2011-05-25

वो क्या कहते थे तुम जिसे .....प्यार !

"अ" का प्यार-
मेर बाप अब भी मुझे उंगुली पकड़ के चलाना चाहता है ..वो समझता है मुझमे अक्ल नहीं है ....ये मेरी जिंदगी है यार
"....वो पूरे कमरे में   चहलकदमी कर रहा है ..वो जब भी परेशां होता है ..बहुत चलता है ..यहां वहां .बेवजह .सन्डे की सुबह सुबह उसकी एंट्री हुई है ..घडी में आठ बजे है..वार्ड का रायूंड भी है ...
मै मेज पर पड़ी आखिरी सिगरेट को देखता हूँ ..फिर.अलमारी पर टंगे उस ब्लेक बोर्ड को जिस पर रात में मैंने बड़ा बड़ा चोक से लिखा था ..."क्विट स्मोकिंग "
  .तेरा अच्छा है साला ब्रेक अप हो गया इन लफ़डो  से छूट गया ..मै उसे याद दिलाना चाहता हूँ के मेरा ब्रेक अप नहीं हुआ मुझे लड़की ने छोड़ा है ..पर मै सिर्फ सिगरेट सुलगाता हूँ
तू साला मेरी बात भी सुन रहा हूँ या सिर्फ सिगरेट पी रहा है
 
मै उसकी ओर देखने लगा हूँ....

"तुम कवि शायरों का पता नहीं साला कब क्या सोचते रहते हो'.. !  तुम लोगो के  क्या कहते है उसे ....' ज़मीर" को   बेवक्त आने की आदत है ...... !.उसके हाथ में जावेद की तरकश " है ..ये डाइलोग उसने उसके पन्ने  पलटते  हुए बोला है...फिर उसे पलंग पे उछाल दिया है ..पूयर जावेद!
उसका मोबाइल बज उठा है...वो बिना कुछ कहे बात करता बाहर निकल गया है..ठीक वैसे ही जैसे आया था .
पता नहीं मेरा  ज़मीर अब कितने  टके का होगा   !!!!
 "ब ""का प्यार ...
मुझे हाल्फ फ्राई खाने की तलब लगी है
.झोपड़ा केन्टीन पे बाइक खड़ी करता हूं .इस केन्टीन में सिर्फ शोहदे आते है ओर सिगरेट पीने वाले सारे शोहदे होते है! हॉस्टल ओर हॉस्पिटल के बीचो बीच एक टीन  का शेड है...जिसे झोपड़ा केन्टीन कहते है .....ऑर्डर देने की जरुरत नहीं है..उसे मालूम है  मुझे क्या चाहिए ... मै  गुजराती अखबार उठाकर पढने की कोशिश करता हूं .ऐसा नहीं है के गुजराती मुश्किल है पर मैंने कभी सीरयसली सीखने की कोशिश नहीं की ."ब " की मोटर साइकल आकर रुकी है..उसने चाय का ऑर्डर देकर सिगरेट सुलगाई है ..अपने म्यूजिक लाइटर से ...
"रायूंड   हो गया " मै उससे पूछता हूं
हूम..म...उसने लम्बा कश लेकर सिगरेट मेरी ओर बढाई है ...

