2009-09-14

यार फटीचर तू इतना इमोशनल क्या है ?


जीने के टूल्स इतनी तेजी से बदल रहे है की साला हर दस से बीस साल के बाद दुनिया का एक नया "वर्ज़न" लॉन्च हो   रहा है . इस इश्तेहारी ज़माने में  हर आदमी  हाई लाइटर लिए खडा है .जिसकी स्याही का रंग भी  रोज बदल रहा है
..पहले हम जिसे "रेट रेस" कहते थे बीस साला सोनू उसे "सरवाइवल ऑफ़ फिटेस्ट " कहता है ...रोज सुबह आसमान की ओर सर उठाकर देखता हूँ की कही फ्लेश तो नहीं हो रहा ...प्लीज़ अपडेट यूर सॉफ्टवेयर ....नयी परिभाषाये इतना कनफ्यूज़न क्रिएट करती है .की रोज  सुबह एक "रिफ्रेश " का बटन दबाना पड़ता है ...

 पुष्पा आई हेट टियर्स !
...सुनते है दूर देश की एक पॉप स्टार ने अपने प्रेमी के  फोन पे रिकोर्ड मेसेज सेल कर दिए है ...इसे समझदारी कहते है ...टाईम्स ऑफ़ इंडिया के एक आर्टिकल के मुताबिक अब कोई रिलेशन टूटने के बाद कोई ठहरता नहीं..दुसरे रिलेशंस में इन्वोल्व हो जाता है ...इसे" इमोशनल इंटेलिजेंस "कहते है ... अब लगता है..कमाल का पेशेंस   रखते थे शीरी -फरहाद ......   वाई फाई युग में "सेंटीमेंटल" होना अवैज्ञानिक है .. कितना .इलोजिकल....रेलवे स्टेशन पे चाय के छोकरे को देख  हीरो  के रोने वाली फिल्म अब  ओल्ड फेशंड है ……नये डी एन ए  में कुछ अमीनो  असिड  की सिक्वेंस  चेंज   हुई  है शायद ...घनी घूत  भावुकता   से   एलर्जी    के रोगी बढ़ रहे है..
सोचता  हूँ   गुरुदत्त  अगर आज होते तो ....कितनी लड़कियों का जीवन अपनी फेयर नेस क्रीम से सुधार चुकी  करोडो का टर्नओवर  कमाने वाली  कम्पनी के  एक साहब  कहते है .... .. समझदार लोग मौके के मुताबिक अपने इमोशंस को घटा बढा देते है....
संजय दत्त सुना है अपने बदन पे टेटू करवाने साउथ अफ्रीका गये है ..भारत  कल पूरा  दिन  वन डे रेंकिंग में टॉप पे रहा है....मल्होत्रा जी सड़क पे  अपनी  बड़ी गाडी रोक के खड़े है ... ...सड़क   किनारे  एक पुराने  पेड़ के नीचे बैठे बूढे मोची  को देख भारत भ्रमण को आया उनका भांजा जब अमेरिकी अंग्रेजी  में" वोव " कह कर  अपने लेटेस्ट निकोन कैमरे से फोटो उतार  रहा है ...मल्होत्रा  जी   मुझे  देख  मुस्कराते है.....बूढे मोची की आँख मिचिया गयी है ...लगता है जिंदगी में पहली बार किसी ने उसकी फोटो ली है .... 
. क्या आसमान में कुछ हलचल  हुई है ... कोई   फ्लेश   दिखा आपको  ....



वक़्त के उस मोड़ पर  जब अचानक टक्कर हुई थी तुमसे
मीठे-मीठे कितने  लफ्ज़  बिखर गये थे सड़क पर तुम्हारे बैग से .......
सुनते  है पहले  कुछ ओर था  जिसे तुम हुनर कहते हो.
.

72 टिप्‍पणियां:

  1. हांजी, दुनिया बडी तेज़ी से बदल रही है और इमोशनल इंटेलिजेंस भी- तभी तो बूढे मां-बाप अब ओल्ड एज होम की तलाश में निकले हैं, यह गाते हुए....
    दो दिवाने प्यार के ढूंढने निकले है...एक आशियाना प्यार का>>>:(

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  2. bahut khub doc sa'ab...
    ab to aapke dil ki baat ka hi intezaar rahta hai..
    ... yu hi likhte rahiye....

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  3. bahut achchha,dil se nikli hui baat bahoot asar rakhti hai,"batate rahiye dil ki kahi

    lalit sharma

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  4. dakdar saab kade mahare fouji tau dhore bhi aao
    "ekloharki" pe milega.

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  5. " टाईम्स ऑफ़ इंडिया के एक आर्टिकल के मुताबिक अब कोई रिलेशन टूटने के बाद कोई ठहरता नहीं..दुसरे रिलेशंस में इन्वोल्व हो जाता है ...इसे" इमोशनल इंटेलिजेंस "कहते है ... अब लगता है..कमाल का पेशेंस रखते थे शीरी -फरहाद ...... वाई फाई युग में "सेंटीमेंटल" होना अवैज्ञानिक है ..........."

    कितना सही कहा आपने........

    अक्सर ही इस रंग से लिपी दुनिया बड़ी अजनबी सी लगने लगती है.......कभी लगता है यह अजनबी नहीं,यह तो अपनी सही चाल ले पर है,हम ही इसमें मिसफिट हैं....

    फिल्म "लव आज कल " देखा तो बड़ी दिलासा मिली कि शायद कोई भी रंग क्यों न पोता जाय....दिल का अपना रंग वही रहेगा,ओरिजेनाली जो उसका रंग है....बहुत समय तक उसे दुसरे रंग में सराबोर नहीं रखा जा सकेगा....
    पर यह भी लगता है कि विज्ञानं बहुत तरकी कर गया है...इसमें आदमी बिना दिल के भी तो जिन्दा रहता है.....

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  6. दुनिया नही बदली, इंसान ही हेवान बनता जा रहा है

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  7. लगता है डॉक्टर साहब आज कुछ खास मूड में हैं. बहरहाल अच्छा लगा पढ़कर.

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  8. इधर कुछ दिनो से आपके हस्ताक्षर कहीं भी नही दिखाई दे रहे थे, तो सोच रही थी आपको एक मैसेज़ करने को, फिर लगा कहीं आप इसे इनडायरेक्ट कमेंट रिक्वेस्ट ना समझ लें....! मगर ढूँढ़ रही थी आपको अलग अलग झरोखों पर...!

    हम्म्म्म्म् सही कहा " डा० साब आप इतने इमोशनल क्यों है..??"

    सर्वाइवल आफ फिटेस्ट का फार्मूला जो उनका है, वो आपका नही हो सकता..क्योंकि आप उस फॉर्मूले में फिट ही नही रह पायेंगे। कपालभाति प्राणायाम से सुना है सबको बहुत फायदा होता है मगर ब्लड प्रेशर और pregnanat woman को नुकसान करता है...!

    you are, what you are...! And we people like you in your way..! don't ever try to change your software..!~

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  9. अपने हिन्दुस्तान में वाई फाई (मोबाइल) उपयोगकर्ता की संख्या तेजी से बढ़ रह रही है, हमारे शहर का सड़क और ट्रांसफार्मर अक्सर खराब रहता है. और अपना दिल है की मानता नहीं है... कैसे कहें
    "सेंटीमेंटल" होना अवैज्ञानिक है ..........."

    - सुलभ सतरंगी

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  10. सेंटी होना आज कल मेंटल माना जाता है ..मीठे-मीठे कितने लफ्ज़ बिखर गये थे सड़क पर तुम्हारे बैग से .......यह लफ्ज़ भी अब कीमती हो गए हैं जी ..कोई मुफ्त में नहीं देता अब इन्हें ..

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  11. टाईम्स ऑफ़ इंडिया के एक आर्टिकल के मुताबिक अब कोई रिलेशन टूटने के बाद कोई ठहरता नहीं..दुसरे रिलेशंस में इन्वोल्व हो जाता है ...इसे" इमोशनल इंटेलिजेंस "कहते है ... अब लगता है..कमाल का पेशेंस रखते थे शीरी -फरहाद ...... वाई फाई युग में "सेंटीमेंटल" होना अवैज्ञानिक है .. कितना .इलोजिकल...

    डेनियल गोलमेंन "इमोशनल इंटेलिजेंस" किताब दोबारा लिखे तो शायद यही लिखे... बदलते मूल्यों, मान्यताओं और जीवन को आपकी माँइक्रोसोपिक आखें किस तरह फोरसेप से पकड़ ब्लॉग पर तस्वीर खींच देती हैं कटाक्ष हथोड़े की तरह आत्मा पर वार करते हैं...

    क्या बात है!

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  12. क्या कोइन्सिडेंस है आज सुबह ऑफिस आ रहा था तो सामने जा रही गाडी में 'ठुसे' बच्चे चना जैसा कुछ खा रहे थे. और मेरे दोस्त ने कहा 'वोव !' और फोटो खिंच ली. मैं अनमना सा कुछ सोचता रह गया... आखिर किस व्यू पर उन्होंने 'वोव' कहा होगा !

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  13. वाह डाक्टर साहब...विज्ञान और जीवन के तालमेल से ऐसी अद्भुत भाषा गढी जाती है ...आज पता चला....आपकी लेखनी जब भी चलती है..इतिहास बनता है...बहुत खूब बनाते रहिये.,.

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  14. संभवतः शीर्षक देते-देते टूट गए... !

    कितना कुछ है कहने को मेरे पास... पर अब सोचता हूँ क्या कहूँ... आज ही नाको (नेशनल एड्स कण्ट्रोल organization) से होकर आया हूँ... कभी-कभी लगता है मैं पागल हो जाऊंगा... शायद हो भी गया हूँ... पर सामंजस्य बनाना कुछ पेशे में सिखाया जाता हैं
    यू नो - डोंट गेट सेंटीमेंटल...

    मेरा पाला रोज़ ऐसे लोगों से पड़ता है... (मैं घिरा ही हुआ हूँ ... अब मैं क्या बताऊँ.. आपको )

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  15. जिन्दगी के विपर्ययों को देखने की आपकी सटीक दृष्टि है !

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  16. टाईम्स ऑफ़ इंडिया के एक आर्टिकल के मुताबिक अब कोई रिलेशन टूटने के बाद कोई ठहरता नहीं..दुसरे रिलेशंस में इन्वोल्व हो जाता है ...इसे" इमोशनल इंटेलिजेंस ... i think aise intelligent hone se emotional fool jyada better hai...apki hi post thi emotional fool...वक़्त के उस मोड़ पर जब अचानक टक्कर हुई थी तुमसे
    मीठे-मीठे कितने लफ्ज़ बिखर गये थे सड़क पर तुम्हारे बैग से .......
    सुनते है पहले कुछ ओर था जिसे तुम हुनर कहते हो. ese pad ke ik baat yaad a gyee..agar tumhare bina jeena ik kala hai to mujhe kalakaar nahi banna...kaash upar wala sach me bta de ki kya updation karni hai to kar le....hum kamia sudhar le....behad achhi light se fresh c post....

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  17. नये डी एन ए में कुछ अमीनो असिड की सिक्वेंस चेंज हुई है शायद ...घनी घूत भावुकता से एलर्जी के रोगी बढ़ रहे है…….
    आपकी ये बात शत प्रतिशत सही लग रही है ।भावुक इन्सान को तो पागल से कम नहीं समझते लोग कितनी प्रेक्टिकल हो गयी है दुनिया। हमेशा की तरह लाजवाब पोस्ट बधाई

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  18. इमोशनल इंटेलिजेंस के और भी कई पहलू हैं ....जिन्हें टाईम्स ऑफ़ इंडिया ने नहीं बताया ....
    वैसे पोस्ट तो आपकी हमेशा की तरह लाजवाब है ....

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  19. बदलाव ही जिन्दगी है ..अगर ये बदलाव न होते तो आज लाइफ आज की जैसी न होती ....वही पाषण युग में जी रहे होते ...बस बात वही है की ये अगर अच्छे के लिए होते हैं तो दुनिया इन्द्रधनुष , नहीं तो बदरंग हो जाती है ...रिश्तों की खूबसूरती को लोगों ने पहचानना बंद कर दिया है ...इमोशंस ख़त्म हो रहे हैं न ....काश हर रिश्ता दूसरे रिश्ते से कहता ... I HATE TEARS....

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  20. कहते हैं हर चीज का एक चक्र होता है...जल चक्र, वायु चक्र, फैशन चक्र...आशा है ..इमोशन का चक्र होता होगा...

    आभार..इस सेंटी रचना के लिए.

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  21. जीने के टूल्स इतनी तेजी से बदल रहे है की साला हर दस से बीस साल के बाद दुनिया का एक नया "वर्ज़न" लॉन्च हो रहा है . इस इश्तेहारी ज़माने में हर आदमी हाई लाइटर लिए खडा है .जिसकी स्याही का रंग भी रोज बदल रहा है.....


    आते रहेगें यूँ ही फ़िजाओं में
    खुशबुओं के काफिले ...
    बस हम न रहेंगे
    तुम न रहोगे .....

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  22. दुनिया तेजी से बदल रही है, हूं। मुझे भी लगा। पता है कल मैं अपने स्‍पेशल पेज के लिए अपनी टीम से एक काम कराउंगा। उन्‍हें लोगों के पास भेजूंगा और पता लगाने को कहूंगा कि क्‍या उन लोगों ने अपने रोल मॉडल बदल दिए हैं।

    मुझे जवाब पता है पचास प्रतिशत से अधिक लोग कहेंगे बदल दिए हैं। यानि जीवन जीने की शुरूआत जिसे लेकर की थी, वह भी पीछे छूट गया। चाहे वह तेंदुलकर हो या बहुगुणा।
    बाकी तो और क्‍या कहूं। कल ही पता चलेगा....

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  23. अनुराग भाई ,
    आप की शैली ,
    कैमरे के लेंस की तरह है -
    हम भी हर प्रीज़म के रंग देख रहे हैं -
    via your lens --
    बहोत खूब --
    हिन्दी हर भारतीय का गौरव है
    उज्जवल भविष्य के लिए प्रयास जारी रहें
    इसी तरह लिखते रहें
    - लावण्या

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  24. पोस्ट पे कुछ लिखने बैठा तो कंचन की टिप्पणी आड़े आ गयी...देर शाम की आपके बारे में की गयी बातें....

    बाद में आकर फिर से कुछ कहता हूँ।

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  25. ऒऎ यार डाक्टर, हुण की कराँ ?
    साड्डा ते वाई- फाई वी इमोशनल हुँदाप्याँ ऎ !
    तेरी परजाई ते इमोशनल मखणा ई पसँद कैंदी ऎ ।

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  26. ह्म्म्म्म्म्म्म बढ़िया है !!!
    actually, मैं इमोशनल नहीं होना चाहता |

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  27. "सेंटीमेंटल" होना अवैज्ञानिक है ..........."

    वाह क्या पोस्ट लिखी है ... इमोशनल इंटेलीजेंस की परिभाषा भी कंविंसिग लगी आज के ज़माने के सॉफ़्टवेयरों के हिसाब से.

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  28. इक बात नोट कर ले, जीने के टूल्स बदल गये,
    यूँ ढोंग करना अलग बात है, पर दिल के टूल्स कभी ना बदलेंगे ।

    खुद से खुद को कोई आज तक न कुचल पाया, तन्हाइइयों में बँदा उसमे पैबँद लगाता या रिपेयरिंग करता ही मिलेगा ।
    वह पैबँद दारू का हो, या रिपेयरिंग की ग्राफ़्टिंग लेखन-वेखन से हो.. या रिक्रियेशन का हो, क्या फ़र्क पड़ता है ?
    बस पूछ कर देख किसी के दिल से...
    दार्शनिक हो रहा हूँ क्या ?
    चल छोड़ यह बातें !

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  29. नये डी एन ए में कुछ अमीनो असिड की सिक्वेंस चेंज हुई है शायद ...घनी घूत भावुकता से एलर्जी के रोगी बढ़ रहे है…….. Tabhee to Gurudatt kee picturen ab naye log nahee dekhate. faltu ke sentiyana.

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  30. यांत्रिक दुनिया के व्यवहारिक लोग ही हैं जो रियल्टी शो के नाम पर लोगों की भावनाओं को कैश कर रहे हैं.
    विदेशी या अपने एन आर आई यहाँ किसी की बेबसी की तस्वीरें बेच कर नाम कमाने वाले आदि..--सभी इतने अधिक व्यवहारिक हो गए हैं की आज के समय में कोई दो शब्द भी आप के लिए भावभरे कहेगा तो वह स्वार्थी नज़र आने लगता है..
    यही है समय का फेर जब 'आई हेट टीएर्स 'कहने वाला प्रेमी ..'तू नहीं और सही और नहीं और सही..वाले फार्मूला अपनाने लगे हैं..
    -जो भी सेंटीमेंटल है उसे मेंटल कहा जाता है..इस दौड़ती भागती आधुनिक दुनिया में मिसफिट..सच और झूट में फरक करना मुश्किल होता जा रहा है...किस से ..क्या कहें ..क्या न कहें .?
    -बस 'रिफ्रेश' बटन दबाते रहें..यूँ भी सफ़र जारी रहे तो क्या बुरा है..आत्मसंतुष्टि तो है खुद के सेंटीमेंटल होने में.

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  31. दुनिया रंग-रंगीली बाबा!
    इमोशनल इंटेलिजेंस के बिना कैसे चलेगा? गीता में भी तो भगवान् ने इमोशनल इंटेलिजेंस का ही ज्ञान दिया है. अगर "सत्यमेव जयते" सही है और "इमोशनल इंटेलिजेंस" जिता रही है तो भावुकता (= कोरी कर्महीन भावुकता) तो असत्य ही हुई न! इमोशनल फटीचर की याद दिलाने का शुक्रिया!
    off-record: बूढे माँ-बाप का ओल्ड-एज-होम गमन उनको कुम्भ के मेले में पटक आने से तो बेहतर ही है.

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  32. सोचता हूँ गुरुदत्त अगर आज होते तो ....कितनी लड़कियों का जीवन अपनी फेयर नेस क्रीम से सुधार चुकी करोडो का टर्नओवर कमाने वाली कम्पनी के एक साहब कहते है ..समझदार लोग मौके के मुताबिक अपने इमोशंस को घटा बढा देते है....
    Gurudutt daton tale ungliya dabaa rahe hote..:)))

    emotions ghata -bahda lena ...haha....zindagi main jaise drip lagi ho...:)))par sachcha chitran..darpan dikhata huaa..

    hats off aap ke lekhan ko...

    A rejoinder -

    बेहतर पाने की चाहत हर पल,
    रिश्तों के मायने गए हैं बदल

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  33. एक बार फिर लेखनी का शानदार नमूना...

    वक़्त के उस मोड़ पर जब अचानक टक्कर हुई थी तुमसे
    मीठे-मीठे कितने लफ्ज़ बिखर गये थे सड़क पर तुम्हारे बैग से .......
    सुनते है पहले कुछ ओर था जिसे तुम हुनर कहते हो.

    -बहुत खूब!!

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  34. आपकी पोस्ट किसी दुनियां देख चुके खानाबदोश सूफ़ी कलन्दर के लोक गीत सी भीतर उतरती है...
    आप मेरठ में ठहरे वरना इन दिनों मुझे भी किसी बडे़ हकी़म की जरूरत थी फ़िर सोचता हूँ आपसे कोई अपने रोग के बारे मे बात करने आये तो खतरा बड़ा है आप उसे जाने कितने रोग और याद दिला दें ? यार फटीचर तू इतना इमोशनल क्या है और फ़िर उसी मसहले पर बतियाते हुए कह बैठें "रिलेशन टूटने के बाद कोई ठहरता नहीं..दुसरे रिलेशंस में इन्वोल्व हो जाता है ...इसे" इमोशनल इंटेलिजेंस "कहते है ..." तो जो दर्द से दूसरी आस बंधती है उसका भी कचूमर निकल जाये.

    दुनिया की बेरहमी को देखो दोस्तों

    पोस्ट स्क्रिप्ट : पिछली पोस्ट पर एक कमेन्ट था जो इस नोट पैड पर ही चिपका रह गया है " तीन साल बाद अम्मा किसी के साथ दाखिल हुई है ....
    सफ़ेद जर्द चेहरा ..आँखों के नीचे काले घेरे ..एक अजीब सी उदासी ....गोद में एक बच्चा ...दूसरा अम्मा के साथ है...मुझे पहचानने में वक़्त लगता है..." इतना याद भी मत रखा कीजिये. एक सज्जन कुछ साल पहले हमारे बोर्डर पर पाये गये थे. अमेरिका मे उनकी गुमशुदगी दर्ज थी... रह रह अंग्रेजी में एक ही सवाल पूछते थे " तुमसे किसने कहा कि ये इंडिया है और उन गधों को नामालूम ये किसने बता रखा है कि वो अमेरिका है..."

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  35. यार फटीचर है ही इसलिए.. क्योंकि साला इमोशनल है.. या फिर इमोशनल है इसलिए फटीचर है..
    आप खुद ही तो कहते है संवेदनाये टेम्पररी हो गयी है.. चैनल वाले रियलिटी शोज से चाहे कितना ही रुला दे..चैनल बदलते ही संवेदनाये ख़त्म.. वैसे अपनी लाईफ के टूल्स तो ठीक ठाक है.. समय के साथ नहीं चले तो टंगडी मार के गिरा देता है साला..

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  36. bahut acchha likha hai....sach main dunia bahut badal gyi hai....

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  37. बेहद ही अछि पोस्ट की है...
    मीत

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  38. कितनी प्यारी लगती हैं बातें तुम्हारी

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  39. इमोशनल होन गुनाह हो गया है अब... ज्यादा देर तक किसी चीज को पकड के बैठ ना किसी को गवारा नहि ..

