2009-03-19

पहली बारिश !!!


बारिश की बूंदे जब किसी शाम को भिगोती है .. विंडस्क्रीन पर एक तलब उभरती है .. ... माजी की गलियों की इक तस्वीर.... ... कितने रंग है उसमे ..गिनने की कोशिश ... .. .. वाइपर खामोश रहता है...जैसे किसी की आमद का इंतज़ार हो... ......सिगरेट के धुंये की चादर में धुंधले से कुछ अक्स उभरते है ...ओर गुम हो जाते है....

इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
उसके
ओर लफ्जो के बीच
बे-इरादा
कुछ कोरे कागज
छोड़ आया हूँ

बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
बादल का इक टुकड़ा
काट के घर लाया हूँ
साल की पहली बारिश है आज .........

72 टिप्‍पणियां:

  1. एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रस्तुति . आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  2. ये तो टेलिपैथी से भी दूर क़ी गोटी है.. मैने भी आज नज़्म पर हाथ सॉफ कर लिया था और यहाँ पर आप भी.. पहली बारिश सबको भिगो गयी.. नज़्म तो खूबसूरत है ही.. पर ये तस्वीर कमाल क़ी लगी.. simply awesome!!

    ऐसी बारिशे अक्सर होती रहनी चाहिए..

    उत्तर देंहटाएं
  3. बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........
    " barish or uski khushnuma bunde ek mitha sa ehsaas jgaati si..."

    Regards

    उत्तर देंहटाएं
  4. नज़मो की पहली बारिश भी तो है...आज बहुत दिनों बाद. कुछ भीगे अल्फाज़ टाइम मशीन से होते हैं...किसी पुराने मोड़ पर फिर खड़ा कर देते हैं, भीगते रहने की ताकीद के साथ. उफ़ क्या लिखा है...इत्तेफाक के मोड़ो पर कुछ ख्वाहिशें छोड़ आया हूँ.
    पहली बारिश...खुशामदीद

    उत्तर देंहटाएं
  5. ऐसी बारिशो मे तन नहीं मन भीगता हैं वैसे बरसात दूर हैं अभी पर आप नए सजीव कर दी

    उत्तर देंहटाएं
  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  7. चैत की शुरुआत में सावनी छींटे....! पर्यावरणीय असंतुलन...!:) :)

    आपक नज़्मे हमेशा लाज़वाब होती हैं...!

    उत्तर देंहटाएं
  8. बिन बारिश के बारिश की बूंदों का सुन्दर एहसास..... बेहद खूबसूरत लगी यह अभिव्यक्ति .... यूँ ही दिल की ज़मीन पर लफ्जों की बारिश होती रहे

    उत्तर देंहटाएं
  9. बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज

    वाह डॉ.साहब बारिश के ये छींटे शिमला में भी पहुँच गये। बहुत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अनुराग जी जो बात अब तक कहता आया हूँ, आज आपकी रचना को पढ़ कर फिर कहता हूँ...आप लाजवाब हैं...वाह...
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ

    पढ़कर मुझे "सत्या" फिल्म में हरिहरन जी का गाया और गुलज़ार साहेब का लिखा गीत याद आ गया...

    बादलों से काट काट के
    कागजों पे नाम जोड़ना
    ये मुझे क्या हो गया....
    नीरज

    उत्तर देंहटाएं
  11. वाह -वाह -वाह !
    बेमिसाल ! !

    उत्तर देंहटाएं

  12. बेहतरीन पोस्ट..
    ईश्वर तुम्हें दीर्घायु करे, ताकि मेरे छोड़े हुये अधूरे कार्य कर सको..
    पर.. " सिगरेट के धुंये की चादर में धुंधले से कुछ अक्स उभरते है ..."
    सो.. अक्स देखने के लिये ' सिगरेट के धुंये ' का इस्तेमाल कुछ कम किया कर, भाई मेरे !

    हाँ, एक बात और ' बरसात का इन्तेज़ार कर लेता, तो तेरे संग मैं भी कुछ ज़्यादा भीग लेता..
    चल.. इसकी रिठेल-वैल्यू इतनी ज़बरदस्त है, कि बरसात में फिर पढ़वाना.. इस बार एक कप चाय के साथ !
    अब स्माइली भी लगाऊँ, क्या ?
    खुद ही लगा लेना

    उत्तर देंहटाएं
  13. उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ


    Bahut khub

    उत्तर देंहटाएं
  14. इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
    एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ

    बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........

    अनुराग जी,
    सुभानअल्लाह...!! आप तो बस नाज़्में ही लिखा करो.....आह...! भीतर तक क्चोट गइ

    बहोत सुंदर......!,बहोत खूब ,....! मशाल्लाह...!!! पर ये कोरा काग़ज़ किसके लिए छोड़ आए हैं...?

    उत्तर देंहटाएं
  15. सुदर नज्म तो है ही ..कुश से सहमत हूँ चित्र बहुत बढ़िया है ...पता नही यहाँ बारिस कब होगी ..

    उत्तर देंहटाएं

  16. संदर्भ : इस बरसात हाथों में चाय का कप !
    चाय तो मीनाक्षी बना ही लेगी, और..
    तब तक कुश भी पकौड़ी बाने वाली एक नवेली का जुगाड़ बना ही लेगा !
    ब्लागर है.. तो जुगाड़ मनोवृत्ति से अपरिचित भी न होगा !

    उत्तर देंहटाएं
  17. बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ
    वाह !

    उत्तर देंहटाएं
  18. ये पहली बारिश का ही कमाल होता है जो दिल को भी भिगो जाती है .....आपकी इस नज़्म को ही ले लीजिये .....

    उत्तर देंहटाएं
  19. @ गुरुवर अमर कुमार जी
    जब नवेली आएगी तो भाभी जी तो बस हुकुम चलाएगी.. वो थोड़े ही चाय बनाएगी.. वैसे पकोडियो के साथ साथ जोधपुर के गरमा गरम मिर्ची बड़े और प्याज क़ी कचोरी का भी जुगाड़ हो जाएगा.. जुगाडू का सर्टिफिकेट तो आपने दे ही दिया.. स्माइली लगाऊ? चलिए हम भी अपना स्माइली अनुरगवा पे छोड़ते है..

    उत्तर देंहटाएं
  20. नज़्म से पहले " विंडस्क्रीन पर एक तलब " किसी के आमद में रुका हुआ वाइपर सब कुछ एक नज़्म सा लगता है .वो एक इत्तिफाक ही था की ऑरकुट पर गुलज़ार से सर्च करते हुए पहली बार आपको वहां किसी कम्युनिटी पर ही पढ़ा था एक नज़्म थी शायद अपने बेटे पर लिखी हुई फ़िर आपके खंभे बन गए , वहां से ही ब्लॉग का पता मिला पर लगा आप नज़्म छोड़ चूंके है .आ फ़िर आपकी आमद अच्छी लगी .
    "इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
    एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच"

    सुभानाल्लाह !!!!! बेमिसाल !!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  21. इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ

    बहुत खूब अनुराग जी
    इस najm में अजीब सा गहरा एहसास है. शब्दों का इतना अनोखा प्रयोग है की दिल चाहता है कई बार पढूं. साल की पहली बारिश........बादल का एक टुकडा......बहुत ही खूबसूरत एहसास है इस रचना में. दिल के करीब से गुजरी हुयी दास्ताँ लगती है यह

    उत्तर देंहटाएं
  22. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  23. कितना गज़ब का लिखते हैं आप ...ये पंक्तियाँ दिल को छू गईं...

    बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........

    उत्तर देंहटाएं
  24. इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
    एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ

    खूबसूरत पंक्तियाँ। बार बार पढ़ रही हूँ, चित्र भी सुंदर......बहुत बढ़िया।

    उत्तर देंहटाएं
  25. क्या बात है!!!! ... आपकी नज़्म ... बहोत दिनों ... नहीं महीनो बाद !!! ... आज सचमुच सूरज कही और उग गया लगता है !!! ... और इतनी गर्मी में बारिश !!! हम भी मिस कर रहे है !!!

    उत्तर देंहटाएं
  26. बहुत ही सुन्दर रचना. तस्वीर तो गजब की है. आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  27. नज़्म के साथ चित्र न भी होता तो कुछ कमी न पड़ती ! आप तो अपने शब्दों से ही ऐसे चित्र खींच देते हैं कि बस ! इंसान चित्रखिंचित सा रह जाये !

    आभार !

    सुशान्त सिंहल
    www.sushantsinghal.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  28. पहले बारिश शब्द देखकर सोच में पड़ गया। यहाँ पोस्ट पर आया तो सबसे पहले फोटो ने मन मोह लिया। और आपकी इस नज़्म में भीग कर आनंद आ गया। मन किया बस इसमें ही भीगता रहूँ, ना कोई रोके ना कोई टोके पर ... यह बारिश जब बारिश के मौसम में आऐगी तब .......

    इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
    एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ

    अद्भुत। ख्यालों की किस स्याही से इतने प्यारे शब्द और जज़्बात लिखते हैं आप।

    उत्तर देंहटाएं
  29. बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........

    बेहतरीन! बादल के कुछ टुकड़े मेरे ब्लॉग पर भी बरसाएंगे क्या?

    उत्तर देंहटाएं
  30. ये बारिश की बून्दें, यह सेण्टीमेण्टालिटी और यह पकौड़ियों की टिप्पणियां! मिलाजुला स्वाद मिला पोस्ट पर!

    उत्तर देंहटाएं
  31. बादल गरजन लागे,
    मितवा का सँदेसवा
    बूँदन सँग लै आवे
    बहुत सुँदर ..
    - लावण्या

    उत्तर देंहटाएं
  32. शब्द कहाँ से चुन लाये ,अनुराग सा हो जाता है पढ़ कर

    उत्तर देंहटाएं
  33. चित्र इतना बढिया, और कविता भी...

    विंड्स्क्रीन पर एक तलब...वाह क्या Original Thought है !!

    इस चित्र में मुझे और भी बहुत कुछ दिख रहा है.

    मानवीय ड्रेक्युलीयन आकृति और उसकी ओर बढते हुए आक्रोश भरे हाथ, छोटी छोटी मछलियों का स्कूल, और बहुत कुछ.

    आपके पिछले पोस्ट नें काफ़ी गमगीन कर दिया. ज़मीनी हकीकत से रूबरू होने से संवेदन मन उद्वेलित हो उठता है, और रूह कांप उठती है. ईश्वर,
    वाकई तुम कहां हो?

    उत्तर देंहटाएं
  34. मन को शब्दों के बौछार से भिंगोने में पूरी तरह कामयाब रहे आप.....
    आप तो बस आप ही हैं.......लाजवाब !!!

    उत्तर देंहटाएं
  35. एक एक शब्द बोलता है बेसाख्ता!!

    एक अलग सी कशिश रहती है आपको पढ़ते:

    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ


    --क्या बात कही है और कितनी दूर तक जाती है. माँ शारदा का आशीष यूँ ही बरसता रहे आपकी कलम पर, डॉक्टर साहब!!

    उत्तर देंहटाएं
  36. अनुराग जी अनुराग जी अनुराग जी ,
    एक बात पूछता हूँ क्या ये नज़्म मैंने कभी भी कही पे पढ़ी है ? अगर नहीं तो ये इतना अपना अपना सा क्यूँ लग रहा है ... बहोत ही अपनात्वा लिए हुए है ये नज़्म... बहोत खूब लिखा है आपने... हर शब्द में एक कशिश है .... उफ्फ्फ्फ्फ़ ...

    अर्श

    उत्तर देंहटाएं
  37. आजकल नज़मो की बारिश है हर और यह पहली बारिश भिगो गई अंतर्मन को..

    उत्तर देंहटाएं
  38. बहुत उम्दा अनुराग जी..
    और आपकी हौसला-अफ़ज़ायी और ज़र्रा-नवाज़ी के लिये बहुत बहुत शुक्रिया


    हल्की हल्की बारिशें होती रहें
    हम भी फूलों की तरह भीगा करें

    उत्तर देंहटाएं
  39. ए तो बेहद नाइंसाफी है ऊपर वाले की -कहीं बारिश की फुहारें कहीं तपता खेत खलिहान -कुछ बूदें इधर भी भेजो न कुश और अनुराग भाई कुछ तो तपिश और खलिश कम हो !

    उत्तर देंहटाएं
  40. बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........
    बहुत ही सुंदर.
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  41. itne sidhe saral shabdo mein itni gehrai haasil kar pana, sir g aap hi ka kamaal hai...is se zyada kya kahun?

    उत्तर देंहटाएं
  42. कविता क्या है एक चित्र है और चित्र कविता सा है।
    घुघूती बासूती

    उत्तर देंहटाएं
  43. डॉक्टर साहेब अति सुन्दर .लेकिन पहली बारिश अभी ?यहाँ तो सूखा -सूखा सा है -पर जो भी है आपने मिट्टी की सोंधी महक का एहसास दिला दिया

    उत्तर देंहटाएं
  44. एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ
    bahut sunder ehsaason ki baarih,khubsurat picture ke saath,waah

    उत्तर देंहटाएं
  45. बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    आँखों के साथ मन भी भीग गया है...
    मीत

    उत्तर देंहटाएं
  46. har bar ki tarah aap asa likhte h ki bar padhna padhta h or picture to kamal h sukhe hue rait par abhi bunde padi ho jese or kuch kore kagaj etne bighe hote h ki vo bina likhe bhi bahooot kuch kahte h ....bahoot sunder

    उत्तर देंहटाएं
  47. इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
    एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ

    अनुराग जी क्या खूब आपने लिखा है । शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  48. इस रचना में त्रिवेनी की ली झलक नजर आती है...
    बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........

    पढ़कर मजा आ गया..

    उत्तर देंहटाएं
  49. अच्छी प्रस्तुति!
    मुझे भी कोई इसी तरह का अपना पुराना ख्याल याद आ रहा है आपकी रचना पढ़ के.

    उत्तर देंहटाएं
  50. बेहतरीन भावपूर्ण संस्मरण..... साधुवाद...

    उत्तर देंहटाएं
  51. इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
    एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच

    dont have words :)

    उत्तर देंहटाएं
  52. बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........

    गर्मी में बरसात के मौसम का एहसास करा दिया!इस बादल का एक कतरा हमारे शहर भी भेज दो!

    उत्तर देंहटाएं
  53. बहुत ही खूबसूरत नज़्म है.
    यूँ तो बारिश में /पर लिखी हर नज़्म कुछ भीगी सी होती ही है.जो आँखों को नमी दे जाती है.
    मगर यह कुछ रंग समेटे हुए है..और चित्र में विंडस्क्रीन पर गिरते पानी में रंगों की तस्वीर बना रही है.

    जिस कविता में /रचना से पाठक खुद को जुडा माने तो समझिये कि लिखना सार्थक हुआ.

    बहुत दिनों बाद आप की कोई नज़्म आई है...पसंद आई.

    उत्तर देंहटाएं
  54. बहुत खूब.. दिल को छू गई यह कविता.. अद्भुत संयोग देखिए कविता के प्रकाशन के बाद मेरे शहर में बारिश भी हुई..

    उत्तर देंहटाएं
  55. बहुत सुन्दर चित्र. लेख तो आपका हमेशा की तरह ही खूबसूरत है.

    उत्तर देंहटाएं
  56. रूमानी एहसास से लबरेज सुंदर रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  57. बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज
    ...
    क्या खूब!!!!!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  58. पहली बारिश की लाजवाब सोंधी महक !पहली बारिश की लाजवाब सोंधी महक !

    उत्तर देंहटाएं
  59. qatl sir ji.. faqat qatl.. :)

    bahut dino se soch rha tha koi nazm nahi dikhayi aapne.. aaj armaan poore kar diye aur kya kiye hain.. maar dala fir se :)

    उत्तर देंहटाएं
  60. एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ

    बे इरादा कोरा कागज कुछ नहीं करता :)
    वैसे काफी गहरी बात कही है हमेशा की तरह
    ये न्यू लुक पसंद आया
    इससे पुरानी पोस्ट पढने में सुविधा रहेगी
    वर्ना बड़ी दिक्ककत होती थी

    उत्तर देंहटाएं
  61. दिल कि तपिश पर बूंद गिरी है । कही तो उसने कोइ नज्म लिखी है । एक पूरी पुस्तक ही लिख मारो ,मुझे अकाल राहत कार्य चालू करना है ।

    उत्तर देंहटाएं
  62. हमेशा की तरह शानदार, खासकर अंतिम वाली। नया टेंपलेट अच्छा लग रहा है लेकिन साईड में ब्लोग लिस्ट लंबी होने से लेफ्ट का कैनवास खाली खाली है। अब उसमें चाहें तो हमारे ब्लोगस के नाम लिख दीजिये और उससे अच्छा फ्रंट पेज में दिखने वाली अपनी पिछली पोस्टों की संख्या बढ़ा दीजिये। सुंदरता थोड़ा और बढ़ जायेगी

    उत्तर देंहटाएं
  63. hi......ur blog is full of good stuffs.it is a pleasure to go through ur blog...


    by the way, why don't you start a new blog in your own mother tongue...? now a days typing in Indian Language is not a big task..

    recently i was searching for the user friendly Indian language typing tool and found ... " quillpad ". do u use the same...?

    heard that it is much more superior than the Google's indic transliteration...!?

    expressing our views in our own mother tongue is a great feeling...save, protect,popularize and communicate in our own mother tongue...

    try this, www.quillpad.in

    Jai..HO....

    उत्तर देंहटाएं
  64. बारिश की बूंदे जब किसी शाम को भिगोती है .. विंडस्क्रीन पर एक तलब ....
    Kya baat hai...bahut khoob

    उत्तर देंहटाएं
  65. इत्तेफ़ाकॉ के मोडो पे,
    कुछ खवाहिशे छोड़ आया हूँ,
    एक रिश्ता अब भी दरमियाँ है
    उसके
    ओर लफ्जो के बीच
    बे-इरादा
    कुछ कोरे कागज
    छोड़ आया हूँ

    पहली बारिश इन लफ्जों से तो खूबसूरत नहीं, वाकई ये आपकी बेहतरीन नज्मों में से है।

    उत्तर देंहटाएं
  66. बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज .........
    ab kyaa kahaa jaaye...in panktiyon ke baad ...aadaab anuraag ji ,

    उत्तर देंहटाएं
  67. आप बहुत खूबसूरती से भावों को स्पष्ट करते हैं ,कुछ कहना मुश्किल हो जाता है .इत्तेफाक के मोड़ ,ख्वाहिशों का छूटना ,बादल का एक टुकडा घर लाना ....................सब कुछ बहुत सुन्दर .

    उत्तर देंहटाएं
  68. bohat sunder kahte hai aaap dil ki baat........ess par tipani deni bohat mushkil kaam hai...maine bohat baar comments likhe par delete kar diye...shabad nahi milte mujhe.....

    उत्तर देंहटाएं
  69. आपकी तीन बेहतरीन नज्मों में एक...
    खासकर - बड़ी खुश्क हुआ करती थी वो आँखे,
    बादल का इक टुकड़ा
    काट के घर लाया हूँ
    साल की पहली बारिश है आज ... बहुत ही खूबसूरत

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails