2008-07-22

एक दिल जिसकी रगों में उम्मीद ओर हौसले दौड़ते है


सई को अपने बारे मे ज्यादा कहना पसंद नही है ,उससे मैं कभी रूबरू भी मिला नही हूँ ओर सच बतायूं कभी फोन पे भी बात नही की है ,सिर्फ़ sms ही इधर उधर
गये है हाल मे ही एक गुजारिश की थी उनसे कुछ लिखने की ....मुझे मान देते हुए
उन्होंने कुछ भेजा है .....

दुनिया से मेरा परिचय...इसने कराया....
कुछ किस्से कुछ कहानियाँ सब के पास होती है.मेरे पास भी है.थोड़ी बहुत दुनिया किताबों में...ज़्यादातर डॉक्टरों के यहा और इस अस्पताल में देखी है.अपोलो चेन्नई के बारे में कुछ लिख रही हू..मेरे नज़र में अपोलो चेन्नई क्या है...बस वही..और तो आप सब जानते ही है अस्पताल क्या और कैसे होते है.यहा अनजान लोग अपनी तक़लीफ़ ऐसे बाँट लेते है जैसे की पड़ोसी हो।एक महिला मेरे पापा को लिफ्ट के यहा मिलतीहै, बातों बातों में बताती है की उनके पति डायलयसिस पर है और बचने की उम्मीद कम है(तब इसका मतलब नही समझ पाई थी क्यूंकी आई वाज़ स्टिलडिसकवरिंग की मुझे क्या हुआ है)जाने क्यू उसने बताया..मुझे तब नही समझा पर अब लगता है..जहा सभी किसी बीमारी से जूझ रहे है वही सबसे ज़्यादा सहानुभूति समझने वाले मिल सकते है.पहले ऑपरेशन के वक़्त १ महीना लगा था सर्जरी फाइनलाइस होने को.फिर भी वही रह रही थी ताकि एकदम ठीक हो जाो (आइरॉनिकल इसन्त इट?) वहां की नर्सस से संवाद करना....अपने आप में एक कला थी॥उनकी अँग्रेज़ी ठीक ठाक और हमारी तमिल सुभान अल्लाह ! वैसे ही ऑपरेशन से थके हुएहोते है॥उसमे भी इशारों से बात करना ..उउफ्फ!पर नर्स ये माँ का ही एक रूप है इस पर मेरा पूरा विश्वास हो चुका है ( पर्सनल अनुभव ) किसी को कोईऔर अनुभव हुआ हो..तो सॉरी।
अस्पताल एंटर करते ही सामने एक छोटी सी गणेश जी की मूर्ति है ,वहां एक अखंड दीप जलाया हुआ है।हर कोई उसके सामने दो पल रुक कर अपने लिए अपने प्रियजन के लिए कुछ माँग लेता है (एक नमाज़ पढ़ने का कमरा और गिरिजाघर भी है पर दूसरी जगह है)।वह जगह मुझे पूर्णा विश्वा का दर्शन करवाती है. हर साल नयेलोगों से मिलवाती है। (सालाना चेक-उप और दो ऑपरेशन्स के बाद काफ़ी जानती हू उस जगह को अब) कोलकाता से सीधे अपना समान साथ रखे हुए लोगों को देखा है जो एक अन्जान डॉक्टर नामक देवता के हाथों अपने आप को सौंप देते हुए देखा है.एक ही आशा होती है की बस अपने दुखो का निवारण यही होने वाला है. वहां जाकर इस बात में कोई शंका नही रहती की दुनिया में भगवान है वरना हमारा विश्वास...बिन पैंदे का लोटा है..कभी यहा कभी वहां?
अब अंतरराष्ट्रिया मरीज़ भी होते है. पिछले ऑपरेशन के वक़्त (२१ जुलाइ २००६) एक अफ़गानी बूढ़ी औरत आई सी यू में मेरी पड़ोसन थी.उसे देख कर मुझे अपने नानी की याद आती थी. वही गोरा रंग, वही छोटी आँखें, वही झुर्रियाँ नज़र आती थी.हमेशा ऐसा लगता की उसे एक बार गले लगा लू (हम दोनो के ड्रेसिंग देखते हुए नामुमकिन था )वो सब चीज़ों के लिए मना करती थी..ना उसे खाना खाना होता ना दवाई लेना. एक दिन तो पूरा आई सी यू सिर पर उठा लिया..नर्सस ने मिन्नतें की..डॉक्टर्स आये..पर वो ना मानी. फिर उसके पोते को बुलाया गया..वो लड़का..उसके नज़दीक बैठा..दो प्यार के बोल बोले..हाथो से खाना खिलाया..और सुलाया..क्या चाहिए था उसे?एक जाना पहचाना चेहरा..अन्जाने देश में अजनबी चेहरो के बीच..
ऐसे कई किस्से है..यादें जुड़ी है अपोलो के साथ..और वो बस बढ़ती ही जाती है..हर बार इंसानियत का कोई पाठइंसानो की अच्छाई का एक उदाहरण देख आती हू..और मन ही मन दुआ करती हू...जब भी यहा आऊं कुछ सीख के जायूं जो मुझे एक बेहतर इंसान बनाता रहे..
-सई



