2009-10-20

डिटरजेंट से धोई हुई "साइन्साना ख्वाहिशो" पे बाइस्कोप !


इधर हमें साइंस से कुछ ज्यादा ही उम्मीदे लगने लगी है ...जब भी हम अपने एक पुराने दोस्त को फोन मिलाते है ...उधर से कुछ अजीब सी आवाजे सुनाई देती है ...कुछ खा रहे हो....हम संशकित होकर पूछते है ......
क्या ?
समोसा ...
अकेले ?
नहीं ब्रेड में दबाकर .....
हमें मेज पर पड़ी मूंग की दाल को निहारते  है ....
बहुत   पहले  एक सीरियल   आया करता था ...स्टार ट्रेक ..पता  नहीं  आपको   याद   है के   नहीं ..जिसमे एक लम्बे कानो वाले मिस्टर स्पार्क भी हुआ करते थे ...उसमे  अजीब  सी किरणों से कही भी ट्रांसपोर्ट हुआ जा सकता था ....कसम से हमें भी  उम्मीद है   एक रोज जब हमारे यही फोनुआ दोस्त  राजमा  में  चावल मिलाकर खा रहे होगे .हम ट्रांसपोर्ट हो जायेगे ...........कल  जब  सब्जी   वाले ने  सब्जी  तौलते  हुए    “ तूने  बैचेन  इतना  ज्यादा   किया   ,मै  तेरा   हो  गया मैंने वादा किया वाला "....मोहमद अज़ीज़  का सोंग बहुत देर तक सुनाकर    अपना  मोबाइलवा  उठाया    .तो हमने फ़ौरन  आसमान में नजर  डाली ........ग्राहम बेल  एक ठो मुस्कराहट   दे रहे थे .....
  …   तो  क्या   वो दिन  दूर नहीं   जब    .  आप   अपने  बढ़ई   नसीम  भाई   को   ट्विटर   पे  सुबह  सुबह ट्विट  करोगे  के " .अमां  नसीम  भाई  .एक  खिड़की  का  पल्ला  जरा   बुरा  मान  गया  है  …आ  कर  थपथपा  दो.... या  फेस  बुक  पे   आप का इलेकट्रीशियन   आप को जवाब भेजे ..  .ऊपर    वाले    स्टोर   की   बत्ती जो   आंख  मार  रही थी  बदल दी है .....नीचे इनवर्टर का भी फ्युस चेंज हुआ है ...कुल मिलाकर इत्ते मेरे बनते है ...अकाउंट  में  ट्रांसफर कर देना .... 
तो   किबला   अपनी "  पुरानियो "  के    नाम   लिख  लिख  कर    उन्हें  गूगल   में    ढूंढने   की    ही   नहीं   बल्कि   दूसरी   ओर  कई   जहमते   उठाने   के  लिए  कमर कस  लीजिये
तो  भाई   लोगो  दी  एंड  करते  हुए  अपुन  चलता  है  ……









  ई .एम .आइ-

उठायो ख़वाहिशे ओर रख दो लाल घेरे मे
दीवार पर टॅंगी दूर से नज़र आती है.....

बदलो सफ्हा कॅलंडर का ...ये महीना भी गया

61 टिप्‍पणियां:

  1. अनुमान सही है जब सब के पास आज मोबाईल हो गया है तो ट्विटर और फ़ेसबुक कौन बड़ी बात है, जल्दी ही वह वक्त आने वाला है। बेटा भी ट्विटर पर ही फ़रमाईशे करेगा...

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  2. तो क्या वो दिन दूर नहीं जब . आप अपने बढ़ई नसीम भाई को ट्विटर पे सुबह सुबह ट्विट करोगे के " .अमां नसीम भाई .एक खिड़की का पल्ला जरा बुरा मान गया है …आ कर थपथपा दो.... या फेस बुक पे आप का इलेकट्रीशियन आप को जवाब भेजे .. .ऊपर वाले स्टोर की बत्ती जो आंख मार रही थी बदल दी है ....

    hanji.. wo din door nahi..

