2009-03-06

आप जो मेरी जानिब होते !!!!!!!

पहली हर चीज कितना थ्रिल देती है है ना......पहला किसी पतग को काटा हुआ पेचा........ मोहल्ले के खूंखार बोलर पर लगाया हुआ वो पहला चौका ..... . पहला स्कूल बंक.....स्कूल के माने हुए गुंडे को आँख मीच कर लगाया हुआ पहला घूँसा ....टूशन साथ पढने वाली काली स्कर्ट को पहला ख़त....वो पहली बार ऍ टी एम् से पैसे निकलना ..हाय कितना रोमांटिक है ना !
ग़लतफ़हमी मत पालिये..... अपने चारो ओर नजर डालिए ...आप कौन से फ्लोर पे खड़े है .तीसरे चौथे .....या .......किस्मत की लिफ्ट कभी खाली नहीं मिली आपको ....ओवरलोड का इशारा लिफ्टमेन करता ओर आप खिसियाये से बाहर निकल कर एक ओर खड़े हो जाते या अपने सामने बंद होते लिफ्ट के दरवाजे को देखते ..... फिर सीडिया दर सीडिया चढ़कर कर आप जिंदगी की बिल्डिंग में हर फ्लोर में हांफ हांफ कर चढ़ते ...आखिरी सीडी पर सफ़ेद कपड़ो में देवदूत मुस्कराते बोलते ..."यू आर लेट माय सन ...पर लिफ्ट ....आपके शब्द मुंह में रह जाते ..."नो आरगयुमेंट माय सन" .....
बरसो से आप उस मंदिर को ढूंढ रहे है .... जिसकी घंटी पकड़ कर (भले ही थोडा उचक कर )आप कह सके "आज खुश तो बहुत होगे तुम "....वैसी घंटी ओर वैसी एक मूर्ति देख एक दिन .आप पोज़ लेते है ..शर्ट को बाहर निकल कर गाँठ मारते ही है .कि ........ मंदिर का पुजारी ...यहाँ केवल क्रेडिट कार्ड चलता है बेटे .... .........
निराश हताश आप फ्लेश्बेक में चले जाते है....
जिस क्योशचन को छोड़ आपने रात भर सारी किताबे घोटी है .... अगली सुबह पेपर में सबसे पहले वही दिखता .. ..ओर हॉल में चित्रगुप्त का अट्हास गूंजता ......ओर फिर वो .....
आपकी पहली ऍ. सी यात्रा ...राजधानी ट्रेन चेयर कार ...दस घंटे का सफर .....एक कमसिन खूबसूरत हसीना कंधे पर बेग टाँगे दूर से आती दिखती है ..आपके दिल की धड़कन बढती है....धीरे धीरे अहिस्ता आहिस्ता वो आपकी बराबर वाली सीट पर बैठती है....आप का दिल अभी बाग़ बाग़ हुआ ही है ...की अचानक एक मोटे पसीने में गंधाये अंकल एंट्री मारते है मैडम ये मेरी सीट है.....बिजली कड़कने की वही चिरपरिचित आवाज ...कर्टसी रामानन्द सागर .... आप इधर उधर देखते है ..ट्रेन की खिड़की के बाहर मुस्कराते चित्रगुप्त ...अभी तुम्हारा टर्न नहीं है वत्स .
वो पहला ..नहीं चौथा या शायद पांचवा छोडिये प्यार कहाँ किसी गणित में बंधता है ...रात भर कागजो में उलझकर आप ग्रीटिंग कार्ड पर कुछ जुमले लिखने में सफल हुए है ..केवल आँखों पर चुनकर फ़िल्मी गीतों की एक केसेट तैयार कर .उलटी शेव खीचकर आप वही काली शर्ट पहन कर (जिसमे आपके दोस्त कहते है बड़ा स्मार्ट दिखता है )..लोकर रूम में एक गुलाब हाथ में लिए उसे "बर्थ डे विश" करने पहुँचते है .पर उन्हें किसी ओर से गले मिलता देख आपका दिल " रंगीला "के आमिर खान की तरह टूटा है बस..... फर्क इतना है की कोई बेक ग्राउंड म्यूजिक नहीं बजता ..निराश .टूटे हुए ..धीमे कदमो से आप बाहर निकलते है साइड में चित्र गुप्त खड़े है ..कभी कभी वो भी रियायत देते है इसलिए मुस्कराते नहीं ..आप उनसे लिपट कर रोना चाहते है...पर वे "अभी ड्यूटी पर हूँ" कहकर पीठ थपथपा देते है.....

ओर अब जब लगता है टॉप फ्लोर का सफ़र बस कुछ सालो में तय हो जायेगा .....


उमस भरी दोपहरी में
बादल का एक टुकडा आकर
पडोसी की छत भिगो गया
अजीब बेवफाई है !



ये शायर ओर कवि बड़े खतरनाक होते है ... साले ....सलीके से गाली देते है ..ओर हम शेर समझ कर ताली बजा देते है... फ्लाईट में ...एक पतले कम गंधाये इन्सान का बिन मांगे दिया फलसफा.

ओर ऊपर वाला फोटोग्राफ बेंगलोर के एअरपोर्ट से चलती गाडी से मोबाइल से ..

89 टिप्‍पणियां:

  1. फिर सीडिया दर सीडिया चढ़कर कर आप जिंदगी की बिल्डिंग में हर फ्लोर में हांफ हांफ कर चढ़ते ...आखिरी सीडी पर सफ़ेद कपड़ो में देवदूत मुस्कराते बोलते ..."यू आर लेट माय सन ...पर लिफ्ट ....आपके शब्द मुंह में रह जाते ..."नो आरगयुमेंट माय सन" .....


    उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !

    अनुराग जी पहले पहले कमेंट करने में भी और पहले कमेंट को पढने में भी कितना मजा आता है
    बहुत ही अच्‍छा लिखते हो आप

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  2. " मुझको भी लिफ्ट करा दे ...बँगला मोटर कार दिला दे " अदनान भी यही गाते रहे ना ?
    डा. पासा करके खुशी मिली होगी आपको है ना ? और कई लिफ्ट , बिलकुल सही मँज़िलोँ पे रुकी होगी :)
    कहते हैँ ना," You can't have it all buddy " फिर भी, बहुत बढिया लिखा है जी ......

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  3. दिल की बात मानना , सच्चाई का दामन पकड़ना ...लेकिन फिर रोना ये जानकार कि दूसरों को वो सब मिल गया और मैं रह गया .....
    आखिर चित्रगुप्त के सीने से लिपट कर रोने का मन तो करता ही है ...

    बहुत प्यारा लिखा है आपने ...सचमुच दिल खुश हो गया

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  4. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !ya fir yahi thi asli kamai! :)

    dil bhi to humhi baar baar lekar pahunch jaate hein tudwaane.. ab dil ko kaun rokey?

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  5. अरे यही तो मेरे साथ हुआ था . अरे यह तो मैं भी लिख सकता था . यही लगता है जब मै आपको पढता हूँ लेकिन यह असंभव है क्योकि मै डॉ. अनुराग नहीं हूँ .

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  6. आप जो मेरी जानिब होते
    खुदा कसम हम भी गालिब होते
    माफ़ कीजियेगा...आजकल मूड होलियाया हुआ है :) आप भी चित्रगुप्त से हिसाब किताब कर रहे हैं भले आदमी हैं, तो कहती हूँ सब मिलकर चल लेते हैं, एक ही बार में clear हो जाए की माजरा क्या है? चित्रगुप्त एक और आदमी इतने सारे, बहुत नाईंसाफी है...इसलिए बेचारा हमें भूल जाता होगा.

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  7. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !..
    bahut achhe..
    very good :)

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  8. जिस क्योशचन को छोड़ आपने रात भर सारी किताबे घोटी है .... अगली सुबह पेपर में सबसे पहले वही दिखता .. ..ओर हॉल में चित्रगुप्त का अट्हास गूंजता ......
    ऐसा तो हमारे साथ भी हुआ है और हमने भी जम कर चित्रगुप्त को कोसा है.

    पर क्या करे अकेला बेचारा चित्रगुप्त,

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  9. bilkul sahi anurag sir .. pehli baar ki cheezein.. chahe wo rat ko 3 baje kisi ka pehli baar phone ana aur kehna.. i ws missing u.. ya.. subah subah hostel ke kamre par darwaze ke neeche se sarka hua kisi ka card dekhna..

    khoobsurat alfaaz.. hatz off sir...

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  10. बहुत कुछ कहती हुयी मेल है यह.........
    समय के साथ साथ बखरी हुयी यादों और हकीकत के साथ का सफ़र कहती

    अंतिम लेने बहुत ही खूब हैं
    उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !..

    उत्तर देंहटाएं
  11. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !


    दिल की बात कह दी आपने... जीवन भर यही तो भोग हैं... साधू।

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  12. अनुराग जी, कहीं कहीं यादों की प्रत्यंचा को ऐसा खीच दिया कि कमानी टुटते टुटते बची और तीर जो छूटा तो सीधे यादों के झुरमुट से होता तीरछे ही बादलों के आर पार। क्योंकि उन्हीं बादलों के बनते बिगडते आकार में कहीं वो पहली यादे हैं तो कहीं घरौंदो के साये। पहला खपरैल फोडने पर उठी आवाज - कौन है रे और फिर दुबकने पर मिलने वाला अहसास.....ओह...बच गया :)
    यादों को भिगोते चले हो बंधुवर। बहुत खूब।

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  13. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !

    बढ़िया! मैंने पहले भी आपके आलेख पढ़े हैं। आपकी लेखन शैली मुझे अच्छी लगी।

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  14. गुज़री बातों को लिखने का एक नया अंदाज़- बढिया। मंज़र भोपाली का एक शेर है-
    सब लिखाई पुरानी मिटा कर
    इक फसाना हम नया बनाएं
    आएं, तिनके मुहब्बत के चुन कर
    आशियाना नया बनाएं॥

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  15. एक पतले कम गंधाये इन्सान का बिन मांगे दिया फलसफा

    ji main clearly samajh nahin paaya aapki baat...This is the philosophy someone told you, when you were travelling form bangalore...or its your creation??

    As per commments it seems, you've written it....

    Its the first blog I have visited besides poetry....and I liked it...

    Just started reading...aur padhta hi chala gaya, rok hi nahin saka khud ko..

    Well done..

    yogesh249@gmail.com

    http://tanhaaiyan.blogspot.com

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  16. भाई साहब.. लगता है आप भी अभी फगुनिया मूड में आ गये हैं..
    आज का पोस्ट तो इसी मूड में लिखा हुआ लग रहा है..
    बहुत बढ़िया.. :)

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  17. triveni??

    photo bhut aachchaa he..

    lekh ki taarif sabane kar di... dil ki baat dil se..

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  18. सत्य कथन और आपकी लेखनी दोनों समानांतर चलती है ....
    हलाकि त्रिवेणी को मिस कर रहा हूँ मगर इसने पूरा कर दिया...

    उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !

    बहोत खूब....
    आजकल आपके दर्शन नहीं हो रहे है ... माना के रिसेशन है मगर .....



    आपका
    अर्श

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  19. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई बहोत खूब....

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  20. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !


    -और हम सेम पिंच करते आँखें भिगोये बैठे रह जाते हैं..जिन्दगी की गाड़ी फिर भी नहीं रुकती..वो कान फोडू...छुक छुक छुक...कब शांति मिलेगी????

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  21. no arguments,devdut,zindagi ki lift,waah kamal kamal,sirf aapki kalam hi karti hai koi jadu sa asar,aur wo jo zindagi mein pehli baar kch achha ehsaas hmmmmmm,badal bada bewafa nikla,sundar post.

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  22. अपनी गलतियों पर भी लोग नाज करते हैं,
    कौन अब गुनाहों पर शर्मसार होता है।
    आपने दिल की सारी बात कह दी अनुराग बाबू,
    वरना कौन अब दिल की बातों पर विश्‍वास करता है।

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  23. मनमाँगा भी बहुत कुछ होता है परन्तु उसे हम भूल जाते हैं। एक प्रश्न बिना पढ़ा आया याद रहता है जो नौ प्रश्न पढ़े हुए आते हैं, वे हम भूल जाते हैं।
    लेख अच्छा लगा परन्तु त्रवेणी खो गई।
    घुघूती बासूती

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  24. ज़िन्दगी को एक इमारत की तरह देखना... 'किस्मत की लिफ्ट कभी खाली नहीं मिली आपको'... और रेल के डिब्बे के सफ़र से जीवन के किसी अध्याय से मिलान करना..

    बहुत ही अद्भुत कल्पना है..
    ख़ास कर चित्रगुप्त का भी बेहद संवेदनशील होना मन को भा गया!
    आप को 'खुद को बाँटने को 'वह तो मिल ही जाता है.हर मोड़ पर...हर किसी को यह भी नसीब नहीं होता..

    बिन मांगे दिए फलसफे में उन जनाब ने कुछ गलत तो नहीं कहा...

    [बादल की बेवफाई ..बहुत खूब!यह बरसात क्षण भर की ख़ुशी ही तो है न..खुल के बरसने की प्रतीक्षा करीए!]
    -har baar ki tarah..aap ki lekhani mein jaadu hai... :)

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  25. Oh haan...picture achchee hai..mobile se khinchi hai magar achchee aayi hai...

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  26. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई बहोत खूब.... वाह जी क्या बात है, हर वो बात जो पहली बार हो ....
    धन्यवाद

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  27. यार, लिखते तुम कीबोर्ड से हो..
    पर एहसास कलम का होता है..
    और प्रभाव जैसे कि कैमरे का ?

    जिस तरह से पैन करते हो, फ़ेड-इन व फ़ेड-आउट के दर्शन...
    साथ में, ज़ूम इन और ज़ूम आउट ऎसा कि, 'पसीने में गंधाये अंकल’ यहाँ तक गँध मार रहे हैं :)
    यह क्या चक्कर है, भाई ?

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  28. कोई गाड़ी की खिड़की से
    हवाई जहाज़ की आड़ में
    आसमा कैद कर ले...
    शब्दों के शतक लगा
    चित्रगुप्त को धर ले...
    छप्पर या लिफ्ट में
    जहाँ भी छेद करे
    वाह! वाही लूट ले

    सच में...
    अजीब बेवफाई है :-)

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  29. जाहिर है, सब कुछ ऐसा सामने आता गया जैसे कई चित्र एक साथ सजा दिये गये हों.
    पढ़ा तो पढ़्ता ही गया, रुका नहीं और लगा कई जगहों पर मैं शामिल हूं.

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  30. यह डाक्टर अमर कुमार सही कह रहे हैं। आपकी कलम/कीबोर्ड चूमने का मन करता है।

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  31. ड़ाक्टर से बढिया राईटर हो। नो। नो आर्ग्यूमेंट माई डियर डाक्टर्।

    बुरा न मानो होली है।

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  32. पहली बार की हर बात रहती है याद ..इस लेख की हर बात याद रहने वाली है ..चित्र बहुत बढ़िया है पर आपकी त्रिवेणी की आदत पड़ गयी है उसको मिस किया ..

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  33. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !

    " " बेवफाई की भी हद हो गयी.... बादल भी.....??"

    Regards

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  34. हमारी तो अक्सर ही चित्रगुप्त जी से मुठभेड़ होती रह्ती है। और वो हर बार मुस्कराते मिलते है और हम उदास। फिर वही आप वाली बात(पहली हर चीज कितना थ्रिल देती है) पहली बार किसी लड़की का समझाना कि "अगर भगवान(इंसान भी) तुम्हें दुख देकर अंचभित करें तो तुम भी उस दुख में खुश रहकर उसे अंचभित कर दो। फिर देखो जिदंगी का आनंद।" तब से अंचभित करने की कोशिश में लगे रह्ते कभी वो जीतता है और कभी हम। खैर आपकी पोस्ट को पढ़कर जो आनंद आता है उसके लिए शब्द भी नही मिलते मेरे को। फिर भी कह सकते है कि अद्भुत सा लगता है।
    उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !

    वाह जी वाह क्या बात है। फिर चित्रगुप्त मुस्करा गया।

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  35. गजब !
    आज तो आपने चित्रगुप्त को भी शामिल कर लिया । :)

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  36. ऐसे ही विरोधाभासों और विडंबनाओं में बीत जाता है जीवन !

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  37. पहली हर चीज कितना थ्रिल देती है है ना...

    bahut sahi aur bahut khub likha hai apne...

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  38. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  39. यार, मजा बांध दिया यार! अपना भी सब पहला-पहला याद हो आया! कैसे लिख लेते हो इतनी रोमांटिक बातें?

    - आनंद

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  40. फिर से आपने ज़िन्दगी से रू ब रू करा दिया...
    मीत

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  41. kudos ......
    बरसो से आप उस मंदिर को ढूंढ रहे है .... जिसकी घंटी पकड़ कर (भले ही थोडा उचक कर )आप कह सके "आज खुश तो बहुत होगे तुम "...

    ओर
    बिजली कड़कने की वही चिरपरिचित आवाज ...कर्टसी रामानन्द सागर .... आप इधर उधर देखते है ..ट्रेन की खिड़की के बाहर मुस्कराते चित्रगुप्त ...अभी तुम्हारा टर्न नहीं है वत्स .
    ब्रेवो
    फर्क इतना है की कोई बेक ग्राउंड म्यूजिक नहीं बजता ..निराश .टूटे हुए ..धीमे कदमो से आप बाहर निकलते है साइड में चित्र गुप्त खड़े है ..कभी कभी वो भी रियायत देते है इसलिए मुस्कराते नहीं

    क्या कहूँ ?जब कोई गंभीर लेखक फागुनिया मूड में आता है तो डर लगता है की क्या वही एक्सपेक्टेशन पूरी होगी ,पर आप पूरी कर देते है ,शीषक देखा लगा कोई नज़्म होगी यहाँ आई तो आपकी नयी शैली दिखी .काली स्कर्ट ,स्कूल का गुंडा,खूंखार बोलर पर चौका ओर आखिर में पतले गंधाये आदमी का फलसफा सब कुछ परफेक्ट .
    happy holi doc.

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  42. Though I have always loved reading Prose I avoid reading it and getting into that passion as want to restrict myself to Poetry while managing me time between Poetry and life.
    I generally scroll your posts to read the Triveni. Today dont know how I happened to read this short article and realized you are a good writer besides a good Poet!

    BTW, .. just wanted to Sher ... I mean, share ... :)
    They dont clap for good Sher/Shayari as per the Shayari culture. (They clap when they dont like a Shayar's Shayari)

    God bless
    RC

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  43. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  44. हांफता हुआ बड़ी मुश्किल से अब पहुंचा हूँ आप के ब्लॉग पर...जब जब आने की कोशिश की चित्रगुप्त भाई कहते "यु आर इन क्यू...आप कतार में हैं.." और मैं लोगों को आपके ब्लॉग पर कमेन्ट कर हंसते हुए जाते हसरत से देखता रहा...पूछता रहा चित्रगुप्त भाई मेरा नंबर कब आएगा????
    आप किसी दावत पर लेट पहुंचे हैं जहाँ आपके आने तक या तो खाना ख़त्म हो चुका होता है या इतना ठंडा की खाया नहीं जा सकता...लेकिन दावत और आपकी पोस्ट में ये ही फर्क है...ये हमेशा ताज़ी मिलती है, आप चाहे जब पहुंचें.....मुझे इसीलिए कभी आप के ब्लॉग पर लेट आने का मलाल नहीं हुआ...पढने को न मिले तो मलाल जरूर होता...
    क्या लिखा है आपने...वाह...एक दम नया अंदाज़...और कितना दिलचस्प.....बस कमाल है जी कमाल....
    "बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
    किस छत से गुज़रना है किस छत को भिगोना है"
    या फिर
    अबके सावन में मेरे साथ अजब बात हुई
    मेरा घर छोड़ के, शहर में बरसात हुई
    नीरज

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  45. टिप्पणी कर रहा हू अब आप यह मत कहना ..."यू आर लेट माय सन ... | थोड़े से शब्दों मे सारी बात बता दी । वैसे मैने सुना है कि चित्रगुप्त जी का ओफ़ीस अब ओनलाइन हो गया है ।

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  46. aap ko to movie banani chahiye...itne sare log kuch creative karne ke bajay ajib ajib kam mein kyu fanse hai...aap doctor-i kar rahe ho...kush kuch kar raha hai....mil jao dono aur koi hangama kar lo....

    उत्तर देंहटाएं
  47. aap ko to movie banani chahiye...itne sare log kuch creative karne ke bajay ajib ajib kam mein kyu fanse hai...aap doctor-i kar rahe ho...kush kuch kar raha hai....mil jao dono aur koi hangama kar lo....

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  48. सबसे बढ़िया पहला

    स्कूल के माने हुए गुंडे को आँख मीच कर लगाया हुआ पहला घूँसा

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  49. सर जी.....कितने पेंचो-खम हैं इस लेखनी के....हर बार एक नायाब नजारा दिखा देते हो आप और मैं शब्दों के इस बहाव में डूबता-उतरता सोचने लगता हूँ कि ये मेरठ का चक्कर किस्मत में कब लिक्खा है.....
    इस बार की त्रिवेणी कहाँ हैं? मैं तो अंदाज़ा लगा रहा था कि कोई रंगों में रंगी भीगी-भीगी सी त्रिवेणी आयेगी अब के.....
    खैर मुबारका होली

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  50. "....सलीके से गाली देते है ..ओर हम शेर समझ कर ताली बजा देते है"
    जय हो!

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  51. वाह क्या बात है? बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  52. Hamesha baadke 50 mehee meree tippanee shumaar hotee hai..isliye mere pehle jo keh jaaten hain, unke saath shamil ho jaatee hun...alfaaz aur alagse kaise milen?
    Har baar hashr hota hai aapke lekhanse.....! kaash! mai bhee itna behtareen likh paatee..!

    Meree postpe aapne jo sawal kiya,(jise shayad aaj, dobara padhneke bad mai samajh paa rahee hun) uskaa jawab to mai apne lekhan me kayee baar de chukee hun...kayi saare karan bane, jo meraa praktan the...un sabse chhutkaaraa thaahee nahee...!

    उत्तर देंहटाएं
  53. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !


    अजीब फ़लसफ़ा है, इन्सान की फ़ितरत का. मेरा मित्र हमेशा कहता था- हमारे साथ ही ऐसा क्यों होता है?

    कालिदास की उपमायें सर्व विदीत और प्रसिद्ध है. आप की सिमिली का अंदाज़ भी वैसा ही अनोखा और स्तुत्य है. जिंदगी की लिफ़्ट,भगवान से उलाहना, चित्रगुप्त की एंट्री, सभी बातें एक फ़िल्म की मानिंद आंखो के सामने घुमा देते हैं आप, जादुगरजी.

    मगर अब अलग बात .जब से सोची तो ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बदल गया. अगली लिफ़्ट का इंतज़ार तो करना ही है,किसी को लिफ़्ट नसीब तो कोई पैदल ही सीडी चढ रहा है. क्योंकि टॊप मंज़िल की चाह तो ही कार्मिक संसार का गाजर है. मगर नहीं पहुंचे तो जिस भी मंज़िल पर थोडी प्यार भरी छांव मिली वहीं रम लेंगे.

    अगली राजधानी नही मिली तो तो लोकल में लद लेंगे, सामूहिक गंध के समुंदर में गोते खाते हुए.भला किसी दूसरे की उजली कमीज़ पर नज़र नही मारेंगे तो क्या बिगड जायेगा ? चित्रगुप्त भी जायेगा कहां? आखरी दिन तो एंट्री देनी ही पडेगी.इसे नैराष्यवाद के नहीं , सकारात्मक चष्मे को चढा कर देखा तो सब जगह हरा ही हरा है.सावन के आने की राह देखने की क्या ज़रूरत है?

    शायद यही एक सेंडविच है जो रास आयेगा -यथार्थ और फ़ेंटासी का, बीच में चटनी या स्प्रेड की जगह आप के सपनें...

    हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले,
    अजनबी जैसे अजनबी से मिले..

    उत्तर देंहटाएं
  54. आपका गद्य शायरी की रूमानियत का आभास देता है ,वशायरी में गद्य की गंभीरता और विस्तारहै

    उत्तर देंहटाएं
  55. होली के रंगों में सब डूबे हुए हैं और कहाँ आप चित्रगुप्त के जानिब खोमचा लगा बैठे। बादल की बेवफाई करने की लाईनें गजब की हैं। होली की शुभकामनायें।

    उत्तर देंहटाएं
  56. अपने साथ तो कई बार ऐसी चोट हो चुकी है ...जब किस्मत की लिफ्ट में बैठते बैठते रह गए!कमबख्त पैर रखने ही वाले होते हैं तभी कोई और दौड़ कर घुस जाता है और दरवाजा बंद....अब कहते रहो " अरे यार ..फिर से "

    उत्तर देंहटाएं
  57. Baadal ka ek tukra
    padosee kee chat bhigo gaya
    ajeeb bevafai hai........

    Atyant sunder bhav.......
    Shayad baadal ke tukre ko aapke padosi se pyar ho gaya ho.....

    उत्तर देंहटाएं
  58. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !
    बहुत प्यारा लिखा है आपने । ढ़ेरो बधाईयां

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  59. Sab kuch padha aur baad ka sher aur baad main likhi aapki special highlated tippni bhi

    aap waqayi kamaal ke writer ho

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  60. हमेशा की तरह एक और बेहद खूबसूरत त्रिवेणी और एक और किस्सों की लड़ी। सुनने में और पढ़ने में जो भली सी मालूम होती है। वाकई जिन्दगी में कितने ऐसे किस्से हो जाते हैं जब चित्रगुप्त कह जाता है अभी नहीं वत्स, दिज इज नाट यार टर्न, लेकिन जब वो अंतिम सत्य होता है तो कोई नहीं कहता कि दिज इज नाट यार टर्न।

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  61. रंगों के पर्व होली की आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामना .

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  62. .उलटी शेव खीचकर आप वही काली शर्ट पहन कर (जिसमे आपके दोस्त कहते है बड़ा स्मार्ट दिखता है )..लोकर रूम में एक गुलाब हाथ में लिए उसे "बर्थ डे विश" करने पहुँचते है .पर उन्हें किसी ओर से गले मिलता देख आपका दिल " रंगीला "के आमिर खान की तरह टूटा है बस..... फर्क इतना है की कोई बेक ग्राउंड म्यूजिक नहीं बजता
    सही कहा । कोई बात नही बादल पडोसी की छत भिगो गया ।
    बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
    किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है ।

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  63. Anuraag ji,
    आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाये.


    Meerut se aayi farmaish ko prastut kiya hai same post mein.. :)

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  64. मेरे देखे पहली बार आपने अपने कलेवर को मज़ाहिया पुट दिया है, और क्या खूब दिया है !

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  65. बहुत सुंदर रचना ...होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ...

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  66. sir g...bahot lambe arse ke baad padha aap ke blog ko...aaj to zarurat hi ho gayi thi jaise...

    itna hi kahunga...dil baag baag ho gaya...dil se...

    vaise ye sahi me khatarnak tha...

    ये शायर ओर कवि बड़े खतरनाक होते है ... साले ....सलीके से गाली देते है ..ओर हम शेर समझ कर ताली बजा देते है... फ्लाईट में ...एक पतले कम गंधाये इन्सान का बिन मांगे दिया फलसफा.

    उत्तर देंहटाएं
  67. पहली थ्रिल की बेवफाई
    या बेवफाई का थ्रिल
    कुछ तो होता
    अगर हम आपकी जानिब होते [शीर्षक से]

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  68. आपको एवम आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं.

    उत्तर देंहटाएं
  69. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !


    Kyaa kahne !!!
    Lajawaab post, hamesha ki tarah !!!
    Holi ki Shubhkaamnaaon ke saath :)

    उत्तर देंहटाएं
  70. bahut badhiya likha hai.Chitragupta ko daal kar bada masaledar bana diya diya :)

    उत्तर देंहटाएं
  71. Anurag ji, kai bar aapke blog pe aayi pr har bar tippani dene se vanchit rah gayi ...sabse pehle ..."HOLI MUBARAK" !!

    Aur aapki ye paktiyan dil chu gayin....
    उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !waah ...! Aur ham dekhte rah gaye..!?!

    उत्तर देंहटाएं
  72. मन को मोरा झकझोरे छेड़े है कोई राग
    रंग अल्हड़ लेकर आयो रे फिर से फाग..

    आदरणीय हिंदी ब्लोगेर्स को होली की शुभकामनाएं और साथ में होली और हास्य
    धन्यवाद.

    - सुलभ

    उत्तर देंहटाएं
  73. bahoot achhha likhta h aap, or sahabd nahi hote kuch kahne ka liya, or "khush to bahoot honge aaj" y to kai bar kaha h ,,,or chitrgupt ko bhi shyad staff ki shortge h .....sab line m hi rah jate h ....

    उत्तर देंहटाएं
  74. सही कहा आपने, हर पहली बात में एक रूमानियत होती है।


    होली की हार्दिक शुभकामनाऍं।

    उत्तर देंहटाएं
  75. sahi hai ustaad ji , bilkul sahi hai ....main bhi sochta hoon kabhi kabhi ki chitrgupt meriu entry le le to saara ka ssara shor khatam ho jaaye zindagi se....

    उत्तर देंहटाएं
  76. Dear Dr Anuraag,

    वाकई, आप एक अच्छे त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं बडी ही बारीकी से खाल उतारते हैं. उपमाओं को तो सानी भी ढूंढना पडेगा चित्रगुप्त का अट्टाहस / काली स्कर्ट वाली को लिखा खत / रात को छोडा हुआ प्रश्न.

    आपका मेरे ब्लॉग पर आना और आपकी प्रतिक्रिया का धन्यवाद.

    मुकेश कुमार तिवारी

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  77. अनुराग जी इन सभी पोस्ट्स को क्रमशः पेपरबद्ध करवा कर प्रकाशन की सोचें मैं तो यह सोच कर ही प्रफुल्लित हूं कि संवेदना से भरे आलेख हमेशा सहजने योग्य हो जायेंगें.... वाह...

    उत्तर देंहटाएं
  78. और लीजिए, आपके लिए एक आॅस्कर.....या ज्ञानपीठ.....जो भी आप समझें........संवादघर के पसंदीदा ब्लागस् में ‘दिल की बात’ को शामिल किया गया हैऽऽऽऽऽऽ

    उत्तर देंहटाएं
  79. kya baat hai sir aap chitrgupt ko bahut yaad karte hain....maano aapka koi puraana dost ho jo baat be-baat aapko yaad aata rehta hai :)

    उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !

    baadaalon ne kab waada kiya tha ke wo hamari chhat pe barsenge?? ye tou bas humne ummeed laga rakhhi thi...aur ummedein tou hoti hi tootne ke liye hain :)

    Phir se Jagjit sahib ki ghazal yaad aa gayi...

    "Barsaat ka baadal tou deewana hai kya jaane...
    kis raah se bachna hai kis chhat ko bhigona hai"

    उत्तर देंहटाएं
  80. कुछ समझने की कोशिश कर रहा हूँ...कुछ-कुछ समझ में आ रहा है....कुछ नहीं भी समझ आ रहा है...अरे मुझ पर से रंगों का खुमार जा ही नहीं पा रहा है....अतीत की याददाश्त से कह रहा हूँ कि आपको पढ़ कर अब भी मज़ा आ रहा है....!!.......अब ए बात अलग है कि मेरी टिपण्णी ना आने से आपको पता चल ही नहीं पा रहा है.....!!

    उत्तर देंहटाएं
  81. उमस भरी दोपहरी में
    बादल का एक टुकडा आकर
    पडोसी की छत भिगो गया
    अजीब बेवफाई है !

    बहुत ख्होब अनुराग जी ...लाजवाब !!!!!!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  82. अनुराग जी,
    हर पहली बात में एक रूमानियत का आपने जो पुनः प्रसारण किया, मुझसे पहले टिप्पणी करने वाले सभी लोगों ने दिल खोलकर न केवल सराहा बल्कि लगे हाथों आपने - अपनी "पहले" फ्लैश्बक की अनुभूति करने में जरा भी देर न लगाई.

    सभी पूर्व (मेरे से समस्त "पहले") की टिप्पणिया स्वतः सिद्ध कर रही हैं की आपकी लेखनी, सोच, एवं शैली मैं कितना गहरा तालमेल है की इतनी गहरी छाप छोड़ गई.

    आपके लेख का पुछल्ला "ये शायर ओर कवि बड़े खतरनाक होते है ... साले ....सलीके से गाली देते है ..ओर हम शेर समझ कर ताली बजा देते है... फ्लाईट में ...एक पतले कम गंधाये इन्सान का बिन मांगे दिया फलसफा."
    भी तो अपनी तरह का पहला ही एक पतले कम गंधाये इन्सान का बिन मांगे दिया फलसफा ही तो है. हो सकता है बाद में अधिक गंधाये और सभी खुश्बंधायों से भी ऐसा ही फलसफा पढने - सुनने को मिले................

    चन्द्र मोहन गुप्त

    उत्तर देंहटाएं
  83. भाई अनुराग जी,

    संवेदनाओं की अनुभूति आपकी गजब की है और साथ ही लेखनशैली उसे और भी मूर्तिरूप प्रदान कर रहा है.

    "तकलीफ को किसी अनुवाद की आवश्यकता नहीं होती ...."
    पढ़ कर लगा की आपने मन की बात कह दी, पर उन्हें क्या कहे जो किसी भी प्रकार का अनुवाद नहीं समझना चाहते.................

    आपने पुनः लिखा है "....आस्था ....श्रद्धा ...या हालात की बेबसी में कोई उम्मीद की चाह? तुम कहाँ हो ईश्वर ????"

    गीता में कहा गया है कि ईश्वर हर जगह है, पर वह हर किसी की तब तक मदद नहीं करता जब तक वह अपने हिस्से की भुगत नहीं लेता.

    जो लिखा है वह तो भोगना ही होगा, पर अपने कर्म का लक्ष्य भी खुद ही तय करना होगा.

    आपने यह भी लिखा कि "....अजीब बात है अपने ही देश में अपने ही भगवान् को बंदूको के साये की जरुरत है .हम कहाँ जा रहे है ?"

    भगवन को कभी भी बन्दूक के सायों की दरकार नहीं रही, ये दरकार भयभीत भक्तों की है, पत्थर की मूर्तियों के लिए नहीं बल्कि वहां इकठ्ठा कर रखी अकूत संपत्ति और अपने अस्तित्व की.

    गांधी ने भी पूजा की, त्याग का अनोखा उदहारण पेश किया, शरीर से वस्त्र भी कम करते गए, परिवार मोह छोड़ कर जन-जन के हो गए, उनसे कोई क्या लूट सकता था, सिवाय उनके शरीर के.

    जिन्हें शरीर भी बधय्मन लगा, उन्हों ने उसे भी समाप्त कर दिया फिर भी गांधी बाबा कह ही गया "हे राम"....

    शायद यही है "....आस्था ....श्रद्धा ...या हालात की बेबसी में पहुचे हुवों की उम्मीद, चाह "


    टिप्पणी शायद कुछ ज्यादा ही बड़ी हो गई पर करून क्या, विषय एक नहीं कई इकठ्ठे उठ खड़े हुए थे, फिर भी रुक रह हूँ....................


    चन्द्र मोहन गुप्त

    उत्तर देंहटाएं
  84. आपकी ख्वाइश, सवाल, कन्फेशन, शिकवे, शुबहे और शनाख्त के इस हिस्से पर टिपण्णी का सिग्नेचर छोड़ते हुए चलते है.....बाकी लोग इतना कुछ बोले हैं के हम क्या बोले :-)

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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