2008-10-09

ये भी क्या कम इत्तेफाक हुआ है मेरे साथ ,हर शै मिल जाती है इत्तेफाक़न वो नही मिलता

वक़्त
के मोडो पर
कई बार
बेसबब ही रुका हूँ
ये सोचकर
क़ी शायद
मिल जायोगी तुम कही.....


तुम्हारे शहर के एरपोर्ट से जब भी गुज़रता हूँ
वेटिंग लाउंज मे ,बाहर चेहरो क़ी भीड़ को
देख कर सोचता हूँ
गर
तुम किसी को छोड़ने आ जाओ ……..

बीच शहर क़ी दुकानो पर झाँकते हुए गुज़रता हूँ
कि
शायद किसी गोल्गप्पे क़ी दुकान पर
'खट्टा मीठा पानी"पीती हुई तुम दिख जाओ
या सड़क किनारे किसी मेहंदी वाले से
किसी नये डिजाईन मे उलझी हुई….
या किसी होटेल के वेटर से "रेसीपी "पूछती हुई

क्या अब भी बारिशो मे
मोटरसाइकल के पीछे बैठकर शोर मचाती होगी तुम!
क्या अब भी सर्दियों में
काँपते हुए आइसक्रीम खाती होगी तुम !
क्या अब भी सिगरेट छीनकर
लंबे लंबे कश लेकर खांसती होगी तुम !
क्या अब भी
खुले बालो मे अच्छी दिखती होगी तुम!
कैसी होगी तुम?
साड़ी पहनने का बहाना ढूँढती थी उन दिनो,
तब ब्लेक साड़ी फ़ेवरेट थी तुम्हारी.......
आजकल मेरी है!
कभी किसी को छोड़ने आ जाओ ........













सिगरेट की डब्बी पर लिखे गये कुछ बेतरतीब से लफ्ज़ .....................कई बार ये सोचकर ही लिख लेता हूँ कि शायद पढ़ लोगी तुम कही ?

58 टिप्‍पणियां:

  1. क्या है भई । बहुत खूब । अच्छा लगा

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  2. aapki ye kavita hamesha se meri favorite rahi hai. ittefakan aaj maine bhi kuch isi mood me likha hai :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. खुले बालो मे अच्छी दिखती होगी तुम!
    कैसी होगी तुम?
    साड़ी पहनने का बहाना ढूँढती थी उन दिनो,
    तब ब्लेक साड़ी फ़ेवरेट थी तुम्हारी.......
    आजकल मेरी है!
    कभी किसी को छोड़ने आ जाओ ........
    " aapke ye kaveeta maine to pehle baar hee pdhee hai, kise ke intjar se sarabor, kise ko neegahen hr jgeh hr baat mey talash kertee huee, uskee hr baat ko yad kertey, dil khol kr rkh diya jaise...,felt very emotional and touching.."

    regards

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  4. अरसे बाद इतनी खूबसूरत नज़्म पोस्ट की है अनुराग जी, बहुत शिद्दत से इंतज़ार था ऐसी नज़्म का, बहरहाल मेरी ख्वाहिश पूरी करने का बेहद शुक्रिया...एक बात पूछूं?
    वो कौन थी?

    उत्तर देंहटाएं
  5. 'खट्टा मीठा पानी"पीती हुई तुम दिख जाओ
    या सड़क किनारे किसी मेहंदी वाले से
    किसी नये डिजाईन मे उलझी हुई….
    या किसी होटेल के वेटर से "रेसीपी "पूछती हुई

    सच,काफी सटीक ऑब्जवेर्शन है आपका। लगता ही नहीं कि ये आपने सिर्फ लिखने के लिए लिखा है बल्कि लगता है किसी को पढ़वाने के लिए लिखा है....जो भी हो खूबसूरत है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. वक़्त
    के मोडो पर
    कई बार
    बेसबब ही रुका हूँ
    ये सोचकर
    क़ी शायद
    मिल जायोगी तुम कही...

    अच्छी तहरीर है... अच्छा लगता है आपके ब्लॉग पर आकर...

    उत्तर देंहटाएं
  7. क्या अब भी बारिशो मे
    मोटरसाइकल के पीछे बैठकर शोर मचाती होगी तुम!
    क्या अब भी सर्दियों में
    काँपते हुए आइसक्रीम खाती होगी तुम !
    bahut sundar sir....

    Aapki triveniyo ka bada mureed hu mai.. kabhi likhiye na

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  8. बहुत सुंदर, अनुराग जी...
    इस तरह की कवितायें मुझे बहुत पसंद हैं...
    पढ़कर दिल में एक मीठा सा दर्द हुआ...
    जारी रहे...

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  9. कई बार ये सोचकर ही लिख लेता हूँ कि शायद पढ़ लोगी तुम कही ?

    -वाह!! अद्भुत!!

    एक मीठी सी कशिश!!

    यह पेन्टिंग भी क्या आपने बनाई है, अनुराग भाई?? बहुत बढ़िया लगी.

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  10. वक़्त
    के मोडो पर
    कई बार
    बेसबब ही रुका हूँ
    ये सोचकर
    कि शायद
    मिल जायोगी तुम कही.....

    बहुत खूब ...

    बरस के यादों ने
    आज फ़िर ...
    दिल की जमीन को
    कर दिया गिला ...
    पर इतेफाक भी
    कहीं रोज़ रोज़ होते हैं :)

    सवाल वही कि कौन है यह :)

    उत्तर देंहटाएं
  11. क्या अब भी बारिशो मे
    मोटरसाइकल के पीछे बैठकर शोर मचाती होगी तुम!
    क्या अब भी सर्दियों में
    काँपते हुए आइसक्रीम खाती होगी तुम !
    क्या अब भी सिगरेट छीनकर
    लंबे लंबे कश लेकर खांसती होगी तुम !
    क्या अब भी
    खुले बालो मे अच्छी दिखती होगी तुम!
    कैसी होगी तुम?
    साड़ी पहनने का बहाना ढूँढती थी उन दिनो,
    तब ब्लेक साड़ी फ़ेवरेट थी तुम्हारी.......
    आजकल मेरी है!
    कभी किसी को छोड़ने आ जाओ ........
    वाह! वाह! क्या बात है. सुंदर कल्पना.

    उत्तर देंहटाएं
  12. क्या अब भी सिगरेट छीनकर
    लंबे लंबे कश लेकर खांसती होगी तुम !
    क्या अब भी
    खुले बालो मे अच्छी दिखती होगी तुम!
    कैसी होगी तुम?

    किसको संबोधित है ये बेहतरीन रचना सर जी ?
    पेंटिंग का तादाम्य इसके साथ गजब का है !
    शुभकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  13. वाह...
    छूटती नहीं कम्बख्त दिल से लगी हुई
    आपके इन बेतरतीब शब्दों ने हमारे भी राख के ढेर छेड़ दिये
    यादों के गलियारों में विचरता मन तपन महसूस रहा है

    उत्तर देंहटाएं
  14. क्या अब भी बारिशो मे
    मोटरसाइकल के पीछे बैठकर शोर मचाती होगी तुम!
    क्या अब भी सर्दियों में
    काँपते हुए आइसक्रीम खाती होगी तुम !
    क्या अब भी सिगरेट छीनकर
    लंबे लंबे कश लेकर खांसती होगी तुम !
    क्या अब भी
    खुले बालो मे अच्छी दिखती होगी तुम!
    कैसी होगी तुम?
    साड़ी पहनने का बहाना ढूँढती थी उन दिनो,
    तब ब्लेक साड़ी फ़ेवरेट थी तुम्हारी.......
    आजकल मेरी है!
    कभी किसी को छोड़ने आ जाओ ........

    डा. साहब, तारीफ के लिए शब्द नहीं मिल रहे.
    आज तो आपने मन चुरा लिया.

    उत्तर देंहटाएं
  15. हुई मुद्दत कि ग़ालिब मर गया पर याद आता है
    वो हरेक बात पे कहना कि यूँ होता तो क्या होता

    ठ्ण्डी आंहो के सिवा कोई कर भी कया सकता है, अनुराग जी, अब भी उन राहो को देखते है जहा से कभी जिन्दगी गुजरती थी....
    धन्यवाद सुन्दर यादो के लिये

    उत्तर देंहटाएं
  16. Wah anuragji, sab kuchh to kah dala. katl bhi kar dete hain is andaz se ki pata bhi nahin chalta, kab jaan leli. bahut romantik kavita.

    उत्तर देंहटाएं
  17. वाह अनुराग जी वाह....सिगरेट की डिब्बी का कितना अच्छा उपयोग करते हें आप...कौन कहता है सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है...ये सब इस पर निर्भर करता है की आप उसका उपयोग कैसे करते हें...बेहतरीन रचना...बेहतरीन याने बहुत ही कमाल की रचना...हमेशा की तरह..
    नीरज

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  18. अब यहाँ से आगे बढ़ने का मन ही नहीं कर रहा, पढ़ लिया अब भक्क बैठा तेरी नज़्म को निहार रहा हूँ, मन ही नहीं भरता !
    खुद को कहीं गुम कर देने वाली नज़्म ।
    एक झप्पी तेरी ड्यू है, याद रखना ।

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत सुंदर..बहुत भावपूर्ण है आपकी कविता..अच्‍छा लगा इन पंक्तियों को पढ़ना ..।

    उत्तर देंहटाएं
  20. ओह अभी तक याद हूँ मैं,
    और वे सब मेरी बातें,
    मैं कई बार गुजरी
    तुम्हारे पास से
    अनेक बार छुआ तुम्हें
    और तुम पहचान नही् पाए
    वक्त ने बहुत बदल दिया है
    मुझे
    बहुत बदल गई हूँ
    तुम तलाशते हो वही चेहरा
    बरसों पहले का
    नहीं कहीं नहीं मिलेगा वह
    मैं कहूँगी कि मैं वही हूँ
    तुम मना कर दोगे कि मैं
    वह हो ही नहीं सकती
    मगर मेरे यह कहने का
    का भी कोई अर्थ नहीं
    वह एहसास जो जिन्दा है
    तुम्हारे अंदर उसे जीने दो
    वह मर गया तो
    तो तुम जी सकोगे
    और न मैं।

    उत्तर देंहटाएं
  21. ऊपर की अंतिम पंक्तियाँ इस तरह पढ़ें....

    मगर मेरे यह कहने का
    का भी कोई अर्थ नहीं
    वह एहसास जो जिन्दा है
    तुम्हारे अंदर, उसे जीने दो
    वह मर गया तो
    तो न तुम जी सकोगे
    और न मैं।

    उत्तर देंहटाएं
  22. वो कौन थी.........बड़ा जालिम सवाल है !मनोज कुमार की मूवी थी ना इसी नाम से ....
    हमारे यहाँ फोरेंसिक मेडीसिन में कहते थे" लीडिंग कुएस्शन "
    @समीर भाई ......ये पेंटिंग बोले तो उधार ली हुई है ,अपुन की किस्मत में खाली कलम घसीटी है

    उत्तर देंहटाएं
  23. किसी के दिल की आह , किसी के दिल से होती हुई, सुन्दर हाथों से,कलम के जरिये लिख दी गई।
    तब ब्लेक साड़ी फ़ेवरेट थी तुम्हारी.......
    आजकल मेरी है!
    कई बार पढने के बाद भी जी कर रहा है कि कमेंट लिखना छोड कर फिर से पढने लगूँ। इसलिए ....और आखिर मैं पूछूँगा कि वो कौन थी? और हाँ बगैर अनुमति के आपकी पोस्ट सेव कर ली है।

    उत्तर देंहटाएं
  24. एक परछाईं। मीठी सी कशिश। अच्‍छी नज्‍़म! काश वह भी सुन ले....पढ़ ले।....लेकिन अनुराग जी ये है दिल की बात।

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  25. bahut badhiya abhivyakti kisi ko talash karati hui or sath me sundar kavita. bhai apka bhi jabab nahi . dhanyawad.

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  26. प्रेयसी की एक खूबसूरत और दि‍लकश चि‍त्र खि‍चा है आपने, लाजवाब।

    उत्तर देंहटाएं
  27. बीच शहर क़ी दुकानो पर झाँकते हुए गुज़रता हूँ
    कि
    शायद किसी गोल्गप्पे क़ी दुकान पर
    'खट्टा मीठा पानी"पीती हुई तुम दिख जाओ
    या सड़क किनारे किसी मेहंदी वाले से
    किसी नये डिजाईन मे उलझी हुई….
    या किसी होटेल के वेटर से "रेसीपी "पूछती हुई
    wah kitna alladpan,kitani chanchalta jhalakti hai es hasina ki har baat mein,bahut khubsurat chitran doc saab {ya kabhi gujri sachhai:)}sach kya aaj bhi vaisi hi hogi wo,apnibachpan mithas liye:) bahut sundar

    उत्तर देंहटाएं
  28. सौन्दर्यपूर्ण शब्दों से सजी सुंदर कविता के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आपके मेरे ब्लॉग पर पधारने का धन्यबाद कृपया पुन: पधारे मेरी नई रचना मुंबई उनके बाप की पढने हेतु सादर आमंत्रण

    उत्तर देंहटाएं
  29. बहुत सुंदर यादें ! बेहतरीन चित्रण किया है आपने !

    उत्तर देंहटाएं
  30. इंतजार भी कितनी खूबसूरत होती है.. एक ऐसा इंतजार जो कभी लगता है कि खत्म ना ही हो तो अच्छा है..

    उत्तर देंहटाएं
  31. शमा यूँ ही जलती रहे ...
    उजालेँ सुकून देते रहेँ..
    ज़िँदगी चलती रहे...

    उत्तर देंहटाएं
  32. यादें अक्सर यथार्थ से ज्यादा खूबसूरत होती हैं । और हम कितनी सुगमता से उनमें खो जाते हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  33. नमस्कार!

    kya kahna hai.yaadon kee braat.
    ye braat aisi hai k smirtiyon mein hamesha sukhad ehsaas karati hain.

    पढिये: अब पत्रकार निशाने पर , क्लिक कीजिये
    http://hamzabaan.blogspot.com/2008/10/blog-post.html

    उत्तर देंहटाएं
  34. आप लोगों ने मुद्दे की बात तो पकडी ही नहीं, जरा इन लाईनों की ओर देखें -

    शायद किसी गोल्गप्पे क़ी दुकान पर
    'खट्टा मीठा पानी"पीती हुई तुम दिख जाओ

    अगली लाईन शायद अनुरागजी ने Delete कर दी है -
    गोलगप्पे खाने के बाद जब तबीयत खराब हो,
    तो तुम मेरे पास आना प्रिये
    डॉक्टर तो अच्छा हूँ ही,
    मेरी एक कविता तो खाना प्रिये :)

    बस यूँ ही थोडा हल्का-फुल्का लिख दिया है :) नाराज न होना बंधुवर।

    अच्छी कविता लिखी है।

    उत्तर देंहटाएं
  35. मै "जालिम सवाल" तो नही पूछूंगी पर हाँ ये देखकर तसल्ली हुई की कविता ,नज़्म अभी भी आपके आस पास है वरना पिछले कुछ दिनों से लग रहा था की आप ब्लॉग लेखन में वो सब चीजे भूल से रहे है .आपकी त्रिवेनियों का इंतज़ार मुझे भी रोहित की तरह है.कुछ लिख डालिए please .

    उत्तर देंहटाएं
  36. aap kahi maya ki to baat nahi kar rahe the? ..:P . hmmmmm.....izajat wali...

    उत्तर देंहटाएं
  37. क्या बात है... लगता है ब्लैक कलर सभी का फेवरेट होता है!मेरी आज की पोस्ट देखना! लगता है आजकल यादों का मौसम आया हुआ है!:)

    उत्तर देंहटाएं
  38. आप की ये कविता मन को छू गयी. सीधी सादी,मगर भीगी भीगी सी , सुबह की ओस की मानिंद.

    बहर, मात्रा, काफ़िया सब बेकार है इन लफ्ज़ों की ईमानदारी के आगे..

    मैं विवेचना में नही पड़ना चाहता. शायद ये हम में से हर एक के दिल की वेदना के प्रकट अभिव्यक्ति ही है. इसीलिए, खुदाया , इतने सारे कमेंट्स !!!

    आपने देखा , जितने हज़रात, लगभग उतनी ही ख़वातीन..

    हुस्न पत्थरदिल होता है यह सुना था मगर.. यहाँ लगता नहीं.
    हम तो अपनी राय देंगे, जब भी धोका खाएँगे. ( शेर को मरोड़ने के लिए क्षमा)
    फिलहाल ...

    देख तो दिल की जां से उठाता है,
    ये धुआं सा कहा से उठाता है............................

    उत्तर देंहटाएं
  39. इस तरह यादों से जुडी बातों में अजीब कशिश होती हैं, जिसने भी ईमानदारी से इसे छू लिया, कसम से दिल जीत लिया समझो. ये तो यश चोपड़ा के शिफ़ान सीरीज़ की प्रेम तिकोन फिल्मों की भांति है जो उम्र के हर पड़ाव पर अपनी ही लगती है और बार-बार पढ़ने और देखने की इच्छा होती है.

    उत्तर देंहटाएं
  40. यादें हमेशा खुशनुमा होती हैं। और वे अगर दिल के किसी खास हिस्से में रची बसी हों, तो अक्सर कविता बन जाती हैं।
    बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  41. निगाहें तो अपनी भी ढूढती है उसे बिल्कुल इसी अंदाज में, पर दिखी ही नहीं कभी. सुनहरी मीठी यादें है मालिक... मत छेडिये.

    उत्तर देंहटाएं
  42. आप सभी का शुक्रिया.......
    बेतरतीब से लफ्ज़ .....सबको अपने से लगे ,समीर यादव ,दिलीप ने जो व्याख्या की.....शायद मै भी नही कर पाता....
    @पल्लवी -
    व्हाइट भी मेरा फेवरेट है....ठीक यश चोपडा मार्का ....
    एक बार फ़िर तहे दिल से सबका शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  43. मुस्कुराने का दिल किया

    अर्ज किया है
    बैठे रहे रोजन पर देर तक आज
    न जाने किसका इंतज़ार था
    वाकई बहुत सुंदर कविता है

    उत्तर देंहटाएं
  44. आज पहली बार आपकी ऐसी कविता पढ़ रही हूं, आपकी लेखनी की तो मैं कायल हूं, पर आज अपनी यादों और भावनाओं को जैसे आपने लफ्ज दिए हैं, कहना पड़ेगा कि आज तो शायर डाक्टर पर हावी हो ही गया।

    उत्तर देंहटाएं
  45. har shey mil jaati hai ittefaqan wo nahi milta....awesum :)

    pata nahi ye kavita ittefaaq se likhhi hai apne ya phir....
    par agar ittefaqan aap itna achha likhte hain un baaton ko jo kabhi hui hi na hon...tou phir sach ko kis khoobsoorti se likhte honge aap......

    उत्तर देंहटाएं
  46. aap ki kavita behad khubsurat hai--aisa lagta hai ki bhaav kahin mel khate hain--ha ha ha!ye to kayeeYon ke dil ki baat hogi-
    -aap ki sabhi rachnayen padhungi ek ek kar ke-

    -haan i too miss everyone here-un sabhi ko khaas kar jo bahut apne se lagne lagey they--with Warm wishes and Diwali ki shubhkamnaOn sahit--Alpana

    उत्तर देंहटाएं
  47. Bahut khoob Anurag ji, behatar chitran kiya hai sunahri yadon ka...asal me shabd shilpiyon ka jeevan sach mein rochak hai.dil ki baat hontho par na aaye to kalm se ris jati hai...sunder kavita ke liye sadhuvad.
    Shashi Purohit, Manali

    उत्तर देंहटाएं
  48. Hello Anurag ji,
    We dont know each other. I found your blog in some random search on Meerut. I belong to Meerut too.. Started reading your blog.. its so enderaign and heartening. I adore your writing style.. So many times your post leave us lost in thoughts.. Like this one.. It reminds me of my own affair.. We all have life where we leave so much behind us.. Your post just brings us back to our lost past.

    Sneha

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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