बीच सड़क से .......

सुबह गाड़ी बाहर निकालने के लिए गेट खोलता हूँ तो गली में साइकिल पर बैठा आदमी जोर जोर से चिल्ला रहा है जोडो के दर्द ,कमर दर्द ओर पैरो की सूजन के इलाज़ का मर्ज बेच रहा है ,उसके कंधे पर एक झोला है ..इस "मोबाइल डॉ "के दर्शन पर मै मुस्करा उठता हूँ ..किसी भी प्रकार की खुजली ....एक्जीमा ...उसका विज्ञापन जारी है...अरे साला ये तो मेरे पेट पर भी लात मार रहा है .... बीच सड़क पर आते ही आपकी आज़माइश शुरू हो जाती है अपने ठिकाने तक पहुँचते पहुँचते आपके धेर्य की अनेको परीक्षाये हो चुकी होती है. ट्राफ़िक सिग्नल पर कोई रुकने को तैयार नही है, क्रॉसिंग पर आप लाइन मे गाड़ी मे खड़े है, एक महाशय लंबी चौडी गाड़ी लेकर तिरछी कर खड़ी कर देती है, बाक़ी ट्राफ़िक गया भाड़ मे, कोई ट्रक सड़क पर मूड रहा है, उसका हेलपर हाथ देकर रुकने का इशारा कर रहा है की कुछ मोटर साइकल वाले उसकी साइड से निकल कर भागे जा रहे है, ...सड़क के कोने पर एक लड़की जींस ओर टी शर्ट पहन कर सिमटी सिमटी सी जा रही है .. कोने पर खड़ा पेटू पुलिस वाला भी ओर लोगो की तरह उसे घूर रहा है ...उसके ठीक पीछे बोर्ड लगा है .उत्तर प्रदेश सदैव आपकी सहायता के लिए तत्पर -सौजन्य से कविता साडी ...
सोचता हूँ चरित्र प्रमाण पत्र हर महीने में रिवीयू होना चाहिये..केवल नौकरी में दाखिले के वक़्त ही इस देश में चरित्र की जरुरत समझी जाती है ..... एक साहब गाड़ी बीच सड़क मे खड़ी करके अपने दोस्त से बतिया रहे है ओर हॉर्न देने पर ऐसे घूरते है जैसे मैग्राथ चोका पड़ने पर बेट्समेन को घूरता है. .....आगे बढ़ता हूँ ....पेट्रोल पम्प जाने के लिए एक गली से मूडना पड़ेगा तो पूरी गली मे तंबू तना हुआ है की आज जागरण है.उनकी भक्ति महान है.पेट्रोल पम्प पर पहुँच गया हूँ.....मेरे आगे एक मोटर साइकिल है ...दस रुपया का ? पेट्रोल पम्प का सेल्समेन इतनी हैरानी से बोलता है .की बेचारे लड़के शरमा जाते है .उनकी उम्र १९-२० साल है ...पेट्रोल भरवाते भरवाते भी दस रुपये मेरे दिमाग में घूम रहे है ...
जब चलते चलते अचानक जोरदार झटके लगने शुरू हो जाते....कुछ फासला खींच कर वो बीच सड़क में घोडे के हिनहिनाने जैसी आवाज के साथ बंद होती ...पीछे बैठने वाला सिर्फ़ एक सवाल पूछता जिसका जवाब उसे मालूम होता ,..पेट्रोल ?वो सर खुजाते हुए कहता भूल गया. .उसकी याददाश्त कई सालो तक ऐसी ही रही .....फ़िर पूरी मोटरसाइकिल को सड़क पर लिटाया जाता ,हिलाया डुलाया जाता फ़िर ,सीधी करने के बाद वो हिनहिना कर स्टार्ट हो जाती .. कुछ फासलों के बाद अगर पेट्रोल पम्प दूर तक नजर नही आता ....तो फेफडो में हवा भर कर पूरी ताकत से पेट्रोल की टंकी में हवा भरी जाती .बरसो ये सिलसिला चला , कही किसी पार्टी में जाना हो या मूवी देखने आप सड़क पर एक बार ज़रूर हिनहिना कर रुकेगे . सबसे कमाल की बात तो यह होती की आधी रात आप पेट्रोल पम्प वालो से मिन्नतें करके उन्हें नींद से उठाते फ़िर ये महाशय कहते “10 रुपये का डाल दो .उस पर ये चलते चलते कहते पेट्रोलमै सिविल हॉस्पिटल में हूँ कोई काम हो तो बताना . ….सिविल हॉस्पिटल का नाम इस तरह इन्होने कई बार रोशन किया .हम बाकी दोस्तों के पास बाद में यामहा आर एक्स १०० रही ,पर इस होंडा मोटरसाइकिल की वजह से हम सब इन्फीरियरटी काम्प्लेक्स में रहे ....होंडा वालो ने भी दुबारा ऐसी मोटरसाइकिल नही बनायी ...
पीछे हार्न बज रहा है...रेडियो ऍफ़ एम् खोलता हूँ .....बाबा रामदेव ने कैंसर के मरीजो को ठीक करने का दावा किया है...यश को संभालना भी बड़ा मुश्किल है जी.......




आज की त्रिवेणी

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है

ओर हाँ आज कुश का जन्मदिन है ...दुआ करे उनको अलादीन का चिराग अनलिमिटिड ख्वाहिशो के पैकेज में मिले ...

62 टिप्पणियाँ:

Rohit Tripathi ने कहा…

"एक साहब गाड़ी बीच सड़क मे खड़ी करके अपने दोस्त से बतिया रहे है ओर हॉर्न देने पर ऐसे घूरते है जैसे मैग्राथ चोका पड़ने पर बेट्समेन को घूरता है"

Bahut khoob sir.. bahut acha likha likha hamesha ki tarah.. Kush ko dhero badahiya.. dua karege ki usse woh Alladin ka chirag jarur mile :-)

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खो देना चहती हूँ तुम्हें.. Feel the words

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

कुश को मिलेगा अलादीन का चिराग ... और हमें मिला इस लेख से एक और ज़िन्दगी का फलसफा :)

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है

बहुत खूब ...सही कहा

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप तो लफ्जों के जादूगर हैं...और ये जादू आप की हर रचना में खूब नजर आता है...जीवन की छोटी छोटी घटनाओं को बेहद खूबसूरती से पिरोते हैं आप अपनी रचना में...ये कमाल का हुनर हर किसी के पास नहीं होता...पढ़ते हुए जी करता है की ये किस्से कभी ख़त्म ना हों...
नीरज

pallavi trivedi ने कहा…

anurag...badi sachchi tasweer pesh ki apne ek bheed wale raaste ki ...lekin kya ab bhi 10 rs. ka petrol koi bharwata hai?nayi baat pata chali.

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

वाह जी वाह। जिदंगी के पलों की खूबसूरती पेश करनी हो तो कोई आपसे सीखें। फिर से यही कहूँगा कि आपको पढ़कर सुकुन मिलता हैं।
कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......
कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है
और इन त्रिवेणीयों का तो क्या कहना।

Rachna Singh ने कहा…

like your writing style and all the more your comments on various blogs

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

महोदय , बहुत ही खूबसूरती से आसपास होने वाली सामान्य घटनाओं को दिल से पिरोकर दिल की बात की है . बधाई .
कुश जी को भी जन्मदिन की ढेरों बधाई और सुभकामनाएँ .

लवली / Lovely kumari ने कहा…

आप कैसे छोटी -छोटी बातों और घटनाओं को पिरोते है...मेरे लिए रहस्य ही रहने वाला है
कुश जी को अभी-अभी बधाई दी है..सुबह से रजाई ओढ़ कर सोये थे हम,इसलिए पता नही चला इस बात का.

अभिषेक ओझा ने कहा…

ये मोटरसाइकिल वाले लम्हें तो सच में बहुत चुभते हैं. पर क्या करें... उन्हें कुरेदे बिना रहना सम्भव भी तो नहीं ! बिसलेरी की बोतल में भी पेट्रोल लेके आना पड़ता था कई बार... और कई बार २-३ किलोमीटर तक धकेलना भी. लाइसेंस और बाकी कागजात के लिए भी पकड़े जाते और तीन लोग एक ही बाइक पर होने के लिए भी. इस सिलसिले में नेगोसियेट करना जितना पुलिस वालों से सीखा उतना कहीं और नहीं... अंततः १०-२० रुपये उनकी जेब में भी जाते.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

सोचता हूँ चरित्र प्रमाण पत्र हर ६ महीने में रिवीयू होना चाहिये..केवल नौकरी में दाखिले के वक़्त ही इस देश में चरित्र की जरुरत समझी जाती है ..

बड़ी संवेदनशील और गहरी पकड़ है जिन्दगी से ! बहुत शुभकामनाएं !

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

Waah jindgi

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है

har baar .... ye teen lines poori baat par bhari pad jaati hai.....! Kush ke liye shubhkamanae.n

Zakir Ali 'Rajneesh' ने कहा…

छोटी से छोटी बात को भी बडी खूबसूरती से बयॉं कर देते हैं आप। आपकी लेखनी में वाकई जादू है।

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

अद्भुत है..
ये नज़र और ये आपकी कलम.

कुश को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं.

अल्पना वर्मा ने कहा…
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
अल्पना वर्मा ने कहा…
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
COMMON MAN ने कहा…

भाई साहब, डाक्टर हो या फोटोग्राफर.

neelima ने कहा…

चरित्र प्रमाण पत्र का renew होना , मोटी तोंद वाले पुलिस वाले ,सच ऐ हिन्दुस्तान में लड़की अगर एक बार सड़क पर आ जाए तो लोग उसे ऐसा घूरते है कि जैसे ओर ये पुलिस वाले इनसे सबसे ज्यादा डर लगता है कभी एक बार मेरी सहेली को छेद दिया किसी ने हमने सोचा आगे सड़क पर पुलिस कि पिकेट पर जाते है बाप रे बाप!उन्होंने ऐसे घूरा कि मारे डर के हम चुप चाप आ गए ,वैसे भी हमारी हरयाणा पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस कि तरह सदेव आपकी सहायता में तत्पर मिलती है .आपके किस्सों में शब्दों का चुनाव सदहरण बात को भी खास बना देता है ओर आपकी त्रिवेणी ऐ क्लास है गुलज़ार कि परम्परा को आप बढ़ा रहे है आपकी पोस्ट का इंतज़ार रहता है ओर वो कभी बेकार नही जाता
कुश को हमारी बधाई

Udan Tashtari ने कहा…

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है

बहुत ही उम्दा त्रिवेणी!!!

कितना सही कहा कि यश को संभालना भी बड़ा मुश्किल है जी.......

बहुत सुन्दर आलेख. मनोभावों का लेखा बखूबी अहसास करवा देते हैं, बधाइ.

कुश को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाऐं.

mehek ने कहा…

sahi kaha kuch lamhe bahut teji se ghumte hai,ramdev baba agar cancer treat kare to saare chemotherapic agnets banane ki jarurat na rahe,nahi cancer treatment par kharch honewale hazaron lakhon rupiye kharch ho.sach gali mein ghumnewale un chote doctor par kabhi kabhi daya aati hai,kitne bhole aur naddan ya phir bhondun hote ha na jane.

mehek ने कहा…

kush ji ko janam din ki mubarak baat

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

बहुत सुन्दर आलेख.

कुश जी को जन्मदिन की ढेरों बधाई .

poemsnpuja ने कहा…

उस ज़माने में १० रुपये का पेट्रोल मिल भी जाता था...आज तो कीमत देखते हुए लगता है की पाइप में ही अटक के रह जायेगा. अच्छा लगी आज की ये दास्तान भी, हमेशा की तरह.

