2008-11-14

जाग जायेगा कोई खवाब तो मर जायेगा


अब बजाज स्कूटर बुक कराकर महीनो इन्तजार करने की कवायद नही है...फोन बूथ पर लम्बी लाइने भी नही है ....न पड़ोसी के यहाँ ट्रंक कॉल सुनने के इंतज़ार की असहजता ....अब छोटी सी कार मोहल्ले में कोई उत्तेजना पैदा नही करती है...देश हाई टेक हो रहा है ......मोनोपोली ख़त्म हो गयी है....अ अपने खांसते बच्चे को घर छोड़ "गिल्ट "में दबी कामकाजी माँये है ...ख्वाहिशो के एवेज में कैलेंडर में लाल घेरो में कैद तारीखों पर ..... एम आई की मुहर है अब बच्चे मेकडोनल में बर्गर खाकर भूख मिटाते है... . .मंहगे डाइपर में सू- सू करते है .. .फ़िर महँगी एंटीबाओटिक खाकर अपनी बीमारी भगाते है..........
इस देश को शायद सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा प्राइम मिनिस्टर नसीब हुआ है....अमेरिका का नव निर्वाचित राष्टपति भी भारत की प्रतिभा से अपने यहाँ नौकरी के खतरे महसूस करता है.....अब आतंकवाद आतंकवाद नही रहा है....हिंदू आतंकवाद ....मुस्लिम आतंकवाद बन गया है.....इस शब्द के खोजी की सब पीठ थपथपा रहे है........
१३ साल का सोनू अब भी उसी ढाबे में है....तीन साल में उसने रिन ओर निरमा की टिकिया में फर्क सीख लिया है....हाथ में आते ही पहचान लेता है की कौन सी असली है ओर कौन सी नकली .... कम पानी में बर्तन धोने के उसके हुनर का कोई सानी नही..... ग्राहक को पहचानने लगा है ...सिगरेट लाकर देने में बचे पैसे कैसे मालिक से बचाकर अलग अलग रखने है ...ताकि सिक्के आवाज करे ...सब जान गया है.....इंडिया हाईटेक हो गया है....टी वी में रियल्टी शो देखा है उसने.....सर्दियों में ...पैबंद पुराने कम्बल में उकडू मारकर कर भी उसके सपने सिकुड़ते नही है....रोज सुबह स्टेज पर उसे जाते हुए देख ... उसकी माँ अपने पल्लू से आंसू पोछती है ...पीछे से तालियों की आवाज .में कोई उसका नाम पुकारता है...घुटने मोड़कर इस भद्दी आवाज को अनसुना करने की कोशिश ..रोज बेकार जाती है ........कसकर आँख बंद कर स्टेज को दुबारा पकड़ने की एक पुरजोर कोशिश .... बर्तनों की आवाज ...

गर्म पानी के भगोने में रोज सुबह उसकी उपस्थिति दर्ज होती है ,गल्ले पे अगरबत्ती घुमाते मालिक को देख उसके होठो पे मुस्कराहट आयी है ..इंडियन आइडल का गाना गुन गुनाते हुए वो बर्तन मांजना शुरू कर देता है.....
तिरंगा चाँद पर लहरा गया है इंडिया अब "ऑफिशियली हाई टेक" हो गया है



आज की त्रिवेणी-

चिलचिलाती धूप ओर छाँव का बँटवारा हुआ है
ज़िन्दगी की कचहरी मे बेनामा लिखा है

रसूखवालो ने मौसम को रिश्वत दी है

94 टिप्‍पणियां:

  1. ठीक है नहीं हुआ और मानता हूँ कि एक असमान वितरण है चाहे शिक्षा का हो, चाहे न्याय का हो, चाहे सुविधाओं का हो पर पाने वालों की संख्या और प्रतिशत निश्चित रूप से बढ़ा है. हमें यह मान कर चलना चाहिए कि यह एक दिन बहुत बड़ी आबादी को मिलेगा. :) जय हिंद.

    उत्तर देंहटाएं
  2. India bhale hi high tech hone ka dawa kar reha hai...lekin yahan ke neta iss india naam ki cheej ko baar baar patakhani de reha hai.wo nahi chahta yahan ke log sukhi rehein...woh nahi chahta yahan ke logon ke hothon par muskurahat ho...woh chahta hai ki khoon kharaba hota rehe...
    hamara durbhagya hai..ki hum aise logo ko neta kehte hain..aise logon ke haath mein desh ka kaman hota hai...

    उत्तर देंहटाएं
  3. ठीक कहते हैं आप ;
    रसूखवालों से मौसम ने रिश्वत खाई है

    किसी के हिस्से में चिलचिलाता सूरज आया है
    और किसी के हिस्से में मौसम सुहाना आया है

    उत्तर देंहटाएं
  4. शानदार!
    केवल एक शब्द नहीं है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. एक साथ इतने सारे जज्बातो को बाँध के रख दिया है आपने... आटिफ़ का गाना याद आ रहा है..

    हम किस गली जा रहे है?? अपना कोई ठिकाना नही

    उत्तर देंहटाएं
  6. डॉक्टर साहब आप निहायती संजीदा इंसान लगते हैं। मैंने हमेशा देखा है डॉक्टर, पत्रकार और पुलिस न चाहते हुए भी संवेदनाओं से दूर हो रहे हैं....हमारा पेशा हमें काम में इस कदर डूबा जा देता है। अभी कुछ समय से ही आपका लिखा पढ़ना शुरू किया है...सच विश्वास होने लगा है कि दिल कोने में इंसानियत और ज़ज्बात दोनों ही जिंदा है...सांस लेते हैं..कसमसाकर कलम (कीबोर्ड) से निकल जाते हैं। ईश्वर हम सभी के अंदर की इंसानियत जिंदा रखे। और हम अपने जीवन में अपने लाड़ले के अलावा किसी एक सोनू के भी ख्व़ाबों को पर लगा सकें तो जिंदगी सफल...वरना जिंदा तो कुत्ते-बिल्लियाँ भी हैं और जानती हूँ हमसे बेहतर स्थिति में हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  7. तीन साल में उसने रिन ओर निरमा की टिकिया में फर्क सीख लिया है....हाथ में आते ही पहचान लेता है की कौन सी असली है ओर कौन सी नकली .... कम पानी में बर्तन धोने के उसके हुनर का कोई सानी नही.....

    बहुत संवेदनात्मक घटनाओं से आप रूबरू कराते हैं ! हम हाईटेक होकर भी कहाँ पहुँच रहे हैं ?
    बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है आपका लेखन ! बहुत शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  8. बस लाजवाब कह देना उचित होगा क्या?
    और कुछ कहने के लिए बचा ही कहाँ है?

    उत्तर देंहटाएं
  9. kya kahen? bas aapke lekhni ko jhuk kar salaam karte hain..

    उत्तर देंहटाएं
  10. बाल दिवस पर कामकाजी माँ के दर्द के साथ उच्च मध्यम वर्ग की संतानों के अलग दुःख को आपने आधुनिक भारत के सोनू के साथ जिस तरह बांटा है ओर " भगोने की स्कूल के रजिस्टर से तुलना" क्या कहूँ ????
    त्रिवेणी पञ्च है ओर अपने आप में ख़ुद बहुत कुछ कह देती है !सलाम आपको

    उत्तर देंहटाएं
  11. अगर मैं गलती नहीं कर रहा हूं तो ऐसा क्‍यों होता है कि जो बहुत कुछ कर सकते हैं केवल कलम चलाते हैं... अब कीबोर्ड चलाने लगे हैं... मैं भी और आप भी... हम उत्‍तेजना पैदा कर देते हैं. मॉनीटर के सामने बैठकर पोस्‍ट पर शानदार, बहुत अच्‍छा और पता नहीं कितने ही झूठी-सच्‍ची उपाधि दे देते हैं लेकिन इससे होगा क्‍या....

    समस्‍या जस की तस बनी रहेगी. कुछ ऐसा काम करना होगा जो समाज में भद्र भी कहलाए और लोग वाह वाह भी कहें....तो पोस्‍ट ही लिख लो....

    यह कमेंट मैं पोस्‍ट पर नहीं कमेंट्स को पढ़ कर दे रहा हूं....

    सब बकवास है...काम करने की बारी आएगी तो तिनका नहीं हिलेगा और वाह-वाह की तो लाईन लगा दी जाएगी....

    सचिन आउट हो गया तो उसे ऐसा खेलना चाहिए था, उसे वैसा खेलना चाहिए था. खुद टीवी पर नजर गड़ा कर सीख दी जाती है...नेता ने कुछ किया तो हमारे देश के नेता ऐसे ही हैं...

    भाई लोग हमलोग क्‍यों नहीं बन जाते हैं सचिन या फिर नेता और खेले अच्‍छा भारत के लिए....हो पाएगा क्‍या.... किसी के पास जवाब हो तो जरूर दीजिएगा...

    उत्तर देंहटाएं
  12. आपको कई दिनों से पढ़ रहा हूँ परन्तु पहली बार टिपण्णी कर रहा हूँ.

    डॉक्टर साहब, ज़िन्दगी को लेकर हर किसी का फलसफा डिफरेंट होता है, और परिस्थितियों को महसूस करने की व्यक्तिगत कैपबिलिटी भी. आवश्यकता बस इस बात की है, कि--

    इन्सान है हुआ कीजै
    इंसान रहे दुआ कीजै

    राजेश जी,

    आपने प्रश्न तो बहुत सार्थक उठाया है, परन्तु यह कहना कि जब आपने करने कि बारी आएगी तो तिनका भी नही हिलेगा, थोड़ा अतिवादी लगता है.

    हर कोई अपने-अपने तरीके से कुछ रचनात्मक करने का प्रयास करता रहता है. चाहे किसी क्षेत्र में ही क्यों न हो. लगभग सभी ब्लॉगर जीविकोपार्जन के लिए कोई न कोई नौकरी करते हैं, या स्टुडेंट हैं. समाज-देश-परिवेश के लिए सभी सोचते हैं, और अपनी कूबत भर करते भी हैं. यहाँ हम जो भी बहस करते हैं, वह हमारी पीड़ा को समवेत स्वर देती है, परन्तु इस पीड़ा के शमन हेतु हम अपनी परिधियों में रहकर पुरुषार्थ भी करते हैं. यह कटु सत्य है कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है, परन्तु--

    A journey of thousand miles starts with a small step.

    उत्तर देंहटाएं
  13. रात ढल जाएगी

    अब्र खुल जाएगा

    गम न कर

    उत्तर देंहटाएं
  14. राजेश जी,

    आपने प्रश्न तो बहुत सार्थक उठाया है, परन्तु यह कहना कि जब आपने करने कि बारी आएगी तो तिनका भी नही हिलेगा, थोड़ा अतिवादी लगता है.

    हर कोई अपने-अपने तरीके से कुछ रचनात्मक करने का प्रयास करता रहता है. चाहे किसी क्षेत्र में ही क्यों न हो. लगभग सभी ब्लॉगर जीविकोपार्जन के लिए कोई न कोई नौकरी करते हैं, या स्टुडेंट हैं. समाज-देश-परिवेश के लिए सभी सोचते हैं, और अपनी कूबत भर करते भी हैं. यहाँ हम जो भी बहस करते हैं, वह हमारी पीड़ा को समवेत स्वर देती है, परन्तु इस पीड़ा के शमन हेतु हम अपनी परिधियों में रहकर पुरुषार्थ भी करते हैं. यह कटु सत्य है कि अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है, परन्तु--


    A journey of thousand miles starts with a single step.

    उत्तर देंहटाएं
  15. शहर के बहार ,गन्दी जगह पर कूड़ा बिन रहे जो बाल
    वे क्या जाने कब जन्मे थे भारत रत्न जवाहर लाल..
    ..राजेश जी की बात कबीले -गौर है ..जिंदगी में और कुछ कर पाई या नही एक बार कोशिस जरुर करुँगी ..कुछ बदलने की.

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत साधारण बात को आसाधरण करके उसका महत्व बढ़ा दिया है!

    उत्तर देंहटाएं
  17. आपकी पोस्ट मुझे तो कविता सरीखी लगती है ! बड़ा मुश्किल है कमेन्ट करना ! इतने जज्बाती लेख मैंने तो पहले बहुत कम देखे हैं ! आपकी पोस्ट में एक रिदम रहती है ! लाजवाब ही कहूंगा ! धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  18. १३ साल का सोनू अब भी उसी ढाबे में है....तीन साल में उसने रिन ओर निरमा की टिकिया में फर्क सीख लिया है....हाथ में आते ही पहचान लेता है की कौन सी असली है ओर कौन सी नकली .... कम पानी में बर्तन धोने के उसके हुनर का कोई सानी नही..... ग्राहक को पहचानने लगा है.
    " what to say, nice artical which reflects real life image with emotional touch..."

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  19. हम चुप रहै गे, क्योकि हम बोलेगा तो....

    उत्तर देंहटाएं
  20. Anuragji, aapki triveni mujhe hamesha stabdh kar detee hai..."Rusookwaalon ne mausam ko rishwat dee hai..."!Mai kya bataun ke padhke kaisa laga.
    Aapkee tippaneeke liye dhanyawad. Aapne jo sawal kiya hai, uska jawab Dineshji kee tippannee me hai...aap zaroor padhiyega use ....bas waheen aake mai dar gayee...apnaapse chidh gayee, hatbal-si ho gayee...

    उत्तर देंहटाएं
  21. आप की बात पढकर अब हाईटेक होने मे शर्म आ रही है !लगता है परमोद जी सही कहते है प्रतिभा की परिणती सिर्फ़ पतन है !!

    उत्तर देंहटाएं
  22. सब कुच हो गया किन्तु आज भी धर्म के नाम पर झगड़े हो रहे हैं, साम्प्रदायिकता का दानव नाच रहा है।

    उत्तर देंहटाएं
  23. @rajesh ji

    sirf itna hi kahungi ke ek kalam bahut logon ke dil-o-deemag pe asar choddti hai apna. Dr.anurag aisa likh kar hume jagane ki koshish tou karte hain....aur na jaane wo society ke liye kya-kya karte honge...jo log aise achhe karam karte hain wo dhindora nahi peet-te, show-off nahi karte.

    aur mera ek sawaal aapse hai, aisa kya hai jo aap ya main nahi kar sakte aur sirf kalam chalane wale log hi kar sakte hain??? insaan chahe tou sab kuch kar sakta hai. baaki sab bahane hain.
    yahan baithkar social concerns pe blog tou har koi padd sakta hai, aur jo chahe comment kar sakta hai.

    India ka political system itna corrupt hai ke ek insaan chahe bhi tou use badal nahi sakta, uske liye sabko mil kar koshish karni hogi.

    aap kahiye aapne aaj tak society ke liye kya kya kiya hai,paddkar shayad mujh jaise faaltu logon ko bhi koi inspiration mile aapse.

    उत्तर देंहटाएं
  24. सचाइयां कितनी कड़वी होती हैं बड़ी सहजता से जतला दिया!

    उत्तर देंहटाएं
  25. achha laga..bhawnao ko aapne jis tarah net ke panno par ukera hai ..wakai ye kabiletarif hain...likhte rahiye...

    उत्तर देंहटाएं
  26. आपकी ये लाईनें.... सिगरेट लाकर देने में बचे पैसे कैसे मालिक से बचाकर अलग अलग रखने है ...ताकि सिक्के आवाज न करे .....काफी रोचक और आकर्षक लगीं।
    उम्दा लेखन।

    उत्तर देंहटाएं
  27. इंडिया हाई टेक हुआ है सिर्फ, अभी उसे कॉम-टेक होना शेष है।

    उत्तर देंहटाएं
  28. प्रिय @राजेश
    आप ,नीलिमा ,नीलिमा अरोरा ,अल्पना जी ,नीरज जी ,लावण्या जी ,राज जी ....मेरे उस वक़्त के ब्लोगिंग के हमसफ़र ओर यूँ कहूँ की हौसला बढ़ाने वाले रहे है जब मै इस ब्लॉग की दुनिया में पाँव रख रहा था ....ओर रोज डरते डरते कदम रखता था ..आपके क्रोध में भी एक हताशा ओर रुदन है समाज के प्रति ......पर यक्ष प्रश्न ये है की क्या करे ?
    जब मै ११ क्लास में था तब मैंने यशपाल की कहानी "परदा "ओर प्रेमचंद की कहानी "मन्त्र "पढ़ी थी जो आज तक मुझे याद है ...जानते है क्यों ?जाने अनजाने वो मुझे दुनिया को देखने की एक दृष्टि देती है ....भोपाल गैस काण्ड की त्रासदी पर लिखा इंदिरा सिन्हा का उपन्यास "एनिमल्स पीपल "पढ़ कर मै कई दिनों तक बैचेन रहा था ...यही दृष्टि यही बैचनी .मै बचाये रखना चाहता हूँ जो मुझे लगता है कम होती जा रही है .....आर्थिक क्रान्ति भी वैचारिक -चारत्रिक शून्यता के कारण कई बार असफल हो जाती है .हम जिस सामाज में रहते है .अलग अलग शेत्र का प्रतिनिधितित्व करते है ...शायद ये बैचनी हम सबके भीतर है.....ओर मुझे पुरा यकीन है सभी कुछ कुछ न कुछ जरूर किसी न किसी बहाने योगदान करते होंगे उसे पबिलिक प्लेटफोर्म पर कहना इश्तेहार सा लगता है.........बाकी बहुत कुछ कार्तिकेय ने कह दिया है......मूल बात यही है की .... शब्दों का जिन्दा रहना हमारी बैचनी को बचाये रखने के लिए भी जरूरी है दोस्त !

    उत्तर देंहटाएं
  29. चिलचिलाती धूप ओर छाँव का बँटवारा हुआ है
    ज़िन्दगी की कचहरी मे बेनामा लिखा है

    रसूखवालो ने मौसम को रिश्वत दी है
    bahut sundar triveni

    hmm india sahi haitek ho gaa hai,nav bharat ke nanhe haitek bachpan ka bada hi marmik chitran hua hai,bahut badhai.

    सिगरेट लाकर देने में बचे पैसे कैसे मालिक से बचाकर अलग अलग रखने है ...ताकि सिक्के आवाज न करे
    sach ye bachpan kya ka sikh raha hai.

    उत्तर देंहटाएं
  30. इस संवेदना को जिन्दा रखना भी तो जरूरी है...और जहाँ भावनाएं so गई हो उन्हें जगाना भी. ये काम आप जैसे लोग नहीं करेंगे तो कौन करेगा. मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. शब्दों का जिन्दा रहना बेहद जरूरी है. आम जिंदगी के कई पहलुओं को नज़रअंदाज कर देना हमारी आदत बन चुकी है, अब ऐसे में कई बार आप ऐसा लिखते हैं की जाने अनजाने चाहे अनचाहे ध्यान चला ही जाता है...मेरे ख्याल से ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Dear ap na jo kucha likha hai us ko bediya hi dhyan purbak likha hai dhynabad ji

      हटाएं
  31. बहुत सही है कि इंडिया हाईटेक हो गया है चाँद पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है पर इन गरीब बच्चो की ओर समुचित ध्यान नही दिया जाता है तो हाईटेक होने का आनंद काफूर हो जाता है , आजादी के ६० वर्ष हो जाने के बावजूद गरीबी के कारण बाल श्रमिकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है कोई भी क़ानून असरदार साबित नही हो पा रहा है . बधाई आपको बढ़िया अभिव्यक्ति के लिए .

    उत्तर देंहटाएं
  32. १-अमेरिका का नव निर्वाचित राष्टपति भी भारत की प्रतिभा से अपने यहाँ नौकरी के खतरे महसूस करता है...
    -=बहुत ही सटीक और तीखा मगर सच्चा कथन!

    २-कम पानी में बर्तन धोने के उसके हुनर का कोई सानी नही.----
    =ज़माना नहीं बदला है-न नौकर न मालिक!

    ३-.ताकि सिक्के आवाज न करे ----------
    -आप के observation की दाद देनी पड़ेगी.

    ४-तिरंगा चाँद पर लहरा गया है इंडिया अब "ऑफिशियली हाई टेक" हो गया है
    ---हाँ ,हो तो गया है - इस बारे में बहुत सी अलग अलग राय हो सकती हैं.
    - दूसरा भी पक्ष है-- हमें अपने वैज्ञानिकों पर उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है.
    [अफ़सोस है कि इस ख़ास ख़बर की कोई ख़बर फ्रंट क्या दूसरे पेज पर भी यहाँ के[UAE]अखबारों
    में मीडिया में जिक्र नहीं है.]

    ५-रसूखवालो ने मौसम को रिश्वत दी है-
    ----यह वास्तविकता भी हो जाए किसी दिन तो अतिशयोक्ति न होगी-

    उत्तर देंहटाएं
  33. गज़ब की संजीदगी के साथ उम्दा प्रस्तुतीकरण ,बेबाक लेखन ,हजारो सवाल दिलोदिमाग में पैदा कर दिया आपने झकझोर के रख दिया, बहोत ही मर्मस्पर्शी लेखन ,मेरे पास शब्द नही मगर आज भी भारत में दुख है परेशानी है जिसे लोग ज़िन्दगी बोल के आगे बढ़ जाते है ....
    आपको ढेरो साधुवाद..

    उत्तर देंहटाएं
  34. बहुत सशक्त अभिव्यक्ति. बहा ले गई. कलम की ताकत को कौन नकार पाया है. कितनी ही क्रांतियाँ इस ताकत की साक्षी हैं. आपने अपने हिस्से का फर्ज बखूबी निभाया, मेरी नजरों में.

    त्रिवेणी जानदार है.

    उत्तर देंहटाएं
  35. यही आज की जिंदगी का महाकाव्‍य है अनु जी,
    यही दिल से निकली आवाज है जिसे कोई गीत कहेगा, कोई कहानी या पो्स्‍ट...जो भी कहा जाए लेकिन है यथार्थ और दिल के करीब। आपने बहुत सटीक लिखा है...
    अब बच्चे मेकडोनल में बर्गर खाकर भूख मिटाते है... . .मंहगे डाइपर में सू- सू करते है .. .फ़िर महँगी एंटीबाओटिक खाकर अपनी बीमारी भगाते है..........
    ....और दूसरी तरफ बच्‍चा ढाबे पर बर्तन मांजते हुए रिन और निरमा के अंतर को पहचानता है....

    उत्तर देंहटाएं
  36. लाजवाब प्रस्तुति. हर तरफ़ साफ़-साफ़ बिखरी सच्चाई को देखने, समझने और कहने वाली आँख भी दुर्लभ है. ऐ-गुरु की टिप्पणी पर यकीन करने को दिल तो मेरा भी बहुत करता है...

    उत्तर देंहटाएं
  37. तिरंगा चाँद पर लहरा गया है इंडिया अब "ऑफिशियली हाई टेक" हो गया है

    what to say anurag...we all are waiting for the day when this " officially" will turn into " unofficially" . and we all know when this day will come , we will not be in this world to see sonu playing,studying and fulfilling his dreams......bhagwan aapki bechaini ko zinda rakhe.

    उत्तर देंहटाएं
  38. बहुत अच्छे डाक्टर साब...बस इससे ज्यदा कुछ नहीं कहता...यूं ही आंखें नम हो उठी,कुछ और याद आया

    उत्तर देंहटाएं
  39. आपकी पोस्‍ट जि‍तनी जानदार है, उतनी ही टि‍प्पणी भी संजीदगी से लि‍खी गई है-
    अल्‍पना वर्मा जी की हरेक बात जैसे मेरे शब्‍द लग रहे हैं।
    आज की पोस्‍ट के लि‍ए एक ही भाव- अनि‍र्वनीय।

    उत्तर देंहटाएं
  40. baat to satya hai..par isme naya kya hai..har desh aisi hi aahista aahista..age badha..sabhi log ek saath ek hi kaal me pragati ka sukh nahi le pate..koi us pragtai ki kimat chukata hai ..to koi us mulya ka fayada...

    उत्तर देंहटाएं
  41. देश क्या संसार के सारे सोनुओं के दिन पलटने चाहिए । हाथ में रिन टिकिया नहीं, कलम किताब और शाम को कोई बल्ला आदि होना चाहिए । परन्तु यदि हम इसी तेजी से सोनू पैदा करते जाएं तो कोई माई का ला सारे सोनुओं के दिन नहीं बदल सकता । फिर भी आशा तो है ही ।
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  42. बहुत संतुलित और विचारणीय रचना है ! पढने के बाद दिमाग में खलबली मच गई है !

    उत्तर देंहटाएं
  43. मार्मिक लेख!यथार्थ का कड्वा सच/संवेदना शून्य होते समाज में आपकी संवेदनशील लेखनी को नमन/

    उत्तर देंहटाएं
  44. अनुराग जी के लेख पर कमेन्ट देते समय मैं ने यह राजेश जी के कमेन्ट पर ध्यान नहीं दिया न ही उन के कमेंट्स पर कमेंट्स को पढ़ा था.PD के लिखे article से वापस यहाँ आ कर सभी को पढ़ा.
    मेरा यह कहना है-
    १-कलम की ताक़त को आज तक कोई नकार नहीं सका है.इसीलिये..बड़ी नामचीन हस्तियां भी-प्रिंट मीडिया
    का सहारा लेती थीं.और अब ब्लॉग्गिंग में उतर आई हैं.
    २-यहाँ हम सब अपने विचार बाटते हैं .
    ३-ब्लॉग्गिंग के अपने उद्देश्य हैं-सिर्फ़ साहित्य और साहित्यिक भाषा में बात करना ही नहीं है---अगर हम सिर्फ़ अपनी वक्तिगत कोई बात बाँटते हैं तो शायद
    वो हमारी अपनी मानसिक स्थिति के लिए सेहतमंद होगा.और उस बात को बांटने में जो खुशी मिल रही होगी
    उस का अंदाजा और कोई कैसे लगा सकता है?
    ४-सब से बड़ी बात जो डॉ. अनुराग ने बड़ी नम्रता से कही है--
    की अपनी उपलब्धियों को यहाँ बताना सिर्फ़ एक इश्तहार भर होगा.
    ५-हिंदुस्तान से दूर हम यहाँ आज भी सारा समय समाचार भारत के ही देखते हैं?वहां की परेशानियां देख कर परेशान होते हैं ?क्यूँ??जब की सालों से सिर्फ़ एक मेहमान की तरह वहां जाते हैं--
    हम ने क्या किया?कोई क्या करता है और क्या कर सकता है-यह किसी का लेखन या उस की ब्लॉग्गिंग तय नही करती है-
    -यहाँ तो कम से कम स्वतंत्र अभिव्यक्ति की छूट रहने दीजिये!

    उत्तर देंहटाएं
  45. Anurag bhai, Express yourself with intensity & concern the way you always do.
    I am sure you do good & meaningful work along with such honest writing as well.
    Believe me, President -Elect Obama's concern is also for the Many "Sonu's & Tom's who still can not get good education even though they live in the most affluent Nation of this world which is America.
    Human progress is an on going struggle & compelete renaincessance is a Hope for entire mankind.
    Though an Utopia is hard to achieve, we all are struggling to reach there.
    Nice writing ..keep up the good work. Do not change your writing nor your kind & caring heart !
    ( Sorry to post my comments in English ..I'm away from my PC )
    God Bless !
    warm regards,
    - Lavanya

    उत्तर देंहटाएं
  46. इस पोस्ट को पढ़ते हुए बहुत सी बाते और भी याद आ जाती हैं ...परिवर्तन हो रहा है होगा पर किस तरह से और किस सीमा तक यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा ....

    उत्तर देंहटाएं
  47. हर इक को,
    अपने हिस्से की धूप मिली ;
    किसी को मिला घनेरा साया ,
    किसीको मिली जेठ दुपहरी ;
    ज़िन्दगी क्या खूब मिली खूब मिली,
    बहुत खुब मिली | |

    आगे तो लिखा था ---

    ईश्वर भी छिपता ना फिरता ,
    इंसानों से आज ;
    स्वर्ग से गर ' हव्वा 'संग उसे भी,
    निकाला ना होता:
    स्वर्ग नया हुई तब से ये धरती
    जहाँ उनदोनो को ;
    ज़िन्दगी क्या खूब मिली,खूब मिली ,
    बहुत खूब मिली ||

    पर ये लाईने पढ़ कर इसे ऐसे किए देते हैं --

    ईश्वर भी छिपता ना फिरता ,
    इंसानों से आज ;
    गरचे उसने धुप -छाँव के
    बटवारे में रिश्वत न खायी होती ||

    रही सोने से जगाने की बात
    तो मत सोने दो उसे ,कहदो
    देखे सपने मगर खुली आँखों,
    खुली आँखों के सपने ही सच होते हैं,
    वे अपने सपन क्या सच करेंगे ,
    जो सपने देखेते सोते ही रहेंगे||
    कबीरा

    उत्तर देंहटाएं
  48. its very very nice words very ice keep it up sir


    visit my site shyari----Recipes And Etc......

    http://www.discobhangra.com/shayari/

    http://www.discobhangra.com/recipes/

    उत्तर देंहटाएं
  49. अच्छी बहस हो ली जी। अब हम लेट-लतीफ़ आकर क्या कहें। बस बधाई दे लेते हैं। :)

    उत्तर देंहटाएं
  50. इस लेख में आपने जिस संवेदनशीलता का प्रदर्शन किया है वह यदि 20% भारतीयों में आ जाये तो बाकी 80% का जीवन धन्य हो जायगा!!

    -- शास्त्री

    -- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

    महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

    उत्तर देंहटाएं
  51. अनुराग जी बहुत बेहतरीन तरीकसे आपने वक्त के फर्क को परिभाषित किया है

    उत्तर देंहटाएं
  52. शास्त्री जी कि बातों से सहमत हूँ. और आशावान भी कि धीरे-धीरे ही सही परिस्थितियां बदलेंगी ज़रूर. त्रिवेणी लाजवाब रही

    उत्तर देंहटाएं
  53. Very good article. Triveni, this time, is okay.

    God bless,
    RC

    उत्तर देंहटाएं
  54. अनुराग जी, एक संवेदनशील विषय पर अच्छी पोस्ट, लेकिन मुर्दों के शहर में डुग-डुगी बजाने से मुर्दे उठा नहीं करते, मुर्दों को दफनाना ही अधिक बेहतर है, नये जीवन को नयी दिशा देने से ही समाज में कुछ अच्छा होने की आशा है. शायद हम सब नपुंसक हो चुके हैं या फिर मर चुके हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  55. सोनू के बहाने आपने एक बहुत बडे समाज की नियति को बखूबी चित्रित किया है।

    उत्तर देंहटाएं
  56. सच में काफी देर हो गई इस चर्चा में शामिल होने में, राजेश जी की बात सही होते हुए भी कुछ ज्यादा ही तीक्ष्ण हो गई, शायद नाराज होगे किसी बात से, अनुराग जी को उनके गंभीर बातो को इतनी सहजता से कह जाने के लिए साधुवाद देना चाहूँगा.भावनाओं को इतनी गहराई से पकड़ के लाना लेखक की सोच को दर्शाता है, बधाई आपकी कलम यु ही अविरत चलती रहे - अमित तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  57. देर आए दुरुस्त आए....आप को पढ़ना हमेशा एक नए अनुभव से परिचित होने जैसा है...बेमिसाल लेखन...और त्रिवेणी...क्या कहें...वाह.
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  58. पुरे जोर-शोर से बाल-दिवस मनाने वाले इस देश की दुखद विडम्बना है ये.

    उत्तर देंहटाएं
  59. मैं देर करता नहीं देर हो जाती है..
    लेकिन इस बार वाकई देर हो गई..
    एक बेहतरीन पोस्ट पढ़ने के लिये.
    जागृत पोस्ट....
    वाह.....

    उत्तर देंहटाएं
  60. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  61. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  62. चिलचिलाती धूप ओर छाँव का बँटवारा हुआ है
    ज़िन्दगी की कचहरी मे बेनामा लिखा है

    रसूखवालो ने मौसम को रिश्वत दी है
    khoobsurat

    उत्तर देंहटाएं
  63. कुल 65 टिप्पणियां, 2 मुझसे एक ही आलेख पर. कुछ इसका राज बता दो डाक्टर. एहसान मानेंगे!! एक "परिवार" के अंदर कोई बात आपस में छुपाना नहीं चाहिये!!!

    सस्नेह -- शास्त्री

    उत्तर देंहटाएं
  64. एक ही साथ कितनी सच्ची बातें कितने अच्छे तरीके से कह दी आपने,बहुत ही बढ़िया

    उत्तर देंहटाएं
  65. क्या कहना ! डॉ. साहेब आपकी पिछली तीनों रचनाएँ पढीं. बड़ा संजीदा विश्लेषण है सर आपका. त्रिवेणी ने सब कुछ ही कह दिया जी. बहुत ख़ूब ! डॉ. साहेब यदि आपको ऐतराज़ न हो तो बस कुछ दिन सिर्फ़ आपकी पोस्ट पर बगैर भूले आने की आदत डालने के लिए, जब भी आप नई पोस्ट लिखें मुझे ख़त दाल दीजियेगा. आपका मुरीद.

    उत्तर देंहटाएं
  66. सामाजिक विषमताओं का बेहतरीण चित्रण किया आपने...

    उत्तर देंहटाएं
  67. बहुत बढ़िया
    कृपया ठेले पर हिमालय कहानी के बारे में बताएं जो आपने बचपन में पढ़ी थी

    उत्तर देंहटाएं
  68. तीखी...बेलाग !
    धारदार अभिव्यक्ति.
    दूसरे पहलू के उद्घाटन का यह अंदाज़
    ....सच अनूठा लगा.
    ==============
    बढ़ाई
    डॉ.चन्द्रकुमार जैन

    उत्तर देंहटाएं
  69. KYA KAHUN SAHAB JI,man vyathit ho gaya padhkar.
    upar sahi kasar ,aapki triveni ne puri kar di.
    lomharshak
    ALOK SINGH "SAHIL"

    उत्तर देंहटाएं
  70. पढ़कर मैंने कुछ कहना था....लिखने लगा तो सोचा क्या लिखूं..सब तो आपने लिख दिया....दरअसल इसमें तो मेरे भाव ऐसे छिपे हें हैं...जैसे इसे मैंने ही सोचा हो...मैंने ही लिखा हो.....

    उत्तर देंहटाएं
  71. पहले तो इस लेख ने अभिभूत किया, यथार्थ के जीवंत दर्शन के दर्शन किये. फिर अब टिप्पणीयों को पढते ही दिल और ग़म्गीन हो गया.

    ये ठीक है, कि विचारो की अभिव्यक्ति होनी चाहिये, मगर क्या हम अपने उद्गारों में और सही में तो अपने मानस में सात्विकता और शालीनता नहीं रख सकते?

    राजेश रोशन जी नें जिन बातों पर रोशनी डाली है, वह बात सही हो सकती थी, मगर निशाना ग़लत था, पैरहन ग़लत था.

    लेख नें अपना काम बखूबी निभाया है, आपके कलेवर में से अंदर चीर कर आपके ज़मीर के तह तक जाकर चुभ गया है. कोई तिलमिला जाये तो आश्चर्य नहीं. मगर हम जैसे ब्लॊगर्स को भी एक मिशन अलोकेट है, जहां भी संभव हो , कुछ किया जा सके तो लेख सार्थक हो जाये.

    संवेदनशीलता का पैमाना है, इस लेख पर इतनी टिप्पणीयां, और टिप्पणीयों पर ऐतराज़ का शालीन तरीका. इन सभी को सलाम !!

    उत्तर देंहटाएं
  72. त्रिवेणी शानदार है, बचपन कठिन

    उत्तर देंहटाएं
  73. Ek dost ne Abhijit naam ke ek sajjan ke blog ka link bheja...usme se aap ke blog ka pata mila....dekha, par zyada nahin, aur padha usse bhi kam....par aap ne khud ke parichay mein jo likha, vo bha gaya! Achchhi 'sense of humour' lagi, jiski aajkal kami ho chali hai!

    Shukriya!

    उत्तर देंहटाएं
  74. गर्म पानी के भगोने में रोज सुबह उसकी उपस्थिति दर्ज होती है ,गल्ले पे अगरबत्ती घुमाते मालिक को देख उसके होठो पे मुस्कराहट आयी है ..इंडियन आइडल का गाना गुन गुनाते हुए वो बर्तन मांजना शुरू कर देता है.....
    तिरंगा चाँद पर लहरा गया है इंडिया अब "ऑफिशियली हाई टेक" हो गया है



    बस इन कुछ पंक्तियों में देश की सच्चाई बयां कर दी आपने , हैट्स आफ टु यू डाक्टर साहब

    उत्तर देंहटाएं
  75. ''कम पानी में बर्तन धोने के उसके हुनर का कोई सानी नही..... ग्राहक को पहचानने लगा है ...सिगरेट लाकर देने में बचे पैसे कैसे मालिक से बचाकर अलग अलग रखने है ...ताकि सिक्के आवाज न करे ...सब जान गया है.....'' ये पंक्‍तियाँ आपकी लेखनी का हुनर हैं और ज्ञान का परिचायक भी...
    कहाँ से सीखा इतना अच्‍छा लिखना...??

    उत्तर देंहटाएं
  76. ये फर्क तो बहुत पहले से था कुछ और लोग प्रमोट होकर हाईटेक ग्रुप में चले गये, कुछ EMI की बदौलत हाईटेक ग्रुप में टिके रहने का भ्रम पाल रहे हैं। ऐसे कई १३ साल के या ३१ साल के लोग अभी भी उसी कंबल में सिकुड़े रहते हैं जिसमें शायद उन्होंने पहली सांस ली थी।

    उत्तर देंहटाएं
  77. विचारणीय और संवेदनशील सशक्त प्रस्तुति।

    उत्तर देंहटाएं
  78. मैं भी दिनेश राय द्विवेदी जी की बात से सहमत हूँ कि इंडिया हाई टेक हुआ है सिर्फ, अभी उसे कॉम-टेक होना शेष है।

    उत्तर देंहटाएं
  79. youn to mujhe padhne ka koi shouk nahin hai lekin sach kahun to aap ko padhta hun ...aap ke mastiksh ki halchal bahut hi prabhavi hai ..

    उत्तर देंहटाएं
  80. वापिस आइये भाई डॉक्टर साहेब , इस पोस्ट पर यह कुल 84 वीं टिपण्णी है मेरी और से. आइये हम इंतज़ार कर रहे हैं. :)

    उत्तर देंहटाएं
  81. कोई के जगने का इंतज़ार लम्बा होरहा है, भई मेरा फ़ीडरीडर तुम्हारी अगली पोस्ट माँग रहा है,
    "आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे ये फ़ीड बुलाते हैं.. "

    उत्तर देंहटाएं
  82. जितना भी कहा जाए कम है.... अद्भुत.. बेमिसाल... बहुत सही कहा।

    उत्तर देंहटाएं
  83. आपने भारत के सपने उकेरने का काम किया है । लेखन में गज़ब की कलात्मकता है । आपने जिस स्थिति से अवगत कराई है उसे देखने वाला इस देश में कोई नही है । बहुत खूब । मेरे ब्लाग पर भी आए ।

    उत्तर देंहटाएं
  84. जमाना बदल रहा है पर कुछ चीजें जिन्हें अबतक बदल जाना चाहिए था वो वैसे ही बनी हुई है। अनुराग जी कल ही बात कुछ बच्चे कुडे में से खाना तलाश कर उसे खा रहे थे। मै उन्हें देखता रहा और सोचता रहा कि उनके स्वाद में और हमारे स्वाद क्या अंतर रहा होगा। और वही कुछ दूरी पर बडी बडी गाडियों में बैठे मार्डन स्कूल के बच्चे पेप्सी और बर्गर खा रहे थे।

    रसूखवालो ने मौसम को रिश्वत दी है

    बहुत अच्छा लिखा आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  85. वाह बहुत खूब लिखा है आपने.

    नमस्कार, उम्मीद है की आप स्वस्थ एवं कुशल होंगे.
    मैं कुछ दिनों के लिए गोवा गया हुआ था, इसलिए कुछ समय के लिए ब्लाग जगत से कट गया था. आब नियामत रूप से आता रहूँगा.

    उत्तर देंहटाएं
  86. Helloo
    Dr
    Achcha laga padh kar apko
    abhi tak guljaar saheb ki triveni hi padhi ab aapki padh kar achhc laga.


    Prashant Dubey
    Bhopal
    prashantd1977@gmail.atmadarpan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  87. Anurag ji, bahut khoobsoorat triveni likhi hai.. 'चिलचिलाती धूप ओर छाँव का बँटवारा हुआ है' - bahut sarahniye hai..

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails