2009-01-03

वैसे खुदा की उम्र क्या होगी तकरीबन !


पने कभी उस आदमी को शुक्रिया कहा है ......... जिसने रुई के टुकडो को चद्दर में लपेट कर रजाई नाम की ये खूबसूरत शै इजाद की .... .... ऐसे कितने शुक्रिया उधार है हम पर ...साल का सबसे पहला फोन मेहता अंकल का आया , "है कोई ख्वाहिश "??  चेस खेलने के शौकीन मेरे दोस्त के इसी पिता ने पिछले साल इन्ही दिनों में अस्पताल के उस बिस्तर पर दिल का दौरा पढने के बाद मुझसे मुस्कराते हुए कहा था ..वो "चेक" दे चुका है....ये "ढाई घर" चलने की कोशिशों में जुटे है .....तय करना मुश्किल है कि गुजरे सालो में .जिंदगी मुश्किल हुई है या इंसान .... काश हर इंसान के लिए ऊपर वाला आसमान में "चेक " का साइन बोर्ड लगाये ....


"गर .....
अच्छे दिनों को " जेरोक्स" करके अलमारी में रखा जाता ...... जमीर की खरोंचे डेटॉल से साफ़ होती .....उसूल स्पीड पोस्ट से डिलीवर होते....अठन्नी में वही खालिस दुआ मिलती ....... एक जोर की सीटी से सूरज नुमाया होता ... सर्द रात पश्मीने का शाल झोपडो पे गिराती ... ओर ........ओर ... कोई हमउम्र खुदा होता ....
जिंदगी किस कदर आसां होती !




आज की त्रिवेणी....
साल के आखिरी दिनों में आते आते ऊपर आसमान में रहने वालो की आदतों में भी कुछ तबदीलिया आ जाती है ....शायद देर रात महफ़िल सजती है ..चिल्मे जलती है सुबह वही धूआ नीचे जमीन पर उतरने की मशक्कत करता है ....


"परिंदे तय कर लेगे अपना सफर
मौसम की दीवानगी से वाकिफ है ..


मुए एरोप्लेन ही होश खो बैठे है "




चलते चलते ...
पिछले साल की खता मुआफ करे...ताकि अगले साल उन्हें फ़िर कर सके.....
वैसे खुदा की उम्र क्या होगी तकरीबन !

104 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा लेख है...
    पर जिस खुदा को आप ढूंढ रहे हैं वो तो आपके मन में ही है...
    आप उससे कुछ कह के तो देखिये हर जायज इच्छा को पूरी करेगा...
    ---मीत

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  2. सचमुच ऐसे कितने शुक्रिया उधार हैं हम पर। त्रिवेणी भी बहुत भायी।

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  3. चलते चलते ... पसंद आया जी.
    पिछले साल की खता मुआफ करे...ताकि अगले साल उन्हें फ़िर कर सके.....

    मुआफ़ की जी. आप तो फ़िर से चालू हो जाइये.

    वैसे खुदा की उम्र क्या होगी तकरीबन !

    खुदा की अभी उम्र ही कितनी है? वो तो अभी अभी जन्मा है. बिल्कुल सद्य:जात है जी. आपको कुछ कम ज्यादा बता गया क्या? :)

    रामराम.

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  4. अनुराग जी नमस्कार,
    मेरा खुदा तो जी मेरी ही उम्र का है. हम दोनों वैसे साथ साथ रहते हैं. मैं कोई भी काम उससे पूछे बिना नहीं करता. उसके लिए मैंने सिर की खोपडी की छत के नीचे घर बना रखा है जी,

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  5. जब तक अपुन जीवित रहे तब तक ही खुदा को जीवित जानिए .

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  6. खुदा शायद खुद से बना होगा। वैसे मुझे लगता है वह अभी जन्मा ही नहीं।
    पोस्ट बढ़िया लगी।
    घुघूती बासूती

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  7. तय करना मुश्किल है कि गुजरे सालो में .जिंदगी मुश्किल हुई है या इंसान ....

    wakaye samajh nahi aata...ke hum log itna ulajh gaye hain apni zindagi ko asaan banane ki khwashish mein....ya zindagi khud b khud aur ulajhti jaa rahi hai...

    aur khuda ki umr.....use jis tarah se dekhna chahoge...dekh paaoge. kaayi baar zindagi mein itna kohra aa jaata hai ke hum use dekh hi nahi paate hain...par dhoop ke nikalne pe jab ye kohra chhatega tou wo khud b khud hume dikhayi dega...hume bas apni aashta ko zinda rakhna hoga :)

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  8. अनुराग भाई...क्या गज़ब की पोस्ट लिखी है भाई....नए साल में...वाह...दुआ करते हैं की आप की सभी ख्वाईशें आपने जो पोस्ट में लिखी हैं पूरी हों....आप जब शब्दों से खेलते हैं तो हम से पाठकों का मुंह खुला का खुला रह जाता है...वाह...वा..
    नीरज

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  9. वाह ! क्या बात कही !
    आप तो बस ऐसे ही रहिएगा चाहे कितने भी बरस निकल जायें.....

    सच कहा,कितनो का ऋण चढा हुआ है सर पर ,क्या कभी चुक पायेगा कुछ भी कर लें ????

    उत्तर देंहटाएं
  10. वाह ! क्या बात कही !
    आप तो बस ऐसे ही रहिएगा चाहे कितने भी बरस निकल जायें.....

    सच कहा,कितनो का ऋण चढा हुआ है सर पर ,क्या कभी चुक पायेगा कुछ भी कर लें ????

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  11. निशब्द!!!

    अमिताभ बच्चन की फिल्म नही

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  12. खुदा ? सोचने पर मजबूर कर दिया बंधुवर। मैं हूँ या खुदा हैं। नहीं...... लगता है हम दोनों ही नहीं हैं, क्योंकि मेरे आसमानी ख्यालों के पुलिंदे अब भी धर्म की दुहाई देते लग रहे हैं। और खुदा भी इस दुहाई को लेने में मजे ले रहा है ....... मैं अब भी सोच रहा हूँ ......खुदा ?

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  13. लाजबाब . डॉ. साहब आप तो नाशुक्रे नही लेकिन अपने बारे मे अभी मैं जोड़ घटाने पर उलझा हूँ

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  14. बहुत खूब!
    खुदा की क्या उम्र? वह तो कभी पैदा ही नहीं हुआ।

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  15. काश यह फलसफा कुछ लोगों को समझ आ जाये!

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  16. पूरे पोस्‍ट और और अब तक आए कमेंटस में घूघूती जी का कमेंट काबिलेगौर है.....

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  17. आप जिस आदमी की बात कर रहे हैं वो दोस्त हैं हम सबका। और दोस्तों को कभी शुक्रिया नही कहा जाता हैं। मैं तो यही मानता हूँ। अनुराग जी। जब जिस दोस्त को उसकी जरुरत महसूस होती उसी के साथ ये दोस्त हो लेता हैं।
    यह सच हैं कि हम अच्छे दिनों को " जेरोक्स" करके अलमारी में रख देते हैं। कल ही अलमारी से फोटो निकाल कर पुराने दिन याद किए।
    अगर आप खता नही करेगे तो तकलीफ होगी।
    और खुदा की उम्र हमउम्र ही होगी जी क्योंकि दोस्त जो ठहरा।

    वाह जी वाह नए साल की इतनी बेहतरीन शुरुआत।
    आपके शब्दों का जादू हम पर तो खूब चढ़ता है जी।

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  18. बने क्या बात जो बात बनाए ना बने ! आप दिल , दिल्लगी और बतरस के बेताज बादशाह हैं -नया वर्ष मंगलमय हो !

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  19. पिछ्ले कुछ सालों में एक बहुत खूबसूरत बात की कमी थी, जैसे कोल्लेज में पेहली बार किसी खूबसूरत लड़की के मुंह पर उसके मोतियों जैसे दातों की तारीफ कर देना... ठीक वैसा ही अब कर रहा हूं.. आपके ब्लाग की तरीफ करके...

    लिखते रहिये.. बढते रहिये..

    सर्द रातों में लाल सूरज की तपिश देता है
    एक शख्स जो मुझसे मुझको मिला देता है...

    आदर सहित..

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  20. vllah...! kya lekhni hai.... उसूल स्पीड पोस्ट से डिलीवर होते....अठन्नी में वही खालिस दुआ मिलती ....... एक जोर की सीटी से सूरज नुमाया होता ... सर्द रात पश्मीने का शाल झोपडो पे गिराती ...
    Niraj ji k sabdon ko dohrana chahungi...आप जब शब्दों से खेलते हैं तो हम से पाठकों का मुंह खुला का खुला रह जाता है...वाह...वा..

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  21. बहुत सुंदर.......अच्छा लगा पढ़ कर.....

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  22. अजी किस किस की किस किस बात पर आप शुक्रिया अदा करोगे,अगर हम अपने आप को कर्जदार समझते है, तो हम भी इंसानियत के लिये कोई ऎसा काम कर के, इन सब का शुक्रिया अदा कर सकते है.
    बहुत सुंदर लगा.
    धन्यवाद

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  23. डाक्टरी किस्म का लेख है, थोड़ा मज़ेदार और थोड़ा हक़ीक़त वाबस्ता!

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  24. अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर !
    मैं इसे नए साल की
    बेहतरीन पोस्ट कह सकता हूँ !

    सच्चा-सरल-सार्थक-सोद्देश्यपूर्ण लेखन !

    वो देखिये आपके सवाल पर खुदा के
    चेहरे पर मासूमियत से भरी मुस्कराहट
    उभर आई है !

    धार्मिक मठाधीशों को समर्पित चंद पंक्तियाँ :

    एक रात खुदा ने कहा
    मैं बूढा हो चुका हूँ
    मुझे कुछ याद नहीं
    कभी.कभी तुम्हारी
    किस्सागोई में
    मुझे अपने बारे में
    सुनने को मिलता है
    कई बातें अच्छी हैं
    पर उनमे से कुछ भी
    जोड़ नही पाता
    अपने आप से !!!

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  25. गरीबो को कौन धन्यवाद देने की जहमत उ‌ठाता है ...उससे काम निकल जाए उसके बाद सलाम । यही जमाने का दस्तूर है । ऐसे गिनाए तो गिनते ही रह जाएगे । अपना काम निकल जाए इससे बेहतर आज के जमाने में कुछ नही होता है । खासकर इनलोगो के लिए वक्त किसके पास है ।आपका शुक्रिया । मेरे ब्लांग पर भी आए

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  26. वैसे खुदा की उम्र क्या होगी तकरीबन!
    कैसे कहूं खुदा नहीं करता है मुझको याद
    हर पंगा मेरे साथ ही लेता रहा है वह! (अनुराग शर्मा)

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  27. "गर .....
    अच्छे दिनों को " जेरोक्स" करके अलमारी में रखा जाता ......
    ...उम्र खुदा होता ....
    जिंदगी किस कदर आसां होती !"
    Bahut achcha likha hai. Yeh baat alag hai ke Zindagi asaan hi hai, xerox ke chakkar mein na rahe toh!

    Naye saal ki shubhkaamnaayein! Wish you a very peaceful and contented new year.

    (Khaalis dua hai ji, athanni speed post se bhej denge? :-) ... on a lighter note!!)

    God bless
    RC

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  28. bahut khub....waise khuda ki umra aadmi ke umra se jyada na hogi!

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  29. कुश के शब्दों में..."निःशब्द" मैं भी

    क्या लिखते हो डाक्टर साब आप भी,उफ !!!
    तारिफों में कुछ कहना बेमानी होगा सब....

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  30. अनुराग जी,
    आपकी पोस्ट लाजवाब है .....खुदा तो शायद हमउम्र ही होगा ....हमारे अन्दर ही तो बसता है !!!

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  31. अनुराग भाई,

    क्या खूब लिखते हो,
    बडा सुँदर लिखते हो!! :)

    "आसमाँ पे है खुदा,
    और ज़मीँ पे हम,
    आजकल वो इस तरफ,
    देखता है कम "

    काश देखेँ
    और
    उनकी दया, करुणा और कृपा
    हर तकलीफ दूर करे -
    पश्मीने की
    रेशमी गरमाई की तरह
    और गर्माई रज़ाई की तरह,
    देर सबेर,
    अलसाई, उनीँदी
    कातिलाना नज़रोँ की तरह ~~~~

    आपको सपरिवार नव वर्ष मेँ अनेकोँ शुभकामनाएँ
    तथा आपकी लेखनी
    यूँही चलती रहे
    यह शुभकामना
    बहुत स्न्हे सहित,
    - लावण्या

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  32. --अच्छे दिनों को " जेरोक्स" करके अलमारी में रखा जाता .........रफी का गाया एक गीत याद आ गाया --दिन जो पखेरू होते पिंजरे में मैं रख लेता -पालता उनको जतन से -मोती के दाने देता......

    --और ... कोई हम उम्र खुदा होता ....दोस्त बना लेते उस को और
    भूल भुलैय्या से जीवन की राहों का अता पता आसानी से मिल जाता !
    आप की कल्पना की उड़ान बहुत ऊँची और अनूठी है!
    -त्रिवेणी बहुत सुंदर है...
    -ब्लॉग पेज पर गिरती बर्फ[???][मालूम है उत्तर भारत में सर्दी जोरों पर है....]
    या जो भी कुछ भी है...बहुत प्यारी और अनूठी लग रही है..
    -नए साल के लिए आप के और आपके परिवार में सभी को ढेर सारी शुभकामनायें.

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  33. ...और यादें पेंसिल से लिखी होती, तो जब जी चाहा ईरेज करके फिर ठीक कर लिया करते। अनुराग बहुत सही लिखा है क्या त्रिवेणी और क्या पोस्ट। नये साल की बहुत बहुत शुभकामनायें।

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  34. bahut behtareen likhte hain aap
    nav varsh ki hardik shubhkamnaye.

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  35. कौन से खुदा की उम्र बताई जाये? उसका हाईस्कूल का सर्टिफ़ेकेट देखा जाये!

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  36. खता करते करते उम्र गुजार दी
    यूं भी खुदा ने गुजारे हैं सफर तेरे लिए

    तरकीबों से उम्र पूछना आप से सीखेंगे जनाब

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  37. या खुदा!.... आपने भी क्या खूब फरमाया!.... बहुत अच्छी अनुभूति हुई, धन्यवाद!.... नूतन वर्ष की शुभ कामनाओं सहित...

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  38. बेहतरीन पोस्‍ट। एक एक शब्‍द मानों सांचे में ढले हों।

    ''गर .....
    अच्छे दिनों को " जेरोक्स" करके अलमारी में रखा जाता ...... जमीर की खरोंचे डेटॉल से साफ़ होती .....उसूल स्पीड पोस्ट से डिलीवर होते....अठन्नी में वही खालिस दुआ मिलती ....... एक जोर की सीटी से सूरज नुमाया होता ... सर्द रात पश्मीने का शाल झोपडो पे गिराती ... ओर ........ओर ... कोई हम उम्र खुदा होता ....
    जिंदगी किस कदर आसां होती !''

    काश..नए साल में थोडा़-थोड़ा भी ऐसा हो पाता...आपकी, हमारी और सभी की जिंदगी में।

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  39. अच्छे दिनों को " जेरोक्स" करके अलमारी में रखा जाता ...... जमीर की खरोंचे डेटॉल से साफ़ होती .....उसूल स्पीड पोस्ट से डिलीवर होते....अठन्नी में वही खालिस दुआ मिलती ....... एक जोर की सीटी से सूरज नुमाया होता ... सर्द रात पश्मीने का शाल झोपडो पे गिराती ... ओर ........ओर ... कोई हम उम्र खुदा होता ....
    जिंदगी किस कदर आसां होती !

    bahut khoob !!!
    kash!aisa hi ho jaye
    khuda hamumr ho jaye
    zindgi ki adhoori see
    kahani poori ho jaye

    shubh kamna

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  40. बहुत खूब!बेहतरीन पोस्‍ट। एक एक शब्‍द मानों सांचे में ढले हों।!.... बहुत अच्छी अनुभूति हुई, धन्यवाद!.... नूतन वर्ष की शुभ कामनाओं सहित...

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  41. "पढ़ा लिखा अगर होता खुदा अपना
    न होती गुफ़्तगु तो कम से कम
    चिट्ठी का आना जाना तो लगा रहता"

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  42. ब्लॉग पर गिरती ओस सी बर्फ की बूंदे और सवाल खुदा की उम्र का ..अपने आप में ही एक रूमानी एहसास है यह ..नया साल मुबारक ....

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  43. खुदा की उम्र आपसे कम है. जिस दिन आपने महसूस किया, आपके लिए खुदा उस दिन पैदा हुआ. कहते हैं मां का जन्म उस दिन होता है जिस दिन वह एक नई जान को जन्म देती है.

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  44. der se aane ke liye maafi...aur khuda ke baare mein ab humare paas sawalon ke siwa kuchh nahin...uske upar aapne ek sawal add kar diya...vaise naya saal mubarak ho sir g...

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  45. अनुराग जी
    बहूत ही खूबसूरत अंदाज से लिखा है
    औए त्रिवेणी तो कमाल कर गयी

    मुए एरोप्लेन ही होश खो बैठे है "

    पूरी त्रिवेणी गहरा भावः लोए है

    उत्तर देंहटाएं
  46. अनुराग जी
    बहूत ही खूबसूरत अंदाज से लिखा है
    औए त्रिवेणी तो कमाल कर गयी

    मुए एरोप्लेन ही होश खो बैठे है "

    पूरी त्रिवेणी गहरा भावः लोए है

    उत्तर देंहटाएं
  47. har lafz padhke laga jaise kisinejaduu ki chadi ghumadi ho aur ehsaason ko haatho mein thama ho.khuda ki uar nahi pata,magi banane wale ka shukran udhar hai ab tak.kash zindagi aasan hoti par humumar khuda mila nahi dekha nahi.triveni shandar,aap doctor ho ya jadugaar shabdon ke:)

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  48. निहायत खूबसूरती से दिल की बात ...दुनिया की बात ..अनुराग भाई ...डॉ इकबाल ने कहा हैं
    तू इसे पैमाने इमरोजे-फर्दा से न नाप,जाबिदा पेहम रवां हरदम रवां है जिन्दगी..१ इमरोजे[प्रारंभ]२ फर्दा[अंत]३ जाबिदा[शाश्वत ]४पेहम रवां[निरंतर]....बेहद मार्मिक पोस्ट ...बिना लाग लपेट के कहने का अंदाज ...एक आईने की तरह ..हार्दिक बधाई,

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  49. वाह के अलावा कुछ भी समझ में नहीं आ रहा कि क्या लिखूं...... आप कमाल करते हैं अनुराग जी...

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  50. जिंदगी आसां बनाने का नुस्खा सरल और सुंदर सिर्फ़ सम्भव करने की देरी है.. :-)
    और हाँ! त्रिवेणी एरोप्लेन ही नही सभी के होश गवा देती है...

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  51. खुदा की उम्र..? बेहद हसीन खयाल.

    वैसे सर्द रात पश्मीने का शाल झोपडो पर गिराने की राह देखें या खुदी को कर इतना बुलंद के खुद खुदा बंद दरवाज़े से झांक कर पूछे कि बता तेरी रज़ाई कहां है?

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  52. बहुत गज़ब की पोस्ट-नये साल में.

    खुदा की उम्र तो वही होगी जो आपकी है जनाब-तकरीबन नहीं यकीनन!!

    त्रिवेणी धांसू है-सच, ये मुए एरोप्लेन-इंसान चलाता है न!!

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  53. चलते चलते ...
    पिछले साल की खता मुआफ करे...ताकि अगले साल उन्हें फ़िर कर सके.....
    वैसे खुदा की उम्र क्या होगी तकरीबन !
    " जीवन के छोटे छोटे मगर रोमांचक अनुभवो से रूबरू कराते सुंदर शब्द...." कहतें है खुदा हर मासूम बच्चे की मासुमियत मे झलकता है, तो खुदा की उम्र उतनी ही होती होगी ना जब तक एक छोटे से बच्चे की मासूमियत जिंदा रहती होगी..... और शायद खुदा को भी बार बार जन्म लेना पड़ता होगा शायद....."

    regards

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  54. अनुराग साहब आपका अंदाज बेहद अलग है ....लेकिन हर नई पोस्ट मेरे जेहन में यह बात साफ करती जाती है कि आप इंसान बेहद नेकदिल है। वैसे मेरे खुदा की उम्र मेरे बराबर ही होगी...क्योंकि " नानी कहती हैं कि इंसान का भगवान उसके अंदर होता है अपने अंदर बसे इस भगवान की हत्या मत करना।" अभी तक तो मुझे लगता है कि मेरा खुदा मेरे गलतियों से घायल हुआ होगा शायद कई बार उसे खुद की हीलिंग खुद ही करनी पड़ी होगी। लेकिन उनकी मृत्यु नहीं होगी क्योंकि संस्कार हर बार उन्हें मरने से बचा ही लेते हैं।

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  55. 'खुदा ने इंसान बनाया' या 'इंसान ने खुदा को'... ये पता चल जाए तो फिर उम्र भी पता चल जायेगी ! मुझे तो अब दूसरा वाला ज्यादा सच लगता है.

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  56. एक जोर की सीटी से सूरज नुमाया होता..सर्द रात पश्मीने का शाल झोपडो पे गिराती... और...और..कोई हमउम्र खुदा होता..
    जिंदगी किस कदर आसां होती !

    काश...ऐसा सच में होता....
    आप बहुत खूबसूरत ख्याल वाले व्यक्ति हैं...सबकुछ पता चलता है आपके लिखे हुए से.....बेहद ज़हीन...ईमानदार और नेकदिल
    उम्मीद करते हैं ये सब आपके पास ताउम्र बरकरार रहे...

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  57. जब कभी आपको अपना खुदा मिले तो बताईएगा जरूर।.... वैसे मैं जानती हूं कि वह होगा एक इंसान ही। अगर मिला तो।

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  58. व्यस्तता ने इतने दिनों तक आपके ब्लॉग से दूर रखा ...जाने क्या क्या मिस किया होगा! बहरहाल जिंदगी आसान हो या कठिन ये सब हम पर ही तो है! ख़ुशी हमारे अन्दर ही तो बसती है! और खुदा की उम्र का क्या कहूं...कभी कभी तो ये ही तय नहीं कर पाती की वो है भी या नहीं?

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  59. yakinan lajawab...naye saal ka istakbaal aisa hai to yatra kitni sukhad hogi sahaj hi andaza lagaya ja sakta hai.....dhanyavaad dr. sahab shubhkamnayen naye varsh ki.....
    dushyant

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  60. तू ख़तायें करता रह, रे !
    माफ़ करते जाने का सुख भला नसीब तो हो !

    पण, तू ख़ताइच तो नहीं करता, रे !
    तू तो बड़ी ख़ूबसूरत ख़तायें करता है..
    जिन्हें कभी भुलाने को दिल ही नहीं चाहता !
    ज़िन्दे रह.. नाम पैदा करता रह !

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  61. वाह डॉ. साहब आपने कितना ख़ूबसूरत शब्दों में लिखा है। क्या बात है काश! हमें चैक मिलता तो ढाई कदम से बच जाते लेकिन ऐसा कहां होता है बहुत ही शानदार लेख आपको बधाई हो।
    एक बार पुनः आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  64. कल सुबह बहुत ही प्रिय सहेली के फोन से हुई, जो १८ तारीख को अपने सपनो के महल में जाने की तैयारी कर रही थी, घर का एक एक कोना ६२ वर्षीय ससुर जी की मर्जी से बन रहा था, सहेली की हर राय "तुम अभी कुछ नही जानती" के वाक्य से काट दी जाती और वो मुस्कुरा देतीं, उनका उत्साह देख कर। एक दिन पहले रात १० बजे उन्होने सपनो के घर में जाने की तारीख आगे बढ़ा कर २५ कर दी, क्यों कि इसके एक दिन पहले और एक दिन बाद कार्यालयीन अवकाश रहेगा...! और सुबह ८ बजे ऊपर वाले ने उन्हे बिना शह के मात दे दी। उसने अपने शेड्यूल का एक दिन भी नही बढ़ाया। मैने कल अपनी डायरी में लिखा स्तब्ध...! बिलकुल स्तब्ध..!

    और

    ओर ... कोई हम उम्र खुदा होता ....
    जिंदगी किस कदर आसां होती !

    इस बात से थोड़ा कम इत्तिफाक़ रखती हूँ..खुदा तो किसी भी उम्र का हो सकता है....! बूढ़ा, बच्चा कोई भी.....! आपको उसमें खुदा नज़र आ जाये..बस...! जब, जहाँ, जिसमें....!

    उत्तर देंहटाएं
  65. मासूम ख्‍वाहिशों पर हम क्‍यों फिदा न होएं।

    उत्तर देंहटाएं
  66. नये साल की मुबारकबाद कुबूल फरमाऍं।

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  67. naye saal ka sundar aaghaz kiya aapne apni chir parichit shaili mein.:)

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  68. वाह क्या बात है खुदा की उम्र क्या होगी, सुभानअल्लाह

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  69. क्या बात हैं ,आप तो गजब लिखते हैं .कमाल हैं ,इतने कम शब्दों में इतना कुछ ,जितनी तारीफ करू कम हैं .

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  70. "परिंदे तय कर लेगे अपना सफर
    मौसम की दीवानगी से वाकिफ है ..

    मुए एरोप्लेन ही होश खो बैठे है "

    bahut sundar Anurag ji.. Nav varsha ki hardik shubkamnae.. sundar lekh :-)

    Rohit Tripathi

    Free IITJEE Preparation

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  71. अच्छे दिनो क़ी ज़ेराक्स कॉपी ? वो तो हमेशा से यादों क़ी अलमारी में रहती है || हर इंसान को कहते पाएँगे '' मै जब .......साल का था '' या ''...... साल जब मैं वहाँ गया था " वग़ैरह वग़ैरह | हाँ ज़िंदगी क़ी शतरंज पर ' चेक ' के बाद ' मेट 'से बचने क़ी कोशिश करना या उसका इंतिज़ार करना वह भी हंस कर '' ज़िगरे '' का काम है | हर एक का एक ' 'हम उम्र खुदा ज़रूर होता है" और वही तो हमसे कुछ अच्छे काम करा देता है,वरना हर ' ' ' '' इंसान कहता गाड तुसी ग्रेट हो " यानी इंसान और अच्छे काम !?

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  73. "Page load error" ke kaaran bade dinobaad aapke blogpe pohonch payi hun ! Aapke blogpe aksar aapki triveni padhne aati hun jo mujhe stabdh, antarmukh aur khamosh kar detee hai. Maa ko padhwana chaah rahee thee aapki agli pichhalee, jitnee ho sake utni sab rachnaayen, par wo chalee gayin aur aaj jaake aapka blog khula !
    75 comments ke baad mai aur kya likhun ?
    Khudaahi jaane uski umr kya hogee?Shayad aasmaa pe kaheen darj hogee....hame to apni umr dharteeke qanoononke tehet pata hoti hai jise shayad, gar hai to khuda deta deta hai....wahi chunidaa saanse !Jinkaa kaisa istemaaal kiya jay ye hampe nirbhar hai, itnaa zaroor kahungi !
    Apnee maryada qubool karke ab aur aage kuchh kehneka sahas nahee karti...!
    Aatankwaad virodhme chhedee jangme aap sabheeki shubhkamnayen aur saath chahti hun...ummeed hai zaroor milega...

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  74. कमाल किसी चीज का नाम हो तो डा. अनुराग से मिलिये। बड़ें चर्चे है, साहब, आपके ब्लॉगिंग पर। विशेषज्ञ आपको पसंन्द करते हैं। आपके मुरीद हुए जा रहें है, लेकिन शायद सीखा आपसे ही हो। आप भी दूसरों के कम प्रंशसक नहीं। गूलजार के बाद आपको त्रिवेणीयां लिखते हुए पाया हैं। और कमाल कि नापतौल में बराबर उतर रहें हो। मैं उनसे जिक्र करूंगा। आपके लेखन में सादगी के साथ आत्मियता स्वर मुखर है। इसके अलावा जो बहुत सारा पढ़ने के बाद जो ज्ञान अर्जित होता है आप उन गलियों से भी गूजर आए हैं। खुशी है कि मेरठ के ही है। वैसे बन्दा एक बड़ा पोर्टल गुलजारनामा डॉट कॉम के नाम से ला रहा है। आप भी हाथ आजमाएगा, आपका स्वागत है।
    इरशाद

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  75. कमाल किसी चीज का नाम हो तो डा. अनुराग से मिलिये। बड़ें चर्चे है, साहब, आपके ब्लॉगिंग पर। विशेषज्ञ आपको पसंन्द करते हैं। आपके मुरीद हुए जा रहें है, लेकिन शायद सीखा आपसे ही हो। आप भी दूसरों के कम प्रंशसक नहीं। गूलजार के बाद आपको त्रिवेणीयां लिखते हुए पाया हैं। और कमाल कि नापतौल में बराबर उतर रहें हो। मैं उनसे जिक्र करूंगा। आपके लेखन में सादगी के साथ आत्मियता स्वर मुखर है। इसके अलावा जो बहुत सारा पढ़ने के बाद जो ज्ञान अर्जित होता है आप उन गलियों से भी गूजर आए हैं। खुशी है कि मेरठ के ही है। वैसे बन्दा एक बड़ा पोर्टल गुलजारनामा डॉट कॉम के नाम से ला रहा है। आप भी हाथ आजमाएगा, आपका स्वागत है।
    इरशाद

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  76. jyada kitni bhi ho khuda ki umra uski yaaddasht badi selective type ki lagti hai kya pata kis galti ko yaad rakhe kisko bhool jaay

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  77. Hello anurag ji

    ek shikayat hai aapse. pehle aap hamesha comments ke baad ek reply likhte the...but pichhli 2-3 posts se aapne reply likhni hi band kar di hai. Jab aap comments ke baad likhte hain tou it makes it more interesting....coz tht way we r able to understand ur perspective in a better way. So plz do write in the comment column too. I m really missin tht thing.

    Hope u wil start writin back again in the comment column too :)

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  78. क्या बात है.इस अनुराग नाम के डा.का दिमाग कितने कितने तहो को पार कर आ धमका है पोस्ट में .आमीन...

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  79. काफी कुछ तो कहा जा चुका है, बस इतना ही कि‍ बहुत उम्‍दा लि‍खा गया है। नए साल की ढेरों बधाई।

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  80. आज दिनांक 11 जनवरी 2009 को ख़ुदा की उम्र अट्ठाईस साल 9 महीने और 10 दिन है
    हमने कैलकुलेशन कर ली है

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  81. ना मौका देखते है ना तारीख ...ना सर्द हवाए इन्हे रोकती है ना लू के गर्म थपेडे .....गम है की ....बढे चले आते है....बेनियाज ..बिना कोई छुट्टी की दरखवास्त दिए ...इसलिए सोचा की साल की पहली पोस्ट किसी पोसिटिव नोट पर लिखूं .....मेहता अंकल का फोन आया तो इरादा पक्का हो गया ...गुलज़ार की आवाज मेरे मोबाइल में हमेशा कैद रहती है...".पिया तोरा कैसा अभिमान ".चोखेर बाली मूवी का गाना कागजो पर आडी तिरछी कई लकीरे खीचने में मदद करता है......अलमारी को सहेजते सहेजते उनकी एक नज़्म ओर हाथ लगी...... ख़याल बेलगाम हो गए ...
    पहले सोचा था की की साल भर मिले कुछ कमेन्ट जो शायद पोस्ट से भी बेहतर थे उन्हें सिलेवार लगा कर गुफ्तगू करूँगा .पर शायद सबको समेट पाना मेरे बस में नही था ...उन्हें पढ़ते पढ़ते लगा .... जैसे जिंदगी ने सब के भीतर किसी किरदार को संजीदा किया हुआ है.... ओर कुछ किरदारों को आप पहचानने लगे है.....कम्पूटर के परदे भी जैसे ...अब कई रिश्तो की खिड़किया खोलने लगे है.....
    बंगलौर से लौटा हूँ.....कई अहसास लिए ...चाहे वो मैसूर के चामुंडी देवी के मन्दिर हो जिसमे २० रुपये देकर आप अलग लाइन में दर्शन करते है..या ....इस्कोन के भव्य मन्दिर जहाँ १५० रुपये के पास है....ओर मन्दिर सोने के कपाट के है....लेकिन सच पूछे तो इन मंदिरों के सच्चे भक्त वही है जो नंगे पैर कई किलोमीटर के सफर करके चामुंडी देवी के मन्दिर में आते है...ओर तमाम दुकानों ओर व्योपार को नजरअंदाज करके घंटो लाइन में खड़े रहते है ओर हम जैसे सो कॉल्ड लोग जिनकी श्रद्धा शून्य है उन लोगो के आगे डिजिटल कैमरे में फोटो उतारकर दर्शन करते है..ओर गुनाहों के रिचार्ज कूपन खरीदते है....देखिये फ़िर सीरियस हो गया .....


    खैर इन गमो से बेनियाज लड़ना है ओर रोज हौसलों की मीलो उड़ान भरनी है...ओर अपने आस पास खाली जगहों को खुशी से किसी भी तरीके से भरना है.... यही उम्मीद करते है.....
    शुक्रिया

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  82. 'सच पूछे तो इन मंदिरों के सच्चे भक्त वही है जो नंगे पैर कई किलोमीटर के सफर करके चामुंडी देवी के मन्दिर में आते है...ओर तमाम दुकानों ओर व्योपार को नजरअंदाज करके घंटो लाइन में खड़े रहते है'

    सौ टके की बात.यदि दर्शन से कोई पुण्य मिलता है तो इन्हीं भक्तों को मिल सकता है.

    उत्तर देंहटाएं
  83. khuda ke khuda hone mein hi to baat hai..kam se kam kareebi logon ki tarah unko kuch waqt mein kho dene ka darr to nahi.dil chhoone wale khayal hai..

    उत्तर देंहटाएं
  84. आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

    ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

    उत्तर देंहटाएं
  85. आपकी रचनाधर्मिता का कायल हूँ. कभी हमारे सामूहिक प्रयास 'युवा' को भी देखें और अपनी प्रतिक्रिया देकर हमें प्रोत्साहित करें !!

    उत्तर देंहटाएं
  86. क्या खूब लिखा है दोस्त .अंदाजे बयां दूसरा लगता है .मुंबई हमले से उद्वेलित होकर लिखे मेरे गीत पर भी अपनी बेबाक राय दे तो उपकार होगा

    उत्तर देंहटाएं
  87. मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
    मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

    -----नयी प्रविष्टि
    आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

    उत्तर देंहटाएं
  88. Wah Anurag ji idhar aap mandiron k darsan me mashgool the aur udar Tau ji aapke clinic k bahar marijon ko dekhne me....main bhi unhen aage badhte rehne ki dua di hai dekhen unke blog pr.....aur haan aapki tipanion ka satak pura hone wala hai....BDHAI!

    उत्तर देंहटाएं
  89. आपको लोहडी और मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ....

    उत्तर देंहटाएं
  90. बहुत ख़ूब

    ---
    आप भारत का गौरव तिरंगा गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने ब्लॉग पर लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

    उत्तर देंहटाएं
  91. "दस्तूर किसी मजहब का ऐसा भी निराला हो
    एक हाथ में हो इल्म ,दूजे में निवाला हो "
    shaandaar sir...rajayi wale ka shukriya to ab ki baar ghar jaunga, tab karunga, lekin aapne itna acha likha to sabse pahle aapko shukriya. keep in touch

    उत्तर देंहटाएं
  92. अनुराग जी बहुत ही भावपूर्णं पोस्ट है।

    उत्तर देंहटाएं
  93. आपने कभी उस आदमी को शुक्रिया कहा है ......... जिसने रुई के टुकडो को चद्दर में लपेट कर रजाई नाम की ये खूबसूरत शै इजाद की .... .... ऐसे कितने शुक्रिया उधार है हम पर ...

    kya baat kahi !

    ....तय करना मुश्किल है कि गुजरे सालो में .जिंदगी मुश्किल हुई है या इंसान ....

    Aapko pata chale to hum sab ko bataiye.

    उत्तर देंहटाएं
  94. anuraag ji , thoda hamen bhi apne jaisa likhna sikha dijiye ...

    shabd ji uthen hai ...

    गर .....
    अच्छे दिनों को " जेरोक्स" करके अलमारी में रखा जाता ...... जमीर की खरोंचे डेटॉल से साफ़ होती .....उसूल स्पीड पोस्ट से डिलीवर होते....अठन्नी में वही खालिस दुआ मिलती ....... एक जोर की सीटी से सूरज नुमाया होता ... सर्द रात पश्मीने का शाल झोपडो पे गिराती ... ओर ........ओर ... कोई हम उम्र खुदा होता ....
    जिंदगी किस कदर आसां होती !

    ultimate bhai ..kudos to you yaar.

    vijay

    उत्तर देंहटाएं
  95. anuraag ji

    aapki is line ne , mujhe kuch likhne ko kaha hai ..

    वैसे खुदा की उम्र क्या होगी तकरीबन !

    le sakta hoon ?

    vijay

    उत्तर देंहटाएं
  96. hi..
    sir
    maine aapka "khuda" wala lekh padha...
    aap to kamaal ka likhte hain...
    Aage bhi likhte rahiyega....
    aap ke sukhad bhawishya ki kaamna..

    उत्तर देंहटाएं
  97. खुदा की उम्र तो नही जानती पर सुना है कि खुदा हमारे अन्दर है फिर हम इतनी बडी बडी गलतियाँ कैसे कर जाते है .कैसे बिल्ली के आने पर खुद पीछे होकर किसी और का आने का इतंजार करते है।शायद यही खुदा और उसकी दुनिया का दस्तुर है।

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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