सीधी साधी सपाट चलती जिंदगी के किसी मोड़ पर मिले कुछ इत्तेफाक बहुत खूबसूरत होते है ,इन इत्तेफाको से कई लम्हे उधार मिलते है .... ये लम्हे कभी बारिश की बूंदों से लिपटे हो कभी आसमान से झुककर नीचे झांकते है ...वो ना शायर था ना कोई दीवाना पर अक्सर होस्टल की छत की सबसे ऊँची मुंडेर पर लेटकर सिगरेट के कश भरता था ओर देर तक चाँद को निहारा करता था ...कई बार बारिशो में खींच कर ले जाता ....बदली वाले चाँद से उसे खासी मुहब्बत थी आज कल वो अमेरिका मे है ....कल रात उसका फोन आया ॥तो मै बात करते करते छत पर बाहर निकल आया ....ऊपर आसमां पर नजर डाली तो चाँद बिल्कुल वैसा ही था..... ।अजीब इत्तेफाक है ना ?ऐसा उधार चुकाने का जी नही करता .. रोज शब
खींच कर लाते है परिंदे
ओर उठाकर
टांग देते है
आसमान के सीने में
आसमान के सीने में
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
36 टिप्पणियाँ:
एक और रूहानी नज़्म.. चार शब्दो में किस्सा ख़त्म कर देते है आप.. लाजवाब हुनर है..
रात भर रोता रहा तन्हा चाँद
सुबह फिर गीली थी ज़मीन
सूरज से पूछो , माज़रा क्या था ?
dil ko choo gaya... aur seedhi sapat zindagi padh ke mujhe ek gaana yaad aa gaya.. latest hai Thoda Pyaar thoda Magic ka.. Nihaal ho gayi title hai uska.. :) usmein ye line hai
ऐसे इत्तेफाकों से होती है जिंदगी में खूबसूरती और दिल में हलचल .
हा हा हा...
इस पूरे पोस्ट में एक शब्द जो सब पर भरी है वह है इतेफाक... डाक्टर कभी आला से इस शब्द का चेक अप करना.... जहा जहा भी यह शब्द किसी चेतन प्राणी से मिलता है एक अजीब मंजर होता है... कभी दुःख कभी सुख... चेहरे पर मुस्कान होती है, कभी जबडा भीच जाता है... इतेफाक होता रहता है, होते भी रहने चाहिए :)
Dr sahab.. phir se ek khoobsoorat nazm :-)
होस्टल, उस समय के दोस्त और वो समय... आपकी ही तरह मेरे भी जीवन के सबसे हसीन यादें हैं.
बहुत खूब कह जाते हैं आप डॉ साहब
...कल ही यह लिखा गया रात को मुझसे शायद आपकी इसी बात से कुछ मिलता जुलता
भीगा चाँद...
टप टप टपकते मेह सा
सिला सा अधजगा सा
तन्हाई में लिपटा
धीरे धीरे दस्तक देता रहा
नज़रो से बरसता रहा ...
रोज शब
खींच कर लाते है परिंदे
ओर
टांग देते है आसमान में
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
ek khoobsoorat nazm .
रोज शब
खींच कर लाते है परिंदे
ओर
टांग देते है आसमान में
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
ek khoobsoorat nazm .
वाह बहुत खूब!!
चाँद भी बदमाश है करता है बदमाशियां,
ख़ुद तो सोता नहीं, हमें भी नहीं सोने देता.
कुदरत का शुक्रिया
कि चांद रोज न तो
एक जैसा देती है
और न ही एक ही जगह।
रोज शब
खींच कर लाते है परिंदे
ओर
टांग देते है आसमान में
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
bahut hi khuubsurat! roz kahan??beech mein amavas bhi to aati hai!!!!:)
चाँद को देखने का एक नया नज़रिया है यह !
घुघूती बासूती
vha Anuragji aapke likhane ka to mere pas koi javab nhi hai. sabd hi nhi milate tarif ke liye.
bahut khoobsurat nazam
सीधी साधी सपाट चलती जिंदगी के किसी मोड़ पर मिले कुछ इत्तेफाक बहुत खूबसूरत होते है
साधु साधु ।
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
जी क्या खूब लिखा है आपने।
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
waah!!!
bahut khoobsurat lines hain...
kam shabd mein kitni saari baatein...
दोस्त को बतलाया या नहीँ ..
जैसा चाँद वो देखता था
वैसा आपने भी देखा ?:)
बहुत सुँदर नज़्म ..
- लावण्या
बहुत बढ़िया...
डॉक्टर कवि हैं, या कवि डॉक्टर बन गया...जो भी हो, शानदार है.
ऐसा दिलकश उधार चाहो तो भी ना चुके… हाये…
हर रात देर गये
देखा करता था चाँद
कि उतरे किसी जानिब
सच हों कवियों के किस्से
मगर वो टंगा रहा
रात के माथे पर
कल रात वो नहीं आया
और आज सुबह तुम आईं।
टांग देते है
आसमान के सीने में
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
wah bahut khub
सच में भाई, इतनी अच्छी कविता करते हो तो मरीज कन्फ्यूज नहीं होते - डाक्टर है या कवि?
शायद आपको नही पता,बादलों में चाँद देखते हुए दिल जाने क्यों उदास हो जाता है,चाँद को तकते तकते चाँद के चेहरे पर कई जाने अनजाने से चेहरे अपना रूप बदलते रहते हैं...ऐसे में कभी तो मुस्कुराने का दिल करता है और कभी गहरी सी उदासी छा जाती है,पता है क्यों?
उन चेहरों के लिए जिन्हें हम चाहें भी तो फिर से नही देख सकते...जो ऐसे छिप गए हैं जैसे बादलों में चाँद....
ओह्ह मैं तो भूल गई...बहुत खूबसूरत हमेशा की तरह....
वाह ! क्या बात है हुजूर आज मन खुश कर दिया आपने..
Tareefke liye alfaaz nahi hain....yaheen pe ruk jaati hun!!
Shama
क्या कलमतोड़ लिखता है, भाई !
ज़िन्दे रह .. !
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
-हाय!!!!!! क्या बतायें आपने क्या लिख दिया. बहुत बेहतरीन, अनुराग भाई.
फिर एक दिल को छूने वाली रचना। लाजवाब…
bahut hi sundar ,lekhan bhaavpurna hai
mere chand ko ye kaun hai yu dekhne wala..... :P ...chand ko kya kya banayenge hum..... :)
aap sabhi ka shukriya........chand aor ittefaq dono aise hi hote hai.
रोज शब
खींच कर लाते है परिंदे
ओर उठाकर
टांग देते है
आसमान के सीने में
मुआ चाँद
फ़िर सारी रात सताता है
"kmal bus kmal bus kmal"
Regards
डियर डॉक्टर,
बादलों में चाँद का चित्र, चाँद को निहारने का ज़िक्र,
बात करते करते छत पर चाँद को देखना और चाँद पर सुंदर सी नज़्म,
सच मे, "चार चाँद" लगा दिए आज तो पोस्ट मे.
साधुवाद !!!
हाईवे पर गाडी रोक कर
दोस्तोँ को फोन करने वाला
खयालोँ मेँ अचानक आ धमकने वाला
सिरफिरा
ज़िन्दगी के मतलब निकालता रहता है
ये इस दुनिया का बँदा नहीँ...
चाँद से आया लगता है
wo na to shayar tha na koi deevana ,bus uhin cigarette ke kash lagaya karta tha chand ko dekhkar padkar laga ki har dil thoda awara hota hai .-vivek
एक टिप्पणी भेजें
कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उस संवाद के रास्ते को खोलती है ,जिन्हें लेखक शायद देख नही पाया .....