2008-12-08

शनिवार की रात से

शनिवार रात क्लीनिक से बाहर निकलता हूँ.... सड़क पर गाड़ी से कुछ कदम दूर ठेलेवाला खड़ा है ..ये सीजनल ठेलेवाला है ,सर्दियों में मूंगफली ओर गर्मियों में तरबूज बेचता है..मै कुछ मूंगफली लेकर गाड़ी में घुसकर अपनी टाई ढीली करता हूँ ...क्लीनिक से घर का रास्ता १२-१५ मिनट का है ...रेडियो ऍफ़ एम् चाभी लगाते ही शुरू हो जाता है...कुछ दूर ड्राइव करने पर मै मूंगफली के पैकेट में हाथ डालता हूँ....तकरीबन ४ -५ मूंफलियो का स्वाद मेरे मुंह को लग चुका है ...आगे रास्ते में सिर्फ़ एक रेड लाईट है .. .छिलका तोड़ता हूँ तो मुंह में कड़वाहट फ़ैल जाती है...कोई कड़वी मूंगफली ..खिड़की से बाहर थूकता हूँ...फ़िर दूसरी मूंगफली........कि .आगे हवलदार खड़ा दिखायी देता है..डंडे से मुझे रुकने को कह रहा है.....मुझे ??? पर क्यों ....."ओह ...." मैंने रेड लाईट क्रॉस कर दी है...... मै गाड़ी साइड में करता हूँ...रेडियो ऍफ़ एम् पर गाना बजना बंद हो गया है.....विज्ञापनों का दौर है......ट्रेफिक पुलिस का हवलदार मेरे पास आता है .रेडियो ऍफ़ एम् पर देशद्रोही का डाइलोग चल रहा है...मै शरमा कर उसे म्यूट करते हुए सफाई देता हूँ "रेडियो है "ठीक वैसे ही जैसे आप कई दिनों कि मशक्कत के बाद जब पहली बार अपनी गर्ल फ्रेंड को रूम पर लाते है ओर पहले से सेट किए गाने को चलाने के लिए अपने टेप रिकॉर्डर का बटन माहोल को ओर रोमांटिक बनाने के लिए दबाते है....उसमे से "तुम तो ठहरे परदेसी "बजता है ओर आप हडबडा के फ़ौरन बंद कर सफाई देते है "मेरा नही है "....(मेरी आत्मकथा से )
वो अन्दर झांकता है" क्या कर रहे थे आप" ?आप शब्द बड़ी मुश्किल से आख़िर में जुडा है शायद मेरे कोट टाई का असर है ....मूंगफली के छिलके मेरी पैंट ओर सीट पर बिखरे पड़े है...कुछ बुरादा मेरे कोट पर .....ओर बराबर वाली सीट पर मूंगफली का पैकेट ..जिसमे से दो चार मूंफालिया बाहर निकल कर सीट पर फैली हुई है....वो एक नजर मुझे घूरता है..."आप चलती गाड़ी में मूंगफली खा रहे थे "मै सर झुकाकर अपराध स्वीकार करता हूँ .... जैसे देसी दारु की बोतल मेरी जेब से बरामद हुई हो....कुछ पल खामोशी से गुजरते है.....जाइये...... ओर आगे ध्यान रखियेगा " ..मै सर झुकाकर बिना ".थैंक यू" कहे अहसान फरामोशी में सरपट गाड़ी दौड़ा देता हूँ ....
देर रात टी.वी म्यूट करके स्टार मूवी पर "वाल स्ट्रीट "मूवी देखते वक़्त मै अमीष को फोन मिलाता हूँ वो सूरत में है "अब समझ में आया तेरी पहली गाड़ी उस रोज कैसी ठुकी थी ."..
आज से साल पहले अपनी गाड़ी में गिरी कैसेट को उठाने के लिए झुके अमीष ने अपनी पहली नई कार को ठोक दिया था


आज की त्रिवेणी

खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
वो भी सुना उसने जो कहा नही .....

ये गलतफहमिया भी अजीब होती है

79 टिप्‍पणियां:

  1. त्रिवेणी में ग़लतफहमी को अजीब कहना बेहतरीन रहा!

