2008-11-06

तुम्हारे हिस्से का चाँद अब भी चमकता है .....

वो किसी सेमीनार में स्पीकर बनकर मेडिकल कॉलेज में आयी है ..इसलिए घर आकर लंच साथ करना मुश्किल है ...आज ही वापसी है रात ८ बजे की ट्रेन है। शाम साडे छ बजे तक वो फ्री हो जायेगी ......मै वक़्त से १५ मिनट पहले मेडिकल कॉलेज पहुँच जाता हूँ.एक मिस कॉल देता हूँ उसके फोन पर ..फ़िर गाड़ी में बैठकर उसका इंतज़ार करता हूँ.....बाहर आकर वो गाड़ी में बैठते ही एक नजर मुझ पर डालती है...
.तुम्हारे बाल उड़ रहे है अनुराग !
हाँ , तभी मुझे आजकल हॉलीवुड के हीरो पसंद आते है .मै मुस्कराकर उसको जवाब देता हूँ ......
तुम्हारे दोस्त ने तुम्हारे लिए कुछ भेजा है ...मै निगाह डालता हूँ एक शानदार टाई है ..तुम्हारे पहनने का शौंक उसे याद है...वो कहती है ..मै ड्राइव करता सिर्फ़ मुस्करा देता हूँ...ओर तुम्हारा दूसरा शौंक अभी जिंदा है या ?वो मेरे लिखने के बारे में पूछती है...हाँ कभी कभी कलम-घसीटी कर लेता हूँ....घर आ गया है.....हम तीनो ने सात आठ साल एक साथ एक ही मेडिकल कॉलेज में गुजारे है .उन दोनों की लव मेरिज है.
औपचारिकताओ के दौर के कारण हम घर में अपने तय समय से आगे है ...उसे स्टेशन छोड़ने के लिए मेरा बेटा भी साथ आता है मै उसे मॉल रोड वाले रास्ते से ले जाता हूँ ताकि मेरे शहर के बारे में उसके ख्याल अच्छे रहे ...ये इलाका थोड़ा साफ़ सुथरा है ..स्टेशन पर हम वक़्त से पहुंचे है....गाड़ी अभी खड़ी है.....
दोस्त कैसा है ?मै उससे पूछता हूँ .कॉलेज टाइम में वो उसे दोस्त ही कहा करती थी ...
दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है....
हम दोनों थोड़ा तेज चलकर उसके कम्पार्टमेंट तक पहुँचते है वो गाड़ी में चढ़ गयी है......."तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो.....वो हंसती है......ट्रेन ने सीटी दे दी है..........मेरा बेटा उसे हाथ हिलाकर बाय करता है



 त्रिवेणी .....
याद है उस रोज बांटा था आधा आधा
तुम्हरी गोद से चकोर नजर आता था ....


तुम्हारे हिस्से का चाँद अब भी चमकता है !

93 टिप्‍पणियां:

  1. दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है....
    *********
    वाह ! क्या बात कही है.........लाजवाब........

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  2. दोस्त का सिर्फ़ पति बन कर रह जाना बेहद अफसोसनाक घटना है
    शायद इसी लिए अब त्रिवेणी में सिर्फ़ आधा ही चाँद चमक रहा है बाकी वाला शायद अभी भी दोस्ती दुबारा कराने की कोशिश में होगा
    उन दोस्तों से कहियेगा कि चाँद को भी आधा रहना नही पसंद है

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  3. ."तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो.....
    बहुत दिलकश अंदाज है लिखने का ! पुराने दोस्तों से मिल कर कितने अतीत में चले जाते हैं हम ? पर कलमबद्ध करना हर किसी के बस की बात नही ! शुभकामनाएं !

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  4. ."तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो.....
    बहुत दिलकश अंदाज है लिखने का ! पुराने दोस्तों से मिल कर कितने अतीत में चले जाते हैं हम ? पर कलमबद्ध करना हर किसी के बस की बात नही ! शुभकामनाएं !

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  5. याद है उस रोज बांटा था आधा आधा
    तुम्हरी गोद से चकोर नजर आता था ....

    तुम्हारे हिस्से का चाँद अब भी चमकता है
    त्रिवेणी बहुत लाजवाब है ! धन्यवाद !

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  6. इन लम्हों को शेयर करने के लिए आभार.

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  7. दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है....


    :-) :-) bilkul sach anurag ji.. bahut pyara likha hai.. trveni lajawab hai,, bahut aabhari aapke ki aapne hamari prathna pe gaur kiya :-)

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  8. दोस्त कैसा है ?मै उससे पूछता हूँ .कॉलेज टाइम में वो उसे दोस्त ही कहा करती थी ...
    दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है....
    " HA HA HA HA wanna laugh on this words, but these words are landmark of this artical...or essence of this post.... but truth of the life also... why it is so, or why it happens would be an undeing debate... but to be true i enjoyed readig it.."

    Regards

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  9. ......."तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो.....

    kya sachmuch aisa hi hota hai? shaayad hota hi hoga. kai log aisa kahte hain.

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  10. दोस्त दोस्त रहता है.....अपने महसूस किया होगा .....
    अच्छा फील कराने के लिए आप उन्हें माल रोड से ले गए...अच्छा किया वरना तो......

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  11. अभी तक तो दोस्ती का ही तजुर्बा है तो पति किस चिडिया का नाम है... हमें नहीं पता :-)
    खैर मुझे तो लगता है दोनों की अपनी जगह है... पति-पत्नी की नोक-झोंक ना हो तो फिर क्या मजा?

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  12. दोस्ती जब रिश्तेदारी मैं बदल जाती है तो हर चीज़ आधी आधी बाटनी पड़ती है और तब चाँद भी चकोर नजर आता है .
    डॉ. साहब के यही दिल की बात है .
    जीवन के खूबसूरत संस्मरण शेयर करने के लिए धन्यवाद .

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  13. dost aut pati ke mamale me abhi tippni nahi ... ५ -७ saal bad niskarsh nikal kar apna anubhaw bataungi .baki aapka andaj jordar tha Anurag jee.

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  14. पता नहीं; मेरी पत्नी शादी के समय पत्नी थी, अब बेस्ट फ्रेण्ड है।
    शायद शादी के बाद रोल बदल जाते हैं - समय के साथ साथ।

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  15. दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है....

    ओह!! गजब की बात कह ली!! मानो रियलाईज़ करा दिया...

    त्रिवेणी अति उत्तम!!

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  16. इस दिलकश अदांज को तो हम पसंद ही करते है और आज भी पढ़कर दिल खुश हो गया। पर आखिर एक सवाल पूछने का मन कर गया। क्योंकि कुछ दिनों से ये सवाल दिमाग में घूम रहा था और आज आपने लिख भी दिया। कि "तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो" यही यूँ भी कहा जाता सकता हैं कि"तुम सारी औरतें शादी के बाद सिर्फ पत्नी हो जाती हो"। मेरा सवाल यही है कि ऐसा क्यों होता हैं?
    और त्रिवेणी का तो जबाब नही।

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  17. क्या खूब लिखा है, लेकिन सुशील जी ने उतनी ही सुन्दर टिप्पणी दी है.

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  18. सही कहा जी ..दोस्त और दोनों तरफ़ के रिश्ते अलग वक्त के सांचे में ढल जाते हैं ..त्रिवेणी बेहद पसंद आई ...

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  19. संबंधों का सत्य सामने नहीं आता.....कभी कभी उसकी झलक मिल जाती है और हम समझते है कि हमने जग समझ लिया .....सत्य कहा है आपने.......आपके लेखों के द्बारा भी मेरी ये यात्रा जारी रहेगी

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  20. सबकी अपनी नज़र है चाँद को देखने की..

    किसी को सिर्फ़ पति नही दोस्त चाहिए.. तो किसी को दोस्त नही सिर्फ़ पति..

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  21. नज़र अपनी-अपनी, ख़याल अपना-अपना
    जवाब एक वही है, सवाल अपनी-अपना!

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  22. लिव-इन-रिलेशन की उत्पत्ति यहीं से तो नहीं?

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  23. डॉ साहब, आप इस तरह के रिश्तों की चाहे खुशबू हो या सड़ांध दोनों को ... भावों के डॉ के रूप में बिना किसी भेद के अभिव्यक्त करते हैं. हम कई बार सब महसूस करते हैं लेकिन शब्द में साकार नहीं कर पाते....यही जब कोई कहता है....तो लगता है अरे यही तो !....और कभी लगता है....क्या ऐसा भी.? शायद सभी मर्द शादी के बाद केवल पति हो जाते है, पर...इसी तरह की प्रतिक्रिया आनी है.!...यह सवाल भी ..जेहन में आना स्वाभाविक है कि... क्या वो शादी के बाद केवल शरीर नहीं रह गई ?

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  24. एक लाइन सच है भारतीय परिवारों का .पति पत्नी न जाने क्यों दोस्त नहीं रह पाते . क्या यह हमारे संस्कार की वजह से है ?

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  25. याद है उस रोज बांटा था आधा आधा
    तुम्हरी गोद से चकोर नजर आता था ....

    तुम्हारे हिस्से का चाँद अब भी चमकता है

    आज आपकी त्रिवेणी ने मुझे भी घायल कर दिया है.. बहुत खूब..

    वैसे आपने यह नहीं बताया कि भाभी जी के लिये आप पति हैं या दोस्त.. (दिल पर मत लिजियेगा.. छोटे भाई का मजाक है.. :)) चलिये एक बात तो अच्छा है.. मैं अभी भी कुंवारा हूं.. :D

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  26. यादें ही है जो याद रहती है साथ रहती हैं। पुराने दोस्त जब भी मिलते है वो सामने आ जाती है

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  27. रिश्ता एक पहेली है... बहुत शानदार लिखा है आपने।

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  28. दोस्त कैसा है ?मै उससे पूछता हूँ .कॉलेज टाइम में वो उसे दोस्त ही कहा करती थी ...
    दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है....

    बहोत ही फीलिंग के साथ आपने अदा करी हा आपनी लिखनी के साथ पुरा सही बर्ताव ..बहोत एहसास है इसमे ...आपको ढेरो बधाई ......बहोत ही सुंदर

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  29. अनुराग जी....भाई बहुत खूब...आप की कलम का कमाल है की जिस विषय पर चलती है उसे जीवंत कर देती है...दोस्त..पति हो जाता है लेकिन कभी कभी, हालाँकि बहुत कम केस में पति दोस्त हो जाता है...तब शादी बंधन नहीं लगती...एक खुशनुमा सफर लगती है...
    नीरज

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  30. वैसे, पति की Defination, इलाके, देश और प्रांत के हिसाब से बदलती रहती है....अब जो जिस देश, प्रांत का हो वह इस पति मात्र होने के कथन को उसी हिसाब से समझ सकता है, बाकि आजकल तो रामदौस के दौर चल रहे हैं.....अब पति कौन, पत्नी कौन....पता लगना मुश्किल है :)

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  31. अच्छा है। PD के सवाल का जबाब पेश किया जाये।

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  32. शादी के बाद दोस्त यदि सिर्फ़ ‘पति’ न रह जाय तो पत्नी को सन्तोष नहीं होता; और यदि महिला-मित्र सिर्फ़ ‘पत्नी’ न रह जाय तो पति महोदय जाने क्या कर बैठें...। :)

    भारतीय समाज में अभी भी एकाधिकारवादी मानसिकता प्रभावी है। बल्कि पुरुषों की तुलना में विवाहिता स्त्री को सिर्फ़ पत्नी बने रहना कुछ ज्यादा ही जरूरी माना जाता है।

    एक ‘दोस्त’ और एक ‘पति’ या ‘पत्नी’ होने में ठीक-ठीक क्या अन्तर है, यह विचारणीय है।

    मेरी समझ से सामान्य दोस्ती एक ही समय में एक से अधिक व्यक्तियों के साथ की जा सकती है, और निभाई भी जा सकती है। यह अधिकार या छूट सभी दोस्त एक दूसरे को देने के लिए तैयार रहते हैं। लेकिन वही दोस्त जब पति या पत्नी बनकर जीवन-साथी हो जाता है तो ‘एक्सक्लूसिव राइट्‌स’ के नियम लागू हो जाते हैं। possessiveness का भाव इतना हावी हो जाता है कि सिर्फ़ पति या पत्नी बने रहने में ही भलाई मानी जाती है। यही आदर्श माना जाता है। कम से कम ऐसा ‘दिखना’ तो अपरिहार्य है। भारतीय परिवेश में तो यही हालात हैं।

    ...तो कुँवारे दोस्तों, इस मर्म को समझो और डॉ. दिनेश राय द्विवेदी जी के संकेत को पकड़ो। :)

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  33. भाई अनुराग जी,
    बातों ही बातों में क्या जोर की बात पकडी कि दोस्त शादी के बाद सिर्फ़ और सिर्फ़ पति रह जाता है.
    अपन के मगज में भी कुछ प्रश्न यों उठ खड़े हुए हैं ..................

    अब इसे हादसा समझें या खुशनसीबी?
    रिश्ता समझें या भावना?
    जीत समझें या हार?

    postmartam कर बताईयेगा.

    चन्द्र मोहन गुप्त

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  34. अनुराग जी सलाम बजा लाया हूँ एक और कातिलाने त्रिवेणी पर...
    उफ़्‍फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़!!!! क्या अंदाज है

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  35. बहुत अच्छा िलखा है आपने । भाव की बहुत संुदर अिभव्यिक्त है ।

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  36. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  37. त्रिवेणी वाकई बहुत खूबसूरत है. आपके ब्लॉग पे टिप्पणिया पढ़ रही थी जिनका लगभग एक सा ही नजरिया था. मेरे विचार में रही दोस्त के सिर्फ पति रह जाने की बात तो मुझे लगता है ज़िन्दगी के प्रति हर किसी का एक नजरिया रहता है. अब आप सिर्फ दोस्त नहीं रहे बल्कि एक और रिश्ता जुड़ गया वैसे भी जिस रिश्ते में कई रिश्ते एक साथ समाये हो वो बेहद खूबसूरत होता है और कम लोगो को ऐसा सोभाग्य मिलता है. और अगर लगता है अब सिर्फ पति है तो बेहतर है की पति और पत्नी फिर से मिलकर दोस्ती के ज़ज्बे को जिंदा करने की कोशिश करें, प्रयास दोनों और से होने चाहिए यही ज़िन्दगी की जीत है और ख़ुशी भी :)

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  38. बखूबी समझते होगे डॉक्‍टर इस लाईन को... अच्‍छे दोस्‍त में एक अच्‍छा पति मिले ना मिले अच्‍छे पति में अच्‍छा दोस्‍त मिल जाता है. लाईन को थोडा उल्‍टा किया है लेकिन एक कोण तो इस लाईन में भी बनता है ना!

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  39. याद है उस रोज बांटा था आधा आधा
    तुम्हरी गोद से चकोर नजर आता था ....

    तुम्हारे हिस्से का चाँद अब भी चमकता है
    bahut khubsurat triveni,hmmm shaadi ke baad sab pati dost kyun nahi ban jate patni ke:):),ye ulta ho to safar sundar ho:)

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  40. सीधी-साधी अच्छी बात
    कड़वी लेकिन सच्ची बात
    पहले ऐसी अब वैसी
    पक्के मन में कच्ची बात

    अनुराग जी
    आपकी मित्र को समर्पित करता हूं

    or haan
    मैं देर करता नहीं देर हो जाती है
    उदारता बनाए रखें

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  41. Doctor saab, wo Ghazals jinper aapne meri tareeef kee hai.... meri nahin Jigar ki hain (Jigar Muradabadi, the great Shayar)!
    The title says "Jigar".
    Aapko pasand aayi, achcha laga. He is one of my favorites.

    उत्तर देंहटाएं
  42. हमेशा की तरह बहुत बढ़िया पोस्ट. आप अपनी यादों का पिटारा ऐसे ही खोले रहिये.

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  43. विवाह का एक ओर मतलब एक दूसरे के निर्णयों को सम्मान देना .. आपस में जिम्मेदारियों को इस तरीके से बराबर बराबर बांटना है की दोनों का अपना अपना स्वतन्त्र अस्तित्व बरकरार रहे ..ऐसा संतुलन हो ..की .वक़्त के सांचे में दोनों ढले केवल स्त्री नही ...पदमा सचदेव ने कभी कहा था की एक स्त्री अपने जीवन में कई पुलों को पार करती है ..शायद .जब आप एक दोस्त से शादी करते है तब शायद आपकी अपेक्षाए नोर्मल से ज्यादा होती है.....कहते है की गांधी ओर राम भी घर की दहलीज़ तक आते आते सिर्फ़ पुरूष रह जाते थे.....जिंदगी रोज हमारी हथेली में एक दिन दे जाती है ओर रोज एक नजरिया ..इसलिए पहले दिन पर खड़ा इन्सान जब महान नजर आता है .अगले कुछ दिनों में कही कमजोर दीखता है.....वक़्त सबके नजरिये बदल देता है.......अभिषेक ,कुश ,प्रशांत ओर पल्लवी का इस वक़्त एक नजरिया है ....ओर कुछ नजरियों पे नजर डाले
    बकोल @राजेश रोशन अच्‍छे पति में अच्‍छा दोस्‍त मिल जाता है.
    बकोल@ सिद्धार्थ भारतीय समाज में अभी भी एकाधिकारवादी मानसिकता प्रभावी है
    बकोल @स्वाति जी संबंधों का सत्य सामने नहीं आता.....कभी कभी उसकी झलक मिल जाती है
    बकोल @रंजना जी दोस्त और दोनों तरफ़ के रिश्ते अलग वक्त के सांचे में ढल जाते हैं
    बकोल @ज्ञान जी मेरी पत्नी शादी के समय पत्नी थी, अब बेस्ट फ्रेण्ड है।
    ....रहा पी. डी का सवाल ....तो मै अगर जवाब दूँगा तो एक तरफा जवाब होगा ना जी .... फ़िर भी कोशिश यही रहती है की दोस्ती का रिश्ता बरकरार रहे ....

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  44. पता ही नही चला,कोई आया था -आवारा हवा यू ही अक्सर खटखटा देती है दरवाजे हर समय ,हर कभी....तुम्हारे हिस्से का चाँद हमेशा चमकता रहे,बहुत अच्छा लिखतें हैं आप ...बधाई.

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  45. अनुराग जी, आपकी लेखनी लाजवाब है। दो शब्‍दों में कहुँ तो- 'वाह-वाह', 'मजा आ गया'' ',छू गईं'। बधाई

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  46. तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो...sach hi kah rahi hain aapki dost. kai jagah aisa padhne ko milta hai, shayad aisa hi hota hoga

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  47. भई आजकल नये घर में शिफ़्ट कर रहा हूँ सो देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ, बड़ा काम पड़ा और भागम-भाग है\ आपके हिस्से का चाँद भी सदा चमके यही दुआ है!

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  48. याद है उस रोज बांटा था आधा आधा
    तुम्हरी गोद से चकोर नजर आता था ....

    तुम्हारे हिस्से का चाँद अब भी चमकता है

    Nice triveni...

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  49. तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो.....

    hmmm sochne ki baat waise 'comments ki' aapki analysis sahi lagi.

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  50. इतनी सब कहानी तो हो गयी ,बाकी के आधे चाँद को आप कब याद करेंगे .
    अपनी कहानी आगे लिखवाने के लिए आप को ढूंढ रहा है

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  51. तुम सारे मर्द शादी के बाद सिर्फ़ पति हो जाते हो.....

    bahot badhiyan sayad hame bhi ye word dhyan me rakhna hi hoga, dhnyabad

    डॉ .अनुराग ji mai apke sujhab ko jaroor dhyan me rakhunga, par jaisa ki apko pata hai loan lene ke liye bhi kisi na kisi ki chamachgiri karni padegi. or yahi to mai nai chahta. fir bhi apka bahot bahot dhnyabad COMMENT KE LIYE.

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  52. किस्सा रुचिकर है...और...
    आखिरी पंक्तियाँ पढ़ते ही मुझे एक गीत याद आ गया-
    [काजोल-अजय की नयी फ़िल्म का]-
    'मैं ने तो मांगा था सहेली जैसा सैय्याँ--...मुझे मिला '' पहेली ''जैसा सैय्याँ--'
    यह कुछ हद्द तक सच्चाई ही है.
    .कारण -पति बन कर जो अहम् सर चढ़ जाता है--वोहि पुरुषों को
    खुलने नहीं देता शायद.
    खैर सिक्के का दूसरा पहलू भी है कि पत्नियाँ भी तो अक्सर
    सिर्फ़ पत्नी ही रहना पसंद करती हैं..दोस्त नहीं बनतीं...

    --त्रिवेणी बहुत ही खूबसूरत है..लाजवाब!

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  53. अनुराग जी, शायद आपको मेरी रचनाएं इसलिए पसंद आयी क्‍योंकि हमारा जायका एक जैसा है। आप भी तो
    कमाल का लिखते हैं अब तक अमृता जी की ही लेखनी पसंद थी अब आपकी रचनाओं में उनकी सी महक आ
    रही है। आपने जो पूछा है, 'अब तक कहाँ छुपी थी...?' तो 'मैं छुपी थी कहाँ मेरा ये राज है'...और राज को राज ही रहने
    दें। शुभरात्रि।

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  54. aha Dr. Saheb, itna bada sach itee sahajta se prastut karna aap hee ke bus kee baat hai.

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  55. काफी लेट हो गया आने में, लोगों ने पहले ही इतना कुछ कह दि‍या है, बस इतना ही कि‍ अपनी जिंदगी को कसौटी बना देने पर सबकी पीड़ा अपनी पीड़ा बना जाती है, और आपके शब्‍दों में ये दर्द कहीं-न-कहीं छि‍पी होती है।

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  56. आपके जीवंत लेखनी का कायल हुआ जा रहा हूं.सादे और स्वच्छ शब्दों का ये कमाल है.

    विषयवस्तु भी विचारों की जुगाली करने का आमंत्रण देतीं है, क्योंकि सीधी दिल की गहराई में घुस जाती है.और जब तक उसपर कुछ टिप्पणी न कर दें या मनन मन्थन ना कर लें तब तक वो खलिश वो चुभन बरकरार रहती है, जो बकौल गालिब , तीरे नीमकश से होती है.

    मराठी में एक गीत है, जो कमोबेश इसी परिस्थिती को बयां करता है..

    तोच चन्द्रमा नभात, तीच चैत्र यामिनी,
    एकान्ती मज़ समीप , तीच तू ही कामिनी ..
    ( वही चन्द्र है आकाश में , वही चैत्र की निशा है, एकांत में मेरे समीप, तुम हो, वही कामिनी )

    सारे ज़री ते तसेच , धून्दी आज ती कुठे?
    मी ही तोच, तीच तू ही , प्रीती आज ती कुठे?
    ती न आर्तता उरात, स्वप्न ते न लोचनी,
    एकान्ती मज़ समीप , तीच तू ही कामिनी ..
    तोच चन्द्रमा नभात.......)

    (सब कुछ वही है अभी, मगर वह बेहोशी या नशा अब कहां है?
    मैं भी वही, तुम भी वही, मगर वह प्रीत कहां है?
    मन में अब वह आतुरता नहीं , और ना ही नैनों में अब वह सपना है,
    एकांत में मेरे समीप, तुम हो, वही कामिनी )

    ये उद्गार पुरुष स्वर में है, और इस बात की पुष्टि करतें है, सिर्फ़ पति ही दोस्त नहीं रह पाते है, ये बात दोनो तरफ़ लागू होती है.

    त्रिवेणी में यह संकेत है.

    आशा है, कि लेन देन की रस्म नही निभायी है, इसका इक़रार करेंगे!

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  57. छोटी -छोटी बातें
    कह जाती हैं बड़ी बात

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  58. ye aapki kalam ka kamaal hai ya zindagi ka sach hai....ye tou aap hi jaanen.....sometimes even after spending their lifetime together ppl r unable to know each other...
    kehte hain kuch rishton ka rang waqt ke saath feeka padd jaata hai....par agar wo rishta dil ke bahut hi kareeb ho...tou phir zindagi ke canvas mein naye rang bharne ka mann hi nahi rehta.
    zindagi bhar ki dosti ke liye pyar ke saath shayad aur bahut saare ingredients chahiye.....

    aapki triveni bahut hi umdaa hai :)

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  59. apki triveni bahut khoobsurat hoti hai...
    or lekh t hai hi sunder...
    abhaar

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  60. सर्वप्रथम धन्यवाद आपकी उस मित्र को, जिस के कारण यह सार्थक बहस अस्तित्व में आई...सभी ने बड़ी गंभीरता से इस पर विचार दिये...और सभी विचार मूल्यवान.....! इन्हे एकीकृत कर के, मथ के जो माखन हाथ आये वो अत्यंत उपयोगी होगा...!

    नये दौर में ज़रूरत है पति पत्नी दोनो को समझने की कि आधुनिक समय में जरूरतें क्या हो गई हैं....! क्यों कि समय बहुत जल्दी जल्दी बदल रहा है....! खुद मे भी बदलाव उतनी ही तेजी से लाना होगा...!

    वैसे अभीषेक जी, लवली जी कुश जी जैसे प्रिय मित्रों के साथ शामिल हो कर राय देने से बच सकती थी.. :) लेकिन सोच रही हूँ कि ज़रूरी तो नही कि पत्थर से ठोकर खा कर गिरूँ और फिर संभलूँ इससे बेहतर है कि दूसरों को गिरते देख कर पहले यही समझ लूँ कि चलना कैसे है...:) P

    त्रिवेणी लाजवाब....!

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  61. और हमारे चाँद को
    फ़िर किसी सुरज की दरकार है !!

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  62. ये तो सच ही कहा, दोस्त अब सिर्फ़ पति है. ठीक वैसे ही जैसे शादी तो शादी ही है चाहे फिर अरेंजड हो या लव|

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  63. दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है....
    कड़वा सच, लेकिन सच तो है

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  64. waise sach kahu to soch ke dar lagta hai..... :) ...dosti aur patipatni ka rishta....

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  65. बात तो सच ही है.....चाहे लव मैरिज ही क्यूँ ना हो.....मगर शादी के बाद हम सब मर्द सिर्फ़ पति रह जाते हैं....ठीक वैसे ही जैसे स्त्री........पत्नियां.....हा..हा..हा..हा..

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  66. ...अच्छा डा० साहब, अब आप त्रिवेनी सिर्फ यहाँ लिख रहे है, तभी तो हमारी community बेरंग लग रही है. :(

    मैने सोचा अब पहली प्रतिक्रिया तो मै कभी नही दे सकता, इस बार आखिरी मे लिखुंगा, पर हे भगवान आखिरी तो होता ही नही....:) शायद आपके लेखनी की बढती लोकप्रियता का ही ये नजारा है, आपके दिल की बात कई लोगो के दिल का आईना जो बन चुकी है.. माँ सरस्वती की कृपा आप पर युँ ही बनी रहे..

    जहाँ तक पति का अपनी प्रेयसी से विवाहोपरांत दोस्त से सिर्फ एक आम पति रह जाने तक का प्रश्न है, शायद यह प्रेम विवाह का एक और पहलु है| विवाह के पहले का एक दुसरे पर का एकाधिकार जब विवाहोपरांत कई और रिश्तो मे जगह पाने की कवायद शुरु करता है और वास्तविकता की धरातल पर कई और चीजो से रुबरु होना पड्ता है, सिर्फ एक चीज ही प्यार को प्यार बने रखने मे काम आ सकती है, और वह कुछ नही बस प्यार ही है| बस एक दुसरे की भावनावो का ख्याल रख कर परस्पर प्यार को बनाये रखे, यकीन मानिये यह दोस्ती उम्र के साथ बढती ही जायेगी|

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  67. उसके हिस्से का चांद आज भी चमकता है
    मेरे हिस्से का आधा काला
    अष्टमी है शायद

    दोस्ती खत्म नही तो कम तो हो ही जाती है कारण
    पुरुष का अहं..

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  68. "दोस्त! .......अब सिर्फ़ पति है...." koshish karunga ki dono ke beech mein balance banaakar rahoon... :)

    triveni atiuttam...

    aaj bahut dino baad sabke blogs padhne ka waqt mila hai...

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  69. पहले तुमने बाल झड़ने की बात की तो मैं समझा हिस्से का चांद चमकता है बालों के बीच से झांकते चांद के लिये कहोगे....;)

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  70. bahot khub sir g...aap ko itne din na padh ke shayad maine hi kuchh khoya hain...is baat ka ehsas kar diya...

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  71. तहे दिल से आप सभी का शुक्रिया

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  72. Mujhe nahee pata ki kahan aur kaise comment karun...do "Triveni" jo aaj padhee wo isqaadar gehree hain, ki mai nishabd hun....aur ye qissa...aur ye shabd," Dost ! Ab wo sirf patee hai.."ke mujhe hila gaye...! Bohot kam shabdonme aap itnaa kuchh keh jaate hain ki rashk hota hai !
    Mere blogpe shayad aapko apne sawalon ke kuchh, kuchh uttar mil rahe honge aisee ummeed kartee hun !

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  73. बहुत ही शदार पोस्ट! अफ़सोस बहुत बाद में पढ़ पाया.

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  74. is post me aapki saheli ke dil ka kitna dard hain ,vah bhi sirf vakay me .bahut hi achchi prastuti .

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  75. वाह डॉक्टर साहब
    क्या त्रिवेणी लिखी है.
    आप एक त्रिवेणी की किताब क्यों नही लोख देते?

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  76. @प्रिया .अभी उस काबिल नहीं समझता अपने आप को

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  77. बहुत सुन्दर त्रिवेणी है और पोस्ट तो है ही।

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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