2008-05-22

कशमकश ?


कई बार
सोचता हूँ
कि
फलक पर
सीडीया लगा कर
चढ़ जायूँ
ओर जोर- जोर
से चिल्लाकर पूंछू

....कोई है ?

24 टिप्‍पणियां:

  1. एक और बार सलाम आपकी कलाम को डा. साहब.. कितने कम शब्दो में इतनी बड़ी बात.. बहुत अच्छे

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  2. ...और किसी ने कह दिया हा मैं हू तो आप कैसी विश्वास करेंगे, करेंगे भी या नही!!!

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  3. इस छोटी सी कविता के माध्यम से बहुत अच्छा संदेश दिया है आपने। बहुत कुछ सोचने को विवश कर देती है आपकी कविताएं।

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  4. सुन्दर शब्द और सुन्दर चित्र का युग्म।

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  5. khuda aapki soch ko anjaam de...! lekin jo jawab mile vo hame bhi bataiyega.....!

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  6. बहुत सुन्दर !
    परन्तु शायद वहाँ से भी यहाँ की ओर मुँह किये बहुत से लोग यही चिल्लाते मिलेंगे, 'कोई है' !
    घुघूती बासूती

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  8. थोड़ा कंफूजिया गया हूं.. ये समझ में नहीं आया की ये गंभीर कविता है या फिर मसखरे वाली?? जैसे-
    चीटी चढी पहाड़ पर..
    फिर उतर गई.. ;)

    बुरा मत मानियेगा.. आजकल हर बात पर हंस रहा हूं.. पता नहीं खुद पर हंस रहा हूं या जिंदगी पर हंसना सीख रहा हूं.. :)

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  9. ज़िंदगी एक धारा है बहती हुई
    इस पार है सब उलझा हुआ
    उस पार न जाने क्या होगा
    एक पल में सब मिट जाए
    एक पल में सब मिल जाए
    न जाने उस पार कैसा आलम होगा :)

    उस पार यदि इंसान है हम आप जैसा तो कोई आवाज़ नही आएगी :) क्यूंकि समय नही है न आज कल इन्सान के पास :) हाँ इन्सान के अलावा कोई एंजेल है तो जरुर कोई जवाब देगा :) बहुत खूब लिखा है आपने अनुराग जी ...बस यही सवाल मेरे पास भी हैं तो जवाब यही ख़ुद को देती हूँ ...:)

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  10. अनुराग...खुदा तो बोलने से रहा हाँ लेकिन हम शायर लोग हैं..हमसे तो चाँद तारे भी बातें करते हैं..शायद ये सभी एक साथ हाथ ऊपर कर के चिल्ला दें....प्रेजेन्ट सर

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  11. बहुत अच्छा चित्र है और हाँ मैं लिख रही हूँ। ब्लाग का पता लगता है सही ही है। आप ऐसे ही लिखते रहिये।

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  12. dr sahab aap jaise shaks ko bhi aisi tahayi salti hai jankar aascharya huya

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  13. बड़ा गहरा दर्शन है चित्र में भी और रचना में भी.

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  14. sir aapka link apne blog me de diya hai bina puchhe aapko koi etraj ho to bataiyega :-)

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  15. अनुराग जी
    सुंदर चित्र और उतने ही सुंदर शब्द...अगर लौट कर आप को अपनी ही आवाज़ सुनी दी तो?
    नीरज

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  16. bahut hi badhiya doc saab,kya wo uparwala aawaz dega,bahut gehri,har mann ki baat kahi.

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  17. आप सभी का शुक्रिया .....प्रशांत जी दरअसल ये नज्म गुलज़ार साहेब की एक नज्म से प्रेरित है ...बस इस दुनिया को देखकर कभी कभी ख्याल आता है .....की क्या वाकई खुदा है की नही ?लोवेली कुमारी जी हमारा अहो भाग्य की आपने हमारा लिंक दिया .....धन्यवाद ...

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  19. ek baar uppar seediyan laga kar jab wahan pahunchengey..to bahut se log yahi sawaal puchhtey sunayee denge!!!!!!Koi hai?????

    [Ye chitra kahan se itne sundar laate hain??kathan ke saath ek dum match kar raha hai..]


    thode shbdon mein gahari baat kah di hai aap ne in panktiyon mein!

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  20. ओर जोर- जोर
    से चिल्लाकर पूंछू
    ....कोई है ?


    Hmmm....aapne bilkul sahi likha hai...in fact hamsab aisi aazadi chahte hein per bahut kum mil pata hai chillane ka mouka.

    Per mann se puchti hun to kahta hai-
    "Aye dheer gambhir,
    tum ab to dheer dharo!"

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  21. अल्पना जी ओर रेवा जी आपका शुक्रिया......

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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