2008-04-11

अपने बेटे के लिए

ईट पत्थरो की इस दुनिया मे
रोजमर्रा की आज़माइशो से
उबकर
किसी शब जब
अपनी आँखे बंद करता हूँ ,
कोई नज़्म मेरी जनिब हाथ बढ़ाती है
मैं नज़्म का हाथ पकड़
ख़्यालो के जीने दर जीने
आहिस्ता- आहिस्ता उतरता हूँ
कुछ लफ़्ज़ो से गुफ़्तगू करता हूँ
कुछ मायनो से उलझता हूँ
उन्हे सिलेवार लगाने की कशमकश करता हूँ
तभी तुम
जीने के दरवाज़े से
मुझे आवाज़ देते हो
मैं तुम्हारा नन्हा हाथ पकड़कर
वापस इस बेहिस दुनिया मे
दाख़िल होता हूँ
ज़िंदगी मुस्कराती है
सच मानो.........
ये दुनिया ख़ूबसूरत हो जाती है









कई दिनों पहले ये नज्म उसी के लिए लिखी थी जब मैं इन्ही नज़मो मे उलझा हुआ था ओर वो मेरे साथ खेलना चाह रहा था ,आप क्या पढ़ रहे हो ? उसने मुझसे पूछा .मैंने कहा "नज्म"उसने दुहराया जब ये शब्द तो यकीन मानिये मुझे इससे पहले नज्म शब्द इतना अच्छा नही लगा । अब भी कभी किताबो की दूकान मे जब मैं कुछ किताबे देखता हूँ तो वो पूछता है नज्म की किताब है ? वैसे ये नज्म मैंने प्रवीण शाकिर जी के किसी ख्याल से प्रेरित होकर लिखी है ....

21 टिप्‍पणियां:

  1. bahut aachhe dr. sahab.. aapki blog ka title dil ki baat bahut sahi hai... kyonki aapki baatein wakai dil se nikalti hai aur dil tak pahuchti hai..

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  2. एक अलग सी दुनियाँ के वातायन होते हैं बच्चे।
    और वातयन ही क्यों, रचनाकार होते हैं।
    यह कविता आपके बेटे की है, आप तो केवल माध्यम हैं उसे रखने के!

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  3. सच में खूबसूरत - बच्चों के साथ ऐसा ही होता है - और होनहार बिरबान के क्या कहने - चिरंजीव रहें

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  4. bahut khubsurat hai doc saab,sahi bachhon k saath har nazm ka mayana hi badal jata hai,aapke baba ko dher sara pyar aur aashirwad sahit.

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  5. जितनी खूबसूरत नज्म उससे कहीं प्यारी है आपके बेटे की मुस्कान ।

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  6. अनुराग जी
    दिल से लिखी नज्म सीधी दिल तक पहुँची है. सरल शब्दों से आपने जो प्रेम का संसार रचा है वो अनोखा है. शब्द मन को भिगो देते हैं. बच्चे को इतनी खूबसूरत नज्म लिखवाने के लिए मेरा दिली आशीर्वाद.
    नीरज

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  7. बहुत प्यारा लग रहा है बेटा....बिल्कुल जूनियर अनुराग...

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  8. छोटे मियाँ बड़े हो गये है-अब नज़्मे सुनने को तैयार हो जाइये आप ।

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  9. आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया .....

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  10. यही हकीकत है , सुंदर अभिव्यक्ति, बधाईयाँ !

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  11. अनुराग जी,जिस के लिये आप ने यह नज्म लिखी उस की मुस्कान बहुत प्यारी हे,ओर ऎसी मुस्कान पर एक पिता सब कुछ नोछाबर कर देता हे ( अरे ममी भी साथ मे)आज की आप की नजम सब से अच्छी लगी.धन्यवाद

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  12. जितना खूबसूरत आपका भविष्य है… उतनी ही सुंदर उसके उपर लिखी यह नज्म है…।
    बहुत शानदार।

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  13. रविन्द्र जी ,राज जी ,दिव्याभ जी आप सभी का शुक्रिया.......

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  14. koi hamare hath me esi kitab de,
    uljhe hue swal ka jo sidha jwab de.

    Thanks, for the comments. I saw your page,it is inspiring for me, I am very new in this field, plz keep in touch to gtuide me.

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  15. नज्म खूबसूरत है ख्याल खूबसूरत है और जिस पर लिखी वह मुस्कान बहुत खूबसूरत और मासूम है :)

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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