2008-08-20

'चार किताबे पढ़ लिख कर ये भी हम जैसे हो जायेगे "

ग्रीन टी शर्ट में "आर्यन "अपने कजिन के साथ



"बच्चो के साथ झाडियों में जुगनू ढूंढेगे
दिल के मुआमलात में बचपन भी चाहिए "-बशीर बद्र






पिछले साल दीवाली पर हमेशा की तरह बहुत भाग दौड़ रही ,दीवाली से पहले उपहारों का आदान -प्रदान,एक दूसरे के घर जाना ओर पेशे से जुड़े कई काम ....हर आदमी व्यस्त था रास्ते भी ख़ूब जाम रहे , अक्सर सड़को पर झूंझलहट रही, छोटी दीवाली पर ऐसे ही किसी ख़ास रिश्तेदार के घर जाते वक़्त एक चौराहे पर जाम मे कई देर तक फँसे रहने के बाद ,ग़ुस्से ओर झुंझलाहट मे मै जब ट्रॅफिक पोलीस वाले के बराबर से गुज़रा तो पिछली सीट से ज़ोर से आवाज़ आई “हॅपी दीवाली” मेरे ४ साल के बेटे ने उस ट्रेफिक पुलिस वाले को कहा.तो उसके चेहरे पर इन तनाव के पलोमे भी एक मुस्कराहट आयी अचानक मुझे लगा सचमुच हम छोटी छोटी चीज़ो को कभी कभी कितना मुश्किल बना देते है ओर देखो ये इंसान आज के दिन भी अपनी ड्यूटी कर रहा है ,घर से दूर. मैने शीशा नीचे उतारा ओर कहा” हॅपी दीवाली”
उसने मुस्करा कर जवाब दिया “आपको भी”.

बंगलोर में एक 8 साल की बच्ची दही चावल से भरा कटोरा सिर्फ़ इसलिए खा जाती है की उसके पापा उसे सर मुंडाने देंगे, वो इसलिए सर मुंडा कर स्कूल जाती है क्यूंकि उसकी क्लास में पढने वाला एक बच्चा lukemia से पीड़ित है ,ओर chemotherapy की वजह से गंजे सर के साथ वो स्कूल आने में शर्म महसूस करता था ….. उस नन्ही परी को किसने सिखाया बड़ा होना ?-







3D Spinning Smiley

61 टिप्‍पणियां:

  1. Dr. saab bachhon ki maasumiyat jo apna paraya nahi jaanti vah hi unhe ham sab se upar banaati hai, aur jaise hi bachhe ko apne paraye ki samajh viksit hone lagti hai tab ve phir hamaare jaise banne lagte hai.

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  2. inhi logo ke liye kaha gaya hai ki poot ke paa.nv paalne se pata chal jate hai.

    Heads off to that sweet angel

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  3. अभी मैंने ठीक ऐसी ही एक टी शर्ट खरीदी है.... हरे और सफ़ेद रंग की.... केसरिया होता तो तिरंगा हो जाता..... लेकिन फ़िर भारत का संविधान मुझे वह पहनने नही देता.... अच्छा है हरा और सफ़ेद ही है

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  4. उस नन्ही परी को किसने सिखाया बड़ा होना ?-
    "मासूमीयत से भरा बचपन कहतें है न भगवन का रूप होता है, नन्ही परी आज गंजा होना चाहती है अपने एक दोस्त की वजेह से ये उसके बचपन के निश्चल प्यार और मासूमीयत के देन है, मगर क्या जब वो बडी हो जायेगी तब ये कर पायेगी, शायद सोच भी नही पायेगी, सच है 'चार किताबे पढ़ लिख कर ये भी हम जैसे हो जायेगे "
    Regards

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  5. मैंने भी पढ़ा था आहा जिंदगी में उस बच्ची के बारे में...पढ़कर लगा था की मैं तो उस बच्ची के सामने बहुत छोटे दिल की हूँ! शायद मैं अपने किसी मित्र के लिए ऐसा करने का सोच भी नहीं पति...बहुत अच्छी पोस्ट है!

