2009-08-26

क़त्ल !!!!!!!

सुबह से छेनी हथौडे खोल रहे है
उसके जिस्म की तहे …।
जिद्दी है मगर रूह उसकी
ना कोई आह है ,ना दर्द की शिकन चेहरे पर
बस इक हवा है
जों दबी दबी सी सिसकिया भरती है
मायूस सी धूप भी
बेसबब चहलकदमी करती है
कोनो पे खामोश खड़े दो खंभे
कुछ गमजदा से लगते है
दूर उस बुत की आंखे भी
सुबह से इस जानिब तकती है
जख्मी बदन से
बेतरतीब सी कुछ दुनिया
बाहर निकली है
कितने वाकये ,कितने हादसे
शिरकत करने आये है
क़त्ल मे शामिल
कुछ लोग भी सर झुकाये है
मुफलिसी दोस्त थी उसकी ,
वो मुफलिसों का दोस्त था
आओं इस फुटपाथ को दफ़न कर आये !

वक़्त के उस लम्हे के बतोर गवाह कई थे .....एक मै , ....मेरी कार ..एक बूढा भिखारी .दो स्कूली बच्चे ..एक अधजली सिगरेट ओर दो बैचेन परिंदे ...जो अपनी जबान में शायद कुछ नाराजगी जाहिर कर रहे थे ... ...
सड़क की छाती अब पांच फीट चौडी है...किनारों पे उसने रंग बिरंगे नये लिबास पहने है ..दो नये खंभे... तिकोने लेम्प सर पे डाले इतराये हुए आते जाते मुसाफिरों को घूरा करते है ... वो मूरत ......वो मूरत मगर अब भी उस जानिब ही देखा किया करती है ...

2009-08-21

जाने क्या सोचकर वही गुजरा .....


