2009-06-16

अबे सुन बे गुलाब !


जब रोज़ कमेटी में हमारा नाम शुमार हुआ ... जाट गंभीर से दिखे ..हम चिंतित हो गये .उनके गंभीर होने का मतलब किसी घटना के होने का आसार था..पिछली बार जब वे गंभीर हुये थे तब डॉ देसाई की लड़की को प्रपोज़ कर आये थे .वो तो शुक्र था की की उनकी ठेठ हरयाणवी उसकी समझ नहीं आयी थी .ओर वो उसे कोई लोक-गीत समझ सारु छे .... सारु छे ...करती रह गयी थी ....
उन्होंने गंभीरता से रोज़ डे के पोस्टर के आगे खड़े होकर अलग अलग एंगल से पोज़ दिये....हमारी छठी सेंस का एंटीना सिग्नल देने लगा ...शाम को जब हम कमेटी के चार मेंबर काम करने की रणनीति को लेकर डिस्कस कर रहे थे .जाट उसी गंभीर मुद्रा में अवतरित हुये ....
डिसकाऊंट कित्ता है .... उन्होंने पूछा .
ओह कम ओन प्रदीप ये रोज है मेरे साथ रोज कमेटी में शामिल लड़की बोली.....
.कोई स्कीम ....दो पे एक फ्री जैसी ....जाट
रोज में डिसकाऊंट ??? कितने अनरोमांटिक हो ... लड़की ने मुंह बनाया .....
तुम्हे कितने रोज चाहिए ......दूसरी थोडा नर्म पड़ी....हम चूँकि उनके रूम पार्टनर थे .इसलिए न्यूट्रल के किरदार में खामोश खड़े थे ...जाट ने एक लम्बी सी लिस्ट निकाल कर सामने रख दी .... कॉलेज की सारी जूनियर -सीनियर खूबसूरत लड़किया किब्ला सभी शामिल थी ...........फिक्स या " हाँ या ना" में अटकी पड़ी ...सबको पिंक रोज ...प्यार से पहले दोस्ती में जाट का अटूट विशवास था .....उसके बाद दोनों कई सारी गुलाबी पर्चिया निकाली जिनमे ऑटोग्राफ के साथ कोई सन्देश भी था ...किब्ला कोई अंग्रेजी कविता का हिस्सा ..मोर्डन दर्जे के रोमानटीजिम की ये नई थ्योरी थी .जिसके आखिर में "हेंस प्रूव्ड ' की जगह जाट के ऑटोग्राफ थे ....
पर एक नाम देखकर हम गश खा गये... वे न केवल फिक्स ओर खासी रौबीली थी ओर उस पे तुर्रा ये की उसका बॉय फ्रेंड भी हट्टा कट्टा गबरू जवान ......ओर सीनियर .......ओर हम दूसरे साल में ....
"अबे जाट वहां रहने दे ' हमने उसे अकेले में समझाया ..
.क्यों पिंक रोज देने में के है ? लाल थोड़े ही ना दे रहा हूँ ?जाट अंगद के पाँव की माफिक अडिग था ......
कल्चरल फेस्टिवल पांच दिन चलता था ....चौथे दिन रोज बाँटने थे ...आखिरी दिन हमने फिर उन्हें टटोला ....पर उन्होंने अपना फैसला रिज़र्व रख छोडा था ..
हमने डरते पड़ते बाकी रोज के साथ उसके रोज भी बाँट दिये ,.....रात को कल्चरल एवेनिंग थी ,गजल का प्रोग्राम था ...कोई साहब गुलाम अली की ऐसी तैसी फेर रहे थे ....लड़किया साडीयो ओर खूबसूरत लहंगों में ऑडिटोरियम में नुमाया होती ......हम एक जगह जाट के साथ बैठे हुए 'कोई उम्मीद बर नजर नहीं आती ' ग़ालिब के इस शेर को याद कर रहे थे ..... ..अचानक वही रौबीली मोहतरमा अपने गबरू बॉय फ्रेंड के साथ दिखी ..हम थोड़ा सिमट गये...
.हे प्रदीप तुम्हारा रोज मिला ..थैंक्यू ..वे बोली ......
"तो आज से अपां दोस्त."..जाट बोला था ......



weaker sex is stronger than stronger sex
because
weaker sex is weakness of stronger sex

अहमदाबाद के सिविल हॉस्पिटल में रेडियोलोजी डिपार्टमेन्ट के रिपोर्टिंग रूम में अगर कोई सबसे दिलचस्प चीज थी तो वो था एक ब्लेक बोर्ड जिसका ईजाद वहां के पी जी ने आपसी तफरीह के लिया किया था ....उस पर 10 साल पहले लिखा एक फिमेल रेसिडेंट की लिखी एक सूक्ति .. ... जाट ने अपनी रेसीडेंसी वही की थी ....

70 टिप्‍पणियां:

  1. "आपां दोस्त..." बहुत खूब लिखा है आपने अनुराग जी...हमारे भी कालेज के दिन आपकी लेखनी के स्पर्श से फिर से जवान हो जाते हैं...लेकिन एक कसक सी रह जाती है दिल में...उस ज़माने में इंजिनीरिंग में लड़कियां दाखला नहीं लेती थीं इसलिए इंजिनीरिंग वो ही करते थे जिनके जीवन रस ना हो...हम में रस तो था लेकिन मेंडक काटने से डर लगता था इसलिए डाक्टर नहीं बन पाए...अगर मेडिकल कालेज में दाखिला लिया होता तो आपको हम भी ऐसे दिलचस्प किस्से सुनाते...और हाँ वो वीकर सेक्स और स्ट्रोंग सेक्स वाली बात बहुत जंची.
    नीरज

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  2. अच्छा था जो जाट साहब प्यार से पहले दोस्ती में विश्वास रखते थे... अगर कहीं दोस्ती से पहले पार कर लेते तो....
    एक अच्छी पोस्ट...
    मीत

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  3. weaker sex is stronger than stronger sex
    because
    weaker sex is weakness of stronger sex.

    WAH ! WAH !!
    AAH !

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  4. जाट बहुत दिलेर था.. मस्त..

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  5. weaker sex is stronger than stronger sex
    because
    weaker sex is weakness of stronger sex


    :) :)

    सच कहा.. वैसे दोनो ही दोनो की कमजोरी है, दोनो को एक दूसरे की ज़रूरत है, मगर फिर भी बहसों का आधा मुद्दा
    "यार इन लड़कियों को कोई नही समझ सकता"
    और
    ‌" ये आदमी की तो ना..जात ही ऐसी होती है"
    का होता है...!

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  6. जात कथा दिलचस्प लगी............ पुराने दिनों के ऐसे ही कुछ किस्से गुदगुदा जाते हैं मन को.......... लाजवाब पोस्ट है आपकी हमेशा की तरह

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  7. te aaj se aapa dost....very very interesting post.....

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  8. बड़ा ही दिलचस्प किस्सा जाट यार का। पुराने बातें याद आने पर एक अलग सी तरंग उठती है। कभी सोचता हूँ ये किस्से कहानी ना होते तो जिदंगी बोरिंग हो जाती।
    प्यार से पहले दोस्ती में जाट का अटूट विशवास था

    हे प्रदीप तुम्हारा रोज मिला ..थैंक्यू ..वे बोली ......
    "तो आज से अपां दोस्त."..जाट बोला था ......
    वाह वाह वाह क्या बात कही जाट जी ने। वैसे ये फूल देने की हिम्मत कहाँ से खरीदी जाती है :-)

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  9. dr. saahab aage to aapne bataaya hee nahin ..agee chal kar wo jaat blogger ban gaya aur ek billan paal kar sabse paheliyaan poochhne laga..use log ek hee naam se pehchaanne lage...taau..ha..ha..ha..
    kya kalpna hai....

    dr. saahab ye hotel waale dino kaa hee kamaal hai jo aap dil kee baat ham tak pahunchaa rahe hain.

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  10. बहुत दिलचस्प पोस्ट ,बीते हुए लमहें कितनें अनोखे थे .

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  11. आपकी स्मृतियाँ इतनी ताज़ी होती हें की बस ...जाट जी की बेबाकी और निडरता वाकई कमाल है ...और उस पर आपकी जादुई लिखावट ....एक गहरा अंदाज ...हलके से अच्छा लगा

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  12. कल्चरल फेस्टिवल ! आह ! वो दिन भी क्या दिन थे !

