2008-07-03

शबे-फुरकत का जागा हूँ ....तुम आयो तो कुछ बात बने ......


दो ख़्याल चले थे साथ-साथ
इक नज्म के वास्ते
रास्ते मे मगर...... जुदा हो गये
अधूरी नज्म लिए बैठा हूँ कब-से.......

ना जाने कब हम-ख्यालात हो जाये

33 टिप्‍पणियां:

  1. अधूरी नज्म लिए बैठा हूँ कब-से.......

    ना जाने कब हम-ख्यालात हो जाये
    bahut khub doc saab,juda huye khayal mile aur nazm puri ho yahi dua hai

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  2. ना जाने कब हम-ख्यालात हो जाये..बहुत खूब ..

    [सलाह ]
    नज्म पूरी करे डॉ साहब :) ख्याल क्या पता तब मिल जाए :)

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  3. koi baat nahin...intzaar karenge aap ki nazm ke poore hine ka....

    [practicle sujhav-waise 'dono khyalon ko talaash kar sulah karaaa deejiye[/milaa dejeeye]--is tarah se wo aap ki nazm hi ban jayenge...

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  4. अनुराग जी इस नज्म़ को तो मेरे आज के आलेख हिन्दी-उर्दू और हिन्दुस्तानी के साथ होना चाहिए था।

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  5. ना जाने कब हम-ख्यालात हो जाये

    dua karenge anurag ji aapke ye khayal jald hi mil jaaye

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  6. अधूरी नज्म लिए बैठा हूँ कब-से.......
    :
    :
    hmmm....shayad adhuri nazm hai isi liye aap itna khubsurat likh paaye...suna hai likhne ke liye dil mein aur aaspaas dard ka hona bahut jaruri hai.....galat hu agar to maafi chahungi...

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  7. मुंतज़िर जिनके हम रहे उनको
    मिल गये और हमसफ़र शायद...

    कुछ ज़रा से हर्फ़ों में पूरी कहानी कहनी कोइ आपसे सीखे!!!

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  8. अनुराग जी, ये "मगर" बीच में क्यों आ जाता है? आपने चंद शब्दों में लोगो की जिंदगीयाँ बयान कर दी।
    "दो ख़्याल चले थे साथ-साथ
    इक नज्म के वास्ते" ...............

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  9. दो लफ़्जो मे सारी कहानी ही लिख दी आप ने,बहुत खुब.

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  10. arse bad aapke blog par aayi aor sari post padh dali ,pita aor dr day par likhi aapki post ankhe nam kar gayi..is nazm ko aj maine uutar liya hai...apni badi bahan ko jo austrilia me hai ,bhej rahi hun.aap shayar hai ya lekhak ya dr?

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  11. kahte hain kuch cheezen apne adhoorepan ke saath jyada khoobsurat hoti hain....

    again beutiful lines frm u....

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  12. "ना जाने कब हम खयालात हो जाए..."
    अनुराग जी इश्वर करे जल्दी ही हो...आप जैसा इंसान इंतज़ार करे ये ठीक नहीं लगता.
    आप तो बिन कहे कितना कुछ कह जाते हैं...वाह.
    नीरज

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  13. इस नज़्म का अधूरा रह जाना
    कई नई नज़्मों की ज़मीन बनाएगा.
    इंशा-अल्लाह !

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  14. क्या बात है डॉक्टर साहब!! बहुत खूब..अधूरेपन में पूरा अहसास!!

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  15. sir g...is baar to khayal ko bas adhura chhod diya...ek tishnagi si reh gayi...

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  16. Tareef nahin kar sakta aapki boss... kyuki lekhak nahin hun.. per aap ke paas sach main hunar hai jo apne dil ki baat kalam se doosron tak pahucha sakte ho !!!!

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  17. सुन्दर! प्रतीक्षा करिये मित्र। विचार ही हैं - कभी अनायास जुड़ जाते हैं। कभी बहुत प्रयास के भी नहीं जुड़ते।

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  18. आप सभी का शुक्रिया .....तहे दिल से ....

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  19. वाह ! क्या जज़बात व्ह्हेडे हैं डो.साहब।

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  20. दो ख़्याल चले थे साथ-साथ
    इक नज्म के वास्ते
    रास्ते मे मगर......
    "bhut acchey, pic along with this post is eye catching"

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  21. दो ख़्याल चले थे साथ-साथ
    इक नज्म के वास्ते
    रास्ते मे मगर...... जुदा हो गये
    अधूरी नज्म लिए बैठा हूँ कब-से.......

    ना जाने कब हम-ख्यालात हो जाये

    meri khayal mein tou ye nazm poori hi hai...ek adhhure rishte ki kahani...hai na?

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  22. ऐसे कैसे..ख्याल भी बिछडा करते है आज जाना..

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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