2008-07-05

टुकडा- टुकडा जिंदगी


पहला टुकडा

इन अहसासों को जरा कसकर पकडो
बहुत मशहूर है इनकी बेवफाई के किस्से






दूसरा टुकडा

तुमसे जो होकर गुजरा है ,
मुझ तक पहले पहुँचा था
इन लम्हों का सफर बहुत लंबा है



तीसरा टुकडा

कई बार आधा प्याली चाय ,
ओर एक बंटी सिगरेट मे ही
आसान हो जाती है मुश्किलें


चौथा टुकडा

रोटी दाल की फ़िक्र में गुम गये
मुफलिसी ने कितने हुनर जाया किये



पांचवा टुकडा

कुछ कांटो से चुभते है
सब रिश्ते गुलाब नही होते

35 टिप्‍पणियां:

  1. Hamaree dua hai
    aap ke her Rishte
    Gulab ho jayein,
    aur
    her Din,Suhana ho !
    Bahut khoob ,
    Gujre lamhe,
    thame nahee jate,
    yaadein, bhulaye
    bhooltee naheen -
    sneh,
    L

    उत्तर देंहटाएं
  2. कुछ कांटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते
    Wah!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. रोटी दाल की फ़िक्र में गुम गये
    मुफलिसी ने कितने हुनर जाया किये

    अनुराग जी
    आओ अनुराग एक ख्वाब बुनते है
    इन टुकडो मे चलो रंग भरते है॥

    उत्तर देंहटाएं
  4. डा. साहब,
    आपके ब्लोग पर एक चीज़ जो बार बार खींचकर लाती है वह है परिस्थितियों से आपकी संवेदनशील तटस्थता। यह निर्ममता की स्थिति तक पहुँच सकती है मगर आपकी संवेदनाएँ एक एक शब्द में अद्वितीय रूप से झलकती हैं। यही बार बार मुझ जैसे टिप्पणी-कंजूस को यहाँ खींच लाती है और टिप्पणी करने पर भी मजबूर करती है।
    मुझे लगता है कि आप अद्भुत संस्मरण लिख सकते है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपके लिखे हर लफ्ज़ को दिल की बात कहा जा सकता है और दिल की बात पर कोई क्या टिप्पणी करे .हर टुकडा जिंदगी का जिंदगी की रूह से जुडा है ..खासकर ..यह

    इन अहसासों को जरा कसकर पकडो
    बहुत मशहूर है इनकी बेवफाई के किस्से


    तुमसे जो होकर गुजरा है ,
    मुझ तक पहले पहुँचा था
    इन लम्हों का सफर बहुत लंबा है

    और यह सबसे खुबसूरत बात कह दी है आपने चंद लफ्जों में

    कुछ कांटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते..

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  6. ये चित्र और पांच टुकड़ॊ से कोई जिग-सॉ पजल हल करनी हो तो अपने जैसे अकाव्य मर्मज्ञ के लिये महा कठिन है!
    खैर, जब स्वास्थ्य नरम हो तो आदमीं साफ साफ सोच नही पाता।

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  7. कुछ कांटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते

    डाक साब ये यथार्थ बहुत अच्छा और सटीक लगा.उपरोक्त दो पंक्तियों से ये संदेश भी लिया
    कि जो गुलाब बन कर ज़िन्दगी के आसपास
    मौजूद हैं उनकी क़द्र करनी चाहिये.

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  8. :-(


    शुक्रिया करो उन बेवफ़ा एहसासों का,
    जिनसे
    इतनी ताकतवर लाइनें निकल कर आ रही हैं

    इन एहसासों को सहेज़ कर रखो;
    यह तो ज़िन्दगी जिये जाने की सनद हैं
    हाँ, कमीनी बेवफ़ा को जरा इधर तो आने दो !

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  9. काँटों से रिश्तों से जो दर्द मिलता है वो भी तो सहेज के रखते हैं, गुलाबों से रिश्तों की खुशबू की तरह...नहीं?

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  10. कुछ कांटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते..
    --- बहूत खूब, उम्दा ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. 'रोटी दाल की फ़िक्र में गुम गये
    मुफलिसी ने कितने हुनर जाया किये'
    न होती फिक्र अगर ये
    हम हुनरमंद न होते।

    उत्तर देंहटाएं
  12. इन अहसासों को जरा कसकर पकडो
    बहुत मशहूर है इनकी बेवफाई के किस्से
    ------------------------
    तुमसे जो होकर गुजरा है ,
    मुझ तक पहले पहुँचा था
    इन लम्हों का सफर बहुत लंबा है
    :
    chotisi baate aapki kalam ka rasta pakar badi ho jaati hai.....

