2009-07-16

वही ....इशक की बाइलोजी


इश्क एक ऐसा गुनाह है जिसकी " ग्लोबल स्वीक्रति" है ...पुरानी फाइलों को अगर तरतीब से टटोला जाये तो हर आदमी का हलफनामा कही न कही किसी कोने में पड़ा जरूर मिलेगा ..... कितने साल बीत गये पर आज भी इश्क ओर शराब ये दो ऐसे नशे है जिसमे "हाई" होने के बाद के कुछ डाइलोग आज भी बरसो बाद वैसे ही है ... ओर" हैंग ओवर" के बाद के भी ..
मोहब्बत ही ऐसी शै है जिसे करने की कोई वजह नहीं होती....यूँ भी हर पेचीदा इश्क की बुनियाद में वही सादा दिल होता है … सपोटिंग रोल में कुछ हमदर्द दोस्त ….…..सिगरेटों के ठूंठे .. जगजीत सिंह ओर एक हेंड्ससम सा रकीब …...कोई साहब पहले कह गये है की " जिंदगी बीस से तीस साल तक किसी रोमंटिक फिल्म की माफिक होती है .....उसके बाद एक आर्ट फिल्म.....यथार्थ सिनेमा.....
क्रिकेट की तरह इश्क भी अनिश्चितताओं से भरा है… कॉलेज के दस सालो मे हमने कई ऐसे जोडो को बनते देखा ....जो एक दूसरे के नाम पे तलवार निकाल लिया करते थे .. ओर वो लड़किया जिसके पास से गुज़रते हुए …हम अक्सर सोचते थे की कितनी गंभीर लड़की है,……पता नही हँसती भी होंगी या नही, ……बाद में घर वालो से विद्रोह कर ऐसी क्रान्तिकारना शादी करती की ....आप लाइफ की थ्योरी में फिर एक संशोधन करते .
"अब ओर नहीं " वाली कसम ..ठीक वैसी सी होती ...… जैसे नया नया पीने वाला अक्सर हैंग ओवर की अगली सुबह में कहता है …., वैसे भी कसमो की उम्र कभी लम्बी नहीं रहती फिर ..इश्क की सबसे बड़ी खासियत है की आप इसमें दकियानूस नहीं होते …कसमे टूटने से कोई आसमान गिरता है भला.....
.. मैथ्स के आलावा कुछ चीजे ओर भी हमें जिंदगी में कभी समझ नहीं आयी ..मसलन की फिल्मो में विलेन रेप से पहले हँसता क्यों है …? मसलन विनोद मेहरा हमेशा अपनी कमीज के चार बटन खुले ..क्यों रखते थे ….मसलन .सचिन स्ट्राइक लेने से पहले अक्सर एल गार्ड की पोजीशन काहे ठीक करते है...मसलन . परपोज़ करना इतना मुश्किल क्यों है ? आप कितने ही बड़े तीसमार खान हो …आप कितनी भी रिहर्सल कर ले ....स्टेज पे रहकर आपने हजारो दर्शको का सामना किया हो... …कॉलेज में आपके नाम पे आत्मविश्वास की कसमे खायी जाती हो.. ..वहां जाकर आप मै मै करके मिमियागे ही …आपका दिल पसलियों से बाहर आएगा ही ….. .वो फराज साहब कहते है न ..
"उससे मिले तो जोमे -तक्काल्लुम के बावजूद
जों सोचकर गये थे वही अक्सर न कहा".....
जोमे -तकल्लुम का मतलब है संवाद की आतुरता यानि की बातचीत की तगड़ी ख्वाहिश …..इश्क में आप अक्सर वही नहीं कहते जो आपको कहना होता है.....पर हर कोई फराज साहब से इत्तेफाक रखे ऐसा जरूरी नहीं ..
मसलन हमसे दो साल सीनियर ....पटेल...भावुकता के अन्यतम विरोधी ...वक़्त की कीमत को भारी तवज्जो देते थे ..सीधे सीधे जाकर .....खल्लास ....
मसलन पटेल साहब के लोबी मेट सांकला जी .....ठीक उनके कमरे के सामने उनका कमरा था..... "मुझे हो गया है प्यार" गर उस वक़्त रिलीज हुआ होता यकीनन उनकी लाइफ में कई बार बेक ग्रायुंड में बजा होता ...धुर इमोशनल आदमी....सेंटीयाना उनकी फितरत में था...हर छह महीने बाद सेंटीया जाते.....ओर हर बार ...मकाम पूछने पे ... वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन .......उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा .....ठंडी आह भरकर गुनगुना देते ..साहिर के "इस मोड़" पे वे करीब आधा दर्जन बार पहुंचे .....ओर इसी मुख्तसर सी ख्वाहिश .सीने में ...लिए कॉलेज से विदा हुए ...
या अपने बंगाली बाबू जो "यूनिक इंटेलिजेंस "की तलाश में आठ साल भटकते रहे.....जब भी पटेल साहब ओर उनका सामना होता पटेल साहब उन्हें धकिया देते ...साले मोहब्बत भी मार्क शीट देखकर करोगे........
किस्सा कोताह ये के ....तफसील से सुनाने बैठे तो एक अदद "वार एंड पीस" ठो मोटा उपन्यास तैयार हो जाए ...
सुनते है अब वक़्त बहुत बदल गया है.....कागज की पर्चियों के बदले बेगारी .एस एम् एस ने ले ली है...उन दिनों इजहारे -मोहब्बत के बाद अमूमन एक डाइलोग यूँ होता था ....
मैंने तुम्हे कभी इस नजर से नहीं देखा......क्या हम अच्छे दोस्त नहीं रह सकते......पता नहीं आजकल कौन सा जुमला पैट्रन में है.....
इधर मौसम भी ..... रोमानटीकाना है पिछले दो दिनों से ..बारिश का..मेनिफेस्टो जैसा कुछ है............काम करने का मन नहीं है... " कमीने" का सोंग वैसे ही दो दिनों से बज रहा है कानो में.....टेन टेंड.....टेन ...टेड .... ......

