2009-08-11

निगोडी दुनिया में " वंडरफुल लाइफ "



सुबह की नींद ..में दो बार बजे अलार्म के बाद जब कोई आवाज देकर आपको उठाता है ओर आप तकिये से लिपट कर कहते है "बस पॉँच मिनट ओर " हाय वो पांच मिनट .....कितने जालिम होते है .....के उन पांच मिनटों के बाद निगोडी दुनिया में फिर एंट्री होनी ही है .

एक
बारिश की भीगी दोपहरे ....बॉस ऑफिस में नहीं है.... सेक्सी जूली आपसे एक अदद समोसे की फरमाइश करती है ओर आप जूली को भीगी बारिश में अपनी बाइक पे बिठाकर दयाराम हलवाई के यहाँ समोसे खिलाने ले जाते है ....बीच में तीन स्पीड ब्रेकर है जहाँ जूली "आउच "वाला साउंड इफेक्ट देती है ...
दो
आसमान में बादल गरजते है ... जाहिर है एक बिजली भी होगी .....पीछे से बेक ग्रायुंड म्यूजिक ..ओर भगवान् प्रकट होते है "वत्स तुम्हे पांच दिन का अवकाश दिया जाता है वेतन सहित ये लो होनुलुलू के टिकट...

साले मन में रोज कितने लड्डू फूटते है!!!!!!!!

अमूमन हर इंसान के दस बीस दोस्त होते है ओर एक दो दुश्मन. दुश्मनी हमने किसी से कभी रखी नही अलबत्ता दोस्त हमारे दस –बीस से कही ज़्यादा है. .जिन्होंने हमें फ्लेश्बेक में कई सीन दे रखे है....
जैसे हमारे दूसरे रूम पार्ट्नर जिन्हें एक मोटे से तकिये से लिपट कर सोने की आदत थी …अचानक .....रोज रात 2 बजे उठने लगे …एक जुमले के साथ … भूख लगी है .तो किबला हम दोनों . रेलवे स्टेशन की लारी पे जाकर अंडे पाँव खाते …तकरीबन साढे तीन बजे वापस लौटते ...शुक्र है के चालीस दिनों के बाद वो रहस्मयी भूख अंडे –पाँव के नियमित चढावे से ही शांत हो गयी . अन्यथा आधी रात के इस नियमित विचरण से किस्म -किस्म की अफवाहे फैलने का भय था ,,
मसलन ... हमारे एक ओर अज़ीज़ दोस्त है… .ये अमिताभ बच्चन साहब के बहुत बड़े मुरीद है,इतने बड़े की जिस पिक्चर मे अमिताभ बच्चन साहब मरते है उसका अंत ये नही देखते है…तो ये महाशय हमे दिन भर अग्निपथ के डाइलोग सुनाते उसी अंदाज में हाथ को हिला कर “हें हे अपुन दीनानाथ चोहान .गाँव मांडवा ….? अपने घर ले-जाकर इन्होने इतनी बार अग्निपथ दिखाई है की पूछिए मत… फिर हमसे पूछते "अब क्या कहते हो”? “मिथुन की ऐक्टिंग लाज़वाब है मै उनसे कहता …….आज़ वो अमेरिका मे है, हमें पूरा यक़ीन है आधे से ज़्यादा अमेरिकियों को उन्होने अपने घर बुलाकर अमिताभ की पिक्चर दिखाई होंगी.
एक तीसरे महाशाया थे ,जो हमारी लॉबी मे रहते थे, पूरे 5 साल अंडर-ग्रॅजुयेट के दिनों मे इन्होने कभी साबुन नही ख़रीदा , पूरी लॉबी के साबुनों से नहाते रहे…..पर साबुन का कौन सा ब्रांड ज़्यादा बेहतर है इनसे बेहतर कभी कोई नही बता पायेगा ....….
मसलन ......हमारे बिल्कुल बराबर के रूम के एक महाशय, जो दिन में अक्सर हमारे दरवाजे के पीछे चिपकी ग्लेडरेगस की बालाओं को छि: छि: कहते पर हर रात को सोने से पहले हाथ में पानी की बोटेल लिए हुए बिना कोई अब्सेंट लगाए चार साल तक निहारने आते रहे ...कई बार तो दरवाजा खटखटा कर निहार कर जाते ....
मसलन के .....वे. जो ...अंग्रेजी में ऐसे उधार मांगते की आप सेंटिया जाते ...अक्सर रात में हमारी बाइक के पेट्रोल टेंक के पाइप से नीचे एक बोतल लगाये मिलते ..हमें देख बिना विचलित हुए शांत निर्विवार किसी योगी की भाँती बोलते " आई एम् टेकिंग जस्ट फ्यू ड्राप मेन"..ओर हम "या या श्युर 'कहते हुए बूंदों का बोतलों में जाना देखते .....
यूँ भी होस्टल में जब किसी चीज़ की तारीफ करनी होती तो ..कुछ यूँ होती है क्या सेक्सी शर्ट है ...या .क्या सेक्सी खाना है वहां का ...सभ्य समाज में आने के बाद आपको अपने तौर तरीके यूँ भी बदलने पड़ते है ....…ओर जब आपको लगता है की वो गोल्डन एरा ख़त्म हो गया ... इत्तेफकान भगवान् आपको नए सीन दे दे देता है ....