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

"बेहतरीन पोस्ट के लिए आदर सहित आभार बधाइयां "

bhoothnath ने कहा…

दूसरों के लिए जाने या अनजाने जब हम परेशानी का सबब बनते हैं.....तब ये ख़याल भी हमें नहीं आता कि दरअसल ये हम अपने ऊपर लौटा रहे हैं और जब वो सचमुच हमपर वापस लौटती हैं तब हमारे मुंह से उनके लिए गाली निकल जाती है ....मगर हमें ख्याल भी नही आता कि.....बाकि हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते....हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी.....!!

"Arsh" ने कहा…

कुश को जन्म दिन की बहोत बहोत बधाई और शुभकामनाएं ..
आपकी लेखन पे और क्या कहूँ बस यही के बहोत ही संवेदनशील है आपको ढेरो बधाई और साधुवाद ...

dhiru singh {धीरू सिंह} ने कहा…

bahut khoob chitrn .happy b'day kush

Dineshrai Dwivedi दिनेशराय द्विवेदी ने कहा…

आप का रिकार्डर बहुत अच्छा है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

दुनिया मै अगर सब से ज्यादा कोई देशवासी आजाद है तो वह है एक भारतीया, दिल किया कही थुक दिया, कही मुत दिया, पखाना भी कही कर दिया, गन्द कही भी डाल दिया, अजी हमने आजादी हांसिल की है कोई मजाक थोडे ही ना है, पेदल चलने की अकल नही गाडी ले कर चल रहै है, भाई आजाद है...
धन्यवाद

अनूप शुक्ल ने कहा…

अच्छा है। चरित्रप्रमाण पत्र छह महीने में बनेगे तो बनाने वालों की कमाई और बढे़गी। कुश को फ़िर से बधाई।

shama ने कहा…

Lekh to poora padha, achha to thahee...isme kaunsee nayee baat, haina??Par meree nazar in alfazonpe aake atak gayee,"Kayee baar toka hai, yun bewaqt,
Nange haatho maazee na kureda karo....Kuchh lamhen bade tez chubhte hain"! Kisqadar sachhayee hai in alfaazonme..!Kitnee gehraayee..!

Hari Joshi ने कहा…

पहले पल्‍लवी जी की प्रतिक्रिया पर- जी! कभी भी ऐसी नौबत आ जाती है कि दस रूपये का ही भरवाना पड़ता है। पर्स घर में भूल आए जैसे जुमले भी फेंकने पड़ते हैं जबकि पर्स घर में रह जाता तो दस भी कहां से आते।
शब्‍दचित्र बेहद जीवन्‍त है अनुराग जी। पढ़ते-पढ़ते लगा जैसे मैं भी केसरगंज से गुजर रहा हूं। मजबूरी है कि रोज गुजरना पड़ता है। पुलिस वाला भी अपनी मोटी तोंद को नहीं बलिक वालाओं की टाइट जींस पर जरूर घूरता है।
बहुत महीन कताई की है आपने लेकिन बहुत सी बातों को मिलाकर गड्मड्ड भी कर दिया है।
ये भी बता देते कि कुश का कौन सा जन्‍मदिन है। चलिए कोई सा भी हो हम तो यही कहेंगे कि तुम जियो हजारों साल।...क्षमा कीजिएगा, आदमी नाम का जानवर कुछ ऐसे ही झूठ बोलता है और लोगों को अच्‍छे लगते हैं।....हमारी तो कुश जी यही दुआ है कि आपकी लेखनी हमेशा रोशनी बिखेरती रहे।

जितेन्द़ भगत ने कहा…

आपने रोजमर्रा की जिंदगी का बढ़ि‍या चि‍त्र खिंचा है और वि‍चार भी अनूठें हैं-
चरित्र प्रमाण पत्र हर ६ महीने में रिवीयू होना चाहिये..
और त्रिवेणी भी गंभीर-

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो
कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है

( कुश जी को जन्मदिन की ढ़ेरों बधाई।)

PD ने कहा…

बहुत सही.. आपने 2 साल् पीछे भेज दिया.. 2 साल पहले हम भी ऐसा ही करते थे..
और हां.. कुश को मैंने फोन किया था मगर वो कहीं और व्यस्त थे.. कहीं.. ऊंहूं.. अहां.. :)
समझने वाले समझ ही गये होंगे.. ;)

समीर यादव ने कहा…

सोचता हूँ चरित्र प्रमाण पत्र हर ६ महीने में रिवीयू होना चाहिये..
खलबलाती यादों और व्यवस्था के कोढ़ को... लेकिन डॉ साहब हम " नीयत " का क्या करेंगे...छः माह में भी चरित्र का परिक्षण तो हम लोग ही करेंगे न...!!

Fighter Jet ने कहा…

bahut maza aya...bahut dino baad mauka mila padhne ka..

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

अच्छा िलखा है आपने ।

http://www.ashokvichar.blogspot.com

अल्पना वर्मा ने कहा…

मोबाइल डॉ----पेटू पुलिस वाला--गाड़ी बीच सड़क मे खड़ी--मोटरसाइकिल को सड़क पर लिटाया जाता ,हिलाया डुलाया जाता ---कोई काम हो तो बताना--सच लिखा है आपने अपने इस छोटे से सफर की दास्ताँ में-
यही सब बेहद सामान्य सी बातें अक्सर आम जीवन में होती रहती हैं आस पास दिखती रहती हैं-
क्या कभी ये सीन बदलेगा???मोबाइल डॉक्टर पर अंकुश और पुलिस वाले बिना तोंद के दिखायी देंगे?
कितना कुछ बदलना चाहिये मगर भारत में अब भी नहीं बदलता -
--'यश' को संभलना मुश्किल है...क्यूँ की अक्सर लोग अंध भक्त होते हैं . ----
**कुश को बधाई दे di hai..धन्यवाद yaad दिलाने के लिए.---
***त्रिवेणी हमेशा की तरह अच्छी है.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

भारत के एक शहर का
"क्लोज़ - अप" ही दीखला दिया और त्रिवेणी उम्दा रही अनुराग भाई !
कुश जी हैप्पी बर्ठ डे टू यू :)

neera ने कहा…

वाह! आपने तो परदेस में बैठे- बैठे मेरठ की सडकों पर घुमा दिया!

seema gupta ने कहा…

" we all have to face such type of incidents and experieces daily, but you have mind blwoing art to draft those small incidents from the routine life and present them lively...."

regards

कुश एक खूबसूरत ख्याल ने कहा…

कितना अच्छा लगता है ना इतनी सारी शुभकामनाए एक साथ देखकर.... बहुत बहुत आभार डा. साहब का, अपनी ब्लॉग पर जगह देने के लिए..

आप सभी की शुभकामनाए मैं तहे दिल से स्वीकार करता हू... एक ही प्रार्थना है जब भी कभी वो अलादीन का चिराग मिले सबसे पहले उस से आप सभी की विशेज़ पूरी कर सकु...

एक और बार आप सभी का हार्दिक आभार

swati ने कहा…

hriday se aap jo chitra khichte hai unka koi saan nahi...aap ki pyaari si kavita bahut hi khoobsoorat lagi....

Rakhee ने कहा…

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है

I really dont have words to praise. :)

भूतनाथ ने कहा…

बहुत बेहतरीन पोस्ट सर जी !

मीत ने कहा…

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है
kuch batein seedhi dil mein utar jati hain jaise ye triveni

मीत ने कहा…

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है
kuch batein seedhi dil mein utar jati hain jaise ye triveni

सौम्या झा ने कहा…

bahut khoob anurag jee!!
vakai aapka gairpeshawar hona aur peshe ko bachane ki jaddo jehed,dono ka saamanjasy kafi rochak laga

मीनाक्षी ने कहा…

आपके दिल की बात सीधे दिल मे उतर जाती है खासकर त्रिवेणी... कुश को जन्मदिन मुबारक..

डा. अमर कुमार ने कहा…

भाई अनुराग, दिल लूटने वाली पोस्ट देते रहे हो, यह सिलसिला जारी रहेगा..
पर पोस्ट के अंत में दी गयी त्रिवेणी सबकुछ लूट कर लिये जाती है, यही देख रहा हूँ आजकल !
मैं स्वयं भी आज की त्रिवेणी का शिकार होकर जा रहा हूँ !

क्या ऎसा नहीं हो सकता, कि अपनी हर नयी पोस्ट के साथ की ताज़ी त्रिवेणी सबसे ऊपर साइडबार में स्थायी रूप से देते रहने की परंपरा बना लो ..
हमारे जैसे कुछेक संग्रहकर्ता और भी होंगे, उनको भी त्रिवेणियों के लिंक अलग से सुलभ हो जाया करेंगे..
अनायास ख़्याल आया, सो बता दिया
बच्चन के ब्लाग के संदर्भ में, तुम्हारी दो-टूक बातों ने तुम्हारी गरिमा को एक नया आयाम दिया है !

गौतम राजरिशी ने कहा…

त्रिवेणी कातिलाना है डाक्टर साब......शब्दों का ये जादुगर ----सलाम आपको

Rajesh Roshan ने कहा…

क्‍यों डाक्‍टर जादूगरी का काम छोड़ा नहीं है... कुश को जन्‍मदिन की बधाई देते देते लोग आपकी जादूगरी के किस्‍से सुना रहे हैं...किसी ने मुझसे कहा आज कल तुम डॉ अनुराग को नहीं पढ़ते क्‍या मैंने कहा हां, नौकरी ने बांध रखा है... कहता है वहीं तो सबके कमेंट दिखते हैं, तुम्‍हारा दिखता ही नहीं.... कोशिश करूंगा हरेक पोस्‍ट पढ़ पाऊं...

U r simply great Doctor. God Bless U

अर्शिया अली ने कहा…

छोटी सी बात को खूबसूरत अफसाने में बदल देना कोई आपसे सीखे।

neelima sukhija arora ने कहा…

कई बार टोका है यूँ बेवक्त
नंगे हाथो माजी न कुरेदा करो.......

कुछ लम्हे बड़ी तेज चुभते है

बहुत खूब ...सही कहा

meeta ने कहा…

badhiya..hamesha ki tarah... achanak present se past mein chale gaye...aapke saath hum bhi ... :) ..kai baar yun hi humne bhi hamari purani Luna ko thik nahi hone par dhoya tha college ke jamane mein....thank god!! petrol ke liye hamesha se hi 10 se jyada rupye rahe hamare paas :D :P

makrand ने कहा…

bahut khub
regards

makrand ने कहा…

bahut khub
regards

दीपक ने कहा…

चरित्र प्रमाण-पत्र देने वाले के ्चरित्र का निर्धारण और प्रमाणीकरं कौन करे !!यश को सम्हालना कठीन काम है यह आपने सही कहा !

सतीश पंचम ने कहा…

ये जो मोटरसाईकिल को लिटा कर उससे तेल निकालने की जोर आजमाईश चलती है वह देखने में बडी मजेदार लगती है.......कभी-कभी तो लगता है कि दुपहिया कहीं श्वान नस्ल की सवारी तो नहीं है जो एक टांग उठाकर तिरछा होने के बाद ही तेल की धार छोडता हैं :) हमारे कॉलेज के जमाने मे मित्रगण जब कभी ऐसी नौबत आई है तब यह जरूर कहते- ससुर अब कुकुर मुतान होना पडेगा :)
अच्छी रोचक पोस्ट।

रंजना ने कहा…

Waahhh.
aap lajawaab ho......

डॉ .अनुराग ने कहा…

आप सभी का तहे दिल से ...शुक्रिया .......
@डॉ अमर कुमार ......
गुरु जी ....आपकी बात मेरे भी दिमाग में थी ....पर कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम आ रही है .उन्हें सुलझा कर कुछ करता हूँ..

shama ने कहा…

Isee triveneeki khojme aaj phir chalee ayee...

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उस संवाद के रास्ते को खोलती है ,जिन्हें लेखक शायद देख नही पाया .....