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  6. बच्चे मन के सच्चे इसलिए ही कहे जाते हैं ..पर बाद में दुनिया का रंग रूप देख कर वैसे ही बन जाते हैं ..जैसा यह ज़माना चाहता है ...काश सभी के अन्दर यह बचपना बना रहे तो अच्छा है

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  7. bachho ki maasoomiyat hame tab ashcharyachakit kar deti hai when its least expected..hamare andar ki achhai tab jagaati hai..when its least expected...

    surf excel ki ad hai na 'daag achhe hote hai'

    bahut badhiya...

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  8. इस बच्ची के बारे में हमने भी पढ़ा था.. और अपना आर्यन तो है ही नन्हा शायर.. दिल की बात तो जींसमें है इसके.. ऐसी ही पोस्ट पढ़वते रहिए डा. साहब..

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  9. किसी ने नही .उसने ऐसा किया क्योंकि वह परी है

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  10. "...उस नन्ही परी को किसने सिखाया बड़ा होना ?"

    आप जादूगर हैं साहब!!
    खुदा ने आपकी कलम को वो स्वाभाविक सरलता दी है कि आपको पढते पढते कब नमी आ जाए पता भी नही चलता!!!

    यकलख्त किसी का लिखा ये शेर याद आ गया:

    किसी मासूम बच्चे के तसव्वुर में उतर जाओ,
    तो शायद ये समझ पाओ, खुदा ऐसा भी होता है...

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  11. अरे भई बशीर साहब के हम भी तरफ़दार हैं! और आपकी कलम तो जादू बिखेर रही है!

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  12. 'आए क्या परदेस में, हो गये नौकर यार.
    छूट गये सब 'मौदगिल' गांव-द्वार-त्यौहार..'

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  13. उस नन्ही परी को किसने सिखाया बड़ा होना ?
    :
    bahot mast......bahot dino baad aapki koi aisi post padhi jise padhkar muskurana hua....

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  14. सच में.... आज के बच्चे कब कैसे प्रतिक्रिया देंगे... कहा नहीं जा सकता। बच्ची का अपने मित्र के लिए सिर मुंडाने का ख्याल, वास्तव में उसके मासूम मन में हिलोरे लेती संवेदनाओं को दिखाता है... इन हिलोरों के कुछ कतरें काश हम तक भी पहुंच जाएं.... आमीन।

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  15. आर्यन का स्टाइल पसंद आया, शायद यह बच्चों की सच्चाई ही है कि उन्हें हर कोई अपना सा लगता है वो किसी को भी बाय कर सकते हैं, हैप्पी दिवाली विश कर सकते हैं या फिर अपने दोस्त के लिए सिर मुंडवा सकते हैं। एक और बढिया पोस्ट के लिए बधाई

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  16. आप की पोस्ट पढ़ कर बहुत अच्छा लगा .....यह दुनिया को एक बहुत बड़ा संदेश दे गई। बहुत बढ़िया लिखा है।

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  17. bahut din hue main bloggin nahi kar pa rahi thu.. itne din baad ek behtareen post padh ke achcha laga..

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  18. दरअसल परोपकार के लिए आत्मोत्सर्ग तक की भावना प्रकृतिप्रदत्त होती है -यह नन्ही परी उदाहरण है .
    इस वृत्तांत के लिए धन्यवाद !

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  19. वाह बहुत सुन्दर। बच्चों की सरलता यदि बड़ों में भी आ जाए तो ना जाने कितनी परेशानियों का अन्त हो जाए। सुन्दर प्रस्तुति।

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  20. आर्यन और नन्ही परी नै तो म्हारै घनै प्रणाम और आशीर्वाद !
    अण दोनु ही बालकां की जितनी भी तारीफ़ करी जावै कम ही
    पड़ेगी ! अनकां काम घणा अनुकरणीय सै !

    अंत मै आपनै लिख राख्या सै की "लेन- देन की रस्म "
    निभाणै की बात ! सो डाग्दर साब हरियाणवी तो इसे
    काम करते कोनी ! असल मै हम ठहरे देहाती माणस !
    अंगेजी हिंदी किम्मै आंदी कोनी और म्हारी हरयाणवी
    कोई समझै कोनी ! इस करकै म्हारै कमेन्ट छोटे हुया
    करै सै ! वरना आपकी पोस्ट तो हम ३ बार तैं कम
    पढ़ते ही कोनी ! थमनै पढण मै त घणा आनंद आवै सै !
    राम राम

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  21. .

    किसने सिखलाया होगा.. बड़ा होना ?
    बहुत खूब दोस्त !

    अभी उसके मम्मी-पापा
    उसे झूठ व दिखावे का सच नहीं सिखा पाये होंगे,
    दोनों शायद वर्किंग कपल हों..

    एक सच तुमने लिखा और..
    रोज देखा जाने वाला एक सच मैंने उगल दिया..
    लेन-देन पूरा होगया कि नहीं ..

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  22. wah bhai kya baat kahi us nanhi pari ne. Bachche bahudha aisi baat yaad dila dete hain jinhein jaante samajhte huye bhi hum bhulaye rehte hain.

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  23. अच्छी तस्वीर खीँची है आपने!
    बच्चोँ को मन की कालिमा दुनिया मेँ बडा होते होते सीखनी पडती है ये दुखद है ..
    यहाँ पर, छोटे बच्चोँ को रँगभेद का पता नहीँ रहता पर बडे होकर वही अपने अपने घेरे मेँ चले जाते हैँ

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  24. हम सब भागते हे एक दम से बडी बडी खुशियो के पीछे, ओर हमेशा खाली हाथ रहते हे, फ़िर भागते हे मन्दिरो मे, साधु संतो के... कभी गोर नही करते इन छोटी छोटी बातो को, इन छोटी छोटी खुशियो को, लेकिन इन्ही मे कही छिपी हे बडी खुशियां.
    धन्यवाद

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  25. kabhi kabhi bacche ham badon se bhi badi badi baatein kar jaate hain...mujhe film to nahi yaad aa rahi par last scene me jab baccha class me ghusta hai to dekhta hai ki sare bacche sar muda ke aaye hain.mujhe us film ka baaki kuch yaad nahin bas ye yaad hai ki rongte khade ho gaye the aur aankhein geeli.

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  26. हर कदम पर दिखने वाली दुनिया, हर लम्हे पर दिखने वाला झूठ, ढोंग ये सब ही तो बड़ा करने में साथ देते जाते हैं... बाकी तो सब साथ छोड़ जाते हैं...

    मासूमियत भरी पोस्ट पर एक लाइन में ही सारी गहनता भर गई है.

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  27. काश हम सब भी बच्चे ही रहते तो कितना स्कून भरा होता जीवन हर कही परी ही परी नजर आती

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  28. बच्चे ही तो साबित करते हैं- वो भगवान का रुप हैं. एक बच्चे का हैप्पी दिवाली कहना!! उस बच्ची का सर मुडवाना-सलाम है!!

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  29. bachcho se sikhane ka alag hi majaa hai saahab..
    aap khoob maje le rahe hain..

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  30. बहुत सुंदर प्रसंग हैं. पढ़कर बहुत अच्छा लगा. यही छोटी-छोटी बातें मानव को मानव बनाती हैं.

    मैं भी एक परी सी बच्ची को जानता हूँ जिसने अपने बाल एक फुट लंबे करके एक संस्था को दान किए थे ताकि वह किसी कैसर-पीड़ित का विग बनाने के काम आ सकें.

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  31. आर्यन को हमारा स्नेह दें। ...दुआ है कि बड़ा होकर वह भी अपने दिल की बात बिखेरता रहे और दिल उसका ऐसे ही भगवान जैसा बना रहे। ...उस नन्ही परी को सलाम।

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  32. @बंगलोर में एक 8 साल की बच्ची दही चावल से भरा कटोरा सिर्फ़ इसलिए खा जाती है की उसके पापा उसे सर मुंडाने देंगे, वो इसलिए सर मुंडा कर स्कूल जाती है क्यूंकि उसकी क्लास में पढने वाला एक बच्चा lukemia से पीड़ित है, ओर chemotherapy की वजह से गंजे सर के साथ वो स्कूल आने में शर्म महसूस करता था ….. उस नन्ही परी को किसने सिखाया बड़ा होना ?

    कितनी खूबसूरत बात है. बच्चे भगवान का रूप हैं,भगवान् ही सिखाते होंगे इन्हें.

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  33. अनुराग जी काश कि हम सब बच्चों जैसे हो जाते तब दुनिया कितनी खूबसूरत होती। मैने कई बच्चों की दिल्लेरी, इंसानियत, मासूमियत अपनी आँखो से देखी हैं एक दो का जिक्र भी अपने ब्लोग पर किया था । वो इंसानियत उन्हें किसने सिखाई हैं। और हम चार किताब पढकर इंसान नही बन पायें हैं। पता नहीं क्यों? क्या जीवन की सच्चाई इतनी भारी होती हैं कि उसके नीचे इंसानियत जैसे शब्द दब कर रह जाते हैं। हम इंसान ना बनकर पता नही क्या क्या बन जाते है । खैर आपकी पोस्ट ने एक सच्ची बात कही हैं। आर्यन बेटे को हमारा प्यार।

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  34. नन्हीं, महीन सी बात
    शहद की धार जैसी
    प्यारी सी सिखलाती पोस्ट ....

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  35. अनुराग आज लगा कि ये दो पोस्ट नहीं पढ़ी होती तो जरूर से कुछ
    मिस कर दिया होता। अनुभवों को आप अपनी शब्दों में पिरोकर कमाल कर देते हैं।

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  36. उस नन्ही परी को किसने सिखाया बड़ा होना ?-
    डा. साहब! बहुत बड़ा सवाल कर दिया आपने.
    वैसे मैं तो कहता हूँ की नन्ही तो बड़ी होना सीख गयी, काश! हम सब भी नन्हे-नन्ही होना सीख जाएँ

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  37. नहीं बच्चों को बस बच्चा ही रहने दीजिये. बड़े हो गए तो हमारे जैसे हो जायेंगे.
    बहुत खूब... आपकी पोस्ट हमेशा emotional कर देती है. पर मुस्कराहट भी देती है सोच कर की अच्छे लोग हैं अभी.

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  38. आप के दिल की बात सच में बहुत खुबसूरत है ..सर जी ..

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  39. नन्ही बच्ची का सिर मुडाना - साबित करता है कि बचपन कितना निर्मल होता है.... चाहो तो मन के आर-पार देख लो..... पानी की तरह।

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  40. बचपन आसमान के रूई जैसे बादलों की तरह खालिस होता है, हर फर्क से परे, न वहां जात का बंधन होता है न नस्लों की बातें, न रंग देखता है न मज़हब का कोई रंग, कभी कभी सचमुच दिल करता है की साड़ी दुनिया के लोगों के दिल बचपन की मासूमियत को छू लें तो ना कहीं कोई फसाद होगा न कहीं बेगुनाहों की मौत होगी. लेकिन ये भी मालूम है की ये सब दिल की बेकार सी ख्वाहिश है और कुछ नही, बस खुशी इस बात की है की हम बड़ों की वहशत से भरी इस दुनिया में इन प्यारे प्यारे बच्चों की मासूम सी ख्वाहिशें जीने की प्रेरणा देती हैं...आर्यन की फोटो बहुत प्यारी लग रही है, उसे मेरा ढेर सारा प्यार...और आपको इस जज़्बात को लौ देती पोस्ट के लिए मुबारकबाद.

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  41. उस नन्हीं परी को लाखों लाख दुआएँ।

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  42. उस नन्ही बालिका को मेरा सलाम....

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  43. आपकी हर पोस्ट दिल को छू जाती है।

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  44. भावात्मक अभिव्यक्ति सोचने को विवश करती है . बहुत बढ़िया अनुराग जी धन्यवाद

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  45. श्री कृष्ण जन्माष्टमी की ढेरों शुभकामनाएं |

    हिन्दी भाषा में उपलब्ध सूचनाओं व सेवाओं की जानकारी :


    हिन्दी इन्टरनेट


    एक बार अवश्य जांचें |

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  46. प्रिय डा. अनुराग जी
    परिवार एवं इष्ट मित्रों सहित आपको जन्माष्टमी पर्व की
    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! कन्हैया इस साल में आपकी
    समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करे ! आज की यही प्रार्थना
    कृष्ण-कन्हैया से है !

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  47. आपको जन्माष्टमी पर्व की
    बधाई एवं शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  48. ये काम भी बच्चे ही कर सकते हैं। सिर मुंडाकर स्कूल जाने वाली उस बच्ची को प्रणाम। आपने सचमुच बहुत अच्छा प्रेरक प्रसंग लिखा है। आपको बधाई। मुझे नहीं मालूम था कि मेरठ जैसे शहर में भी कुछ चांद छिपे बैठे हैं।

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  49. बचपन कि बात ही निराली है ...किसी ने सच ही कहा है
    "Child is the father of man"

    जन्माष्टमी कि हार्दिक शुभकामनाएं !!!

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  50. अनुराग जी, चलिये समधी बन जाते है,आपके आर्यन की शादी हमारी लडकी (अभी उसकी माँ का भी पता नही है वैसे) के साथ तय| :)
    सच मे ये बच्चे हम बडो (??) को कभी कभी बहुत कुछ सिखा जाते है....

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  51. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  52. Bachcho ki masoomiyat ke kya kehne...kash! bade hoker bhi yahi masoomiyat rehti to...ye dunia jaisi dikhti hai ...vaisi na hoker kuch aur hi hoti.... very good post....

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  53. किसी ने सच ही कहा है बच्चे इश्वर का ही रूप हैं...घर से मस्जिद है बहुत दूर ,चलो यूँ कर लें, किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए"
    जैसे आप मिष्टी के लिए कहते हैं ना...वो ही मैं आर्यन के लिए कहता हूँ...इसे काला टीका लगा कर रखिये...नजर लग जायेगी.
    मिष्टी की कुछ फोटो आप को अलग से मेल पर भेजूंगा अगर आप वादा करें की आप भी मुझे आर्यन की कुछ और फोटो बदले में भेजेंगें तो...
    नीरज

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  54. Anuraag, kya baat likhi hai. char kitaaben parkar....

    Bahut hi prerak prasang reha us bachii ka.

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  55. क्या बात लिखी है अनुराग भाई आपने। कभी कभी बड़ों को देखता हूँ, तो डर लगता है कि क्या आगे चल कर मैं भी इन जैसा बन जाऊंगा और ये ऐसे कैसे बन गए। कभी तो यह भी मेरे जैसे रहे होंगे!

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  56. बहुत पुरानी एक पिक्चर है 'धरती कहे पुकार के 'गाँव के तीन भाई की कहानी है उसमे एक सीन है बड़ा भाई गाँव के मास्टर का गिरेबान पकड़ कर कहता है.....ऐ मास्टर अब किसी ओर को नही पढाना पढ़ लिख कर आदमी सिर्फ़ अपनी सोचता है......सोचता हूँ सामाजिक मूल्य अभी भी वाही है बस शक्ल बदल गये है.....

    @कुणाल
    दो तीन पोस्ट पहले मैंने मजाक में एक शेर लिखा था ...
    .कि साँस लेते है बिजली के तारो पे
    रिश्ते अब कम्पूटर के पर्दों पे बनते है
    ओर कुणाल ने देखिये एक रिश्ता सामने रख दिया.......हा हा भाई हमें कोई ऐतराज नही पर उस जमाने में शायद हमसे पूछा न जाये....सिर्फ़ बताया जाये ......
    @नीरज जी
    मै जरूर आपको मेल करूँगा ...मुझे अपना मेल id दे ....

    आप सभी लोगो का ढेरो शुक्रिया....

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  57. bachche hain tow kya hua unke andar dil tow badon ka hai dr asal we sansarikta ke aise sanskar men pale badhe hote hain jahaan bade inhen nhin apitu ye badon ko sikhalaya karate hain . aur kiya yahi us bachchi nen aur us char sal ke bachche nen . wastaw men aaj tow mera bhi hridaya kafi jyada aapnen aapko dhanya mahsoos kr rha hai aur sonch rha hai ki abki deewali ko main bhi aise hi logon ko dhanyawad kahoonga .

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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