2008-04-08

दस्तक ?


जब किसी रोज दोपहरी मे
तीन चार बूंदे खिड़की से छलांग लगाकर
इन कागजो ओर चेहरे पे
अचानक आ गिरती है,
हवा भी खिड़की के दरवाजे से
लटक कोई शरारत करती है
खिड़की पे टंगा बादल
चिल्लाकर कहता है
"छोड़ो ये गमे- रोजगार के मसले,
छोड़ो ये रोजमर्रा के बेहिस फलसफे ,
छोड़ो ये खामोश मेज ओर कुर्सी
फेंको ये जहीनीयत का लिबास ......."
खिड़की से
...उफक की ओर अपना बस्ता थामे
भागते सूरज को देख
मैं भी सोचता हूँ ...........

चलो यूं करे यारो
"उन्हें "एक "मिस कॉल" दी जाये

14 टिप्‍पणियां:

  1. :):) doc saab bahut umada khayal hai,barsaat ki boonde aisa hi asar karti hai ke unki yaad aaye bina nahi raha jata,bahut behtarin kavita.badhai.

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  2. der nahin kariye! dastak to di hai--awaz de kar dekheeye!

    khushnseeb hain aap jo barsat ka lutf utha rahe hain.

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  3. चलो यूं करे यारो
    "उन्हें "एक "मिस कॉल" दी जाये

    वाह भाई साहब बहुत ही बढ़िया भाव... मिस कॉल ज़रा जल्दी कीजिएगा.. बारीशो के मौसम में नेटवर्क अक्सर खराब रहता है..

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  4. शर्म करो अनुराग....
    अब तो कमाने लगे हो....कॉल क्यों नहीं करते?!

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  5. अगर ग़मे रोज़गार के मसले छोड़ ही चुके हैं, रोज़मर्रा के बेहिस फ़लसफ़ों को ताक पर रख ही चुके है तो क्या ये अच्छा नहीं हो कि उन्हें साथ लेकर ही निकल जायें उन्हीं बूंदों को चूमने, उन्हीं बादलों के फ़ाहों को अपने हाथों में थामने और उन्हीं हवाओं को अपने कानों में ये कहने देने कि आओ स्वागत है आपका.
    हमेशा की तरह एक उम्दा पेशकश.
    धन्यवाद.

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  6. wah kya khyal hai? u bhi kahi uljhe ho aur achank kuch bunde pad jaye to badal jata hai mijaj. khub likha hai

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  7. वाह ,आज कुछ हट के आप का यह आंदाज भी कबिले तारीफ़ हे.

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  8. शुक्रिया दोस्तो..
    बेजी
    वास्तव मे यहाँ "मिस कॉल "देने का मकसद कुछ ओर है थोड़ा शरारती भी ओर कुछ ये line ड्राइव करते वक़्त दिमाग मे आयीं थी ,मन मे एक लालच भी था इन्हे रखने का.......इसलिए रखा......

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  9. अरे रे,

    हमें भी थोड़ी शरारत ही सूझी थी...

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  10. बस ’मिस काल’ करते समय नम्बर ठीक से डायल करें , वरना ’रौंग नम्बर’ डायल किया था , पता भी नहीं चलेगा .....

    ज़िन्दगी मे काफ़ी कौम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं ..... :-)

    कविता अच्छी लगी ।

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  11. बेजी जी हमे भी मालूम है आपको शरारत भी सूझती है ...ये तो सिर्फ़ बाकि पाठको को भी एक हिंट देने के लिए था ..अनूप जी आपका शुक्रिया

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  12. baarish ki fuhaar si hi taazgi deti hai aapki kavita...bahut acchi hai.
    agli ka intezaar ragega

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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