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  40. सामाजिक सम्बंधो में आ रहे बदलावों को आपने बखूबी समझा है।
    { Treasurer-S, T }

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  41. हर एक बात सच्ची। समाज में आ रहे बदलावों सही चित्रण किया आपने। सच आज फिर से शब्दों की नई परिभाषाएं गढी जा रही है ...... जो पहले आपकी योग्यता कहलाती थी वही आज अयोग्यता बनती जा रही है....... सेवा मे मेवा मिलती जा रही है ...... और आखिर में आपकी त्रिवेणी का जवाब नही। और हाँ ये फोटो कहाँ से लाते है जी हमें भी बता दो।

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  42. दुनिया भर के शाश्वत कहे जाने मूल्य, धारणाएं,भाव, रिश्ते,आदर्श वगेरह सब इस सदी के विशाल मेल्टिंग पौट में खदबदा रहे है. साल भर छोटे भाई में एक पीढी का अंतर झलकने लग गया है. आपकी पोस्ट बहुत subtle तरीके से ये सब बता रही है.

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  43. पोस्ट वांग त्रिवेणी वी चंगी ए...ओ टीवी वाला फटीचर पंकज कपूर वड्डे दिनां बाद याद आ गिया।

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  44. लाइफ़ का नया वर्ज़न जितनी बार इन्सटॉल करने की कोशिश करो साला क्रैश हो जाता है। इसीलिए मैं पायरेसी से चिढ़ता हूं। अब नया वर्ज़न ओरिजिनल ही ख़रीदूंगा।

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  45. 'Artificial intelligence' ke bare me to padha tha.Aaj 'emotional intelligence' ke bare me bhi jaan liya.

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  46. kaha kuch badla hai ?50 sal phle ki hidi pictur me
    bhi yhi khte suna hai ki mahgai kitni badh gai hai .aur aaj 50 karod ki pictur bhi hme bemani lgti hai .
    aapki post pdhkar aannd agya .

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  47. बहुत पहले एक कविता लिखी थी डॉक्टर .." फटीचर " शीर्शक से उसकी यह पंक्तियाँ आपको समर्पित ..

    " अपनी आँखे हाथों में लेकर कौन भला अब रो सकता है / जब तक जागा है फटीचर कौन चैन से सो सकता है " -शरद कोकास

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  48. आज सुबह के दस बजे .....चौह्राहे पे खडा एक पोलिस वाला ट्रेफिक को रोक कर एक हाथ में लकडी लिए स्कूल ड्रेस में बच्ची को सड़क पार कराता है ....दिखने में खडूस सा है वो ...उम्र भी काफी है .शायद एक दो साल में रिटायर हो जाएगा ......हाथ उठाकर वो गाडियों को चलने का इशारा करता है .....गाडी में अपनी सी डी को मै फिर रिवाइंड करता हूँ ....पियूष मिश्रा ने इतना बेहतर क्यों लिखा है ......दो दिन से ओ री दुनिया ओर इसे ही सुन रहा हूँ ........@डॉ अमर कुमार जी ठीक कहते है ....."दिल के टूल्स कभी ना बदलेंगे "....क्यूंकि मेरे कितने दोस्तों के मोबाइल में ये गाना फीड है.....गूगल में हजारो लोगो ने इसे डाउनलोड किया है ......
    @सागर नाको की बात करते है तो मुझे भी दस साल पुराने कई चेहरे याद आते है ......@किशोर जी कहते है चेहरे याद मत रखो......पार कुछ चेहरे अपने आप फीड हो जाते है ...कमबख्त निकलते नहीं .......
    अभी तो इस गाने के बोल दे रहा हूँ.............

    ओ रात के मुसाफिर तू भागना संभल के
    पोटली में तेरी हो आग ना संभल के
    रात के मुसाफिर ..
    चल तो तू पड़ा है , फासला बड़ा है
    जान ले अँधेरे के सर पे खून चढा है
    मुकाम खोज ले तू , मकान खोज ले तू
    इंसान के शहर में इंसान खोज ले तू
    देख तेरी ठोकर से राह का वो पत्थर
    माथे पे तेरे कस के लग जाये ना उछाल के
    हूँ रात के मुसाफिर तू भागना संभल के
    पोटली में तेरी हो आग ना संभल के
    ओ रात के मुसाफिर

    माना की जो हुआ है , वो तुने भी किया है
    इन्हों ने भी किया है , उन्होंने भी किया है
    माना की तुने हँ है , चाहा नहीं था लेकिन
    तू जानता नहीं की यह कैसे हो गया है
    लेकिन तू फिर भी सुन ले , नहीं सुनेगा कोई
    तुझे यह सारी दुनिया खा जायेगी निगल के
    ओ रात के मुसाफिर तू भागना संभल के
    पोटली में तेरी हो आग ना संभल के


    क्यूँ दे रहा हूँ.....खामखाँ ही.......

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  49. अनुराग भाई ....... जो बात आपने कही कल परसों में वही सोच रहा था बरसो.....................एक दम सही किसी का इमोशनल होना आज उसकी सबसे बड़ी बेवकूफी कही जाती है............... क्या करें लेकिन दिल नहीं मानता..............लेकिन डॉ. साहेब जब तक आप हम जैसे लोग रहेंगे तब तक हम दीवाने खुश रहेंगे.

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  50. अभी पिछले दो हफ़्ते से डॊक्टरों के चक्कर लगा रहा हूं, और देख रहा हूं कि अभी भी अधिकांश ईमोशनल ही हैं. चलो , आप जैसे लोग और भी हैं, तो क्या बुरा है.

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  51. तभी हम कहें हम फटीचर के फटीचर क्यों हैं......दुनिया के साथ बदलने वाले होशियार हैं! इमोशनल फूल्स साले वहीं के वहीं हैं!

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  52. डा साहब,
    कमाल का लिखते है....किशोर भाई ने सबकुछ कह दिया है...आपकी सभी पोस्ट बेहतरीन अभिव्यक्तियाँ है...और हाँ.मैं आपके कमेन्ट बाक्स पर आपके सन्देश से भी प्रभावित हुआ हूँ..'कुछ टिप्पणियाँ कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उस संवाद के रास्ते को खोलती है ,जिन्हें लेखक शायद देख नही पाया .....'
    बधाई और आभार!

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  53. अनुराग जी..थोड़ा देर से आपकी पोस्ट पढ़ पाया..और फिर साला फ़टीचर इमोशनल हो गया..बहुत सी बातें दिमाग़ मे आयीं..दुःस्वप्न सी...मगर फिर याद आया पिछले साल एक एनिमेशन फ़िल्म देखी थी..Wall-E..अगर आपने देखी हो तो फिर मेरे लिये कुछ कहने को नही बचता है..भविष्य के प्रति बहुत आश्वस्त सी कर गयी यह फ़िल्म.. हाँ हो सकता है कि यह ऑप्टिकल इल्य़ूजन्स हों..फिर मैं कुछ ऑप्टिमिस्टिक भी हूँ..शायद कल को कुछ फ़टीचर से लोग इमोशन्स के भी सोफ़्ट्वेयर्स ही बना डालें..जिन्हे कि मशीन्स मे भी डाला जा सके..फिर शायद..
    ..और फ़िर यह जो उम्मीद है ना..आप जानते हैं कि बड़ी कमीनी चीज होती है..चाँद पर भी सुर्ख गुलाब के फूल उगाने के फ़ितूरी सपने देखा करती है...देखो शायद किसी जन्म मे उन फ़ूलों की खुशबू महसूस कर सकूँ..या शायद इसी जनम मे..who knows.........

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  54. कासिद बनकर आया है बादल,
    कुछ पुराने रिश्ते साथ लाया है ;
    आसमान से आज कई यादें बरसेंगी ..........

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  55. अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
    मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
    आप का स्वागत है...

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  56. वक़्त के उस मोड़ पर जब अचानक टक्कर हुई थी तुमसे
    मीठे-मीठे कितने लफ्ज़ बिखर गये थे सड़क पर तुम्हारे बैग से .......
    सुनते है पहले कुछ ओर था जिसे तुम हुनर कहते हो. ग

    आखिरी लाइन आपकी पोस्ट का निचोड़ कह जाती है अब चालाकी ओर चमचागिरी हुनर है अवगुण नहीं

    इस पोस्ट में काफी कुछ है
    *हर आदमी हाई लाइटर लिए खडा है .जिसकी स्याही का रंग भी रोज बदल रहा है
    *प्लीज़ अपडेट यूर सॉफ्टवेयर ....नयी परिभाषाये इतना कनफ्यूज़न क्रिएट करती है .की रोज सुबह एक "रिफ्रेश " का बटन दबाना पड़ता है ...
    *वाई फाई युग में "सेंटीमेंटल" होना अवैज्ञानिक है .. कितना .इलोजिकल…..
    *समझदार लोग मौके के मुताबिक अपने इमोशंस को घटा बढा देते है....



    किसी ने कल मुझसे यूँ ही पूछा था की क्या पढ़ती रहती हो हिंदी में तुम...मैंने कहा की अपडेट करती हूँ खुद को .....आपको पढ़कर बहुत अपडेट हुई हूँ डॉ साहब .इत्तिफाक से विण्डो मीडिया प्लेयर में गाना चल रहा है
    जिसका चेहरा छीला
    अन्दर से कुछ ओर निकला
    देखिये गुलज़ार साहब ने भी वक़्त की नब्ज़ पकड़ ली ....पर आप ऐसे ही बने रहिये

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  57. आपके पसंदीदा शायर गुलज़ार साहब के शब्दों में...
    "वक़्त रहता नहीं कहीं टिककर,
    इसकी आदत भी आदमी सी है।

    कुछ अपडेट ऐसे भी होते हैं, जिन्हें डाउनलोड न करने में ही सिस्टम की भलाई है। हमें तो वक्त के साथ चलने से बेहतर इस दौड़ में पिछड़ जाना लगता है।

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  58. डियर डॉक्टर, बहुत ही सुंदर भावनाओ को व्यक्त किया है.
    इस वैग्यानिक युग में एमोशन्स, जज़्बात तो खत्म ही हो रहे हें.
    भावना भी "भाव-ना" हो गयी हें, व्यावसायिकता के इस दौर में सच में कोई भाव नही है इनका.
    वो शायद गुज़रे ज़माने का "अमर प्रेम" ही था जो कहता था "Pushpa i hate tears",
    अब तो "लव आज कल" यही है कि "दुनिया की तो फिक्र कहाँ थी, तेरी भी अब चिंता हट गयी !"
    साधुवाद !

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  59. sahi kaha...
    yahan rafi aur jagjit sahab ke gaane suno to dost sunane baith jaate hain.. old-fashioned, psycho, over senti, and all that... hard rock ke is zamane mein kaun dhoondhega dil ka soona saaz, kaun hothon se chukar geet amar karne ki sochega...
    phir bhi ek ummeed hai ki kabhi na kabhi kahin na kahin koi na koi to aayega...

    aabhaar...

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  60. Ek adad maheene hue aapke blog ko follow karte,
    kasam se bahut jhanjhanaahat mehsoos hoti hai padte hue,
    jo choti-choti baatein aap uthate hain, aur use hamare saamne patakte hain, lagta hai ki wo ghatna hamare saamne ho rahi hai...

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  61. हम बहुत टेंशन में आ गए हैं...आपकी पोस्ट आयी और हमें पता भी नहीं चला...लानत है इस मसरूफियत पर...दिल करता है चुल्लू भर पानी में डूब मरुँ...इस देरी के लिए लज्जित हूँ...आपकी पोस्ट पढना अपना काम नहीं अब तक तो धर्म समझता था...लेकिन धर्म की जो देश में हालत हो रही है वो ही मेरे धर्म की भी हुई...अब क्या कहूँ इस पोस्ट पर जिस पर पहले से ही कितने सारे लोग कितना कुछ कह चुके हैं...
    वेरी गुड तो कहना ही पड़ेगा...अब आ गया हूँ तो बिना कहे थोड़े न जाऊंगा...:))
    नीरज

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  62. अनुराग जी ,

    दुःख पूर्ण घटना है गौतम जी सीमा पर लड़ते घायल हो गए हैं ....आइये उनके लिए दुआ करें ....!!

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  63. आपकी हर रचना में मुझे एक अंतर्यात्रा दिखाई देती है...बीच में कुछ ऐसे बिम्ब आते हैं कि सारे शब्द जुबान और जुमलों की हदों को तोड़कर भाग जाते हैं...चित्र संयोजन भी अद्भुत है.....किसी भी बात को सही तब कहा जाता है, जब वह देश काल परिस्थिति के अनुसार सही हो या न हो..मगर व्यक्तिगत तौर पर हम उसमें शामिल होंवें......तो ही हम उससे सहमत हो पाते हैं....मैं अक्सर आपके हर लेख में शामिल हो जाता हूँ...सहमत तो होना ही पड़ेगा फ़िर .........बहुत अच्छा लिखा आपने...बात सरलीकरण से चालू हुई थी....मगर और पता नहीं मुझे कहाँ - कहाँ छोड़कर आएगी...


    Nishant kaushik

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  64. kuch saal pehle, meri ma ke kahe shabd mujhe yaad aagaye.."aadambar ka sthaan sarvpratham hai aaj ki duniya mein"..
    vaise, emotional intelligence aaj ek naya field bana jaata hai, jismein bahut se pehloo research ke kaabil hain... all in the name of better adjustment with your SELF!!

    उत्तर देंहटाएं
  65. वक़्त के उस मोड़ पर जब अचानक टक्कर हुई थी तुमसे
    मीठे-मीठे कितने लफ्ज़ बिखर गये थे सड़क पर तुम्हारे बैग से .......
    सुनते है पहले कुछ ओर था जिसे तुम हुनर कहते हो.

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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