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  13. यादों के वितान में जाट को लाकर आपने इसे एक अद्भुत रंग दिया है.हर कथा या संस्मरण में वो खिलाडी जो ढाई घर चलता हो, उस कथानक की जान होता है.
    मस्त और जानदार.

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  14. इंशा अल्लाह! आपकी पोस्ट वो कमी पूरी करती हैं जो गर्ल्स स्कूल और कालेज में जाने के कारण बेतर्बीन ख्वाईशें दिल के भीतरी तहों में सिलवटों में दबी होती है.. वहां कोई रोज़ बांटने वाला ना था ... जान हथेली पर रख बारह फीट ऊँची दीवार फांद कर आने वाले और फिर वार्डन और केयर टेकर के हाथों पीटने वाले कई थे...

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  15. मज़ा आ गया डाक्टर साब्।इच्छा तो हो रही है लौट चलूं अपने कालेज के दिनों मे अपने चुन्नू के कारनामो की गठरी खोलने।कल रात ही उसने बहुत तंग किया है फ़ोन करके,मगर अभी मै करिया महाराज के पास ट्राय कर रहा हूं,सवाल फ़्यूचर का है ना।बहुत शानदार किस्सा और हां आपका जाट वाकई दिलेर निकला।

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  16. mazaa aa gaya ji
    waise purane dino ke kisse humesha dil ko khush kar jate hain

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  17. बहुत अच्छा लगा आज का आप का यह लेख, खास कर जाट भाई का.धन्यवाद जाट को ओर आप को

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  18. आपका रोचक संस्मरण जब हमें इतना आनंदित कर गया तो आपलोगों को कितना मजा आता होगा ,सहज अनुमान लगाया जा सकता है....

    सचमुच जाट जी कमाल के रहे होंगे....हमारे तरफ से वंस मोर दर्ज कर लीजिये....कुछ और किस्से सुनाइए....

    मजेदार पोस्ट के लिए धन्यवाद...

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  19. जाट द जवाब नहीं।
    वैसे आपकी रचना का शीर्षक पढकर निराला की कविता भी याद आ गयी। शुक्रिया।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  20. kamaal ka character hai ye aapka jaat bhi...ek aur kissa padh kar maza aaya.

    jinke apne life ke funde sahi hote hain, unhein wakai dar nahin lagta :)

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  21. आप अपने मित्र जाट के किस्से जब भी लिखते हो, दिलचस्प रहते हैं.

    यह सब अनमोल धरोहर बन कर जीवन भर गुदगुदाते हैं. बेहतरीन किस्सा!!

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  22. बहुत दिनों बाद आपसे जाट जी का किस्सा सुना ..मजेदार है ..सुनाते रहे और

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  23. क्या बेहतरीन उक्ति है पढ़कर मजा आ गया !

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  24. अनुराग जी, रामराम.
    पहली बार में तो मेरे पल्ले पड़ी नहीं, लेकिन चूंकि जाट का मामला था तो दोबारा धीरे धीरे पढ़ कर समझा. बढ़िया लगा. और किस्से सुनाइए.

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  25. किस्सागोई के कुछ नमूने
    एक -
    वो तो शुक्र था की की उनकी ठेठ हरयाणवी उसकी समझ नहीं आयी थी .ओर वो उसे कोई लोक-गीत समझ सारु छे .... सारु छे ...करती रह गयी थी ....
    दो -
    ...प्यार से पहले दोस्ती में जाट का अटूट विशवास था .....
    तीन -
    मोर्डन दर्जे के रोमानटीजिम की ये नई थ्योरी थी .जिसके आखिर में "हेंस प्रूव्ड ' की जगह जाट के ऑटोग्राफ थे ...

    जाट के किस्से पहले भी पढ़े है ओर ढूँढने की कोशिश अब हमारे शहर में शुरुआत हो जायेगी आख़िर हमारे हरयाणा के जो ठहरे ,बस दिक्कत एक है इधर जिधर देखो तित जाट है
    .ओर आख़िर में उस फेमेल रेसिडेंट की जय जिसने ये धाँसू उक्ति लिखी जो दस साल बाद देखिये कहाँ जाकर दिखी ओर कहाँ कहाँ पहुँच गई इसकी लेखिका जहाँ भी हो हमारी जय ले ले .
    ओर हाँ निराला जी का शीर्षक आपने चुना उनकी तो हम सदा ही जे बोलते आए है

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  26. weaker sex is stronger than stronger sex
    because
    weaker sex is weakness of stronger sex

    bahut khoob doctor sahab:)...hamesha ki tarah dilchasp.

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  27. अजी डाक्टर सा'ब,
    अपाँ जाट आजकल कित्थे है ? :)
    किशोर दा का गाना याद आ गया ..
    (पूरी पोस्ट पढकर)
    ..
    " नखरेवाली ....आ ..आ ...आ "
    - लावण्या

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  28. जाट का रोज में डिस्काउंट माँगना ....बेहद दिलचस्प लगा.

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  29. बहुत दिनों बाद हॉस्टल का किस्सा सुनाया..
    मजेदार किसा!
    'रोज़ डे --और रोज़ कमेटी!क्या बात है!
    पिंक रोज़ से रेड रोज़ तक का सफ़र जाट' साहब क्या तय कर पाए??
    आखिर में इंग्लिश का कुटेशन भी कमाल का है... दुनिया में अब तक हुई जंगों के कारणों [jar,joru,zameen] mein 'एक कारण 'स्त्री को इसीलिये तो कहा गया है क्योंकि वह दुनिया के stronger sex ki weakness hoti hai!

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  30. जाट भाई कमाल निकले . मजेदार पहले के किस्सों की तरह .

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  31. जात भाई तो कमाल के निकले ...

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  32. bahut majedar hai..... intzaar rahega aise hi post ka

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  33. pata nahi aisa kyun laga ke aisa kuch similar sa maine pehle bhi padda hai kahin.
    anyways...nice post :)

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  34. बहुत दिनों बाद आपने अपने मित्र जाट के बारे मे लिखा, हमेशा की तरह बेहतरीन एवं लाजवाब | कई गंभीर और दार्शनिक लेखों के बाद इस लेख ने बहुत गुदगुदाया |

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  35. वैसे तो मैं सिर्फ आधे किडनी का बित्ता भर हैसियत रखने वाला मूली हूँ. मगर यह इश्क की चर्चा जब भी हुई हमने बड़ी दिलेरी से इसमें हिस्सा लिया है. आपके जाट की तरेह

    यूँ कहें की हम तो उनसे भी दो कदम आगे थे--

    चौथी क्लास में दोस्तों के चढाने पर उस सिखनी का मांग भरा था छुट्टी में. स्कूल सरकारी था.

    यह मूली उसी के हत्थे चढ़ गया. दांत काट कर भाग निकला. उसका भाई महीने तक मुझे गाँव में खोजता रहा.

    इधर इस मूली के हिम्मत को २१ तोपों के सलामी दोस्तों से मिल रही थी.

    हम आत्ममुग्ध थे....

    ... आज वोह याद आया है... और चाहता हूँ. कोई पुराना दोस्त मिले और उस घटना पर मेरी टांग खीचे...

    ... मगर patachep.

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  36. हमें याद है ...हमारे एक मित्र कहा करते थे ...की गर आपने किसी चलते हुए जहाज को नहीं रोका ..या कभी भागते हाँफते किसी रेलवे स्टेशन पहुंचकर किसी छूटती हुई ट्रेन को आंसू भरकर नहीं निहारा .....तो मियां लानत है आपकी मोहब्बत पे ...मोहब्बत के इस थ्रिल को जाट ने पकडा .गाँठ बाँधी ओर जिंदगी भर निभाया....लाइफ इस अल अबाउट रिस्क ...'वैसे भी इश्क इर्रेशनल रोग है...ओर गुलाब उसका सिम्पटम...जाट हमेशा ओपनिंग बेट्समेन की माफिक खेले ...ओर कई साहसिक शोट लगाये ..कहते है जिंदगी बीस से तीस के बीच एक रोमांटिक फिल्म होती है...उसके बाद एक यथार्थ सिनेमा.....तो कॉलेज में कई कल्चरल फेस्टिवल शान से आये ..इश्क ओर रोमांस की नयी ब्यारे .नई कहानिया लेकर...वैसे भी हमारे बोयस होस्टल में एक अलिखित थ्योरी थी .इस कॉलेज में तीन ही चीज दिलचस्प है.....
    लड़किया ,लड़किया .लड़किया......(हेंस प्रूव्ड )
    @गौरव .@मुसाफिर @रंजना जी .....जाट के दूसरे किस्सों के लिए मैंने ऊपर लिंक दिए है .वहां क्लिक करोगे तो पढने को मिलेगा...
    @लावण्या दी जाट आजकल हरयाणा में है.ओर खूब नामी गिरामी हस्ती है..सादे तीन घंटे की ड्राइव पे हम अक्सर तीनमहीने में मिल लेते है .....
    @नीलिमा .वैसे वो आपके ही शहर में है....जरा गौर से देखोगी तो समझ जायोगी...
    @नीरा जी ....ऊँची दीवारे यहाँ भी फांदी गयी है बस तब मकसद दूसरा था....
    @नीरज जी.....इंजीयरिंग में रहते आपने तीस साल पहले जो क्रांतकारी प्रेम किया था वो किसी गुलाब से कम नहीं था....
    @सागर....कोई दोस्त न सही...बकलम सही.....
    @rakhee.you are my true reader....yes ..

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  37. शुक्रिया अनुराग जी,

    आपका कमेन्ट बहुत मायने रखता है...

    वैसे आपका नाम लिखते थोडी सी जलन होती है. इसी नाम का एक 'उदू' था अपना. कंप्यूटर क्लास में... यह वाकया २००१ का है...

    हमने पुनः बाज़ी मारी...

    फिर मेरे लिए था--
    "लंगूर के हाथ अंगूर"

    उसके लिए अंगूर खट्टे हो गए...- बकौल वोह 'अनुराग' (मेरा calssmate)

    ... हाँ यह 'उदू' जगजीत जी के ग़ज़ल से उठाया है. यह रेफ़रन्स पहली बार दे रहा हूँ. वरना हमारी साहित्यिक रणनीति कहती है 'सन्दर्भ दो मगर नाम छुपा दो' --- शरद जोशी.

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  38. जाट की निगाह से दुनिया देखने के लिए साफ़ सुथरा दिल चाहिए या फिर एक संरक्षित मस्तिष्क, फिर सब आसान है जिसे ग़ालिब ने मुश्किल कहा है वो भी.

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  39. ज़िन्दगी गर कही है तो बस यही है.. बस यही है.. बस यही है... जाट को मालूम है क्या कि आपने उन्हें हीरो बना दिया है...

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  40. यह दुनियां यत्न करने वालों के लिये है! जो झिझका सो अटका!

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  41. अनुराग...जाट को बोलो न की इस पोस्ट पर अपना भी कमेन्ट दे! बाई द वे आपने किसे रोज़ दिया वो तो बताया ही नहीं!

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  42. dr. sahab...waakai padhkar kaphi achchha laga....abe gulaab word....kya likha hai...very nice post...

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  43. अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के चक्कर हमने भी काटे, मरीज बनकर :) पर radiology जाना नही हुआ, उम्मीद है कभी हो भी नही!!

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  44. अभी भी मेल मुलाकात होती है उनसे? कालेज के जमाने के दोस्तों की बात अलग होती है.

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  45. कभी वक्त मिले तो अपने दिल के दरवाजे भी खोलिये । हमे भी दरवाजे खुलने का इंतजार है ।

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  46. आपां दोस्त ... वाह क्या बात है वेसे कुछ मेरे भी दोस्त जाट है जैसा आपने कहा बिलकुल वेसे ही अंगद के अडिग पावों की तरह जो ठान लिया वो ठान लिया उसे अब कोई नहीं हिला सकता ... ये बात दोनों तरह से दुरुस्त है .. अछि बात लिखी है आपने बॉक्स में बहोत बहोत बधाई डाक्टर साहिब ..

    अर्श

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  47. हास्य से लबरेज पोस्ट !
    पढ़कर बेहद आनंद आया !


    शुक्ल जी के बाद अब जाट भाई से परिचय दिल को गुदगुदाने वाला रहा ! अच्छा हुआ की आपने जाट जी की पुरानी पोस्ट का लिंक दे दिया ... जिससे इन भीषण दिलचस्प करैक्टर को समझने में सहूलियत रही !

    आपकी पोस्ट पढ़कर इतना आनंद आया कि मैंने अपने दोस्तों को भी पढ़वाया ! सब लोग खुलकर हँसे !
    ख़ास तौर पे :
    * अबे यो दूसरा चूहा है ...जाट गुस्से मे खड़ा हो गया ..
    * लौटे तो जाट खाली अंडर वियर मे सुलगे हुए खड़े थे..
    * नीचे से गुजराती मे गलिया आनी शुरू हुई ओर जाट भाई अपनी
    चद्दर ओड के लाईट बुझा के लेट गये

    * वो तो शुक्र था कि हरयाणवी उसकी समझ नहीं आयी थी. और
    वो उसे कोई लोक-गीत समझ सारु छे ..सारु छे ...करती
    रह गयी थी ...


    हम सबकी जिन्दगी में जाट भाई और शुक्ल जी जैसे कैरेक्टर आते हैं जो हमारे जहन में हमेशा रहते हैं और गाहे-बगाहे याद आकर मुस्कान भर देते हैं ! जिनकी जिन्दगी में नहीं आते उनकी जिन्दगी ब्लैक एंड व्हाईट सी होकर रह जाती है !

    दाद देता हूँ आपकी लेखन शैली को ... जो पढ़ते हुए साक्षी होने का अहसास कराती है ! मैं तो चाहूँगा कि आप अपने संस्मरण के पेज में इजाफा करके एक मुक्कमल किताब का रूप दें ,,,,, सच में इस बहाने हममें से बहुत लोग अपने-अपने पुराने समय को बार-बार जी सकेंगे !

    चलते-चलते :
    डाक्टर साहब यह मैं क्या पढ़ रहा हूँ ...
    सुलग उठा मेरठ .. हालत बेकाबू .. शहर में कर्फ्यू ..
    यह सब क्या हो रहा है ?
    मेरठ को किसने नजर लगा दी ?
    यह आप वाला ही मेरठ है न ?
    ऐसा लगता है मानो कतरा-कतरा मन के भीतर जमा होता रहता
    आक्रोश किसी न किसी बहाने अपना रास्ता खोज ही लेता है !


    आज की आवाज

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  48. weaker sex is stronger than stronger sex
    because
    weaker sex is weakness of stronger sex

    उक्ति में दम है।

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  49. jat ji ki gatha pad hame bhi apne ek jat mitra ki yaad aa gayi :)

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  50. अहा...डाक्टर साब किस्सगोई की इस अनूठी अदा पे कुर्बान हुये हम तो...!!!
    कितने इश्क के किस्से कमबख्त इसी ’अपां दोस्त?’ के इर्द-गिर्द औंधे से पड़े हैं

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  51. sunder sansmaran,apne college ka salana gathering yaad aa gaya,aur kisine diya wo gulab bhi.wo ankhein aaj na jane kaha hongi.
    waah ye jaat ji ke kisse hamesha behtarin hote hai,aapke longterm memory ki daad deni padegi,kitni choti se choti chiz bhi yaad reh gayi.ankhonke samne chitra ubhar jata hai.

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  52. जाय साहब की तो लॉटरी लग गई ।

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  53. Mast kissagohi jaat bhaii ke saath :))
    interesting ..Very interesting !!!

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  54. आपणे जट भरा दी गल सुण के ता दिल कपाह वाँग खिड गिया किते इह गप्प ताँ नही?
    चलो गप्प वी होवे ताँ वी है ताँ अपणे ही वीर दी है ना मैं ताँ तुहाडी कलम तों निकले इक इक शब्द दी मुरीद हाँ

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  55. @पल्लवी @kush ....जाट अभी एक महीने पहले मेरे साथ सूरत गया था ...हमारी एक दोस्त आई थी यू के से तो सभी साथी बरसो बाद इकठ्ठा हुए थे ...फ्लाईट केवल एक थी दिल्ली से ...जब जहाज देखा तो हैरान हो गए .छोटा वाला था .उसे प्रोपेलर नाम दिया.....फ्लाईट इंडियन एयर लाइंस की थी ..पहले waiting लाउंज में हिंदी तहलका दिखी.तो मैंने जाट को आखिरी पन्ना दिखाया ...मेरा लेख था ..जाट पढ़कर बोला "सुधरे नहीं साहब '...नेट का इस्तेमाल कम करता है ..पर हाँ उसे मालूम है उसके बारे में लिखा है क्यूंकि हमारा तीसरा कॉमन दोस्त कभी कभी ब्लॉग पढता है .जब कॉलेज के किस्से लिखता हूँ.....
    @प्रकाश जी
    मेरठ के सुलगने के कई राजनैतिक कारण है .जहाँ मजहब का इस्तेमाल चतुराई से किया गया है ..पर मेरा मानना है की प्रशासन ओर पुलिस को सख्त ओर निष्पक्ष होना चाहिए .बिना किसी धर्म की परवाह किये .जो गलत है ओर दंगाई है उसे सख्ती से पेश आयो......
    एक साहब ने पेशकश दी है ...इन्हें श्रृंख्ला बंद करने की....उनकी किताब अभी छपी है ..अभी तक सोचा नहीं .आगे देखते है .
    @महक जी
    वो आँखे शायद आपको भी ढूंढती होगी कही..
    @निर्मला जी....
    जाट के आलावा उन दस सालो के इतने किस्से है की किसे भूले ओर किसे याद करे......चलिए एक ओर बताता हूँ ...एक बार रात को किसी बियर पार्टी के बाद होटल से खाने के बाद वहां किसी पुल में रात को सुट्टा मारने रुके ....एक साहब को लघु शंका हुई..वे सीधे पुल से शुरू हुए ही थे की पुलिस की जीप सायरन बजाती आ गयी.....सोचिये उन्हें चैन बंद करने का मौका नहीं मिला......हम कैसे छूटे ओर क्या एक्स्प्लेनेशेशन दिया....वो कहानी फिर कभी.....आजकल वे शाहब यू के में है ..खासे फेमस है .इन्तेल्लिजेंट तो थे ही.....
    तो किसको यद् करे अब ओर किसको भूले ......

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  56. पिंक रोज़ से रेड रोज़ तक का सफ़र जाट' साहब क्या तय कर पाए??
    आखिर में इंग्लिश का कुटेशन भी कमाल का है...जाट की कहानी मस्त लगी ...

    उत्तर देंहटाएं
  57. आपके जाट साहब तो काफी सारु छे......!

    डॉ देसाई की लड़की को प्रपोज़ कर आये थे....अभी तक कुवांरे हैं ....??

    अंगद के पाँव की माफिक .....? बहुत खूब.....!

    हम एक जगह जाट के साथ बैठे हुए 'कोई उम्मीद भर नजर नहीं आती ' ग़ालिब के इस शेर को याद कर रहे थे .....ऊं.... हूँ ....किस तरह की उम्मीद. है जी यह .........!!

    उत्तर देंहटाएं
  58. बेहद रोचक. यादों के गलियारे में भ्रमण करते करते पुरानी कहानीयां याद आ गयी

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  59. ... तारीफों का पुल बना हुआ है अब उस पर क्या तारीफ करें, बहुत खूब !!!!!

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  60. कॉलेज के दिन ज़िन्दगी के सबसे बेहतरीन दिन होते हैं, जब आप हर छोटी छोटी बात पर अपने आप को prove करते रहते हैं| उस समय हम कड़के होते थे फिर भी कैसे भी पीते थे तब दोस्त थे, आज पैसे बहुत हैं, जब चाहे तब पी सकते हैं....लेकिन वो दोस्त सब दूर हैं|| एक sms है -

    "Memories play a very confusing role...They make you laugh when you remember the time you cried together!! But make you cry when you remember the time you laughed together.."

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  61. किस्सा मस्त है बीते हुए कॉलेज के दिनों की याद दिलाता है
    जाट साहब से या उनसे प्रेरित चरित्र हल काल खंड में पाए जाते हैं क्या ? सुन्दर लेखन की बधाई

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  62. हर इंसान के अतीत मे होते है
    कुछ काग़ज़ के टुकड़े
    कुछ मुड़े टुडे, कुछ सहेज कर रखे हुए
    हरेक की यादों का संदूक
    किसी लॉकर मे पड़ा है...
    खूब कहा है...

    ये अतीत ही तो है जो कम्बख़त साथ ही नहीं छोड़ता

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  63. anuragji apka kisse sunane ka andaj bhut hi khubsurat laga unhi discount vale gulab ke fulo ki tarh .
    badhai

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  64. यो जाट देवता की रोमांटिक कथा में आगे के हुआ यो जाणन की घणी उत्कंठा सै.

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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