2009-06-29

"बाँध के रखो इन ख्यालो को....कम्बखत आसमां तक उडान भरते है "

राशिद मियां ….तकरीबन ५० साल के है एक रुपये में एक कपडा प्रेस करते है .दस किलोमीटर से साईकिल चलाकर एक दूकान के आगे लकडी के एक तख्त पर ऊपर एक चद्दर तानकर सूरज से लड़ के पिछले बीस सालो से कोयले की प्रेस के संग है .. बचपन की पढाई से यहाँ तक के सफ़र में उन्हें वही खड़े देखा है .जैसे कोई किरदार खामोशी से अपना एक ही रोल निभा रहा है... पहले सूरज इतना चुभता नहीं था ...सूरज बदला है या मै....
आपकी प्रेस इस बिजली की मोहताज नहीं मियां...मै उनसे कहता हूँ....
एक बात बतायेगे छोटे मियां ....वे गाडी की खिड़की पे आ गये है ...मुझे लगता है वे किसी बीमारी की बाबत बात करेगे ...
" कोई जन्नत है भी या ये भी खामखाँ हम जैसो को बहलाने के शगल है ….उनकी नजर मेरे लेपटोप पर रुक गयी है … .. " सुना है साइंस ने बड़ी तरक्की कर ली है इन दिनों .. ...आपका ये जादू का डब्बा कुछ कहता है इस बारे में ..." मै सिर्फ मुस्कराता हूँ ….अक्सर मेरी गाडी से प्रेस के लिए कपडे उठाते उन्हें किताबे ओर लेप टॉप दिख जाते है .इसलिए उन्हें गलतफहमी है के मै खूब पढने लिखने वाला इंसान हूँ
आप तो हवाई जहाज में कई बार बैठे होगे .आसमान में...
हाँ क्यों ?
कुछ नहीं......वे हंसते हुए कपडे उठाते है. हमारी बेगम कहती है .. रब ऊपर बैठा है …फिर एक ठंडी सांस ..…"पगली है " ...
"मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......


अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "







सुना है कपिल सिब्बल शिक्षा में नयी क्रान्ति ला रहे है ....तो क्या इस देश के किसी दूर दराज गाँव का
बच्चा भी वही किताब पढेगा . जो दिल्ली या कलकत्ता में ए. सी क्लास रूम में पढने वाले बच्चा पढ़ रहा है . ...... .तो क्या अब स्कोलर शिप के फार्म हर गरीब के बस्ते में होगे …..की कोई हुनर दाल- रोटी की फ़िक्र में जाया न हो..... तो क्या अब ..... २२ साल के होने पे ....जिंदगी की दौड़ में .. मौको की एक सी रिले -रेस होगी ..तो क्या अब किस्मत केवल दौलत वालो के पाले में खड़ी न होगी .. .हिश -श- श- श...... बावरा मन देखने चला एक सपना ….अभी तो राखी सावंत की शादी पे नेशनल डिबेट हो रही है...

109 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    तन्हाई में मन बाते करता है तो एक अजीब सी हलचल होती है......

    उत्तर देंहटाएं
  2. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "


    बहुत खुब डॉ साहेब..

    उत्तर देंहटाएं
  3. खुदा तो वाकई इन दिनों मुहं ढक के सो रहा है ..अब हवाई जहाज में बैठे तो संदेशा उस तक पहुंचा दे ..कुछ भ्रम वाकई मासूम और खूबसूरत होते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. मैं तो कहता हूँ की खो दो इन ख्यालों को ..कमबख्त क्या गजब की उड़ान भरते हैं...हम भी परवाज करना चाहते हैं....

    उत्तर देंहटाएं
  5. दुनिया को देखने के सब के नज़रिए कितने अलग अलग होते हैं.
    लैपटॉप सच में जादू का डिब्बा ही तो है..अंतर्जाल की सुविधा ने दुनिया छोटी कर दी है.
    आज की त्रिवेणी - दूसरे व्यक्ति के जज़बातों को समझ कर कैसे इतनी खूबसूरती से शब्दों में ढाल दिया!
    सच में ...आप की कलम भी जादू की है..

    कितनी अच्छी पंक्तियाँ हैं!

    "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    लाजवाब!

    उत्तर देंहटाएं
  6. कमाल की पोस्ट. रोमांच होने का आया कि किस्से ने यू टर्न ले लिया... बहरहाल मामले को थोड़ा और विस्तार देने की अपेक्षा थी. मार्मिक पोस्ट के साधुवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  7. राशिद मियां नें बतकही में बहुत ऊँची बात कह दी ,इसके लिए सारी उम्र विस्वविद्यालय -लाइब्रेरी की खाक भी छान ली जाये तो भी एक झटके में इतना गहन दर्शन नहीं परोस पाएंगे . डॉ साहब ,आज फिर आपने उम्दा पोस्ट लिख दी .

    उत्तर देंहटाएं
  8. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    क्या बात है!

    काश की रशीद मियाँ भी देख सकें जादू के पिटारे में अब वो और उनकी बेगम भी बंद हैं ..

    उत्तर देंहटाएं
  9. badi dil ko chune wali aur jadui post, na jane kaha se le aate hai aap anurag sir yeh sari batein.. behad khoobsurat post

    उत्तर देंहटाएं
  10. खूबसूरत त्रिवेणी और संजीदा बातें...! हमारे बाँवरे मन के सपने और बाँवरी राखी के सपने...! फर्क‌ बस इतना कि नेशनल डिबेट का मसाला हमारे नही राखी के ही सपनो में है...! सब जानते हैं कि क्या हो रहा है...और सब देखते हैं कोस कोस कर...!

    उत्तर देंहटाएं
  11. जो हाथ रोटी न तोड़ सके दो वक़्त की
    वो हाथ किताबें क्या थामेंगे :) :)
    बालश्रम अभिशाप है :)

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सही कहा डाक्साब आपने।नेशनल डिबेट होना किस पर चाहिये और हो किस पर रहा है और एक विषय गरमाया हुआ दफ़ा 377 का।इस पर भी जमकर बहस हो रही है मगर शिक्षा,बेरोज़गारी,खेती-किसानी का तो लगता है कोई माई बाप ही नही है।इसलिये कोफ़्त होती है और लिख दो अनाम भाई चले आते है कहते हुये कि अच्छे चैनल मे नौकरी नही मिलने का इतना मलाल्।क्या-क्या बतायें।बहुत बढिया लिखा रशीद मियां जैसे कैरेक्टर हर किसी की ज़िंदगी मे होते है मेरे भी है,लेकिन उसे कागज़ पर जस का तस उकेरना हर किसी के बस की बात नही है और आपको तो लगता है इस कला मे महारथ हासिल है।दिल को छू लेने वाली इस पोस्ट के लिये बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  13. हाँ क्यों ?
    कुछ नहीं......वे हंसते हुए कपडे उठाते है. हमारी बेगम कहती है .. रब ऊपर बैठा है …फिर एक ठंडी सांस ..…"पगली है " ...
    "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "





    भई, बहुत ख़ूब !

    उत्तर देंहटाएं
  14. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  15. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "
    क्या बात है

    उत्तर देंहटाएं
  16. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    Waah Waah...kya khub andaaz hai...

    उत्तर देंहटाएं
  17. अनुराग् जी आपकी पोस्ट पध कर कितनी देर सोचती हूँ फिर भी निशब्द ही रहती हूँ----क्यों की आपकी संवेदनायें शबदों की मोहताज नहीं होती--वो तो दिल मे कहीं गहरे से अस्तित्व को हिला देती हैं---बस शब्द नहीं मिल रहे---शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  18. bahooot achha bahoot achha or shabd hi ni h aapki soch k liya to

    उत्तर देंहटाएं
  19. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "
    बहुत सुंदर सोच का उदहारण...

    आपने अपनी पोस्ट में रशीद मियां के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा लेकिन ऐसा लगता है जैसे रशीद मिएँ को बरसों से जानता हूँ...
    मीत

    उत्तर देंहटाएं
  20. मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......
    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है

    वाह...............लाजवाब andaaz .........किसी मस्त haathee की caal जैसे liki है यह post ......... daarshnik jogi जैसे jene का andaaz नज़र आता है............ bahoot khoob

    उत्तर देंहटाएं
  21. क्यूँ न जन्नत को भी दोज़ख में मिला लें यारब
    सैर के वास्ते थोडी सी जगह और सही...

    अनुराग जी आपने जो त्रिवेणी दी है इस बार वो आपके कलम के बस की ही बात है...आप का लेखन उच्च कोटि का है...ऐसा लेखन जो आजकल कहीं पढने को नहीं मिलता....लिखते रहें...यूँ ही... ये हम पाठकों पर आपका एहसान है...

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  22. बहुत ही बढि़या लिखा है आपने ।

    उत्तर देंहटाएं
  23. आपके ख्यालों को सलाम
    खुदा ने ओढाया है एक सा आसमान अपने बच्चों के सर
    ये बच्चे ही लड़-भिड कर उसकी नींद में खलल डालते होंगे

    उत्तर देंहटाएं
  24. कुछ कहने लायक आप छोड़ते कहाँ हैं जो कहूँ.......

    भगवान् आपके जोरे कलम को हमेशा ऐसे ही बुलंद रखें...शुभकामनाये.....

    उत्तर देंहटाएं
  25. अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    gajab maza aa gaya......

    khuda to muh dakar so raha hai...
    par aap kaha nadarad ho gaye hujoor..
    bahut dino se milne nahi aaye....

    उत्तर देंहटाएं
  26. डाक्टर साहब राशिद मियां के साथ साथ त्रिवेणि मजेदार रही....हर बार कि तरह
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  27. आप की सोच कितनी शानदार है. जब भी आपको पढता हूँ. गुलज़ार साब की याद आ जाती है. बहुत ही अच्छा लेख... आप बहुत आगे जाओगे डॉ. साब.... बहुत बहुत शुभकामनाये....

    उत्तर देंहटाएं
  28. इधर पगली? उधर पागल? अजब इत्तेफाक है। खैर अभी कुछ दिनों पहले देखा एक आदमी भरी दोपहरी में सड़क किनारे कोई धार्मिक किताब पढते हुए भगवान को याद कर रहा था। देख कर मैं अचम्भित था। उसकी आवाज ऊपर वाले को पहुँची होगी कि नहीं? आपकी त्रिवेणी का तो जवाब ही नही होता। दिल को छू जाती है। और हाँ काश हर बच्चे को शिक्षा मिले।

    उत्तर देंहटाएं
  29. आप अंतर्विरोधों को कमाल की सहजता से अभिव्यक्त कर जाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  30. मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......
    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है
    aapkee kalam gazab kee baat kah gaee.....

    उत्तर देंहटाएं
  31. मियाँ ने तो एक जुमला उछाल दिया और हमारी कल्पनाशीलता देखिये की उसमें गजब की दार्शनिकता पा कर निहाल हो लिए हैं -यह आपकी लेखनी का कमाल है अनुराग जी

    उत्तर देंहटाएं
  32. मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है

    --बहुत धुआँधार-संवेदनशील हृदय से निकली सीधी बात!!

    उत्तर देंहटाएं
  33. क्या कहूँ?....क्या..
    शानदार!

    उत्तर देंहटाएं
  34. डॉक्टर डे से एक दिन पहले अपने फेवरेट डॉ से अगर एक 'त्रिवेणी " मिल जाये तो हम गुलज़ार भक्त निहाल हो जाते है .आप ये छोटी पोस्ट लिखकर आजकल कंजूसी बरतने लगे है .सूरज नहीं बदला है हम बदल रहे है ए सी ओर आराम तलबी की आदत जो बन गयी है .
    हमारे हरियाणा का कोई लड़का जब दिल्ली या मुंबई की किसी एम् एन सी में इंटरवियु देने जाता है ,आधा तो बेचारा अंग्रेजी की वजह से वैसे ही हीन भावना से मारा जाता है .आपकी पिछली पोस्ट में आपने लिखा था न 'इन पुट ओर आउट पुट का जमाना है ठीक लिखा था .कितने काबिल ओर होणार बच्चे एक्सपोज़र न मिलने से क्लर्क या बैंक की नौकरी में अपनी जिंदगी गुजार देते है .शिक्षा सभी की एक सामान होनी चाहिए .
    त्रिवेणी धाँसू है .जहाँ तक मै समझी हूँ ये रिवर्स त्रिवेणी है .है न अनुराग जी ?

    उत्तर देंहटाएं
  35. कुछ कहने को बचा ही नही ---
    सिर्फ शानदार

    उत्तर देंहटाएं
  36. I have no word to comment on this. I just love your writings.

    उत्तर देंहटाएं
  37. आज तो सोचा लिखूंगा: 'इस पोस्ट पर कहने को कुछ नहीं है !' वो भी कोई कह गया ऊपर. बड़ी जालिम दुनिया है ! हमें इसी का गम हो गया और आप राशिद मियां की बात कर रहे हैं. सिब्बल साहब के प्रयासों का स्वागत है. पर क्या कभी आइडियल समाज हो पाया है? राम-राज्य तो किताबों और कल्पना की चीज है सर.