कासिद बनकर आया है बादल
कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है …….

आसमान से आज कई यादे गिरेंगी



इसी मुए इश्क के कुछ किस्से यहाँ भी है...

77 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ किस्से पुराने....कुछ दिल के फ़साने
    कोई हमसे बस ये ना पूंछे की ये मोहब्बत क्या है :)

    काफी रोमांटिक पोस्ट है...अच्छा लगा पढ़कर ...और कमीने फिल्म का गाना हमारी जबान पर भी चढ़ चुका है

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  2. रूमानी दिल, रूमानी धड़कन, रूमानी मौसम और उस पर रूमानी पोस्ट
    ------
    गुलाबी कोंपलें · चाँद, बादल और शाम

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  3. ये ऐसी गलियां हैं,जिनमे कभी भी दिलो दिमाग को ले जाकर छोड़ देंगे वर्तमान का क्षण कितना भी अवसादग्रस्त क्यों न हो ,होटों पर मुस्कान बिखरा ही जाती हैं..........

    बहुत ही आनंद आया आपका यह संस्मरणात्मक आलेख पढ़कर..

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  4. bahut hi khas andaaj me bayan kar jate hai
    aap sachchyi..
    majedaar...baten...
    achcha laga padhakr...
    dhanywaad..

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  5. एक शेर सुना था कभी..बहर में नहीं है, लेकिन बात पुरी बहर में है
    "वो खड़े हमारी लाश पे कहते हैं
    हम तो सुनते थे इश्क में नींद नहीं आती"

    अब मैं नहीं जानता कि इस पोस्ट को पढ़कर मुझे ये शेर बेसाख्ता क्यों याद आया...
    वैसे साहिर साब के उस कथित मोड़ से हम सब जाने कितनी बार गुजरे हैं...!!!! और लगता है ये गुजरना जारी रहेगा ता-उम्र !

    आसमान से वाकई कई यादें गिर रही हैं इन दिनों डाक्टर साब....

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  6. इश्क ने बहुत से काम के आदमियों को निकम्मा कर दिया है और आगे भी करेगा ही!

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  7. aaj subah hi aapka blog check kiyaa ki kuch naya aaya ho.. kaafi din ho gaye the.. abhi jaakar milaa kuchh aur mazaa aa gayaa padh kar...

    Ishq ki daastaaN hai pyaare..
    Apni-apni zubaan hai pyaare..

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  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  9. मौसम बड़ा जालिम है-कितने गहरी चोट कुरेद गया..बमुश्किल भरी ही थी अभी...


    बेहतरीन किस्सागोही!!

    कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है …….

    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी

    -उम्दा!! मास्टर पीस त्रिवेणी.

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  10. इश्क ने हमें निकम्मा कर दिया जनाब...
    वरना हम भी इश्कोलोजी लिखते...

    आज सुबह से ही यादें गिर रही है... आज का दिन मेरे लिए ख़ास है.
    २ साल पहले आज ही के दिन हम अपने प्यार से अलग हुए... प्यार अभी भी दिल में बसा है...
    ज़िन्दगी की एक नई कहानी शुरू हुई...

    और उन यादों के साथ आपकी इशक की बाइलोजी...

    लिखना नहीं आता इसलिए गलती माफ़ कीजियेगा.

    बहुत सुन्दर डॉ. साब.

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  11. mohabbat se badkar nahi hai nemat koee..sharat yeh hai zmane ko pata na chale....aapki yeh post to kmaal hai......risto ko anjaam dena sach me mushkil hai.....

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  12. इधर मौसम भी ..... रोमानटीकाना है पिछले दो दिनों से ..

    क्या वाक़ई....???? एक और शख्स है जो डूबा हुआ है आजकल पुराने इश्क़ की ताज़ी हवा में। :) आपने कहा तो लगा शायद सच ही कह रहे हैं आप।

    वैसे जहाँ तक मैने देखा है कि दम रहते तो कोई भी खूबसूरत मोड़ दे कर नही छोड़ता,चाहे एक साथ एक, दो, तीन, चार कितने भी अफसाने चल रहे हों :) हाँ ये सही है कि जिस मोड़ पर आगे जाने का कोई चांस ही नही रह जाता उसी को खूबसूरत मान के छोड़ना मजबूरी होती है। :)

    वैसे डॉ साब ये क्या हम अच्छे दोस्त नहीं रह सकते बड़ा सॉलिड संटेंस है अभी कुछ दिन और चलेगा। इधर लखनऊ तक तो यही हाल हैं। आगे मेट्रोज़ में सुना कु बदला है..! पक्की जानकारी होते ही बताऊँगी...!

    कमीने फिल्म के गीत डॉ साब की जुबाँ पर आज ही डॉउनलोड कराती हूँ। :)

    कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है …….

    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी


    excellent

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  13. कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है …….
    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी

    वाह anuraag जी
    हमेशा की तरह क्या खूब अन्दाज़ है ........ बहूत कुछ aisaa होता है jiskaa jawaab या तो hotaa नहीं या इंसान dhoondhna नहीं chaata बस............. जैसे हो उसे accept कर leta है ........ लाजवाब हैं ये laine भी

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  14. दिल के दरिचो में कही थमे हैं गुज़रे लम्हात
    हर याद के रंग में तुझको ही मैने देखा है

    यह बारिश का मौसम शायद यादो से घिरने का ही मौसम होता है ..तभी बरस जाती है यह यूँ सुन्दर अल्फाज़ में ..

