2009-04-28

"देयर इस नो रूल इन इश्क " मेरी जान !!


इंटेलिजेंस की अपनी लिमिटेशंस है लेकिन बेवकूफी उसकी तरह मजबूर नहीं है....शुक्ला जी की दीवार पे लिखे इस जुमले का कापी राइट किसके पास था ये तो याद नहीं पर ...पर इस जुमले ने हॉस्टल के इन्टेलेकचुवलो में उनकी "एंट्री "करा दी थी ....
कुछ दिनों बाद उनके हिस्से की अलमारी पे लाल रंग से एक ओर नये जुमले ने उन्हें बतोर "विद्रोही" हिट करा दिया ..."जीनियस डोंट फाल इन लव "अलबत्ता इस जुमले से नाइत्तिफाकी रखने में हम भी शामिल थे ...फिर भी चूँकि शुक्ला जी हमारे सीनियर थे उस पे यू . पी के तो हमने कभी खुले आम नाइत्तेफाकी जाहिर नहीं की ....हमें यकीन था जिंदगी के किसी मोड़ पे इश्क अपनी एंट्री मारेगा ही......शुक्ला जी की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके जीवन में जबरदस्त ट्रांस-फोरमेशन कर दी .. अलबत्ता उसे खूबसूरत कहने पे कई यारो में कंट्रोवर्सी है.

.हुआ यूँ के हर साल AIIMS में दिनों का कल्चरल फेस्ट होता है जिसमे देश भर के मेडिकल कॉलेज शिरकत करते ...रात को खुले मैदान में "करोके कम्पीटीशन "होता जिसमे खासे रोमांटिक अंग्रेजी गाने स्क्रीन पे चलाये जाते ...ओर कोई एक बेचारा इस मजलिस में तन मन से गाता . .लोग यहाँ वहां किसी की गोद में लेटे होते ...कुछ माहोल से इंस्पायर हुए सिर्फ हाथो में हाथ डाले बैठे ...जिनके पास ना कोई गोद होती न ऐसा इंस्पायर्ड साथी ...वे आहे भरते ....कुछ बियर पीकर इश्क को गाली देते ...शुक्ला जी ने एक रात बियर पीकर इश्क को खूब कोसा ...गुजरात की मिलावटी शराब पीने का आदी उनके ब्लेडर ने दिल्ली की असली बियर से विद्रोह कर दिया .. ...आलस ओर परेशां शुक्ला जी ने रात के अँधेरे में दूर की झाडियों को फारिग होने के लिए मुनासिब समझा ..चैन खोलकर वे रिलेक्स होने की पहली मुद्रा में ही थे की अचानक झाडियों में एक लम्बा चौडा सरदार निकला ओर माँ बहन की गलिया देता इनके पीछे दौड़ लिया..एक .प्रेमी जोड़े .के प्रेमालाप में असमय पड़ी इस फुहार ने जो विघ्न डाला ....सरदार ने उसका क्लाइमेक्स बड़ी बेरहमी से किया .....
इस अपमान से आहत हॉस्टल वापस लौटे शुक्ला जी एक महीने के लिए कुछ किलोमीटर के दायरे के अज्ञातवास में बिना औपचारिक घोषणा के चले गये .. फिर वे अंग्रेजी के मोटे मोटे नोवल थामे सीडियो पे प्रकट हुए ...उनके अधखुले दरवाजे से अक्सर केनेजी की कैसट बजती सुनायी देती .इस दौरान कोई नया जुमला भी उनकी अलमारी पे आकर नहीं गिरा ... एक दिन "ब्रेकिंग- न्यूज़ "आयी शुक्ला जी ने "अंग्रेजी मेजर "को परपोज कर दिया है ...इश्क से उनके असहयोग आन्दोलन की अचानक मौत ....वो भी अंग्रेजी दा किस्म की लड़की से...बुजुर्वा किस्म के छोटे से क्रन्तिकारी तबके को अपने इस युवा संभावित नेता के इस कदम से गहरा धक्का लगा .... होस्टल में हंगामा बरपा हो गया... लड़को की एक अच्छी खासी परसेंटेज इन .अंग्रेजी दा लड़कियों को "आउट ऑफ़ कोर्स "मानती थी .जिसका सीधा ओर देसी अनुवाद था "औकात से बाहर ".....
हमेशा जींस ओर टीशर्ट में दिखाई देने वाली इन लड़कियों को प्रेम में लिखी हिंदी कविताये " वल्गर "लगती ओर "सेंटीमेंट्स " छिछोरे... .ओर ये थी मेजर की औलाद .....
उस रोज रात को शुक्ला जी ने अपने जुमले में संशोधन किया .."जीनियस डोंट फाल इन लव -इट हेप्पंस " .२ महीनो में ये वाकई हेप्पंस हो गया ....शुक्ला जी हॉस्टल के तमाम नाकाम प्रेमियों के लिए उम्मीद की एक साडे पॉँच फूटी लौ बन के उभरे ओर एक घटना ने इस लौ को ओर जगमगा दिया .....
कॉलेज की ऐसी मोहतरमा जिन्हें हर लड़के को भाई बनाने का शौंक था ..ओर कुल जमा उनके पास साडे छब्बीस भाई थे ...(एक अभी डिस्पोसल पे था )...पे एक साहब मर मिटे ...तीन ठो असफल प्रयास के बाद उन्होंने शुक्ला जी की शरण ली...शुक्ला जी ने उनके गिरे हुए मोरल को जाने कौन सी क्रेन से उठाया .की उनकी भी नैय्या पार हो गयी....... इश्क वालो के लिए शुक्ला जी पीर पैगम्बर हो गये . ...
इश्क के तमाम नाकाम , "हाँ ओर ना " के दोराहे पे खड़े प्रेमी उनके दर पे आते ....बिगडे हुए केस संभल जाते ..
यारो का बस चलता तो उन्हें पदमश्री दिलवा देते ......