    उत्तर देंहटाएं
  38. ऊपर वाला भी शायद रिश्वत लेने लगा है, ओर कुछ नही.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  39. राशिद मियाँ तो मिर्जा गालिब का पुनर्जन्म दीखते हैं, हमारा सलाम उन तक पहुंचे:
    हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
    दिल के खुश रखने को गालिब यह ख्याल अच्छा है

    उत्तर देंहटाएं
  40. हुआ यूँ के शनिवार दोपहर में सक्सेना साहब दिखाने आये .७२ साल की उम्र का आदमी जब अपने से आधी उम्र के आदमी को हाथ जोड़कर नमस्कार करे तो बड़ी शर्मिंदगी होती है...चीफ इंजीनियर के पद से रिटायर हुए है...कई साल हुए .उन्हें भी वही रोग लगा था नौकरी में जो उस पीढी को था ...ईमानदारी का एपिडेमिक....पिता जमीदार थे ...जिंदगी भर रिश्वत नहीं ली..दो बेटो को पढाया लिखाया ..शादी कर दी .सेटल हो गये ..अचानक एक्सीडेंट में दोनों बेटो की डेथ हो गयी...एक बहु उनके पास है दूसरी ने मुकदमा ठोक रखा है .गाँव की जमीन पर भाई नजर गडाये हुए है....दो पोतो को अपने पास रखकर पेंशन से पढ़ा रहे है ..माकन पर उन भतीजो ने मुकदमा डाला है .जिन्हें पढ़ा लिखा कर .सिफारिश से उन्होंने नौकरी पे डलवाया है....
    दोनों बुजर्ग दुखी थे .एक ही सवाल था "डॉ साहब हमने ईमानदार रहकर कौन सा पुण्य कमा लिया ...आज लोगो को देखता हूँ..पैसा पास हो तो दुःख भी दूर भागता है...कभी कभी मन बहुत कचोटता है..की ऊपर वाला कैसा हिसाब रख रहा है......अक्सर ऐसे सवाल हमारे मन में बहुत उठे .समय के साथ कम हो गये...कभी हमने भी पोस्ट लिख मारी.थी...बुनियादी तौर पे सर्टीफायिड इमोशनल फूल जो ठहरे ..फिर कल दोपहर "एक रुका हुआ फैसला दिखी."..जी क्लासिक पे ....फिर राशिद मियां टकराए ...वैसे भी हम कुछ तजुर्मा पढ़ रहे थे .किन्ही ख्वातीन का....बारिश हो नहीं रही थी...बिजली गम थी..लोग माइकल जेक्सन के गम में ग़मगीन थे ..ओर एक साहब चीख चीख कर कह रहे थे की सिब्बल साहब क्रांति लायेंगे .....फोर्स लालगढ़ से रामगढ पहुँच गयी है .पर वो तो बंगाल में है...सब कुछ गड मड हो गया .
    खैर अब बारिश हो गयी है....शाम तक नेशनल डिबेट के नए इश्यु होंगे ........
    @नीलिमा ....हाँ ये रिवर्स त्रिवेणी ही है.....

    उत्तर देंहटाएं
  41. ईमानदार व्यक्ति जीवन के अंतिम चरण में हताश और निराश ही रहता है . यह कटु सत्य है

    उत्तर देंहटाएं
  42. ऊपर एक सज्ज्नन लिखते हैं कि गुलजार की याद आती है। क्या खूब सही लिखते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  43. चाय पीते हुए पोस्ट पढने के बाद लगा आज चाय कुछ ज्यादा ही अच्छी बनी है ...... एक कप और हो जाय :)

    उत्तर देंहटाएं
  44. जानदार-शानदार।

    आभार/मगलकामनओ के साथ

    मुम्बई टाईगर
    हे प्रभु यह तेरापन्थ

    उत्तर देंहटाएं
  45. जादुई कलम का एक और तोहफा .... आमीन ।

    उत्तर देंहटाएं
  46. Bahut Khoob Dr. Sahab.,,,
    Rashid Miyan Ho ya hum jaisa koi insan.. shayad kisi na kisi andekhi jannat ki hi ummeed mein zindagi guzar deta hai..aur wo jo upar baitha hai, shayad use ye zarurat mehsoos nahi hoti ki jannat ka kuch nazara is duniya mein bhi kara de... Yunhi Likhte rahe bade din baad aapke blog par aaya hoon padhkar hamesha ki tarah achha laga...

    उत्तर देंहटाएं
  47. मेरा रुकना सफल हुआ.. दिन में कमेन्ट करने की सोच रहा था पर पता नहीं क्यों मुझे लगा आपकी टिपण्णी भी आएगी.. आपकी एड ऑन टिपण्णी और जायकेदार बना देती है पोस्ट को..

    इस पोस्ट पर, आप ही के शब्दों में कहू तो लगता है खुदा ए सी चलाकर सो गया है...

    उत्तर देंहटाएं
  48. बेहतरीन लगी आपकी आज की त्रिवेणी और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति से जुड़े हुए बेहद ईमानदार और जरूरी प्रश्न

    उत्तर देंहटाएं
  49. मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......
    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है

    ये तीन पंक्तियाँ तीस हजार लाइनों पर भारी हैं। इसमें तो एक महाकाव्य छिपा हुआ है। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  50. बात रुकी
    राखी सावँत की शादी की डीबेट पर :)
    हुम्म्म ...
    बाकि ,
    सिब्बल जी बहक गये हैँ ..
    ऊँच नीच, भेद भाव, जात -पाँत ,
    क्या ऐँवे ही खत्म हो जायेँगे भारत देस मेँ ?
    ..
    कहीँ सपना ..तो नहीँ
    - लावण्या

    उत्तर देंहटाएं
  51. oh! kitni shjta se apne jvlant prshn rakh diya samne .berojgari imandari kitni vivshta bhri hai sbke drdo me .
    kamal ki post .
    kya log sirf is liye rakhi savant ko dekhegeki dekho aagekya hota hai?

    उत्तर देंहटाएं
  52. पूरा पढ़ने के बाद जो टिपियाने आया तो देखा ५० लोग टिपिया चुके है ,और एक से एक धुरंधर |
    रशीद मियां जैसे सीधे साधे लोग तो न कह पाएंगे हमीं कहे देते है :----

    जब कभी फिर से परवाज़ भरना ,
    मिले या न मिले वो उन असमानों में ,
    मेरी ओर से कहना जोर से कहना उस जहाँ में ,
    नहीं जानता कि तूने ही है हमें बनाया ,
    बस ये जानता हूँ तू हमी जैसों कि ईजाद है ,
    अगर चे हम न होते तू भी न होता ,
    हमी से ही तेरा वजूद है ,तेरा वजूद है |

    अगर सक्सेना साहेब मिलें तो कहियेगा कि
    '' गुनाह करना इक जुनून है ,
    ऐसे गुनाहों से हम फिर भी बाज न आएंगे ,''
    ''अब तक तिरपन ''

    उत्तर देंहटाएं
  53. अनुराग जी, क्या पता आपका वो खुदा कान में रुई भी डाले हो.
    वैसे मुझे आपकी त्रिवेणी से ये साफ़ नहीं हो पाया की, ये खुदा की नींद तोड़ने के लिए कही गयी है या उन्हें थोडा और आराम से सोने देने के लिए.

    वैसे ये कहने की बात तो है नहीं ki रचनाएँ आपकी लाजबाब होती हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  54. आप वाकिये की रोचकता को बहुत बढा देते हैं
    अपनी शानदार लेखन शैली से ..

    wonderful!!

    उत्तर देंहटाएं
  55. बचपन की पढाई से यहाँ तक के सफ़र में उन्हें वही खड़े देखा है .जैसे कोई किरदार खामोशी से अपना एक ही रोल निभा रहा है...
    अपने किरदार की प्रोपर्टी ही तो खो गयी है दूसरों के मुखोटों में खुद को फिट करने की कोशिशों में.

    उत्तर देंहटाएं
  56. आदमी को अपनी ईमानदारी पे रोने दो,
    और खुदा को आस्मानी चादर ओढे बे-खौफ सोने दो,
    हमारी चीख में अब दम कहां है,
    उस के पास भी मरहम कहां है....आपकी पोस्ट पर अचानक आया और आपका ही हो कर रह गया भई । कमाल है...

    उत्तर देंहटाएं
  57. dil khush ho gaya dak saab.........

    vaise to kahte hain doctoron se doori bhali...

    par pata nahi kyo aapse bar-bar milne ko dil karta hai......

    dhanywaad..........

    उत्तर देंहटाएं
  58. kya is triveni ko khoobsoorat kahun?
    gazab ki masoomiyat hai...par khuda yun to nahin uthta hai...koi aur intezam kiya jaaye.

    उत्तर देंहटाएं
  59. खुदा का बंदा1 जुलाई 2009 को 12:37 am

    इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  60. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  61. कुछ लोग होते है जो बिना पढ़े लिखे अपने तज़ुर्बे के दम पर ज़्यादा ज़हीन हो जाते है. गाव में ऐसे कई किरदार मिल जाते है... हम उन मायूस आँखों को बस पढ़ने का समय निकालें... उन ठहराव में बहुत हलचल होती है...

    ... जहाँ तक यह स्वर्णिम दिन की बात है तो वो बराबरी वाला दिन नही आने वाला....
    हमारे पटना में एक कहावत है... 'लिखटांग के आगे बकतंग नही चलता' जो रसुखदार है वो क्या घास बेचेंगे...

    जहाँ तक रखी सावंत की बात है... तो दिल्ली में बाक़ायदा होर्डिंग्स लगे है... दुदुम्भि बज रहे है... झाझ, पखावज सभी जारी है...
    हम शर्मिंदा है सब हमारी आखों के सामने हो रहा है... महाभारत युग गया नही है भाई... बस बेबस होकर नाच देखिए...

    यह था मुद्दा... अब आपकी मेहनत पर आते है..

    पाला अच्छा बदला है... दो बातें मिला कर अच्छा जोड़ा है... शुक्रिया...
    ------------------------------------------------
    .... देखिए दकियन्नूसी सोच सर उठा रहा है... एक बंधु विरोधी भक्ति पर उतर आए है...
    ------------------------------------------------

    उत्तर देंहटाएं
  62. खुदा का बंदा1 जुलाई 2009 को 1:31 am

    इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  63. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  64. Indore, Madhya Pradesh, India
    Bharti Broadband (122.168.212.118) [Label IP Address]

    उत्तर देंहटाएं
  65. Number of Entries:
    Entry Page Time:
    Visit Length:
    Browser
    OS
    Resolution 8
    1st July 2009 01:08:57 PM
    54 mins 36 secs
    IE 6.0
    WinXP
    1280x1024 India Returning Visits:
    Location:
    IP Address:
    Entry Page:
    Exit Page:
    Referring URL: 0
    Indore, Madhya Pradesh, India
    Bharti Broadband (122.168.212.118) [Label IP Address]
    anuragarya.blogspot.com/
    anuragarya.blogspot.com/2009/06/blog-post.html#comments
    No referring link

    उत्तर देंहटाएं
  66. उम्मीद करता हूँ आशीष इस आई पी एड्रेस को पहचानने में मेरी मदद करेगे.....

    उत्तर देंहटाएं
  67. आपकी पोस्ट को देर से पढ़ने का एक अलग ही लुत्फ़ होता है। फीड पे आपकी नयी पोस्ट दिख जाने के बावजूद खुद को जबरदस्ती रोके रखता हूँ....कमबख्त टिप्पणियां भी तो वही तिलिस्म लपेटे आती हैं आपके पोस्ट पर...

    कुश के ही शब्दों को दुहराते हुये कहूँ तो वाकई आपकी एड ऑन टिपण्णी और जायकेदार बना देती है पोस्ट को..

    और रशीद मियां के जुमले पे सारी शायरी निछावर !

    उत्तर देंहटाएं
  68. राखी की शादी की नेशनल डिबेट.. राखी के तो हर काम की नेशनल डिबेट होती है.. बहुत अच्छा लिखा आपने..

    किसी भी आईपी एड्रेस की जानकारी http://www.who.is/ वेबसाइट से ली जा सकती है। आप जिस पते की जानकारी चाहते हैं उसके लिए- http://www.who.is/whois-ip/ip-address/122.168.212.118 पर क्लिक करें।

    उत्तर देंहटाएं
  69. यूँ तो हर गली मुहल्ले के कोने पर रशीद मियाँ मिल जाएँगे और खुदा भी यूँ ही मुँह ढक कर सोया रहेगा या कभी कभी पलकों के कोनो से झाँक लेगा पर ये जो आपका जादू वाला डब्बा है ना .....कमाल की बातें कह जाता है .....

    उत्तर देंहटाएं
  70. राशिद मियाँ जैसे लोग दुनिया के उत्तमांश में हिस्सेदार कभी नहीं होते. अपना किरदार वे एक्स्ट्रा की भूमिका में ही पाते हैं जिन्हें लाइम लाईट नसीब नहीं होती.वे स्टेज के पीछे अँधेरे से उठते क्षीण स्वर मात्र होते हैं.
    आपने उन विनम्र, सर झुकाए किरदारों को अग्रिम स्थान दिया है.

    उत्तर देंहटाएं
  71. @शुक्रिया आशीष
    तत्परता से जवाब देने के लिए .....
    दो कमेन्ट मुझे मेल से मिले है ..उनमे से एक @राखी भल्ला
    m not able to post my comment in ur blog....so writting it here......

    "baanwra mann dekhne chala ek sapna.....awesum post.

    par ek baat khatak rahi hai mann mein

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    huzoor baar baar us khuda pe kyun tohmat lagate hain. bure karam karte hue tou insaan kabhi sochta hi nahi...par jab aage jaakar kisi janam mein un karmon ke bhuktaan ka time aata hai tou hum us upar wale ko ghoor ke dekhte hain jaise sab uska kiya dhara ho. aur jaise wo hume pareshaan dekh kar khush hota ho. wo hamara janamdaata hai. jab ek jan-ni apne bachhon ke liye kabhi bura nahi soch sakti, kabhi ye nahi chah sakti ke uske bachhe dukhi hon...tou wo ishwar jiska humse janam janam ka naata hai kya wo kabhi yunhi hume dukh dekha. wht we get is just the result of our own deeds, the only thing is we dont remember wht we did in our last births. "


    ओर दूसरी @RC
    The facility to post comment on a blog has been blocked in my office. Thankfully, I can at least read the blog (clicking on 'post a comment' takes us to 'blocked' page). So here's the comment on बाँध के रखो इन ख्यालो को....कम्बखत आसमां तक उडान भरते है "

    A very impressive article, I must say! Enjoyed reading it. Short, crisp and effective. I loved the title, as soon as I read it on my blog's listing I couldnt stop reading the article (smells Gulzar though)!.

    Each thought very beautiful and geaciously expressed ! (main mazaak mein Gautam Rajrishi ji se kehti hoon aap galati se "sakht-jaan" sipahi ban gaye .. aapko "emotional" shaayar hona chahiye tha .... kya aap bhi galati se doctor ban gaye? Kidding!)

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "
    Awesome couplet!

    God bless
    RC

    उत्तर देंहटाएं
  72. kya mareejon ne jyada gher rakha hai dak sab...

    roj bulava bhej raha hu aap aate hi nahi........

    dil ka mareez hu...kuch to khayal kariye....

    उत्तर देंहटाएं
  73. anuraag ji ,

    mere paas shabd nahi hai aapke post par comment karne ke liye ... maine aaj subah se aapki saari posts apne ghar me padhwaaye hai ... aur sabne ek saath kaha ki mujhe aapse likhna seekhna chahiye ...ye mere poore pariwaar ki taraf se compliment hai aapke liye sir ji ...

    just hats off to you ...

    kudos for such a wonderful writing .. soon I will come to meet you in merut ..

    aapka
    vijay

    उत्तर देंहटाएं
  74. तस्वीर बहुत ही सुन्दर है
    ििकरण राजपुरोिहत ििनितला

    उत्तर देंहटाएं
  75. Aap kitna sochne par mazbur karoge ye koi nahi kah sakta
    bahut samvedansheel hai aapka man

    उत्तर देंहटाएं
  76. DAKTAR SAHIB,
    AMMA JAAN LEKE RAHOGE KYA... FIR JAAN LAUTAANI BHI PADEGEE APKO... KYUNKE DAKTAR JO THAHARE AAP.. KYA KAMAAL KI BAAT KAHI HAI AAPNE ... PAHALAA KE USKE KHAMOSHI SE KIRDAR NIBHAATE HUYE... DUSARA KAPADE UTHAATE AUR FIR AAPKI TRIVENI... MAGAR IS TRIVENI KE KYA KAHANE BILKUL SATIK LAGAYA HAI AAPNE ,... APNE LEKH KE MUTAABIK.. MAIN TO UPAR SE SARE COMMENTS BHI PADHATAA AARAHAA HUN... FIR SOCHAA KUCHH KAHTE CHALE DUAA SALAAM KARTE CHALE... BAHOT BAHOT BADHAAYEE SAHIB...


    ARSH

    उत्तर देंहटाएं
  77. band kar rakho en khayalo ko kamakht aasman tak udaan bharte hai......title hi amazing hai...post usse bhi shandar...or khuda kaha so pata hai...hum log use chan se kaha sone dete hai....har roj nayee nayee shikayate..nyee demands rakhte hai...fir bhi shaq karte hai ki kahi so to nahi gya....

    उत्तर देंहटाएं
  78. aayeeye dekhiye court k faisle par ek cartoon....
    is samaz ka kya hoga.....

    anurag ji....
    apne moolywan vicharo se mujhe avgat karayen.....

    उत्तर देंहटाएं
  79. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "
    कितने ख़ूबसूरत अंदाज़ में आपने बात कह दी डा. साहब वाह वाह।

    उत्तर देंहटाएं
  80. मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    hamesha si khuubsurat triveni

    उत्तर देंहटाएं
  81. बावरा मन....साला इतने सपने ही क्यों देखता है? काश गरीबो के सपनों को भी औकात में रहना आता! और खुदा ....उसका तो खुदा ही मालिक है!

    उत्तर देंहटाएं
  82. आप की सोच कितनी शानदार है.

    उत्तर देंहटाएं
  83. कई गंभीर इशारे करती हुई सहज सी अभिव्यक्ति।

    यह अंदाज़ अनोखा है।

    उत्तर देंहटाएं
  84. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "...
    bahut achi trivani likhi hai
    thanks for sharing..

    उत्तर देंहटाएं
  85. उम्‍मीद है खुदा के कान भी होते होंगे :(
    वैसे सोचनेवाली बात है- हवाई जहाज में हार्न तो होता ही होगा:)

    उत्तर देंहटाएं
  86. अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "...


    हमेशा की तरह बेहतरीन लिखा है अनुराग जी शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  87. aap bhagvan ko horn se disturb karne ko soch rahe hain /// agar kahin bhagvan ke paas mobile hota to kitna pareshan ho gaya hota.

    उत्तर देंहटाएं
  88. aaj bahut dino ke baad is blog jagat se vaapis juda. aate hi aapke post ko padha, aur pehle ki hi tarah paaya ek saargarbhit sa lekh jo bahut kuch sochne par majboor kar deta hai. jeevan ki choti choti jhalkiyon me jeevan ke falsafe ko samajhne ki ek aur kamyab koshish

    उत्तर देंहटाएं
  89. डॉ अनुराग जी , नमस्कार !
    सब से पहले तो हौसला-अफ़्ज़ाइ का ब्बहुत-बहुत
    शुक्रिया हुज़ूर .. कोई भी तहरीर सिर्फ और सिर्फ तभी
    अच्छी होती है जब वो पढने वालों या सुनने वालों को
    पसंद आये ...
    आप आलिम फ़ाज़िल शख्सियत हैं ...
    आपको पढ़ना हमेशा अपने आप में एक गहरा
    तज्रबा रहता है ...
    आपकी ज़हानत आपके लेखन में
    हमेशा नुमायाँ रहती है .
    इस बार भी आपने इंसान के "मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण " से रु.ब.रु करवाया है
    मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं .
    ---मुफलिस---

    उत्तर देंहटाएं
  90. मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    behtarin tiveni,hmm kush ji ki tippani se sehmat ,aapke shabdon mein kahe to khuda AC lagakar so gaya.hamesha ki tarah kehna bahut hai magar lafz nahi.marmik post.

    उत्तर देंहटाएं
  91. bahut khoob..maja aa gaya aapki tippani padh kar..shukriya..

    उत्तर देंहटाएं
  92. छोटी सी बात में गहरा फलसफ़ा लिखना आप ही लिख सकते हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  93. हजूर आदाब......!!

    हमने तो शिकायत में कुछ पंक्तियाँ लिख रखीं थीं ......

    कुछ था कातिब को खुद पर गुमां
    कुछ नज़्म को भी था गरूर
    मुए दिल ने हंसकर कहा -
    ये तो मंजिल का रास्ता नहीं

    इतने लोगों के बीच अब मेरी जगह कहाँ .....शतक की बधाई .....!!

    उत्तर देंहटाएं
  94. अनुराग जी,
    एक बात जरूर कहूंगा..आप जो लिखते हैं बहुत ही उम्दा लिखते हैं।आप की हर पोस्ट का इन्तज़ार रहता है चाहे कमेन्ट करूं या न करूं....
    बहुत बहुत बधाई....बहुत उम्दा शेर..

    उत्तर देंहटाएं
  95. अनुराग जी आपकी पोस्ट पढने के लिए मूड बनाना पढ़ता है ..अब १०४ टिप्पणियोंके बाद क्या कहने के लिए कुछ शेष रह जाता है ...राशिद मियां की उदासी आपकी शब्द-शेली मैं जज्ब कर ली है ..आपके लेख के कायल होना ही होता है ..बीच मैं निरंतरता टूटी हैखेद है

    उत्तर देंहटाएं
  96. Dr. Anurag ji.. hum log aapki nayi posting ka intezar kiya karte hain.. kam se kam ek week me to ek post de hi diya kare..

    Surya

    उत्तर देंहटाएं
  97. "मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

    अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
    तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है "

    bahut khoobsurat...
    har baar ki tarah lajwaab...

    उत्तर देंहटाएं
  98. Doctor .....aapki triveni par waari jaaon.....hamse kuch na bola jayega....hamesh sochte hain....aapko poora padhna hai... ek post hi dimaag ki battiyan jala deti hain....to installment mein lena hoga......waqt ka bhi takaza tharaa....By the way mera fav. writer.." Dr. Anuraag" :-)

    उत्तर देंहटाएं
  99. kapil sibbal par ek visshuddh tippadi.
    apki ye post b pad li. :)

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails