2009-06-04

बैठे रहे देर तलक तसव्वुरे जानां किये हुए


dark_rain 079a
Originally uploaded by k3nt

वर्ल्ड कप पिछली दो रातो से दस्तक दे रहा है ........इन सुबहो में भी दोपहर की मिलावट है ...आने वाले दिन का मिजाज दे देती है ..... दिल है कि रोज सुबह 'एक ब्रेक 'की अर्जी रोज सामने रख जिरह करता है ...ओर बेख्याली यूँ इस अंदाज में आमद ले रही है कि गोया कई दिनों बतोर पेइंग गेस्ट रहेंगी ... कुछ किताबे खफा है कई रोज से .... आते जाते टोका करती है ... रोज वादा करता हूँ... .रोज तोड़ देता हूँ...
दोपहरे मुई कर्फ्यू सा लगाती है शहर में ....एक दो बागी छाते रिक्शो पे सूरज से ....बेअदबी सी जरूर करते नजर आते है .........

जब
किसी रोज
दोपहरी में
तीन चार बूंदे खिड़की से
छलांग लगाकर
इन कागजो पे
अचानक गिरती है,
हवा भी
खिड़की के दरवाजे से लटक
कोई शरारत करती है
खिड़की पे टंगा बादल
चिल्लाकर कहता है
"छोड़ो ये गमे- रोजगार के मसले,
छोड़ो ये रोजमर्रा के बेहिस फलसफे ,
छोड़ो ये खामोश मेज ओर कुर्सी
फेंको ये जहीनीयत का लिबास ......."
खिड़की से
...उफक की ओर अपना बस्ता थामे
भागते सूरज को देख
मैं भी सोचता हूँ ...........
क्यूँ ना
"उन्हें भी "एक मिस -कॉल" दे दी जाये



कुछ लोग इस ख्याल से पहले गुजर चुके है ....बेख्याली में पुरानी गठरी को ही खोलना मुनासिब समझा .....
.वैसे कित्ते दिन हुए आपको लॉन्ग ड्राइव पे गये हुए .....बेसबब उन्हें गुलाब की एक अदद डाली दिये हुए

68 टिप्‍पणियां:

  1. लगता है डा. साब छुट्टीयों की दरकार के लिये मन मचल रहा है, और मौसम की तुनकमिज़ाजी भारी पड़ती दिख रही हैं, क्या ऐसा ना होना चाहिये कि एक शाम आपके नाम से मुन्नकीद करनी चाहिये और आपको जी भर के इस शहर को सुनवाया जाए। कुछ दिनों पहले अपने एक अज़ीज के लिये मैंने लिखा था कि किसी को चाहने की एक हद वो होती है जब आप भी उस जैसे हो जाते है, गुलज़ार कितने खुश होगें अपनी नस्लों को फलते-फुलते देखकर। आपकी मौलिकताएं नये प्रतिमानो को गड़ रही है, ’इन सुबहो में भी दोपहर की मिलावट है’.

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  2. बारिश की नन्ही-नन्ही बूंदो का मै भी बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूं और उनके रुनझुन सुनते ही निकल पड़ूंगा लांग ड्राईव पर्।किसी को कुछ देने का कभी मौका मिला ज़रूर था मगर तब अकल कम और अकड़ कुछ ज्यादा ही थी। हा हा हा हा।सच डाक्टर साब लांग ड्राईव का आनंद ही कुछ है,चाहे हमसफ़र खूबसूरत हो(इसका मुझे कोई अनुभव नही है)या फ़िर अकेले। और हां मिस काल तो डेड अकाऊंट भी रिओपन करदेती है,ऐसा मैने सुना है।

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  3. विश्व पर्यावरण दिवस पर सूरज, धरती, बादल, गरमी का जिक्र......! अच्छी बात है..! :) :)

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  4. gulzaar saab ki panktiyan yaad aa gayi

    Dupahren aisi lagti hain
    ki jaise khali khane rakhe hon
    na koi khelne wala hai baazi
    aur na koi chaal chalta hai......

    Behad khubsurat sa khayal, jisse hokar main baar baar gujra.

    Aabhar!

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुती डॉ. साब. लांग ड्राईव का मूड बना दिया आपने... अब इस रविवार जाना ही पड़ेगा...

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  6. मिजाज बढ़िया रुख अखित्यार कर रहे हैं डॉ साहब के ..:) मिस कॉल फंडा .. सोच में है दिल कि क्या यह वाकई काम करता है ...हर वक़्त ...या कभी कभी तो एस एम् एस भी बेअसर होता है ..और लॉन्ग ड्राइव के लिए मौसम का कुछ बहकना जरुरी है ..इन्तजार है बारिश के साथ खुद बहकने का ..

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  7. वो मारा पापड वाले को... काफी दिनों बाद आप मिले है..

    सुबह में दोपहर की मिलावट शानदार है..

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  8. तो फिर देर किस बात की, मिस कॉल दे ही दीजिए।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  9. उस khayal-e दौर की बात ही क्या
    जब बाहों में हो तुम
    और संभलने का मौका न मिले

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  10. नमस्कार
    आपने बहुते अच्छा लिखा हैं, ओर इन पंक्तियों को पड़कर तो मन विचलित सा हो गया है
    बस लगता है, अब देर कहेका निकल चलो ...


    "छोड़ो ये गमे- रोजगार के मसले,
    छोड़ो ये रोजमर्रा के बेहिस फलसफे ,
    छोड़ो ये खामोश मेज ओर कुर्सी
    फेंको ये जहीनीयत का लिबास ......."

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  11. वाह! क्या खूब लिखा है! मेरी आप बीती कह डाली!

    ओर बेख्याली यूँ इस अंदाज में आमद ले रही है कि गोया कई दिनों बतोर पेइंग गेस्ट रहेंगी ... कुछ किताबे खफा है कई रोज से .... आते जाते टोका करती है ... रोज वादा करता हूँ... .रोज तोड़ देता हूँ...

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  12. सही है ,अब मिस कॉल दे ही दीजिए सर जी .

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  13. कल मिलूँगा तो तुम्हारी जुल्फें भी सुलझा दूंगा;
    आज उलझा हूँ ज़रा वक़्त को सुलझाने दो....

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  14. मिस को काल दे दीजिए और बेसबब ही सही लाल गुलाब अपडा दीजिए - शायद कुछ सबब बन जाए.....हां, गाल बचा कर:)

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  15. शानदार पोस्ट. हमेशा की तरह.
    लॉन्ग ड्राइव...!! बहुत ज़रूरी है. फुरसत तो निकालनी चाहिए.

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  16. भागते सूरज को देख
    मैं भी सोचता हूँ ...........
    क्यूँ ना
    "उन्हें भी "एक मिस -कॉल" दे दी जाये

    -बहुत खूब!

    लॉन्ग ड्राइव का सुहाने मौसम से सम्बन्ध भी रूमानी है.

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  17. अनुराग जी मिस काल मारने के लिए भी मोबाईल में बेलेंस तो होना ही चाहिए। और जिनके पास बेलेंस ही ना हो तो ??........खैर एक दिन हमने भी जिद कर ली देखा जाएगा जो होगा और निकल गए सब फ्रीक को दरकिनार करके। शायद उस दिन पर एक पोस्ट डालू सोमबार को। वैसे मैं घूम तो लिया एक दिन, पर एक गुलाब की डाली कैसे दी जाती है ये भी बता देते तो ज्यादा अच्छा होता :-) वो भी करके देख लेते।

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  18. नज़्म से पहले का इंट्रोडकशन नज़्म को ओर खूबसूरत बना देता है

    *****इन सुबहो में भी दोपहर की मिलावट ओर ...आने वाले दिन का मिजाज .. रोज सुबह 'एक ब्रेक 'की अर्जी बेख्याली की आमद ****
    गर बेख्याली में ये आमद है तो क्या आमद है .
    वैसे मुझे ये लाइने बड़ी हसीं लगी लगा जैसे रिक्शे पे जाती किसी लड़की को देख लिखी है

    ***'दोपहरे मुई कर्फ्यू सा लगाती है शहर में ....एक दो बागी छाते रिक्शो पे सूरज से ....बेअदबी सी जरूर करते नजर आते है .........'****

    कभी कभी जहीनीयत का लिबास .फेंककर शायर बनना भी जरूरी है डॉ साहब .आख़िर हम जैसे पाठक में भी तो है न आपके .

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  19. ओर हाँ बेसबब गुलाब जब मिलता है तो बड़ा अच्छा लगता है

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  20. रात ग्यारह बजे तक भी दोपहर की मिलावट रहती है अनुराग जी, बहरहाल नया नौ दिन और पुराना सौ दिन,,,,, खैर....

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  21. हम तो आपके सीरियस लेख पढ़कर टिपण्णी देने से घबरा जाते थे ,आज आपकी उर्दू पे पकड़ देख कर मन खुश हुआ .ये तो साबित हुआ की आप गुलज़ार के बहुत बड़े फेन है .
    -आशीष तोमर

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  22. लौंग ड्राईव!! अजी कल ही गये थे लौंग ड्राईव पर.. फुरसतिया जी से मिलने के चक्कर में 65 किलोमीटर बाईक दौड़ाये हैं.. अब भले ही शहर के बीच ही सही, मगर छोटा वाला लौंग ड्राईव तो कह ही सकते हैं.. :)

    और वो गुलाब वाला मामला जरा पेचीदा है.. देखिये कब देते हैं और किसे देते हैं.. :D

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  23. बहुत सुंदर लिखा आप ने,बहुत अच्छे लगा आप के सुंदर शव्द, दिल को छू गये.बस दो दिन से ही घर पर बेठे है इन छुट्टियो मै....

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  24. बड़े दिन बाद आपकी कोई नज़्म पढ़ने को मिली..मन खुश हुआ

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  25. ek break ki arji manjoor kar hi li jaaye dil ki...kitni arjiyan jama ho rahi hain khamakha mez ki darajon mein...gulab...ab bas kitabon me paaya jaata hai, fursate jana ki yaad dilaate huye

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  26. DR. SAHIB KYA BAAT KHA DAALI AAPNE AAJ IS WEAKEND PE... KAMAAL KI BAAT KAHI HAI AAPNE KHAMOSH DHADKANE BETARTIBI SE SHARAARAT KARNE KO MACHAL UTHE ......... AUR YE BAAT KE FIR KE MISS CALL.... KAMAAL KI ADAYADI HAI JANAAB...MAJAA AAGAYAA,,,

    WESE MAIN BHI SOCH ME DUBAA HUN KARUN MAGAR KOI TO HO...HA HA HA .?????

    ARSH

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  27. ...उफक की ओर अपना बस्ता थामे
    भागते सूरज को देख
    मैं भी सोचता हूँ ...........
    क्यूँ ना
    "उन्हें भी "एक मिस -कॉल" दे दी जाये
    apko parne ke baad to lagta hai aisa kuchh karana hi chahiye...

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  28. अजी क्या कहें ! लॉन्ग ड्राइव पे चले जाएँ तो लगता है 'टाइम' बर्बाद कर लिया... ऐसा तो हाल बना रखा है. गुलाब तो दिया पर... उस डाली देने के बाद वो वक्त कहाँ जो उसे वैसे ही महकता ताजा रख सके. फुर्सत जरूरी है जी. अभी रात के ३ बजे ख्याल आ रहा है :) वैसे लॉन्ग ड्राइव का वक्त हो रहा है एक अजीज दोस्त आ रहे हैं तो ५ मिनट में ही. शायद हाइवे पर बाईक दौड़ जाए ! ये पोस्ट पढ़ने के बाद संभावना तो ऐसी ही लगती है.

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  29. फर्क इतना है की आप मिस कल देगें और मुझे आती हैं -पर भला लौटना कब और कहाँ संभव हुआ है ?

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  30. नज़्म ताजा है... पढ़ा कई बार,
    हर बार कोई तवील किस्सा ज्ञान का हो जरूरी भी नहीं.
    बोलते हुए बुतों में साजिश की बू आती है और इंसान की चुप्पी में.

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  31. वह अनुराग जी................ सलाम है आपकी सोच की उदान और आपकी लेखनी को........... दिल को छु गयी आपकी बात

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  32. बढ़िया है जून का ये दोपहर चिंतन.

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  33. हमेशा की तरह एक छोटी मगर जानदार पोस्ट ।

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  34. वाह वाह

    जिंदगी के एक लम्हा सूत को मखमली चादर में बदल देना
    बहुत खूबसूरत है अंदाजे बयाँ

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  35. यहा तो हर वक्त एक लम्बी फ़ुर्सत की आस रहती है, बस जी चाहता है कि भारत भ्रमण पर निकल जाये। काश सन्यासी होते, ये आराम तो रहता

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  36. "छोड़ो ये गमे- रोजगार के मसले,
    छोड़ो ये रोजमर्रा के बेहिस फलसफे ,
    छोड़ो ये खामोश मेज ओर कुर्सी
    फेंको ये जहीनीयत का लिबास ......."

    सुन लीजिये उनकी भी.

    उत्तर देंहटाएं
  37. वर्ल्ड कप पिछली दो रातो से दस्तक दे रहा है ........इन सुबहो में भी दोपहर की मिलावट है ...आने वाले दिन का मिजाज दे देती है ..... दिल है कि रोज सुबह 'एक ब्रेक 'की अर्जी रोज सामने रख जिरह करता है ...ओर बेख्याली यूँ इस अंदाज में आमद ले रही है कि गोया कई दिनों बतोर पेइंग गेस्ट रहेंगी ... कुछ किताबे खफा है कई रोज से .... आते जाते टोका करती है ... रोज वादा करता हूँ... .रोज तोड़ देता हूँ...
    दोपहरे मुई कर्फ्यू सा लगाती है शहर में ....एक दो बागी छाते रिक्शो पे सूरज से ....बेअदबी सी जरूर करते नजर आते है .........

    hame to ye bhi ek nazm lagi sahab.google me dermatologist daala to ye link nikal aaya.bataye kya kahe ?contct baad me karege .pahle nazm padh lete hai.
    abhiraj.

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  38. भूमि‍का भी कि‍सी कवि‍ता से कम नहीं है, और जो कवि‍ता है, वह तो बिंदास है ही।

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  39. आह! डाक्टर साब...इन सुबहों में दोपहर की मिलावट के इस अंदाज़े-बयां ने कमबख्त जान ही निचोड़{!} दी है।
    बस्ता थामे भागते सूरज की उफ़क पर की दौड़ ने मन की ऐसी-की तैसी कर दी।
    शब्द-शब्द शायरी...बात-बात नज़्म...!!!

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  40. क्या लेख था कविता ही लेख में रुनझुना रही थी और कविता से जब रूबरू हुए तो बस अवाक !

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  41. उफक की ओर अपना बस्ता थामे
    भागते सूरज को देख
    मैं भी सोचता हूँ ...........
    क्यूँ ना
    "उन्हें भी "एक मिस -कॉल" दे दी जाये
    बेहद अच्छी लगी यह तो...
    सुंदर...
    मीत

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  42. chaliye...aap bhi hamare saath trekking par ho lijiye....november mein.....

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  43. ये अदा है तो दे ही दो एक मिस कॉल...वादा है मिस न होगा. :)

    बहुत सुन्दर!!

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  44. लीजिये हम गोली मार कर आ गए ....अजी किसी इंसान को नहीं ....दर्द को.....!

    और ये क्या ........

    उफक की ओर अपना बस्ता थामे
    भागते सूरज को देख
    मैं भी सोचता हूँ ...........
    क्यूँ ना
    "उन्हें भी "एक मिस -कॉल" दे दी जाये

    किसे....?
    सूरज को....??
    क्या सोचते हैं वो आपको कॉल करेगा .....???
    हरगिज नहीं ....!!
    चाँद को देते तो चुपके से दरीचे से झांकता ....!!

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  45. चालीस लाईनों में जीवन का पूरा फ़लसफ़ा निचोड कर रख दिया. सुबहों में दोपहर की मिलावट...ख्या खूबसूरत खयाल है.मिस काल ज़रूर दें, और उम्मेद है कि कुदरत आपके इस मिस काल पर रिटर्न काल दे कर अपनी बूंदों से निहाल कर दे...

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  46. देखिये ना आज भी सूरज सुबह से ओपनिंग बेट्समेन की माफिक छत पे आ टंगा है ...शाम देर तक आउट नहीं होगा ..वर्ल्ड कप भले ही टी ट्वंटी का हो...पर सूरज की पारी टेस्ट ओपनर जैसी चलती है.......राते दो बजे तक लम्बी हो गयी है...बेख्याली के आलम में ...एक पुराना ख्याल इसलिए यहाँ चस्पा कर दिया था ..बेजी ,कंचन ,पूजा ,कुश मीता शायद पहले इससे रूबरू हो चुके है...
    मिस काल एक विम्ब की तरह है यहाँ .....कामकाजी जोडो को बस एक दूसरे को जताने के लिए की तुम्हारी याद आ रही है..तमाम रूटीन वर्क के बीचों बीच भी.....पेशे या नौकरी के कमिटमेंट के बीच भी.......
    आखिरी लाइन क्यों लिखी....
    तो क्या रोमांस शादी के बाद खिड़की कूद कर भाग जाता है....?बीवी को गुलाब का फूल देने की कोई उम्र होती है ?या कोई दिन ?बेसबब नहीं दिया जा सकता .....आप कभी अचानक अपनी बीवी के ऑफिस गाडी उठाकर पहुंचे है ...लॉन्ग ड्राइव के लिए ?कितने दिन हुए ये करे हुए ?कभी करके देखिये ...

    ऑस्ट्रेलिया कल रात बाहर हो गया ....आज फिर दो बजे तक रात होगी.....
    आप सभी का शुक्रिया.....

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  47. hamne bhi socha der se hi sahi apna missed comment aaj de dete hain bahut badiya abhar

    उत्तर देंहटाएं
  48. तपाती जून की गरमी के लिए उपयुक्त रचना। हमें भी बारिश का इंतजार है। अभी लोंग ड्राइव पर जाना मौत को दावत देना होगा, बाहर 44 डिंग्री है। बारिश आने पर सोचा जा सकता है। अखबार रोज कह रहा है कुछ दिनों से कि बारिश अभी आएगी, अभी आएगी, पर बादल विलंब से चल रहे हैं...

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  49. jindgi ki rumaniyat par lagam lagati vyastayen,aur in vyastta ke beech mised call ...uff ...chalo koi yaad to karta hai ...

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  50. डॉक्टर. साहब ! आप को बास आप ही हैं ..मज्जा आ गया...! क्या सोच है.. क्या कल्पनाशक्ति है...वाह...!!!
    मेरी वर्त्तमान ज़िंदगी में आपके जैसा अभी कोई नहीं ... मेरी इस ज़िंदगी में खाली पड़ा कोई कोना .. जो कभी मेरे जीवन का केन्द्र था .. अब फिर से .. रोशन हो गया है .. मेरे अन्दर की सृजनात्मक प्रवृति फिर करवट ले रही है.. लगता है.. नीद से जाग जायेगी..... अब मेरे जीवन के इस छोटे से कमरे ने मुझे रहने का मन करता है ... कमरे में रक्खी सारी चीज़ें अब साफ़ साफ़ नज़र आ रही हैं ...
    ..आपको धन्यवाद !!!
    .. मुझसे संपर्क में रहिएगा .... शायद कही किसी सड़क पे हमारी मुलाक़ात हो जाए ..
    --रजनीश (लखनऊ)

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  51. WWWWWWWAAAAAAAAAHHHHHHHH !!!!!!!!!!!!!!!

    Hamesha ki tarah LLLLLAAAAJJJJWWWAAAABBBB !!!

    Sare shabd aap aise uda le jate hain ki iske aage kuchh kahne ke liye bas unhe dhoondhte rah jate hain ham...

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  52. खिड़की पे टंगा बादल कभी कभी चिल्लाकर हमसे भी यही कहता है
    "छोड़ो ये गमे- रोजगार के मसले,
    छोड़ो ये रोजमर्रा के बेहिस फलसफे ,
    छोड़ो ये खामोश मेज ओर कुर्सी........

    ..... पर ये चाह कर भी नहीं छूटती.... कहाँ जाऊं जिम्मेदारियों से मुंह चुरा कर....

    .. पर कभी कभी हम भी आपकी तरह रोमांटिक तो जाते हैं.... लॉन्ग ड्राइव तो नहीं पर गुलाब की डाली जरूर दे देते हैं.....

    उत्तर देंहटाएं
  53. चिलचिलाती धूप और बारिश की बात..... बहुत सुन्दर भावपूर्ण आलेख . .

    उत्तर देंहटाएं
  54. मैं तो क्‍लीन बोल्‍ड.... कुछ भी कहूंगा तो गुस्‍ताखी होगी। :)

    उत्तर देंहटाएं
  55. छोड़ो ये गमे- रोजगार के मसले,
    छोड़ो ये रोजमर्रा के बेहिस फलसफे ,
    छोड़ो ये खामोश मेज ओर कुर्सी
    फेंको ये जहीनीयत का लिबास
    मौसम के तीखे तेवर हर कहीं विरक्ति का भाव घोल रहे है आपने इसे बखूबी पहचाना और व्यक्त किया है ,आखिर आप भावनाओं के शिल्पी जो ठहरे .

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  56. barish bhi Anurag Da ke shabdo mein wah.. nt well so was nt able to post comments

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  57. anuraag ji ,

    kya kahun .aap to bus aisa aisa likhte hai ki kaleja moonh ko aa jaata hai .. waah ji waah .. long drive ki yaad dila kar aapne man ko udaas kar diya ,..yarr zindagi ke fande kyon itne bade hote hai ki , choti choti khushiya choot jaati hai ..

    pata nahi boss

    just kudos to you

    उत्तर देंहटाएं
  58. बहुत खूब। ये मौसम की कशिश ही ऐसी होती है कि मन को कभी कभी बादल, धूप और हवा से अपनी नजदीकी में ही सुकून मिलता है।
    बहुत बढिया।

    उत्तर देंहटाएं
  59. आपकी कविता बहुत पसंद आई
    मिस काल के बहाने कुछ उष्मा चुराने की लालसा खूब भाई.

    उत्तर देंहटाएं
  60. इस बार आपने "दूसरा" फेंका है !
    फ्रीक्वेंसी मैच नहीं हो पा रही है !


    इधर मामला जुदा सा है ! मेरी किताबें खुशकिस्मत हैं .... मैं उनसे कभी बेवफाई नहीं करता ! वो तो आपस में ही एक दुसरे से जलती हैं ...... एक ही टाईम पे चार-पांच किताबें चल रही होती हैं .... मूड के हिसाब से किस दिन किस किताब का नंबर आएगा .... यह तो पहले से मैं भी नहीं जानता !

    पिछले कुछ दिन (हबीब तनवीर जी और ओम प्रकाश आदित्य जी का प्रस्थान) ऐसे अवसाद भरे थे कि गुलाब और लांग ड्राईव जैसा कोई भाव दिल में नहीं है ! हबीब जी से मिलना तो मेरे लिए तीर्थ करने जैसा था !

    आजकल तो दिल की हालत कुछ यूँ है :

    चलो साथ चलें
    दूर तक
    अजनबी रास्तों पे पैदल चलें
    कुछ न कहें
    अपनी-अपनी तन्हाईयाँ लिए
    सवालों के दायरे से निकलकर
    हम यूँ ही साथ चलते रहें
    कुछ न कहें ....
    तुम अपनी तन्हाई का
    कोई जिक्र न छेड़ो
    मैं भूली हुयी कोई नज़्म न दोहराऊं
    तुम कौन हो
    मैं कौन हूँ ... क्या हूँ
    इन बातों को ... बस रहने दें
    कुछ न कहें
    चलो दूर तक
    अजनबी रास्तों पे पैदल चलें !!


    आज की आवाज

    उत्तर देंहटाएं
  61. शानदार पोस्ट...

    सूरज कि क्या बात करो हो डाक्टर साब...

    सुबह आठ बजे लोग उस पर पानी के लोटे उड़ेल कर सर झुकाते हैं...प्रार्थना केरते हैं...



    और जब लोगों की दुआ से सूरज चार घंटे में ही सर पे चढ़ता है..


    तो लोग उसे कोसते हैं....
    कुछ तो बाकायदा..गाली भी बकते हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  62. पर सूरज ने कभी मोडिरेशन नहीं लगाया शायद...

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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