2008-08-10

रेड लाइट के बहाने कुछ गुफ्तगू ......


स्वर्ग की सड़क है पर कोई उस पर चलना नही चाहता ,नरक का कोई दरवाजा नही है पर लोग उसमे छेद करके घुस जाना चाहते है –
अजात



चौराहे पर रेड लाइट है पर पीछे गाड़ी में बैठे मह्शय को शायद मार्क्सवादी विचारधारा पसंद नही है ( लाल सलाम ) इसलिए लाल रंग देखकर भी वे हार्न दिये जा रहे है …उनके मुताबिक जब ट्रेफिक पुलिस वाला नही है तो मै क्यों खड़ा हूँ ..हार्न लगातार बज रहा है …साइड से वो मेरे पास से मुझे घूरते हुए निकल गए है ….जितनी बड़ी गाड़ी उतना बड़ा गुस्सा ……कोई रुकना नही चाहता है ... ऐसा लगता है पता नही कहाँ जाना है सबको ….जहाँ भी थोडी सी जगह दिखी …निकल लो ….क्रोध गाड़ी का एक्सीलेटर बन गया है ..लोग मोटरसाइकिल ओर ---स्कूटर की पिछली सीट पर क्रोध को बैठा कर बाहर निकलते है …उसकी आदत बिगड़ गई है वो हर जगह साथ चला आता है क्रोध ..अंहकार .. ?दोनों आपस में गुथ गये है ,मिल गये है .इतने की अलग –अलग शक्ल पहचानना मुश्किल है …सड़क पे आप हार्न बजाते है .. ऑफिस में मातहत को धकियाते है ओर ब्लॉग पे ?.किसी ने जरा सी वैचरिक असहमति हमसे दिखायी ….उसके गुण - दोषों पे माइक्रोस्कोप टिका दी …यही व्यक्ति जब आपकी प्रशंसा कर रहा था तब आप इस मुई माइक्रोस्कोप को धूल चटाते है ? हम उन्हें हमेशा सराहते है जो हमें पसंद करते है ..जिन्हें हम सरहाते है उन्हें हमेशा पसंद नही करते ….
एक सज्जन है जिन्होंने "लाफ्टर क्लब "बना रखा है ,वे कही भी मिल जाए आपके जीवन में खुशियों की महत्ता बताने लग जाते है .फ़िर एक फार्म निकालते है सामाजिक कार्यो के लिए आपसे चंदा मांगकर आपको उसका सदस्य बनाते है..सुबह सुबह उनके क्लब के सदस्य कालोनी के पार्क में जोर जोर से हँसते है .वे मुझसे खफा रहते है क्यूंकि कभी कभार मै अपने साडे चार साल के बेटे को पार्क में घुमाने ले जाता हूँ वो उन्हें हँसता देख मुफ्त में हँसता है......उनका बस चले तो खुशी का पेटेंट करा ले ..(जैसे पंडितो ने नर्क का भय दिखकर अपना बिसनेस चला रखा है .-फ़िर अजात )एक ओर मह्श्य है वे हमेशा ही खफा रहते है ,जब विजिलेंस में थे (अच्छी पोस्ट पे )तब इस बात पे खफा रहते थे की लोग काम इतना बड़ा कराते है ओर पैसे कम देते है .. ड्राईवर ओर मातहत को इत्ते जोर से सुबह सुबह डांटते थे की सारी कालोनी सहम जाती थी ...जो पैसे देता था उससे भी खफा जो नही देता उससे भी .....अब रिटायर हो गए है उन्हें सिस्टम से नाराजगी है ..समाज से नाराजगी है समाज भ्रष्ट है ...........क्रोध में पर एक खासियत है ये जाति धर्मं ,उम्र , लिंग - भेद जैसी सामान्य बातो से ऊपर उठ गया है भेदभाव नही करता .. मेरा १४ साल का भतीजा भी इंडियन क्रिकेट टीम से नाराज है
मेरा एक दोस्त कहा करता था की हम सब दौड़ रहे है...रेट रेस यू नो ....जो जितना जोर से दौड़ा उतना बड़ा चूहा ... इस रेस से परेशान भी है ओर इसे जीतना भी चाहते है ...इस भाग दौड़ में हम अपने आप को खो रहे है ....यही मै पिछली पोस्ट में कहना चाहता था .....के .....


साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

51 टिप्‍पणियां:

  1. आपके विचारों से मैं जबरदस्‍त सहमति‍ रखता हूँ। एक-एक बात सोलह आने सच !!

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  2. नारियल वाले से नारियल खरीदी.... दो-दो रूपये के दो... पाँच का सिक्का दिया....तभी उसने एक रूपये के साथ अपने लिए एक गुटखा की पुडिया निकाली फाड़ने को हुआ ही था कि..... मैंने कहा रुको.... ये एक रूपये रख लो लेकिन पुडिया मत खाओ..... उसने थोडी मुस्कुराहट दी और पैसे रख कर कहा अच्छा..... मैं जानता हू वो पुडिया खायेगा लेकिन फ़िर भी......

    साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

    ग़लत नही है लेकिन यह ग़लत तब हो जाएगा जब आप बहार भी ऐसे ही रिश्ते बनाते चले

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  3. साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

    वाह वाह साहब! बहुत खूब कहा!

    बेशक हमारे अंदर शायद यही कमी है कि हम खुद को बदलने में तो कतराते हैं मगर समाज और व्यवस्था को बदलने की ज़बरदस्त वकालत करते हैं!
    पर कोई बात नहीं, समय बदल रहा है ... बदलाव अवश्य आएगा!

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  4. अनुराग जी हम तो भाई हमेशा खुश रहते हे आप से ,ओर सभी से, ओर लाल बत्ती होने से पहले ही रुक जाते हे, ओर हरी होने पर ही चलते हे,मजा आ गया ,धन्यवाद

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  5. itni goodh baate aap itne saral shabdo mein likh dete hai ki seedhe seedhe jehan mein utar jati hai..

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  6. सबसे ज्यादा बुरा तबही लगता है कि रेडलाइट देख करके कोई हॉर्न बजाए। दूसरा कुछ खूसट ऐसे होते हैं जो आपके घऱ से निकलने को भी पेटेंट करवा दें।
    बढ़िया और सटीक लिखा है।

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  7. बहुत सटीक बात कही है अनुराग भाई आपने. आपकी पोस्ट ने साबित कर लिया की गुसा आज सबके साथ साए की तरह चल रहा है. कोई भी किसी से खुश नही है. बढ़िया पोस्ट के लिए धन्यवाद

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  8. बहुत ही सरल सुंदर शब्दों में एक दम खरी खरी बातें कह गए.बिल्कुल सहमत हैं आपसे.बहुत ही अच्छा लिखा है.

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  9. ...........क्रोध में पर एक खासियत है ये जाति धर्मं ,उम्र , लिंग - भेद जैसी सामान्य बातो से ऊपर उठ गया है भेदभाव नही करता .....
    इस जुमले को पढ़कर मन मे एक ख्याल उठा कि फिर तो क्रोध करने वाले से हमे नाराज़ नही होना चाहिए...

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  10. bahut sachha aaina dikhati rachna
    aur ek sahi baat batati hui
    ki krodh hamesha hi kuch sikha jata hai
    kayi baar krodhit vayakti ko samjhne main hum bhul kar jate hain
    magar unka gussa kadhwahat bahut kuch sikha deti hai

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  11. अनुराग जी
    बहुत "सत्य वचन" कहने लायक पोस्ट लिखी है आपने. आज की आपाधापी के युग में किसी के मन में संतोष नहीं है...मंजिल नहीं है...सिर्फ़ रास्ता है....और रास्ता सिर्फ़ तनाव ही देता है...
    हमारी विचार धारा बीमार है, हमें अपनी ही सुरक्षा के लिए एक व्यक्ति लाल बत्ती पर खड़ा मिलना चाहिए...जो हमें रोके और हमारी जान बचाए जैसे हमारी जान बचाना उसकी जिम्मेवारी हो...मुझे याद है जर्मनी में रात तीन बजे कड़कती ठंठ में मुझे एयरपोर्ट जाना था...रास्ते में सुनसान सड़क पर लाल लाईट पर मेरा टैक्सी वाला अकेला खड़ा रहा...जब की उसे मालूम था की इस समय कोई भी कहीं से नहीं आने वाला है...लेकिन ये बात शायद उसको बचपन से ही सिखा दी गयी होगी की लाल लाईट का मतलब रुकना होता है...ये ही अन्तर होता है सोच का.
    नीरज

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  12. मेरा एक दोस्त कहा करता था की हम सब दौड़ रहे है...रेट रेस यू नो ....जो जितना जोर से दौड़ा उतना बड़ा चूहा ... इस रेस से परेशान भी है ओर इसे जीतना भी चाहते है ...इस भाग दौड़ में हम अपने आप को खो
    अच्छा और प्रभावी लिखा है। बधाई स्वीकारें.

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  13. गुस्सा ही लोग ओढ़ रहे हैं. गुस्सा ही बिछा रहे हैं...सहमति न बनने की हालत में भी तरीका ढूंढ लेते हैं गुस्सा निकालने का..

    बहुत शानदार पोस्ट है अनुराग जी.

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  14. साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

    सचमुच कितनी दूर है गए हैं हम जिन्दगी से, क्यों सब इतने खफा-खफा से दिखते हैं।

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  15. तब इस बात पे खफा रहते थे की लोग काम इतना बड़ा कराते है ओर पैसे कम देते है .. ड्राईवर ओर मातहत को इत्ते जोर से सुबह सुबह डांटते थे की सारी कालोनी सहम जाती थी ...जो पैसे देता था उससे भी खफा जो नही देता उससे भी .....अब रिटायर हो गए है उन्हें सिस्टम से नाराजगी है ..समाज से नाराजगी है समाज भ्रष्ट है ...........क्रोध में पर एक खासियत है ये जाति धर्मं ,उम्र , लिंग - भेद जैसी सामान्य बातो से ऊपर उठ गया है भेदभाव नही करता .. मेरा १४ साल का भतीजा भी इंडियन क्रिकेट टीम से नाराज है

    bhai itna karibi agar hai koi to nuks dekhne ki adat is umr men to aap bhi na dalo.....
    ek din hum retire ho na ho kar to diye hi jayemge naa........

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  16. स्वर्ग की सड़क है पर कोई उस पर चलना नही चाहता ,नरक का कोई दरवाजा नही है पर लोग उसमे छेद करके घुस जाना चाहते है –
    अजात

    jisne bhi kahi aap bhali dhoondhe ho so badhaai

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  17. पता नही अनुराग जी आजकल जिदंग़ी में ये निगेटिव चीजें क्यों आने लगी हैं। जिसे देखो वही भिनभिना रहा हैं।
    साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

    बहुत खूब।

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  18. जो जितना जोर से दौड़ा उतना बड़ा चूहा ... इस रेस से परेशान भी है ओर इसे जीतना भी चाहते है ...इस भाग दौड़ में हम अपने आप को खो रहे है साँस लेते है बिजली के तारो पे अबरिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है ..बहुत सहज शब्दों में बहुत गहरी बात कह दी आपने ..हर कोई ख़ुद को ही जायदा परेशान और तनहा समझता है ..

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  19. साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

    -वाह!! बड़ी गहरी बात कह गये इन पँक्तियों में आप. गजब भाई.

    कभी बड़ी कोफ्त होती है इस तरह. मगर करिये क्या?

    कभी यूँ ही लिखा था:

    http://udantashtari.blogspot.com/2007/11/blog-post_06.html

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  20. बहुत बढ़ि‍या लि‍खा है।
    - आनंद

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  21. साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है
    :
    aur un rishto ka kya hoga??
    :)

    उत्तर देंहटाएं
  22. .

    सच तो है, डाक्टर अनुराग..
    तकनीक से दुनिया तो सिमट रही है,
    लेकिन आदमी इस कदर एक दूसरे से दूर होता जा रहा है,कि..
    किसी की नेह भरी पाती अब एक सपने सरीखा है ।
    हर कोई अपने में ही इतराता फिरता है, शुक्र है, कि..
    " मुझसे अच्छा कौन है... " अभी हमारा प्रार्थना गीत नहीं बन पाया !

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  23. बहुत बढिया वचन हैं ! अगर हमारे यहाँ लाल बत्ती
    का पालन नियम से करो तो पीछे वाला गाडी
    चढ़ा देगा .. इस अंदाज में घूरता है ! क्या करे ?
    आपने पते की बात लिखी है !
    गुरुवर ने लिखा है :-
    "किसी की नेह भरी पाती अब एक सपने सरीखा है ।"
    तो गुरुवर इस कंप्यूटर ने वाकई ऐसा उलझाया है
    की आप की और अनुराग जी बात सोलह आने
    सच है ! रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

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  24. डॉक्टर साहब, मान गये कि नब्ज़ पकड़ना आप बखूबी जानते हैं। समाज में विचरण करते प्राणियों की जो डाइग्नॉसिस आप कर रहे हैं वह क़ाबिले-तारीफ़ है।

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  25. नब्ज़ पकड़ना कोई डॉ. से सीखे :)
    सही कह रहे हो ..

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  26. roz chauraho par horn sunta hun kai baar khud bhi bajaata hun,gussa sunte aur bajaate dono samay aata hai,lekin ab gussa nahi aap yaad aayenge.badhiya likha badhai

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  27. roz chauraho par horn sunta hun kai baar khud bhi bajaata hun,gussa sunte aur bajaate dono samay aata hai,lekin ab gussa nahi aap yaad aayenge.badhiya likha badhai

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  28. सब्र??? किस चिडिया का नाम है भाई??? पहले कभी कभी दिख जाती थी... अब सब्र किया तो लल्लू, चिम्पू कहाओगे.... किसने कहा ट्राफिक नियम पालने को... पहले अपना देखो फिर देश का सोचो.. अगर जरूरी नहीं है तो कार में हार्न है ही क्यों???
    अरे यह सब तो मैं उन सज्जन की तरफ़ से कह रही हूँ जो आपको हार्न देते है!!!
    बहुत सही बातें लिख दी आपने.. बस अपने को सुधरने की जरूरत है. बाकी सब सुधर जाएगा.

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  29. सही कहा आपने.
    सुंदर विश्लेषण.
    पढ़ कर लगा हर परिस्थिति में आपके सामने मैं ही हूँ.
    आइना दिखलाती एक जबरदस्त पोस्ट.
    आभार.

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  30. हमारी आज कि सब से बड़ी प्रॉब्लम यही है अनुराग जी कि हम बिना किसी तरफ़ देखे बस दौडे जारहे हैं, रिश्ते अब रिश्ते नही रह गए हैं, अजीब दौर है जब एक रिश्तेदार दूसरे से बरसों गुज़र जाते हैं, मिल नही पता क्योंकि किसी के पास इन फजूलियात के लिए टाइम नही है. बस यही सोच कि ' अरे सिर्फ़ किसी से मिलने के लिए इतना टाइम बर्बाद क्यों किया जाए, हर रिश्ता ज़रूरत का रिश्ता बन चुका है.
    ये तरक्की का दौर है, सब कुछ होते हुए भी जिस में कोई मुतमईन नही है. अब छोटी छोटी खुशियों पर कोई मुस्कुराता नही, हम और, और की लगन में हाथ आई खुशियों से भी हाथ धो बैठते हैं. काश हम समझ पाते कि जो अभी है, जितना है, वही सब कुछ है. तो मुस्कुराहटों के लिए तरसना न पड़ता.

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  31. स्वर्ग की सड़क है पर कोई उस पर चलना नही चाहता ,नरक का कोई दरवाजा नही है पर लोग उसमे छेद करके घुस जाना चाहते है –
    'Kitna sach hai, sub jantey hain magar semejty nahee hain" a wonderful sharing..

    Regards

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  32. साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है
    शानदार लाइनें.
    अच्छी और सार्थक पोस्ट लिखने के लिए बधाई

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  33. अनुराग भाई, सही कहा आपने.. अपने देश मे हर कोई जल्दी मे है (फिर भी हर जगह देर से पहुँचना तो हमारा fashion है)| हम शायद अपने देश पर और दुसरे कारणो से गौरवान्वित हो (हलाँकि बाहर रहकर मुझे एहसास होता है कि हमे कितना झूठा दंभ भी है) पर कई ऐसी आदते हम भारतीय लोगो मे है जिससे अगर बाहर की दुनिया हमे गैर जिम्मेवार और असभ्य मानती है तो अतिश्योक्ती भी नही है| यहाँ अमेरिका मे अगर एक बात जो देखने और सीखने को मीलती है वो यहाँ के लोगो का अनुशासन और gentleman attitude है| दिन हो या रात, शहर हो या दुर बीरने का एक चौक, मजाल है कोई भी व्यक्ती (99% तो जरुर ही) traffic signal को तोड कर निकल जाये भले ही रास्ता बिल्कुल सुनसान हो| चाहे कितनी भी जल्दी और सामने भीड हो, honking को यहाँ असभ्यता की नजर से देखा जाता है और यह सब किसी traffic police के डर से नही बल्की उनके रगो मे शुमार है कि कोई सार्वजनिक नियम है तो उसका पालन सभी को करना है| पता नही हम भारतीय कब सुधरेंगे| एक ऐसे ही नमुने के तौर पर अपने traffic का उदाहरहन यहाँ देखीये..

    http://www.youtube.com/watch?v=RjrEQaG5jPM

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  34. साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है

    बहुत खूब

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  35. साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है.
    जबरदस्त पोस्ट.

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  36. कुछ तो चुप्पी पे भी छोड़नी चाहियें
    सारी बातें नहीं बोलनी चाहियें

    -www.chiragjain.com

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  37. ganimat hai,kahin to rishtey bante hain,adhe adhoore,kabhi mukammal bhi par unka wajood hai to sahi.
    agar net par bhi rishtey na bante to jis tarah vaqt ki mara mari me ham bhag rahe hain...behad tanha ho jaate.koi to bandhan hai jo jodta hai logon ko...its the silver line in the dark cloud

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  38. पूजा जी की टिप्पणी के साथ सहमती रखता हूँ! मेरा भी विचार यही है वास्तविकता से अधिक आजकल लोग वर्चुअल रिलेशन की ओर अग्रसर हैं!

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  39. बेहद विचारणीय पोस्ट, खुशी के लम्हे भी अब खरीदने पडते हैं, क्या कहा जाय.......अच्छा लगा, बहूत खूब।

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  40. सच ही तो है रिश्ते आजकल कम्प्यूटर पर ही बनते हैं

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  41. सत्य वचन! रौशनी फैलाते रहिये!

    मस्त रहो, आजाद रहो
    मेरठ रहो, अमदाबाद रहो!

    ~एक अनुराग से दूसरे अनुराग तक सानुराग!

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  42. दिल की बात दिल से कही गई,बहुत अच्छा लगा पढ़ कर...

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  43. BHAI HORN NAHI BAJAYENGE TO SAMNE WALE KO PATA KAISE CHALEGA KI UNHE BHI GADI CHALANI AATI HAI.......AUR FIR BHALA HORN BANA HI KYON HAI...SO BAJAYE JAO..CHAHE BATTI LAAL HO YA HARI...BHAI BANDAR KE HAATH ME HORN JAYEGA TO YAHI HOGA NAA....


    BAKI RAHI RAT RACE KI BAAT..TO WO TO SOLAH AANE SACH HAI..

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  44. आप सभी लोगो का ढेरो शुक्रिया.....

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  45. "साँस लेते है बिजली के तारो पे अब
    रिश्ते कंप्यूटर के परदो पे बनते है"

    Sachchai hai... lekin kuchh parde waale rishte jeevan ka hissa bante ja rahe hain !

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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