2008-10-17

छुट्टी ?

धूप जब किवाडो की दरारो से झाँककर
मेरे घर मे दख़ल देती है..
अलसायी सी मेरी नींद
उबासी लेकर उसको उलहाना देती है.
तुलसी का वो पोधा ,जो आँगन मे खड़ा है
धीमे लहज़ो मे
पानी ना मिलने की शिकायत करता है।
मेज़ पर रखी किताब के पन्ने हवा मे फडफ़ड़ाते है.......
पता नही.......
सबको कैसे मालूम है..
आज मेरी छुट्टी है.







चलते चलते एक त्रिवेणी -



जाने क्या निस्बत है कि शब जाते जाते
रोज याद का कासा छोड़ जाती है .....

हर सुबह एक लम्हा पड़ा मिलता है

62 टिप्‍पणियां:

  1. आह! एक और खूबसूरत नज़्म.. बड़े दिनो बाद ये शायर जागा है..

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  2. अनुराग जी..आप शब्दों के जादूगर हैं....सही माने में...जो लिखते हैं कमाल लिखते हैं...बेहद खूबसूरत नज़्म...
    नीरज

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  3. पता नही.......
    सबको कैसे मालूम है..
    आज मेरी छुट्टी है.
    क्या लाजवाब नज्म है ! बहुत शुभकामनाएं !

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  4. आज फिर दिल को छु लेने वाली दिल की बात पढने को मिली . धन्यवाद .

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  5. doctor sahab aap dermatologist kaise ban gaye, kavitayen padhkar to nahi lagta ki ek doctor bhi bhawnaon se ot-prot ho sakta hai, vaise mujhe bahut achcha lagta hai, aapka doctor ke saath kavi hriday hona

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  6. बहुत कारगर/शानदार/बजनदार/दिल को छूने वाली रचना है।

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  7. jane kaise sab ko pata chal jata hai ke aaj chutti hai:),sach na jane chutti ke liye kab se mann tarsa gaya hai,bahut hi khubsurat si nazm.

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  8. तुलसी का वो पोधा ,जो आँगन मे खड़ा है
    धीमे लहज़ो मे
    पानी ना मिलने की शिकायत करता है।
    मेज़ पर रखी किताब के पन्ने हवा मे फडफ़ड़ाते है.......
    पता नही.......
    सबको कैसे मालूम है..
    आज मेरी छुट्टी है.
    वाह! बहुत खूब.

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  9. आपकी संवेदना को मुखरित करते बिम्ब विधान को नमन.......

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  10. व्यस्‍त दि‍नों में वो चीज़ें नजर नहीं आती, जो अवकाश के दि‍न साफ-साफ नजर आता है,खुशनुमा पल होता है ये, तुलसी को याद करना प्रकृति‍ के नजदी‍क होना है। सुंदर भावपूर्ण कवि‍ता।

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  11. बहुत खूब क्या बात कही है ..यह बहुत दिन तक याद रहेगी ..

    जाने क्या निस्बत है कि शब जाते जाते
    रोज याद का कासा छोड़ जाती है .....

    हर सुबह एक लम्हा पड़ा मिलता है..

    उत्तर देंहटाएं
  12. बढ़िया नज़्म और शानदार त्रिवेणी का युग्म, भई मज़ा आ गया।

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  13. आपकी छुट्टी भी लाजवाब होती है डॉ साहब ,ये भी मालूम चल गया आज .

    जाने क्या निस्बत है की शब् जाते जाते
    रोज याद का कासा छोड़ जाती है .....
    हर सुबह एक लम्हा पड़ा मिलता है

    शुक्रिया त्रिवेणी देने के लिए ,जैसी उम्मीद थी वैसे मिली है ,वैसे मुझसे ज्यादा अब मेरा भाई आप का ब्लॉग पढता है.

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  14. .
    एक अलसायी हुयी सी, छुट्टियाई रचना !
    कैसे लिख लेता है, यह सब ?
    तू मुझे कविता लिखना सिखा दे,
    मैं तुझे खूब लम्बीई लम्बीईईई पोस्ट लिखने के गुर दूँगा !

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  15. जिस दिन सुबह जल्दी फोन की घंटी बजे। लगता है लोगों को पता लग गया है आज छुट्टी है।

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  16. dhnyabad sir, aap to shabdon ke jaadugar hai, ye jaadugiri yuhin continue rahe, dhnyabad

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  17. बहुत खूब छूट्टी के दिन भी शब्दों का जादू चलाते हो।
    धूप जब किवाडो की दरारो से झाँककर
    मेरे घर मे दख़ल देती है..
    अलसायी सी मेरी नींद
    उबासी लेकर उसको उलहाना देती है.
    बहुत खूब। पुराना वक्त याद आ गया।

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  18. अनुराग जी लाजवाव बहुत सुंदर सरल रचना धनयबाद

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  19. अनुराग जी अगली बार एक दिन पहले ही उस तुलसी के पोधे को पानी देदेना, किबाडो पर परदा लगा देना , पुस्तको पर कोई वजन रख देना, ओर टेलीफ़ोन का चोगा नीचे रख देना, फ़िर सारा दिन मस्ती से सोना.... :) :)
    बहुत ही सुन्दर है आप की आज की कविता,
    धन्यवाद

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  20. ओहो ......पक्के कवी बन गये हो.....बहुत सुन्दर।
    कुछ-कुछ उस.. चूल्हा पडा उदास...वाली कविता का भाव आ रहा है।

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  21. दिल से निकली दिल की बात। हो सकता है ये नज्‍म हो या कविता लेकिन है दिल से। एक गुजारिश और- कभी उर्दू के कठिन शब्‍द इस्‍तेमाल किया करें तो नीचे उसके अर्थ भी दे दिया कीजिए। हम जैसे अज्ञानियों को सुविधा होगी। शब्‍दकोश की शरण में नहीं जाना पड़ेगा।

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  22. माशा-अल्लाह !बहुत खुब कहा आपने !! क्या चित्र खीचां है ।

    नोट: उपरोक्त सारी बातें दिल की बात है इसे औपचारिकता ना समझा जायें !!हा हा

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  23. आहा...सचमुच छुट्टी के मूड की नज़्म है....और त्रिवेणी सोने पे सुहागा.

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  24. वाह सुँदर नज़्म और बढिया त्रिवेणी लिखी है आपने अनुराग भाई ..
    पर पानी दे देना तुलसी मैया को
    और आराम भी कर लीजियेगा ..
    - लावण्या

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  25. तुलसी के पौधे को देखकर ,
    मन तो खिल-खिल जाता है ना ,
    छुट्टी दिन तो अक्सर ,
    सब कुछ दिख जाता है ना ...
    सब को अपनी तरफ़ देखता हुआ पाकरही ,
    महसूस हो पता है कि...
    आज छुट्टी है ना !!

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  26. अनुराग जी,
    प्रतीक और संकेतों के माध्यम से आपने बडी सरलता है कोमल भावों को अिभव्यक्त िकया है ।

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  27. पता नही.......
    सबको कैसे मालूम है..
    आज मेरी छुट्टी है.

    सुंदर कविता!

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  28. पता नही.......
    सबको कैसे मालूम है..
    आज मेरी छुट्टी है.


    --पता तो हमें भी लग गया!!! आप छूट्टी पर हों तो एक अलग माहौल जो बन जाता है!! :)

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  29. हम तो बाद में आये, आज भी छुट्टी है या नहीं।

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  30. bahot hi masum si kavita,mahsusiyat bhari......... bahot hi umda .... bahot bahot badhai.......

    regards

    उत्तर देंहटाएं
  31. आपकी छुट्टी और सुबह पडा हुआ एक लम्हा..
    क्या बात है !

    उत्तर देंहटाएं
  32. अनुराग जी दिल जीत…………जीत नही दिल लूट लिया आपने। सुंदर शब्द चित्र।

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  33. @हरी जी ...... ठीक कहा आपने .....मै सोच ही रहा था पोस्ट करते वक़्त की डाल दूँ ,फ़िर पता नही क्यों हिचक गया ?
    निस्बत का अर्थ है सम्बन्ध
    कासा =एक प्रकार का बर्तन

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  34. जाने क्या निस्बत है कि शब जाते जाते
    रोज याद का कासा छोड़ जाती है .....

    हर सुबह एक लम्हा पड़ा मिलता है

    हर सुबह वो लम्हे समेटना कितना हसीन होता है न

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  35. दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं /दीवाली आपको मंगलमय हो /सुख समृद्धि की बृद्धि हो /आपके साहित्य सृजन को देश -विदेश के साहित्यकारों द्वारा सराहा जावे /आप साहित्य सृजन की तपश्चर्या कर सरस्वत्याराधन करते रहें /आपकी रचनाएं जन मानस के अन्तकरण को झंकृत करती रहे और उनके अंतर्मन में स्थान बनाती रहें /आपकी काव्य संरचना बहुजन हिताय ,बहुजन सुखाय हो ,लोक कल्याण व राष्ट्रहित में हो यही प्रार्थना में ईश्वर से करता हूँ ""पढने लायक कुछ लिख जाओ या लिखने लायक कुछ कर जाओ ""

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  36. बहुत ही सुंदर नज़्म है अनुराग जी ,टिपण्णी के लिए अल्फाज़ ही नही मिल रहे !!!!!!

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  37. बेहतरीन। डा.अमर कुमार से बात बनी?
    कासा= भिक्षापात्र
    वो खरीदना चाहता था कासा मेरा,
    मैं उसके ताज की कीमत लगा के लौट आया!


    -राहत इंदौरी!

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  38. मुक्त छंद की उन्मुक्त नज्म, 'छुट्टी' कर दी सबकी. डॉ साहब एक नज्म से जो प्यास जगाते हैं... दूसरे के आते तक वही तीव्रता बनी रहती है. मजा आ जाता है.

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  39. bahot mast......sach kaha...bade dino baad aapke andar ke shayar ne darshan diye... :)

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  40. khoobsoorat kavita.
    bahut sahaj.

    ik guzarish
    lahja ko lahza likhne se parhez kijiye.

    ज़रूर पढिये,इक अपील!
    मुसलमान जज्बाती होना छोडें
    http://shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com/2008/10/blog-post_18.html
    अपनी राय भी दें.

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  41. बस एक हमें ही पता नहीं चला !
    बढ़िया है ।
    घुघूती बासूती

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  42. धूप जब किवाडो की दरारो से झाँककर
    मेरे घर मे दख़ल देती है..
    अलसायी सी मेरी नींद
    उबासी लेकर उसको उलहाना देती है.
    khoobasoorat ehasas. bahut khoob

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  43. लाजवाब,बहुत दिनों बाद आपकी कविता पढ़ने को मिली।

    उत्तर देंहटाएं
  44. छुट्टी की छुट्टी कर दी! सरल और सुंदर कविता !

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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