सई को जुलाई महीने से खासा लगाव है यूँ कहे उनका दिल का नाता है . दो बार उनके दिल से छेड़ छाड़ इसी महीने मे हुई है (उनके दिल की सर्जरी हुई है 'मिट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट "आम भाषा मे कहूँ तो उसके दिल मे छेद है) पहली सर्जरी जुलाई २००२ मे plaaned थी दूसरी सर्जरी २१ जुलाई २००६ मे इमर्जेंसी मे...क्यूंकि पहली सर्जरी कामयाब नही हो पायी ....उनके दिल मे ढेरो नज्मे ओर शेर भी जमा है ओर बावजूद चाकू छुरों ओर ढेरो ग्लोव्स का सामना किए हुए अब भी वही टिके है ..कभी फ़िर गुजारिश करूँगा उनसे भी.....

45 टिप्‍पणियां:

  1. उफ़ ! कितना हृदयस्पर्शी और जीवन्त चिन्तन.सई को हमारा सलाम पहुंचाइये.उसकी बहादुरी और रचना धर्मिता को प्रणाम.और हां,उसका ये कहना,"नर्स मां का ही रूप होती है" सौ प्रतिशत सच है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. कितना भावुक कर देने वाला वर्णन है....इसे पढ़कर मानवता में विश्वास मजबूत होता है!अस्पताल में मरीज़ शायद एक दुसरे के दुखों को आत्मसात करते हैं इसलिए अपनापन ज्यादा महसूस करते हैं!सई वाकई बहुत बहादुर हैं...दो बार उन्हें इस दर्दभरी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा!मैं भगवान से दुआ करूंगी की अब उन्हें और अस्पताल न जाना पड़े!बहुत अच्छी पोस्ट भेजी है उन्होंने...उनके अन्दर दबी हुई नज्म और शेर भी सुनने की इच्छा है!

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक अरसे से जानता हू सई को.. उसके दिल से निकली कई नज्मे तो सीधे दिल तक उतर जाती है.. अनुराग जी का आभार उन्होने सई का लिखा अपने ब्लॉग पर प्रकाशित किया..

    उत्तर देंहटाएं
  4. Saee....orkut par mili..aur mujhe laga mujhe ek choti behen mil gayii. Woh bhi mujhe bhaiya bulaati hai. Rishte kaise jud jaate hain, pataa hi nahi chalta. Ye padhkar bahut bahut achcha laga. Saee aur Dr. saab...dono ko bahut bahut dhanyawaad

    उत्तर देंहटाएं
  5. अनुराग जी
    बहुत भावुक करदेने वाले प्रसंग लिखे हैं हैं साईं जी ने. अनुमान कर सकता हूँ की जो दूसरों के दुःख तकलीफ को इतनी शिदद्दत से महसूस कर सकता है उस दिल से बेहतरीन गज़लें और नज्में ही जन्म लेती होंगी...पढने को लालायित हूँ.
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अजीम हैं वो,खुदा करे, अब उन्हें कभी इन मुश्किलों से न गुज़रना पड़े...उनकी नज्में और ग़ज़लें ज़रूर प्रकाशित करें की ये भी उनके लिए दावा का काम करेगी,और आप तो फिर डाक्टर हैं, दावा देना सुकून देना आपका फ़र्ज़ है...मेरी दुआएं उनके साथ हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  7. भावनाओं को छूने में सई को महारत है, a great introduction.

    उत्तर देंहटाएं
  8. सई की बहादुरी को सलाम!! ऐसे जिंदादिल लोग बहुत कम देखने में आते हैं. वाकई जीवट होना दुरूह कार्य है. "नर्स माँ का रूप होती है" कहना उनकी सकारात्मक सोच को दर्शाता है. अस्पताल के माहौल में ऐसा नजरिया रखना आसान नहीं है. डॉक्टर वाकई में कभी कभी भगवान् बनकर आते हैं. मुझे इसका अनुभव हुआ था जब मेरी माँ का आपरेशन हुआ था दिल का. बहुत नाज़ुक पल थे वह. सई भगवान् आपको और शक्ति दे!!

    उत्तर देंहटाएं
  9. Dil ko choo liya. main bhi train se aa rahi thi to apollo chennai ke kaafi saare patients the. bahut si experiences thi. sach mein, unke dukh ko jaan kar lagta hai humari problems kuch bhi nahi

    उत्तर देंहटाएं
  10. सई ने अंतर्मन को वाकई भीतर तक छू लिया। सहजता के साथ भावनाओं की असीमित अभिव्यक्ति..

    दिल की बात पर हिन्दी ब्लॉग टिप्स को लिंक देने का शुक्रिया..

    उत्तर देंहटाएं
  11. भावुक कर देने वाला वर्णन

    उत्तर देंहटाएं
  12. सबसे पहले सई को प्रणाम और उनके जज्बें को सलाम। भावुक हो गया। सही कहती है। "नर्स ये माँ का ही एक रूप है"। हमारी दुआऐ उनके साथ है। हम उनके दिल में जमा नज्मों को पढना चाहेगे।

    उत्तर देंहटाएं
  13. Nice post SAI. Too soft and Loads of Emotions.

    Cheers
    Rajesh Roshan

    उत्तर देंहटाएं
  14. धन्यवाद अनुरागजी इस संवेदनशील पोस्ट के लिए. जीवन को इतना करीब से बहुत कम लोग देखते हैं. इसे एक श्रृंखला का रूप दें तो और बेहतर होगा.

    -----

    हम्मारी प्रस्तुति आपको पसंद आई इसके लिए धन्यवाद. कुछ साधारण html और टेबल के टैग उपयोग किए हैं... शाम को आपको बताता हूँ, इस अज्ञानी व्यक्ति से कभी भी कुछ पूछना हो तो abhishek.ojha@gmail.com पर ईमेल भेजने से पहले सोचियेगा भी मत. बस भेज दीजियेगा.

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत ही संवेदन शील और भावुक कर देने वाली पोस्ट है यह ...sai की सोच बहुत अच्छी और गहरी है सलाम उनके जज्बे को नज्म पढने का इन्तजार रहेगा

    उत्तर देंहटाएं
  16. "ah! very emotional and sensitive one, may god bless her with long life and blish in her life"
    great efforts of yours......

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  17. अनुरागजी..हमेशा की तरह इस बार भी सई के 'दिल की बात' दिल से लिखी जो पढ़ने वाले के दिल को छू जाती है.... आप दोनो को खूब प्यार और आशीर्वाद ...

    उत्तर देंहटाएं
  18. डाकटर साहब आपने मेरा दिल खोल कर रख दिया अपने ब्लॉग पे ! आप ये सई की दास्ताँ लिख गए या मेरी !
    मैंने आपको शायद एक दो दिन पहले ही अपनी दास्ताँ बयान की थी ! सई का ये कथन की ......

    "पर नर्स ये माँ का ही एक रूप है इस
    पर मेरा पूरा विश्वास हो चुका है"

    " एक अन्जान डॉक्टर नामक देवता के हाथों अपने आप को सौंप देते हुए देखा है.एक ही आशा होती है की बस अपने दुखो का निवारण यही होने वाला है. वहां जाकर इस बात में कोई शंका नही रहती की दुनिया में भगवान है"

    मैं यहाँ ये भी बताना चाहूँगा की जो भी ऎसी हालातों से गुजर जाता है ! उसके लिए डाकटर सिर्फ़ एक डाकटर नही रह जाता ! इस तरह के मरीज और डाकटर का रिश्ता मेरे लिए गूंगे के गुड जैसा ही है ! मैं बयान नही कर पाया पर आपने गूंगे के हाव भाव पढ़ कर दिल छु देने वाले अंदाज में लिखा है !
    मुझे ऐसा लगा आपने कहीं सई के नाम से मेरी कहानी तो नही लिख डाली है ? मां सरस्वती का आप पर वरद हस्त रहे , यही शुभकामना करता हूँ !
    वैसे मैंने जो कुछ आपको बताया था , उसे सिर्फ़ आप जैसा इंसान ही समझ सकता है !
    अनेकों शुभकामनाए !






    इस लेख की एक एक

    उत्तर देंहटाएं
  19. sai se mili bhi hu aur khub baate bhi ki hai humne....jab pahli baar mili tab pata nahi tha ki uska aisa koi operation hua hai....bahot sidhi sadi lagi thi ...apni umr ki ladkiyo se kuch jyada hi mature .... socha tha hoga kuch jisne use aisa mature bana diya hoga....par aisa hoga ye us wakt pata nahi tha...usse milne ke kariban 1 mahine baad mujhe is baat ka pata chala...aur kuch vakt ke liye main sunn ho gai thi ..... she is very brave girl.... keep smiling dear...

    उत्तर देंहटाएं
  20. सई से मिलकर अच्छा लगा. बहुतों के लिए प्रेरणा बनेगी सई. सई को मेरी शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  21. aap logon mein mere is chhote se prayas ko padha..aur sahara..iska dhanywaad..
    anuraagji ko tahe dil se shukriya ki unhone mujhe ek guest writer ke roop mein bulaya..

    kuch baatein share aap sabse...par jab koi in haalaton se guzarta hai..use uparwala itni shakti bhi deta hai ki wo sehejta se swikaar kar paar karein...

    aap sab ka tahe dil se shukriya ek aur baar..
    -Saee

    उत्तर देंहटाएं
  22. bhagawaan se prathana karata hun ki sai swasthy rahe or bhavishy me unke achchi najm padhane mile.

    उत्तर देंहटाएं
  23. संवेदनशील पोस्ट ..सई को अनेकों शुभकामनाए ..आपको आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  24. सई को शुभकामनायें। उनका ब्लॉग काफी क्रियेटिव है।

    उत्तर देंहटाएं
  25. जज्‍बे को सलाम

    आपका हार्दिक स्‍वागत है सई जी, हमारे प्रतापगढ़ में एक सई नदी बहती है, बहुत खेले है सई की गोद में।

    उत्तर देंहटाएं
  26. अनुराग जी अब भी पढ़ नहीं पा रही हूं

    उत्तर देंहटाएं
  27. अनुराग जी मेरे ७,८ बार अप्रेशन हुये हे,कई तो बहुत ही बडे हुये हे, तो साई की बात नर्स मां का रुप ओर डा० भगवान के रुप होते हे मे कोई शक नही,मेने देखा हे जिन्दगी के हर रुप को बहुत नजदीक से, साई को मेरा सलाम, ओर युही हिम्मत से लडे जिन्दगी से,जिन्दगी हमारी गुलाम हो जाये गी.
    अनुराग जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद इस लेख के लिये ओर साई से परिचय करवाने के लिये. देरी से तो रोज आता हु, सो माफ़ी केसे मागूं, सोम वार से पहली टिपण्णी करने की कोशिश रहे गी , क्योकि ३ सप्ताह की छुटिट्या जो हे.

    उत्तर देंहटाएं
  28. बहुत सुंदर वर्णन है. मन भीग सा जाता है.

    उत्तर देंहटाएं
  29. भाई अनुराग जी,
    प्रस्तुति ने एक बार यह फिर सिद्ध कर दिया कि मानवीय संवेदनाओं का सही रूप क्या है, उसे दुःख झेल कर ही जाना जा सकता है. फिर भी यदि आदमी को ज्ञान प्राप्त नही होता तो वह मनुष्य(इन्सान) न बन कर आदमी ही रह जाता है, जो दुःख के कटते ही स्वार्थ, धनलोलुपता के चलते पुनः काटने को तैयार हो जाता है.
    आदमी में इंसानियत के भाव पैदा होने चाहिए, आज ऐसे प्रयास शायद न के बराबर ही हो रहे हैं, तो फिर दोष किसे दें, संस्कार कौन पैदा करेगा, यदि सब छोड़ देगें तो फिर अंतत यह कार्य प्रकृति को ही करना पड़ेगा.
    हमें यह सोचना ही पड़ेगा कि हमारी प्रकृति इंसानियत कि है या हैवानियत की और हम किस तरफ जा रहे हैं और किस लिए? यही तो सुखद भावनाएं हैं. श्रद्धा भाव में आते ही संस्कार स्वतः पल्लवित होते हैं यथा
    श्रद्धा
    (२१)
    कभी किसी ने कहा यहाँ पर
    कुछ भी तो अपने हाथ नहीं
    हानि-लाभ, जीवन - मरण,
    यश-अपयश विधि हाथ रही
    मैं - मेरा से, उठ कर ऊपर
    मानवता में तो विश्वास करो
    हो कर तुम श्रद्धा से अवनत
    क्या कह पाओगे,"नाथ" नहीं

    चन्द्र मोहन गुप्त

    उत्तर देंहटाएं
  30. आपकी इस पोस्ट के सम्मान में सई के लिये एक शेर अर्ज़ करता हूं कि
    ना हो ग़र संवाद फिर संवेदना भी क्या करे
    सोच को जबरन हिला दे जिन्दगी की राह में

    उत्तर देंहटाएं
  31. hridaysparshi.... Sai ko dil se shubkamanye aur uske zazbe ko salam

    उत्तर देंहटाएं
  32. My heart felt good wishes to Dear Sayee
    &
    thanx Anurag bhai, for posting her here .
    I'm traveling so prdon my response in English,
    warm Rds,
    Lavanya

    उत्तर देंहटाएं
  33. .




    समझ सकता हूँ..सई के एहसास को
    अधर में टँगें जीवन से जूझना लोगों को
    महसूस करवाने में कामयाब रहे,
    बधाई का क्या करोगे ?
    पहले रमपुरिया ताऊ की शुभकामनायें समेटो,
    अभी तो मेरा भी सीना तना हुआ है, तुम पर !

    उत्तर देंहटाएं
  34. Behat BHavuk kar dene waali sachhaii hai.... is se zyaada likh nahiN paooNga..
    Sai aur tamaam duniya ke saare marizooN ko meri dua lage :
    Gar duaooN meiN kuch asar ho meri,
    Ziist zeyb guzre aye ajnabi teri.

    उत्तर देंहटाएं
  35. सबसे पहले सई का शुक्रिया उसने मेरे आग्रह पर कुछ लिखा ,उम्मीद करता हूँ की किसी रोज उनकी एक दो नज़्म भी इस आयेंगी .आप लोगो ने जो स्नेह ओर आशीर्वाद दिया है उसका शुक्रिया...रामपुरिया जी को विशेष आभार ....उनके सीने में एक घर सवेदनशील इन्सान छिपा है......

    उत्तर देंहटाएं
  36. saee ben, pahli baar baat hui thi to ek dost ki khair khabar lene ke liye hui thi.
    jab mile to itna masti hui, ke subah se sham tak kar safar finally raat ko sath ruk kar poora hua..:)
    Keep up the spirit saee. Live life 'queen' like...:)

    उत्तर देंहटाएं
  37. saee ko salam aur sirg ka shukriya...

    rahat saab ka sher yaad aa gaya saee ko padhne ke baad...

    shaakho se tootne wale patte hum nahin,
    tufanon se keh do apni aukat mein rahe...

    उत्तर देंहटाएं
  38. आप और सई, दोनो को सलाम..

    सई बहुत अच्छा लिखती है..

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails