2008-06-21

तीन बरस की जिंदगी


सोचता था थाम लूँगा हाथो में
वक़्त है मगर ठहरता नही

जब उसे दरवाजे तक छोड़ कर वापस मुडा तो मेरे स्टाफ की लड़की पानी के गिलास उठाते हुए बोली "एक बात कहूँ सर 'बोलो मैंने कहा ...ये डॉ कितनी सुंदर थी ना,..मै मुस्करा दिया ,ये मुस्कराहट भी अजीब शै है अपने पीछे ढेरो दास्तान छुपाये रखती है .मेघा मेरे क्लीनिक पर आयी थी अपने किसी relative को दिखाने..बड़े ही ओपचारिक तरीके से हम मिले ,साथ में उसकी मदर -इन-ला भी थी .. आजकल ऑस्ट्रेलिया में थी ... ९ साल बीत गये ..

उस रात ११ बजे हॉस्पिटल के बाहर चाय की लारी पर था तब मोबाइल बजा था ..अजय था .."शेखर का एक्सीडेंट हो गया है... ..मोदीनगर के पास हुआ है किसी ट्रक ने टक्कर मार दी है...?क्या सब ठीक है ..मैंने डरते डरते पूछा था "कह नही सकता अभी बेहोश है "काफी fractures है शरीर में....मै स्टेशन पर खड़ा हूँ.... सुबह तक पहुँच जायूँगा ...तू कल सुबह वाली किसी ट्रेन से बैठ जाना......
दो दिन पहले ही तो उससे बात हुई थी ......साले छट्टी रखना २६ तारीख की ..एंगेजमेंट है ... नही आ सकता ..एक्साम है..मैंने कहा ..अबे हमने भी residency की है ..भाईसाहब आप पास हो गए है...उसका रिजल्ट अभी २० दिन पहले ही आया था. अभी ६ महीने है एक्साम में ....उसने गाली दी ...अभी अपनी होने वाली भाभी को तो देख ले .... वही है मैगी वाली ?. या कोई दूसरी है ?..मैंने छेडा…...चिंता मत कर अब राजमा चावल मिलेगे ..बहुत अच्छा बनाती है....उसने कहा ..राजमा चावल मेरी कमजोरी रहे है..वो जानता था बस तू आ जा यार ..ड्रामे मत कर... . वो गुस्सा हो गया था ...."ठीक है भाई" मैंने कहा .... आप हमेशा आगे रहे है.. ..पहले सेलेक्शन,पहले अफेयर ,पहले शादी ..मैंने "ओपनिंग बैट्समैन हूँ न.......वैसे फर्स्ट विकेट डाउन तू था न ? वो हंसा था ...
हम तीनो का ११ क्लास से साइकिलों से पूरा दिन तय करते ...क्रिकेट ओर badminton .दोनों ही टीमो का हिस्सा रहे ...वो ओपनिंग बैट्समैन था ,एक बार मेरठ में एक जगह हालात ख़राब होने की खबरे फैली ..कुछ दुकानों के शटर गिर गए थे ओर हमारा क्रिकेट मैच था ... तो मै ओर अजय साइकिलों से छोटी छोटी गलिया तय करते हुए उसके घर पहुंचे ..उसके घरवालो ने मना कर दिया ,वो बाहर छोड़ने आया तो अजय ने उसे साईकिल पर बिठा लिया ...वो मैच तो बीच में ही रोकना पड़ा था ..पर उसके बाद का मैच कई महीनो तक चला ......उसके घर में हमारी एंट्री बैन हो गयी थी...

फिरोजपुर जनता में ही T.T.को कुछ पैसे देकर मैंने हाथो हाथ जुगाड़ करवाया था ,थकी हुई ट्रेन थी पर कोई ओर आप्शन नही था ..ट्रेन में याद आया कि "मेघा से पहली मुलाकात कैसे हुई थी ? मेरठ में सर्दियों में रात भी ठिठुरती है ओर वो भी दिसम्बर के आखिरी दिनों में ,उस रात उसके होस्टल में हम लोग ये सोचकर बैठे थे की एक एक बियर पी कर कुछ खाने निकल जायेंगे ..लेकिन लंबे अरसे के बाद मिले थे तो वक़्त गुजर गया रात १२ बजे खाना कहाँ मिलता ?मैंने कहा यार भूख लगी है ?बहुत लगी है उसने पूछा .हाँ मैंने कहा था .."चल फ़िर "उसने जैकेट पहनी "इतनी रात को "कहाँ मिलेगा "है एक जगह वो बोला ....उसके पास सफ़ेद रंग का LML वेस्पा था ,हम उस पर बैठे ओर वो लेडीज होस्टल में घुस गये,हमें काटो तो खून नही "अबे पिटवायेगा '? मै फुसफुसाया था ..कही झाडियों के पीछे उसने स्कूटर खड़ा किया ओर पत्थर फेका ...कोई खिड़की खुली ..उसने सीटी बजायी ..अंधेरे में एक छाया बाहर आयी..भूख लगी है ..साथ में कौन है उसने पूछा ....अनुराग है ... ...अबे इधर आ ...उसने मुझे बुलाया मुझे उस माहोल में मिलने में बड़ी शर्म आयी ये साला कौन सा तरीका है रात के १२ बजे बियर पी कर उसके होस्टल में घुस कर खाना मांगो फ़िर छाती ठोककर कहो .."ये है मेरा बेस्ट फ्रेंड " खैर कुल मिलाकर १० मिनट बाद मैगी ,कुछ बिस्कुट लेकर हम स्कूटर पर बैठकर वापस रवाना हुए थे
 

दोपहर ४ बजे तक मै मेरठ पहुँचा था ..सीधा नर्सिंग होम पहुँचा तो नर्सिंग होम के बाहर ही अजय मिल गया
रात को ही घंटो उसका ऑपरेशन चला था ,डॉ होने के नाते उसे ये फायदा हुआ था ..
.. ऑपरेशन तो हो गया है ..multiple fracture है.'सीधे हाथ का अंगूठा ओर दो उन्गुलिया गयी वो कहता कहता रुक गया ....ये बहुत बुरी ख़बर थी.... " मन कही गहरे तक बैठ गया ...उसका तो सपना था की आगे न्यूरो सर्जरी करेगा ...सर्जन के सीधे हाथ का अंगूठा ओर अंगुलिया जाना मतलब ..कैरिएर ख़त्म ....होश आया मैंने पुछा ..."हाँ अभी आधा घंटा पहले ही आया है..' उसने कहा ...जा उससे मिल आ ..पर कदम उठ नही रहे थे .... अन्दर कमरे में घुसा तो उसकी मम्मी देखते ही फूट फूट कर रोने लगी... अंकल ने चेहरा उधर घुमा लिया था ...
मुझे देख वो मुस्कराया उसके चेहरे पर दाढ़ी बड़ी हुई थी चेहरे पर कई घाव थे बाकि शरीर पट्टियों में लिपटा हुआ था , उसके खूबसूरत चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी .. ..कितनी देर कमरे में खामोशी रही.. कई मिलने जुलने वाले आते रहे ....
तकरीबन ४५ मिनट बाद हम दोनों अकेले हुये..मै उसके पास उठकर गया .."कैसा है ? “सब ख़त्म हो गया यार” वो बोला .."वो मुझसे लिपटना चाहता था पर शायद शरीर ने उसका साथ नही दिया ..उसकी आँख से आंसू बह निकले सब ठीक हो जायेगा मैंने उससे कहा ...क्या ठीक होगा मै भी नही जानता था .. कुछ मिनट हम रोते रहे ........जाने कितनी देर से गुबार अपने अन्दर रोके हुए था ..मै हिल गया था ,हम तीनो में वो सबसे मजबूत था ओर मुश्किल वक़्त में हम उसका कन्धा ही ढूंढते थे ....
दरवाजा खुला तो मेघा ओर उसके परेंट्स थे .....मै उठा ओर आहिस्ता आहिस्ता बाहर निकल गया ....
अगले तीन दीन बाद उसका दूसरा ऑपरेशन हुआ ... उसके एक पैर में रोड डली ओर उसके fracture कि हालत देखते हुये बतोर एक डॉ हम जान गये थे कि उसका एक पैर अब नोर्मल नही रहेगा , उसकी चाल में उम्र भर एक लंगडाहट रहेगी .ज्यादा छुट्टी नही ले सकता था इसलिए ५ दीन बाद मै भी सूरत वापस रवाना हो गया ...अगले १ महीने वो हॉस्पिटल में रहा , ओर तकरीबन ६ महीने तक वो बिस्तर में रहा ..उससे फोन पर लगातार संपर्क में रहा ...३ महीने बाद एक दिन रात को उसका फोन आया ..वो सिसक रहा था..क्या हुआ ?..मेघा के घर वालो ने शादी से इनकार कर दिया था ..वे उसकी शादी ऑस्ट्रेलिया के किसी लड़के से कर रहे थे ..मै सन्न रह गया ..उसके पैर में जिंदगी भर खराबी रहेगी ये तय था ,अब वो सर्जरी भी नही कर पायेगा ..पर प्यार ?३ सालो से उनका अफेयर था....
मै बात करूँ मेघा से ?मैंने कहा ..नही ..उसके स्वर में सख्ती थी .. मै जानता था कुछ मामलो में उसके असूल पक्के थे "..प्यार में कोई शर्त नही होती" वो अक्सर कहा करता था ओर प्यार अपनी सूरत नही बदलता वो हर मौसम में एक सा रहता है....फ़िर भी अजय ने मेघा से बात की थी... नतीजा कुछ नही निकला था... उसके बाद हमारी फोन पर बातें होती पर वो कभी मेघा का जिक्र नही करता ..बात करने पर बात को घुमा देता ...अजय से मालूम हुआ ...वो ऑस्ट्रेलिया चली गयी है . वो लगभग ६ महीने बिस्तर पर रहा ...मै एक्साम में उलझ गया ओर रिजल्ट आने के बाद मुंबई जाने से पहले एक बार घर आया तो हम दोनों एक रेस्टोरेंट में खाना खाने बाहर गये तब तक वो एक छड़ी का सहारा लेकर चलता था .."अब क्या इरादा है ?मैंने पूछा ..पता नही ?सोचता हूँ USMLE दे दूँ ?"हूँ "मै सुनता रहा ... ,नानावटी हॉस्पिटल में ...

जिन दिनों मुंबई नानावती में था तब मालूम चला वो अपने बड़े भाई के पास इंदोर चला गया है ओर वही रहकर USMLE की तैयारी कर रहा है ... बाद में घर वाले भी वही शिफ्ट कर गये ....उसने एक्साम पास कर लिया ओर नॉन क्लीनिकल ब्रांच में पी.जी की.....फ़िर वही वही किसी पाकिस्तानी डॉ लड़की से शादी कर ली... अभी उसके एक प्यारी सी गुडिया है फिलहाल वे दोनों वहां के मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट पर है.. ,.
आज से ३ साल पहले वो जब इंडिया आया था तो हम तीनो दोस्त दिल्ली में मिले थे उसके पास वक़्त की कमी थी ओर अजय तब दिल्ली में हिंदू राव हॉस्पिटल में ही था ... उन तीन सालो में जिस जिंदगी को मैंने जिया है उन्ही में मै समझा हूँ..कि जिंदगी क्या है...इसलिये सच मायनो में मेरी उम्र अभी ५ साल ही है उस रात वो बोला था ..
अभी कुछ दिन पहले मै अपने पुराने फोटो निकालकर उन्हें ठीक कर रहा था तो मेरे बेटे ने उसकी फोटो देखकर पूछा था" ये कौन है ?"
ये हीरो है बेटे असली हीरो "मै बुदबुदाया था


45 टिप्‍पणियां:

  1. आपको पढ़कर ख़त्म किया कि ये पंक्तियाँ दिमाग में कौंह पड़ीं-
    सोचता था थाम लूँगा हाथो में
    वक़्त है मगर ठहरता नही
    बहुत सही वर्णन
    आलोक सिंह "साहिल"

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  2. ये लेख पढ़कर स्तब्ध हू.. ज़िंदगी से कोई पुरानी यारी लगती है आपकी काफ़ी करीब से देखा है आपने..

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  3. सही में हीरो हैं आपके दोस्त ..और जिंदगी के रंग आप ने बहुत ही करीब से देखे हैं ..उनको लिख कर रूबरू करवाने की कला आपकी कलम में बनी रहे यही दुआ है ..

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  4. वाकई मे हीरो है डाक्टर साहब , आपने भी एक एक लम्हा कागज पर उतार दिया है

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  5. अभी पीछे किसी पोस्ट में प्यार के बारे में कोई कह रहा था कि प्यार भी कभी गैर होता है!! मैंने किसी दूसरे के माध्यम से जाना है कि प्यार भी गैर होता है। आपका भी कमेंट था उसमें..

    जिंदगी हर रंग के साथ लोगों को मिलती है। इसकी गहराई एक मासूम बच्चे की तरह जो काफी प्यारा लगता है लेकिन ठीक उसी वक्त काफी अनजान भी क्योंकि उस बच्चे की भाषा हम नहीं समझ सकते। केवल मां समझ सकती है। इसी प्रकार जिंदगी के रंगों को समझने के लिए मां सा भाव लाना पड़ता है। .. और आप मां की भावना रखते हो..

    इसी पोस्ट में जिंदगी के दोनों रंग हैं। आपने उनको सही सही रखा है।

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  6. पोस्ट में जिंदगी के दोनों रंग हैं,सही वर्णन.

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  7. क्या मस्त लिखाई है .शुरू में लगा डॉ. साहेब अब शायद दिल फेंकगें पर दिल ले गए .
    ब्लॉग को साहित्य बनाकर कर ही मानेगे ? सारे रस से सराबोर ,अब तक की बेहतरीन दिल की बात .

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  8. लड़की ने सोचा होगा सिर्फ प्यार से पेट नहीं भरता.. पर वो ये भूल गई कि हादसा उसके साथ भी हो सकता था।
    बढ़िया; विचारणीय पोस्ट।

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  9. it makes me speechless...कुछ समझ नहीं आ रहा क्या कहू ... आपको बधाई दू या फिर आपके उस दोस्त के बारे में सोचु ... लगता है जैसे मैंने तो आज तक कुछ जिया ही नहीं ... इतने दर्द अपने आस पास देख के , महेसुस करके आप मुस्कुरा रहे हों .... 3 cheers for u !!!

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  10. क्या कहूँ,संवेदनाएं मन को छूकर शब्दहीन कर गई. जीवन के रंग बहुत करीब से आंखों के सामने जीवंत हो उठे. सुंदर मर्मस्पर्शी रचना के लिए बधाई.

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  11. आपका इमानदार लेखन सशक्त होने के साथ भावपूर्ण भी है....आपका ब्लॉग पढ़ना हमेशा से अपने आप में एक अनुभव रहा है ....

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  12. दुख है एक बात का कि एक काबिल सर्जन दुनिया को ना मिल पाया !
    &
    I know that
    "life is never Fair "
    आपने अपने दोस्त के साथ दोस्ती पूरी निभायी है ..बहोत भावपूर्ण पोस्ट है अनुराग भाई
    - स स्नेह्,
    - लावण्या

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  13. sahi arth se hero hai aapke dost,zindagi se ladhna aur wo jaisi hai usse apna lena koi aasan baat nahi hoti,dua hai aage khushiyan unki raahon par bikhari ho.

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  14. जिंदगी के अलग अलग रंग दिखे आपकी इस पोस्ट में। क्या कहूँ इस भावपूर्ण पोस्ट के लिए बस भावुक हो कर रह गये।

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  15. समझ...संवेदना...संदेश
    त्रिवेणी संगम !
    =================
    बधाई डाक्टर साहब.
    डा.चन्द्रकुमार जैन

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  16. प्यार में कोई शर्त नही होती" वो अक्सर कहा करता था ओर प्यार अपनी सूरत नही बदलता वो हर मौसम में एक सा रहता है....kitni pyaari baat hai ye

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  17. paanch saal ki bhi agar umr hai aapki to paanch saalon ke hisab se jindagi ko kaafi kareeb se dekha hai aur jiya hai aapne.
    aur un lamhon ko bayan karne ka andaj bemisal hai.

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  18. आप तो डर्मोटोलाजिस्ट हैं, क्या इन जख्मों के निशान को ठीक नहीं कर सकते।

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  19. Anuraag saab ,
    aapko ssalaam!
    kitni bakhoobi se aapne yaadon ki jhaorkhe ye baat kahi hai .Sach aapke dil ke saare jajbaat samajne me mujhe zara bhi waqt nahi lagta hai. jab bhi kabhi udaas hota hoon ya kabhi kisi ki kami khalti hai ..aapke blog padh kar chehare me khushi ki lahar daud jati hai .seene me dhadakta dil ek pal ke liye ruk sa jata hai ..mano woh kuch yaad kar raha ho...din le kone me kho se gaye chehron aur unsi jude achche bure vakye doondh ne lagta hai.
    Thanks & Regards,
    Gaurav(Rohit)

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  20. क्या कहा जाये! गजब अंदाज है..सन्न हूँ. बेहद भावपूर्ण.

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  21. bahut bahut achcha hai dr. saab.... bhala ho blogging ka..ki ham aise lekh padh rahe hain. Jeevan to kisika anubhavheen nahi hota par un anubhavo ko baantne ki shakti kisi kisi me hi hoti hai.

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  22. डॉक्टर साहब, आपकी सभी रचनाएं एक से एक ऊँचे पायदानों पर चढ़ती जा रही हैं। भाव विभोर कर दिया आपने। 'दिल की बात' से हमारा 'अनुराग’ बढ़ता जा रहा है। साधुवाद।

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  23. आप का दोस्त सचमुच हीरो है, जिसने न सिर्फ़ इस हादसे को झेला,बल्कि अपनी टूटी हड्डियों के साथ साथ अपने टूटे सपनों की किरचन को भी सह लिया।

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  24. सोचता था थाम लूँगा हाथो में
    वक़्त है मगर समय ठहरता नही .
    बहुत ही बिंदास बधाई

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  25. हमें लगता था की हम जिंदगी जी रहे है... पर अभी लगा कि ... हमें तो पता ही नहीं जिंदगी चीज़ क्या है...

    कुछ ऐसे ही दिखाते रहिये पहलु... बहुत कुछ सीखने को मिलता है... मिलाते रहिये हीरो से..

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  26. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  27. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  28. पढ़ना शुरू किया--
    'कही झाडियों के पीछे उसने स्कूटर खड़ा किया ओर पत्थर फेका ...कोई खिड़की खुली ..उसने सीटी बजायी ..अंधेरे में एक छाया बाहर आयी-'-aisa laga mono kisi film ki patkatha padh rahi hun--

    जैसे जैसे आगे पढ़ा तो दुःख भरी दास्ताँ को पढ़ कर बहुत दुःख हुआ--वक्त भी कैसे कैसे खेल खेलता है--दिल को छू गया ये किस्सा.
    ये संदेश भी मिलता है- 'जिंदगी चलती रहती है और जिंदगी चलती रहनी चाहिये---
    बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया संस्मरण .

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  29. पहले एक्सीडेंट का दर्द ,फिर दिल टूटने का ...इसके बाद इन सबसे उबरकर जिंदगी की नयी शुरुआत कोई हीरो ही कर सकता है...

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  30. sach mein hero hain aap ke dost...itna sab hon k baad tike rehna aur zindagi ki nayi shuruaat karna...koi hero hi kar sakta hain...

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  31. क्या कहें डा साहब, पढ़ने के बाद इस वक़्त हमारे पास शब्द कम है! सही कहा आपने, वो सचमुच का हीरो है!
    वोही है विजेता
    जिसने खुद को जीता!
    इस साफदिली और बयान करने के अंदाज़ को बरकरार रखें! दिल छूना, अंदाज़े बयान के उपर बहुत कुछ निर्भर करता है!
    बहुत बहुत शुक्रिया, एक विजेता से मिलाने के लिए!

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  32. निसंदेह आपके दोस्त हीरो है जिन्होंने सही मायने मे जिंदगी पर विजय हासिल ही है।

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  33. अंजान मुसाफिर23 जून 2008 को 3:46 am

    आपका पोस्ट पढकर आंख में आंसू आ गये और दिल हिम्मत से भर गया.. कुछ आपके दोस्त जैसा हादसा मेरे साथ भी हुआ और वो मुझे छोड़कर चली गई.. मैं अभी तक टूटा हुआ महसूस कर रहा हूं, मगर आपके दोस्त की हिम्मत ने मुझे भी हिम्मत दे दी..
    आप मुझे जानते हैं(शायद इस ब्लौग जगत में सभी मुझे जानते हैं) सो अंजान मुसाफिर बनकर कमेंट कर रहा हूं.. सार्वजनिक नहीं होना चाहता.. शायद आपको पता चल जाये मेरे आई.पी पते से.. :)

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  34. Bhawuk kar dene wali post Anurag ji.... lekin aapke dost ko hamari taraf se badhai sach mein hero hai woh... lekin Dr sahab aapse ek shikayat hai.kuch ache logo ke naam mein aapne hamara naam to dala hi nahi :-)

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  35. हक़ीकते हैं जीवन की.... बहुत बार वो चीजें बर्दाश्त करनी पड़ती है जिन्हे सोचो तो नामुमकिन लगती है..मगर पता नही कैसे हम जीवित रह जाते हैं...

    लेकिन अभी थोड़े दिन पहले की एक घटना है कि भईया के एक मित्र के बेटे के ऊपर बम गिर गया था..वो आर्मी आफीसर हैं, स्पाईनल कॉड में चोट आने के कारण उनके दोनो पैर बेकार हो गए। विवाह बचपन के फेमिली फ्रैंड की बेटी से तय था, उन्होने बहुत समझाया कि उसे कि कहीं और शादी कर लो लेकिन वो नही मानी...आज वो पति पत्नी है।

    तो होता ऐसा भी है...!

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  36. dekhiye ek ap ke dost ki kahani hai aur oopar kanchan ke comment mein ek doosri daastaan...

    kuch log waqt ke sath badalte hain to kuch apne balboote par waqt ko badal dete hain..

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  37. आपकी रचना पढ़कर जिन्दगी की हकीकत से रूबरू हुआ जा सकता है,

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  38. पोस्ट पढ़्कर मौन हो गये। कुछ कहते नहीं बनता।

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  39. ऐसी कहानियां पढ कर ही इन्सानियत पर विश्वास बढता है ।
    धन्यवाद ।

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  40. भावपूर्ण घटना का सुंदर रेखाचित्र है। आपका हीरो, वाकई असली हीरो है। काश ऐसा हीरो हर किसी की लाइफ में होता।

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  41. दोस्तों आप सभी का शुक्रिया...
    अनाम साहब आपका शुक्रिया....आपने इस दर्द को महसूस किया वही बहुत है ..ओर अंजान मुसाफिर जी जिंदगी रोज नये फलसफे देती है कई बार इससे शियाकत होती है कई बार मोहब्बत ..कई बार जब आप पीछे मुड कर देखते है तो लगता है इन गमो को कितना बड़ा समझा था हमने.....उम्मीद है आप भी एक असली हीरो बनेगे....
    कंचन जी आपके वाकये ने दिल छु लिया सही कहा आपने हर शै की दो तस्वीरे होती है....मारी जिंदगी में हमारे आस पास ढेरो ऐसे लोग होते है जो बिना शोर शराबे के ढेरो गम अपने सीने में लिए जिंदगी गुजार जाते है....ऐसे ढेरो हीरो है.....एक मेरा दोस्त भी ....

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  42. zindagi ki paheli koi samazh pata......par itna zaroor hai ki apka mitra hero awasya hai....

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  43. कुछ घबराहट हुई आपका लिखा वाकया पढ़ कर.. की कभी असल ज़िन्दगी से मुलाकात हो गयी तो क्या होगा..

    शायद खुशफ़हमी में जीना ही बेहतर है.. असल चेहरे बहुत डरावने होते है.. और उस से भी डरावना होता है, ज़िन्दगी का अपने तेवर दिखाना.. ऐसा ही महसूस हुआ..

    खैर.. कभी किसी असली हीरो को नहीं देखा, आपकी पोस्ट पढ़ कर बहुत मन हुआ की किसी ऐसे ही असली हीरो को देखा जाए.. हो सके तो फोटो के साथ पोस्ट करे!!

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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