दोपहर का सूरज भी अपनी दिहाड़ी करके जैसे सुस्ताने के मकाम पे है .ओर . हम नॉएडा के "ग्रेट इंडियन मॉल" की बसेमेंट पार्किंग मे दाखिल हुए है..., अन्दर उस पांच मंजिला इमारत में जुदा-जुदा ख्वाहिशे करीने से सजी है .....शोपर स्टॉप के लेडीज सेक्शन के किनारे पे एक काफी शॉप है ,वह रखी कुछ पेस्ट्रिया देखकर हमारे नन्हें मिया मचल गये है ,हमारी श्रीमती जी चूँकि अपनी शूपिंग मे व्यस्त है .... इसलिए मैं ओर आर्यन वहां कुर्सियों मे बैठ गये है ,उन्ही कुर्सियों के सीधे हाथ पे दीवार से लगे किनारे पे दो सोफे है ,काफी शॉप से थोड़ा बाहर निकले हुए मानो बाहर झाँक रहे हो ...,आर्यन ने अगले कुछ मिनटों में मुझसे आदतन मुश्किल सवाल पूछे .है .आदतन जिनका मैंने गोल मोल जवाब दिया.है .. पेस्ट्री आयी है पर उसकी सूरत उसे पसंद नहीं आयी है चुनाचे ... मैंने सैंडविच का ऑर्डर दिया है ...अपने लिए कोफी ....
.. फ़िर वो नजर आयी है .....परपल फ़्रोक मे ,नन्हें नन्हें पैरो मे आवाज करते जूते ,जिनकी आवाज जैसे पूरे शोपर स्टॉप मे गूँज रही है ..... पर कानो को बहुत भली सी लग रही है ......गोरी चिट्टी ..बिल्कुल परी सी .है ....उसके छोटे से कंधे पे एक पानी की बोत्तल ओर माथे पे बिल्कुल नन्ही सी बिंदी ..एक दम बीचों बीच ......वो आर्यन की तरफ़ बढ़ी ...."..मिष्टी "पीछे से आवाज आई ," लक्ष्मी मिष्टी को देखो "....आवाज का पीछा करता हूँ ....एक उम्रदराज महिला . एक युवती ओर एक लगभग ३0 -३५ की ...मोर्डन किस्म की एक महिला है... ,अंदाजा लगाता हूँ वही मिष्टी की माँ है... .उस किनारे पे रखे सोफे पे से एक १३ -१४ साल की दुबली पतली सांवले से कुछ गहरे रंग की एक लड़की उठी है ओर मिष्टी को उठाकर उसकी माँ के बराबर मे रखी खाली कुर्सी पर उसे बिठा दिया..है ...कुछ दो मिनट बीते .है .... मिष्टी की आँखे हमारी ओर घूमी है... .. ....फिर वही जूतों की आवाज आर्यन के नजदीक आकर रुकी है............"मिष्टी " ...माँ की आवाज ....लक्ष्मी खींच कर उसी कुर्सी पे टिका रही है. ..... , उनका ऑर्डर आ गया है .. उन्होंने खाना शुरू किया है .... ....साथ वाली युवती कुछ ओर ऑर्डर कर रही है ...मां मिष्टी को चम्मच से खिलाने की असफल कोशिश करती है ...मेरी कोफी ओर आर्यन का सेंडविच आ गया है ......सोफे पे कुछ दूर बैठी लक्ष्मी की निगाह कुछ सेकंड तक सामने शीशे पे रंग बिरंगी पेस्ट्री पर रुकी.है....फिर अपनी मालकिन पर..
मै कोफी का एक घूँट भरता हूँ ..दो घूँट . ....कोफी गरम है......तकरीबन दो तीन मिनट गुजरते है .. ... मिष्टी किसी खाली प्लेट मे चम्मच बजा रही है ....वे .तीनो खाते हुए अपनी बातचीत मे बिजी है .... वेटर मिष्टी का सैंडविच लेकर आया .है....एक नजर अपनी प्लेट को देख उसकी आँखे सोफे पर मुडी है.... ...".लक्ष्मी " उसने तोतले लफ्जों से पुकारा ,लक्ष्मी ने वही से उसे मुस्कान दी है.....कोफी का एक ओर घूँट ...."आराम से खायो ...."माँ ने बातचीत रोककर .अंग्रेजी मे हिदायत दी है....फिर व्यस्त हो गयी है....,मिष्टी सोफे की ओर देखती है.... फ़िर नीचे उतरती है... अपनी सैंडविच वाली भारी सी प्लेट लेकर सोफे की तरफ़ बढ़ी है..... .तकरीबन आधा रास्ता पार किया है ....."मिष्टी कम हियर"माँ ने पुकारा है ...मिष्टी सीधी चलती हुई सोफे पे पहुँची .है.....सोफा उसके कद से थोड़ा ऊँचा है ,पहले प्लेट रखी.. गयी है.......' मिष्टी कम हियर" .....'वापस वही आवाज ...मिष्टी ने अपने नन्हें पैर उचके है .. ओर लगभग कसरत सी करती हुई सोफे पे चढ़ गई .है .प्लेट मे से एक सैंडविच का पीस उठा कर लक्ष्मी की दिया है... ओर एक अपने हाथो मे पकड़ खाने लगी. है.......लक्ष्मी सहमी हुई है .......'.खायो -खायो"मिष्टी की तोतली आवांज गूंजती है... वो आर्यन को देखते हुए अपना सेंडविच खा रही है उसकी मां की ओर मेरी निगाह एक पल को मिली है....मै कोफी का आखिरी घूँट भरता हूँ...


कई बार कुछ वाक़ये अलग शक्ल इख्तियार कर आपके सामने से दोबारा से गुजरते है ...इत्तिफकान या कोई ओर वजह ये कहना मुमकिन नहीं ...हैदराबाद के एयरपोर्ट से मेरियट होटल की दूरी लगभग एक घंटे में तय करने के बाद रात को मै ओर मेरा दोस्त बिरयानी के मूड से बाहर निकले ...वहां एक होटल में कुछ ऐसा सा ही नजारा सामने आया ..बस फर्क नाम का था ...यहाँ मिष्टी के बदले फरजाना थी ...उम्र में शायद एक आध साल बड़ी ....लिखने कुछ ओर बैठा था ... .पर जाने क्यों ये वाकया अब भी दिमाग पे काबिज है ...सोचा इससे निजात पा लू ...इसलिए रीठेल रहा हूँ....
वैसे एक मिष्टी ओर है ...दूसरी परी...

2009-08-11

निगोडी दुनिया में " वंडरफुल लाइफ "



सुबह की नींद ..में दो बार बजे अलार्म के बाद जब कोई आवाज देकर आपको उठाता है ओर आप तकिये से लिपट कर कहते है "बस पॉँच मिनट ओर " हाय वो पांच मिनट .....कितने जालिम होते है .....के उन पांच मिनटों के बाद निगोडी दुनिया में फिर एंट्री होनी ही है .

एक
बारिश की भीगी दोपहरे ....बॉस ऑफिस में नहीं है.... सेक्सी जूली आपसे एक अदद समोसे की फरमाइश करती है ओर आप जूली को भीगी बारिश में अपनी बाइक पे बिठाकर दयाराम हलवाई के यहाँ समोसे खिलाने ले जाते है ....बीच में तीन स्पीड ब्रेकर है जहाँ जूली "आउच "वाला साउंड इफेक्ट देती है ...
दो
आसमान में बादल गरजते है ... जाहिर है एक बिजली भी होगी .....पीछे से बेक ग्रायुंड म्यूजिक ..ओर भगवान् प्रकट होते है "वत्स तुम्हे पांच दिन का अवकाश दिया जाता है वेतन सहित ये लो होनुलुलू के टिकट...

साले मन में रोज कितने लड्डू फूटते है!!!!!!!!

अमूमन हर इंसान के दस बीस दोस्त होते है ओर एक दो दुश्मन. दुश्मनी हमने किसी से कभी रखी नही अलबत्ता दोस्त हमारे दस –बीस से कही ज़्यादा है. .जिन्होंने हमें फ्लेश्बेक में कई सीन दे रखे है....
जैसे हमारे दूसरे रूम पार्ट्नर जिन्हें एक मोटे से तकिये से लिपट कर सोने की आदत थी …अचानक .....रोज रात 2 बजे उठने लगे …एक जुमले के साथ … भूख लगी है .तो किबला हम दोनों . रेलवे स्टेशन की लारी पे जाकर अंडे पाँव खाते …तकरीबन साढे तीन बजे वापस लौटते ...शुक्र है के चालीस दिनों के बाद वो रहस्मयी भूख अंडे –पाँव के नियमित चढावे से ही शांत हो गयी . अन्यथा आधी रात के इस नियमित विचरण से किस्म -किस्म की अफवाहे फैलने का भय था ,,
मसलन ... हमारे एक ओर अज़ीज़ दोस्त है… .ये अमिताभ बच्चन साहब के बहुत बड़े मुरीद है,इतने बड़े की जिस पिक्चर मे अमिताभ बच्चन साहब मरते है उसका अंत ये नही देखते है…तो ये महाशय हमे दिन भर अग्निपथ के डाइलोग सुनाते उसी अंदाज में हाथ को हिला कर “हें हे अपुन दीनानाथ चोहान .गाँव मांडवा ….? अपने घर ले-जाकर इन्होने इतनी बार अग्निपथ दिखाई है की पूछिए मत… फिर हमसे पूछते "अब क्या कहते हो”? “मिथुन की ऐक्टिंग लाज़वाब है मै उनसे कहता …….आज़ वो अमेरिका मे है, हमें पूरा यक़ीन है आधे से ज़्यादा अमेरिकियों को उन्होने अपने घर बुलाकर अमिताभ की पिक्चर दिखाई होंगी.
एक तीसरे महाशाया थे ,जो हमारी लॉबी मे रहते थे, पूरे 5 साल अंडर-ग्रॅजुयेट के दिनों मे इन्होने कभी साबुन नही ख़रीदा , पूरी लॉबी के साबुनों से नहाते रहे…..पर साबुन का कौन सा ब्रांड ज़्यादा बेहतर है इनसे बेहतर कभी कोई नही बता पायेगा ....….
मसलन ......हमारे बिल्कुल बराबर के रूम के एक महाशय, जो दिन में अक्सर हमारे दरवाजे के पीछे चिपकी ग्लेडरेगस की बालाओं को छि: छि: कहते पर हर रात को सोने से पहले हाथ में पानी की बोटेल लिए हुए बिना कोई अब्सेंट लगाए चार साल तक निहारने आते रहे ...कई बार तो दरवाजा खटखटा कर निहार कर जाते ....
मसलन के .....वे. जो ...अंग्रेजी में ऐसे उधार मांगते की आप सेंटिया जाते ...अक्सर रात में हमारी बाइक के पेट्रोल टेंक के पाइप से नीचे एक बोतल लगाये मिलते ..हमें देख बिना विचलित हुए शांत निर्विवार किसी योगी की भाँती बोलते " आई एम् टेकिंग जस्ट फ्यू ड्राप मेन"..ओर हम "या या श्युर 'कहते हुए बूंदों का बोतलों में जाना देखते .....
यूँ भी होस्टल में जब किसी चीज़ की तारीफ करनी होती तो ..कुछ यूँ होती है क्या सेक्सी शर्ट है ...या .क्या सेक्सी खाना है वहां का ...सभ्य समाज में आने के बाद आपको अपने तौर तरीके यूँ भी बदलने पड़ते है ....…ओर जब आपको लगता है की वो गोल्डन एरा ख़त्म हो गया ... इत्तेफकान भगवान् आपको नए सीन दे दे देता है ....

वे हमारे दोस्त तीस की उम्र के बाद बने ,हम पेशा है हम उम्र भी ..इत्ते बड़े पांच सितारा होटलों में अकेले नींद नहीं आती यूँ भी एक घंटा खामोशी से कागज पेन लेकर लेक्चर सुनने की आदत अब रही नहीं...ओर कांफ्रेंस के दिन भर लेक्चर आपको वैसे ही इतना खौफजदा कर देते है .. इसलिए अक्सर हम उन्ही के संग एक कमरे में ठहरते है ...... ...कमरे में घुसते ही ये साहब चैनल फटाफट बदलते है ओर बी ग्रेड या सी ग्रेड चुन चुन के फिल्म लगाते है ..मजे से देखते है ...जित्नेंदर की सफ़ेद जूतों वाली फिल्मे ......मिथुन की फिल्मे ....रामसे ब्रदर की होरर फिल्मे .... गुलशन कुमार के छोटे किशन कुमार की फिल्मे ....जोगिन्दर उनके फेवरेट विलेन है ...जब वे हीरो को धमकाते है .... ये ठहाके लगा कर हंसते है . मुझे पूरा यकीन है .इन्होने "देशद्रोही "फिल्म की सी .डी माँगा कर देखी होगी ...
बीच बीच में मुड़कर कहते है साला .हिन्दुस्तान का रियल सिनेमा यही है.....
१४ अगस्त की दोपहर के बाद अगले तीन दिन हैदराबाद इन्ही के संग कटेगे .
स्वाइन फ्लू से ज्यादा खतरा इस बात का है के की वे वहां मौज में आकर ये न कहे .सुन बे "शेडो" देखने चले क्या ?

आज की "त्रिवेणी "

कल तप रही थी पेशानी उसकी, बुख़ार था शायद
सुबह से ही भिगो रहे है मुये बादल उसे......

"नुमोनिया" हो जायेगा इस" दिन" को देखना ,इक रोज

ऐसे ही हमारे एक नेटिया दोस्त है कुश .....इत्तिफकान अभी तक हम रूबरू नहीं मिले है ...पर हमारे फोन के बिल में इनका भारी योगदान रहता है ... वे ठंडी सांस भर के अपनी एक छोटी सी ख्वाहिश बताते है .... की एक ओर ब्लॉग बनाना चाहता हूँ जिसका नाम कुछ यू हो.....के …" आप .मरने से पहले ये फिल्मे जरूर देखे "…उनकी ख्वाहिशे ओर भी है पर किन्ही अपरिहार्य कारणों से उन्हें यहाँ सार्वजनिक नहीं कर सकते... वो क्या कहते है ...ब्रीच ऑफ़ कोन्फ़ि डेंस हो जायेगा जी ...
खैर उन्होंने अगर ये ब्लॉग बनाया तो एक फिल्म हम भी उसमे जोड़ेगे जी....ओर आपसे भी यही कहेगे .मरने से पहले इसे जरूर देख ले ....." इट्स ए वंडरफुल लाइफ"

2009-08-07

"मेरी तामीर में ही मुज्बिर है इक सूरत खराबी की "


हमारे घर के ठीक सामने रहने वाले प्रोफेसर साहब कहा करते थे ...आज के ज़माने में पैसा उड़ रहा है .बस उसे पकड़ने की तरकीब आनी चाहिए .....हर आदमी ने अपनी अपनी तरकीब निकाल रखी है ..रोज नयी नयी निकल रही है ...जिंदगी इसी तरकीब में गुजर रही है... आपकी जिंदगी का कुल निचोड़ एक टोटल है ...करके देखिये ... सारी पास बुक , पोलिसिया ऍफ़ डी ,सोना . जमीन के कागजात ...हम सबके पास एक आंकडा है ....किसी का ज्यादा तो किसी का कम ..... सारी भाग - दौड़ ...सारी .कवायद...इतने झूठ ...इसी आंकडे की खातिर ...पीछे क्या क्या छूटा. है .. कभी हिसाब किया है.....अंगुलियों पे गिनने की कोशिश करिये कितने इंसानों की जिंदगी में आपके किसी कदम से..सपोर्ट से ...सकरात्मक बदलाव आया है .....कभी आँख बंद कर दिल पर हाथ रख कर एक सवाल खुद से पूछिए ... आपके मरने के बाद कितने लोग आपको याद करेगे ..आपकी बीवी ...बेटा .ओर शायद एक आध दोस्त......कब तक ?आपकी जिंदगी में एक टोटल ये भी तो है.........
कभी यू ही सोचा है की ये ज्ञानी मुनि बड़े बूढे इतने सालो से आत्मा आत्मा चिल्ला रहे है ..आखिर है क्या बला ?ऐसी कौन सी चीज है जिसके शरीर से निकल जाने पर इस शरीर की कोई वक़्त नहीं रह जाती.......
हम डार्विन-लेमार्क को महान वैजानिक घोषित करते नहीं थकते ...पर अपनी आत्मा का इस्तेमाल कम उम्र से ही करना बंद कर देते है ... आत्मा की एट्रोपी भी तो होती होगी ....कोई तो सिस्टम होगा जो उसे भी डीटोक्सीफाई करता होगा ...
ऐसे सवाल बहुत डराते है .....पर ये भी सच है भरे पेट ही ऐसे सवाल उठते है ....ओर इनकी उम्र भी ज्यादा नहीं होती ....
दो साल पहले पुणे जाते वक़्त मै फ्लाईट में ..छत्तीस साल की उम्र के एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर से मिला था जो लाखो रुपये महीना कमा रहा था ..पर पिछले दो सालो से सो नहीं पा रहा था ..काम की भाग दौड़ में उसे इन्सोमिनिया हो गया था ......
सड़क के बीच एक रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक बंद है..आप पहले से खड़ी गाडी के ठीक पीछे लाइन में खड़े हो जाते है .पीछे से एक बड़ी गाडी आपके आगे से गुजर कर टेडी होकर खड़ी हो जाती है..उसके पीछे कई ओर ...फाटक खुलने में कुछ देर की मशक्कत के बाद वे आपसे पहले निकल जाती है ....आप सोचते है क्या फायदा मेरा डिसिप्लिन में रहने का ...जिंदगी भी एक फाटक है .. फर्क सिर्फ इतना है ...वक़्त के साथ आपकी गाड़ी की पोजीशन भी बदलती जाती है ..... ..वो कौन से कारण है की पहली क्लास से सच बोलना चाहिए पढ़ते पढ़ते आठवी क्लास तक पहुँचते पहुँचते हम जान जाते है की ये सेंटेंस सिर्फ पढने के लिए है....वक़्त को अगर फ्रेम में बंद करके लगाया जा सकता तो हर फ्रेम अलग अलग तस्वीर बयान करता ..
तो क्या सचमुच पैसा इतना बुरा है ...पर जिंदगी में बड़ा घालमेल है ....
२००६ का सर्दियों का कोई महीना -
लोयंस क्लब की ओर से एक हेल्थ केम्प है .मेरा एक दोस्त एक्टिव मेंबर है इसलिए विशेषगो की जमात में बतोर विशेषग मै भी वहां मौजूद हूँ....पास के गाँव के बच्चे है स्कूली ड्रेस में .नंगे पाँव ...डी एम् मुख्या अतिथि है .उनकी पत्नी भी साथ है .केम्प के बाद उन्हें कुछ कपडे दिए जा रहे है ,मैडम के हाथो ..मैडम मुस्करा कर एक दो बच्चो से सवाल भी पूछ लेती है ...क्या बनोगे बड़े होकर...डॉ ,इंजीनियर ..ऐसे जवाब इस पूरी प्रक्रिया के फोर्मेट को फिनिशिंग टच दे रहे है ...मै भी अपने मोबाइल से खेल रहा हूँ... "मै पैसे वाला बनूगा "उस लाइन के आखरी बच्चे का जवाब है .. ..निगाह उठाकर देखता हूँ... पतला दुबला सात साल का लगभग कुपोषित सा बच्चा है... समय ने .मैडम को भी पोलिश्ड कर दिया है .. वे उसके बालो को सहला कर आगे बढ़ गयी है ...पूरी भीड़ में शायद उसने ही सच बोला है......

साल २००५ महीना याद नहीं -
तीन दिन से एक एडमिट केस देख रहा हूँ ...एडमिट फिजिशियन दोस्त के अंडर है ..पेम्फिगस है ...तीस साल की जवान औरत ...एक इन्वेस्टिगेशन है .जो बाहर होना है ...शाम तक नहीं हुआ है ...अस्पताल वाले कहते है ..पति मना कर रहा है ...वो सामने पड़ता है...क्यों ?मै पूछता हूँ.....अभी ऍफ़ .डी तुड़वाई है साहब .पोस्ट ऑफिस वाले कहते है कल मिलेगे ...उसका छोटा बच्चा अपने बाप की अंगुली थामे मुझे देख रहा है....मेरी सारी अकड़ ढीली हो गयी है ....

जावेद अख्तर साहब ने एक बार कही लिखा था ...मुश्किल हालात में जीना भी एक आर्ट है ...वक़्त ने अच्छे समय के लिए भी ये डेफिनेशन मुक़र्रर कर दी है .. ...एंड लाइफ इज नौट फॉर बेड एक्टर्स यू नो !
खवाहिशे लाइन लगा कर खड़ी है ..इस जीवन को मै भरपूर जीना चाहता हूँ....ओर दुःख से मुझे घबराहट होती है ..तो क्या पैसा ही सुख है ....सुरक्षा है..... जमीर भी अपनी स्पेस चाहता है ..मै फिर कंफ्युस हूँ....पर आज की दुनिया में ...जब वारेन बुफेट नाम का आदमी अपनी कुल संपत्ति का ८३ प्रतिशत हिस्सा दान कर देता है तो हैरानी होती है ..ओर ये हैरानी ओर भी बढ़ जाती है जब हमें उस हिस्से की .कीमत मालूम पड़ती है ......... जानते है वो हिस्सा कितना है ...३७ अरब डालर ..यानी १६६६ ० अरब रुपये .....
आप ओर मै तीन जन्मो में भी इतना पैसा नहीं कमा सकते ...कम से कम मै तो नहीं ...क्या कारण रहे होगे उस इन्सान को इस निर्णय तक पहुचने के.......पर क्या हम उम्र के किसी मोड़ पर पहुंचकर कोई भी छोटा दान कर सकते है ?
यूँ भी इस दौर में भावनाये डिसपोजेबिल है.... ओर हर सुबह एक डस्ट बिन की माफिक ....






"मेरी तामीर में ही मुज्बिर है इक सूरत खराबी की "
मजाज़ की इस लाइन का मतलब है ....मेरे बनने में ही बिगड़ने की एक सूरत छिपी हुई है

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails