2008-06-26

एक दिन हॉस्पिटल से -अक्टूबर २०००

होस्टल की लोबी से तैयार होकर निकलने वाला मैं आखिरी बन्दा था , सीडियों पे पहुँचा ही था की  सामने  से नैनेश अपने स्कूटर पर आता दिखा .वो मेरा  जूनियर था ,खुदा का बंदा अमोल पालेकर जैसा सीधा. वो लोकालाइट था ओर होस्टल यदा कदा ही आता था ,इतनी सुबह!!
"वो वार्ड मे लफडा हुआ है ,  बुंदू  को सुबह सिस्टर ने बाहर निकाल दिया था रात को दारू पी कर हंगामे कर रहा था .... पता नहीं किसने  N.G.O वालो को फोन कर दिया वो आकर हंगामा मचा रहे है.
क्या टाइम हुआ है ? ८.२० ......
सर बलसाड से ट्रेन पकड़ कर आते थे ,उनके आने मे अभी पौन घंटा था ,मोबाइल वो रखते नही थे .
हमारी A.P. छुट्टी पे थी..मैंने मोटर साईकिल पर किक मारी ओर वार्ड पहुँचा ...बाहर वर्षा बेन खड़ी थी ,
तुम्हारे सर कहाँ है "मुझे देखते ही बोली . मुझे उनसे बात करनी है ..
 सर के आने में वक़्त है.
  वर्षा  बेन  उन NGO  मे से एक थी जिनके  साथ मेरी कभी बनी नही ओर मैंने अपनी नापसंदगी को कभी छुपाया भी नही.  सुबह सुबह वे लिपस्टिक ओर परफ्यूम लगा कर वार्ड के बाहर आ कर खड़ी हो गई थी .
"तुम्हारे सीनियर कहाँ है "
वे एक्साम गोइंग थे इसलिए मैं उन्हें परेशां नही करना चाहता था.
"बात क्या है ?
मैंने पूछा .....
बात ?  तुम्हारा कुछ मनेज्मेंट  है  या  नही  ?  इस  हॉस्पिटल  मे ?  पेशेंट को बाहर निकाल देते हो ? ये S.T.D का पेशेंट है....सिस्टर ने इसे बाहर निकाल दिया है ओर तुम्हारे जूनियर ने थप्पड़ मारा है ..
मैंने अरोरा को देखा वो जूनियर मोस्ट था ओर गर्म मिजाज था उसकी आंखो मे र्देखते ही मैं समझ गया की थप्पड़ लग गया है.....मैं वर्षा  बेन  को  जानता था वो फसाद खडा करने वाले लोगो मे से एक थी ,मनीषा बेन की तरह नही.
“ओर ऊपर से ये लोग झूठ अपनी गलती छिपाने के लिए गरीब आदमी पर इल्जाम लगा रहे है.,इसके पास पैसे कहाँ से आयेगे , अगर पैसे आ भी गये तो शराब कहाँ से पियेगा बतायो ?.वर्षा बेन बोली .
बूंदु वही सर झुकाकर खड़ा था ... बुन्दु अपने आप मे कमाल का करेक्टर था ,ओर उतना ही बड़ा एक्टर भी ...हम सब उसके फन से वाकिफ थे , ओस्कर जीतने वाली परफोर्मेंस  वो पिछले दो सालो से हमारी ओ पी.डी मे दिखाने आता था हर बार कसम खाकर जाता  था  की साहब इस बार नही....
.नतीजन ,उस पेशेंट को genital fungative ulcer था जो बेहद  बू मारता था   इतनी  की  पूरे  वार्ड  मे उसकी  बू  भरी रहती थी . वार्ड के दूसरे मरीज उसकी  बू से परेशां थे ओर सिस्टर उसे संभावित H.I.V समझकर सैम्पल के लिए उसका  ब्लड  नही  लेती  थी  ऐसे मरीजो मे रेसीडेंट को ही ये काम करने पड़ते थे ,हमे उसकी biopsy की रिपोर्ट का इंतज़ार था ,सिस्टर उसे infectious disease वार्ड मे  भेजने की जिद पे थी     .उसकी रोज सुबह ड्रेसिंग होती थी  जिसे करना अपने आप मे एक मुश्किल काम था ,कई बार मैंने भी उसकी ड्रेसिंग की थी .
ऐसे मे रात को उसने पीकर वार्ड मे हंगामा मचा दिया था..
बुन्दु  सर झुकाये खड़ा था
इतने में वार्ड का फोन बजा सिस्टर  बोली   अनुराग भाई प्रिस्नर वार्ड से फोन है .वहां एक बिगडा रईसजादा भरती था ,  रईसजादों के सारे गुण थे उसमे शौकीनी ,अय्याशी  . कही  पी कर रिवाल्वर  चला बैठे थे ,अगला अल्लाह को प्यारा हो गया . ये साहब जेल में .  मामूली से  कोई स्किन रेश थे . जाहिर है अस्पताल रेफर हो गए . बाप रसूखदार ओर पोलिटिक्स में सो  इनकी सेवा पानी में ३ -४ लोग रहते थे .  मैंने पुलिस वालो को भी उनके साथ कई बार हँसी मजाक करते देखा था.