वे हमारे दोस्त तीस की उम्र के बाद बने ,हम पेशा है हम उम्र भी ..इत्ते बड़े पांच सितारा होटलों में अकेले नींद नहीं आती यूँ भी एक घंटा खामोशी से कागज पेन लेकर लेक्चर सुनने की आदत अब रही नहीं...ओर कांफ्रेंस के दिन भर लेक्चर आपको वैसे ही इतना खौफजदा कर देते है .. इसलिए अक्सर हम उन्ही के संग एक कमरे में ठहरते है ...... ...कमरे में घुसते ही ये साहब चैनल फटाफट बदलते है ओर बी ग्रेड या सी ग्रेड चुन चुन के फिल्म लगाते है ..मजे से देखते है ...जित्नेंदर की सफ़ेद जूतों वाली फिल्मे ......मिथुन की फिल्मे ....रामसे ब्रदर की होरर फिल्मे .... गुलशन कुमार के छोटे किशन कुमार की फिल्मे ....जोगिन्दर उनके फेवरेट विलेन है ...जब वे हीरो को धमकाते है .... ये ठहाके लगा कर हंसते है . मुझे पूरा यकीन है .इन्होने "देशद्रोही "फिल्म की सी .डी माँगा कर देखी होगी ...
बीच बीच में मुड़कर कहते है साला .हिन्दुस्तान का रियल सिनेमा यही है.....
१४ अगस्त की दोपहर के बाद अगले तीन दिन हैदराबाद इन्ही के संग कटेगे .
स्वाइन फ्लू से ज्यादा खतरा इस बात का है के की वे वहां मौज में आकर ये न कहे .सुन बे "शेडो" देखने चले क्या ?

आज की "त्रिवेणी "

कल तप रही थी पेशानी उसकी, बुख़ार था शायद
सुबह से ही भिगो रहे है मुये बादल उसे......

"नुमोनिया" हो जायेगा इस" दिन" को देखना ,इक रोज

ऐसे ही हमारे एक नेटिया दोस्त है कुश .....इत्तिफकान अभी तक हम रूबरू नहीं मिले है ...पर हमारे फोन के बिल में इनका भारी योगदान रहता है ... वे ठंडी सांस भर के अपनी एक छोटी सी ख्वाहिश बताते है .... की एक ओर ब्लॉग बनाना चाहता हूँ जिसका नाम कुछ यू हो.....के …" आप .मरने से पहले ये फिल्मे जरूर देखे "…उनकी ख्वाहिशे ओर भी है पर किन्ही अपरिहार्य कारणों से उन्हें यहाँ सार्वजनिक नहीं कर सकते... वो क्या कहते है ...ब्रीच ऑफ़ कोन्फ़ि डेंस हो जायेगा जी ...
खैर उन्होंने अगर ये ब्लॉग बनाया तो एक फिल्म हम भी उसमे जोड़ेगे जी....ओर आपसे भी यही कहेगे .मरने से पहले इसे जरूर देख ले ....." इट्स ए वंडरफुल लाइफ"

62 टिप्‍पणियां:

  1. ये पहली निगोड़ी पोस्ट है आपकी जिसने अपने को छपते ही हमसे पढ़वा लिया वर्ना हम तीन-चार दिन आपकी पोस्टें दायें-बायें से देखते हैं तब कमेंट के बाद उसे पढ़ते हैं। इसलिये कि पढ़ने के बाद क्या बचेगा पढ़ने के लिये। वैसे ये वाली सेक्सी पोस्ट है जी।

    कुश का क्या है कि भाईजी आइडिया किंग है। झकास आइडिया नरेश। नेट बिल पर सुना है काफ़ी पैसे ठुक गये इस बार। फ़िलिम बनायेंगे तो देखी भी जायेगी!

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  2. kya baat aaj tewaar bahut badle hai doc saab:).vaise apni hi bhasha mein kahe,dhasu,ghani sexy post che.sach kuch lamhe zindagi ke golden era ki tarah bas jaate hai mann mein.
    ab hum raat 2 ya 3 baje bahar jaake egg pav nahi khaye kabhi.bada miss karte ,phir soche kaash hum ladka hote,ye maze bhi kar paate.girls hostel ke dwar par hi taala kahe laga diya jaata hai raat mein?
    jitni chulbuli sunder poat,trieni bhi bahut khub rahi.badhai.

    bahut dino se aapki koi nazm nahi padhi,bas gujarish,kabhi fursaat ho suna digiyega.mann ko jo khush kar de,isi post ki tarah.

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  3. गुरुदेव की जय हो.. गजब सेक्सी पोस्ट लिखे हैं भाय..। मज़ा आ गया। इ दोस्ती डे आने के साथ ही लोग-बाग दोस्तों जो आमतौर पर निगोड़े ही होते हैं याद क्यों करने लगते हैं। हम ज़रा रुक-रुक के पोस्ट करने लगे हैं। पता नहीं ज्यादा लिखने से धार तेज़ होती है या भोथरी?

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  4. और हां, डॉक्टर साब निगोड़ी दुनिया में वंडरफुल वाइफ़ पर कुछ लिखेंगे क्या?

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  5. अभी बता दो न उस फ़िल्म का नाम। मर के तो कैसे देखेंगे भला।

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  6. आज तो लाइफ का हर भाग एक वंडरफुल एपिसोड बन गया है..बड़े बड़े प्रसंग है....आपने भी अच्छा वर्णित किया...

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  7. कुश के आइडिया तो लाजवाब होते हैं ..:)और हजारो ख्वाइशें ऐसी की हर ख्वाइश पर दम निकले :) अलग अंदाज़ लगा आज आपकी पोस्ट का ..मतलब की बढ़िया लगा :)

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  8. बाद दिनों के इस बार की पोस्ट के जायके ने मूड बना दिया है. आपके लड्डू मन को भा गए हैं और आप ही कि बात को आगे यूं भी कहा जा सकता है कि हर एक आदमी के भीतर दस बीस आदमी होते है. हैदराबाद की यात्रा से कुछ नए किस्से फूटेंगे ही... आप एक बार फिर से पढ़ना अपनी इस पोस्ट को मजाआएगा !

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  9. कमाल है भाई लोगो ....फ्रेंक कोपारा की फेमस फिल्म "इट्स ए वंडर फुल लाइफ "का पोस्टर इत्ता बड़ा दिखा रहा हूँ...कभी फुर्सत में डी वी डी मंगा कर देखिये ....वाकई खूबसूरत फिल्म है

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  10. वाह अनुराग जी बड़े दिनों बाद आप सेक्सी मूड में नजर आये ,वैसे अब गर्ल्स होस्टल में भी ये जुमला कोमन होने लगा है ,पोस्ट एक दम टन टना टन है ,पहली लाइन से शुरू हुई पोस्ट आखिर तक मजा देती है .
    निगोडी दुनिया में जब तक ऐसे दोस्त शामिल होगे खूबसूरत ही रहेगी ,पर आपके हमपेशा दोस्त मस्त लगे जो ऐसी फिल्मे देख कर मजे लूटते है.शेडो के अब जब भी एड टी वी पर आयेगे ,आपके दोस्त याद आयेगे .जितेन्द्र की सफ़ेद जूते सफ़ेद पेंट वाली फिल्मे एक समय में बहुत आई थी उनमे से एक का गाना बड़ा हिट हुआ था
    तोहफा तोहफा तोहफा
    इट्स ए वंडरफुल लाइफ" फिल्म मैंने देखी है ओर इसे वर्ल्ड की क्लासिक फिल्मो में से एक में गिना जाता है .इसकी स्टोरी आप के भीतर के इन्सान को जिंदा रखने में मदद करती है ,मै भी कहती हूँ हर इन्सान को मरने से पहले एक बार जरूर इस फिल्म को देखना चाहिए .कुश का आईडिया लाजवाब है .उससे कहे ऐसा ब्लॉग बनाए

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  11. डाक्‍टर साहब बेहतरीन बहुत मजा आया पढकर बहुत बेहतरीन शुक्रिया

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  12. "आप जूली को भीगी बारिश में अपनी बाइक पे बिठाकर दयाराम हलवाई के यहाँ समोसे खिलाने ले जाते है ....."

    और गाते चले---रिमझिम के तराने लेके आई बरसात....:)

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  13. भई लोगो ने जिस अंदाज़ को आपके ब्लॉग पर बहुत दिन बाद पाया, वो मैने दुर्भाग्य से पहली बार पाया ...! :)

    मगर कुछ तो गड़बड़ है कहीं...! ये अचानक सबका मूड कैसे चेंज हो गया है। जिसे देखो उसका ही अंदाज बदला है...! ऐसा तो नही जिस बारिश को भगवान ने बड़ी देर में भेजा उसमे कुछ मिलावट कर के भेजा है ???? खूदा कैर करे....!

    मेरे एक भांजे को भी मेरी बनाई मसूर की दाल बहुत सेक्सी लगती है....! इंग्लिश लैंग्वेज पढ़ाने वाले उस बालक से मैं हमेशा कहती हूँ कि "बेटा sexy is not the synonymous of nice and wonderfull :)"

    बीच में तीन स्पीड ब्रेकर है जहाँ जूली "आउच "वाला साउंड इफेक्ट देती है ...

    संभल के लिखिये डॉ० साहब...! ऐसे तो किसी की भी स्पीड में ब्रेक आ जायेगा।

    वैसे ये अनेकानेक ब्लॉग बनाने के आकांक्षी कुश हैं कौन...?? कभी मुझसे भी मिलवाइये ना....!

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  14. अरे हां, हम तो बताना भूल गए कि हम वो फिल्म नहीं देखेंगे...अरे वही, वंडरफुल लाइफ़ वाली, क्योंकि यह मरने से पहले देखना है और हम कह रहे हैं...खुदा वो दिन न दिखाए..:)

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  15. आपके दोस्तों के बारे में पढता हूँ तो आपने कालेज के दिन याद आ जाते हैं...आप तो संस्मरणों की एक किताब छाप सकते हैं...पहला खरीद दार मैं ही हूँगा...दूसरे तीसरे चौथे...की फ़िक्र आप पर छोड़ता हूँ...मैं तो ये कहूँगा की "इट्स अ वंडर फुल पोस्ट..."

    कुश से आप मिले नहीं??...च च च च....जल्द मिलिए ऐसे इंसान इश्वर फुर्सत में गढ़ता है...बोनस में आप हम से भी मिल लेंगे...जयपुर का कार्यक्रम बनाईये अक्टूबर की छै तारीख को मिष्टी का जन्म दिन है चले आयीये...आर्यन का साथ होना जरूरी है..
    नीरज

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  16. Doctor Saheb kahan se laate yeh dilchisp tukde zindagi ke...aur aapki kissagoi ka kya kehna !!
    Waise hum bhi ab dilli se Hyderabad shift ho rahe hain...aapse ek baar milna zaroor chahenge !!

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  17. हाय रे निगोड़ी दुनिया। मुए ये स्पीड ब्रेक्र, कभी गुस्सा दिलाते है और कभी..। किसी किसी के लिए ही दयाराम हलवाई लड्डू बनाता है। जो बिखरते नही। हम ढूढते ढूढते इतने बडे हो गए बस दयाराम हलवाई नही मिला। और रही दोस्तों की बात तो जी जब दोस्तों की बातें शुरु होती है ये समय भी चादर तान सो जाने के लिए विवश हो जाता है। त्रिवेणी की बात तो जी ये बादल इधर नही आ रहे है। चंद पल के लिए इधर भी भेज दो हम भी कुछ लिख डाले। कुशभाई के तो क्या कहने जी ये तो है ही कमाल और हमेशा धमाल करते रहते है। और हाँ जब इतनी अच्छी फिल्म है तो सीडी भी तो भेज देनी चाहिए जी।

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  18. कमाल की पोस्ट. अत्यंत आनंद की प्राप्ति हुई.

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  19. ये तो काफी रोमांटिक है -बिंदास !

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  20. बदलते मौसम के तेवर में एक ये पोस्ट...कुछ और भी रूमानियत आ गयी

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  21. मजा आ गया.. पुरानी यादें पढ़कर.. हैदराबाद में पुराने दिन.. क्या बात है enjoy!!

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  22. आज बहुत दिन बाद एक बिलकुल डॉक्टर अनुराग स्टाइल पोस्ट है, डायरेक्ट दिल से. मज़ा आ गया पढ़कर दोस्त और उनकी बातें बस यादें रह जाती है. वाकई ज़िन्दगी की वो पुराणी जींस ठीक यहाँ दिल में रहती हैं. बहुत पैसा बहुत सारी लग्जुरी , लेकिन मन आज भी उन्ही दोस्तों को ढूंढता है.
    यादें यादें बस यादें रह जाती हैं,

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  23. क्या बात है सर जी.. जाने कितनी यादें ताजा कर दी आपने.. सर जी शायद आप भी मेरी बात से इत्तेफाक रखेंगे के होस्टल की जिंदगी जिसने नहीं जी है शायद उसने जिंदगी के असल मायने .. असल रंग नहीं देखे हैं.. एक ही छत के नीचे दुनिया के हर किस्म के प्राणी मिल जाते हैं.. शायद ही कुछ बचता हो.. दिन का कोई वक़्त आप ऐसा नहीं कह सकते जब जिंदगी चालू न हो.. भले ही दिन के १२ बजे हो या रात के ३ बज रहे हो.. कोई न कोई मस्ती.. कुछ न कुछ धमाल होता ही रहता है.. और जिंदगी के कैनवस पे जाने कितने रंग हमेशा दीखते रहते हैं ..उसके बाद सिर्फ एक रंग बचता है.. रंग-ए-रोज़गार.. रंग-ए-रोज़मर्रा.. निहायत दिल को छूती पोस्ट

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  24. लगता है आप के यहाँ बरसात अच्छी खासी हो ली है। हम तो आस लगाए बैठे हैं। लगता है इस साल सारा रोमांस बादलों के साथ ही उड़ गया।

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  25. डाक्टर साहिब ,
    अहा दिल खिल गया और मन में गुदगुदी हो उठी पढ़ कर इस पोस्ट को ... कॉलेज के दिन को गुजरे अभी तिन चार साल ही हुए है ,.. आखिरी एम्.बी.ए की पढाई के बाद काम में ऐसे मशगुल हुआ के फिर हर चीज बेरुखी सी हो गयी है आज अचानक आपके पोस्ट को पढ़ कर पुराने दिन याद आगये.. एक सच्ची और बात है के मेरा भी एक दोस्त था के वो भी पिछले पांच साल से हवाई चप्पल नहीं ख़रीदा उन्होंने कहा के अब शादी में ही मिलेगा तो उससे ही काम चलाऊंगा मगर इतफाकन उनको चप्पल वहाँ भी नहीं मिला .... अब उनका क्या होगा राम जाने... त्रिवेणी हमेशा की तरह बेहतरीन है बहोत बहोत बधाई और कुश जी को सलाह में कह दें की वो बना लें...


    अर्श

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  26. अनुराग जी,
    हम तो लम्बी टिप्पणी लिखेंगे।
    पहले तो जल्दबाजी में निगोडी दुनिया में वंडरफ़ुल वाईफ़ पढ गये। कुसूर हमारा ही है, उमर ही ऐसी है। कल समीरजी घर पर आये थे तो वो भी कह रहे थे कि कब तक ऐसे भटकोगे, शादी कर लो....;-)

    हमने कल समीरजी को अपना बी ग्रेड फ़िल्मों का कलेक्शन दिखाया और आज आपने ये पोस्ट लिख डाली, क्या कोइन्सीडेन्स है।
    गौर फ़रमायें:
    चुडैल, युगांधर, आया तूफ़ान, सबसे बढकर हम, जनता की अदालत, सुरक्षा, गुंडा (खैर ये तो A+ है), लोहा, यमराज, सौतेला, हिटलर, जोडीदार और आदि आदि....

    मुफ़्त साबुन, शैम्पू और टूथपेस्ट के किस्से तो हर होस्टल के कल्ट का हिस्सा है। मसलन हमारे एक मित्र हैं शिव स्वरूप अग्निहोत्री, जैसा नाम वैसे ही कर्म। एक बार एक मित्र को रात में सिगरेट जलाने के माचिस की जरूरत पडी तो रात को दो बजे उन्हें जगाया गया कि जिसकी अगरबत्ती की खुशबू पूरी विंग मे रहती है उसके पास माचिस तो होगी जरूर। इधर अपने पंडित जी ने कुबूला कि माचिस है लेकिन सिगरेट जलाने के लिये नहीं है। अब किसी ने पंडितजी के हाथ पैर पकडे और दूसरा उनकी माचिस ले कर भागा और पीछे पीछे पंडितजी पानी का खाली मग्गा लेकर मारने को दौडे।

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  27. निगोड़ी दुनिया भी आपकी लिखी बातों से
    और त्रिवेणी से हसीं लगने लगती है ..
    आहा हां ,
    कोमल मन के इंसान ,
    अपने सहकर्मियों का कितना ध्यान रखते हैं !
    बारिश हो चाहे थकान, अजी समोसे ,
    खिलवाये ही जायेंगें ..
    .यही तो है, " दिल की बात " :)
    और "कुश भाई " भी वैसे ही देर हैं ...
    आपके दोस्त जो हैं !!
    ऐसे ही मौज में रहें और लिखते रहें ..
    "यादों की बारात, निकली है आहा , दिल के द्वारे "
    स्नेह,
    - लावण्या

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  28. एक बार फिर शानदार कवर ड्राइव....

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  29. lagata hai kush bhaee sahab ne aapse phone pe kaha hoga chalo thodasa roomani ho jayen .par aap to kuch jyada hee bahak gaye aur becharee/re ko pneumonia karwa diya.............. ha ha ha.

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  30. मस्त है.. आज पूरा पढ़ पाया,
    जब भी यह पोस्ट खोलता, वह हौले से बगल में खड़ी हो पूछती..
    " निगोड़े अनुराग की वँडरफ़ुल वाइफ़ को यह समोसेदार पोस्ट पढ़वाया क्या ? "
    आउच.. मैं चौंकता हूँ, क्योंकि अगल बगल तो कोई था ही नहीं,
    या.. शायद वही रही हो ? अभी देख कर आता हूँ !
    क्रमशः..

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  31. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  32. ये वाली फिल्म तो देखि है जी और अभी पिछले वीक ही अपने मित्र को दिखाई है आजकल हमारे साथ ट्रिप पर आये हैं और उन्हें ब्लैक एंड व्हाइट देखने का शौक चढा है. तो इसके अलावा व्हाइट एंग्री मैन और मिस्टर स्मिथ गोज टू वॉशिंगटन भी दिखाई. अभी कुछ और दिखाता हूँ :)
    मिथुन दा से 'गुंडा' याद आई... अब आगे क्या कहा जाय आपको पता ही होगा इस फिल्म की बड़ी लम्बी फैन फोलोइंग है.
    और सेक्सी से याद आया एक बार हमने किसी गाडी को सेक्सी कहा तो मेरी एक मित्र मुझसे बहस में उलझ गयी की गाडी कैसे सेक्सी हो सकती है. मैंने कहा ये बताओ सेक्सी कौन सी चीज नहीं हो सकती है :)

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  33. मैं हॉस्टल में तो नहीं रहा, अलबत्ता जब दिल्ली आया तो कई साल यहाँ हौज़ खास इलाके के फेमस 'जिया सराय' में रहा, यहीं आई आई टी कैम्पस है, थोडी दूर जे ए यू भी है तो हॉस्टल की लाइफ खूब देखी... रहा भी होटेलेर्स जैसे ही. एक मजेदार लाइफ का आनद लिया, खाना मेस में खाता और लगता जैसे इंडियन मिलिटरी अकेडमी में ट्रेनिंग लेने आये हुए है... हाय! दिस इस सागर फ्रॉम बिहार... तो हाय दिस इस रोशन फ्रॉम अहमदाबाद... कंजूसी के नमूने तो जिंदगी भर देखता रहूँगा... नो डाउट!

    फिल्म की जहाँ तक बात है... यह तो शिक्षण है ... विजन है... नजरिया है... मेरे लिए तो मनोरंजन का साधन नहीं है... कुश जी से मेरी भी बात हुई... हाँ हाँ नेटे से दोस्त बने थे... फिर जी टॉक पर नंबर लिया... और अब दे-दनादन...

    कई और रोमांचक किस्से है... फुर्सत मिले तो शेयर करूँगा... मसलन एक मेरा भी दोस्त है. उसके खानदान को फिल्मोनिया है... बी-ग्रेड फिल्मों की, १९९५ में मिथुन की १४ फिल्में आई थी जाहिर सी बात है सभी फ्लॉप थी लेकिन उसके खानदान ने सभी देखि थी.... इसके अलावे वो टकले द्वारा रेप सीन, डाकुओं में किरण कुमार साउथ इंडियन मोटी औरतों का नहाना और ज़मींदार में रजा मुराद का कमला को घूरना भी पसंद करता है...

    हैदराबाद जा रहे है तो बिरयानी खाना मत भूलियेगा... कहिये तो कुछ और भी जानकारी दूँ...:)

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  34. घर में कोई ऐसा कमरा जिसमे फर्श पर सिर्फ एक गद्दा ,एक साइड किताबो से भरी शेल्फ ओर सामने की दीवार पे प्रोजेक्टर ओर आपकी पसंद की फिल्मो की ढेर सारी सीडिया .....जिसमे घुसते ही मोबाइल ऑफ़ हो जाए ..जब ये विचार मै अपने आर्किटेक्ट के सामने रखता हूँ तो वो मुझे हैरानी से देखता है....क्यूंकि उसकी राय में मुझे एक कंसल्टिंग रूम घर में रखना चाहिए ..ये कमरा जगह घेर लेगा ...सोचता हूँ मुझे लोन देने वाले बैंक मेनेजर को पता लगेगा तो क्या लोन पास कर देगा ....
    विमल रोय,गुरुदत्त ,ऋषिकेश मुखर्जी ,मणि रत्नम, श्याम बेनेगल,चेतन आनद .की हकीक़त, गाइड ,साईं परांजपे की कथा ,चश्मे बद्दूर ,जाने भी दो यारो ,से लेकर गोविन्द निगलनी की अर्ध सत्य ,द्रोह काल ,तमस ,हो या एक रुका हुआ फैसला ,एक डॉ की मौत ....से अनुराग कश्यप ,नीरज वोरा ओर इम्तियाज अली तक अनेको हिंदी फिल्मे है .....
    होलीवुड की अलग लिस्ट है .जिसमे ब्लेक एंड वाईट की क्लासिक एयरपोर्ट ,गों विद दी विंड से रोमांटिक नोटिंग हिल ... स्पीलबर्ग की इनर स्पेस हो या jaw ....या एक्शन फिल्मे जिसमे क्लाइंट इस्त्वूद से लेकर अर्नाल्ड भी है सिल्वेस्टर की कोप लैण्ड ...से लेकर नीमो ओर आइस एज वाली कार्टून फिल्मे है
    पहली बार "इट्स अ वंडर फुल लाइफ " इस फिल्म को पंद्रह साल पहले रात के एक बजे इत्तिफकान नींद न आने के कारण चैनल पलटते पलते देखा .... ओर तीन बजे तक देखता रहा था ..क्या मूवी है.......कई रोज तक दिमाग में छायी रही....
    अब वर्ल्ड सिनेमा ने जैसे पिटारा खोल दिया है ,कई मशहूर ईरानी ओर फ्रेंच जर्मन फिल्मे देखी,बोल्ड थीम ,बोल्ड सब्जेक्ट .ओर कई मुद्दे ....
    सच में कभी कभी सोचता हूँ अभी ओर कितनी फिल्म होगी जिन्हें देखना बाकी होगा .... ओर कितनी किताबे होगी जिन्हें पढना बाकी होगा
    @नीलिमा @कंचन @अर्श ओर @नीरज @अभिषेक @सागर की टिप्पणियों ने इस पोस्ट में एक नया टेस्ट डाल दिया है

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  35. कल से तीन दिन अपने उस दोस्त और उनकी फिल्मों के साथ मुबारक हो.
    जीवन में तनिक स्थायित्व आने के बाद भी उन बेचैन दिनों की यादों में टहल आपके इस ठिकाने पर बार बार ले आती है, चाहे पोस्ट कोई नई लगे या न लगे.
    इस ब्लॉग पर अब हमारा भी हक बन गया है.
    हमारा अपना एक ठिकाना, सुकून और बेचैनी का ठिकाना.

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  36. aapki post ka solid asar hua...parso dvd laaye aur badi mushkil se time nikal kar do kisht me dekhe...bahut acchi lagi film mujhe.
    wakai...its a wonderful life.

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  37. एक आध ऐसी बाउंसर पोस्ट हर ओवर में डाल दिया करो सर..मज्जा ही आ गया आज तो.. अपुन भी फैन है वईसे.. ऐसी फिल्मो के.. ऐसी ऐसी फिल्मे देखी है मैंने जिन्हें खुद बनाने वालो ने भी नहीं देखी होगी.. और वो भी सिनेमा हॉल में जाकर.. वो एक अलग तरह की कोमेडी होती है.. मसलन एक सीन याद है.. एक फिल्म देख रहा था.. जिसमे चार दोस्त गाना गाते हुए सड़क पर चल रहे होते है.. और एक आठ दस मंजिल ऊँची बिल्डिंग से किसी लड़की के चिल्लाने की आवाज़ आती है.. अपना हीरो सड़क से खड़े खड़े ही ऊपर छलांग लगता है और हिरोइन को बचा ले आता है.. अब बताइए.. ?

    वैसे ऐसी ही फिल्मो को समर्पित एक फिल्म आ रही है 'क्विक गन मुरगन' जिसे 'वैसा भी होता है पार्ट टू' बनाने वाले शशांक घोष बना रहे है.. इसी महीने रिलीज होगी.. कहिये तो ऑनलाइन टिकिट बुक करवा दू आपकी..

    और हाँ माईलस्टोन मूवीज के नाम से ब्लॉग बनाया तो है.. जल्द ही अपडेट करूँगा..

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  38. हॉस्‍टल की यादें ताजा कर दी । मजेदार प्रसंग मजेदार अंदाज।

    कुश जी के ब्‍लॉग का इंतजार रहेगा:)

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  39. **बहुत ही रोचक :)..
    **'दिन 'को भी नुमोनिया न हो जाये शायद इसी लिए आज कल बादलों ने तरस खा कर बरसना छोड़ दिया है.
    **आप की सुझाई फिल्म भी एक बार जरुर देखेंगे..
    **अगली पोस्ट में बताएयेगा --'shadow' कैसी लगी?अगर आप के दोस्त ने यह पोस्ट देखी होगी तो आप को यह फिल्म unke saath जरुर देखनी पड़ेगी!

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  40. आपके sansmaran........uff क्या kahiye....lajawaab, majedaar,lajjatdaar...

    याद aa गया की chatrawaas के दिनों एक से badhkar एक sade हुए filmon का कैसे aanand लिया करते थे हम भी....

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  41. मानसून का मौसम अच्छे अच्छों को रोमांटिक बना देता है ...तभी तो सब इन्द्र देवता को प्रसन्न करने में जुटे हैं ...रिमझिम गिरे सावन ...और मौसम है आशिकाना ...जैसे गीत इसी मौसम की रूमानियत को जाहिर करते है ....
    "IT'S A WONDERFUL LIFE "मौका मिला तो मूवी जरूर देखेंगे

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  42. इन तमाम व्यस्तताओं में आपको पढ़ना डाक्टर साब जैसे लंबी एक पेट्रोल से वापस आने के बाद पूरे ग्लास ठंढ़े पानी को एक सांस में गटक जाना....या फिर महज दो बाल्टी पानी में पूरा दिन निकालने की रोज वाली दिनचर्या में एक दिन अचानक से एक एक्स्ट्रा बाल्टी पानी मिल जाना...और उस लक्जरी बाथ का परमानंद जो शब्दों से परे है,ऐसा ही कुछ आपके पोस्ट को पढ़ना....

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  43. हाय, बिना पढ़े टिपेर देते तो लिखते - बहुत सेण्टीमेंण्टल पोस्ट!
    अब मुझे अपने उस कालेज के दोस्त की याद आ रही है जो इम्तहान के दिन कस कर मैडीटेशन करता था और शेष दिन सुरा सेवन! :-)

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  44. vaise 'kaminey' ki sequal ke liye agar comedy script chahiye to is platform pe banayi ja sakti hain... kya khayal hai sar g !

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  45. आपके अनुभव जब शब्दों के लिबास पहन कर आते हैं, एहसास का एक रंग जो जिया गया है-बरक्स सामने आता है... आपके लेखन हेतु बोहोत अच्छा/बढ़िया कहने के बजाय कहूँगी - "आपकी स्मृतियाँ ही ईमानदार हैं, जो लेखन के लिए सच्चे आईने गढ़ लेती है... जिसमे निम्न मध्यमवर्ग की त्रासदी .. और सुख का combination मिलता है, जिसका ब्यौरा एक मानवीय प्रतिबध्ता के साथ आपकी लेखनी के माध्यम से हम तक पहुँचती है... क्योंकि जीवित रहने के लिए जिस दृष्टि की ज़रूरत है वो आप बखूबी देख लेते हैं, एक बात और कहूँगी, आपकी यही नहीं सभी पोस्ट में परिवेश का मर्म मौजूद होता है, जिसे छूकर अंत तक पहुंचना और फिर भी शुरुआत पर बने रहना सहज होता है. बस लाजावाब हर तरह से.. इतना ही..."
    एक फिल्म ज़रूर देखें... शायद ना देखी हो... "बनारस" ... अच्छी फिल्मो की श्रंखला में से एक है..
    अनंत शुभकामनाएं...

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  46. "वत्स तुम्हे पांच दिन का अवकाश दिया जाता है वेतन सहित ये लो होनुलुलू के टिकट...

    " आई एम् टेकिंग जस्ट फ्यू ड्राप मेन"..ओर हम "या या श्युर 'कहते हुए बूंदों का बोतलों में जाना देखते .....

    What a writeup man !!ये आप की भाषा वाला सेंटिया जाना भी ना कमाल का होता है ..haha

    कुश जी आप बिंदास बनाये मूवी !!:))

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  47. आपकी पोस्‍
    ट फिल्‍म होने का अहसास ही करा रही है। निगोड़ी दुनिया में वंडरफुल लाइफ के जो सीन आपने उकेरे हैं... एकदम सुपरहिट।

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  48. आपकी पोस्‍ट फिल्‍म होने का अहसास ही करा रही है। निगोड़ी दुनिया में वंडरफुल लाइफ के जो सीन आपने उकेरे हैं... एकदम सुपरहिट।

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  49. बहेतरिन शब्द कम पड्ता है आपकि रचना के लिये ... कोइ नया शब्द खोजना पडेगा अब मुझे... आपका प्यारा कुश शायद उसि ख्वाहिश को पुरी करने वैश्नोदेवी गया है....अब तो नया ब्लोग आना ही चाहिये उस् कि तरफ़ से... :)

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  50. बास, फिल्मों का नाम जरूर बताइयेगा.

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  51. It's a wonderful post.

    हमें तो पता ही नहीं था | भला हो आपकी टिप्पणी का जिसे पकड़कर हम यहाँ तक पहुंचे |

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  52. एक निगोडा वायरस कम्प्यूटर मे आ गया था उसने इतना उल्झाये रखा कि आपके ब्लोग तक आने मे 6 दिन लग गये अब आपकी पोस्ट पर सब ने इतना कुछ कह दिया है मेरे पास तो निगोडे शब्द ही नहीं रहे
    अद्भुत लिखते हैं आप बधाई

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  53. what a sexy post....kya main bhi ek do filme add kar sakti hoon? tumhare maslan mein aur bhi kuch jodne ka man kar raha hai. chalo ab tumhari baki ki post bhi padh loon....

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  54. दयाराम हलवाई के यहाँ समोसे खिलाने ले जाते है ....बीच में तीन स्पीड ब्रेकर है जहाँ जूली "आउच "वाला साउंड इफेक्ट देती है ...

    वल्लाह ......!! क्या एक्सपिरियंस है जी आपका .....!!

    डाक्टर साहिब एक बात तो माननी पड़ेगी आपके दोस्त क्या गजब गजब के रहे हैं .......देखिये ....

    पूरे 5 साल अंडर-ग्रॅजुयेट के दिनों मे इन्होने कभी साबुन नही ख़रीदा , पूरी लॉबी के साबुनों से नहाते रहे…..पर साबुन का कौन सा ब्रांड ज़्यादा बेहतर है इनसे बेहतर कभी कोई नही बता पायेगा ....….

    मसलन ......हमारे बिल्कुल बराबर के रूम के एक महाशय, जो दिन में अक्सर हमारे दरवाजे के पीछे चिपकी ग्लेडरेगस की बालाओं को छि: छि: कहते पर हर रात को सोने से पहले हाथ में पानी की बोटेल लिए हुए बिना कोई अब्सेंट लगाए चार साल तक निहारने आते रहे ...कई बार तो दरवाजा खटखटा कर निहार कर जाते ....

    आईला......???

    जित्नेंदर की सफ़ेद जूतों वाली फिल्मे ......मिथुन की फिल्मे ....रामसे ब्रदर की होरर फिल्मे .... गुलशन कुमार के छोटे किशन कुमार की फिल्मे ....जोगिन्दर उनके फेवरेट विलेन है ...जब वे हीरो को धमकाते है .... ये ठहाके लगा कर हंसते है .

    हा...हा....आपकी याददाश्त की दाद देनी पड़ेगी यहाँ तो ....!!

    (देर से आने के लिए क्षमा )

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  55. मुझे पूरा यकीन है .इन्होने "देशद्रोही "फिल्म की सी .डी माँगा कर देखी होगी ...
    वे वहां मौज में आकर ये न कहे .सुन बे "शेडो" देखने चले क्या ?

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  56. ड़ाक्साब हास्टल मे कालेज के धांसू छात्र नेता होने के कारण पीजी के दौरान दो साल तक़ अवैध कब्जा रहा है फ़िर डाक्टर दोस्तो के पीजी हास्तल का भी रेग्युलर विजीटर रहा हूं,आपके लिखे एक एक शब्द सालो पुरानी ज़िंदगी मे ले गये और पूरी फ़िल्म की तरह शुरू से लेकर अंत तक़ एक एक किस्से याद दिलाते रहे।कमरे मे अचानक किसी के मिलने आने पर दिवारों पर टंगे बो डेरेक और ब्रूक शील्ड के पोस्तरो पर कपडे टावल टंगाने से लेकर पेट्रोल मारने तक़ सब सेम टू सेम।बस अब एक गाना गाने की इच्छा हो रही है कोई लौटा दे मेरे बीते हुये दिन्।

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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