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  15. आज दोपहर में एक रेस्तोरेट में लंच करते हुए एक प्रेमी युगल को देख ये ही सोच रहे थे.. एक कॉफी का प्याला या जुस का ग्लास हो.. धीमा संगीत और चंद बाते.. इससे ज्यादा हमारी सोच चलती नहीं.. लेकिन देखे हम लंच से आये और कुछ देर बात ये रुमानी अहसास पढ़ने को मिल गया..बहुत अच्छा!! अच्छा लगा..

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  16. क्या बात है डाक्टर साहिब ..
    ऐसे खयालात मगर मैं क्या कहूँ ... मगर एक शे'र ये कहता है के ..
    इश्क के दरिया को सोचा पार कर लूँ डूब के
    दर गया गालिब के कहने भर इसी मझधार से ....

    मगर मैं ये आप से पूछता हूँ के एक और शे'र ...
    मेरे मरने के बाद मेरे सिने से मेरा दिल निकाल के रख लेना ..
    कहीं वो ना जल जाये जो इस दिल में रहता है ...

    क्या मतलब और हो सकता है....बहोत बहोत बधाई ...

    अर्श

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  17. मौसम तो इधर भी कुछ दिन से रूमानी हो गया है। लेकिन काम रुमानियत का शत्रु, इन्हीं दिनों यकायक बढ़ गया है। रुमानियत अलमारी में कैद है।

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  18. जिंदगी बीस से तीस साल तक किसी रोमंटिक फिल्म की माफिक होती है .....उसके बाद एक आर्ट फिल्म.....यथार्थ सिनेमा.....


    chahe kisi ne bhi kaha ho par apke post ke liye prasangik hai...

    ....utkrisht post.

    and great eye for detail....

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  19. कसम से अनुराग भाई,

    तीन बजे से ड्यूटी पर हूँ... सुबह से धुर (विशुद्ध) बोरियत थी... कच्ची रोटी जैसे नींद में आपको लिख रहा हूँ. पर यह तिलिस्म भी आपके पोस्ट ने ही तोडी... कई साइट्स देख पढ़ कर ऊब गया था... शाम को आपका पोस्ट अवतरित हुआ नज़र के सामने...तो कुछ बातें मेरे जेहेन में भी आई ---

    अ.
    ओर वो लड़किया जिसके पास से गुज़रते हुए …हम अक्सर सोचते थे की कितनी गंभीर लड़की है,……पता नही हँसती भी होंगी या नही,...

    "ऐसे लड़कियों के लिए हमारे स्कूल-कॉलेज में कई गुट थे... लड़की को पता भी नहीं होता और खून-खराबा हो जाता था... उन्हें क्रेज था आशिक कहलाने का... और हम भेदिये हुआ करते थे... जो पढाकू बने रहने का नाटक करते थे... हमें दोनों तरफ से सहानुभूति मिलती थी... "

    ब.
    "उससे मिले तो जोमे -तक्काल्लुम के बावजूद
    जों सोचकर गये थे वही अक्सर न कहा".....

    इससे मिलता -जुलता ये

    "घर से चले थे हम हर मुआमला साफ़ करके,
    कहने में उनके सामने बात बदल-बदल गयी'

    आगे की बात करें तो मजाज, फ़राज़ और साहिर का रूमानी दौर गुजरने के बाद सारे (हमारी संगति वाले) मंटो पर दम तोड़ते है... जहाँ 'साईल' ... 'बाईस' और खूंखार नजरिया होता प्यार के प्रति...

    और दूसरी संगति वाले इश्क में असफल होने पर पर कहते.... 'साली... उसकी तो...'

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  20. सबसे पहले तो किसी डोक्टर के गले में लगा स्टेथो ओर हाथ में गुलज़ार की किताब को अडजस्ट करने में वक़्त लगता है .आपके ब्लॉग के ऊपर गिटार किताब के ऊपर रखा कप ओर एक ओर स्टेथोस्कोप आपकी शक्सियत से रूबरू कराता है
    here are some of your touch
    १)मोहब्बत ही ऐसी शै है जिसे करने की कोई वजह नहीं होती....यूँ भी हर पेचीदा इश्क की बुनियाद में वही सादा दिल होता है … ओर एक हेंड्ससम सा रकीब
    2)मैथ्स के आलावा कुछ चीजे ओर भी हमें जिंदगी में कभी समझ नहीं आयी ..मसलन की फिल्मो में विलेन रेप से पहले हँसता क्यों है …? मसलन विनोद मेहरा हमेशा अपनी कमीज के चार बटन खुले ..क्यों रखते थे
    3)इश्क में आप अक्सर वही नहीं कहते जो आपको कहना होता है
    4)साले मोहब्बत भी मार्क शीट देखकर करोगे
    5)साहिर के मोड़

    त्रिवेणी खल्लास है.

    पर आपसे शिकायत है हफ्ते में एक पोस्ट तो लिख दिया करे .

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  21. ये है वो आतिश...

    यादें आसमान से गिर ही रही थी कि आपका आना हो गया वरना बुलावे में ज्यादा देरी ना थी.

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  22. क्या डाक्टर साहब ,आपने भी नए पुराने जख्मों को कुरेद दिया ! मैंने तो उम्र के दूसरे और अब पांचवें पड़ाव पर इस ब्रह्म बल्कि काम वाक्य को ही पुनः पुनरपि दुहराया जाना पाया है ".क्या हम अच्छे दोस्त नहीं रह सकते.." अब अच्छे दोस्त के डूज- डोंट को जरा व्याख्यायित तो करिए !
    कुंवर बेचैन की ये लाईने सहसा याद हो आयी हैं -
    कोई उलझन ही रही होगी जो वो भूल गया
    मेरे हिस्से में कोई शाम सुहानी करना

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  23. ज्ञानी जनों की टिप्पणी में ही हमारी टिप्पणी समझी जाय !

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  24. इश्क की दास्ताँ भी क्या खूब कही है!
    आप की आज की पोस्ट से कुछ पंक्तियाँ जो अपने साथ लिए जा रही हूँ--
    ['जिंदगी बीस से तीस साल तक किसी रोमंटिक फिल्म की माफिक होती है .....उसके बाद एक आर्ट फिल्म.....यथार्थ सिनेमा.....'
    --'मोहब्बत भी मार्क शीट '
    -मोहब्बत ही ऐसी शै है जिसे करने की कोई वजह नहीं होती.'
    -क्रान्तिकारना शादी!लाइफ की थ्योरी..हा! हा !हा!]
    ----------------------
    ---गज़ब का लिखा है..बड़े तरीके से विचारों को बुना है.
    -देर से आई आप की यह पोस्ट मगर बहुत अच्छी लगी..शुरू से अंत पढने वाले तक बाँधे रखती है..
    --त्रिवेणी भी पसंद आई.

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  25. अनुजा, हम इशारा समझ रहे हैं...रूसवा न करो हमें अभी डाक्टर साब के सामने। इल्जाम जायेगा इनके ही सर, लिखते ही ऐसा हैं!!!
    इनके पोस्ट पढ़-पढ़ कर तो ये पुराने किस्से याद आते हैं...so u can blame doctor anurag!

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  26. ख़ैर यादें गिर ही गई आस्मां से जो हम भुलाना चाह रहे थे . डाक्टर सहब जादू आता है क्या आपको

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  27. आसमान से आज कई यादे गिरेंगी...
    इश्क की यह फिलासफी भी अजीब है ,लेकिन आपने लिखा है बडी तबियत से .आनंद आ गया डॉ साहेब.

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  28. इधर मौसम भी ..... रोमानटीकाना है ..गज़ब का लिखा है..

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  29. kya baat hai,ishq wo gunah jiski global swikruti hai,waah,vaise har college mein gambhir ladki hoti hai jiska vidroh visfot internship mein hi kyun hota hai:);),lajawab lekh,tasveer bhi under,jaise ishq kaid ho.

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  30. फराज साहब हमें भी कुछ इस तरह याद आये की;

    बड़ा नाज था उनको अपने परदे पे,
    कल रात वो मेरी महफ़िल में सरे-आम चले आये.

    वैसे बहुत खूब लिखा है इस बार भी..

    "धुर इमोशनल आदमी....सेंटीयाना उनकी फितरत में था...हर छह महीने बाद सेंटीया जाते....."
    "तफसील से सुनाने बैठे तो एक अदद "वार एंड पीस" ठो मोटा उपन्यास तैयार हो जाए ..."

    इस बार हिंदी भाषा का पुरुस्कार आपको ही मिलना चाहिए, खर UP की हिंदी में लिखते है की हसी निकल जाती है, अच्चा भी लगता है अपनी महक से जुड़ना, आप और आपकी कलम चलती रहे.

    शुभ कामनाये,
    अमित

    वैसे जो नहीं दिया न अवार्ड हिंदी वाला तो एक दो ठो लड़के ले के लखनऊ को मूवमेंटिया जरुर देंगे.

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  31. बड़ी-बड़ी बूंदों में....है न अनुराग जी??
    बहुत अच्छी त्रिवेणी

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  32. kasam se doctor sahab...ek ek line par thahar ke bas ufff...aaaah kiye jaa rahe hain.
    ishk ki pechega galiyon se gujarti ek dilnashin post :)

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  33. मैं देर से यहाँ आया और आ कर यहीं का रह गया...बेहद उम्दा लिखा है आपने...इश्क पर आपकी ये दास्ताँ लम्बे अरसे तक याद रहेगी...
    "ज़िन्दगी फूस का इक ढेर है जिसमें आकर
    आग तुम इश्क की सरकार लगाते क्यूँ हो"
    मैं ये पोस्ट पढ़ कर जो तालियाँ बजा रहा हूँ उसकी आवाज़ आप तक जरूर पहुँच रही होगी...ऐसे तालियाँ बजाने के मौके आप बार बार देते रहें इसी कामना के साथ:
    नीरज

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  34. आपने अपने ब्लॉग का ये टेम्पलेट कहाँ से लिया है या किस से बनवाया है...???ऐसे हुनर मंद लोगों से हमें भी कभी मिलवाया करो भाई...और अगर ये आपने खुद ही बनाया तो हमारा सलाम कबूल करें और बताने की ज़हमत करें की आपने ये सब किया कैसे...नहीं बताएँगे तो हमें मेरठ आना पड़ेगा...जो शायद आपकी सेहत के लिहाज़ से ठीक नहीं होगा...:))
    नीरज

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  35. आजकल इंकार मे छीपे इकरार का ज़माना नही है डाक्साब्।डायरेक्ट कनेक्शन होता है।पहले क्यों नही कहा,कल ही मै एन्गेज़ हुई हूं,सारी अभी तो नही कुछ दिन वेट कर लो फ़िर देखते हैं,ऐसा करो तुम उससे बात कर लो वो खाली है।लगता है इसी पर एक पोस्ट लिखनी पड़ेगी आपके इस रोमांटिकाना मौसम मे मेरा भी काम करने का दिल नही कर रहा है।छा गये आप्।आप तो इश्क की ट्यूटोरियल खोल लो सरजी बाईगाड तहलका मचा दोगे।

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  36. डाक्टर अनुराग, यार, ये मेडिकल कालेज के दिनों के इतने फ़साने कैसे याद रखे हुए हैं? और यह बात भी मेरी समझ में नहीं आ रही कि यह शरीफजादी हर कालेज में कैसे होती है जिसे देखकर दिल यह मानने से इनकार कर देता है कि कुछ लड़कियां इजहारे मोहब्बत के लिए बनी भी होती हैं?
    दीपा शर्मा नाम की एक मोहतरमा मेरी बैचमेट भी रही है जिसको देखकर दिल में 'बहनजी' वाले विछार ही आते थे, लेकिन तीन दिन अब्सेंट रहने के बाद जब वह जींस के साथ हाथों में शादी वाला चूड़ा भी पहने दिखी तो पटेल जी और सांकला जी दोनों ही बहुत याद आये.
    खैर, happiness is contagious and so are your posts. be a carrier.

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  37. इश्क की बायोलोजी में इसकी एन्थ्रोपोलोजी भी समेट ली-वाह!

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  38. " जिंदगी बीस से तीस साल तक किसी रोमंटिक फिल्म की माफिक होती है .....उसके बाद एक आर्ट फिल्म.....

    मैंने तुम्हे कभी इस नजर से नहीं देखा......क्या हम अच्छे दोस्त नहीं रह सकते......पता नहीं आजकल कौन सा जुमला पैट्रन में है.....khoob likha hai :))))

    Drsb ये कैसा कैसा याद दिला रहें हैं आप सभी को इस रोमानटीकाना मौसम में ..:)))
    आर्ट मूवी बेशक बन रही है लेकिन अभी वो हेंग ओवर गया थोड़े ही है hahaha...

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  39. यूँ भी जब भी किसी मेडिकल कॉलेज की इलूमिनी मीट होती है .कनपटियों पे सफ़ेद बाल लिए पुराने बैचमेट जब मिलते है चुपके से एक ही सवाल पूछते है ."तेरे वाली मिली "अलबत्ता इश्क दाकियानूसी नहीं होता...जाहिर है बेच तक सिमट कर नहीं रहता....कहते है पहला प्यार भूलना आदमी नहीं भूलता ....झूठ कहते है .......दूसरा तीसरा ,ओर चौथा भी नहीं भूलता ......उन दिनों हमारे एक अजीज सीनियर "हाँ ओर ना के उसी ऐतिहासिक भंवर" में अटके हुए थे .यार दोस्त नाराज थे की फ़िनल ईयर है ...हम जूनियर थे एक असफल प्रेम से ताजा ताजा बाहर निकले थे ...कुछ कविताये ठेल लेते थे .कोलेज के सेक्रेटरी के भाषण के आखिर में लिखे शेर अक्सर लिखा करते थे .स्टेज पे एक दो प्रोग्राम भी...लड़कियों में थोडी घुसपैठ .भी थी .अच्छे श्रोता भी थे.....कुल मिलकर उन्हें ग़लतफ़हमी हुई हम इश्क के अच्छे सलाहकार है ....वे अक्सर हमें सुनाने चाइनिस रेस्टोरेंट में ले जाते .खुद कुछ खाते .सुनाते ......बदकिस्मती से तब हम ना चाइनिस के शौकीन थे ओर तब हमने नॉन वेज खाना शुरू किया था......तो किब्ला हम कोई एक सूप पकड़ कर उनकी स्टोरी सुनते ...जब हमें शौंक लगा .उनकी हाँ हो गयी......खैर वे आज भी हमारे बहुत अच्छे दोस्त है......ओर उनके दो प्यारे प्यारे बच्चे है.....ओर पिछले तीन महीने पहले जब हम सूरत गए उनके यहाँ डिनर करते हुए हमने उन्हें यही उल्हाना दिया था .....
    @नीरज जी
    टेम्पलेट के मामले में अंगूठा ठेक है ...हमने बस इतना किया की फोटो ओर पासवर्ड कुश को दिया ओर बोला सब आपके हवाले .पिछले दिनों वैसे ही व्यस्त थे ....सब उनकी मेहनत है.....बिना किसी दाम लिए ..वैसे आप मेरठ आये .....खुदा कसम खूब गुजरेगी ....

    उत्तर देंहटाएं
  40. "अब ओर नहीं " वाली कसम ..ठीक वैसी सी होती ...… जैसे नया नया पीने वाला अक्सर हैंग ओवर की अगली सुबह में कहता है …., वैसे भी कसमो की उम्र कभी लम्बी नहीं रहती फिर ..इश्क की सबसे बड़ी खासियत है की आप इसमें दकियानूस नहीं होते …कसमे टूटने से कोई आसमान गिरता है भला.....

    वाकई प्रेम इतना ही खूबसूरत होता है
    और हर कसम की दीवार इतनी ही कच्ची

    उत्तर देंहटाएं
  41. आजकल यूं कहा जाता है :

    तू नहीं कोई और सही
    और नहीं तो और सही

    और और और सही......

    उत्तर देंहटाएं
  42. आपने इशक की बायलोजी क्या... अनाटोमी, फिजियोलोजी, साइकोलोजी, बायो केमेस्ट्री सब बता डाली...

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  43. Mausam ka mizaz to humare yaha bhi kuchh raomntikana sa hi hai...

    कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है …….

    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी

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  44. कमबख्‍त इश्‍क! यह क्रि‍केट की तरह अनि‍श्‍चतताओं से भरा हुआ है और हम पर तो मैच फि‍क्‍सींग के कई आरोप लगे हुए हैं जी:)

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  45. ीअब सब बच्चो की बात पर क्या बोलूँ मुझे तो आपके लिखने का अन्दाज़ बहुत अच्छा लगता है एक दम सब से हट कर और लाजवाब बधाई

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  46. आपने बहुत ही प्यारी सुन्दर त्रिवेणी कही है।
    कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है …….

    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी

    सच में कई कहानी और किस्सें आँखो के आगे घूमने लगे। आपके एक एक शब्द दिल को छू रहे है। ना जाने क्यूँ एक गाना भी याद आ रहा है। " मौसम है आशिकाना...... " और हाँ आपका ये टेम्पलेट बहुत ही सुन्दर लग रहा है। दिल आ गया इस पर। हा हा हा।

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  47. डॉक साब इश्क की ऊतक रचना में बदलाव तो शर्तिया आया है. फिल्मो से ही जानकारी मिल जाती है. सत्तर के दशक की फिल्मों में नायिका खलनायक के हाथों छुडाने के बाद हीरो से कहा करती थी.....
    " स्वामी, मुझे हाथ मत लगाना, मैं तुम्हारे लिए अपवित्र हो गयी हूँ...."
    :)
    अब कहाँ ऐसे डायलाग?

    उत्तर देंहटाएं
  48. मौसम की रोमांटीयत यहाँ भी फैली हुई है.. तस्वीर हमेशा की तरह आप छांट के लाये है.. पुरानी यादो का ये कोलाज बहुत सारी यादो से रु ब रु कराता है.. हमने तो एस एम् एस के दौर में भी चिट्ठियों की घुसपैठ जारी रखी है.. अभी भी ज़िन्दगी में बहुत सी जगह पर हम फ़िल्मी हो जाते है.. पर क्या करे.. हम कोई केलेंडर जो नहीं की हर महीने बदल जाए..

    एक और उम्दा पोस्ट..

    उत्तर देंहटाएं
  49. अनुराग भाई ,
    आपका और कुश भाई का ब्लोग
    सिर्फ मोज़ील्ला से ही देख पा रही हूँ -
    Nice BLOGS - Both of them :)
    खास आप दोनोँ के लिये मोज़ील्ला लगाया
    ताकि,
    कमेन्ट कर पाऊँ ...
    " मोहोब्बत ऐसी धडकन है,
    जो समझाई नही जाती .."
    ( सिर्फ महसूस की जाती है जी )
    और बारिश ने आज यादोँ की बूँदेँ टपकाईँ हैँ
    वही सहेज लेँ तो अच्छा हो !
    - लावन्या

    उत्तर देंहटाएं
  50. टैम्पलेट की बात चल रही है तो यहां लगे हाथ यह भी बता दूँ कि इश्क जिंदगी का ऐसा टैम्पलेट है जिस पर लिखा हुआ तभी समझ आता है जब पढने वाला भी उस टैम्पलेट से वाकिफ हो वरना तो वो यही कहेगा -

    Define इश्क ?



    अच्छी पोस्ट।

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  51. डॉ. अनुराग जी,

    एक खूबसूरत पोस्ट।
    शेर-ओ-शायरी, जुमलों से भरी हुई बॉयलोजी सा विषय जिससे जेनाईटल प्रोसेस के इतर कुछ और समझ नही पाये ( वो भी किसी वैज्ञानिक पद्धिती से नही, वही ठेठ जिन्दगी की पाठशाला जिसमें एक-दो बच्चों का अदद बाप दोस्त से ज्यादा प्रोफेसर हो जाता है इन विषयों में )बहुत ही रोचक अंदाज में समझा।

    श्री कुश जी को एक बहुत अच्छी टेम्पलेट बना देने के लिये बधाई।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  52. एक हमारे सीनियर कम दोस्‍त थे कौशल साहब। एक लड़की से उनका वन-वे चल रहा था। हम उनकी तारीफें करते, लड़की की तारीफ करते, उनके जोड़ी की तारीफें करते। उन्‍हें बताते कि जब उन्‍होंने विकेट लिया/चौका मारा, तो दर्शकवर्ग में बैठी उस लड़की ने खूब ताली बजाया। या फलाँ मौके पर हमारे कौशल साहब को बलिहारी नज़रों से देख रही थी। अनेक संदर्भों का हवाला देकर साबित करते कि "उस लड़की के दिल में भी कुछ है"! कौशल साहब हमें चाय-नाश्‍ता कराते।

    जब भी हमें चाय-नाश्‍ते का मूड होता। कौशल साहब जिंदाबाद...


    - आनंद

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  53. सही कहा आपने ... असल में हम इश्क की बातें तो करते है.. लेकिन इश्क से परहेज़ भी बहुत करते हैं...
    "बहुत हो गयी इश्क की रस्मे अदायगी, चलो अब इश्क कर लिया जाए.., दिल के दरवाज़े पे कब से दस्तक दे रहा है कोई ..."

    उत्तर देंहटाएं
  54. "मैंने तुम्हे कभी इस नजर से नहीं देखा......क्या हम अच्छे दोस्त नहीं रह सकते......पता नहीं आजकल कौन सा जुमला पैट्रन में है....."

    अनिल कान्त की पोस्ट का इंतजार है....:-)

    उत्तर देंहटाएं
  55. bahoot acha to aap haemsha hi likhte h bahoot sach bhi, ha par aaj kal bhi kuch jagha hi sahi par "mohabat sirf ahasas h ruh se mahasus karo," or bichudne par वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन .......उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा" esko hi apnate h bahle hi kam ho unki ginti, par shayd sach y hi h or to esko define kiya bhi na ja sakta shyad ha ak shar or " kuch to majburiya rahi hongi koi yuhi bewafa nahi hota" ...........

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  56. इश्क...मुहब्बत...प्यार

    मुझे लगता है कि यह इकलौता विषय है जिस पर मैं सबसे ज़्यादा लिख सकता हूँ ! लेकिन मैं जिस इश्क जैसी चीज़ को जानता हूँ वो 'आउटडेटेड' सा कुछ है ! मेरे देखते-देखते इश्क इबादत ..इश्क खुदा से होता हुआ ... इश्क कम्बख़्त और इश्क कमीना बन गया !

    इश्क पर बात हो तो जहन में खुद-ब-खुद 'बंदिनी' की कल्याणी और बिकास घोष ... 'तीसरी कसम' की हीरा बाई और हीरामन, ... 'कागज के फूल' की शांति और सुरेश जैसे पात्र छाने लगते हैं ! देवदास की पारो (पुरानी वाली जी) याद आती है !

    आज के दौर में भी जब 'तुम बिन' या 'सिर्फ तुम' जैसी कोई फिल्म को देख लेता हूँ तो दिल को बहुत राहत सी मिलती है कि अभी इश्क का पुराना स्वरुप सलामत है !

    अमरकृति- गुनाहों का देवता के चंदर और सुधा की याद आते ही मन बुरी तरह व्याकुल हो उठता है ! जब मैंने पहली बार गुनाहों का देवता पढी थी। मैं तब गहरे सदमे में आ गया था .... कितने ही दिन तो खुद से बेगाना बना रहा !

    अगर कोई एक तरफा इश्क को इश्क नही मानता तो यकीनन उसने कभी इश्क किया ही नही, अगर आप इस उम्मीद से इश्क करेंगे कि सामने वाला भी उतनी ही शिद्दत से इश्क करेगा तो काहे का इश्क ?? यह तो प्योर बिजनेस हुआ न ! मुहब्बत के बदले मुहब्बत मिले तो यह आपकी खुशनसीबी ... लेकिन मैंने तो ज्यादातर इश्क को एक तरफा ही देखा है ! वैसे भगवती चरण वर्मा की पुस्तक 'चित्रलेखा' को जरूर पढना चाहिए जो प्रेम के तमाम स्वरूपों को स्वीकारती है।

    बूंद बूंद मुझपर झरकर ,मेरा रीतापन भरकर,वो तो ख़ुद ही रीत गया,
    वो तो आवारा बादल था,दीवाना था ,कुछ पागल था,सिखा मुझे भी प्रीत गया


    प्यार किसी कैमिकल लोचे से नहीं होता ! ये दिल कब किस पर आ जाए, कौन जानता है। जिन्दगी की टेढी-मेढ़ी पगडंडियों पर चलते-चलते कब हम प्यार के आगोश में समां जातें हैं, हमको खुद भी पता नहीं चलता। ये प्यार हर किसी से यूं ही नहीं हो जाता। लेकिन इस कम्बख्त इश्क की पहचान भी बड़ी अजीब होती, अगर आपको किसी से प्यार हो जाए, तो आप कुछ-कुछ बहकने लग जाते हैं। ज़िंदगी आपको बहुत खूबसूरत लगने लगती है। जब उसकी हर पसंद आपकी पसंद बन जाए, उसके और आपके भगवान एक हो जाएँ , तो समझिये ये दिल अब आपका नहीं रहा ।

    काश इश्क को समझना इतना आसान होता ....

    मेरे एक पुराने दोस्त हैं ... कालेज लाईफ से अब तक तकरीबन दर्जन भर सच्चे इश्क कर चुके हैं .... अब एक अदद सच्चा इश्क घर में बच्चे संभाल रहा है .... आज भी दो पैग पीने के बाद सच्चा इश्क न कर पाने का मलाल जाहिर कर देते हैं !

    कोई समझे तो एक बात कहूं
    इश्क तौफ़ीक है गुनाह नहीं


    आज की आवाज

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  57. anuragji
    ak to aapki post itni khubsurt hoti hai kai ki bas pdhte jao ,upar seutni hi rochak tippniya .
    badhai ho bangali babu ka kissa achha lga .
    shubhkamnaye

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  58. दिल की सडक पर वक्त की धूल को फूंक मार कर आप दिखा रहे है । पता नही कितनी लम्बी सडक है । आज आप भी उस मोड की बात कर रहे है जहा से सभी दो चार होते है ।

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  59. बंगाली बाबू की "यूनिक इंटेलिजेंस" की बात काफी यूनिक लगी.

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  60. wah wah wah!! na jaane kitni baar humne aise kaafi log dekhe hain jo seedhe haath dekhne ke bahane ladkiyon ka haath pakadte the aur bas thodi der mein ten ten ten... aur hum bagal mein baithte yahi sonchte rahte ki ladki kya sonchegi ki ye ladka itna badtmeez hai.. Jo bhi ek do kisse humari zindagi mein hai wo bhi nahin hote agar bandiyon ne khud hi himmat na dikhayi hoti :P

    Triveni jabardast thi..uske alawa is line ne ghayal kar diya..

    "जिंदगी बीस से तीस साल तक किसी रोमंटिक फिल्म की माफिक होती है .....उसके बाद एक आर्ट फिल्म.....यथार्थ सिनेमा....."

    Baki Ahamed Faraz to khud ek yugpurush hain..aapka diya hua sher pahle nahin suna tha..aaj bombay mein baarish nahin hai, lekin aapne mahsoos kerwa di :)
    shukriya

    उत्तर देंहटाएं
  61. idhar barish hai subah se hamare shahar me ,maloom tha aap post nahi daalege ,par tippani padhne chali aa gayi .kyunki aapke yahan tippani padhne ka bhi ek alag maja hai.kuch IE me aapka blog khul raha hai."kush "ne vkai ek achha templete diya hai .

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  62. जुमला तो अभी भी वही पैटर्न में है :)
    और फराज साहब की बात तो... वाह !
    त्रिवेणी तो पढ़ी हुई निकल गई. शायद रिक्शेवाले वाली त्रिवेणी के साथ पढ़ी थी.

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  63. शब्दों का बहुत बड़ा खजाना है आपके पास.... और उस पर किस्स्गोई की ये स्टाइल..... उफ्फ्फ.....
    घायल कर दिया आपने....
    बारिश के मौसम में आप पर प्यार की बारिश हो...
    शुभकामनायें....
    www.nayikalm.blogspot.com

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  64. Ab kahan kanpatiyon par safed baal Drsb....garnier colour ko namaskaar hai na ??;))

    aur rahii pyaar kee baat to durust farmaya ....pahla kya aur panchawa kay ....
    vo kahteyn hai na .

    "Love thy neighbour" ..haha voi wala na ??:))

    उत्तर देंहटाएं
  65. इंजीनियरिंग कॉलेज में ना इतनी रंगीनियाँ थीं ना ही इतने फसाने.. पर आपकी यादों की इन फुहारों से गुजरना प्रीतिकर लगा।

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  66. आपने तो पुरानी यादों को ताजा कर दिया है अब तो कुछ देर यादों के सहारे रहने दो.
    बहुत अच्छा लिखा है आपने

    उत्तर देंहटाएं
  67. aasman se aaj kayi yaadein girengi...

    ishq ki jadein itni gehri hone ke baavjood in yaadon se saraborhue nahi rahengi...do visit my blog and post ur comments. Thnx !!

    उत्तर देंहटाएं
  68. "अब ओर नहीं " वाली कसम ..ठीक वैसी सी होती ...… जैसे नया नया पीने वाला अक्सर हैंग ओवर की अगली सुबह में कहता है …., वैसे भी कसमो की उम्र कभी लम्बी नहीं रहती फिर ..इश्क की सबसे बड़ी खासियत है की आप इसमें दकियानूस नहीं होते …कसमे टूटने से कोई आसमान गिरता है भला.....

    सोचती हूँ ज़िन्दगी को कितने करीब से पहचाना है आपने ....सच
    न आसमान गिरता है ...न ज़िन्दगी रूकती है ....बस कुछ यादें हैं जो गिरती रहती हैं .....आसमान से ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  69. Anurag ap navj achcha pakar lete ho. shabd sajane aur usme vimb garhne me mahir ho. shadubad. ap jaise doctor jo prem ko samjhe uski jaroorat hai. hume to her doctor me munna bhai najar aata hai.
    Apka Dr. Asthana. Ab sath N chhutega.

    उत्तर देंहटाएं
  70. वैसे भी कसमो की उम्र कभी लम्बी नहीं रहती फिर ..इश्क की सबसे बड़ी खासियत है की आप इसमें दकियानूस नहीं होते …कसमे टूटने से कोई आसमान गिरता है भला.....

    आपका इश्क वाकई रोमंतिकाना था.. या कहिये है... पोस्ट पढ़कर मज़ा आ गया.. वैसे जब भी इन्टरनेट पर कुछ नहीं होता, तो आपके बिलाग पर आ जाते हैं, बहुत कुछ मिल जाता है....

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  71. sir ji... saahir saab ki woh do lines to hume bhi utni hi chhu leti hain...

    aur haan...izhare mohabbat ka kareena bhale hi badal gaya ho...par nazariya aaj talak nahin badla...aa bhi koi USS nazar se dekhta hi nahin... :)

    उत्तर देंहटाएं
  72. अपनी फाइल टटोली तो सूखे हुए गुलाब मे
    लिपटा दिल नज़र आया ...
    पन्ने खुलते ही बज उठे जल्तरंग कई
    क्यूँ इश्क की फाइल कोई दफ़न कर आया ......one more beautiful post ...

    thanks for sending mozila firefox link ...maine wahi use kiya hai

    उत्तर देंहटाएं
  73. accha hai..waise to saare sant saare chintak ishq ko ek journey kahte hain, jo duality se non duality tak chalti hai.. yahi adhaar vedant darshan ka bhi hai....ishq ki paribhasha waqt ke according change ho gai hai...aur prem aadhunik{ye shabd kabhi samajh nahin aaya} ho gaya hai...vo paash ki kavita hai na...

    premikaon ko patr likhne walon
    agar tumhaare kalam ki nok baanjh hai
    to kagjon ka garbhpaat na karo...

    Shabd pryog accha hai..
    ......
    dhyaan djiye aapne profile mein favorite Music mein "Mehndi hassan" sahab ka naam likha hai...Mehndi ka arth hina hota hai..."mehdi" sahi shabd hai..mehdi yaane meher ya faiz, ya fir fazal,, english mein kaha jaaye to grace ya hindi mein kripa...

    उत्तर देंहटाएं
  74. Bhagwan ne jab ishq ko banaya hoga yarro, to ishq ko khud bhi ajmaya hoga yarro, hum or aap to kya cheej hai, es ashq ne to bhagwan ko bhi rulaya hoga yarro,
    Ek sacha premi,

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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