2008-08-29

इन मुई गोलियों का कोई मजहब नही होता


छत से नीचे झाँककर देखता हुआ वो आदमी जिसकी टांग पकड़े दूसरा आदमी खड़ा है कह नही सकते की गोली उसके पार से निकल जाये ओर वो वही मर जाये ,सरकार उसको इस काम की शायद सात या आठ हज़ार रुपये महीना देती है....पता नही वो किस गाँव का है ?उसके गाँव में शायद केबल ना हो ,उसकी बीवी अपने रोजमर्रा के काम में उलझी हो ओर उसकी बेटी स्कूल गई हो ... १८ घंटो के बाद भी अगर वो जिंदा रहा तो कोई उसका इंटरव्यू लेने नही आयेगा..उसे सबसे पहले यही मालूम करना है की गोली किसको लगी ....उसने अपने दो साथियों को गिरते देखा था .....उसके बड़े अफसर शायद उसे एक दिन की छुट्टी दे दे .........


छोटे के स्कूल से .....परचून की दुकान तक
कितनी सरहदे खींची हुई है अब भी गाँव मे.......

फ़ौजी की लड़ाई मरने के बाद तक चलती है




दो दिन पहले जम्मू मे १८ घंटे लड़े जवानो के लिए

51 टिप्‍पणियां:

  1. जी हां फ़ौजी की लड़ाई मरने के बाद तक चलती है - हालत तो ये हो जाती है कि उसके मुआवजे के लिये भी उसके घर वालों को एक अलग जंग लडनी पडती है।

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  2. kuch hazar rupye mahine ki pagar ke liye chhatisgarh me hazaron log zindagi daaw par laga rahe hain,bahut sahi likha aapne jawan ki asli jung to uski maut ke bad hi shuru hoti hai

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  3. याद नहीं पढता किसी और ने इन जवानों के लिए ऐसी या किसी भी तरह की कोई संवेदना दिखाई हो...इसी लिए तो आप सब से अलग और विलक्षण हैं...बहुत सार्थक पोस्ट...सलाम आपको.
    नीरज

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  4. " bhut marmeek post hai, kitna dardnak manjar hotta hoga aapke liye jub koee asia hadssa dekhen ko milta hoga, jan hthalee pr laiker mejeh kuch hazar rupyun kee naukree krke desh ke rakhsa kerne wale jvaan sach mey khud kitne majbur hain, khud apnee liye kuch nahee kr patey....., magar kyun.???? ye javab kiseke pass nahee...." sach kha aapne ke फ़ौजी की लड़ाई मरने के बाद तक चलती है....

    Regards

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  5. samvednashoonya samaj me theek aisi jagriti chahiye kintoo aisa prateet hota hai ki jhinjhode jane ke bawzood bhi janta sone ke upkram me hai.....

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  6. sahi kaha..
    फ़ौजी की लड़ाई मरने के बाद तक चलती है

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  7. अनुराग जी सच कहते हो। फोजी की लड़ाई मरने के बाद तक चलती हैं। यह हम सबका दुर्भाग्य हैं। आपने स्मरण कराया बहुत अच्छा किया।

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  8. फोजियों के दर्द और उनके लिए व्यक्त की गई आपकी
    भावनाओं के लिए आपको प्रणाम ! मेरे परिवार स्वयं
    और ससुराल पक्ष से आज की तारीख में १७ फोजी हैं !
    सिपाही से लेकर ब्रिगेडियर तक ! आपकी भावनाओं को
    हमसे अच्छी तरह कौन समझ सकता है ! इस पोस्ट के
    लिए आपको पुन: प्रणाम !

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  9. सही कहा आपने , हम सिर्फ़ बतकही मे ही रह जाते है, कुरबानी देते है फ़ौजी और उनके परिवार , कुरबानी बिन दिये कैश कराते है राजनितिक , जिस्का सबसे बडा उदाहरण काग्रेस के मालिकान है ,जिनको इस देश के सेनाध्यक्षो से ज्यादा अधिकार और सम्मान प्राप्त है :)

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  10. एक बहुत अच्छी पोस्ट...अगर सरकार इसे पढ़े तो शायद इन जवानों कि बेहतरी के लिए कुछ सोचे!जान देकर भी शहीद के परिवार को बहुत कष्ट भुगतने पड़ते हैं!

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  11. गोलियों का मजहब नहीं होता ! और जिनका तथाकथित मजहब होता है वो इसे उसके लिए इस्तेमाल करते हैं ! और फिर इसका परिणाम भुगतने वाले की लडाई मरने के बाद भी चलती है...
    एक और बहुत अच्छी पोस्ट.

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  12. Dr. Sahab bahut acchi post hai. Desh ke sainik jaan hatheli main rakhkar apni duty nibhaate hain , kintu desh ka media aur desh ka raajnaitik amla aur laalfeetasahi unko unke kaarya anuroop samman aur haq dene main baadhak bante hain. ghayal ho jaane ke baad sainkon aur shahidon ke jaane ke baad unke parivaar ko dar dar bhatkne ke liye majboor karte hain. aise main kaise aaj ki yuva peedhi main desh bhakti ka jajba aur josh paida hoga.

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  13. कितने मुश्किलातों में यह बहादुर फौजी हँसते हँसते रहते हैं वह बहुत करीब से देखा है मैंने ..आपने सही लिखा है वह दर्द

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  14. अनुराग,
    सही कहते हैं आप.... फौजी की लड़ाई मरने के बाद तक चलती है। हां बस, तब वो नहीं उसका परिवार लड़ता है।

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  15. छोटे के स्कूल से .....परचून की दुकान तक
    कितनी सरहदे खींची हुई है अब भी गाँव मे.......

    छोटे के स्कूल से .....परचून की दुकान तक
    कितनी सरहदे खींची हुई है अब भी गाँव मे.......

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  16. बहुत संवेदन शील रचना है। दिल को छू गई। सस्नेह

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  17. दुखद है कि सेना को सतत युद्ध लड़ना पड़ रहा है।

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  18. मन संवेदित कर गयी आपकी यह पोस्ट ..फौजियों को सलाम !

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  19. goliyon ka majhab ho bhi jay aayachariyon ka koi majhab nahi hota.

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  20. sahi keh rahe ho Anuraag, Fauji to ek baar marta hai lekin uske ghar wale bar bar.

    Tumhare template me kuch problem hai, comments thik se listed nahi hote

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  21. यही फौजी दस दिन की थकान के बाद एक कैजुअल लीव ले और उस के दौरान सड़क दुर्घटना में अपंग हो जाए तो उसे अपंगता पेंशन नहीं मिलेगी। दिल्ली उच्चन्यायालय का यही निर्णय है। जरा अदालत ब्लाग देखें।

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  22. छोटे के स्कूल से .....परचून की दुकान तक
    कितनी सरहदे खींची हुई है अब भी गाँव मे...

    bahut hi sateek likha hai ki foujio ki ladai marne ke baad tak jari rahati hai . foujio ki mratyu ke baad unke parivaajano ko kafi pareshani jhelani padati hai . dinesh ray ji ki teep bhi nai /ajeeb lagi ki fouji casual leave lekar jaye or uska sadak durghatna ho jaye to use vikalangata pension nahi milegi . jab jinda rahate huye ye hal hai to marane ke baad unke parivaarjano ki ladai ki shuruaat ho jati hai .

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  23. एक बहुत ही संवेदनशील पोस्ट।
    सही कहा है कि फौजी की लड़ाई मरने के बाद तक चलती है।

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  24. अनुराग जी मेरे भैया अनुराग भी सेना मे अफ्सर है. एक अफ्सर और एक जवान की ज़िन्दगी मे बहुत अन्तर होता है. लेकिन सिर्फ 'ज़िन्दगी' मे!

    काश इतनी सम्वेदना फौजियो के लिये हमारे रोज़ मर्रा के जीवन मे आ जाये.

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  25. ‌लड़‌ म‌रन‌ा क‌ह‌ाँ क‌ा जन्न‌त क‌ा रास्त‌ा ह‌ै प‌राये ह‌मारी ज़‌मीन को छीन रहे हैं अपनी ब‌ताक‌र, यह कह‌ाँ त‌क सही ह‌ै? व‌ह खुद ही बत‌ायें तो अच्छ‌ा!

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  26. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  27. a salute to you...and to our soldiers.
    hamesha likhne ke liye shabd nahin hote...

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  28. .


    पहले तो माफ़ी चाहूँगा, अपनी लेट-लतीफ़ी का...
    बहुतेरे लोग तुमसे सहमत हैं, ज़ाहिर है कि मेरे अल्पमत में जाने की मंशा नहीं ही होगी..मेरे पास मत अपने पक्ष में करने के लिये कोई थैली भी नहीं है.. और मैं भी फ़ौज़ी के ही साथ हूँ ।
    साथ ही.. उन परिवारजनों के साथ हूँ... जिनको वह पीछे छोड़ जाता है,
    जब तक जिया, शान से जिया किंतु छुट्टियों के बाद लौटने में वह अशांत हो कर जाता है..अनायास बड़ी होती जाती लड़की, सूखा सा मुँह लिये बीबी... न जाने कब और किस हालत में लौट कर आयेंगे, कोंचती हुयी अनिष्ट की आशंकायें ! धड़कते दिल और उदास धुँधली आँखों से विदा करते माँ बाप का चेहरा वह अपने लौटने के वारंट की पुर्जे में दोहराता रहता है.. ..
    c/o, A.P.O. आने वाली चिट्ठियों की अनिश्चितता उसको चिंतित किये रहती है..
    मिलीं तो खोल कर देखी गयी चिट्ठियाँ ही मिलीं...
    बहुत लंबी फ़ेहरिश्त है.. और टिप्पणी डिब्बा बहुत ही छोटा..
    जो भी हो, मेरा फ़ौज़ी इतना मामूली भी नहीं है,
    कि उसे इस टिप्पणी डिब्बे में समेट सकूँ..
    तुमने पोस्ट लिखने की सोची तो... ..
    यही बहुत बड़ा आभार है, हम सब का... उन अनाम फ़ौज़ियों पर

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  29. "जो समर मेँ हो गए अमर,
    मैँ उनकी याद मेँ,
    गा रही हूँ श्रध्धा गीत
    धन्यवाद मेँ "
    गीत रचना स्व. पँडित नरेन्द्र शर्मा
    गायिका : लता दीदी !
    जय हिन्द !
    - लावण्या

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  30. सच कहा डॉक्टर साहब. मैं ऐसे लोगों को करीब से जानता हूँ और यह मानता हूँ की इन लोगों की ज़िंदगी के दान पर ही हमारा समाज निर्भय है.

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  31. बड़ी कठिन जिन्दगी है जवानों की। संवेदनशील पोस्ट!

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  32. दिल को छू गई अनुराग जी आपकी ये पोस्ट, बड़ी मुश्किल भरी जिंदगी होती है, उनकी हिम्मत और साहस पर ही हम सुकून से जी रहे हैं, आपने उनके बारे इतने संवेदनशील अंदाज़ में लिख कर उनकी हिम्मतों को सलाम किया है जिसके लिए आपकी जितनी तारीफ़ की जाए कम है...आजकल समय बिल्कुल नही होने की वजह से ब्लॉग की दुनिया से दूर सी हो गई हूँ, इसलिए इतनी देर के लिए माफ़ी चाहूंगी.

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  33. मैं डा. अमर कुमार जी की टिपणी को एक फोजी और उसके परिजनों
    के परिपेक्ष में कही हकीकत मानता हूँ ! और उनके कुछ शब्द भी दोहराना
    चाहता हूँ !
    "किंतु छुट्टियों के बाद लौटने में वह अशांत हो कर जाता है..अनायास बड़ी होती जाती लड़की, सूखा सा मुँह लिये बीबी... न जाने कब और किस हालत में लौट कर आयेंगे, कोंचती हुयी अनिष्ट की आशंकायें ! धड़कते दिल और उदास धुँधली आँखों से विदा करते माँ बाप का चेहरा वह अपने लौटने के वारंट की पुर्जे में दोहराता रहता है.. ..
    c/o, A.P.O. आने वाली चिट्ठियों की अनिश्चितता उसको चिंतित किये रहती है..
    मिलीं तो खोल कर देखी गयी चिट्ठियाँ ही मिलीं..."

    ये हकीकत है एक फोजी की ! और अभिषेक भाई की इस बात के लिए भी धन्यवाद देना चाहूँगा की
    उनके ये शब्द "एक अफ्सर और एक जवान की ज़िन्दगी मे बहुत अन्तर होता है. लेकिन सिर्फ 'ज़िन्दगी' मे!"
    भी सौ % खरे हैं ! चुंकी हम लोगो के परिजन फोजी हैं तो ये बात ज्यादा गहराई से समझ आती है !
    मैं आज डा. अमर कुमार जी और भाई अभिषेक जी को उनकी टिपनीयों के लिए सलाम करता हूँ !
    हमने हमारे परिजन खोये हैं ! उनको इस तरह याद करना भी श्रन्द्धान्जली ही है ! हम तो रोज ही
    याद करते हैं और क्या लिखे........?

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  34. बहुत ही संवेदनशील पोस्ट है अनुराग जी .....सही कहा आपने वो फौजी जो हम जैसों के लिए अपनी जान दे देता है...उसकी लड़ाई कभी खत्म नही होती !!!!!!!!!

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  35. अति संवेदनशील, ...भावुक कर गयी यह पोस्ट!
    फौजी भाइयों को सलाम!

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  36. haqikat to ye hi hain...real life heroes ko koi puchhta nahin...kyon ki vahan glamour nahin...

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  37. आप न फिल्म् बनाना शुरू कर दीजिये अब.....ब्लॉग पाठकों तक आपकी संवेदनशीलता ना सीमित करे

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  38. Anurag ji
    aapne jo baat kahi hai wahi sach hai
    fouzi ki ladhayi kabhi khtam nahi hoti
    unka parivaar bhi ladhta hai aur unke bachhe bhi
    aur unka naam bhi shayad log nahi jaante
    is sab baat ko jaante hue bhi wo farz nibha raha hai
    raaz zindgi ke sikha raha hai

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  39. बिलकुल सही अनुराग जी फौजी की लङाई उनके मरने के बाद भी चलती रहती है।

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  40. संक्षिप्त मगर बहुत ही संवेदनशील पोस्ट .....सही कहा आपने, वो फौजी जो हम जैसों के लिए अपनी जान दे देता है...उसकी लड़ाई कभी खत्म नही होती !!!!!!!!!

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  41. majhab goli kaa bhi tha kabhi
    mangal pande paida hua tabhi?

    desh dharm seekhati goli.
    rashtr charan me bhi tab
    hoti hai har bhashaa boli.
    ma ka aanchal hota haraa hai,
    lal rakt se
    jab seekh jaate hain
    ham tum
    lagaana apni maati ki roli

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  42. डॉ अमर कुमार जी ओर अभिषेक .......ताऊ रामपुरिया ने आपकी टिपण्णी पर सब कुछ कह ही दिया है ,इसलिए मेरे कहने की अब कुछ गुंजाइश नही बचती .....अभिषेक ने एक बात कही है की जवान ओर फौजी की जिंदगी में अन्तर होता है जो सौ टका सही है......घर के ऐ.सी कमरे में जम्मू का लाइव रिपोर्टिंग देखते हुए एक जवान को छत से नीचे लटकते हुए देख मन में ढेरो विचार उमड साथ में कुछ पुरानी यादो ने भी दस्तक दी...कई मरीजो को जो आर्मी में जवान है देखा है ,बचपन के कुछ पल रुड़की में बिताये है ओर ख़ुद पिता डेपुटेशन पर राजपुताना रिफेल्स के इंचार्ज रहे है .......सब के सबो को चाँद लाइनों में समेटने की कोशिश की है........
    आप सभी लोगो का तहे दिल से शुक्रिया.......

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  43. सच कहा आपने फौजी की लडाई उसके मरने के बाद भी चलती है ,किसी ने भी उस फौजी का इंटरव्यू नहीं लिया जो घंटो जम्मू के उस परिवार को बचाने में जूझता रहा

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  44. vr true,one jawan gives his life for nation but no one understands what he has given ,he has given whole happiness of his family for other people ,he do not even know.bahut sarhade abhi baki hai zameen aur dil se mitane ke liye.by mehek

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  45. मन बहुत उचाट है डाक्टर साब...कुछ उल्टा-सीधा लिख जाऊँगा

    आप दिल में बसते जा रहे हो

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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