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  3. मेरे आस-पास बॆड वाले मेरे ठहाकों पे गौर से मुझे देख रहे हैं डाक्टर साब..."पुरानियों" का नाम गुगल में ढ़ूंढ़ने वाली बात पर। आज बड़े दिनों बाद आप तनिक दूसरे मूड में दिखे हो। तो मैं ये मान लेता हूँ कि हमारी मुलाकात से पहले की ये आखिरी पोस्ट है।

    मुहम्मद अज़ीज की बड़े दिनों बाद याद आयी। श्रीमान से बड़ी उम्मीदें थीं...

    और दिनों बाद त्रिवेणी का जायका भी बदला-बदला नजर आया।

    इधर वादी अजीब से नजरे दिखा रही है कल से और रुखसत का समय भी आ गया है हास्पिटल से।

    बस एक आने की खबर पे इतना सारा कुछ हो रहा है, जाने क्या कयामत साथ लेके आवोगे.... :-)

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  4. आप हमेशा यादों की सुहानी धूंध में ट्रांसपोर्ट किये ले जाते हैं. यह धूंध यथार्थ के उजाले से बेहतर लगती है. हमें इंसान बनाये रखती है.

    दिवाली की ढेरों शुभकामनायें..

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  5. बेहद रोचक और मार्मिक व्यंग्य है।

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  6. साइंसाना ख्‍वाहिशें... यहां आने पर जुमला तो मिलता है लेकिन उसे इस्‍तेमाल करने से बचने की कोशिश करता हूं। कभी कभी लगता है आप लहसुन की तरह हैं और मैं कटोरी की तरह।


    हा हा हा हा हा हा हा हा


    इसीलिए ... दूर रहने की कोशिश करता हूं....

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  7. असंभव क्या है अनुराग जी ! आज टेक्नोलजी इतनी आगे जा चुकी है की बस आपने सपने देखे नही की उसकी खोज शुरू .....

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  8. समय के साथ साथ सब कुछ बदलता जाता है।बहुत बढिया व रोचक पोस्ट है।

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  9. एक और बढ़िया पोस्ट पर बधाई !
    साथ साथ गौतम भाई के discharge होने कि भी बधाई !!

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  10. Aaj to katai 'Shashi Twiterror' kinda post ?

    उठायो ख़वाहिशे ओर रख दो लाल घेरे मे
    दीवार पर टॅंगी दूर से नज़र आती है.....
    बदलो सफ्हा कॅलंडर का ...ये महीना भी गया

    'Kingfisher' wala calander ho to khwaheshein dafnane ka bhi apna hi maza hai.
    :)

    Tippani ki kawali...

    ek tapakti hui chat hai meri,
    do deewerein hai bheege hue.

    aankho main seelan lagi ha kabse !!

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  11. ऐसी किसी मशीन से कोई हमें भी ट्रांसपोर्ट कर दे...जहाँ आप और गौतम जी मिलने वाले हैं...कसम से हम समझ नहीं पा रहे हैं की आपसे जलें या गौतम जी से...जो यूँ मिलने का प्लान बन रहा है और हम इतने दिन से सुन रहे हैं. मुलाकात मुबारक हो आप दोनों को...हम इंतजार करते हैं, कौन जाने वो कमबख्त मशीन मिल ही जाए हमें.

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  12. डाक्टर अनुराग भाई साहब,
    मेरे बेटे का पसंदीदा शो था स्टार ट्रेक - - तौबा इत्ती के , शाम की न्यूज़ भी देखने ना देता था वो
    और नुकीले कानवाले स्पार्क और कप्तान कर्क हमारे भी चहेते हो गए थे
    और यहां जो घर की सफाई करने सुन्दर सी रशियन कन्या , हमारे घर आया करती है वो फैस - बुक पर भी हमें मिली ...ज़माना बदल रहा है जनाब ....त्रिवेणी भी पसंद आयी ...
    स स्नेह,
    - लावण्या

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  13. बहुत बढिया...


    आज ही मेरा लकड़ी का मिस्त्री(मेरा रडीमेड दरवाज़ों का काम है)मुझसे कह रहा था कि कहीं कोई बढिया सा पुराना कम्प्यूटर मिले तो बताना...

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  14. jmana teji se badl rha hai aur isi ke chlte ham sab snvad kar pa rhe hai .ha smajvad ki pribsha badl gai hai .

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  15. मेरे कुछ मजदूर मित्र अपने लोगों को मेरे यहाँ से इमेल करवाते हैं , बैंक के एटीएम का उपयोग तो सभीने शुरू कर दिया है । मोबाइल भी सब रखते हैं । सवाल यह है कि उस वर्ग के लोग जो अभी इन सुविधाओं का उपयोग करते हैं इन मेहनतकशों को भी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग करते देख नाक -भौं नहीं सिकोड़ेंगे । उनका वर्ग अहंकार फिर कैसे पोषित होगा ? हमारे एक मित्र अक्सर कहते हैं " लो अब रिक्शे-तांगे वाले भी मोबाइल रखने लगे "

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  16. ऐसे जाने कितने सवाल जेहन को घेरे हैं...


    शानदार पोस्ट....

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  17. सच है.. ये व्यंग्य ही सही पर सच है..और इस सच की विडम्बना का एक पहलु भारत सहित कई विकाशशील देशों में आज भी मौजूद है.. महानगरों से २०-२२ किलोमीटर का सफ़र करके देखिये लगेगा की एक युग पीछे चले आयें हैं..
    और जिस दिन हमारा इलेक्ट्रिसियन Gtalk पे ping करके ये बताएगा कि दिवाली कि फैंसी लाइट बनके तैयार है... मेरा यकीन मानिये उस दिन भी २० फीसदी गाँव अँधेरे में सो रहे होंगे...
    ये तकनीकी सिर्फ फासले तैयार करेगी.. हमें थोड़ा सा और ज्यादा सर्वोत्तम कहलाने के मौके दिलाएगी बस और कुछ नहीं..

    आपकी पोस्ट हर बार की तरह इस बार भी सोचने पे मजबूर कर गयी डा. साहब... क्या करें अपनी आदत से मजबूर हैं....

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  18. अमां नसीम भाई .एक खिड़की का पल्ला जरा बुरा मान गया है …आ कर थपथपा दो....

    इस आने वाली दुनिया की भाषा में हीं सही, गर इतनी तहजीब बची रह जाए, अपनापन बचा रह जाए, तो दुनिया शायद कितनी हीं दूरियां झेल लेंगी...

    jaisa aap kahte hain...One of your best

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  19. बढियां फन्तासियाया है आपने !

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  20. आप की त्रिवेणी-
    'उठायो ख़वाहिशे ओर रख दो लाल घेरे मे

    दीवार पर टॅंगी दूर से नज़र आती है.....

    बदलो सफ्हा कॅलंडर का ...ये महीना भी गया'

    -इतनी आसानी से 'kisi technology se bhi'ऐसा कभी हो पायेगा..मुझे ऐसा लगता तो नहीं है!

    ----------------------------
    'स्टार ट्रेक 'भी याद है..रविवार को दूरदर्शन पर आया करता था..
    विज्ञान और तकनीक ने दुनिया छोटी ज़रूर कर दी है..मगर..खैर..फिर कभी..

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  21. गूगल पर 'पुरनियों' को ढूंढने का अच्छा ख्याल आया आपको और याद दिलाया :)

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  22. अगर कही से वो टेकनीक मिल जाए तो सुबह शाम जोधपुर जाकर खाना खा लिया करूँगा.. ग्राहम बेल साहब तो ऊपर झूमते ही होंगे..
    सबसे धांसू बात पुरानी वाली.... अब क्या बताये पुरानी वालियों को तो हम भी ढूंढते रहते है.. कई पुराने दोस्त यहाँ फिर मिल गए..

    और हाँ इस पोस्ट को रिट्विट कर दिया है..

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  23. कल रात "गुड विल हंटिंग "मूवी देखते देखते ब्रेक में अचानक ख्याल आया .के "तुने बैचेन इतना ज्यादा किया ....कही शब्बीर कुमार का तो सोंग नहीं है ......जिसे मोहमद अज़ीज़ का लिख गया .खैर इसपे बराबर टॉर्च तो युनुस भाई ओर मनीष ही फेंक सकते है .दिलीप भाई को तो यद् नहीं रहा ........
    @सूर्या
    इस ज़माने में हर खवाहिश की एक इ एम आई है ओर हर इ एम आई की एक तारीख ...कार लोन की तारीख ....मकान की किस्त.की तारीख ...ओर सारी उम्र इन्ही तारीखों के बंदोबस्त में निकल रही है....सो त्रिवेणी इसी मूड पे है ....

    @लावन्या दी स्टार टेक सन्डे आता था ...ओर केप्टन क्रूक मुझे उसकी आवाज अब तक याद है.....

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  24. साईंसाना खुशियों जितनी मिले कम ही लगती है।दिल जीत लिया डाक्टर आपने।

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  25. पुरानी वालियों को हमने तो वाक़ई कई बार सर्च मे डाल कर ढूँढ़ा है...मगर लगता है या तो सब नाम चेंज कर के यहाँ पर हैं या फिर गृहस्थी सुख में मस्त है और नेट जैसे टाईमपास की ज़रूरत नही....!!

    पुनीता शर्मा, जान्हवी ओझा, मोनिका मिश्रा, आराधना त्रिपाठी हर नाम के साथ एक गीत जुड़ा है....!!! एक सीढ़ी भी...एक बेंच भी...!

    और साहब फोन वाली बात तो ये है कि सुबह सुबह धोबी फोन कर के पूँछता है "दीदी कपड़े हो तो आयें ?"
    और काम वाली मिस काल पे बैक काल मँगा के हड़काती है "हम इतनी देर से बाहर खड़े हैं, घर मा भईया हईये नही हैं।"

    हाईटेक सर...वैसे हमें भी फायदा है इसमें कहीं से भी फोन घुमा दिया...! आज शाम को मत आना, खाना दीदी के घर है। :) :)

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  26. उठायो ख़वाहिशे ओर रख दो लाल घेरे मे
    दीवार पर टॅंगी दूर से नज़र आती है.....

    बदलो सफ्हा कॅलंडर का ...ये महीना भी गया
    khwahishe jara or paliye
    deewar pe nahi asma pe tangiye
    mousam kabhi to badlega....

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  27. ढ़ई नसीम भाई को ट्विटर पे सुबह सुबह ट्विट करोगे के " .अमां नसीम भाई .एक खिड़की का पल्ला जरा बुरा मान गया है …आ कर थपथपा दो.... या फेस बुक पे आप का इलेकट्रीशियन आप को जवाब भेजे .. .ऊपर वाले स्टोर की बत्ती जो आंख मार रही थी बदल दी है

    ...आज तो आपकी पोस्ट खिलखिला रही है क्या बात है डाक्टर साहब, लगता है सुबह सुबह ट्विटर पर कोट्विट कर रहे थे

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  28. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  29. एक दम मस्त पोस्ट है रिफ्रेशिंग .मूड फस क्लास हो गया है .लड़किया पुरानो को ढूंढती है छिप छिप के ओर लड़के पुरानियो को हा हा हा.
    त्रिवेणी का अपना क्लास है बोंस !

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  30. @ Anurag ji,
    yah lijeeye is gane ka kachha chittha--:)...

    yahan dekh skate hain--http://www.youtube.com/watch?v=4MvOWRXtHBA

    details-
    Tune Bechain Itna Ziada Kiya

    Movie Name : Nagina (1986) Singer : Anuradha Paudwal, Mohd Aziz
    Music Director : Laxmikant Pyarelal
    Lyrics : Anand Bakshi

    CAST : SRI DEVI ,RISHI KAPOOR

    [--Chanda re chanda re..mujhe bhi bahut pasand hai..khaas kar jo sawaal poochhey gaye hain ve sabhi..]

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  31. ".अमां नसीम भाई .एक खिड़की का पल्ला जरा बुरा मान गया है …आ कर थपथपा दो.."
    और नसीम भाई ट्वीटर पर खिड़्की थपथपा देंगे ... लो जी, सब ठीक हो गया:)

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  32. डागदर साहेब,
    आप अभी तक नसीम बाबू से उलझे हुए हो पल्ला ठीक कराने में...आपका ब्रोअद्कास्त में एक ठो चैनल मनोरंजन का भी होवे के चाही..
    अब भला इ बताइए कि बतनवा दबाये और थिरकत-थिरकत स्पार्कवा के जगह पर अंजेलिना जोली ड्राइंग रूम्वा में नजर आवे तो तो का होई..... चाहे बचवा के बी'डे विश घरे में शाहरुख़ खान दे जावे ...बस बटन दबावे के जरूरत होवी....अरे होलोग्राम से इ सब तिलस्म तो होइए रहा है..का बढ़िया होवे कि सब फिल्म स्टार साक्षात् भगवान जैसे दर्शन देवे लगिहें...
    आपका लेख अति सुन्दर.....लेकिन हम ऐसन बुडबक..पहिली बार आये हैं...बताइए इ कौनो बात है भला...!!!

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  33. वाह ये साइंसाना अन्दाज़ बहुत खूब् शुभकामनायें

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  34. dr साहब वापस टिप्पणिया पढने के लिए आती हूँ पर एक ओर कोइन्सिडेन्स हुआ आज सुबह मैंने भी "गुड विल हंटिंग "देखी रात की पिक्चर दिन में रिपीट होती है न !सच कहूं मै तो ऑफिस जाते जाते लेट हो गयी छोड़ने का मन नहीं किया .सच में बहुत अच्छी है
    i am going to buy its cd.

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  35. क्या बात है डाक्टर साहिब छा गए अमा आप तो इस साईंस वाले टोपिक में ... हा हा हा ...कोशिश मैं भी कर रहा हूँ पुरानी वाली का नाम .. हा हा क्या कमाल कर देते हो आप डाक्टर साहिब...सर्च में दाल रख्खा है देखते है किसका नाम आता है ... तेक्नोलोग्य कहाँ से कहाँ ... उफ्फ्फ्फ्फ़ वाली बात हो गयी ये तो... वादियों में लगता है शाईर और डाक्टर साहिब मिलने वालें हैं .. बहुत बढ़िया ... बधाई हो ... अगर वो मिले तो उनसे नर्स वाली बात जरुर पूछना आप....

    अर्श

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  36. कुछ पुराने नाम किसी कोने से आवाज लगाते हैं तो कई बार सर्च वाले डब्बे में डाल दिए जाते हैं एक दो बार उधर से काम की बात भी निकल आती है. लेकिन अक्सर निराशा हाथ लगती है. भविष्य में देखते हैं अभी तक तो आउटडेटेड नहीं हुए हैं टेक्नोलोजी के मामले में आगे का पता नहीं :)

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  37. टिप्पणियां भी मजेदार.देर से आने का ये फायदा है कि आपको मिलता उम्मीद से दुगना है यानी एक पोस्ट से भी थोडा ज्यादा.

    बीच में ये little boy और fat man न आये होते तो तकनीक के फायदे राशन की दुकानों पर घुटने टिकाते लोग भी ज़रूर उठा पाते.
    अलग जायका देती पोस्ट.शुक्रिया.

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  38. यहाँ की दुनिया में तो यह सब शुरू हो गया है वहां भी यह दिन दूर नहीं...घर साफ़ करने वाले वाली से आप उसकी वेब साईट पर जाकर स्लोट ढूंढ कर उसकी सहूलियत के मुताबिक समय बुक करो और भुगतान एडवांस में सीधा उसके बेंक में ...इससे बेहतर है की सफाई खुद कर लो.. :-)

    आह! त्रिवेणी ने गुमे हुए कितने लाल घेरे और कलेंडर याद दिला दिए...

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  39. गजब की पोस्ट। ख्यालों की पंतग को नए जमाने के मांजे से आसमान में उडा दिया। जब ये नई टेकनीक मिल जाऐगी तब क्या क्या करेगे यही सोचने लगे जी हम तो। मजा आ गया।

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  40. आखिरकार यादों का बक्सा खोलने को मजबूर कर ही दिया आपने ... उन दिनों स्टार ट्रेक सीरियल और मिस्टर स्पार्क मेरे फेवरेट हुआ करते थे ...और उन अजीब सी किरणों से ट्रांसपोर्ट होने का सपना भी देखा करते थे ...विज्ञान इस सपने को कभी तो हकीकत में बदलेगा ...
    फेस बुक या ट्वीटर पर इलेक्ट्रिशियन या बढ़ई की दस्तक का आईडिया अच्छा है ....
    व्यस्तता के कारण पिछली पोस्ट 'शाह और मात ' आज पढने को मिली ...बड़े ही अच्छे शब्दों में अपनी बात को कह डाला है आपने ....समझ नहीं पाती हूँ की औरतों की मानसिकता और भावों को इतनी अच्छी तरह कैसे समझ पाते हैं आप ...शायद इतना अच्छा तो इंडिया की फिफ्टी परसेंट औरतें खुद को भी समझ नहीं पाती होंगी ....
    ज्यादा पढ़े लिखे लोगों के नाखून अद्रश्य होते हैं ...साथ रहने पर ही दीखते हैं ...कभी कभी औरत अपने भीतर रूक जाती है ...इस वाक्य ने कुछ हलचल सी मचा दी है ...बहुत कुछ कह दिया है जो अद्रश्य है ....
    वाकई कुछ सवालों के जवाब मुश्किल होते हैं तो कुछ सवाल ही मुश्किल होते हैं ...सही में कुछ सिरफिरे हैं वो लोग जो जिन्दगी के ऐसे मुश्किल सवालों के जवाब की तलाश में हैं ..

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  41. पुरानी वालियां...क्या खूब जुमला कहा है...जब से पढ़ा है ,दिल में घंटियाँ सी बज रही हैं...घर जा कर मलिका पुखराज का गाया हुआ 'अभी तो मैं जवान हूँ..." सुनता हूँ...

    नीरज

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  42. ज़माने भर के साइंसदानों को यह पढना चाहिए... बड़ा ही रोचक बन पड़ा है... उन्हें प्रोडक्ट बेचने की नयी तहजीब भी मिलेगी... एक नयी लैंग्वेज सीखेंगे...

    एक वक़्त था जब मुहम्मद अज़ीज़ के गाने 'रफी दा' के सबसे करीब समझी जाती थी इस लिस्ट में अनवर का नाम भी था जो "हमसे का भूल हुई जो यह सजा हमको मिली' गा कर उनके क्लोज हो गए थे... फिर जाने कहाँ गायब हो गए... खुदा गवाह के गीत और जैकी श्रोफ्फ़ के "मेरे नाग बाबा तू ना आना भाग जाना" जैसे गीत आज भी ठेलेवाले, पानवाले का पसंदीदा है... मैं भी अकेले में गा लेता हूँ... पर सबके सामने नहीं :)

    शब्बीर जी और अज़ीज़ जी गाने अभी भी बहुत दिनों बाद सुनने पर कांफियुज़ करते हैं...

    पोस्ट छोटी रह गयी है आदेश हो तो मैं बढाऊँ ? क्या सिकुअल लिखेंगे ?

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  43. आपकी सांइंसाना ख्वाहिशें सच होने में ज्यादा दिन नही लगने वाले । ओर हाँ तो किबला अपनी " पुरानियो " के नाम लिख लिख कर उन्हें गूगल में ढूंढने की ही नहीं बल्कि दूसरी ओर कई जहमते उठाने के लिए कमर कस लीजिये ।
    क्या बात है ।

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  44. waah waah.... aisa hi kuch concept Raj Comics ke ek Hero par aazmaaya gaya tha jo apni body ko atoms mein divide kar taaron se nikal jata tha aur wahan jaker saare atoms phir jud jate the :P naam tha Parmanu..

    aapko pata hai bombay mein log in cheezon par bhi business plan banate hain aur na jaane kitne startup hain.. I mean floor to floor nahi..lekin aapko plumber/electrician chahiye, phone ghumaiye, aur wo aapke ghar... (Aaj plumber bulane ka bhi time nahi hai apne paas)

    kahin padha tha :)
    "atom bomb, supersonic ke is yug mein,
    Doori ka Parimaap simat kar paas aa gaya
    tann ki doori simat gayi to, mann ki doori badhti jaati..."

    aaj aapne ek naye mood se likha hai..achha laga padhkar..

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  45. कल जब सब्जी वाले ने सब्जी तौलते हुए “ तूने बैचेन इतना ज्यादा किया ,मै तेरा हो गया मैंने वादा किया वाला "....मोहमद अज़ीज़ का सोंग बहुत देर तक सुनाकर अपना मोबाइलवा उठाया .तो हमने फ़ौरन आसमान में नजर डाली ........ग्राहम बेल एक ठो मुस्कराहट दे रहे थे .....

    अब सब्जी वाले तक तो यहाँ नहीं देखा था ...हाँ काम करने वाली बाइयों तक की तो मौज थी ....!!

    पुरानी वालियां...क्या खूब जुमला कहा है...जब से पढ़ा है ,दिल में घंटियाँ सी बज रही हैं...घर जा कर मलिका पुखराज का गाया हुआ 'अभी तो मैं जवान हूँ..." सुनता हूँ........हा...हा...हा....ये नीरज जी भी रोते हों को हंसने वाले हैं ....!!

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  46. मो. अजीज़... क्या कहूँ समझ ही नहीं आता, आपने अपने कष्ट को इस सरलता से रूपायित किया है कि बधाई के पात्र हैं.

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  47. bahut khoob, dr saab!
    ek bahut hi romaanchak website par aaj kal thoda samay bitaati hoon,www.halexandria.com. kabhi padhiyega, itihaas kaise dohraaya jaa raha hai... yeh sab pehle ho chuka hai, aur phir hoga, sab kuch mathematical hai... chaand sooraj..dharti...aur hum!
    .. bachpan mein ramayan sunte aur kehte.. udankhatole mein lanka se laute ram aur sita... india mein pehle se hi hawai jahaaz hua karte the... (har cheez mein pehal karne ka to theka hami ne le rakha hai)
    ...aur suna hai chaand par pani mil gaya hai.. yakeenan life forms hone ki sambhaavna...wahan ke log kya lunatics kehlayenge?

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  48. हर बार की तरह खूबसूरत पोस्ट...

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  49. अमां नसीम भाई .एक खिड़की का पल्ला जरा बुरा मान गया है …आ कर थपथपा दो....

    hahahahaha

    bahut khoobsurat post

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  50. :-) Good article !
    काश आप जो कह रहे हैं जल्द सच हो जाये ... | मैं जहाँ रहती हूँ ... एक अच्छे कर्पेनेटर//प्लमबर/बिजली-वाला इत्यादि को ढूंढ कर काम पर बुलाना याने बहुत बड़ी समस्या है |
    बाई द वे, दिल की धड़कने फास्ट/स्लो करने वाले .. और उसमें रीचारजेबल बेटरी लगाने वालों के लिए "teleportation" कोई बड़ी बात नहीं ! What do you think?

    RC

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  51. hanji....ab to din mein dekhe hue sapne hi sach hote hai.... :)) ..... achchi baat hai din mein sapne dekho doc. saab..

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  52. थोड़ा कन्फ़्यूजन सा हो गया...यह मासूम सी साइंसाना ख्वाहिशें खिले मन की पैदाइश हैं या बुझे मन की ??..अच्छी ख्वाहिशें हैं..बस ख्वाब देखते-२ एक कील चुभ जाती है बिस्तर मे..हमारे इधर के कई गांवों मे रातें अभी भी कँवारी ही बुढ़ा जाती हैं..बिजली के खम्बे जो नही आये दामाद बन कर....
    ..वैसे मुझे तो थोड़ा डर भी लगता है..ग्लोबल कनेक्टिविटी के उस दौर मे हमें अपनी बेटे को डिनर टेबल पे बुलाने के लिये उसकी फ़ेस-बुक-वाल पे जाना पड़े..या बेटी की लोकेशन उसके ट्विटर अपडेट से ही पता लगे..या हमारी बीवी ही हमें अपनी फ़्रैंड-लिस्ट से बाहर कर दे..पुरानी-वालियों की फ़्राइंड-रिक्वेस्ट देख कर..और स्टेटस लगा दे..सिंगल अगेन !! ;-) और हम उम्र दोस्तों मे से जिसका ट्विटर अपडेट ने हो कुछ दिन..समझ लें कि ऊपर टेलीपोर्ट हो गया बस !!
    वैसे अपना खयाल है कि यह सोशल कम्यूनिटीज का करेंट फ़ंडा ३०-४० साल से ज्यादा नही चलेगा..नई पीढ़ी उखाड़ फेंकेगी हमारी पीढ़ी के सोशल-औजार..आउट-ऑफ़-फ़ैशन कह कर..वैसे जैसे हमने पिछली पीढ़ी के औजार डस्ट्बिन मे फ़ेंक दिये..ट्रंक-काल, दूरदर्शन, टाइपराइटर्स, १५ पैसे वाले पोस्टकार्ड्स, और जयमाला मे झुमरीतलैया वालों की फ़रमाइश पर मों. अजीज का वह साँग....

    हाँ पुरानी वालियों की बात पर गौतम साहब के मिस्टीरियस ठहाके हम दुनियावालों के कान चौकन्ने और निगाहें १२० डिग्री पर पहुंचा देते हैं..आप दोनों की मुलाकात पे बातों का मेनु क्या रहा होगा..अब मजमून समझ आ रहा है कुछ-कुछ....वैसे हिचकियां इधर भी आ रही थीं ;-)
    गुड-विल हंटिंग हमारी भी फ़ेवरिट मूवी है ;-)

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  53. Sahi kaha aapne....takneek jis tarah pasartee aur sarvsulabh hoti ja rahi hai...yah sab bilkul bhi asambhav nahi...

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  54. "सुना है उसे अब फ़िर से ख़त आने लगे हैं"

    इस वाक़ये ने जैसे सांस फूंकी है पूरी नज़्म में ......पूरी नज़्म एक अजीब से अहसासों का भरा टोकरा है .जिसे छूने भर से छलकने का डर लगता है ...लगता है इस दिल में ढेरो नज्मे छुपी बैठी है ..सर झुकाए .अपनी अपनी बारी का इंतज़ार करती हुई.....

    नज़्म लिखते वक़्त आपका भी khyaal aa रहा था के pta नहीं डाक्टर साहब किस rup में lete हैं .....शुक्रिया ....!!

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  55. kya ho agar tumhari ye post bhavan padhe aur tumhari soch se bhi aage jaakar kuch aisa kare ki ham man apne purane walo ko yaad karen aur sare ke sare ek saath dhapp se saamne......

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  56. hmm ye transport wali baat bahut bha gayi,rajma chawal,hum roj transport karwate,specialy delhi se,viasa taste kahi nahi mila rajme ka.
    aur ha chutti wale din purane doston ke ghar transport ho jate:), star treck nahi dekhi kabhi.magar ye idea bahut mast laga. triveni bhi shandar.

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  57. लिखने का ढँग बहुत दिलचस्प है |निचली पोस्ट की हिरोइन से मिलने का दिल कर रहा है , जो जिन्दगी को मात दिए बैठा हो , वो क्या पी के जीता है ये देखने का दिल करता है |

    गुजरे वक़्त में खुद को शनाख्त करने में सहूलियत रहे ...

    अपना चेहरा ही नही जाता है पहचाना ?

    वैसे खुदा की क्या उम्र होगी तकरीबन !

    आदमजात से तो बड़ा ही होगा न .....या फ़िर इमेजिनरी रोल मॉडल , आदमी की नैतिकता को कंट्रोल करने के लिए ;तो आदमी के होश सँभालने के बाद पैदा हुआ होगा , न ?

    अनुराग जी

    टिप्पणी का बहुत बहुत स्वागत है | तकलीफ ,पीड़ा , दर्द , गम क्या पर्याय वाची नहीं हैं ? पहले मैंने ' पीड़ा ' की जगह 'मेरे गीतों को बाँधोगे ' लिखा था , क्योंकि मेरा ज्यादातर लेखन पीड़ा के झंझोड़ने से उपजा है , और उसे मैंने सबकी तकलीफ से जोड़ दिया |खैर , हम तो हर दुःख को नयामत में बदल लेते हैं , वो इक नई नज्म जो दे जाता है | बहुत बहुत धन्यवाद

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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