"नहीं  अभी पी है " मै कहता हूं...
"**** कैसी है" मै उसकी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछता हूँ....जो आजकल बरोदा में है .उससे एक साल सीनियर
'ठीक है'
तू गया नहीं ..अमूमन सन्डे वो ट्रेन से बरोदा निकल जाता था ...
साला छुट्टी मिले तो फिर  इमरजेंसी ... एक्जाम टर्म  ..घर जाना चाहता  हूँ.. एक ब्रेक ..थक  गया हूँ
"क्या हुआ "..मै जान गया हूँ वो डिस्टर्ब है ..ये लाइने उसकी नहीं है . 
गुलाब कविताएं रोमांस ..उसी मुझमे वही चाहिए ..वो कम्फर्ट ज़ोन में है यार ..पर  मेरा स्ट्रगलिंग पीरियड है... ..वो अब भी मुझमे  चार साल पुराना  मै ढूंढती  है ....सब कुछ उस के सामने तो है . ऐसे में रोमांस ....एक लम्बा कश....
.केन्टीन वाला हाल्फ फ्राई रख के गया है .समझदार है सिर्फ चुपचाप सुनता है ..मुझे भूख बहुत लगी है ..मै कहना चाहता हूं  ये पाव बासी है पर  सामने वाले की सूरत देखकर पता नहीं क्यों नहीं कहता! ..वो क्यों नहीं समझती....चार  साल का रिश्ता है हमारा पर........उसकी आवाज धीमी हुई है.....कंधे झुक से  गये है .... जानते हो अन्दर से मै डरा हुआ हूँ...पिछले एक महीने से  उसकी बातो में एक ओर बन्दे की तारीफ होती है ...उसकी आवाज की टोन   बदल गयी है या मेरा भ्रम है के  जैसे भर्रा  गयी हो.....मै जानबूझ कर उसके सामने नहीं देखता ...."क्विट स्मोकिंग" को एक दिन ओर आगे बढाकर मै सिगरेट  उसके म्यूजिक लाइटर से जलाता हूँ...खाते खाते .
.मेरा" मेल एगो " इस डर को  उसके आगे............ वो रुक गया है .सिगरेट जल रही है पर वो कश नहीं लेता ......
पर
  प्यार का मतलब समझना भी तो होता है न यार "
 मै  सिगरेट का  बड़ा कश  लेता हूँ.....फिर दूसरा .......लाइटर को  उलट पुलट के देखता हूँ ...ये लाइटर उसकी गर्लेफ्रेंड सिंगापूर से लायी थी ....स्लीक !
 तू  सुन रहा है  ना या सिर्फ सिगरेट पी रहा है .मै उसकी ओर देखता हूं.... पर उसने कवि- शायर के मुताल्लिक कुछ नहीं कहा है !
ब्रेक में "क" की गर्लफ्रेंड
 ...हॉस्पिटल केन्टीन में मै चाय पीते वक़्त अंग्रेजी का अखबार पढने की सोचता हूं ..सूरत में अंग्रेजी अखबार लेट आता है ..चाय के पहला  घूँट भरता हूं....तुम सिगरेट क्यों पीते हो यार ? ‘-“वाली है ....मेरे सामने बैठ गयी है ... मेरी शर्ट के जेब से झांकते पैकेट को देख कुड जाती है.. कहना चाहता हूं  .तुम्हारे बॉय फ्रेंड के वास्ते है उसे वार्ड में देने जाना  है .महँगी  सिगरेट है .साले ने मोबाइल पर फोन करके मंगाई है ..इनकमिंग काल ४ रुपये की है ...सिगरेट २२ की....पर कहता नहीं... जानते हुए भी की ये पैसे कभी वापस नहीं मिलेगे ..उन हालातो में जब आपकी जेब में केवल चालीस रुपये हो.....यूँ भी के ....लोग कहेगे कितने कमीने आदमी हो दोस्ती बड़ी के २६ रुपये !
केन्टीन बॉय उसके लिए चाय रखकर गया है .उसकी टी शर्ट पे "प्ले बॉय ' लिखा है ..! केन्टीन में "वो "आयी है अपने डिपार्टमेंट के साथ ...उससे  आंखे  मिलती है ...उन आंखो में अजीब सा कुछ है ..मै अफ़सोस मनाता हूं के मैंने शेव नहीं बनायीं ..वो हमारे बाए तरफ वाली सीट पर  बैठ  गयी है..उन आँखों में मै फिर देखता हूँ ...वे अब भी मुझे देख रही है 
उधर देखने का कोई फायदा नहीं ..वो फिक्स है "क" वाली ने जैसे मेरी मूवमेंट  को पकड़ लिया है
(फिक्स ! पर उसकी आँखे तो कुछ ओर बोलती है .)
 "हमारी शादी की डेट भी नक्की  हो गयी है ."क वाली  बोले जा रही है .नक्की गुजराती वर्ड है ...मै उन आँखों से फिर टकराता हूं...बड़ी बड़ी  आँखे ... .(ऐ खुदा  फिक्स वालो की आँखे इतनी स्टेयरनिंग तो नहीं होती.)
वैसे तुम क्या सजेस्ट करते हो..मैरून कलर का लहंगा ठीक रहेगा ...क वाली शादी में इन्वोल्व है....पर '.वे आँखे ' सीट से उठ गयी है ....उसने सीट से उठते उठते मुझे फिर देखा है ....मै भी उठ गया हूं .बाय कहकर ...सोच रहा हूं" क" को सिगरेट का पैकेट देते वक़्त कहूँगा "अब भी वक़्त है सोच ले '...पर बिना कहे ही सिगरेट का पैकेट दे आया हूं ..जेब में अब केवल १८ रुपये है .
"स" का प्यार जैसा कुछ  -
पूरा कोलेज मानता था  के वो पिछले दो सालो से कोलेज की सबसे सेक्सी लड़की  के साथ है ! मै  भी ! पर मेरी उसकी दोस्ती उससे कही पहले  थी . वो बहुत खूबसूरत तो नहीं था पर उसे  भीड़ में  भी इग्नोर नहीं किया जा  सकता था . ...झूठ बोलने का भी एक सलीका होता है ...कोंफिड़ेंस..."स " उसमे माहिर है ..पर वो ये आर्ट सिर्फ लडकियों ओर टीचरों के आगे दिखता है दोस्तों के आगे नहीं...... पीकर तो बिलकुल नहीं! ...वो रूम में शिवास लेकर आया है ..सूरत में ..शिवास मिलना एक लक्ज़री है ..ट्रेन में सूटकेस में कई कपड़ो के  नीचे दबा कर लाया है ..कहता है पापा ने गिफ्ट की है ..मुझे अपने याद आते है .सिगरेट का पता चलेगा तो बन्दूक निकाल लेगे ...

