2008-04-30

कुछ त्रिवेनिया .......

भरोसेमंद नही रहा उड़ान भरना इन दीनो
हर परिंदा डाल पर सहमा हुआ है ........

आसमान भी जात पूछकर रास्ता दे रहा



परिंदे तय कर लेंगे अपना सफ़र
मौसम की दीवानगी से वाकिफ़ है........
मुए "एरोपलेंन " ही होश खो बैठे है




कासिद बनकर आया है बादल
कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है .......
आसमान से आज कई यादे गिरेंगी


हर इतवार सवेरे उठकर मीलो पैदल चलता था
जेब मे छिपाकर मज़हब पहली पंगत बैठता था.........
हर इतवार अब्दुल पेट भर खाना ख़ाता था


रिक्शावाला .........

धौंकते सीनो से, पेशानी के पसीनो से
लड़ -लड़कर सूरज से जो जमा किया था.........

एक गिलास मे भरकर पी गया पूरा दिन













































16 टिप्‍पणियां:

  1. itni gahrai kahan se aati hai, kab mil jati hai itni fursat jindagi ko itne kareeb se dekh lene ki?
    bahut accha hai...aur kaise taarif karun :)

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  2. कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है .......
    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी

    वाह क्या बात कह दी है बहुत खूब अनुराग जी ..बेहद खूबसूरत हैं यह

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  3. कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है .......
    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी
    wah doc saab aasman se yaad girengi,kya khub kaha sundar,majhabwala bhi bahut badhiya laga,har pic ke saath har panti ek alag andaz liye hai bahut badhai.

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  4. फ़ोटो के शीर्षक मोजू हैं.

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  5. हर इतवार सवेरे उठकर मीलो पैदल चलता था
    जेब मे छिपाकर मज़हब पहली पंगत बैठता था.........
    हर इतवार अब्दुल पेट भर खाना ख़ाता था
    अनुराग जी सोने पर सुहागा हे, एक तो पक्तिया इतनी सुन्दर फ़िर उन से खुब सुरत फ़ोटो, सुन्दर मिलाप किया हे आप ने दर्द ओर कुदरत का,
    ओर हर इतवार अब्दुल को भर पेट खाना मिल जाता हे खेरात के रुप मे ओर बेचारा शुकर करता हो गा खुदा का.

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  6. धौंकते सीनो से, पेशानी के पसीनो से
    लड़ -लड़कर सूरज से जो जमा किया था.........

    एक गिलास मे भरकर पी गया पूरा दिन

    गुलज़ार की खुशबू है आपकी त्रिवेणियों में।

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  7. धौंकते सीनो से, पेशानी के पसीनो से
    लड़ -लड़कर सूरज से जो जमा किया था

    एक गिलास मे भरकर पी गया पूरा दिन

    My diary today got rich with these lines. Wonderful !

    उत्तर देंहटाएं
  8. waaah....had se jyada khoobsurat triveniyaan hain...aur tasweeren bhi... wakai jaadugar hain aap.

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  9. भरोसेमंद नही रहा उड़ान भरना इन दिनों
    हर परिंदा डाल पर सहमा हुआ है ........

    आसमान भी जात पूछकर रास्ता दे रहा..


    धौंकते सीनो से, पेशानी के पसीनो से
    लड़ -लड़कर सूरज से जो जमा किया था

    एक गिलास मे भरकर पी गया पूरा दिन


    वाह--वाह!!! एक से बढ़कर एक. बहुत खूब!

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  10. वाह बहुत अच्छी रहीँ त्रिवेणीयाँ --
    - लावण्या

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  11. हर त्रिवेणी लाजवाब है मैं कौन सी चुनु.. हर त्रिवेणी की अपनी एक बात है.. चित्र भी बहुत खूबसूरत है..

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  12. कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है .......
    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी


    doctor sahab apna murid bana rakhha hai aapne hume :-)

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  13. भरोसेमंद नही रहा उड़ान भरना इन दीनो
    हर परिंदा डाल पर सहमा हुआ है ........सुंदर चित्रण और सुंदर कविता की पंक्तियाँ बहुत बढ़िया बधाई

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  14. कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है .......
    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी
    kuch alag hi baat hai is triveni mein
    saare hi ek se badhkar ek hai bas yeh dil mei bas gaya...
    bahut khoobsoorat...

    likhte rahe...

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  15. कासिद बनकर आया है बादल
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है .......
    आसमान से आज कई यादे गिरेंगी



    धौंकते सीनो से, पेशानी के पसीनो से
    लड़ -लड़कर सूरज से जो जमा किया था.........


    एक गिलास मे भरकर पी गया पूरा दिन

    अति सुंदर !

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  16. आप सभी का शुक्रिया.......

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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