मै   भी सर के साथ  रायूँड पर होता . आज उनका डिस्चार्ज का दिन था ओर वे जेल नही जाना चाह रहे थे प्रिस्नर वार्ड में रेसिडेंट को अधिकार नही था की जाकर मरीज को देखे .सिवाय इमर्जेंसी के या ड्रेसिंग वगैरह छोड़कर .इसलिए मुझे सर का इंतज़ार ही करना था .
आपको बुलाया है "एक ओर पंगा .....मैं बुदबदाया "यार ये हमारे सर मोबाइल क्यों नही खरीदते "?
इस हंगामे के बीच हमने राउंड लिया फ़िर O.P .D शुरू हो गई ,जब सर आये तो चुपचाप सारा किस्सा बताया गया उस वक़्त कमरे में मै ओर सर ही थे ....उन्होंने खामोशी से सारी बाते सुनी ..फ़िर .अरोरा को तलब किया गया ..अरोरा जी की डर के मारे घिघी बनी हुई थी
....उसने पी थी ?  सर ने पूछा...
जी अरोरा ने सर हिलाया .....
जब मारा करो तो इतनी जोर से  मारा  करो  की  आदमी शिकायत लेकर मेरे पास ना आये या फ़िर मारा मत करो....वे बोले .
समझे ....जी अरोरा ने सर हिलाया ..तभी दरवाजे पर वही वोयलेट लिपस्टिक दिखी....वो कुछ बोलने वाली ही थी की हमारे सर ने उनसे चाय के लिए पूछा ...नही...३ मिनट तक उनका कहानी नॉन स्टाप चली.
आप वार्ड में चलिये मै आता हूँ.....सर ने कहा.
ड्रेसिंग रूम में बुन्दू को बुलाया गया . मै  अरोरा ,नैनेश , सिस्टर भी साथ है.
तुमने बुन्दू को बताया के नही ? सर ने मुझसे कहा ..
मेरे जवाब का इन्तजार किए बगैर उन्होंने मेरे जूनियर से कहा
नैनेश तुने बताया ? तुममे से किसी ने इसे नही बताया ? वे हम पर गुस्सा होते है..
हम सब सर झुका लेते है.
तुझे कुछ बताया रिपोर्ट के बारे में ....वे बुन्दु से पूछते है.
बुन्दु पहले ही ऐड्स के डर से परेशां है.ओर इंजेक्शन का खौफ  खाता है  "क्या साहब ?" वो पूछता है.
तेरी एक रिपोर्ट आ गई है..कुछ गड़बड़ है  ...साहब उठकर चिंतित मुद्रा में खिड़की के पास जाकर खड़े हो गए है . दो मिनट का मौन .
बुंदु  इस मौन से थोडा बैचैन हो गया है .
सर  पीछे मुड़े फिर आहिस्ता से टेबल पर बैठ गए है . ठीक बुंदु के नज़दीक
"अब  तेरी बीमारी में क्या है  अगर अंग्रेजी पी तो बचने के चांस थोड़े है . देसी पी तो "काटना" भी पड़ सकता है   ये लड़के लगता है तुझे बताना भूल गये .
.हम सब ने सर थोड़ा ओर नीचे झुका लिए.
मैडम की कुछ समझ नही आ रहा था .वो हैरान खड़ी देख रही थी.
बुन्दू  साहब के पैरो में गिर पड़ा है
"मुझे बचा लो साहब ,  देसी पी थी.
मैडम के चेहरे पर पसीना आ गया है   .वे बाहर की ओर चलने लगी है .
 सर बड़ी विनम्रता से उन्हें रुकने  को कहते है . ओर अरोरा को ड्रेसिंग खोलने को इशारा करते है .
अरोरा  तेजी से ड्रेसिंग खोलता है
वर्षा बेन उबकाई लेती है ओर मुंह बंद करे  बाहर भागी  है . बाहर से उलटी करने की आवाजे सुनाई  दी है
  सिस्टर मुस्कराती है "साहेब तमे भी '.
सर भी मुस्कराते है.
"इसको इंजेक्शन शाम से शुरू कर देना."
वे अरोरा से कहते है.
अरोरा मुझे देखता है. मुझे मालूम है कि multi vitamin का इंजेक्शन लगना है.. बाहर निकलते है तो वर्षा बेन मुंह पर  दुपट्टा  रख  के खड़ी  है. 
'केम छो? सर पूछते है.
वो हाथ से इशारा करती है कि ठीक है.
सर बाकी लोगो को o.P.d में जाने को कहकर मेरे साथ प्रिस्नर वार्ड में जाते है .

वो फर्स्ट फ्लोर पर है.
 "साहेब" रास्ते में ही कोई नेता टाइप सीढिया पार करते ही मिल गया है ." सुप्रिडेंट साहेब से बात हो गयी है .   कुछ भी दिखा  के एक हफ्ता  रोक लो , फिर कोर्ट से जमानत ले लेगे "
सर मुस्कराते है .

वार्ड में  घुसते है तो रईसजादे को पोलिस वाले कोई पान मसाला अपनी हथेली में  पीस कर दे रहे है
वो रईसजादा  बैठे बैठे कहता   "साहेब कुछ करो"
"क्या करूँ तू ठीक तो हो गया "सर कहते है.
आहिस्ता आहिस्ता ठीक करना था.साहेब "
कोई इंजेक्शन देकर  कोई छोटी बीमारी नही आ सकती ?
छोटी तो नही पर बड़ी बीमारी आ सकती है.!
 सर मुझे देख मुस्कराते है.
बड़ी .वो सकपका सा जाता है .

 "देखता हूँ. "सर उससे कहते है ,फ़िर बाहर निकल आते है.
ऐसा करो शाम को बुन्दु को यहाँ शिफ्ट कर देना . रात भर रखना .सुबह ६ बजे ,वापस वार्ड में ले आना .पर ध्यान से .
मै समझ गया हूँ.


रात ११.३० बजे
होस्टल की लोबी में मेरे लिए फोन है ..सिस्टर है...
अनुराग भाई प्रिस्नर वार्ड से बार बार फोन आ रहा है.
कोई बात नही सिस्टर..आप वार्ड देखो....मै कहता हूँ....नीचे उतर कर कमरे में आता हूँ...नवाबजादे अपने आप अस्पताल छोड़ देंगे

सिगरेट के पैकेट को उठकर  झांकता हूँ   आखिरी सिगरेट है . जग्गू दा  को देर रात शिरकत करने के लिए टेप  ऑन करता हूँ  सिगरेट सुलगाकर बौल्कोनी  में खड़ा  हो जाता हूँ . पैकेट को फेंकने से पहले उस पर लिखे शेर को पढता हूँ जो जाने किस मूड में लिखा था

 " कुछ ग़म भी चाहिये, कुछ गिले भी, कुछ शिकवे भी
खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता"

37 टिप्‍पणियां:

  1. अनुराग भाई, प्रबन्धन के बिना कहीं काम नहीं चलता।

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  2. सही कहा..

    खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता

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  3. कुछ ग़म भी चाहिये, कुछ गिले भी, कुछ शिकवे भी
    खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता

    सही बात इसी का नाम जिंदगी है ...अनुभव जिंदगी के यूँ ही किस्से बन कर दिल पर दस्तक दे जाते हैं तभी दिल की बात कहलाते हैं

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  4. कितनी-कितनी यादें समोए बैठे हैं, सर...बहुत बढ़िया पोस्ट है. और हाँ...

    खुशियों से भरा रहे दिल तो दिल नहीं रहता...बिल्कुल सच है.

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  5. लगता है डायरी के पन्ने खोले गए हैं ! और पन्ने पलटिये.

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. वर्षाबेनों के कारण यह देश मानसिक संक्रामक रोग ग्रस्त है जी!

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  8. वर्षा बेन जैसे किरदार आज कल कुछ ज़्यादा दिख जाते है..
    वैसे आपकी यादो की दराज में ना जाने कितने ख़ज़ाने भरे पड़े है.. एक और उम्दा पोस्ट

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  9. आपकी कलम है या वीडिओ कैमरा। ग़जब की रिकॉर्डिंग करते हैं भाई। …मुझे अपने साले की MBBS और MD(madicine) की पढ़ाई के दौरान KGMC, GSVM और आगरा मेडिकल कॉलेज़ के हॉस्टल में रुकने का मौका मिला था। बिल्कुल वैसा ही माहौल रहता है जैसा आपने चित्रित किया है। उम्दा लेखन…

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  10. यादो की डायरी के पन्ने खोले गए हैं,उम्दा पोस्ट उम्दा लेखन.......

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  11. ह्म्म ! लगा जैसे कोई उत्तर आधुनिक हिन्दी कहानी पढ रही हूँ जो सच्चाइयों ,अनुभवों कल्पना और अब्सर्ड के माध्यम से उलझे समय और उलझे मनों को कह जाती है । एक डॉक्टर की कलम से निकला एक अच्छा अंश !!

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  12. अच्छा लगा आपकी दिनचर्या पर एक दिन का अंश-बहुत रोचकता के साथ लिखा है:


    कुछ ग़म भी चाहिये, कुछ गिले भी, कुछ शिकवे भी
    खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता


    -बिल्कुल सही.

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  13. पोस्ट नही है... जिन्दगी का अनुभव है... २००० का अनुभव आज भी तरोराजा है... आज भी वर्षा बेन कही न कही violet लिपस्टिक लगा कर आती जाती होंगी.... देश के पता नही कितने हस्पतालों में वही रईस जादा प्रिसोनर वर्ड में पड़ा होगा... कुछ भी बदला.... कब बदलेगा..?

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  14. hosp aur hostel kabhi nahi sota :) sahi:),seems every govt hosp such kinda incident happen,nice reading about it.and every HOD knows how to handle them:),aakhari sher dil ko chu gaua,bahut badhai

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  15. किस्सा बहुत ही मज़ेदार रहा… मन हो रहा है कि गुलज़ार स्टाईल में एक एपिसोड बनाऊँ इसपर…
    "खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता"

    बहुत खूब।
    शुभम।

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  16. ye to tay hai ki hospital mein kaam karte hue aap ko jaane kitni tarah ke logon se milna rahta hai...
    lekin har beeti baat ko sil-silewaar yaad rakhna--???!!!!

    taAjub hota hai....

    aap ki yadDasht wakayee gazab ki hai!

    Ye beeti baaten-- ek kahani si hi lag rahi hain..

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  17. ग़ज़्ज़ब की पोस्ट !
    लोग तो इतना कह चुके कि ...मैंणूँ इन्नाई कैंदा के ' तुस्सी
    तबियत खुस कित्ता !' चंगी पोस्ट !

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  18. pehlo to post ki lambai dekh kar dar gaya...socha baad mein aaram se padhunga...par raha nahi gaya...aur shuru kiya to bas...padhte hi gaya...

    aap hamesha hi avval, sir g...

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  19. बहुत खूब। ऐसा लगा जैसे अनुराग जी की जिंदगी हमें कही राह चलते मिली और हम उसे देख रहे है। इस जिंदगी और भी पन्ने खोलिऐ हमें इंतजार है।

    कुछ ग़म भी चाहिये, कुछ गिले भी, कुछ शिकवे भी
    खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता

    बिल्कुल सोलह आने सच कह दिया।

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  20. आपने अपने संस्मरण को बढ़िया विस्तार दिया है - बिलकुल फ़िल्मी पटकथा की तरह, चुस्त दुरुस्त.

    बस, एक बात बताएं - सिगरेट का जो पैकेट आपने फेंका, उसका प्रयोग आपने सिर्फ और सिर्फ शेर लिखने के लिए ही किया था ना?

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  21. ऐसा लगता है की आपके के साथ ये सब जैसे कल ही हुआ था..... कोई इतनी सफाई से कैसे सब याद रख सकता है..... आपको कभी तकलीफ़ नही होती इतना सब याद रखके??? अपने इर्द गिर्द इतना दर्द... इतनी जिंदगी को आखरी दम लेते हुए देखकर ...... कही वो तकलीफ़ ही तो आपकी कलाम का रास्ता नही खोज लेती ना? जितनी बार पढ़ते है आपका लिखा..... आँखे नाम कर जाता है....

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  22. hamesha achchaa lagta hai aapko padhkar...
    iss baar bhi lagaa...

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  23. अनुराग जी, बहुत अच्छा लिखा, यूं लग रहा था सामने कोई फिल्म चल रही है। आप पुरानी बातें एकदम साफ-साफ याद कैसे रख लेते हैं।

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  24. खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता

    sahi hai....ek aur panna aapki zindgi ka achcha laga.

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  25. अनुराग जी
    कोई मोटी चमड़ी वाला इंसान चाहे वो कितना बड़ा ही लेखक क्यूँ ना हो आप की शैली में नहीं लिख सकता. इतनी खूबसूरती से आप आपने आस पास का संसार दिखाते हैं की लगता है जैसे ये सब होते सुनते आप के साथ ही देख रहे हैं. भाषा और शिल्प पर आप की पकड़ कमाल की है. मेरी मानिए अपने संस्मरणों की एक किताब लिख डालिए. मूड बनाने के लिए मेरा घर और खोपोली दोनों हाज़िर हैं.
    नीरज

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  26. "अफरा तफरी के इस दौर में मिलना है मुश्किल
    कर लेंगे गुफ्तगुं जिंदगी कही मिल जाये तो सही "

    जब भी आपकी यादों का पिटारा खुलता है शब्दों का एक नायब तोहफा हमें मिल जाता है.... आपकी हर पोस्ट दिल की गहराई तक उतर जाती है.. आपके शब्दों को पढ़ते हुए ऐसे लगता है की जैसे मै भी उसी कहानी का पात्र हू या उसे कही करीब से सच में ही देख रहा हु.. अनुराग जी तुसी ग्रेट हो :-)

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  27. नीरज भाई का सुझाव सही है ,
    इन्हीँ ब्लोग पोस्टोँ से छाँट कर
    और नया जोडकर ,
    किताब शुरु कर ही दीजिये
    अनुराग भाई !
    काम शुरु करते ही ,
    कब पूरा हो जाता है ,
    पता नहीँ चलता !
    - हिन्दी साहीत्य को नया आध्याय मिलेगा -
    और हाँ आपकी चर्चा यहाँ भी हो रही है - देखियेगा --
    www.aparnaonline. org

    -- लावण्या

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  28. Haan zaroor main wahi karti hoon jo kaha aapne kaha.Thank u for ur comments.

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  29. upar sabhi logon ne itna kuch kah diya hai... ke mere paas naya kuch kahne ko nahi bacha... par sujhav bahut acha hai... aapki likhni par pakad aur aur likhe hue ki padhne wale par pakad bahut umda hai...
    kitab likh hee daaliye...:)
    aur haan sahi kaha aapne, hostel aur hospital kabhi nahi sote...

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  30. आप सभी का शुक्रिया .दरअसल इतनी लम्बी पोस्ट को सोच रहा था की पोस्ट करू न करू ?फ़िर कर ही डाला ....असली नाम की जगह कुछ नाम change ....करता जरूर हूँ.....पिछली पोस्ट में भी ऐसा ही था.....ओर मुझे तीन ब्लोग्गर्स के मेल आये है . जो मेरी पोस्ट पढ़ते है ,पर कमेन्ट नही देते है....ये तीनो इत्तेफकान यूरोप में है......ओर तीनो ने देश के अलग अलग होस्टल से engirening की है ओर तीनो अपने होस्टल को रोज याद करते है.....ओर अपनी पुरानी गिर्ल्फ्रेंद को भी....उनका भी शुक्रिया...वे.अगली बार कुछ छोटी पोस्ट डालूँगा ......ओर रही किताब की बात तो यारो कोई छपवाए तो सही.....just joking

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  31. aapko intni vyast schedule ke baad bhi likhne ka time kaise milta hai? achcha laga padh ke.

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  32. कुछ ग़म भी चाहिये, कुछ गिले भी, कुछ शिकवे भी
    खुशियों से भरा रहे दिल, तो दिल सा नही रहता

    wah :)

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  33. Sir, AApka sher apne orkut profile per use kiya hai aapke naam ke saath, ummed hai aapko bura nahi lagega.

    Waise bahut hi accha likhte hain aap.

    Ankit

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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