उसका तीसरा है ..ओर मेरा दूसरा ..मै  अपने ग्लास में आइस डालता हूं....मेरी औकात  दो तक की है ओर मुझे मालूम है ..कमरे में छोटा  फ्रिज भी एक लोकालाईट ने रखा है इसी वास्ते ...
"रिलेशन शिप में कभी कभी आप उबने लगते हो '..अचानक उसकी   बातो  का दायरा  बदलने  लगा है ..अपना स्पेस ढूँढने की छटपटाहट सी होती है ..तुझे कभी ऐसा नहीं लगा ..वो मुझसे पूछता है मै जवाब नहीं देता सिर्फ मुस्कराता हूँ..
"साली दुनिया सोचती है मै कोलेज की सबसे सेक्सी लड़की के साथ घूम रहा हूँ...पर कोई मुझसे पूछे ..'
मै उसकी ओर देखता हूँ ...
गर कोई मुझसे पूछे उसके साथ जिंदगी गुजार लेगा ..तो ईमानदारी से कहूँ डर लगता है यार
मुझे सिगरेट जलाने पड़ेगी ....ऐसे  फिलोस्फिकल माहोल में वो बड़ा सहारा देती है !
मुझसे उसपे यकीन नहीं है यार !
 "उसने तुझसे शादी के लिए कहा .क्या" मै पूछता हूं .
नहीं 
गर पूछेगी तो ....उसका डर है !
गर न पूछे तो
?
वो भी हर्ट  करेगा ..
..ब्लेक बोर्ड हवा से हिला है ..सोचता हूं उसके जाने के बाद  क्विट स्मोकिंग मिटा दूंगा ..पिछले तीन हफ्ते में चौथी बार मिटाया है .केसेट ख़त्म हो गयी है ...मै उठकर पलटता हूं उसका पैग ख़त्म हो गया है .वो आगे कुछ नहीं बताना चाहता .न मै उससे पूछना .

लिखा था जिस किताब में इश्क तो हराम है ...

सुबह मोबाइल के अलार्म ने आँख खोली है ..फोन उठाकर बंद करता हूं..उनीदी आँखों से  एक मेसेज दिखता है ... ....मेरी एक्स  का मेसेज है ..."
  मिलना चाहती हूं..मिलोगे"
मै फिर से तकिये में मुंह छिपाकर सो जाता हूं .


 ये तसल्ली है की इसे वो नहीं पढेगी.....जो कभी पढ़कर  "किसी" से कहा करती थी "तुम्हारे दोस्त की कहानियो में इतनी सिगरेटे क्यों आती है !

62 टिप्‍पणियां:

  1. अनुमोदन हेतु प्रेषित :

    अ ब स क का प्रतीकीकरण जँच गया
    मैं भी सोचता हूँ तुम्हारे अफ़सानों में सिगरेट क्यों छायी रहती है ।
    क्विट स्मोकिंग और क्विट लॅविंग में बड़ा साम्य है,
    यह जानते हुये कि दोनों कहीं न कहीं जिस्म को घायल कर रही हैं... कोई छोड़ नहीं पाता ।
    चीज ही ऎसी है ज़ालिम कि अगर कुछ हट हट कर मरते हैं, तो कुछ सट सट कर भी मरते हैं ।

    अनुमोदित करने के लिये धन्यवाद !

    उत्तर देंहटाएं
  2. kabhi pi nahin hai lekin lagta hai sabhi shakhs sigarate ke kash jaise hi rahe honge baharhaal sabhi drishya dilchasp aur yah bhi
    ये तसल्ली है कि इसे वो नहीं पढेगी.....जो कभी पढ़कर "किसी" से कहा करती थी "तुम्हारे दोस्त की कहानियो में इतनी सिगरेटे क्यों आती है !

    उत्तर देंहटाएं
  3. दोस्त की कहानियों में सिगरेट....भाई बहुत खूब...उसे क्या पता के दोस्त की कहानियों में सिगरेट आती है या फिर सिगरेट में दोस्त की कहानियां....जो भी हो डाक्टर साहब अगर आप डाक्टर न हो कर फुल टाइम साहित्यकार होते तो अब तक तीन चार साहित्य अकादमी पुरूस्कार और सात आठ नोबल जीत चुके होते...वैसे ही जैसे मैं अक्सर सोचता हूँ कि अगर मैंने एक्टिंग नहीं छोड़ी होती तो अमिताभ बच्चन आज भी कलकत्ते में कहीं नौकरी कर रहा होता...
    इस बेजोड़ लेखन के लिए भरपूर दाद कबूल करें

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  4. सरप्राइज़ पैकेज .इस दुनिया में दो तरह के लिक्खड़ होते है डा साहब, एक वो जिनके पास बुद्धिमानी उपमाये, भाषा के कठिन शब्द ,बड़ी तिलस्मी बाते होती है वो जो कहते है कभी कभी समझ नहीं आता दूसरे वो जो बोलचाल की भाषा इस्तेमाल करते हुए कुछ ऐसा कह जाते है के लगता है अरे ऐसा ही तो है .आज आप दूसरे वालो हो.

    पिछली पोस्ट पे आपकी सिग्नेचर टिप्पणी का इंतज़ार था की आपने ये थमा दिया .प्यार का "डिसेक्शन" अच्छा है ,कई एक्सपेरिमेंट है कहने का नया स्टाइल दोबारा आयूंगी .

    उत्तर देंहटाएं
  5. कालेज की जिन्दगी सदा ही ऐसे एहसासों से ठुसी हुयी रहती है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. ये तसल्ली है की इसे वो नहीं पढेगी.....जो कभी पढ़कर "किसी" से कहा करती थी "तुम्हारे दोस्त की कहानियो में इतनी सिगरेटे क्यों आती है !
    --------------
    आप इश्क की ये दास्ताँ लिखते हैं तो क्या खूब लिखते हैं. सिगरेट और दोस्ती के बीच गुंथी बेबकियाँ...जिंदगी...
    पता नहीं क्या लिखूं...आपको पढकर अक्सर कहीं 'खो' जाती हूँ. हाँ आखिरी पंक्ति के बारे में कहूँगी...इतना इत्मीनान मत रखिये, दुनिया बहुत छोटी है, और खास तौर से इन्टरनेट की...बहुत मुमकिन है वो इसे पढ़ रही हो और एक किसी दिन सवाल पूछ ही ले.
    ये आपकी कहानियों में मेरा जिक्र इतना क्यों आया है?

    उत्तर देंहटाएं
  7. फिर छिड़ी बात सिगरेट कुइटिंग की..पर हजारों वजह ऐसी कि हर वजह पे एक कश निकले.
    बाँध कर रखने वाला लेखन..

    उत्तर देंहटाएं
  8. पाव बासी है .
    क्विट स्मोकिंग मिटा दूंगा

    और ना जाने कितनी फ्रसेज़.. सब अपना असर छोड़ते हैं..

    और आखिर में वह मेसेज..
    ultimate dr saab..:))

    मनोज

    उत्तर देंहटाएं
  9. यह पोस्ट ऐसे समय में आई है, जब कुछ दिनो से मन में ये चल रहा है कि अक्सर लव का मतलब दो और दो चार क्यों नही होता ? और जहाँ दो और दो चार दिखता है, वहाँ अक्सर लव क्यों नही होता ?? और जहाँ दो और दो चार भी होता है और लव भी दिखता है वो दुनियाँ के कितने भाग्यशाली लोग होते हैं, हम भला उनमें क्यों नही है ???

    अमर कुमार जी के शब्द चोरी करूँ तो
    "क्विट स्मोकिंग और क्विट लॅविंग में बड़ा साम्य है,यह जानते हुये कि दोनों कहीं न कहीं जिस्म को घायल कर रही हैं... कोई छोड़ नहीं पाता ।"

    और एक वाक्य बढ़ा भी दूँ कि हर रोज ब्लैक बोर्ड पर बड़े बड़े अक्षरों में ये लिखा भी जाता है इस उम्मीद से कि शायद अबकी छूट जाये तो और जिंदगी में सुकून आये....जबकि पता है कि ये दोनो वो शै हैं जो ना जिंदगी में रह के सुकूँ देती हैं ना छूट कर..........!!

    ये है आपका असली मूड, मूड को अपने रंग में रंग देता है कुछ दिनो के लिये..........!!! ऐसा ही लिखा कीजिये... हम इसे मिस करते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  10. ये क्या ठाकुर.. अभी तो मेहन्दी भी नहीं उतरी थी पुरानी वाली की.. !!! एक बार तो यकीन ही नहीं हुआ कि इतनी जल्दी दूसरी पोस्ट..?? पर अ ब स से मिलके लगा कि चलो अच्छा ही हुआ आपको फुर्सत तो मिली.. वैसे आँखे फिक्स हो या नॉन फिक्स इन पर भरोसा करने वाले अक्सर सिगरेट सुलगाते ही मिलते है.. अपनी वाली आँखे ज़रा ठीक निकली.. पर सबकी ऐसी किस्मत कहा.. ?

    और हाँ ये मत समझना कि खाली पोस्ट लिखके 'नक्की' किया.... ऊपर नीलिमा जो कह रही है... कि सिग्नेचर कमेन्ट.. उसका क्या?

    उत्तर देंहटाएं
  11. आपको पढ़ना जैसे जादुई दुनिया के हज़ारों कोनों को देख लेना...बहुत दिनों के बाद की पिछली पोस्ट पढ आए थे लेकिन कुछ कह न पाए...सिगरेट शायद प्यारी है आपको :)

    उत्तर देंहटाएं
  12. Interesting ..daak taar saheb ( हम अपने एक डॉक्टर मित्र को डाक तार साहेब ही कहते हैं ).सिगरेट इतनी बड़ी बात भी नहीं के बन्दूक निकल आये और इतनी छोटी भी नहीं के क्विट करने की बात रोज रोज लिख कर मिटा दी जाए ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. dr. sab pata nahi... blog jagat men likhi jane wali kahaniyon men sabse kareeb apki likhi kahaniyan milti hain..ab ise hee dekhiye na...jhopda canteen, ciggy, itni saari prem/ aprem kathayen, aur milna chahti huin ..miloge? jaise sms...:)

    उत्तर देंहटाएं
  14. सिगरेट को छोड़ना बहुत बड़ा जंग माना जाता है खासकर कॉलेज और होस्टल के जमाने में ।

    खैर वादे किसी से भी किये जायें अंतत: टूट ही जाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  15. कहानी कथ्य और शिल्प दोनों मामले में बेजोड़ है। कथा बुनने का आपका कौशल सधा हुआ है।

    (सिगरेट पीना शुरु किया था तो न पीने वाले यार-दोस्त कहते थे .. छोड़ दे बुरी आदत है। हम इतराते हुए जवाब देते थे ... कुछ तो ऐसी आदत हो जो किसी के यह कहने पर “तुम्हे मेरी कसम इसे छोड़ दो” छोड़ सकूं।
    आज सिगरेट नहीं पीता। शादी के बाद ही छूटी। शादी तक किसी प्रेम के रास्ते नहीं पहुंचे थे।)

    उत्तर देंहटाएं
  16. "वो भी हर्ट करेगा .. " - दी बेस्ट !

    उत्तर देंहटाएं
  17. पूजा ठीक कहती है जब आप प्यार ओर यारी पे लिखते हो तो बिलकुल टूट कर लिखते हो .प्यार के डिफरेंट शेड्स एक ही पेंटिंग में आपने डाले है .जिसका कोलाज़ दूर से देखने पर एक ओर अलग पिक्चर देता है . फिक्स वाला हिस्सा मुझे बड़ा पसंद आया ओर ये लाइन भी

    पूरा कोलेज मानता था के वो पिछले दो सालो से कोलेज की सबसे सेक्सी लड़की के साथ है ! मै भी !

    आखिरी की पञ्च लाइन का अपना असर है शायद पोस्ट से भी ज्यादा

    उत्तर देंहटाएं
  18. ये सारे अ ब स क के किस्से और किस्सों में सिगरेट हर कश के साथ कितना कुछ फूँका होगा ,यादें कलेजा और भी बहुत कुछ ......मज़ा आ गया मेरे फेवरिट फ्लेवर "प्यार " की रचनाये

    उत्तर देंहटाएं
  19. ऐसी पोस्ट पढकर "अघाने" का सुकून मिलता है. आप ऐसी शैली के डाक्टर हो..एक बार एनिस्थीसिया देकर पता नहीं क्या-क्या कर देते हैं कि..फिर देर तक उन्हीं फितरतों में मन खोया रहता है.कभी चीरने का दर्द तो कभी मर्ज ठीक होने का सुकून.

    उत्तर देंहटाएं
  20. अ का दर्द ब की कशमकश या स का कन्फ्युशन या क का अफसाना
    ............
    मीर तक़ी 'मीर' साहब का शेर है--
    ये निशान-ऐ-इश्क़ हैं जाते नहीं
    दाग़ छाती के अबस धोता है क्या
    ...........
    [जो व्यक्ति प्यार की अनुभूतियों से न गुज़रा हो वह अगर एक बार आप के लिखे इन किस्सों को पढ़ ले तो हल्की सी संवेदना उस के दिल में भी जागेगी .. यह तय है ]

    उत्तर देंहटाएं
  21. झूठी तसल्लियाँ पाल रखी है....क्या गारेंटी है वो नहीं पढ़ेंगी :-) मुमकिन है जाहिर ना करें, सवाल ना पूछे
    किसी दिन यूँ ही घुमते हुए कोई ब्लॉग जाना- पहचान नज़र आ आ जाये .....मुमकिन तो ये भी है :-)
    आपकी लेखनी के किरदार जीवंत हो उठते हैं...तो ये आपके किरदार को बोला हमने :-)

    उत्तर देंहटाएं
  22. अ ब स द ..... लाजवाब !!!!

    कुछ कहने लायक तो छोड़ते नहीं आप....

    वैसे बात तो सही है, सिगरेट कुछ कम तो होनी ही चाहिए...स्वस्थ के लिए हानिकारक जो है...आप तो जानते हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  23. वो अब भी मुझमेचार साल पुरानामै ढूंढतीहै ....

    कमबख्त सभी ढूंढती हैं ना मिलने वाला पुराना वो! ....:-)



    सिगरेट के छल्लों में उड़ता इश्क का धुयाँ... आसमान पे छाया है

    indulging post!

    उत्तर देंहटाएं
  24. किसी ने ठीक ही कहा है --it is very easy to stop smoking and i have done it so many times .

    उत्तर देंहटाएं
  25. आपके लिखे शब्दो के तीरों से कभी आह निकलती है और कभी वाह निकलती है। बस इस दुनिया में डूबे रहने को जी चाहता है...

    उत्तर देंहटाएं
  26. बहुत बढ़िया.
    काव्य-गध्य... असीम उर्जा से भरे हुए कवियों के साथ अक्सर ये हादसे पेश आते हैं कि उनकी कविता बाँह छुड़ा कर सरपट दौड़ती है. उसका पीछा एक सुंदर कथा को जन्म देता है. ऐसी कथाओं में रिद्म मुखर होकर पाठक को श्रोता में तब्दील कर देता है. मैं आप तक बहुत सी शुभकामनाएं भेजना चाहता हूँ कि निरंतर लिखना जारी रहे.

    उत्तर देंहटाएं
  27. डाक्टर साहब बहुत दिनों बाद आपके ब्लाग पर वापसी हुई, वही भाषा वही फ्लो, हालांकि मुझे ए बी सी वाले कैरेक्टर्स बांध नहीं पाते। पर थोड़ी ही देर में आपने अपने पाठकों को फिर से जोड़ लिया (इन्क्लूडिंग मी) । लेकिन अंत तक आते आते बहुत उदास कर गई आपकी पोस्ट। ऐसे ही किसी अकेले उदास लम्हों में ऐसी कहानियां जनम लेती है। और प्यार जिन्दगी भर आपको यूं ही सालता रहता है।

    उत्तर देंहटाएं
  28. प्यार के कितने रंग...हर एक के लिए एक अलग डेफिनिशन ...हर एक का अलग फलसफा! वैसे आप की कहानी इनमे से कौन सी थी?

    और जहां तक सिगरेट छोड़ने के बारे में मैं सोचती हूँ....मैंने कई लोगों को बच्चे हो जाने के बाद सिगरेट छोड़ते देखा है! वैसे जो भी हो सिगरेट तो शरीर के लिए बुरी है ही... आप तो बेहतर जानते हैं!

    उत्तर देंहटाएं
  29. injurious to health..... everyone knows it .... still so many ppl do it.
    my very good friend had this habit
    and finally he quit...

    उत्तर देंहटाएं
  30. किसी भी व्यक्ति के लिये अन्तिम पंक्तियों में छुपे खंजर की चुभन असहनीय होगी.
    मुझे तो महसूस होती है..

    उत्तर देंहटाएं
  31. ऐ खुदा फिक्स वालो की आँखे इतनी स्टेयरनिंग तो नहीं होती.

    ...Awesome !


    छोड़ दें हम आज ही वाइज़ मग़र तू ये बता...
    ज़िन्दगी अच्छी नहीं या 'स्मोकिंग' अच्छी नहीं? :-P

    "Quit Quitting."
    World No tobacoo Day after all...

    उत्तर देंहटाएं
  32. Dear Anurag
    It is my obsevation that Smoking has been almost Glorified in several of your Posts !
    It is my humble suggestion to avoid or atleast minimise the same in days to come.
    However, your Style and narrations are Excellent indeed !

