2016-07-31

Dcember notes part 2


उसे S .L. E है , वो हंसकर कहती है
"ऊपर वाले ने तमाम उम्र दवाओ के पैकेज के साथ भेजा है "
पर चीज़े उतनी आसान नहीं है जितना बाहर वालो को लगता है ,उसकी बीमारी अपनी कैफियत  मुसलसल  बदलती रहती है बावजूद तमाम दवाइयों के !
इस बीमारी में उसे ताउम्र दवाई लेनी पड़ेगी !
"मेरी बीमारी भी मेरी तरह अनप्रेडिक्टबल है" उसकी मुस्कराहट अब भी कायम है , ब्लड और यूरिन रिपोर्ट में डिस्टर्ब पैरामीटर है ! मैंने उसे उदास कम ही देखा है। इस बीमारी में जब सर दर्द से फटा हो और रेशेस पूरी बॉडी पर हो। तब भी वो कहती है
"ऐसा लगता है ना जैसे किसी ने सुर्खी पाउडर लगा लिया हो वो भी सस्ता वाला !"
पल्स थेरेपी  के दौरान जब दूसरे मरीज निढाल पढ़े होते है ,वो हॉस्पिटल के बिस्तर पर कहती
"अगली पल्स सन्डे को मत रखियेगा ,टी वी पर मेरा कूकरी शोज है !"
मेरा रयूमटोलॉजिस्ट दोस्त मेरी और देखता ! कुछ महीने बाद वो एलान करती है
"डॉ साहब मुझे बेबी करना है और आपके दोस्त (रयूमटोलॉजिस्ट) मना कर रहे है"
"बड़ी मुश्किल से आप रिमीशन फेज में पहुंची है ,थोड़ा सब्र कीजिये बीमारी बढ़ सकती है" मै समझाने की नाकमायब कोशिशे करता हूँ !
---------------------------------------------------

7 महीने की प्रेग्नेंसी में वो तमाम मुश्किलो से जूझती है फिर अचानक बी पी शूट अप !
"आपकी टीम में एक नया प्लेयर आया है" वो नेफ्रोलॉजिस्ट को देखकर कहती है
हमेशा सीरियस रहने वाला मेरा रयूमेटोलॉजिस्ट दोस्त बाहर निकालकर कहता है
" कमाल है ये लड़की भी" !
प्री टर्म डिलिवरी !
बच्चा इनक्यूबेटर में !
21 दिन बाद गायनेकलॉजिस्ट मुझसे कहती है" अनुराग इसकी विल पॉवर में ही ऐंटीबौडीज़ है , मुझे तो खामखाँ क्रेडिट मिल रहा है "
बच्चा भी सर्वाइव कर जाता है !
लड़ने का हुनर उसकी रगो में जो है !
पांच रोज पहले वो फिर क्लीनिक में दाखिल हुई है !
"आप अपनी टीम दोबारा असेम्बल कीजिये ,मुझे फिर माँ बनना है " !
मै उसके पति  को देखता हूँ ,उसकी हिम्मत शायद वही से आती है ! कम बोलने वाला वो शख्स कितनी शिद्दत से उसके साथ है ना !
-------------------------------------------------------

मै ऐसे कितने लोगो को जानता हूँ जिन्होंने अपनी तंदरुस्त ज़िंदगी शिकायतों में बेतरतीब सी गुजार दी है, बिना किसी ख़्वाब की ताबीर किये ,बिना कोई नेकी खर्च किये !
और ये दिसम्बर !! 
अपनी कैफियत नहीं भूला !
तजुर्बे ठंडी हथेली पर रख रहा है !
जीने के हुनर सिखा रहा है 

December notes part one


"वो खूबसूरत थी और इसे बात का इल्म भी था ,हर खूबसूरत शख्स को होता है। हमारे कॉलेज की छुट्टी उसके कॉलेज से कुछ पहले होती थी, उस मोड़ पर उसके आने के वक़्त से कुछ देर पहले मै वहां पहुँच जाता ,वो जानती थी मै वहां उस कोने में किसलिए खड़ा हूँ ! उस उम्र में इतनी तवज़्ज़ो अच्छी लगती है!
वो इस तवज़्ज़ो को एक्नॉलेज करती और तिरछी आँखों से मुझे देखते हुए मुस्कराते अपनी सहेलियों के साथ निकल जाती।
कुछ आँखों को काजल बहुत फबता है ! उसकी आँखे उसके चेहरे में सबसे ज्यादा बोलती थी, मै उन आँखों के लिए 5 किलोमीटर साइकिल चला कर रोज वो कोना पकड़ता "
वो ,चाय के घूँट भरता है उसका यूँ " पॉज़ "लेना मुझे खलता है ! मैंने इस दौरान एक इमेजनरी स्केच खींच लिया है।
फिर ?
"उस रोज मै थोड़ा पहले पहुँच गया था ,मेरी साइकिल में पंक्चर भी था ,मै कोने से थोड़ा पहले पंक्चर वाले से पंक्चर लगवा रहा था। अचानक वो आती दिखी अपनी सहेलियों के साथ ,उस रोज उनके ग्रुप में कोई एक लड़की और थी ,जिसके पैरो में उतनी चुस्ती नहीं थी वो एक हाथ से अपने एक पैर को दबाती फिर आगे कदम बढ़ाती । वो पीछे रह गयी थी ,ऐसा लगा जैसे वो उन्हें आवाजे दे रही थी के वे अपने कदम थामे ,पर आगे वाली लड़की जैसे सुन नहीं रही थी। मै एक खम्भे की ओट में था। उस एक पॉइंट पर सड़क एक सी नहीं थी सो पीछे रह गयी वाली लड़की जैसे बेलेंस संभाल नहीं पायी और गिर पड़ी !
आगे वाली तीनो लडकिया जोर से हंसी ,वो भी , उसने अपनी दोनों सहेलियों से कुछ कहा और उसके हँसते हँसते मेरी उसकी आँखे मिली !
उस रोज पहली दफा उसकी आँखे मुझे खूबसूरत नहीं लगी !
उस दिन के बाद से मै कभी उस मोड़ पर दोबारा नहीं गया !"
वो फिर कुछ सेकण्ड के लिए खामोश हो गया है ! अपनी चाय का आखिरी घूँट भरता है
मेरी चाय भी ख़त्म हो गयी है !
"अजीब बात है ना फकत एक सेकण्ड में आदमी आपके दिल से उतर जाता है ,फकत एक सेकण्ड में " नहीं मालूम वो मुझसे पूछ रहा है के बता रहा है !
मुझे सिगरेट की तलब लगी है !
दिसंबर के पास कई तजुर्बे है