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  2. शुक्र है मुगंफली खा रहे थे... छुट गये... कहीं काजु, बादाम होते तो जुर्माना कुछ अलग होता.. जनाब..

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  3. काफी मज़ेदार रहा आपका experience...!!

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  4. ये ( मेरी आत्मकथा ) आप की ही आत्मकथा है या किसी किताब का नाम !! (अभी भी संदेह का लाभ लेकर बच सकते हैं.)
    वैसे गाना कौन सा चल रहा था देशद्रोही के पहले... :)

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  5. एक तो अधूरे मन से गाडी चलाते हैं और दोष हवलदार पर :)

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  6. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....

    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है

    सही कहा जनाब आपने ..मूंगफली जब जब खायेंगे आपको उस हवलदार का चेहरा एक बार जरुर याद आएगा :) छोटी छोटी बातें भी ज़िन्दगी का अर्थ बता देती है ...वैसे आपकी आत्मकथा पढने को कब मिलेगी हमें :)..इन्तजार रहेगा

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  7. बोतल विदेशी दारू की होना भी उतना ही अटपटा हो जाता डाक्ट्रर सहाब। आप तो ऎसे नहीं जो सिर्फ़ देशी दारू के ही नशे को को गलत कहें।

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  8. बच गए जनाब ठुकने से भी और जुर्माने से भी। मूंगफली बनाने वाले का शुक्रिया।

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  9. उसमे से "तुम तो ठहरे परदेसी "बजता है ओर आप हडबडा के फ़ौरन बंद कर सफाई देते है "मेरा नही है "....(मेरी आत्मकथा से )
    kiski katha hai doc saab:);),sirf dum bharke chod diya wo bhi policewale ne,bade saste mein chute,warna kuch rupiye khali ho jate jeb se.:):),mungfaali baad mein khayi na ho to idhar bhej digiyega:):)

    sach galatfehmiyan wo bhi sun leti hai jo kaha nahi,sundar triveni.

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  10. अच्छा लगा जान की आपने अपना अपराध माना...
    god bless u!
    ---मीत

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  11. यह सही है - अगली बार चाहे जो कर्म-विकर्म करें, कुछ मूंगफलियां सीट पर बिखेर रखियेगा, पुलीसवाले के किये तर्क अच्छा बनेगा।

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  12. सस्तें में छुट गए सर आप। वैसे गाड़ी ध्यान से चलाया कीजिए आप।
    रेडियो ऍफ़ एम् पर देशद्रोही का .........उसमे से "तुम तो ठहरे परदेसी "बजता है ओर आप हडबडा के फ़ौरन बंद कर सफाई देते है "मेरा नही है "....(मेरी आत्मकथा से )।
    अनुराग जी आत्मकथा वाली किताब कब निकल रही? एक वादा रहा जब वह किताब निकलेगी तो पहला खरीदार मैं ही हूँगा।

    खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....
    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है

    वाह।

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  13. Khamoshi mein bhi lafj dhoondh liye usne.....vo bhi sunaa jo kaha nahi....

    Ye galatfahmiya bhee ajeeb hotee hai...

    bahut sahi kaha aapne.....

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  14. moongfali khana accha hota hai, sehat ke liye bhi, aur kai aur cheezon ke liye...aaj hamne dekha.
    triveni bahut acchi lagi

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  15. ".कुछ पल खामोशी से गुजरते है.....जाइये...... ओर आगे ध्यान रखियेगा "

    डाग्डर साब, यो हवलदार बणन काबिल ना सै ! हवलदार कोई इस तरियां जाण देगा के ? सौ का नोट बनता ही था उसका !
    उसको ताऊ की सकूल (school) म्ह भेजो , ट्रेनिंग लेण खातर ! :)

    रामराम !

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  16. आपकी लिखी त्रिवेणी गज़ब की होती है ,ये मुझे खासा पसंद है .. लेख भी उम्दा है मगर अगली बार से गाड़ी चलते वक्त कुछ नही ठीक है न ... डाक्टर साहब....

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  17. एक वक़्त में एक ही काम... कैसेट उठाने के प्रयास में, मैं भी भुगत चुका हूँ !
    बट, बाई द वे यह ' मेरी आत्मकथा ' का सस्पेंस अच्छा बन पड़ा है !

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  18. साधारण सी लगने वाली घटना में जिन्दगी की असाधारण रंगीनियों से रूबरू करा देने का हुनर कोई आपसे सीखे। वाह! त्रिवेणी के क्या कहने...!

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  19. सस्ते में छूट गए डाक्टर साब या तो पुलिस वाला शरीफ था या ज्यादा ही बिजी
    गलतफहमियां अजीब न होतीं तो ग़लतफहमियां क्यों होतीं
    अब तो आपकी आत्मकथा का इन्तजार करने का मन होने लगा है

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  20. डाक्टर साब...सब ठीक लगा...घटने का बयान...रेडियो एफ-एम का बजना...मुंगफली के छिलके...और कातिलाना त्रिवेणी...मगर इस आत्म-कथा ने उलझा दिया...

    अगले पोस्ट की रहस्यात्मक भूमिका तो नहीं?

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  21. बिना लिए दिए पुलिस वाले ने जाने दिया ऐसे पुलिस वाले को हमारा सलाम

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  22. बहुत खूब डॉक्टर साहब, व्यस्तताओं और जिम्मेदारिओं के लगातार बढ़ते बोझ के तले हम अक्सर जिंदगी के छोटे-छोटे अहसासों को भूल जाया करते हैं. आप में वह संवेदना अभी पूरी शिद्दत के साथ जिंदा है, अच्छा लगा देखकर.

    त्रिवेणी पढ़कर लगा बशीर बद्र साहब का कलाम पढ़ रहा हूँ.....
    कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
    ये नए मिजाज का शहर है जरा फासले से मिला करो.
    मुझे इश्तिहार सी लगती हैं ये मुहब्बतों की कहानियाँ,
    जो सुना नहीं कहा करो, जो कहा नहीं सुना करो.

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  23. ये 'पूरी' आत्मकथा छप कर कब आ रही है?

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  24. ड्राइविंग अनुभव बाँटने का आभार.

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  25. वो एक नजर मुझे घूरता है..."आप चलती गाड़ी में मूंगफली खा रहे थे "मै सर झुकाकर अपराध स्वीकार करता हूँ ....chote bacche ki tarah...? ha ha ha !!

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  26. जब भी कार ओन करेँ ,
    बाद मेँ ही रेडियो या C.D.
    स्टार्ट करेँ - because,
    मशीन of your car
    ज्यादा समय अच्छा रहता है :)
    और मूँगफली का कचरा
    प्लास्टीक बेग मेँ भरीयेगा :)
    (अब यहाँ रहते हुए
    ये दोनोँ आदतेँ
    जम गईँ हैँ
    रोजमर्रा की आदतोँ मेँ)
    -- और त्रिवेणियाँ
    हमेशा की तरह बढिया लगीँ
    स स्नेह,
    - लावण्या

    उत्तर देंहटाएं
  27. ये गलतफहमिया भी अजीब होती है
    सच कहा...कुछ तो जान लेवा भी होती हैं...और हाँ ये आत्मकथा का क्या चक्कर है...कब पढ़वा रहें हैं जनाब...गाड़ी में मूंगफली खाते वक्त चौकन्ना रहना पड़ेगा...अच्छा किया चेता दिया आपने...
    नीरज

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  28. अनुराग जी क्या चलती गाडी मे कुछ खाना मना है?? या फ़िर बेध्यानी से चलाना मना है?? चलिये कुछ भी हो लेकिन आप का लेख मन को छू गया.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  29. तुम तो ठहरे परदेसी तक तो चलेगा । हमारे होस्टल एक बन्दे के माता पिता आये हुये थे । वो मैस से खाना लेने गया कि उसके पडौसी ने उसकी फ़ेवरिट कैसेट (मिक्स गानो की) चला दी ।

    मेरा पांव भारी हो गया,
    निगोडी कैसी जवानी है,
    टावल में बाहर जाओगी,
    .....

    बताना जरूरी नहीं कि समाज हित में उस कैसेट को जब्त कर लिया गया :-)

    उत्तर देंहटाएं
  30. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....

    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है


    --बेहतरीन त्रिवेणी.

    इतनी भारी डिमांड पर अब मेरी आत्मकथा श्रृंख्लाबद्ध शुरु कर ही दें. जिज्ञासाऐं कुछ शांत हो भक्तजनों की. :)

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  31. बहुत खूब डॉक्टर साहब. ऐसे संयोग बार बार नहीं होते कि खाने को मूंगफली हों (भले ही कड़वी) और पुलिसवाला सभ्य हो और उगाही करने के बजाय ट्राफिक सिग्नल पर ध्यान भी दे रहा हो! ऐसे दुर्लभ पुलिसवाले को भी हमारा सलाम!

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  32. बेचारा पुलिसवाला भी सोच रहा होगा, टाईवाले डाक्टर साब मुंगफली ही खा रहे है तो इन से क्या लेना!

    आत्मकथा के इंतजार में....

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  33. बहुत अच्छा लिखा है डाक्टर साहब आपने।
    इतनी मजेदार घटनाएं हमेशा आपके साथ हीं क्यों घटती हैं।

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  34. Bouthe he aacha thaa ye experience


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  35. ठीक वैसे ही जैसे आप कई दिनों कि मशक्कत के बाद जब पहली बार अपनी गर्ल फ्रेंड को रूम पर लाते है ओर पहले से सेट किए गाने को चलाने के लिए अपने टेप रिकॉर्डर का बटन माहोल को ओर रोमांटिक बनाने के लिए दबाते है....उसमे से "तुम तो ठहरे परदेसी "बजता है ओर आप हडबडा के फ़ौरन बंद कर सफाई देते है "मेरा नही है "....(मेरी आत्मकथा से )


    आपकी आत्मकथा तो आयेगी या नही ये नही मालूम पर किस्सागोई का अंदाज आपमें खूब है ,साधारहण बातो को दिलचस्प बना देना आपकी खासियत है ,अच्छा लगा कई दिनों से लगातार सीरियस पोस्ट पढ़ रही थी आपकी ,आज भी डरते डरते पोस्ट खोली थी की कही कुछ ऐसा न हो की मन भारी हो जाए ,त्रिवेणी हमेशा की तरह अपने रंग में रंगी है.

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  36. बहुत अच्छा लगा आपका अनुभव...

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  37. aap bahut accha likhte hai .

    triveni bhi ek alag maza deti hai .


    aur aapki baaten , bus yun lagta hai ki hum apni hi baaten karte hai .

    bahut bahut badhai..

    vijay
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  38. बहुत बढ़िया..
    गलतफहमियों की वजह से आधी दुनियाँ चल रही है.

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  39. aapki ki baaton mein chhupi aapki khamoshi ko paddne ki koshish kar rahi hoon theek us din se jis din aapka blog pehli baar padda tha...
    par aaj jo maine suna wo shayad koi galatfehmi nahi hai.... :)

    triveni bahut hi umda hai specially the last line...
    "ye galatfehmiyaan bhi ajeeb hoti hain" :)

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  40. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....

    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है

    gazab triveni hai, jo kahaa nahi wo bhi sun liya

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  41. अनुराग आप् तो शब्दोँ के सर्ज़न हो.हर आदमी की ज़िँदगी मे ऐसा वाक्या होता है मगर उसे शब्दो से चित्र उकेर कर सामने रखना हर किसी के बस की बात नही है ये आप ही कर सकते है.वैसे मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है उसे मै आपकी प्रेरणा से लिखने की कोशिश ज़रुर करुँग.

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  42. वाह वाह ख़ुद मूंगफली खा रहे थे और छिलके बिखरे पड़े थे साथ में परदेशिया .....तूने दिल मेरा ले लिया ..मूंगफली के साथ रोमांटिक गाना ... बड़ा रोमांटिक अंदाज लगा. .

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  43. मैं तो कहना चाहूंगा कि काश सभी पुलिस वाले हर किसी की गाडी रोकने लगें, काश.

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  44. दरअसल आत्मकथा शब्द का इस्तेमाल पोस्ट के ही एक हिस्से का अंग था ...जैसा लिखने की मेरी आदत है....वरना न तो हमारे जीवन में कुछ ऐसा अनापेक्षित घटित हुआ है जो लिखा जाए या हमने कोई तीर मारा हो आज तक ..ऐसा भी याद नही....गलतियों का पुलंदा जरूर है.....पहले चार पाँच कागजो पर शब्द घसीट कर दोस्तों को पढ़वा दिया करते थे ..तो भी दोस्त लोग कह देते थे .लिखते रहो ,बेटा मन हल्का रहेगा ......जब किसी प्रकाशन को बंद होना होगा उसमे तेरी तीन चार कविताएं छपवा देंगे ...
    @raakhee
    कई लोग ऐसे है जिनको मै नही जानता ओर जिनकी पहचान मुझे शायद मिलती भी नही.....उन लोगो का शुक्रिया .......
    आप .उनमे से एक है ..शुक्रिया

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  45. aap apne saare anubhav bahut achhe tareeke se bayan karte hain......

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  46. रोज़ाना होने वाली बातों को जिस ख़ूबी से आप लिखते हैं, वो अच्छा है। ये सीधा संवाद जैसा लगता है।

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  47. बहूत ही खूबसूरत त्रिवेणी

    और फुर्सत के लम्हों जैसी आपकी आप बीती
    वैसे हैरानी की बात तो ये भी है कि पुलिस वाले और फ्री मैं छोड़ दिया

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  48. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....

    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है
    ....aur pyaari bhi to.....

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  49. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....

    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है
    :
    aajkal aapki nazmo ki kami aapmi triveni kar rahi hai... :) ... aisa lagta hai aap jitna jyada busy hote ho...utna bahetar likhte jaate ho....

    उत्तर देंहटाएं
  50. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....
    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है

    बहुत खूब...! ये गलतफहमियाँ कभी कभी बरकरार ही रखने का मन होता है....!

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  51. कोई बात नहीं अनुराग....
    मूंगफली जरूर खाएं....कड़वी निकले तो मुंह बिगाड़ लें... इतनी छूट है आपको। लेकिन ध्यान ना बंटने दे... आखिर कब से परिवहन विभाग नारा दे रहा है...सावधानी हटी,दुर्घटना घटी। और आपका स्वस्थ रहना तो आपके परिवार के साथ ही ब्लॉग जगत के लिए भी बेहद जरूरी है।

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  52. अपना योरोप मे कार चलाना और फ़िर (भारत आकर भी) पतिदेव के मना करने के बावजूद यहाँ की सड़क व गाड़ी पर हाथ आजमाने की कोशिश करना और सामने भिड़ने को तैयार कायनेटिक को देख स्टीयरिंग से हाथ व ब्रेक/एक्सक्लेरेटर से पैर हटाकर ड्रायविंग शीट पर हाथपैर सिकोड़ चीखते अपना सिमट जाना, गाड़ी का फ़ुटपाथायमान होना और खम्भे से जा टकरानना,पोलिस चौकी में तीन घंटे कागज़ी कार्यवाही में कुढ़ना.....सब कुछ याद आगया। मुझे अपनी उस भारतीय ट्रेफ़िकसेंस के अभाव के आगे तो कसेट के लिए झुकना छोटा बौड़मपना लग रहा है।
    नई कार वाले ध्यान दें या कार हमेशा सेकेंड हैंड ही खरीदें।
    वरना मेरी तरह पति (किसी केस में पत्नी भी)सदा के लिए ड्रायविंग रुकवा देंगे और लाईसेंस देख कर ठंडी आहें भरते हुए संस्मरण- ए- ड्रायविंग लिखने पड़ेंगे।

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  53. Uf !!Ab to mera sathiya jaanekaa kram laga ....khair, jobhi hai, par aapki triveni harwaqt alag aur achhooti hoti hai...aur uski antim pankti stabdh kar detee hai....hairan hun, ki aaplog itnee sundartaase kaise likh lete hain??Kaas ye hunar mujhebhi aa jay!

    उत्तर देंहटाएं
  54. दिलं क्लिनिक वाले डाक्टर की दिल की बात में ये साफ़गोई ? तौबा-तौबा। पूरे लेखन में हाई बी पी वाले हार्ट की रीडिंग है, फ़िर अलग से किसी- किसी लाइन को बोल्ड करने की जरुरत क्यों ?

    शेष शुभ ......

    उत्तर देंहटाएं
  55. ड्राइव करते हुए मूंगफली खाना अपराध है आपकी जान और परिवार की खुशी के लिए एक हवलदार ने एक डाक्टर को उसकी ज़िम्मेदारी का अहसास दिलाया... मैं हवलदार से काफ़ी प्रभावित हूँ भले ही उसका इरादा कुछ और हो..

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  56. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....
    ये गलतफहमिया भी अजीब होती है
    --और अक्सर खूबसूरत कहानी बन जाती है ये गलतफहमियां..

    -आप ने जो वाकया यहाँ बांटा है उस में यह संदेश साफ़ है कि ड्राइविंग के समय
    सिर्फ़ फ़ोन करना या बात करना ही ड्राइविंग करते समय ध्यान नहीं बंटाता बल्कि अक्सर हमारी छोटी छोटी
    हरकतें -चाय पीना-कुछ खाना-- आदि भी एक हादसे को दावत देने के लिए काफ़ी होती हैं.एक बार मैं ड्राइव कर रही थी -गरमियों के दिन-३ बजे थे---ac लगाने के बाद भी इतनी गरमी थी कि गाड़ी में पसीने आ रहे थे-sunblock चेहरे पर लगाया था-sunblock पसीने की बूँद के साथ आंखों में चला गया--शुक्र था कि सड़क खली थी-आंखों में इर्रिटेशन के कारण स्टीरिंग पर बैलेंस बिगड़ गया--लेकिन तुंरत साइड में hazard light लगा कर गाड़ी रोकी चेहरा धोया जब नोर्मल हुई तब ड्राइव किया--सोचती हूँ अगर सड़क busy होती तो जरुर एक्सीडेंट होता.
    sach hai we have to be very careful while driving,every day we learn some or other thing on the road while driving.

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  57. आपके ऊपर जब गुजरी होगी तब भले यह कष्टकारक लगा होगा पर पक्के तौर पर कह सकती हूँ की अभी ये वाकया जरूर आपके चेहरे पर मुस्कान बिखेर जाता होगा.....ठीक वैसे ही जैसी अभी पढ़कर हमारे चेहरे पर फ़ैली हुई है.
    बहुत मजा आया पढ़कर...धन्यवाद यह संस्मरण हमारे साथ बाँटने के लिए.

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  58. और भी करारे होते जा रहें हैं आप....
    व्यक्ति और विचारक के रूप में ...

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  59. डॉक्टर होकर इतना जियादा क्यों खाते है जी आप, खाया तो खाया बाहर सड़क पर ही थूकने लगे, सफ़ाई की भी हद होती है...वैसे रेड लाईट जम्प करना तो हमारी शान है कानून बनते ही टूटने के लिये है जी नेताओं के झूठे वादों की तरह...:)

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  60. माफ़ी चाहूँगा, काफी समय से कुछ न तो लिख सका न ही ब्लॉग पर आ ही सका.

    आज कुछ कलम घसीटी है.

    आपको पढ़ना तो हमेशा ही एक नए अध्याय से जुड़ना लगता है. यूँ ही निरंतर लिखते रहिये

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  61. वो अन्दर झांकता है" क्या कर रहे थे आप" ?आप शब्द बड़ी मुश्किल से आख़िर में जुडा है शायद मेरे कोट टाई का असर है ....

    पुलिस से बच गए... वरना बचना आसान नहीं था..

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  62. खामोशी में भी लफ्ज़ ढूंढ लिए उसने
    वो भी सुना उसने जो कहा नही .....

    Bahut khub surat...aur post padhkar maza aa gaya :)

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  63. आपकी पोस्ट बहुत अच्छी लगी , ख़ास कर के त्रिवेणी !!!!!!

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  64. अच्छा नसीब था जो बिना कुछ लिये हवलदार ने छोङ दिया।

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  65. त्रिवेणी दिल छुने वाली है !!

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  66. you have brought some very ugly truths in light and believe me, i hate this concept of loosing values, blurting out whatever on reality shoes and specially, hear anything to everything from the VJs who mock at the participants humiliating them badly. I am shocked to see how people speak things of those kinds and listen those ill words for themselves. They are treated so badly.

    Aajkal burayi aur bure shabd itni publicity paa rahe hain. Similarly, drinking has become a matter of proud and standard among the youngsters and yound couples. If one doesn't then they are mocked and looked down upon!!

    उत्तर देंहटाएं
  67. अनुराग भाई को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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