    उत्तर देंहटाएं
  33. अजीब-सी रात है ये...फेसबुक पे पहले पल्लवी को "बड़ी सूनी सूनी है" गाते हुये सुना...एक सिगरेट तभी जल गई थी| सेंटी था तो उसके ब्लौग पर चला गया| तीन अलग-अलग ज़ायक़ों की तीन पोस्टें पढ़ी और बेतुकी सी टिप्पणियाँ देकर आ गया....|

    आप याद आए उधर टिप्पणियों में तो इधर चला आया| तब तक एक और सुलग चुकी थी...अब इन "अ" , "ब' और "स' के किस्सों के बहाने क्यों जला रहे हो हमें| रज़ाई में घुसा हुआ हूँ| लैपटाप लगभग सीने पे है| एशट्रे बिस्तर पर| आपको पढ़ते ही कमबख्त एक तो खुद ही कुछ लिखने का मूड बन जाता है| क्यों करते हो ऐसा आओ, जाने कितनों को कितनी कहानियाँ याद दिला देते हो....

    missing you Doc...


    हुई वही किताब गुम, बड़ी हसीन रात थी...

    उत्तर देंहटाएं
  34. डॉ साहब
    नमस्कार
    एक के बाद एक ......पहले अ फिर ब सिलसिला और आगे बढ़ाते हुए क फिर स........
    ज़िन्दगी ऐसे ही कई दायरों से होकर गुज़रती है.....
    यही कहूँगा कि आप जैसे लोग " हर फ़िक्र को धुएं में उड़ाते आगे बढ़ते जाते है मगर सीने में कुछ यादों को सहेजे समेटे हुए....... मैंने पहले भी किसी पोस्ट कि टिप्पणी में कहा था कि डॉ आपकी भाषा में जो रवानगी है वो अद्भुत है..... "गौतम" को अगर सिगरेट के लिए आप प्रोवोक कर जाते हैं तो इसमें नया कुछ नहीं.... !!!!

    उत्तर देंहटाएं
  35. aap long term mein kabhi retirement ki sochenge jab, to koi kitaab likh daaliyega. I seriously do not have wrds to describe the marvelous way in which u write. "bows"

    उत्तर देंहटाएं
  36. Pichale kareeb 3-4 mahino se saare blogs se door tha... ab kuchh settle huaa hun to aaj raat aapke pichale 2-3 mahino ke saare posts padhe..

    Hamesha ki tarah hi laajwaab hain sab...

    उत्तर देंहटाएं
  37. Gajab likhate hain dr. saheb

    upar kanchan singh chauhan ji ki taippadi bhi mujhe bahut achchi lagi.

    likhate rahiye :)

    उत्तर देंहटाएं
  38. यही वो दिन है जिसकी तलाश रहती है यहाँ कुछ कहने का...

    ऐसा होता है अक्सर कि लैम्प पोस्ट, सड़क और पेड़ को सबसे ज्यादा कहानियां पता होती हैं. यह साथ नहीं होते, हो कर भी नहीं होते लेकिन इनके पास होता है देखने का अनुभव और मौलिक नज़रिया... ये सुनाते हैं हमको बेहतरीन कहानियां और बदलती तस्वीर... इतना कि आपको लगे यह मुझे कैसे जानता है ? और कम से कम मुझे नहीं तो हमारी संगति में कब रहा ?

    उत्तर देंहटाएं
  39. behad khoobsoorat kahani...

    peena dard ki dawaa hai...sharaab ho ya sigret ya fir dard khud....

    aap ye maanke matt chaliye ki vo ise nahi padhegi, vo ise jarur aur jarur padhegi....(anubhav bolta hai, hum bhugat chuke hain..)

    kuchh milti julti kahani share karna chahunga.....kabhi padhiyega is link par...


    "ek ankhaa sa pyaar"
    http://csdevendrapagal.blogspot.com/2010/03/blog-post_15.html

    उत्तर देंहटाएं
  40. आपको पढने के बाद खुद भी कुछ लिखने/बताने का मन करने लगता है... धन्यवाद, हर उस शब्द के लिए जो आपने यहाँ लिखा.

    उत्तर देंहटाएं
  41. pata nahi bus yun hi aapki kahani padhne ka mann is waqt fir ho gaya jaise hi blog par aayi.....bahut acchi lagi.vese dard ka apna hi maza hai sabhi ko hota ya ho hi jayega jinko nai hua....:):)

    उत्तर देंहटाएं
  42. ye kaisa ishq hai jisaka koee ilaj nahee

    hum unko bhool jate hain wo fir bhee yad rehate hai.

    Hamesha kee tarah la jawab.

    उत्तर देंहटाएं
  43. अक्सर सोचती थी /हूँ की लोग सिगरेट क्यों पीते हैं ...
    आपको पढ़कर लगता है , अच्छा है लोग सिगरेट पीते हैं !