किसी सानेहा के इंतज़ार में !!

स्कूल की छुट्टी के वक़्त  माँ गेट पर खड़ी है कुछ कुछ तैयार सी। रिक्शे में वो मुझे अपने साथ लाये परांठे खिलाती है और याद दिलाती है मैंने कब  "गुड आफ्टरनून" बोलना है । रिक्शा दूर तक चलता है माँ ने मेरी कंघी कर दी है और गीले रुमाल से मेरा मुंह भी साफ़ कर दिया है।
ये बड़ा सा स्कूल है जिसके गेट के बाहर दो चौकीदार है ड्रेस में  । बड़ी मुश्किल से वो हमें अंदर जाने देते है । उस स्कूल में सब कुछ साफ़ सुथरा है । रंग बिरंगे गमले। माँ प्रिंसिपल से मिलना चाहती है । कोई हमें ऑफिस के बाहर बेंच पर बैठने को कहता है । हम देर तक बैठे रहते है फिर कुछ देर बाद एक आदमी आकर कहता है
"कल मिलेगे"
हम तीन दिन तक रोज यही करते है । माँ रस्ते में मुझे "गुड आफ्टरनून "बोलना याद कराती है और रोज कंघी करती है । हम रोज बिना मिले वापस आ जाते है ।
दादी नाराज है,  दादी हमेशा माँ से नाराज रहती है । माँ को कितना कहती है पर माँ कभी कुछ नहीं कहती पापा से भी शिकायत नहीं करती । पर दादी रोज पापा से शिकायत करती है । दादी कहती है वो स्कूल महंगा है दूर भी है । पांचवे दिन प्रिंसिपल सर मिल जाते है ।
मैं उन्हें "गुड आफ्टरनून "कह देता हूँ । माँ उनसे कुछ रिक्वेस्ट कर रही है वे मना कर रहे है ।मां मेरे पुराने स्कूल के रिजल्ट एक फ़ाइल में रखकर लायी है । वे कुछ देर उन्हें देखते है फिर कुछ सवाल पूछते है ।मैं सबके जवाब दे देता हूँ । वे घंटी बजाकर किसी को बुलाते है । माँ दूसरे ऑफिस में मुझे ले जाती है । मैं बाहर बोर्ड पर लिखे इंग्लिश के कोटेशन पढ़ने लगा हूँ । माँ उन अंकल से बात कर रही है । कितना साफ़ सुथरा और बड़ा बड़ा लिखा है ना। रिक्शे से लौटते वक़्त माँ किसी किताब की दूकान पर रुकी है ।उन्होंने कुछ किताबे ली है ।अगले हफ्ते मेरा टेस्ट है ।रात को माँ को नयी किताबो में उलझा देखता हूँ ।  सुबह मेरे उठने से पहले माँ रोज उठ जाती है पर आज टेबल पर किताबे खुली पड़ी है । दो दिन तक माँ की डांट पढ़ने पर पड़ती है । दादी माँ को पढ़ने पर क्यों डांटती है । मैं सोच रहा हूँ माँ सोती कब है ।
दो दिन बाद माँ मुझे नया नया सब सिखाती है । मेरी पसंद की खीर भी बनाती है और आलू शिमला मिर्च की सब्जी भी । अगले हफ्ते मैं स्कूल से छुट्टी लेकर दूसरे स्कूल में टेस्ट देंने जाता हूँ । सारे सवाल मुझे आते है । दो दिन बाद माँ फिर मुझे स्कूल में लेने आई है । सबके सामने मेरा माथा चूमती है । मेरा नए स्कूल में एडमिशन हो गया है ।
माँ आज बहुत खुश है ।
माँ जब खुश होती है तो कितना अच्छी दिखती है

यकीनो के ग्राफ्स


इंजियरिंग कॉलेज में मेरा चौथा समेस्टर है । कुछ दिनों से पीठ में दर्द है ,दर्द अब बढ़ने लगा है
एक रोज सुबह मुझसे उठा नहीं जाता । पापा मुझे लेने आये है । कितने टेस्ट ,कितने एक्स रे। डॉ कहते है मुझ अब बिस्तर पर प्लास्टर के साथ रहना पड़ेगा।दादी रो रही है । मैं बिस्तर पर हूँ । सारा दिन लेटा रहता हूँ ।माँ कुर्सी पर मेरे सामने बैठकर गीता पढती है । सारा दिन गीता पढ़ती है
कभी कभो मेरे आंसू निकलते है तो पोंछ देती है । अब वो कुछ श्लोको का अर्थ भी समझाने लगी है ।
दिन रात जब भी आँख खुलती है माँ को कुर्सी पर बैठा पाता हूँ ।माँ मेरी पंसन्द की खीर भी बनाती है ,ताई जी ,बुआ जब मेरे आगे रोती है के मैं अब ठीक नहीं हूँगा माँ उनसे झगड़ पड़ती है । दो महीने बीत गए है ऐसा लगता है मैं बरसो से हिला नहीं हूँ ।मैं माँ से पूछता हूँ क्या मैं ठीक नहीं हूँगा
माँ मुस्करा देती है और कलेंडर की तारीख पर लगा लाल निशान दिखा देती है । वो मेरे पैरो की उंगलियो की मालिश करती है और हाथो को कई बार उठवाती है ।
कलेंडर की तारीखे रुक गयी है ।माँ नया रेडियो लेकर आई है ।बी .बी .सी से लेकर सब स्टेशन पूछ कर लगाती है । ताई और बुआ को मैंने कई रोज से घर पर नहीं देखा। दादी माँ को उसी के लिए कुछ कह रही है ।
इतने सालो में पहली बार माँ ने दादी को कुछ कहा है ।
माँ ने कई सारी किताबे इकठ्ठी कर ली है ।रोज एक कहानी उसमे से सुनाती है । सच्ची कहानी । हिम्मतो की कहानी ।
"जब ठीक हो जायूँगा माँ तो तेरी भी कहानी मैं लोगो को सुनाऊंगा" मैं माँ से कहता हूँ ।
माँ बस मुस्करा देती है । पापा इन दिनों खामोश से हो गए है ।आजकल मेरी आँखों में देखते नहीं ।जब आँखे बंद कर लेटा रहता हूँ तब मेरे पैर सहलाते रहते है । एक रोज मुझे सोया जान कर चुप चुप रोते है माँ से पूछते है "मेरा बच्चा ठीक भी होगा "
माँ उन्हें भी संभालती है ।
मैं बिस्तर में पडा रोता हूँ।
अगले रोज माँ अपनी दोनों टाँगे खोये पाइलट की कहानी मुझे सुनाती है ।उसने अपनी आर्टिफिशियल टांगो से दोबारा फाइटर प्लेन उड़ा लिया है ।उसकी लंबी कहानी को माँ एक सीटिंग में सुना देती है । कई दिनों बाद मुझे अपनी रीढ़ की हड्डी में सरसराहट महसूस होती है ।
रात को मेरी आँख खुलती है ।
माँ मैं कुर्सी पर सोई माँ को आवाज देता हूँ ।
वही कहानी वापस सुनाओगी
आधी रात माँ वही कहानी वापस सुनाती है ।
कलेंडर की कई तारीखों बाद मैं अपने पैरो पर खड़ा हो गया हूँ ।
______________
इतने सालो बाद डॉ कहते है उन्हें पार्किंसंस हो गया है ।मैं मेडिकल साइंस की गलियो में उम्मीदे ढूंढ रहा हूँ । मै माँ के लिए कुछ करने को छटपटा रहा हूँ
मैं माँ को गीता सुनाने बैठा हूँ।



(एक  दोस्त की ज़िन्दगी से , असल ज़िन्दगी से    ,बिना उसकी इज़ाज़त के  )

2015-10-20

Incubation Period



एक्सीडेंट
______________


उसे सिगरेट की स्मेल से नफरत थी,
वो हर दो घंटे बाद एक सिगरेट पीता था !
उसने कभी किसी गाने को रूककर नहीं सुना था,
वो गुनगुनाते हुए मोटरसाइकिल चलाता था वो भी बहुत तेज!
वो हर काम में संजीदा थी,
 उसकी फितरत में लापरवाही थी!
वो  बहुत खूबसूरत तो नहीं थी पर उसे इग्नोर नहीं किया जा सकता था,
उसे किसी  हैंडसम तो नहीं कहा पर बुरा भी नहीं कहा !
उसकी ज़िंदगी में बहुत ज्यादा लोगो  की आमद नहीं हुई थी,
वो हमेशा दोस्तों में मसरूफ रहता था  !

इंटर्नशिप के आखिरी 15 दिन थे। यार लोग नए ठिकानों की  तलाश में थे जहाँ सर जोड़कर बैठा जा सके ,  ऐसी नौकरी जो  रोजमर्रा के खर्चे  पानी जुगाड़ कर ले  का और इतनी सहूलियत भी दे  कम्पीटिटिव एक्ज़ाम की तैयारी भी जा सके।  कैंटीनों ,पान वालो के पुराने हिसाब टटोले जाने लगे थे  और  हॉस्टल भर में बिखरी  किताबे इकठ्ठी करी जा रही थी। नयी चुनोतियो का खौफ भी था और शहर छोड़ने की कसक भी।

 खुदा के भी कुछ प्लान थे !
शहर से 30  किलोमीटर दूर दोनों को  15 दिनों में एक   प्रोजेक्ट  मुकम्मल करना था   । वे जानते थे इस प्रोजेक्ट को किये बगैर उन्हें कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा !  उस डिपार्टमेंट की "हेड" जरुरत से ज्यादा डिसिप्लीन थी  .

 अपनी सहेली को उसने कहा था  "smell of disappointment "

थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी
_____________________

उसने कुछ रुल बनाये

टाइम डिसिप्लीन !
नो स्मोकिंग !
नो फास्ट ड्राइविंग !
हेलमेट कम्पलसरी !
etc etc
 और उसे रुल कभी याद नहीं रहते  !
 वापसी में उसकी मोटरसाइकिल से उतरते वक़्त उसने उसके हाथ में बना टैटू देखा था !
उसकी सहेली ने फिर उसके मुताल्लिक पूछा
 उसने फुसफुसा कर कहा  " कुछ कोम्प्लिकेटेड सा है  "
 सुनकर वो हंसा था ,  उसके दांत बहुत उजले थे ,सिगरेट पीने के बावजूद !

difference of opinion
-----------------------

उस रोज सूरज लापता था ,वो भी। बीस मिनट इंतज़ार के बाद वो हॉस्टल पहुँच गयी ,उसका रूम पता करना मुश्किल नहीं था। बेतरतीब से बालो में , शर्टलेस उसने दरवाजा खोला था ,कितना गुस्सा हुई थी वो पांच मिनट तक। वो   मुह धोकर उन्ही बेतरतीब बालो में  चुपचाप नीचे उतर आया था।
हेलमेट लेकर!
 फिर भी उसने  उसके  दरवाजे पर लिख दिया था
"graveyard of ambitions "
 अगले रोज बारिश है
पर वो दस मिनट पहले से खड़ा है ,हेलमेट के साथ !
बारिश तेज हो गयी है वे  एक ढाबे पर रुके है
कल की ख़ामोशी उनके दरमियान अब भी है
"तुम पियोगी "वो चाय मंगाने से पहले उससे पूछता है
चाय अच्छी है
वो मुस्कराता है
"तुम्हारे कमरे का पोस्टर अच्छा है "
पिछले दो सालो से मेरे साथ है ,कमरा बदला तो इसे ले आया
तुम लोगो को पोस्टरों से बहुत लगाव होता है
तुम लोगो को ?
आई मीन "लड़को" को
पुरानी रवायतें है
वो उसे देखती है
ट्रेडिशिन है ,पुराने कई सौ साल पहले। फिर वो सांस लेता है “दिल बहलाने की तरकीबे है ,लड़को की ज़िंदगी में सौ गम होते है”
"लड़को की ज़िंदगी में"
"हाँ मेस का खाना देखोगी तो पाकिस्तान से ज्यादा मुश्किल प्रॉब्लम लगेगी ,रात को खाना खाने जाते है तो कोई "सस्पेंस" जैसी चीज़ नहीं होती पता होता है क्या मिलेगा"
"ओह कम ऑन" !
"धोबी को जींस दो तो वो मैल  समझ कर तब तक धोता है जब तक  उसका कलर ना निकले "
कम ओन अगैन  !
"देखा कुछ गमो को दरअसल "गम" समझा ही नहीं गया "
"तभी टी शर्ट “ही” पहनते हो !"
वो पिछले तीन दिनों से सिर्फ टी शर्ट ही पहन रहा है !
 वापस लौटते हुए वो कहता है
"वैसे कल चाय भी दोपहर बाद नसीब हुई "
  "सॉरी मै कल ज्यादा ही कह गयी"
(बारिश शायद आदमी के मिज़ाज़ पर भी कोई असर करती  है)

 कोई नहीं कुछ दिन बैटमैन के जोकर की तरह होते है ,वैसे भी हॉस्टल वालो की मोनोटोनस ज़िंदगी में एक दिलचस्प शब्द तो आया
क्या ?
"graveyard of ambitions "
वो हंसी है। उसके दांत भी बहुत उजले है

Law of Attraction
-----------------------

 उस दिन बारिश नहीं है फिर भी वे ढाबे पर रुके है।
तुम थियेटर देखती हो "
"नहीं रे ,मै बोर होती हूँ इन सब चीज़ो से "
" तुम्हारा शहर खुशकिस्मत है । इसके पास एक नदी है ,एक लाइब्रेरी और एक थियेटर जिसमे "प्ले "होते है  शहर भी ना आपको बनाता है ,उसका भी हाथ होता है आपके बनने में "
वो उसे गौर से देखती है, शायद पहली मर्तबा !
"तुम अपने शहर को मिस करते हो ? "
नोट रियली , कुछ चीज़े  , पीछे छूट गयी चीज़े .... हमेशा याद रहती है
"जैसे की ? "
"बेवजह की चीज़े पोस्टऑफिस ,खेल का मैदान ,म्यूज़िक क्लास रूम ….. तभी बूढ़ा होकर इंसान ना इमोशनल होने लगता है खामखाँ  !  शायद उसके पीछे छूट गयी चीज़े बहुत ज्यादा हो जाती है "
"तुम यहाँ आना रेपेन्ट करते हो "
"नहीं यार , हॉस्टल भी ना एक किस्म का स्कूल होता है  ,ज़िंदगी का स्कूल !  इस स्कूल से आप को  मोहब्बत होती है जो ताउम्र रहती है ! "
"तुम उतने कॉम्लिकेटेड नहीं जितना मैंने सोचा था "
"मतलब ?? "
"मतलब बहुत ज्यादा कॉम्पिलकेटेड हो ! "


Fatal attraction
_______________________

उस रोज  सुबह मम्मी  अपने उस हिस्से में है जो उसे "ऑफ "कर देता है !
शादी का मसला !
शादी शायद माओं की इनसिक्योरटी को और इंटेंस करती है और एक चेन रिएक्शन पैदा करती है जो इमोशनल भी होता है और ट्रॉमेटिक भी. गुस्से में वो बिना कुछ खाये पिए चली आयी थी। ठीक है लड़का गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट की पी. जी कर रहा है पर उसे भी तो आगे पढ़ना है उसका भी तो कैरियर है. मम्मी को डर लगता है लड़के का मन बदल गया तो ? कैसे बदल जायेगा मन ?
 उसे गुस्सा आता है .
“और मेरा बदल जाये तो “वो मम्मी से कहती  है
मम्मी उसे जोर से डांट लगाती है ,पापा चुपचाप  सब सुनते हुए भी इग्नोर करते है !
पापा ऐसा क्यों करते है ?? 
 चेहरा बिना कही चीज़ो को भी कह देता है .वो उसी ढाबे पर मोटरसाइकिल रोक रहा है !
वो खीजी हुई है ,पापा क्यों ऐसे समय चुप हो जाते है उन्हें कुछ बोलना चाहिए !
सराउंडिंग से अलहदा वो अपनी सोचो में है लड़के की  कंफर्टबलटी क्यों तय करे अब इंगेजमेंट होनी और और अब शादी  . फिर जैसे बाहर फूट पड़ी है
"ऐसा क्यों है के लड़कियों के लिए शादी इतनी प्रायर्टी पर क्यों है ?? "
उसकी टोन उसे चौकाती है .उस सवाल में मौजूद  तल्खी को वो पहचान रहा है !
"तुम्हे नहीं लगता हमारी सोसायटी में शादी के मामलो में "male " की "say " है ?
तल्खी बरकरार है !
 "तुम कुछ सुन रहे हो या  नहीं ?? "
हुम्म !!
"ओह ! तुम ज़िंदगी में  कभी किसी बात पर कभी सीरियस रहते हो या नहीं ?????   तुम रहोगे  भी क्यों "मेल " जो ठहरे"
"इसलिए मै लव मेरिज में बिलीव करता हूँ " वो ऑमलेट को ब्रेड में रख  रहा  है !
उसकी इस किस्म की एक्टिविटी उसे ऐसा महसूस करा रही जैसे वो इस बातचीत को लेकर  संजीदा नहीं है   ! उसका गुस्सा बढ़ रहा है
 "लव मेरिज  !! "
यस !!
"लव" !  माय फुट !
 इस दफे आवाज का स्केल थोड़ा ऊँचा है.
"तुम्हे एक और चाय की जरुरत है " 
छोड़ो तुम नहीं समझोगे , ज़िंदगी  सिगरेट ,हंसी मजाक  दोस्ती और अलग अलग समय पर अलग अलग गर्लफ्रेंड्स से बाहर की चीज़ है ! "
 I am not getting  ,"तुम क्या साबित करना चाह रही हो" अपने ऊपर हुए इस पर्सनल अटैक ने उसे नाराज कर दिया है।  उसकी  पिछली ज़िंदगी में दो लोगो की आमद दर्ज है !
तुम क्या जानती हो मेरे बारे में ? कितना जानती हो ? हर आदमी एक सा नहीं है ,एक सा नहीं रहता  .मै अपनी ज़िंदगी उसी तरह से जीना चाहता हूँ जैसे मै सोचता हूँ   ! मेरा आस पास मुझे कैसे देखेगा ये सोचकर नहीं। और  रिलेशनशिप में कोई फिक्स्ड रुल नहीं होते  ,हर आदमी के अपने ज़ोन होते है जो चीज़ तुम्हे अट्रेक्ट करे  वो शायद मुझे नापसंद हो जो तुम्हारी प्रायर्टी हो वो मेरे लिए शायद जरूरी ही ना हो  ! मै आदमी को लॉजिक्स से नहीं मापताफर्स्ट ईयर !! क्या होते है हम फर्स्ट ईयर में ? वो इम्मैच्योरटी थी यार  ! और मुझे एक्सेप्ट करने को लेकर उसके मन में सवाल थे  ,उसे लगा मै उसके लायक नहीं हूँ उसकी एक्सपेटेशन के कुछ क्राइटेरिया थे और मै उनमे फिट नहीं  बैठता था ! उसके नजरिये से वो ठीक थी , हलांकि ये और बात है बाद में मुझे लगा ठीक हुआ  वो एक किस्म का इन्फेचुरेशन था जिससे उसने ही मुझे बाहर निकाला she  cured me from herself without knowing. एक इंसिडेंट से एक वाक्ये ने जैसे मुझे जगा दिया।
रहा थर्ड ईयर ! मैच्योरटी का कोई तय  मेजरमेंट रिलेशनशिप में नहीं होता ,किसी  रिलेशन शिप में जाने के बाद आपको हर शख्स के अलग अलग फ्रेग्मेंट दिखते है ,उन फ्रेगमेंट से जो एक तस्वीर निकलती है उससे  आप कितने कम्पेटेबल हो वो चीज़ो को कंटीन्यू करती है ! हम दोनों बाहर आये थे खुद ही !”
अचानक सीरियस हुए डिस्कशन से वो जान गयी है उसने  निजी दायरे के कुछ  स्पेसो  की बायूंडरी को क्रॉस कर दिया है.
"आप दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की से भी ऊब सकते हो और किसी साधारण सी दिखने वाली लड़की के प्यार में भी पड़ सकते हो ! लव का कोई  इन्क्यूबेशन पीरियड नहीं होता के इस वक़्त के बाद आप को कुछ conclusion  मिलेगा "
उसने बात करते करते सिगरेट सुलगा ली है उसके करीबी जानते है अपसेट होने पर वो काम करता है सिगरेट और चहलकदमी ! चहलकदमी यहाँ मुनासिब नहीं है ,अमूमन वो उसके सामने सिगरेट नहीं पीता !
 " पहले एपिसोड से मै शर्मिंदा होता हूँ गर मुझे चॉयस मिले तो मै उसे इरेज करना चाहूंगा ,किसी को किसी रिश्ते के कम्पेल करना गलत है ,ये खुद से जेनरेट होना चाहिए   " 
वो सिगरेट का एक लम्बा कश लेता है !
कुछ सेकण्ड की  ख़ामोशी जो  उस दरमियाँ लम्बी मालूम होती है !
"आई एम सॉरी "
वो उसे देखता है
"रियली आई एम"!
“मुझे नहीं मालूम तुम  क्या हासिल करना चाहती थी पर मै अपनी मुश्किलो में दूसरे आदमी की जाती ज़िंदगी को नहीं टटोलता “  वो हेलमेट  उठाकर उठ खड़ा हुआ है।
 वो पीछे पीछे चल  रही है  
"मै अपसेट थी सुबह मम्मी ने कुछ कह दिया और पापा सुन कर भी अनसुना करते रहे। मै समझती थी पापा मुझे सपोर्ट करेंगे। "
वो मोटरसाइकिल पर बैठी नहीं है।
"ऐसा नहीं है जतिन मुझे पसंद नहीं या उसमे कोई खराबी है बस मै अभी तैयार महसूस  नहीं कर रही  हूँ। मुझे अभी आगे जाना है। शादी करके आप रुक जाते हो। आपकी  individuality ख़त्म हो जाती है मै चाहती हूँ कम से कम एक आइडेंटी क्रिएट कर लूँ। तुम समझ रहे हो ना। "
वो हेलमेट पहन रहा है !
"मै  क्राइसिस में थी और सारा outburst तुम पर निकल गया "
 उस पूरी दोपहर वो "गिल्ट "से जूझती  है  !
वापसी में वे उसकी जिद की वजह से  ढाबे पर चाय पीने रुके  है !
"तुम जब सीरियस होते हो तो बड़ी भारी  भारी बाते करते हो  ! फिलॉस्फिकल ओशो टाइप "
वो मुस्कुराया नहीं   है
"वैसे कॉलेज में तुम्हारा इम्प्रेशन "केजव्यूअल" सा है ! "
"केजव्यूअल" उसने सोच सोच कर कहा है वो उसे हर्ट नहीं करना चाह रही है !
" इम्प्रेशन " वो बुदबुदाया है !
उसे ड्राप करते वक़्त वो उससे कहता है
"तुम्हारे साथ कुछ मुश्किलें आयी तुमने उनसे और  पहले अपने आस पास के इंसिडेंट से एक  ज़िंदगी की समझ को लेकर एक कन्क्लूज़न निकाल लिया ! ये भी  हो सकता है उस लड़के को  ये बात मालूम ना हो तुम्हारे मन में कैरियर को लेकर क्या चल रहा है ये तुम्हारे पेरेंट्स की सोच हो।  तुम इस सदी की लड़की हो उससे खुद बात करो बताओ तुम क्या चाहती हो ज़िंदगी में ,पढ़ा लिखा बंदा है समझेगा। और हाँ कल मेरा मैच है कल तुम चली जाना "
 वो नार्मल नहीं है ,उदासी पहने हुए है और उदासी उसे सूट नहीं करती। वो एक बार फिर "सारी "कहना चाह रही है पर कह नहीं पाती .कुछ सुबह जिस तरह से शुरू होती  है  फिनिशिंग लाइन पे  गर दिन को  सकून भरे पर मोड़ पर छोड़े तो लगता है मुआवजा दे रही है  
उस रात वो सोयी नहीं !

 Indications of Life
---------------------------------------------
वो अपने स्कूटर से  गयी है ! 
आज  दिन रुका सा  है ,अजीब सी फ़ीलिंग !
जो  पहले कभी नहीं हुई  !
लौटने पर  मम्मी बताती है जतिन आया हुआ है, 
जतिन उसका मंगेतर है।
हर बार उसका दिल जतिन के आने पर धड़कता था
इस बार नहीं ! 
उसमे कुछ गलत नहीं है ,दिखने में ठीक है  सलीके से बोलने वाला , टी टोटलर !!  सिगरेट तो बहुत दूर की बात है , उसने कभी  उसे टी शर्ट पहने नहीं दिखा  , हमेशा तरतीब से लगे बाल ! उस शाम वो जतिन के साथ है।  जतिन की बातो में अपनी फील्ड की मुश्किलें है ,आगे की  प्लानिंग !
जतिन से बात की उसने पर जतिन ने एक दम यकीनी तौर पर जवाब  नहीं दिया ,उसकी बॉडी लेंग्वेज उसके मम्मी पापा  जैसी मालूम पड़ी ! जतिन के अपने सपने है ,अपने !
एक अजीब सा वेक्यूम है उसके भीतर !
क्या कहा था उसने "जहाँ ख्वाहिशे ना हो ,ख़्वाब ना हो वहां एक छोटी सी ज़िंदगी भी लम्बी हो जाती है नार्थ पोल के दिन और रात की  तरह "
उस रात वो फिर देर तक जगी.!

You infected me
___________________

अगले दिन सूरज अपनी  तय जगह है  पर वो नहीं !
वो कुछ  मिनट इंतज़ार करती है।
गुस्सा सेकण्ड की सुई  से भी तेज भागने लगा  है
फिर कोई उसके साथ घूमने वाला चेहरा उसके पास आया  है  "उसे फीवर है उसने कहा है आप  चली जाइये "
वो कुछ देर ठिठकी रहती है क्या उसे उसे देखने जाना चाहिए ? पर उसके तो  कितने सारे दोस्त है
 वापसी में वो स्कूटर उसके हॉस्टल में मोड़ देती है !
दरवाजा आधा खुला हुआ है। सिगरेट की स्मेल और कोई इंस्ट्रुमेंटल मेन्टल म्यूज़िक।
वो क्नॉक करती है !
"खुला है यार"  
उसने दोबारा नॉक किया है
एक दिन की बढ़ी हुई शेव ,और बेतरतीब बाल !
उसकी आमद से  वो चौक गया है !
क्या हुआ ?
"कुछ नहीं फीवर है  "
फिर  प्रोजेक्ट के मुताल्लिक कुछ गैर जरूरी बाते  !
इस दीवार पर  दूसरा पोस्टर है  जो उसे नहीं दिखा था उस रोज ,दरवाजे  के पीछे तीसरा, उसने टेप का  वॉल्यूम स्लो किया है
"तुम्हे गैबरिला पसंद है   "वो पोस्टर को देखकर कहती है
ब्रूक शील्ड्स भी !
वो मुस्कुराती है !
"तुम्हारे मैच का क्या हुआ ??
" हार गये ,राजपूत बड़ी वीरता से लड़े हार गये "
तुम्हारे बहुत दोस्त है वो  भरी हुई ऐश ट्रे देख कर कहती है !
"दोस्तियां मेरा ऐब है  जो cure  नहीं हो सकता  "फिर उसकी और देखता है  "ऐब समझती हो"
वो हामी भरती है 
चाय पियोगी ?
बनाना जानते हो?? 
उसने रूम में कुछ अरेंजमेंट्स किया हुआ है। वो चाय बनाने उठ खड़ा हुआ है
"तुम्हारे फ्यूचर प्लान्स क्या है ?  पी जी की ब्रांच को लेकर "
बाज मर्तबा हम बात करने के लिए बात करते है। उन बातो से ज्यादा हमें बात करने वाले में दिलचस्पी रहती है 
"मम्मी को पेडिएट्रिशियन पसंद है और पापा को ऑप्थेल्मोलॉजिस्ट "
"और तुम्हे ??"
 "मुझे ??  needs और wants में अंतर होता है ना ! "
"मतलब ?? "
"आदमी दरसल दो तरह से मरता है एक बाहर से और एक अंदर से , हम बाहर से मरने वालो को बचाने की तरकीबे सीखते है"
"मै समझी नहीं "
छोड़ो !
वो चाय का घूँट भरता है ,उसकी आँखों का रंग आसमानी है
"ज़िंदगी जीने के कई  पेट्रन होते है हर पेट्रन के अपने  रस्ते  ! हम कोई रास्ता अपनी समझ से प्रजेंट कंडीशन को देखते हुए फ्यूचर को इज़यूम करके चुनते है ,पर फ्यूचर वैसा होगा जरूरी नहीं है "
"तुम वो आदमी  हो जिससे कोई राय लेने आये और ज्यादा  कन्फ्यूज़ होकर लौटे "
 " ब्रांच नहीं ,आपकी पर्सनेल्टी आपकी ग्रोथ कराती है ये आप हो जो अपनी ब्रांच को आगे बढ़ाते हो "
interesting और पैसा ?
"पैसा कमाना बुरा नहीं है  .......सिर्फ पैसा कमाना बुरा है !  
"ये फीवर का असर है या ओशो का ? "
"पेरासिटामोल  के साइड इफेक्ट्स ! "
वो मुस्कुराती है !
"वैसे तुम पर ब्लैक अच्छा लगता है !"
उसने ब्लैक सूट पहना है , अचानक तब्दील हुई इस तवज़्ज़ो से  वो कॉन्शियस  हो गयी है !
"रेङ भी अच्छा लगेगा "
"रेड "
"हाँ  .वो वाला रेड "
फिर वो रेड की "क्लासिफिकेशन "बतलाने लगता है।
" वैसे आदमी की  सूरत उसके बारे में  सही डायग्नोसिस दे जरूरी नहीं "  वो चाय का कप उसे  पकड़ाते   हुए कहता है !
"हमारी केन्टीन का ****** है ना जिसकी शक्ल शक्ति कपूर से मिलती है वो दरअसल बड़ा नेक आदमी है
वो खिलखलाती है  "और तुम्हे उसकी नेकी बारे में कैसे पता "
ब्रेड पर बटर पूरा लगाता है !
उसकी हंसी कमरे में गूँज गयी है !
"तुमने बात की " वो पूछ रहा है !
"अभी नहीं पर मुझे लगता है वो समझेगा  " वो झूठ कहती है !
"प्ले देखने चलोगी कल " ??
फीवर में ?
"कल तक ठीक हो जायेगा ! "
नहीं हुआ तो ?
"पैरासिटामोल ज़िंदाबाद !"
"मुझे प्ले वले समझ नहीं आते। "
"इंसान को तजुर्बों को करते रहना चाहिए  वरना  ज़िंदगी में कई "काश" जमा हो जाते है ,  फारुख शेख और शबाना का है "
 कोई उसके रूम में धड़धड़ा कर घुसा है ,उसे देखकर थम सा जाता है।
वो उठ खड़ी है
"मै चलती हूँ "
कमरे  से बाहर  निकलते वक़्त उसे महसूस हुआ इन  पोस्टरों के  नजदीक  उसे बहुत पहले  आना चाहिए था। इन पोस्टरों में दुबकी हुई परछाईया पोस्टरों के बाहर सूरत से अलहदा थी  सीढिया उतरते हुए उसकी सहेली उसे मिली  है !
"लगता है सुलह हो गयी "
" नहीं यार कुछ गड़बड़ है"  वो स्कूटर स्टार्ट करते हुए कहती है "मुझे सिगरेट  की  स्मेल  अच्छी  लगने लगी है "

इत्तिला माने इन्फॉर्म
----------------------------------------------------------
हॉल  में  घुसते ही उसने कहा " अँधेरा बड़ी शानदार चीज़ है इसमें आदमी की असली सूरत नजर आती है "
उस रात उसने पूरा प्ले देखा। एक एक डायलॉग गौर से सुना !
वापसी में वो शहर के बीचो बीच बहने वाली नदी के पुल पर बैठे है जिसकी बाबत कोई प्लान नहीं था।
"अजीब बात है जब इस शहर में आया था   तो मन से नहीं आया था  ,अब इस  शहर  को छोड़ने  का वक़्त आया है छोड़ना मुश्किल  हो रहा है  कही भी रहूँ  ये शहर छूटेगा नहीं , मेरे भीतर  ज़िंदगी भर  रहेगा "
एक ठंडी सांस !
"वैसे हो सकता है पी .जी तुम्हे इस शहर में मिल जाये "
"उपरवाले के साथ इतनी अंडरस्टेंडिंग नहीं बनी है अभी "
कुछ देर  की ख़ामोशी !
"वैसे तुम क्या चाहते हो ज़िंदगी से  ? "
मै  !!    मुझे अपनी सत्तर फ़ीसदी ज़िंदगी पर अफ़सोस है 35 पर्सेंट मैंने एडमिशन लेने में  खर्च कर दी और 35 पर्सेंट उसे संभालने में  . मुझे पूरी दुनिया घूमनी है अलग अलग देशो में ,वहां की सड़को में वहां की गलियो में ,सड़क के किनारे शेड्स के नीचे के रेस्ट्रोरेन्ट मुझे बहुत अच्छे लगते है ,पहाड़ भी ,नदी भी  . शायद मुमकिन हो शायद नहीं ! कितने लोग जीते है अपनी मर्जी का जीवन ? कितना जी पाते है हम अपनी मर्जी का ! वक़्त बड़ा अन प्रेडिक्टेबल है ! "
हाँ, वक़्त बड़ा अन प्रेडिक्टेबल है ! मैंने  कभी  नहीं सोचा था  8 40 मिनट पर  एक केज्यूवली  टाईप इमोशनल फूल लड़के के साथ यहाँ इस पुल पर बैठूंगी ,जिससे पिछले पांच सालो में कभी बात नहीं की "
 "मम्मी कहती है लड़कियों में छोटी छोटी चीज़ो में खुशिया ढूंढने का हुनर होता है,हुनर मतलब  ....
.जानती हो हम  पहले अपने   जैसे लोगो को ढूंढते है फिर उनके उस हिस्से के साथ कम्फर्ट ज़ोन में रहते है जो लगभग हमारे जैसा है पर उनका दूसरा बड़ा हिस्सा जिसका अपना वज़ूद है दरसल वो हमें  "ग्रो "करता है उस ग्रोथ से हम अनजान रहते है कभी कभी कई साल तक ! आपकी ज़िंदगी में कई मौको पर शामिल लोग कुछ ना कुछ कंट्रीब्यूट करते है "
"यानी तुम्हे मुझसे भी कुछ मिला होगा "
" हाँ "
 "क्या ? "
"पता नहीं , देखो हमारे अलग अलग इमोशनल वेसल होते है ,उनके अलग अलग फिलर हमारे दोस्त ही वो फिलर है। हमारी इंस्टिंक्ट  हमें बताती है हमें किस वेवलेंथ पर रहना है हमारा टेस्ट ज़िंदगी को देखने का टेस्ट एक वेवलेंथ बनाता है और हमारा प्रोफेशन दूसरी "
exactly तुम किस किस्म के आदमी हो यार  ?
वो हँसता है !
“तुम इमोशनल फूल हो “
“वो एक   मैनुफैक्चरिंग डिफेक्ट है ,मेरे डी एन ए में है पापा भी फिल्मे देखकर रोते है मेरी औलादे भी रोयेगी। जानता हूँ  ज़िंदगी उतनी पॉयटिक नहीं रहती  जितने आप इमोशनल  होते हो।  वक़्त नाम का इंस्ट्रूमेंट समय समय पर बजकर आपको इत्तिला करता है  ! “फिर वो रूककर कहता है
"इत्तिला समझती हो ना  inform  " 
वो मुस्कराती है !
"वैसे एक बात कहूँ मेरे  एक दोस्त को  तुम पर क्रश  है "
" ओह कम ऑन ! "
रियली !
"उसका नाम इसलिए नहीं बताऊंगा उसे अभी इसी शहर में रहना है ,फिर उसने इसकी इज़ाज़त नहीं दी है। ब्रीच ऑफ़ कॉन्फिडेंस हो जाएगा "
उसका मन हुआ  उसे जी भर के देखे ,और कुरेदे इस शख्स के भीतर की गंध का जायका ले !


"चले "
 "थोड़ी देर बैठे रहो ! यहाँ यूँ बैठना अच्छा लग रहा है "
 "शुक्रिया ! "
"किस लिए ? "
"रेड सूट पहनने के लिए , हालाँकि ये वो वाला रेड नहीं है ,...उसमे मुझे भी तुम पर क्रश हो सकता था ! "

Perception  and Reality 
------------------------------
"हम ना कई साल साथ  रहकर रोज मिलने वाले आदमी को भी नहीं जान पाते।" वो अपनी सहेली से कहती है
 15 दिन में आप किसी के प्यार में कैसे पड़ सकते है?? its infatuation  बरसो बाद इस पर हंसोगी तुम !
"May be  you are right 13  दिन में आप किसी के प्यार में कैसे पड़ सकते हो  ? दो दिन वो "एब्सेंट" रहा था ना ! "
  
शायद" ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत शब्द है 
____________________________

19 साल तेरह  महीने 21 दिन बाद
 उस ढाबे पर गाडी रुकी  है।
"हम चाय पीने यहाँ आये है " जतिन पूछता है
हाँ !!
"यहाँ कुछ ख़ास है ?? "
शायद हाँ !  ......सुनो तुमने प्ले के टिकट लिए रात के शो के ?





(P.S -  किसी ने कहा मुश्किल सा लिखता हूँ सो सोचा आसान होकर लिखूं। लिखा फेसबुक वास्ते था ,लिखने बैठा तो लगा ज्यादा कह गया। यूँ भी  अरसा हुआ था इस गुल्लक में कुछ जमा नहीं किया था। इमोशंस  की वेव के कई स्पाईक्स होते है, कुछ बहुत तेज ! पीछे मुड़कर देखने के बाद कई बार शुबहा होता है हमारे ही स्पाइक्स  है  ,पर उनसे गुजरना लाज़िमी है !

जब आप सबसे अधिक प्रेम में होते हो तब आप सबसे अधिक असुरक्षित रहते हो. ओर जब आप प्रेम में सुरक्षित हो जाते हो तो प्रेम उतना नहीं बचा रह जाता . अजीब बात है ना !! कहते है दुविधा प्यार का आवश्यक कंपोनेंट है ......दरअसल प्रेम में आप स्वतन्त्र नहीं हो पाते अपने आप से ) 













LinkWithin

Related Posts with Thumbnails