शुक्ला जी अपनी प्रतिभा ओर अंग्रेजी मेजर के साथ विदेस में पलायन कर गये ...



किसी भी हॉस्टल के पिछले दस -पंद्रह सालो को गर फ्रेम दर फ्रेम केप्चर किया जाये ओर मेग्निफाइंग ग्लास से सूक्ष्म निरीक्षण .. तो इश्क हर साल किसी किसी फ्रेम में एक उपस्थित पात्र है ....कहते है इश्क का जींस हर हॉस्टल में दस साल में म्युटेट होता है और शुक्ला जी जैसे लोग हर पीढ़ी में जुदा - जुदा शक्लो जुदा -जुदा नामो से उस पीढ़ी का मार्ग दर्शन करते है जब भी आने वाली पीढिया इश्क लिखकर गूगल में खोजेंगी शुक्ला जी जैसे वहां कोई लौ थामे मिलेगे ...

इश्क में एक स्टेज ऐसी आती है जब हाँ ओर ना के बीच बालिश्त भर का फासला होता है जरा सा बेलेंस बिगडा नहीं के ........-कर्टसी शुकला

83 टिप्‍पणियां:

  1. yes there is no rule in eshq...ussi ko dekh ke jeete hai jis kafir pe dum nikle....ofcource it happens....

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  2. इश्क में एक स्टेज ऐसी आती है जब हाँ ओर ना के बीच बालिश्त भर का फासला होता है जरा सा बेलेंस बिगडा नहीं के ........-कर्टसी शुकला

    -ऐसे सुभाषित आजकल कहाँ पढ़ने में आते हैं. धन्य हैं आपके शुक्ला जी. वैसे ऐसे शुक्ला जी हर जगह होते हैं..यह बिल्कुल सही फरमाया.

    मजेदार!!

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  3. शुक्ला जी का "इश्क दर्शन शास्त्र " पढकर
    अदनान सामी का गीत याद आ गया
    " तू भी हमको लिफ्ट करा दे "
    धाँसू "क्रेनवा" लगाते होँगे शुक्लाजी :)
    शब्द बहुत कुछ कह रहे हैँ .."
    .."जीनियस डोंट फाल इन लव -इट हेप्पंस " .

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  4. इश्क का फलसफा है यह खूब ......रोचक लगी यह दस्तान ए इश्क ..इबताये इश्क है रोता है क्या ..आगे आगे देखिये होता है क्या

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  5. dastan-e-ishq bada khub raha,har 10saal mein ishq kagene mutate hota hai,waah kya baat keh di,ab shukla ji ko padmashree to milni hi chahiye,itane logon ki naiyya paar jo ki hai.badhiya lekh:)

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  6. मेरा भी यही मानना है के ऐसे शुक्ला जी सभी के जीवन में होते है .. पहले तो मुझे ये रचना पढ़ते वक्त हसी आती रही फिर आगे शुक्ला जी के तरह इसमें भी क्लिमेक्स आता गया...बहोत सही लिखा है आपने... जिनके पास गोद नहीं होता वो आहें भर लेते है....

    अर्श

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  7. इश्क के शेर नाकाफी होंगे इस पोस्ट के लिए इसलिए अपना ही एक जुमला लिखना मुनासिब लगा 'इश्क वो बिगड़ी हुई औलाद है जिस को अपनी जायदाद से बेदखल करने का विचार भी तिरस्कार के योग्य होता है'

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  8. बहुत ही रोचक पोस्ट और हाँ ऐसी शख्सियत के लोग कहीं -कहीं मिल ही जातें हैं .

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  9. Bahut hi badhia......rochak post.....

    aapko dekh dekh kar hamara bhi man hota hai, likhne ka, but kabhi likhaa nahi hai na........

    Chaliye.........likhte rahiye....

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  10. पता नहीं जी - टाल्स्टाय के एक उपन्यास में पढ़ा था कि लड़की नहीं-नहीं करती जा रही थी और सटती भी जा रही है।
    प्रेम कुछ वैसा ही होता है - प्राबेबली!

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  11. इश्क क्या क्या न कराये कम है . लेकिन पीर बन जाना भी तो कमाल है

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  12. रोचक किस्से और रोचक किस्सागोई के लिए साधुवाद.

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  13. उस अज्ञातवास में ज़रूर राज़ छुपा है सुकुल जी के metamorphosis का!

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  14. जो परहेज़ करते हें वो भी डूबते हैं...
    as always it just happens!!
    मज़ा आ गया!

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  15. रोचक पोस्ट..........पेंटिंग्स भी अच्छी लगीं..........पोस्ट पर क्या कमेन्ट दें, हम तो इस बला से अनजान ही रहे.........जीवन में इश्क जैसा कुछ हुआ तो शादी के बाद वो भी पति से..........अब और क्या कहें। फ़िर आपकी लेखनी तो है ही लाजवाब।

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  16. आपके शुक्ला जी बहुत ही पहुँचे हुये इंसान निकले! काश हमें भी समय पर मिल जाते .....!!

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  17. dr. saahab main to shuru se ek hee baat kehtaa aaya hoon ki aap dr hain ya dil kee dawaai, kamaal hain shuklaa jee aur usse bhee kamaal unkaa ishk kaa falsafaa aur sabse behtar aapkaa lekhan. sach hai dil kee baat....

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  18. इश्क के तमाम नाकाम , "हाँ ओर ना " के दोराहे पे खड़े प्रेमी उनके दर पे आते ....बिगडे हुए केस संभल जाते ..
    यारो का बस चलता तो उन्हें पदमश्री दिलवा देते ......

    शुक्ला जी अपनी प्रतिभा ओर अंग्रेजी मेजर के साथ विदेस में पलायन कर गये ...

    अ....अहा....ये क्या किया आपने.....? जहां कहानी में क्लाईमैक्स आने लगा था ...आपने शुक्ला जी को विदेश भेज दिया......??
    अभी तो हमने डा. अनुराग का केस भी संभलते हुए देखना था ....!!

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  19. आप के इश्टाइल के कायल हो गये…।:) बहुत खूब लिखा है…असमय पड़ी फ़ुहार की क्ल्पना मात्र से हंस हंस कर बुरा हाल है। शुक्ला जी की गाथा से बहुत कुछ याद आ गया, अभी सुनाते हैं…।:)

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  20. हाँ , डा अनुराग के केस पेपर्स क्या कहते हैं ये हमें भी सुनना है…।:)

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  21. बहुत अच्छा चरित्र चित्रण किया आपने शुक्ला जी का....

    देयर इस नो रूल इन इश्क़, मेरी जान,

    बड़े ही नटखट अंदाज से,शुक्ला को हीरो बनाया श्रीमान,

    जीनियस डोंट फ़ॉल इन लव,इट हैपेन्स,

    आख़िर दिखा ही दिए शुक्ला जी,अपना परफार्मेंस,

    इट हैव टोल्ड दैट, ग़लती से सीखने को मिलता है,

    ज़रूरी नही की हम खुद के काम आएँ तभी सब ठीक चलता है,

    अपने अनुभव से जब दूसरे का काम बनाएँ,

    थोड़ा कम इंटेलिजेंट ही सही,जो दूसरों के काम आएँ,

    वही आदमी आजकल शुक्ला जी की तरह फेमस होता है,

    और जीनियस ही नही वो बहुत बड़ा जीनियस होता है.

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  22. kya baat hai anurag sir.. beete dino ki yad dila di.. aap to jante hi hain apki hamari kaun ek hi hai.. hostlers wali.. is cheez se khoob mukhatib hue hain ham bhi.. aur bahut acche se jante hain.. pyar kiya nahi jata.. ho jata hai .. :)

    bahut mast post.. ek aisi hi kahani hamare paas bhi hai .. kabhi aapko bataunga ...

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  23. ओहो ! आनंदम ! आनंदम ! मजा आ गया इस बार तो.
    इस शुक्लाजी के ट्रू कॉपी से तो हम भी मिल चुके है :-)
    वैसे एक राज की बात है आजकल अपने नियम भी... छोडिये फिर कभी... टिपण्णी पब्लिक होती है.

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  24. "जब भी आने वाली पीढिया इश्क लिखकर गूगल में खोजेंगी शुक्ला जी जैसे वहां कोई लौ थामे मिलेगे ..."

    पूरा इत्तेफाक रखता हूँ । बेहतरीन प्रस्तुति । ऐसी ही प्रविष्टियों के लिये मैं टिप्पणी का एक सौन्दर्यशास्त्र ढूँढ़्ता रहा, पर वह भी शायद इश्क की तरह ही.......

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  25. सुन्दर। बेहतरीन। बहुत दिन बाद ऐसी पोस्ट पढ़ी! मजा आ गया।

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  26. वाह रे ....शुक्ला जी .....अनुराग जी के जरिये शुक्ला जी बोलते भये हैं मगर रत्ती भर बैलेंस नहीं बिगडा है ! क्या खूब !

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  27. 'डोंट फॉल इन लव से इट हेप्पेंस ' तक का शुक्ला जी का सफ़र जबरदस्त था!:D
    पूरी दास्तान जैसे आँखों के सामने से हो कर गुज़री .. बहुत दिनो बाद आप के हॉस्टिल का रोचक संस्मरण पढ़ने को मिला..
    :) अभी हो सकता है Shukla jiशायद विदेश में लव गुरु बने हुए हों???

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  28. वाह शुक्ला जी की दास्तान सुनकर मजा आ गया। कई भावों से होकर गुजरें जी। एक जगह तो मारे हँसी के ऐसे उछले कि .......। वक्त ने शुक्ला जी का जुमला बदल दिया। हकीर जी के कमेंट की आखिरी लाईन से हमारी भी सहमति है। हम भी तो सुने कि अनुराग जी के केस का क्या हुआ था।

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  29. गुरूजी बहुत दिनो से सोच रहा था कि कालेज के ज़माने की गठरी को टटोलूं। पर मौका ही नही मिल रहा था।आपने फ़िर से हमारे यादों की पोटली पर पड़ी धूल झाड़ दी। आपकी प्रेरणा लेकर कुछ लिखना पड़ेगा सब्जेक्ट भी चेंज होगा और थोड़ा मूड भी। बहुत बढिया लिखा डा साब आपको तो लिखा-पढी वाला डा हो जाना चाहिये।

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  30. पिछली दो पोस्टो से आप मूड में नजर आते है .वरना आपकी पोस्ट पढ़कर अक्सर इन्सान थोड़ा संजीदा हो जाता है ,ऑरकुट पर आपकी नज़्म पढ़कर पढ़कर हम आपके ब्लॉग की ओर चले आए .ओर आपको किस्सागोई का एक खान मानते है ,ये मै नही रंजन जी कहते है जो सुना है जल्द ही अपने गजल ओर नज़्म की किताब पबिलिश करने वाले है ,आज फ़िर कहती हूँ आपकी कुछ किस्से हर होस्टल में एक किताब की शक्ल में बांटे जाने चाहिए .कल आपकी पोस्ट पढ़ी ओर हंस हंस के दोहरे हो गए .सरदार जी को इमेजिन करके .
    यहाँ आपकी पाँच पोस्ट दे रही हूँ जो मुझे बेहद पसंद है
    हर स्त्री के भीतर होती है एक लड़की ओर दूसरी है

    जाग जायेगा कोई ख्वाब तो मर जायेगा तीसरी पोस्ट मुझे हमेशा याद रहती है
    सर पे धुप मिली तो याद आया मेरे आँगन में एक बरगद रहता था चौथी पोस्ट जो आप ने अपने बेटे के लिए लिखी है
    I AM SORRY BETA ओर पांचवी पोस्ट
    अपने अपने तर्कों से गुजरते हुए वैसे तो पिता लो लेकर लिखी आपकी पोस्ट भी मुझे पसंद है





    पहली है

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  31. dil khush ho gyaa ishk ki ye dastaan padh kar, hamein bhi apna hostel, apna ishk aur jaane kya kya yaad aa gaya :)
    dilfareb post!

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  32. "जादूगर, तेरे नैना.." की तर्ज पे यहाँ गाने को मन कर रहा है डाक्टर साब "जादूगर, तेरे चिट्ठे.."
    वर्ष 94 से 96 तक AFMC, पुने में होने वाले दो-तीन फेस्ट हमने भी अटेंड किये थे NDA से भाग कर...एक शालिनी हुआ करती थीं, पढ़ी-लिखी लड़की डाक्टर बनने वाली...
    इश्क की इस अजूबी कहानी याद दिला गयी वो शालिनी और शुक्ला जी का चरित्र गैब्रियल मार्केज़ की अभूतपूर्व दास्तान "Love in the Time of Cholera" के बेमिसाल नायक फ्लोरेन्टिनो की याद दिला गया...
    एक अनूठा शब्द-चित्र..

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  33. पहले तो शुक्ला जी का पता मेल कर दीजिये, दो चार भक्त और भिजवाँ दूँ जो मुराद पूरी होने की शर्त पर सब कुछ बेंच बाच के विदेश से भी उनका आशीर्वाद ले आयेंगे :) :)

    दूसरी बात ये बताईये कि आप की हर पोस्ट ऐसे किस्से क्यो याद दिला देती है, जो कमेंट में शेयर नही कर सकते और दिमाग में यादों वाली कोठरी में गज़ब जोर मारने लगते हैं।

    किशोरावस्था से आज तक इश्क़ के संबंध में दो चूजें बड़ी कॉमन देखी कि जो इसका सब से बड़ा अनुयायी होता है वो थोड़े दिन में किसी एक के डिफॉल्टर होने पर इसे बस बातें हैं बातों का क्या बताने लगता है और जो इसे सबसे बड़ा भरम और टाईमपास मानता है वो एक उम्र पर आ कर ऐसा जबर्दस्त मरीज बनता है कि भाई बड़े से बड़े काउंसलर को खुद की काउंसलिंग करानी पड़ जाये।

    अभी लैटेस्ट ही दो मरीज पड़े हैं मेरे पास :) :)

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  34. इस अपमान से आहत हॉस्टल वापस लौटे शुक्ला जी एक महीने के लिए कुछ किलोमीटर के दायरे के अज्ञातवास में बिना औपचारिक घोषणा के चले गये ..यहाँ पर बिना औपचारिक घोषणा के कोई कही नहीं जाता..

    बरगद वाली पोस्ट तो अपनी भी फेवरेट है.. वैसे बड़े दिनों बाद आप मूड में नज़र आये .. सरदार को तो इमेजिन करके ही मज़ा आ गया.. अनूप जी का कमेन्ट देखकर लग गया कि वो एक लाईना में मास्टर है..

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  35. कुल सार बाक्स के अन्दर लिख दिया डाक साब ने.

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  36. डॉक्टर अनुराग, मेरे साथ भी एक शुक्लानुमा चरित्र था. वह भी शहर के एक नामी डॉक्टर की बेटी के इश्क में गिरफ्तार हो गया था. असर ऐसा हुआ कि थर्ड ईयर में शुक्लानुमा साहब हॉस्टल छोड़कर डॉक्टर साहब के नर्सिंग होम वाले मोहल्ले में कमरा लेकर रहने लगे. उनके लिए जिस शे'र का पाठ कालेज में होता था, वह अर्ज है. "इश्क को सर दर्द कहने वालो, हमने यह दर्द सर ले लिया है. अब वह हमसे बचकर जायेंगे कहाँ, हमने उनके मोहल्ले में घर ले लिया है."
    लिहाजा, आज इतने साल बाद उस घटना और कालेज के उस गुजरे जमाने की याद दिलाने लिए शुक्रिया.

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  37. अद्भुत पोस्ट...आनंद आ गया.....शुक्ल जी में मुझे अपनी जवानी नज़र आयी....हम क्या किसी शुक्ल जी से कम थे...हाय रे वो दिन क्यूँ न आये....
    नीरज

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  38. टिप्पणी देने के लिये बहुत स्क्रोल करना पडता है । साढे पाँच फूट की लो जैसे वाक्य पहले कही नही पढ़े । यही आपकी लेखनी का कमाल है । जो यहाँ पढ्ते है सब नया है ।

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  39. However, there is one rule for your prose. It has to have a Triveni!

    Where's my Triveni???

    RC

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  40. अनुराग जी बहुत मजेदार पोस्ट पढ़वाई आपने धन्यवाद। सही में हर साल और हर जगह शुक्ला जी जैसे दार्शनिक मिल जायेंगे इश्क के पाठ पढ़ाने को इश्क के मारों को।

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  41. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  42. बहुत अजीब सी बंदिशे होती हैं इश्क की, न उसने कैद रखा न हम फरार हुए .

    शुक्ल जी की डिमांड creat करके आपने मार्केटिंग के क्षेत्र में भी कदम रख दिया.
    और क्या जमा के कदम रखा है.
    साधु साधु !!!

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  43. अनुराग जी
    हमारे कॉलेज में ऐसी कई जींस वाली होती थी जिन्हें हमने ५ साल तक कभी किसी दुसरे भारतीय परिधान में नहीं देखा .एक दो तो ऐसी थी सोचते थे जींस पहनी कैसे होगी ?पहन ली पर उतारने में कितनी मेहनत करेगी .हमारे यहाँ भी शुक्ल जी तरह एक हुआ करते थे ,हमारे एक दोस्त को किसी भारी भरकम हसीना से इश्क हो गया .लोग उन्हें चिढाते वे मानते नहीं एक बार वे लाइब्रेरी में पढ़ रही थे ये गए ओर बातो बातो बाद खुले हाथो को फैलाकर वापस आ गए बोले "देख तेरे इश्क का माप "हमारे आशिक बोले मोटी नहीं है बस थोडी थोडी healthy है .इन्ही का एक जुमला था ऐसी लड़कियों के लिए
    अक्सर आपका ब्लॉग पढता हूँ पर टिपण्णी नहीं करता .इस बार पढने के बाद रोक नहीं पाया इसलिए लिख रहा हूँ.
    -राहुल
    मुंबई ,विले पार्ले

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  44. आनंद आया इस शुक्ला पुराण को पढ़कर।

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  45. लगे हाथ अगर आपने अप्नी वाली बतिया भी बता दी होती तो डबल टाइप का मज़ा आ जाता न!

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  46. Khoob Bhaya aapka Dastane Ishq. Ishq ne Shuklaji ko kamka aadmi bana diya warna we to aadmi the nam ke.

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  47. कम्बख्त ज़िन्दगी बैलेन्स का खेल ही तो है....
    जो फिसल गया सो........

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  48. सही कहा आपने, दिन आखिर कहां किसी नियम कानून को मानता है। इसीलिए कहा जाता है कि दिल तो पागल है।
    ----------
    सावधान हो जाइये
    कार्ल फ्रेडरिक गॉस

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  49. बहुत ही खुबसूरत लिखा है आपने ......
    एक श्वेत श्याम सपना । जिंदगी के भाग दौड़ से बहुत दूर । जीवन के अन्तिम छोर पर । रंगीन का निशान तक नही । उस श्वेत श्याम ने मेरी जिंदगी बदल दी । रंगीन सपने ....अब अच्छे नही लगते । सादगी ही ठीक है ।

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  50. बेहद दिलचस्प पोस्ट !
    दिल गार्डेन-गार्डेन !

    लाईफ की रील स्वतः रिवाइंड हो गयी !
    वो भी क्या दिन थे .... "बिजी विदआउट वर्क" वाले !

    उन दिनों अपन को भी भाई लोगों ने कंधे पे चढा रखा था !
    वो क्या था कि मेरी हैण्ड राईटिंग अच्छी थी और शेरो-शायरी व कविताओं का शौक था ! ग्रीटिंग भी खुद ही तैयार करता था !
    दो-चार से "पेन फ्रैंडशिप" भी थी !

    मेरी बड़ी डिमांड रहती थी .....
    मैं भी भाव बढाता हुआ ओझागिरी करता हुआ मरीज से
    पूछता था .... क्या नाम है ? ... गाने का शौक है ?
    फिल्म वगैरह देखती है कि नहीं ?..
    हिंदी मीडियम है या इंग्लिश मीडियम ?
    कौन सा हीरो पसंद है ? ................
    पूरा बायोडाटा पूछने के बाद दो-तीन दिन बाद कुछ पंक्तियाँ
    लिखकर दे देता !

    नुस्खा कारगर होता तो अपना कद बढ़ जाता !
    अगर फेल हो जाता तो उल्टा चढाई कर देता ...
    " अबे तेरे से मन किया था न उसके सामने सिगरेट पीने से ... अब भुगत बेटा " ,,,,,,,,,,,,,,,,

    ऐसी ही कितनी ही बातों को याद करके ठहाके लगाने को
    मन करता है !

    एक डर भी है कि अगर कोई साथ का पुराना साथी ब्लॉगर
    हो गया तो कहीं ऐसा ही एक पोस्ट मेरे नाम न कर दे !

    उत्तर देंहटाएं
  51. "जीनियस डोंट फाल इन लव -इट हेप्पंस "

    शुक्ल जी की बात में बहुत दम है !!पोस्ट बहुत ही रोचक लगी,इस पोस्ट के हर लफ्ज़ ने आखिर तक बांधे रखा!!

    उत्तर देंहटाएं
  52. डॉक्टर साहब!!!! बहुत बढ़िया पोस्ट पढाई आपने.. आपकी कलम में जितने हृदयस्पर्शी भाव हैं, हास्य भी उतना ही लाजवाब है...
    बहुत बढ़िया...

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  53. तीन दि‍न पहले पढ़ा था पर आज लि‍ख पा रहा हूँ- लाजवाब।

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  54. Sir, it’s nice to speak on such issue but result is Zero, it’s a dilemma of our country in present perspective. Such big issue not only bother single person but shakes entire Nation. But keep on converse over shaking values.
    --Kindly visit your old well-wisher too I invite you. Your shiv sagar, Meerut

    उत्तर देंहटाएं
  55. hi anurag jee.

    Mere blog par aane ke liye shukriya...umeed hai bhavishya mein fir se guzrenge.

    Hindi mein blog likhne ki apni challenges hoti hai...par aap ka blog kaafi mashoor hai..Keep up the good work.

    उत्तर देंहटाएं
  56. hi anurag jee.

    Mere blog par aane ke liye shukriya...umeed hai bhavishya mein fir se guzrenge.

    Hindi mein blog likhne ki apni challenges hoti hai...par aap ka blog kaafi mashoor hai..Keep up the good work.

    उत्तर देंहटाएं
  57. ha ha ha
    Shukla jee ki kahaani laajwaab lagi !!!
    baat kahne ki shaili koi aapnse seekhe doctor saab!!!

    ek baat poochani thi, iss post mein jo display pic hai, wo kiski banaai painting hai??
    yun lagtaa hai jaise camere se copy ke panne ki pic li huyee hai!!!

    उत्तर देंहटाएं
  58. उड़ी बाबा, बड़ा मस्त पोस्ट चेंपेला है, भाई !
    पण इसे ठेला कब कूँ ?
    अपुन को अब्बी अब्बी पता चला, फ़ौरन आयेला इधर ।
    भाई, ज्यास्ती मस्त पोस्ट है !

    उत्तर देंहटाएं
  59. !बोहोत झोमेल्ला होए गेल्ला बाबा....हंसते-हंसते पेट दुखेला बाबा.....ए अनुराग ऐसा ना लिखा कर भाई.....दिमाग कपार पहाड़ कर बाहर आ जायेला बाबा.....!!

    उत्तर देंहटाएं
  60. laga jaise sari duniya ke Namune log aap hi ko mil gaye hai :) .... jab tak aise shuklaji milte rahenge.....love stories mein kamiya nahi hogi!!! jai ho!!

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  61. इश्क में एक स्टेज ऐसी आती है जब हाँ ओर ना के बीच बालिश्त भर का फासला होता है जरा सा बेलेंस बिगडा नहीं के ........-कर्टसी शुकला

    bahut interesting post hai doctor sahab :)

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  62. इश्क में एक स्टेज ऐसी आती है जब हाँ ओर ना के बीच बालिश्त भर का फासला होता है जरा सा बेलेंस बिगडा नहीं के ........-कर्टसी शुकला

    ये इश्क का फलसफा तो वाकई गज़ब है , आपको पढना हमेशा एक नया anubhav होता है

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  63. I do not agree that Genius don"t faal in LOVE.

    I am in Love with your Blog......!!!!!

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  64. जीनियस डोंट फॉल इन लव इट हैपन्‍स। यह ट्विस्‍ट गजब का था। :)


    आज तो सर्वकालिक श्रेष्‍ठ लेख लगा अब तक का।

    आभार अनुराग जी।

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  65. वाह....मन आनंदित हो गया ऐसी रचना को पढ़कर

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  66. मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! आपने बहुत ही सुंदर लिखा है ! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

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  67. शुक्ला जी जब कभी पी कर सेंटी हो जाते तो अक्सर कहते "इश्क को टेस्ट मैच के ओपनिंग बेट्समेन की माफिक खेलना चाहिये....लौंडो में सब्र नहीं है .....उन दिनों बोयस होस्टल में दो चीजे बड़ी फेमस थी एक ....किसी कवि की एक काविता
    जो कुछ यूँ थी ...
    मै आपकी मित्र हूँ
    सबसे अच्छी मित्र.....
    आप मुझसे ओर क्या चाहते है ?
    अक्सर लड़किया परपोज़ होने पे लम्बा गेप लेती .....उनका शुरूआती जवाब यही होता था ......तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो...........क्या हम दोस्त नहीं रह सकते ? मैंने तुम्हे कभी इस नजर ने नहीं देखा ?
    दूसरे अपने जग्गू दा (जगजीत सिंह )..आजकल भले ही जग्गू दादा कफ सिरप बेचते हो.....पर उन दिनों हर तीन महीने में उनकी एक नयी कसेट बाज़ार में आती ओर हॉस्टल के एक ख़ास रूम में शाम ढले जब तक बजती ....जब तक नयी रिलीज़ न हो.....शुक्ला पुराण के वक़्त...."तेरा शहर कितना अजीब है ,न कोई दोस्त है न रकीब है "का दौर था .....
    कुछ दो तीन बार ठुकराए प्रेमी जरूर मेहंदी हसन तक पहुँचते फॉर ए चेंज .....
    शुक्ला जी बहुत अच्छे इन्सान है ....एक्साम के वक़्त भी बहुत मदद करते थे.....वे अक्सर कहते ..साले हिन्दुस्तानियों में बस कोमन सेंस की कमी है ....ये डाइलोग खासतौर से अपने यू. पी से लौटकर दो चार दिनों तक उनकी जबान पे रहता ..

    ये भी सच है की इश्क का पहला रुल है की इसमें कोई रुल नहीं है जैसा की .....@दिलीप जी ने भी कहा है ..कभी कभी उल्टा भी हो जाता है....हमारे एक दोस्त चार महीने तक लड़की के सामने पहुँच के हकले हो जाते थे एक दिन बियर पी के उसकी चलती क्लास में से उसको बुलवा के बोल आये ....आज दो बच्चो के बाप है .....

    इश्क ओर हमारा बचपन का साथ है....पहला प्यार हमें अपनी नर्सरी की टीचर से हुआ ....हम उनके पास खड़े रहते .रोज वे हमें दस्त बिन पे मुंह पे टेप लगाकर बैठाती.............आठवी क्लास में हमने पहली बार देहरादून में किसी को आई लव यू बोला था .......शुक्र है बात हमारे पिता श्री तक नहीं पहुंची.....वरना ...

    आने वाले जमाने में लोगो की प्रोफाइल पे उनका इसक का ब्यौरा भी होगा .....मसलन पहली बार कब सेंटीयाये ..पहली बेहूदा काविता कब लिखी......आखिर टेक्नोलोजी के कुछ नफा नुक्सान भी होंगे ना !!!!!!!!!
    आप सभी का शुक्रिया

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  68. अनुराग...इन शुक्ला जी से तनिक हमें भी मिलवा दो. सच्ची जनम भर तुम्हारे आभारी रहेंगे!

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  69. wo hostel hi kya jahaan aise shukla ji na ho...ek waqt to main khud apne dosto ke beech pyaar mohabbat ko leke apne unconventional khyaalo ke lie famous tha,ab shayad meri ye baatein unko vaahiyaat lagti hai :D

    padhke bahut zyaada mazaa aaya...ekdum itna sachha sa maloom hua sab kuchh...jaise dikh raha ho saamne :)

    www.pyasasajal.blogspot.com

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  70. ...ये बेलेंस बन भी जाए तो क्‍या है..

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  71. ये एक दूसरे शुक्ला (फुरसतिया) की वजह से इस छूटी पोस्ट (जाने कैसे?) पर नजर गई. बट, इट हैप्पन्स ओनली टू जीनियस?

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  72. वाह कमाल की शब्दों की जादूगरी और शुक्ला जी (दोनों, आपके होस्टल वाले और जिनके कारण हम यहाँ आये) को धन्यवाद।

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  73. Ba-rasta anoop shukla jee ki chitthacharcha saal bhar baad yaha pahuchein hai aur yahi soch rahe hai ki tab kaise itni acchi yah post hamse baki rah gai thi padhne ko.
    sal bhar baad padh rahe hain lekin fir bhi utna hi rochak aur majedar.....

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  74. हा हा हा
    सही बात यू.पी. के लोगों से जितना बचे रहिये उतना ही बढ़िया है. :)

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  75. यकीन मानिए अनुराग... पता नहीं आज अचानक ये पोस्ट कैसे सामने आ गई...लेकिन जो होता है अच्छे के लिए ही होता है :) कई दिनों के बाद अलसाया सूरज निकला था अपनी धूप के संग जिसके साथ हम भी अलसाए और उदास थे...इस पोस्ट ने तो मुस्कान की लम्बी रेखा खींच दी चेहरे पर...:)शुक्रिया शुक्रिया

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  76. बहुत खूब लिखा | लाजवाब लेखन |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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