2008-12-25

कागजो मे बंद कुछ सालो का कोलहाहल

सा 1993.....तारीख इंक की रोशनी से फ़ैल गयी है -
दिल्ली की भीड़ भाड़ से भरी डी. टी. सी बस में जींस टॉप पहनी लड़की एक सरदार की निर्लज उद्दंडता को भयभीत हो कर सहन करती है ओर बेढंगी सी पोशाक पहनी देहाती औरत जोर से उसे फटकार कर भगाती है ....हमारे साथ एम्स के "पल्स "में भाग लेने आयी गुजराती लड़किया सहम जाती है ,बस इन सबसे बेपरवाह आगे जाकर किसी मोड़ पे रूकती है कुछ अंग्रेजो को सड़क पे देखकर कन्डक्टर जोर से आवाज लगाता है "वेलकम टू देल्ही"


सा  96......रात के दो बजे
अचानक हॉस्टल में हलचल हुई है .उनीदी आँखों से सीडियो पर बदहवासी सी फैली है ...उसे मोटरसाइकिल पर दो लोग पकड़ कर बिठा रहे है.....हॉस्पिटल ले जाने को.....उसने आत्महत्या की कोशिश की है ... ..१५ दिनों से गुमसुम था ..उसकी गर्लफ्रेंड की शादी कही ओर तय हुई है.....5 साल से लंबे अफेयर के बाद .सुना है जिससे तय हुई वो आई .. एस में सेलेक्ट हुआ है.....मुझे बोलीबाल के मैदान में उसका हँसता चेहरा याद आता है....

सा  97 .....
हाल पर "मदर इंडिया ' लगी है ,मै ओर मेरा दोस्त जो मेरी तरह फिल्म देखने का शौकीन है ....इस पुरानी ऐतिहासिक मूवी को देखने गये है ..सीमित  टेक्नोलोजी का वो सिनेमा भीतर रूह तक चहलकदमी करता है....इस माध्यम की ताकत मुझे इंटरवेल में भी सीट से उठने नही देती .... मै अपने दोस्त से छुपाकर अपनी आँखों की नमी पोछता हूँ ...
वापस आते हुए मै ओर मेरा दोस्त खामोश है....चाय की लारी पर सिगरेट पीते हुए वो मुझे बताता है...महबूब खान अनपढ़ थे .....

सा  99......
आज वार्ड में बेड नंबर ५ की मौत हुई ...३५ साल की उम्र में ....४ साल की उसकी बच्ची की आँखों का सामना नही कर पाया .."स्टीवन जोहानसन सिंड्रोम" था उसे ....जब केस कम्प्लीकेटेड हुआ तब यहाँ रेफेर किया गया ...आई सी यू में जगह खाली नही थी ...कई मरीज जमीन पर है......पता नही क्यों लगा जैसे बच सकता था वो अगर ....
सिस्टर से भी झगडा हो गया ...उसकी बच्ची की आँखे जैसे अब भी ताक रही है ....गरीबी को पुश्ते दर पुश्ते  ढोती है ......

सा  99 year end -रात डेड बजे
सौरभ भी यू .के उड़ गया ....बेड मिन्टन का आखरी मैच खेला उसके साथ ....साला बेईमानी करता है पर आज बुरा नही लगा ...रघु भी जायेगा पास होकर ...आज सौरभ को फेयरवेल दी रेस्ट्रोरेन्ट में.....कहते है तू भी आ जा वही...क्या करूँ .फोन पर पापा सेंटी होने लगे है ..कहते है एक जगह देखी है क्लीनिक के लिए हाँ कहे तो खरीद लूँ..मना किया तो उदास से हो गये थे ....बस इतना कहा...अपना देश अपना होता है बेटा.....
सा २००० -
२४ साल उम्र होगी उसकी बस......कितनी सुंदर है गोरी चिट्टी .....कोई कह सकता है एच .आई .वी है उसे...शादी को एक साल हुआ है ओर प्रेग्नेंट भी है...... पति से मिला है....पर बच्चा फ़िर भी चाहती है...अबोर्शन को तैयार नही है ..काउंसिलिंग के लिए आयी थी... अभी कुछ symtom तो नही है ....उसके पति को मालूम था तो शादी क्यों की.....
सा २००० आखिरी महीने .मुंबई नानावटी हॉस्पिटल -
तुम्हे तो मारीशस नही जाना ?मेरा क्लास मेट ही वहां प्रिंसिपल है ..कहो तो बात करूँ ...डॉ राव कई दिनों से कह रहे है ...
आज डॉ राव के यहाँ डिनर पे गया था.....मैडम बोली यही आ कर रहो....वहां क्या 4 बाई 4  के कमरे में रहते हो ..वो भी अस्पताल में .....यहाँ इत्ते बड़े घर में हम दो बूढों के अलावा कोई नही है ......डॉ राव व्हिस्की पीने के बाद भावुक होगये थे ..अलमारी से अपने पोते की फोटो ले आये थे ....बोले दादा नही कहता ग्रैंड पा कहता है...हँसते हँसते बोले ...दोनों बेटो को तभी याद आती है माँ की जब बीवी प्रेग्नेंट होती है.
 जब चलने लगा था कैसे गंभीर होकर बोले थे ..."माँ बाप के पास ही रहना"!
साल २००१ -कॉलेज छोड़ने के महीने बाद -
सोचा था इस " बाहर की दुनिया का लेंडस्केप "अलग होगा पर यहाँ के रंग इतने रहस्यमयी है की डर लगता है खो जायूँगा .

सा  2004...पूना हवाई हड्डा....कांफ्रेंस से लौटते वक़्त -
कोई मुझे जोर से नाम के आगे" भाई "कहकर आवाज लगाता है...इस तरह तो गुजरात में बुलाया करते है ,पीछे मुड़ता हूँ सफ़ेद कुरते पजामे ओर कंधे पर कपड़ा रखे हुए है असलम है ...६ फीट लंबा असलम अपने साथ दो चार शार्गिद लिए हुए है ..गोरे चेहरे पर बढ़ी दाढ़ी में वो मेरे कंधे पर हाथ मारता है ,मै असहज हूँ ...कोई काम हो तो बताना अनुराग भाई ...कोई भी काम हो तो......तुम्हारा वतन कौन सा है .....भाई आजकल बहरुच से एम् एल ऐ है उसका एक शार्गिद बताता है ...मुझे प्रिस्नर वार्ड का असलम याद आता है जिस पर हत्या के आरोप है पर उसे चिंता अपनी एस .टी. डी (sexually transmitted disease )को लेकर है।

बीच के कई साल कागजो में नही है ......शायद जद्दोजेहद में गुम है

सा   2008....दिन शुक्रवार -
इस "सायबर युग "में जहाँ पैसे ने प्लास्टिक के चकोर टुकडो की शक्ल ले ली है ,तल्खिया शालीनता का लिबास पहने है ,रिश्तो की डोर में शर्तो की गाँठ है ,शहादत का मजहब है ,मीडिया के आइने है , त्रासदियों का बाजारीकरण है  ,मानवीय संवेदनाओ का स्केल एस एम् एस पोल है ओर असली सामाजिक सरोकार मोमबत्तियों की रोशनी में छिपे है , बलात्कार एडिटिंग टेबल से गुजर कर "दलित बलात्कार "हो जाते है.....नैतिकता की अपनी तिकडमें है  ! मै आमिर खान को बाल काटते देखता हूँ  ओर घने कुहरे में जाते साल को भी.


आज त्रिवेणी लिखने का मन नही है ,कल रात एक कविता पढ़ी थी .सुबह तक वही सिरहाने थी .राजेन्द्र कुमार की कविता .."भगत सिंह :सौ बरस के बूढे के रूप में याद किए जाने के विरुद्ध "

वे तेइस बरस
आज भी मिल जाए कही ,किसी हालात में
किन्ही नौजवानों में
तो उन्हें
मेरा सलाम कहना
ओर उनका साथ देना
ओर अपनी उम्र पर गर्व करने वाले बुढो से कहना
अपने बुढापे का गौरव उन पर नयोछावर कर दे ......


(भगत सिंह २३ साल की उम्र में शहीद हुए थे .....महज़ २३ साल .)

90 टिप्‍पणियां:

  1. त्रिवेणी की जगह जो कविता पेश की वह शानदार लगी . ऊपर का अभी पढा नहीं है . बाद में टिपियाएंगे . अभी चले ड्यूटी :)

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  2. चुन चुन कर डायरी के चंद सफ़े, शायद यहाँ रखे हैं..
    बेहतरीन तरीके से संजोई हुई है, उन लम्हों को..

    मैंने भी लिखने का अभ्यास डायरी से ही शुरु किया था ..
    पर सालों बाद, डर के मारे नदी में प्रवाहित कर दिया ..
    दरअसल डायरी को लेकर सुखराम की जो दुर्गत हुई थी.. उसी से सहम गया था :-)

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  3. बीते साल मिले डायरी के कुछ पन्नो में, कुछ जज्बात वहां भी छिपे थे लफ्जों में ..२००८ शुक्रवार सही विवरण ..न जाने आगे क्या हो ..या क्या पता कुछ भी न हो ....

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  4. डायरी के ये बेतरतीब पन्ने बेशक बिखरे-बिखरे भाव संजोये हुये हैं,किन्तु तारतम्य एक ही गुंथा नजर आ रहा है-यहां तक कि त्रिवेणी की अनुपस्थिति भी उसी तारतम्य का हिस्सा दिख रही है....

    जाने कितनी डायरियों में कितने बेमिसाल लेखक छुपे हुये रहते हैं...!!!

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  5. Diary ko padhna humesh hi achha lagta hai. bahut si baaten yaad aa jati hai......
    achha laga apke diary ke panno ko padh ke

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  6. डॉ साहब, समझ नहीं आता क्या कहें आपकी डायरी के पन्ने पढ़!!

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  7. वे तेइस बरस
    आज भी मिल जाए कही ,किसी हालात में
    किन्ही नौजवानों में
    तो उन्हें
    मेरा सलाम कहना
    ओर उनका साथ देना
    ओर अपनी उम्र पर गर्व करने वाले बुढो से कहना
    अपने बुढापे का गौरव उन पर नयोछावर कर दे ......

    आज बस और कुछ नही !

    रामराम !

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  8. संवेदनाओं को इस तरह साल दर साल सहेज कर रखना आसान नहीं। कविता बहुत सुंदर है।

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  9. aapko padhkar kai tarah ki bhaavnaayen aati hain zehan mein... bataa nahi saktaa...
    yun hi baantate rahen zindagi ke rang...

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  10. अनुराग जी लगता है आज पुरी डायरी ही यहां उतारने का मन था, आज बहुत उदास लग रहे है...ओर हमे भी उदास कर दिया.... यह जिन्दगी है तो बहुत आसान लेकिन इंसानो ने इसे कठिन बना दिया.
    ...महबूब खान अनपढ़ थे ..... काश हम सब भी ...महबूब खान होते.
    धन्यवाद

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  11. उन्हे ये फिक्र कि देखें नया तर्ज़ ए ज़फा क्या है,
    हमें ये शौक कि देखें सितम की इम्तिहाँ क्या है..!!!!

    ये पंक्तियाँ लखने वाले भगत सिंह...ऐसे २३ साल की उम्र कस जीवन पर कई जन्म क़ुर्बान....! इस २३ साल में क्या क्या कर दिया...! क्या क्या पढ़ लिया..! क्या क्या सोच लिया...! क्या क्या लिख दिया...!

    मेरे रोलमॉडल्स में से एक के विषय में लिखने का शुक्रिया..!

    और डायरी...! अक्टूबर ९५ से अक्टूबर २००२ तक बहुत कुछ था लिखने को सुख दुख बहुत कुछ....! अचानक लगा जैसे लिखने को कुछ है ही नही...! दर्ज़ करने की ज़रूरत ही नही जिंदगी को...! २००६ से फिर शुरू करने की कोशिश की है...! लेकिन घटनाएं ऐसे होती हैं कि पीछे समय ही नही देतीं रिपोर्टि्ग का..!

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  12. क्या कहूँ अनुराग जी, आँखे भर आई। गोद में बेटी बैठी हैं आशूँ टपका भी नही सकता, क्योंकि अगर यह पूछ बैठी कि क्या हुआ पापा आपको तो क्या जबाब दूँगा और ये पूछे बगैर मानेगी नही और साथ ही सवालों की बौछार कर देंगी। और उसके सवालों का जबाब ना मेरे पास होगा ना ही शायद आपके पास होगा।

    1.दोनों बेटो को तभी याद आती है माँ की जब बीवी प्रेग्नेंट होती है........जब चलने लगा था....कैसे गंभीर होकर बोले थे ...माँ बाप के पास ही रहना .
    2.गरीबी से बड़ी बीमारी कोई नही....पुश्ते दर पुश्ते इस रोग को ढोती है ......
    3.बस इतना कहा...अपना देश अपना होता है बेटा.....
    4.उसने आत्महत्या की कोशिश की है ... ..१५ दिनों से गुमसुम था ..उसकी गर्लफ्रेंड की शादी कही ओर तय हुई है.....५ साल से लंबे अफेयर के बाद .सुना है जिससे तय हुई वो आई .ऐ. एस में सेलेक्ट हुआ है.
    5.उसके पति को मालूम था तो शादी क्यों की...

    क्या इन सबका जबाब होगा मेरे पास? खैर यही तो जीवन हैं.......................

    राजेन्द्र कुमार की कविता .."भगत सिंह :सौ बरस के बूढे के रूप में याद किए जाने के विरुद्ध

    दिल को छू गई।
    और हाँ बीती रात सपने में हम आपके घर पहुँच गए अपनी बेटी और महेन जी के साथ। लगता यह इस लेखनी के जादू का असर हैं।

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  13. बहुत बढ़िया, भई, बहुत संवेदनशील

    ---
    चाँद, बादल, और शाम
    http://prajapativinay.blogspot.com/

    गुलाबी कोंपलें
    http://www.vinayprajapati.co.cc

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  14. डायरी के पन्ने ही नहीं,शब्दचित्र हैं.साधुवाद.

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  15. ज़िंदगी के कुछ सफ़हे बिखर गये लगता है... कविता बेजोड़ है.. यहा शेयर करने के लिए शुक्रिया.. शायद इसका कोई अक्षर जेहन में क़ैद होकर रह सके..

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  16. मतलब आप इतने सालों से इग्‍नोर मार रहे हैं हमें... पल्‍स 1993 में नीचे लॉबी में ...वहीं जहॉं रंगोली बनी हुई थी, हम भी खड़े थे आपने ध्‍यान ही नहीं दिया।



    पढ़वाने के लिए शुक्रिया

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  17. गुज़रे जमाने की यादें तल्ख भी हों तो सीने में संजोये ही जाते हैं और कभी कभी पिछे मुड कर देखने पर उसकी चुभन भी मीठी टीस सी लगती है। यह संस्मरण उस व्यक्ति के नाज़ुक दिल का पता भी देती है जो संवेदनशील है और संवेदनशील वयक्ति ही एक अच्छा चिकित्सक बन सकता है। इन मानवीय मूल्यों को संजोये रखिए।

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  18. आज तो आपने आँखे नम कर दीं....डायरी के बिखरे पन्नों के साथ एक पल को पिता की बैचेनी में मुझे भी किसी की बैचेन आँखे नजर आ रही हैं...अपनी मिट्टी और अपनो से जुदा होना आसान नहीं.....त्रिवेणी की जगह भगतसिंह पर लिखी कविता दिल को छू गई.....

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  19. डॉक्टर, मुझे लग रहा कि कि आपके लिखने के अंदाज से मुझे प्यार होने लगा है...

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  20. ओर अपनी उम्र पर गर्व करने वाले बुढो से कहना
    अपने बुढापे का गौरव उन पर नयोछावर कर दे ......
    " fantastic...... dairy ke panno mey lafj nahi mano yado or jujbaton ka ek khazana chupa hoga..... behtirn yadon ki barsaat yuni hoti rhe or hume bhigoti rhe...."

    regards

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  21. वर्ष बीतते जाते हैं परन्तु वही प्रश्न बने रहते हें, वैसे ही दुख कुछ रूप बदलकर हरेक की झोली में आ गिरते हैं। पढ़कर अच्छा लगा।
    घुघूती बासूती

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  22. bahut accha laga..bahut barik bate..bahut sulze hue kalm se kah gaye aap.

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  23. टिप्पणी किस पर करू . एक डायरी के पन्नो पर ,डायरी लिखने वाले संवेदनशील लेखक पर ,या एक डाक्टर पर जो दर्द दूर करता है और दर्द को पिरोता है शब्दों मे

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  24. पता नहीं कौन नहीं बदलता? समय या हम?
    क्या कहूं? पढ़ते समय लग रहा था जैसे सबकुछ आंखों के सामने है.

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  25. SUNDAR ABHIVYAKTI, ZINDAGI KE FALSAFE PAR KYA TIPPANNI KI JAAYE SOCH RAHA HOON, PHIR GHOOM PHIR KAR SOCHNE LAGTA HOON, KI KAASH HAR DOC ANURAAG HOTA YA HAR DOC ME ANURAAG HOTA

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  26. समय बढ़ने के साथ साथ सब कुछ बदलता जाता है सिर्फ़ जेहन में यादे रह जाती है . व्यक्तिगत डायरी के पन्ने बांटने के लिए धन्यवाद.

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  27. यानी की आज से १५ साल पहले भी दिल्ली की बसों में लड़किया छिडती थी ....पर आपका संदेश की आधुनिकता अपने अधिकारों से है परिधान से नही
    (२)अनपढ़ लोगो का सिनेमा आज तक पढ़े लिखे लोगो में जिंदा है
    (३)क्रिमनल ही आज के बड़े राजनेता है .
    (४)सायबर युग "में जहाँ पैसे ने प्लास्टिक के चकोर टुकडो की शक्ल ले ली है ,तल्खिया शालीनता का लिबास पहने है ,रिश्तो की डोर में शर्तो की गाँठ है ,शहादत का मजहब है ,मीडिया के आइने है , त्रासदियों का बाजारीकरण है .....मानवीय संवेदनाओ का स्केल एस एम् एस पोल है ओर असली सामाजिक सरोकार मोमबत्तियों की रोशनी में छिपे है ...जहाँ बलात्कार एडिटिंग टेबल से गुजर कर "दलित बलात्कार "हो जाते है.....नैतिकता की अपनी तिकडमें है ....मै आमिर खान को बाल काटते देखता हूँ ..ओर घने कुहरे में जाते साल को भी.......

    एक एक लाइन संजो कर रखने जैसी है ,शायद एक पोस्ट अलग से लिखने जैसी .आपने लगभग सब कुछ समेट दिया है इतना की इस साल का कोटा पूरा हो गया .
    आपको सलाम *

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  28. अनुराग जी क्या कहूँ ...आप की कलम को सलाम...कैसे इतनी सहजता से जिंदगी की तल्ख़ बातें लिख देते हैं आप...वाह...आप की इस पोस्ट और त्रिवेणी दोनों को नमन....
    नीरज

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  29. आज तो आपने भावदृश्यों की झड़ी लगा दी। एक-एक तारीख की प्रविष्टियाँ रुककर सोचने के लिए मजबूर कर देती हैं।

    एक बार फिर आपकी शब्दों की जादूगरी को सलाम।

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  30. आपकी डायरी में अमूल्य धरोहर छुपा हुआ है जो साल डर साल बढ़ता ही जाएगा बहोत ही हृदय स्पर्शी लेख चुना है आपने बहोत खूब ढेरो बधाई आपको .. अपनी पचासवी पोस्ट पे आपका स्नेह चाहूँगा ..

    अर्श

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  31. -तारीख इंक की रोशनी से फ़ैल गयी है
    -मुझे बोलिबाल के मैदान में उसका हँसता चेहरा याद आता है....
    -४ साल की उसकी बच्ची की आँखों का सामना नही कर पाया
    -रिश्तो की डोर में शर्तो की गाँठ है

    lines kafi achhi lagi..

    etni touching post bahut kam he dekhne ko milti hai

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  32. पूरी कविता पढने के लिए एक लिंक छोड रहा हूं:
    http://likhoyahanvahan.blogspot.com/2008/05/blog-post_18.html

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  33. " We look before & after,
    & pine for what is not,
    Our sincerest laughter,
    with some pain is fraught"
    डायरी के सारे लोग ,
    अनजाने होते हुए भी,
    अपने से लगे --
    I guess this is life !!
    ये याद आ गईँ पँक्तियाँ अनुराग भाई
    और हाँ २००९ शुभ हो -
    आपके समस्त परिवार के लिये
    -स- स्नेह,
    - लावण्या

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  34. Doctor aur itana samvedansheel?

    mujhase paDhaa nahee jaa sakaa. Aapane to mehassos kiyaa hai hakeeqat me.

    Great style of writing straight from the heart.

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  35. बढिया! यह डायरी कहाँ छुपी है बता दें ।

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  36. मन में कैद पन्नों को बहुत खूसूरती से उजागर किया है अनुराग जी, बिखरी हुयी यादों को सिमटने की सुंदर शुरुआत.
    आपकी त्रिवेणी का इंतज़ार रहता है, पर आज की कविता नें उस कमी को पूरा कर दिया

    नव वर्ष मंगलमय हो

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  37. इत्ती सी ज़िंदगी और इत्ते सारे shocks! और क्या लिखूं - स्याही सूख गयी पर कागज़ अभी भी गीला है.
    कब की पत्थर हो चुकी थीं मुन्तजिर आँखे मगर
    छूके जब देखा तो मेरे हाथ गीले हो गए (शाहिद)

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  38. सच कहूं तो कुछ लिख नहीं पारहा . आखें कब नम हो गई पता नहीं चला

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  39. kuch keh nahi pa rrahe bas har lamha ankhon ke smane se gujra jaise ahi ji gaya ho.bahut marmik lekh raha aur phir rula diya.

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  40. आपकी डायरी के पन्ने पढकर बहुत अच्छा लगा।... भावनाओं की अभिव्यक्ति बे-मिसाल है।

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  41. डाक्‍टर इस पोस्‍ट को पढ़ने के बाद फिर उसी स्थिति में पहुंच गया कि हमारे लिए सबकुछ स्‍टोरी क्‍यों हैं...बलात्‍कार से लेकर दुर्घटना तक..

    इसका हल क्‍या है मैं नहीं जानता हूं.. यह मेरे लिए बड़ी कश्‍मकश वाली स्थिति है जब आप चाहते है कुछ करना लेकिन चीजें आपके बस से बाहर की हैं....

    डॉक्‍टर अब तक तीन बार हुई है कभी शायद मिल पाऊं... मिलने की बड़ी इच्‍छा है...

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  42. मै आमिर खान को बाल काटते देखता हूँ ..ओर घने कुहरे में जाते साल को भी.......
    एहसास होता है...
    हर चीज का...
    ---मीत

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  43. समझ नहीं आ रहा लेख के किस भाग पर प्रतिक्रिया करूँ?
    ९३-से २००८-के सफर में हुए इन अनुभवों का बेहद सजीव चित्रण किया है.
    कॉलेज छोड़ने के १ महीने बाद -यह सोचन कहीं ग़लत नहीं है--
    " बाहर की दुनिया का लेंडस्केप "अलग होगा पर यहाँ के रंग इतने रहस्यमयी है की डर लगता है खो जाऊँगा '.
    ८ साल बाद भी इन रंगों को बदलते भी देखा होगा..और धुंधले होते हुए भी..
    मगर यह भी सच है -एक संवेदनशील व्यक्ति ही इन रंगों में अंतर कर सकता है..

    हर अनुभव एक कहानी है..कभी खुशनुमा ,कभी दर्दभरी ..आप बाँटते चलिए..हम सुन रहे हैं..
    आज काफी गंभीर और चिंतापरक बातें पढीं.
    ---तल्खिया शालीनता का लिबास पहने है ,रिश्तो की डोर में शर्तो की गाँठ है ,शहादत का मजहब है ,मीडिया के आइने है , त्रासदियों का बाजारीकरण है .....मानवीय संवेदनाओ का स्केल एस एम् एस पोल है ओर असली सामाजिक सरोकार मोमबत्तियों की रोशनी में छिपे है -

    -बेहद उम्दा लिखना है आप का.!

    --आख़िर में प्रस्तुत कविता दिल को छू गई..

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  44. zindagi ke bahut saare sach hain ye....inme dard bhi hai aur ras bhi.

    ---तल्खिया शालीनता का लिबास पहने है ,रिश्तो की डोर में शर्तो की गाँठ है ,शहादत का मजहब है ,मीडिया के आइने है , त्रासदियों का बाजारीकरण है ....

    behtareen likhha hai aapne...tareef ke liye alfaaz kahan se laaun..

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  45. डायरी लिखना बहुत खतरनाक है डॉक्टर... डायरी आईना होती है जिंदगी का...
    आपका लेखन सशक्त है...कुछ पक्तियां आपके लिये...

    जो दुनियां मे दीख रहा है
    शब्द-शब्द जो सीख रहा है
    दुनियां भर का सही आदमी
    पल-पल क्यों यूं चीख रहा है
    उसके संवेदन से जुड़कर
    शब्द-शब्द के अंदर दिखना
    तेरे मन में जो कविता है
    उसको कागज़ पर लिखना...

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  46. Bahut hi umda likhte hein aap, maine aap ke kai pichley blogs bhi pade... sab hi ek se badkar ek.. god bless, hope you come out with a book of trivenis(and some poems ofcourse) from this blog!! :)

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  47. Anurag ji aaj aapki dairy ke kuch paane pade usmain aapki gahri nazar aur soch ki tartamyta ko pada sawal itne the ki uljh kar rahe gayi man udas ho gaya
    in sabhi ghatnaon ko jaise samne dekha ho

    .दोनों बेटो को तभी याद आती है माँ की जब बीवी प्रेग्नेंट होती है. khudgarzi ki nangi tasveer
    माँ बाप के पास ही रहना . ek bhaut achha msg diya hai
    गरीबी से बड़ी बीमारी कोई नही. sach kahte hain
    बस इतना कहा...अपना देश अपना होता है बेटा ek pita ki bebasi
    उसने आत्महत्या की कोशिश की है ... ..१५ दिनों से गुमसुम था ..उसकी गर्लफ्रेंड की शादी कही ओर तय हुई है.....५ साल से लंबे अफेयर के बाद pyaar ka yahi roop hai pyaar kab ka mar gaya hai ab to sirf aakrshan hai jo kab bhang ho pata hi nahi chalta

    उसके पति को मालूम था तो शादी क्यों की...
    shayad maloom nahi ho aur insaan khudgurz itna hai ki .........

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  48. आपके ब्लॉग पर बड़ी खूबसूरती से विचार व्यक्त किये गए हैं, पढ़कर आनंद का अनुभव हुआ. कभी मेरे शब्द-सृजन (www.kkyadav.blogspot.com)पर भी झाँकें !!

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  49. very touching - shades of life, pain of living... the way you have filtered them through the eye lence straight hits the heart and soul...

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  50. ये यादों में क़दमों के निशान हैं या सीढियां चढ़ते हुए जख्मों के अहसास | आपकी भाषा , आपकी सोच वो सब कुछ कह गयी है , जिसे ह्रदय की गहराई से महसूस कर एक हूक उठती है , क्यों , क्यों , न पैरों के नीचे जमीन है , न सिर पर आसमान का टुकडा |
    बहुत ही सशक्त अभिव्यक्ति

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  51. bahut he khubsoorti se aapne apne diary ke ek ek alfaazoo ko utaara hai...padh kar bhaaook ho gaya...

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  52. आपकी आत्मकथा का इंतज़ार रहेगा टुकड़े टुकड़े की जगह पूरा एक साथ पढने को मिलेगा

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  53. kya kahoon aur kya nahin .........?
    shabd kho gaye hain .

    manveey samvedanaa ka itana gubaar kaise samaya us chhote se dil men ?

    isiliye ye dil ki baat hai ........

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  54. अनुराग जी आमिर को एक बेहतर कलाकार के रूप में तो देखा जाना चाहिए । फिल्म चाहें जैसी हो लेकिन यह तो तय है कि आमिर के अदायगी का कोई जबाब नही है। और तो और आमिर को अपना लोहा मनवाने के लिए शायद किसी हिट की आवश्यकता नही है । आमिर का जादू लोगो के सर चढ़कर बोलता है ।धन्यवाद

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  55. अमूल्य धरोहर है.....संभालकर रखिए

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  56. umda...samvedanse bahri bate...nice to read ur write..keep it up...regards

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  57. नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाएँ!

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  58. समझ नहीं आ रहा कि किन शब्‍दों में आपको साधुवाद दूं।..... आपको पढ़ने के बाद दिल तो काम करता है लेकिन खोपड़ी काम नहीं करती।

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  59. अनुराग जी,

    कमाल लिखते हो भाई. पहली बार पढ़ रहा हूँ, सचमुच बहुत मज़ा आया. डायरी के पन्ने थे कि जाने क्या था, लगा अपने बारे में पढ़ रहा हूँ. उम्दा पोस्ट के लिए बधाई.

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  60. आपको तथा आपके पुरे परिवार को नव्रर्ष की मंगलकामनाएँ...साल के आखिरी ग़ज़ल पे आपकी दाद चाहूँगा .....

    अर्श

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  61. blog padhne fir aaungi is bar bite varshon ka dard chuaa hai aapne...

    नव वर्ष की शुभ कामनायें...


    कुछ रहा वही दर्द का काफिला साथ
    कुछ स्‍नेह भरा आप सब का सर पर हाथ
    पलकें झपकीं तो देखा...
    बिछड़ रहा था इक और वर्ष का साथ....

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  62. "नव वर्ष २००९ - आप के परिवार मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं "

    regards

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  63. नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  64. नया साल आपके लेकर ढ़ेर सारी खुशियां लेकर आए

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  65. नव वर्ष की आप और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं !!!
    नया साल आप सब के जीवन मै खुब खुशियां ले कर आये,
    ओर पुरे विश्चव मै शातिं ले कर आये.
    धन्यवाद

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  66. आपको व आपके परिवार को नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें...

    उत्तर देंहटाएं
  67. aapki zindagi se judhe kai panne dekhe yhan. sangharson k bich mili kamyabi wo bhi sadgi se bhri...naman hai aapko....!

    उत्तर देंहटाएं
  68. बहुत ही सुंदर अभिवयक्ति!
    आपको तथा आपके पूरे परिवार को आने वाले वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !

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  69. आप और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं. नव वर्ष आपके जीवन में सुख और शान्ति लाये.

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  70. भाई अनुराग जी ...बीते पिछले सालों का लेखा-जोखा ,दुःख किसी का भी हो आपने रुला दिया ....बेहद सरल किंतु धेर्य से सहेजे गए पलों को इतनी शिद्दत से साझा करने के लिए आप को प्रणाम ..नव वर्ष मैं आप प्रसन्न और सुखी रहें ...

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  71. नव वर्ष है..... नव हर्ष हो
    एक नई सुबह का स्पर्श हो ....

    नव कामना का एहसास हो
    नव कल्पना का वास हो
    नव यौवन का उल्लास हो
    नव कोपल का आभास हो
    नव वर्ष को धारण करे
    नव किरणों का स्वागत करे ....
    नव वर्ष है ...नव हर्ष हो....

    उत्तर देंहटाएं
  72. bahut achchha likha anurag ji,

    jeevan ke anubhav ese hi hai...
    sabhi ghatnayen impress karti hain...

    उत्तर देंहटाएं
  73. डाक्टर साब कहां गुमशुदा हो गये हैं आप?
    नये साल की समस्त शुभकामनायें आपको...ईश्वर करे आपको आपकी लेखनी को तमाम बरकतें हासिल हो

    उत्तर देंहटाएं
  74. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !!

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  75. आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

    उत्तर देंहटाएं
  76. समय और समाज की विसंगतियों व विद्रूप जिस मार्मिकता से व्यक्त हुए हैं, लगता है आप फ़ुलटाईम लेखक क्यों न हुए!

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  77. अलग अलग स्मृतियाँ लेकिन दब्में एक सा संदेश... देखने का नजरिया हमेशा की तरह पसंद आया.

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  78. संवेदना का सुन्‍दर गुलदस्‍ता।

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  79. कागज में बंद बीतें सालों के कोलाहल वाकई बहुत शोर करते हैं, ये कुरेदते हैं, फटकारते हैं बस अब ओर नहीं इन्हें कागजों में ही दबा रहने दीजिए, इनके लिए यही ठीक है।

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  80. साल ९८ ......
    आज वार्ड में बेड नंबर ५ की मौत हुई ...३५ साल की उम्र में ....४ साल की उसकी बच्ची की आँखों का सामना नही कर पाया .."स्टीवन जोहानसन सिंड्रोम" था उसे ....जब केस कम्प्लीकेटेड हुआ तब यहाँ रेफेर किया गया ...आई सी यू में जगह खाली नही थी ...कई मरीज जमीन पर है......पता नही क्यों लगा जैसे बच सकता था वो अगर ....
    सिस्टर से भी झगडा हो गया ...उसकी बच्ची की आँखे जैसे अब भी ताक रही है ....गरीबी से बड़ी बीमारी कोई नही....पुश्ते दर पुश्ते इस रोग को ढोती है ......

    क्यों लगा जैसे बच सकता था वो अगर ....

    एक संवेदन शील महान डॉक्टर और महान मानव ह्रयद को मेरा बार बार प्रणाम ......
    काश हमारे देश का हर डॉक्टर , डॉक्टर अनुराग होता . मुझे इस देश पर गर्व है की इस देश में डॉक्टर अनुराग जैसा डॉक्टर है

    उत्तर देंहटाएं
  81. जब कभी हतोत्साहित होती हूँ,की संवेदनाये मर क्यों रहीं है चारों तरफ़........तो आशाएं आप जैसे लोगों की याद दिला देती हैं और कहती हैं.............अब कहो ????
    और मैं उस ईश्वर के आगे निःशब्द नतमस्तक हो जाती हूँ.

    आपकी डायरी के इन पन्नो ने तो बाँध लिया..........

    उत्तर देंहटाएं
  82. 85/86 commentske baad bhee kya mai kuchh likhnekee himmat kar sakti hun?
    Khair awwal to aapki tippaneeke liye shukraguzaree ataa farmatee hun..
    Dairyke chand panee hee kaafee hai hain, yahan ek sadeeke safarke liye...
    meree dairyka hashr mai pehle shayad likh chukee hun....par shrinkhalame likhna lazmee hoga...
    Triveni ya aur kuchh, aap jobhi likhte hain, gar ek panktibhee padh lun to phir poora padhe bina ruk nahee sakti ye lekhanka kamaal hai...

    उत्तर देंहटाएं
  83. aapke itne touching words padhte hue, har line pe alag bhaav aate hain, sabhi ko vyakt karna shayd mushkil ho par itna kahungi ki batein to aisi sabki zindagi mein hoti hain, kuch khushnaseeb ya jaane kya hai jo unhe mehsus kar lete hain - kuch aur jo mehsus karke jazbaat bayaan bhi kar sakte hain. unhi gehri baton se fir jodne ke liye shukriya.

    उत्तर देंहटाएं
  84. अपने अतीत को खंगालना ओर उसमे से कुछ ऐसा निकालना जिसके मायने शायद सबके लिए हो....बड़ा मुश्किल काम है...वैसे भी कहते है न की" किसी का आज किसी का संस्मरण है "..एक सहब ने मेल लिखा ओर कहा आप तो इससे कई सारी पोस्ट बना सकते थे ....शायद ........पर उस रात जब सबको संजोने बैठा ..लगा की सालो में एक निरंतरता है...ओर उस निरंतरता स गुजरते हुए जो मैंने महसूस किया है...शायद कोई ओर भी करे.....
    दिल्ली की उस भीड़ भरी बस में उस जींस वाली लड़की के आंसू मुझे आज भी याद है.ओर उस सरदार का चेहरा भी..उससे यही बात साबित हुई थी की केवल लिबास आपमें साहस ओर आत्मविश्वास नही भरता ...विरोध की प्रतिक्रिया भीतर से उपजती है.....एस एम् एस पोल अब भी जारी है सवेदनायो का बाजारीकरण करते हुए ...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने सरकार के सेंसर को नकार दिया है......पर अपने आत्म निरीक्षण को मीडिया के लोग टुकडो टुकडो में निजी तौर पर कबूलते है....पर सामूहिक तौर पर वही बाजीगिरी का खेल चलता है तो दुःख होता है
    २३ की उम्र के भगत सिंह कितने परिपक्व थे ...उनके बारे में विभिन् लेखो को पढ़कर लगता है.....पता नही क्यों उनके लेखो को उतना प्रचार नही मिला जितना गाँधी या नेहरू के ?क्या इसके पीछे भी सत्ता के खेल रहे है ...नही मालूम...पर भारतीय युवा को अहसास होना चाहिए वे केवल बन्दूक उठाने वाले नौजवान भर नही थे...चिन्तक थे....
    अपने विचार बांटने के लिए
    आपसभी का शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  85. डाँ. साहब, आपके इन खयालों को संजोने व प्रस्तुत करने का अंदाज़ बहुत प्रषंसनीय है। कुछेक चुनिंदा वर्णन बहुत प्रभावी व संवेदंशील लगे -

    सीमित टेक्नोलोजी का वो सिनेमा भीतर रूह तक चहलकदमी करता है
    ..
    महबूब खान अनपढ़ थे
    ..
    पुश्ते दर पुश्ते इस रोग को ढोती है

    (अब कुछ-कुछ बदलाव भी आ रहा है, पर मूलत: यह सही ही है

    बेटो को तभी याद आती है माँ की जब बीवी प्रेग्नेंट होती है
    रिश्तो की डोर में शर्तो की गाँठ है
    ...मानवीय संवेदनाओ का स्केल एस एम् एस पोल है

    उत्तर देंहटाएं
  86. ye pehli post thi jo, mujhe samajhne me dikkat aai, aur jo maine poori nahi padhii..

    warna ab tak jo bhi post padhni shuru ki, vo ant tak padhi hi thi..

    Waise iska jo aapne pink me likhaa hai vo sach hai..

    राजेन्द्र कुमार की कविता .."भगत सिंह :सौ बरस के बूढे के रूप में याद किए जाने के विरुद्ध "

    वे तेइस बरस
    आज भी मिल जाए कही ,किसी हालात में
    किन्ही नौजवानों में
    तो उन्हें
    मेरा सलाम कहना
    ओर उनका साथ देना
    ओर अपनी उम्र पर गर्व करने वाले बुढो से कहना
    अपने बुढापे का गौरव उन पर नयोछावर कर दे ......


    (भगत सिंह २३ साल की उम्र में शहीद हुए थे .....महज़ २३ साल .)

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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