    उत्तर देंहटाएं
  44. सुबह एक साहब ने एस एम् एस भेजा है ...
    .
    a banner outside a liquor shop "IF U LOVE SOMEONE TODAY " THAN YOU WILL SURELY LOVE ME SOMEDAY "
    प्यार पे कित्ता कोंफिड़ेंस है ना..
    खैर वापस इसी जिंदगी में दाखिल होते है

    हम लडकिया प्यार करती है ओर तुम लड़के.".वो फिल इन दा गेप छोड़ देती है .... जरूर उसके इंग्लिश ग्रामर में अच्छे मार्क्स आये होगे मै सोचता हूँ...उसे अक्सर ऐसे बात करने की आदत है ...मै इस बार भी फिलर के लिए नहीं पूछता हूँ..

    बदल सरकार एक इंटरव्यू में कहते है के औरत प्यार करती है ओर मर्द सिर्फ गणित के खेल खेलते है ...मुझे "स "याद आ जाता है .... अक्सर कहता ..लडकिया जब प्यार करती है तो टूट कर करती है .इतना की कन्फ्यूज़न होने लगता है के यार क्या हो रहा है ...कभी कभी चिल्ला कर ब्रेक लेने का मूड होता है ..पर आखरी ओवर में आँखों में आंसू लिए बाउंड्री लाइन पे किसी दूसरे का हाथ पकड़ कर "आई लव यू "कहना नहीं भूलती ..लडकिया दिल से प्यार करती है पर डिसीजन दिमाग से लेती है ...

    शायद ज्यादा पढ़ी लिखी लडकियों के कुछ सिंड्रोम अलग होते है ...

    @dua uncle...दरअसल अब सिगरेट ना के बराबर ही होती है ..कोई पुराना दोस्त मिले या किसी रोज उदासी बहुत ज्यादा हो ...

    उत्तर देंहटाएं
  45. कैसे लिख लेते हो यार ये सब कुछ ... कुछ अपना सा चेहरा [ थोडा सा धुंधलाया सा ] दिखता है ...तुम्हारी कहानियो में ...किस्सों में ....टुकडो में... डॉक्टर साहेब ...खुदा ने गलत समय पर गलत जगह paste कर दिया है आपको .. खैर ,इस तरह तो हम सभी कवी और शायर गलत दुनिया में pasted है ... once again hats off to your writing .. कभी मिलोंगे तो उंगलियों को चूमेंगे और थोडा हुनर मांग लेंगे आपसे लिखने का ....

    आभार
    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

    उत्तर देंहटाएं
  46. dr. saab...bahut dino ke baad aapko padha...bahut achcha laga. choti choti baaton ko aap bahut pyar se pirote huye ek badhiya kahani bana dete hain. ye cigarette ke dhuyen abhi aur bhi kai vaakye saaf dikhenege, isi ummeed me hain....

    उत्तर देंहटाएं
  47. itna khoobsurat kaise likh lete hain anurag sahab...
    ab tk bs main silent reader hi rhi hn apke blog ki pr aaj socha comment kr hi dun

    उत्तर देंहटाएं
  48. "हुई मुद्दत की तेरी याद,नहीं आई हमें"
    ऐसा भी नहीं की तुझे भूल ही गए हैं हम"
    दूसरी बार आया हूँ,आता रहुँगा।लिखा हुआ गहरे तक उतर गया।

    उत्तर देंहटाएं
  49. कहानियां लिखने वाले बोरिंग लोग होते हैं, सिगरेट पीने वाले भी बोरिंग लोग होते हैं, प्यार करने वाले भी बोरिंग लोग होते हैं, और प्यार में प्यार ढूँढने वाले भी बोरिंग लोग होते हैं |

    जानते बूझते भी इसे सुनता हूँ, पढता हूँ, देखता हूँ, जीता हूँ, अजीब बात है |

    उत्तर देंहटाएं
  50. sukra hi ise ham padh chuke hain....
    padhna start kiya to laga ki ham to padh chuke hin.... comts dekha to o bhi ho chuka ..
    fir se gajab likhate hain... ha sigrate wali bat kuchh khas hi...
    hame bhi bataye kese chhoda jaye ise.

    उत्तर देंहटाएं
  51. ahhha. Dr Saheb,,, ab aapke shabdo ki apne shabdo mein kya badai karu.. par waah

    उत्तर देंहटाएं
  52. Dr. Anurag you write beautifully.. simple lines and complicated emotions...great going.. i also noticed aapki stories mai cigarate bahut hoti h.. nd in practical life i have seen doctors smoke quite lot..

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails