एक ओर रात अपने हिसाब से घटायी होगी ......


सुबह तकरीबन साढे सात का वक़्त है ...शहर का ये छोर इस वक़्त मसरूफ रहता है ... पाँच सौ मीटर या एक किलोमीटर के उस दायरे में तीन-चार बड़े बड़े पबिलिक स्कूल है , वही एक सड़क पर -बड़ी -छोटी कई किस्मों की गाडिया ...कही ड्राईवर का खिड़की से झांकता उनीदा चेहरा ..कही ट्रेक सूट में बेटे के बालो को तरतीब से लगाता बाप .....कही स्कूल के गेट पर किन्ही नन्हे कदमो का दूर तक पीछा करती किसी मां की नजरे ...स्कूल बस से उतरते बच्चो का शोर .....इन सबके बीच सड़क के उस पार ...तमाम भीड़ से गुजरती एक साइकिल ...उसके डंडे पर बनी एक छोटी सी गद्दी पर दो चुटिया ओर आँखों में काजल लगाये.....वो बच्ची साइकिल के कोने पर लगी घंटी को जोर से बजाती है ...फ़िर सर उठाकर अपने कंधे पर उसका स्कूली बस्ता टाँगे उसके पिता को मुस्करा कर देखती है.....उसका पिता उसके कान में कुछ कहता है...फ़िर घंटी को बजाता है....
बड़ी बड़ी गाडियों के इंजन ओर हार्न के बीच उस घंटी की आवाज ........जैसे जिंदगी अपनी शिनाख्त करती है !












एक बूढे नायक के पेट दर्द की मेडिकल रिपोर्ट मीडिया देश को हर घंटे ख़बर दे रहा है .. इस दौरान सौ करोड़ की इस आबादी वाले उस देश में जिसमे अभी अभी परमाणु करार पर हस्ताक्षर अधिक्रत रूप से हो गये है ....७० फीट गहरे बोरवेल में गिरे दो साल का वो नन्हा बच्चा जिंदगी से अपनी जंग हार गया है .....

53 टिप्पणियाँ:

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…
यह पोस्ट ब्लॉग व्यवस्थापक के द्वारा निकाल दी गई है.
Shiv Kumar Mishra ने कहा…

बहुत शानदार!
आपकी जैसी आँखें भगवान सबको दें.

swati ने कहा…

बहुत ही भावपूर्ण लगा आपका ये आलेख....एक मीठी सी अनुभूति लिए हुए , सत्य का अस्तित्व संजोये हुए ,पूर्ण रूप से जीवंत

विनय ने कहा…

la-jawaab shabd chitr kheencha hai, bhai maan gaye!

Deepak Bhanre ने कहा…

डॉ. साहब इस शोर शराबे की दुनिया मैं बड़ी संजीदगी से आसपास की हर छोटी बड़ी घटनाओं पर ध्यान रखते हो .
अच्छा है .

COMMON MAN ने कहा…

aap vaastav me ek chikitsak hain

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

और ज़िन्दगी यूँ ही चलती रहती है .पर इस नजर से परखने की नजर बहुत कम लोगों के पास है ..आप उन में से एक हैं

मनुज मेहता ने कहा…

वह डॉ अनुराग, बहुत खूब लिखा है. बहुत ही भावपूर्ण रचना, सच में दिल फिर एक बार भारी कर दिया आपने. बहुत ही कम शब्दों में इतनी बड़ी बात, मेरी बधाई स्वीकारें.

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत बढिया! बहुत भावापूर्ण पोस्ट लिखी है।बधाई।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

आप जितनी संजीदगी से जिन्दगी को देख लेते हैं ऐसा बहुत कम लोगो के साथ होता है ! बहुत भावनात्मक लेख ! शुभकामनाएं !

seema gupta ने कहा…

"nice artical to express real life with human thoughts"

regards

मीत ने कहा…

शायद यही तो आज का सत्य है...
सुंदर लेख के लिए... बधाई

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अनुराग जी काश मेरे पास शब्द होते अपने भाव प्रदर्शित करने को....नहीं हैं , इसलिए "अद्भुत" से काम चला रहा हूँ. लिखते रहा करें...ऐसे ही.
नीरज

रंजना ने कहा…

वाह......और क्या कहूँ..ऐसे ही बने रहें सदा.

शोभा ने कहा…

बहुत सुंदर. आपकी तीक्ष्ण दृष्हती बहुत कुछ देखती है. मुबारक.

ranjan ने कहा…

bahut aachchaa..

समीर यादव ने कहा…

डॉ अनुराग, ये तो कमाल है. आप अपने फ़न के माहिर हैं. दिल के ऑपरेशन में कोई चूक होनी भी नहीं चाहिए. भाव और अभिव्यक्ति के मेल से जो अद्भुत रचना रची जाती है, उसके भावी उद्धरण होगी आपकी रचनाएँ. मूल रचना को बॉक्स के समाचार ने और प्रभावी कर दिया. अनवरत रहें.

अभिषेक ओझा ने कहा…

कैसे कहा जाय की वही बात है जो रोज दिखती है... देखने का वो नजरिया कहाँ !

और मीडिया का तो धंधा है !

ravindra vyas ने कहा…

भावुक करने वाली पोस्ट।

neelima ने कहा…

Ek bar fir salam aapko dr sahab.
जैसे जिंदगी अपनी शिनाख्त करती है !
You are master of word.i am speechless again.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

बहुत कुछ कह गए आप के ये शब्द चित्र।

रौशन ने कहा…

बहुत खूब
पर सोनू के बारे में पढ़ कर दुःख हुआ

mehek ने कहा…

bahut bhavpurn lekh sahi zindagi ke na jane kitne pehlu hote hai,mahanayak ka dard jyada important haikisi nanhe bachhe ki zindagani se

डॉ .अनुराग ने कहा…

ऑस्ट्रेलिया से मेरा ब्लॉग नियमित पढने वाली ( पर कभी कमेन्ट न करने वाली ) डॉ बरखा मुझसे पूछती है की मैंने इस पोस्ट को ये शीर्षक क्यों दिया ?दरअसल कभी एक शेर लिखा था ..ये शीर्षक उसी से लिया है..

"एक ओर रात अपने हिसाब से घटायी होगी
आसमान ओढ़कर जमीन फ़िर किसी ने बिछायी होगी"

ये उसी से लिया गया है...पोस्ट से क्या ताल्लुक है.....आप जोड़ कर देखे

Gyandutt Pandey ने कहा…

भावपूर्ण!

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

oh...
बेहद कचोट रही है
आपकी संवेदना पूर्ण पोस्ट
बस थोड़ी देर पहले अपनी गज़ल पोस्ट करने तक मैं बड़ा उत्तेजित था
अब तो मन ही मर गया
खैर
जीवन है अगर ज़हर तो पीना ही पड़ेगा
सोनू के मां-बाप को क्या कहूं
कतई समझ में नहीं आ रहा

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

इन नजरों के तो हम पहले से ही कायल है। वरना आज के समय में तो लोग नजर बचा कर निकल जाते हैं। और उसी सुबह के वक्त कुछ बच्चे कमाने भी निकल जाते हैं।

प्रहार - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

जिंदगी का बड़ा सूक्ष्म अवलोकन करते है आप. सत्य की अनुभूति कराती भावपूर्ण अभिव्यक्ति.

Udan Tashtari ने कहा…

दिल की यही नजरें बनी रहें..बहुत भावपूर्ण पोस्ट.

poemsnpuja ने कहा…

m speechless.

PREETI BARTHWAL ने कहा…

सुन्दर और बहुत भावुक लिखा है आपने ।

जितेन्द़ भगत ने कहा…

वर्गीय खाई को पाटना आसान नहीं है, लेकि‍न नजरीया बदल लेने भर से भी एक उम्‍मीद बनती है। आपने ये उम्‍मीद जगाई है।

Manish Kumar ने कहा…

सारा दोष मीडिया का नहीं। हममें से बहुत इस सदी के "महानायक" के बारे में हर पल की जानकारी लेना चाहते हैं। वैसे भी हम सेलेब्रेटी पूजक रहे हैं। बदकिस्मती है कि क्रिकेट और फिल्म के आलावा इस देश में अन्य क्षेत्रों में ये ब्रीड पैदा ही नहीं हो पाई।

ये तो मीडिया का ही असर है कि अब बोरवेल में गिरने वाले बच्चों की खबर हम तक पहुँचती हैं वर्ना इस देश में हममें से कितने ऐसे हैं जिन्होंने शहरों के हटे हुए या गायब हुए मैन होल के ढ़क्कनों को देखने के बाद सम्मिलित रूप से उन्हें वापस रखवाने का प्रयास किया होगा?

makrand ने कहा…

sir u r master of words
great lines composed well
regards

राज भाटिय़ा ने कहा…

देखते तो शायद सभी है ऎसा, लेकिन नजर किसी किसी की मेहरबान होती है, आप की नजरो ने समझा....... इसे.
धन्यवाद

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

खुदा करे कि आपका दिल ऐसा ही बना रहे और आपकी लेखनी इसी तरह की बातेँ लिखती रहे ..जैसी ये पुरानी कविता थी जिससे शीर्षक बना और नायाब पोस्ट बनी
-लावण्या

Tarun ने कहा…

ऐसे स्कूल तो शायद कैंट के पास ही मैने भी देखें है लेकिन शायद कभी कार से उतरते बच्चों पर नजर गयी नही। हाँ साईकिल पर बच्चों को ले जाकर स्कूल छोड़ते बहुत देखे हैं। अनुराग आपने क्या खूब लिखा है खासकर की अंत की लाईन।

dhiru singh ने कहा…

cycil par baithi ghati bjati beti sabse sunder lagti hogi dr. sahab .

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

ईश्वर उस दो चुटिया ओर आँखों में काजल वाली बच्ची के सारे सपने पूरे करे. सेना के इस बार के अभियान की असफलता से दिल को गहरी चोट पहुँची. दिन रात होती दुखद घटनाएं बार-बार याद दिलाती हैं कि माँ-बाप को भी बच्चों के प्रति जिम्मेदार तो होना ही पडेगा.

Rajesh Roshan ने कहा…

डाक्‍टर साहब बस आपका पोस्‍ट और शिव जी का कमेंट देखकर आंखे नम हो गई.

हरि जोशी ने कहा…

बेहतरीन शब्‍दजाल। दोनो खबरें दिखा तो मीडिया ही रहा है। दोनों खबरों की अपनी क्‍लास है।

भूतनाथ ने कहा…

बेहद भावपूर्ण और मार्मिक !

Dr. Nazar Mahmood ने कहा…

really nice & touching,

pallavi trivedi ने कहा…

एक ओर रात अपने हिसाब से घटायी होगी
आसमान ओढ़कर जमीन फ़िर किसी ने बिछायी होगी"

सबसे पहले तो इस खूबसूरत शेर के लिए बधाई.....दूसरी बधाई आपकी संवेदनशील नज़र के लिए जो इस कदर इंसानी जज्बों को महसूस कर बयान कर देती है!

दीपक ने कहा…

आपकी आंखो और दृष्टी की जितनी प्रशंसा की जाये कम है !!यह संवेदन शीलता इंसान होने का परिचय है!

Zakir Ali 'Rajneesh' ने कहा…

जिंदगी की धडकन को पकडना तो कोई आपसे सीखे।

Vivek Gupta ने कहा…

बहुत ही भावपूर्ण | सुंदर |

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

जैसे कैमरा बहुतों के पास होता है पर फोटो कोई कोई ही खींच सकता है वैसे ही नजर और कलम बहुतों के पास है पर आपकी बात ही कुछ और है ।

संगीता मनराल ने कहा…

बहुत खूब! पहली बार आपके ब्लाग पर आना हुआ उम्दा लेखन शैली है, अब आना लगा रहेगा| लिखते रहियेगा|

G M Rajesh ने कहा…

सुबह तकरीबन साढे सात का वक़्त है ...शहर का ये छोर इस वक़्त मसरूफ रहता है ... पाँच सौ मीटर या एक किलोमीटर के उस दायरे में तीन-चार बड़े बड़े पबिलिक स्कूल है , वही एक सड़क पर -बड़ी -छोटी कई किस्मों की गाडिया ...कही ड्राईवर का खिड़की से झांकता उनीदा चेहरा ..कही ट्रेक सूट में बेटे के बालो को तरतीब से लगाता बाप .....कही स्कूल के गेट पर किन्ही नन्हे कदमो का दूर तक पीछा करती किसी मां की नजरे ...स्कूल बस से उतरते बच्चो का शोर .....इन सबके बीच सड़क के उस पार ...तमाम भीड़ से गुजरती एक साइकिल

main prabhaavit hun aapke chabi ankan se

'ताइर' ने कहा…

they say...its all about money, honey...tabhi media...trp aur readership ke chakkar se bahar nahi aata...aur logo ko bhi to wo hi chahiye...khud ka pet bhale na bhar paye...par tapri pe khade khade bacchan k pet dard ki khub khabar rakhte hain...

mera bharat mahan...

neelima sukhija arora ने कहा…

बड़ी बड़ी गाडियों के इंजन ओर हार्न के बीच उस घंटी की आवाज ........जैसे जिंदगी अपनी शिनाख्त करती है !

बेहद भावुक, जिन्दगी को इतने क्लोजली कैसे आब्सर्व करते हैं आप

डॉ .अनुराग ने कहा…

आप सभी लोगो का शुक्रिया ,मुझे मीडिया की इस गैर जरूरी तवज्जो से शिकायत नही है ,मुझे मीडिया की इस" शोर्ट टर्म मेमोरी लोस" की आदत से परेशानी है ....जो उन कारणों पर बहस नही करता जिससे इस तरह की घटना दुबारा घटित न हो उसके बाद कोई उस गाँव का जिक्र नही करता ,कोई मेन होल के लिए किसी सम्बंधित अधिकारी को बार बार याद नही दिलाता ...

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उस संवाद के रास्ते को खोलती है ,जिन्हें लेखक शायद देख नही पाया .....