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  13. कुछ कांटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते
    wah doc saab sahi,bahut khub,har tukda apne rang ranga hai zindagi ke sundar

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  14. डाक्टर साहब एक हफ्ते के लिए घर आया हू... मैं जिसे सबसे ज्यादा मिस कर रहा हु वह है यह ब्लॉग....दिल की बात... क्या खूब लिखते हो यार.... मुझे पता है आप उम्र में काफी बड़े हैं लेकिन अगर यहाँ नही बोलूँगा तो इस पोस्ट का मतलब खत्म हो जाएगा.....
    कुछ कांटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते

    इसलिए तो यार कह रहा हू.... सभी लोगो को मिस कर रहा हू.... मुझे किसी चीज का नशा नही है लेकिन लगता है.... ये ब्लॉग भी....

    उत्तर देंहटाएं
  15. कुछ कांटो से चुभते है
    सब रिश्ते गुलाब नही होते.
    उम्दा ...

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  16. जिंदगी एक भरपूर सुखद एहसास की तरह जी जानी चाहिए. टुकड़ों में क्यों जीते हैं जिंदगी लोग?

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  17. तुमसे जो होकर गुजरा है ,
    मुझ तक पहले पहुँचा था
    इन लम्हों का सफर बहुत लंबा है

    I love this one dr sahab.

    उत्तर देंहटाएं
  18. क्या कहूँ, हर टुकडा जिंदगी की सच्चाइयों का आईना दिखाई दे रहा है.
    इन अहसासों को जरा कसकर पकडो
    बहुत मशहूर है इनकी बेवफाई के किस्से


    तुमसे जो होकर गुजरा है ,
    मुझ तक पहले पहुँचा था
    इन लम्हों का सफर बहुत लंबा है

    एक एक लफ्ज़ इतना सच्चा है कि कहने को कुछ रह ही नही जाता, हाँ कड़वा ज़रूर है लेकिन जिंदगी कि सच्चाईयां भी तो उतनी ही कड़वी हैं, उम्मीद करती हूँ सच्चाई का ये सफर यूंही चलता रहेगा.
    अभी आपको और पढ़ रही हूँ...जैसे जैसे पढ़ती रहूंगी बोरे करती रहूंगी...

    उत्तर देंहटाएं
  19. कई बार आधा प्याली चाय ,
    ओर एक बंटी सिगरेट मे ही
    आसान हो जाती है मुश्किलें
    जी,सच मे आप ने बहुत खुब लिखा,क्या बात हे भुला जमाना याद दिला दिया ,लेकिन वो बंटी सिगरेट ओर आधा कप चाय अब ढुढने पर भी नही मिलती.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  20. छठा टुकड़ा:

    मैंने लाचार समझकर उसे दस रुपये दिये थे
    वह मुझे बिना लाठी शराब की दुकान पर दिखा

    कितना अजीब है दुकान का सड़क पर होना!

    उत्तर देंहटाएं
  21. bahut khoob doc saab !

    Paanchava tukda lagta hai pahle bhi kisi post mein likha tha aapne ? bahut achche tukde.

    उत्तर देंहटाएं
  22. सरसरी ही सही कई चीज़ें देख गया .आपकी काविशों और कोशिशों को देख तबियत खुश हो गयी .
    कई पंक्ति जेहन नशीं होने की कुवत रखती हैं .दुआ यही है ,जोर-कलम और ज्यादा .कभी फ़ुर्सत मिले तो इस लिंक पर भी जाएँ और अपनी कीमती राय से नवाजें .www.shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com और www.hamzabaan.blogspot.com
    ब्लॉग मुबारक हो .अल्लाह नज़र-बद से बचाए .आमीन.

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  23. सारे गम समेट दिए आपने तो इन टुकडों में।
    बहुत खूब।

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  24. gulaab ki hi tarah sundar aur komal.....kintu hriday vyathit hai shayad...

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  25. तुमसे जो होकर गुजरा है ,
    मुझ तक पहले पहुँचा था
    इन लम्हों का सफर बहुत लंबा है

    " so real n true, bhut khubsuret khyal"
    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  26. इन अहसासों को जरा कसकर पकडो
    बहुत मशहूर है इनकी बेवफाई के किस्से

    bahut gahri baat hai

    उत्तर देंहटाएं
  27. आप सभी का शुक्रिया.....बस कल कुछ खास लिखने का मन नही था इसलिए कुछ पुराने शेर डाल दिए साथ में कुछ ....मनीष जी आपने ठीक कहा है.... आपने कही किसी पुराने पोस्ट में जरूर पढ़ा होगा

    उत्तर देंहटाएं
  28. aapki baaton ki taarif kiye bina mushkil hai, aur tarif bhi aapke hi jitni khoobi se karne ko mann chahata hai badi mushkil hai :) par bahut khoob likha hai:

    तुमसे जो होकर गुजरा है ,
    मुझ तक पहले पहुँचा था
    इन लम्हों का सफर बहुत लंबा है

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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