बुकमार्क करके रखा एक दिन

फारुख   हमारी   सूमो का ड्राइवर   है .जो   जो पिछले चार दिनों से हमारे साथ  . है.... अपनी सुबह की शुरुआत  वो  दूसरे   ड्राइवरो की माफिक  किसी  भज़न  या  सूफी   संगीत   से  से नहीं करता है .."कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है "से करता है ..आज .उसके साथ उसका बेटा भी है ...दस साल का ..मै नाम पूछता हूँ तो वो शरमा के बताता है ."शाहरुख़ "....उसके हाथ में एक पेन ड्राइव है जिसमे उसके पसंदीदा गाने भरे हुए है ... टेक्नोलोजी अपना रास्ता खुद इख्तियार करती है..नंगी आँखों से देखा हुआ प्रत्यक्ष सच गर एक सवाल का जवाब देता है तो दूसरे कई सवाल भी  जेहन  में खड़े करता है   यूँ भी  देश के इस हिस्से में जब आप आते है तो आपके पास ढेरो सवाल होते है……कश्मीर के हर आदमी से आप एक सवाल  पूछना चाहते है  ......छतो पर से  डिश एंटीना झांकते दिखते है .सड़क किनारे अपने बेटे का हाथ पकड़ कर स्कूल बस का इंतज़ार करता पिता .रात की नींद की खुमारी  को तोड़ने के लिए उबासी लेते दुकानदार .. ... कुल मिलाकर   सुबह किसी शहर की आम सुबह की माफिक है बस हवा थोडी सर्द है ओर सूरज थोडा ज्यादा हसीन.....
..पहलगाम  के पूरे रास्ते  दुकानों  पर ,मुंडेरों पे  ....चौराहों पर .कही कही खेतो के बीच .... वो   हरी वर्दी   ओर   राइफल   थामे  खडा है मुस्तेदी से....ये जानते हुए भी के उसके आस पास के लोग उसे पसंद नहीं करते है ... वो बेपरवाह से खडा है ...कही कही चोराहो पे वे दो की जोड़ी में है ....... रास्ते में कई गांव पड़ते है ..फिरन पहने  जवान बूढे तमाम लोग ... कही कही फिरन के नीचे जींस भी दिख जाती है ..रास्ते में कुछ  आर्मी के ट्रक  काफिलों  की शक्ल में  गुजरते है ...उनमे से  एक जवान को  मै सेल्यूट    करता हूँ.....मेरे सेल्यूट   का वो जवाब देता है ....देखकर   फारुख का बेटा   उसे   कश्मीरी में  कुछ कहता है .......मुझे सिर्फ   सेल्यूट समझ   में  आता है  ....क्या इन बच्चो के मन में सेना के जवानो के लिए कुछ है? ..पहलगाम   बहुत खूबसूरत   है ..एकदम किसी लेंड्सस्केप  जैसा ...इतना की आपका कैमरा हाथ उठा देगा ..के .क्या क्या समेटूं ! .नाथू की रसोई वहां हिट है ..खूबसूरत कश्मीरी लड़किया जो ना जाने कितनी  मोडलो को इन्फीरियरटी कोम्प्लेक्स दे सकती है मोर्डन लिबास में नाथू की रसोई   में अंग्रेजी में  राजमा चावल या खीर मांगती है ....बेफिक्री से जीने की ललक यहाँ भी  मौजूद है ....उन   आंखो   में .देखी  जा सकती है ......खाना इतना लजीज है के आप उसके कूक को शुक्रिया कहकर ही निकलेगे ....लौटते  वक़्त शाम होने लगी   है ... ....पर वो अब भी वही खडा है ..राइफल   थामे.....नाम मायने नहीं रखता ... सिर्फ हरी वर्दी ...
. केंट एरिया है ..यहां   भी  जाम  लगता .. है ....एक  बस दिखती है ..देल्ही पबिलिक स्कूल श्रीनगर....  चार  पांच बसे ... ... में   अपनी गाडी   से ही बस की  फोटो लेता हूं .. जाने क्यों मन में एक अजीब सा ख्याल आता है. आप देश के किस हिस्से में पैदा होते है ...कभी कभी ये बात भी आपकी सोच का एक दायरा बनती है ..अपने तर्क बनाती है.....होटल लौटकर  एन डी टी वी खोलकर देखता  हूं है ..देश के एक  संचार मंत्री  पर करोड़े रुपये के डकारने के आरोप  है ....अपनी अपनी मनोव्रतियो के विकार   में ....अपने अपने पूर्वाग्रह  अपने मन में समेटे ..दंभ ओर अहं की गुर्राहटो के साथ  जिंदगी  में  शब्दों  की सियासत  का  भौंडा चौपड़ खेलते ...... हम लोग  उस जवान के आगे कितने छोटे है ....कितने छोटे .......




शाम ओर रात के बॉर्डर पे मेजर से मुलाकात होती है ...बुलंद  आवाज में ठहाका लगाने वाला मेजर .साहिरो .बशीर बद्रो...ओर मुनव्वरो  पर नहीं अपनी कोमिक्स के कलेक्शन पर बात करता है ...कश्मीर.... आर्मी ..कश्मीरियत ..स्कूल कोलेज  बांटने   को   कई किस्से है ...पर तफसील से..  कहने सुनने का वक़्त नहीं है .  .मोबाइल बीच  बीच  में  आवाज देता  है .....वक़्त को कुछ देर खींचकर ....मेजर  विदा  लेता है ....उसके हाथ  में बंधे प्लास्तर पर  मै "बेस्ट ऑफ़ लक" लिखना भूल गया हूं   ..  .सो  उस शाम के लिए   यहां  फराज साहब का एक शेर  चस्पा है....तुम्हारे लिए मेजर .....

"बजाहिर एक ही शब है फराके -यार मगर
    कोई गुजारने बैठे तो उम्र सारी लगी "

61 टिप्पणियाँ:

महफूज़ अली ने कहा…

bahut achcha laga aapka yeh sansmaran....

Arvind Mishra ने कहा…

जीवन ने अपने रंग ढूंढ लिए हैं और तकनलाजी भी उनको चटख कर रही है दिनोदिन

अम्बरीश अम्बुज ने कहा…

अपनी अपनी मनोव्रतियो के विकार में ....अपने अपने पूर्वाग्रह अपने मन में समेटे ..दंभ ओर अहं की गुर्राहटो के साथ जिंदगी में शब्दों की सियासत का भौंडा चौपड़ खेलते ...... हम लोग उस जवान के आगे कितने छोटे है ....कितने छोटे .......
bilkul sach likha aapne..

poemsnpuja ने कहा…

इस शाम की रपट का तो बहुत दिन से इन्तेज़ार कर रहे थे. कश्मीर मैं भी घूमने गयी थी कुछ साल पहले, किसी दिन लिखूंगी...इस पोस्ट को हमने भी बुकमार्क कर के रख लिया है.

<b>विवेक</b> ने कहा…

आपकी नजरों से कश्मीर और खूबसूरत लगा...

neelima ने कहा…

कश्मीर कभी गयी नहीं पर आपकी आंखो से थोडा सा देखने की कोशिश की है वहां खड़े जवान को जिस नजरिये से आपने देखा है ओर समझाने की कोशिश की है उसे सोचकर भी अजीब सा लगता है एक ही जगह पर दिन रात खडा एक जवान ओर आपकी पोस्ट की आखिरी लेने पंच लाइने है
"अपनी अपनी मनोव्रतियो के विकार में ....अपने अपने पूर्वाग्रह अपने मन में समेटे ..दंभ ओर अहं की गुर्राहटो के साथ जिंदगी में शब्दों की सियासत का भौंडा चौपड़ खेलते ...... हम लोग उस जवान के आगे कितने छोटे है ....कितने छोटे ".......

मेजर साहब से मुलाकात को आपने कंजूसी से निबटा दिया है .
मेरी त्रिवेणी कहां है ?

अनिल कान्त : ने कहा…

sahi kaha Bookmark karne jaisa hi to hai

सागर ने कहा…

कुछ जवान सिर्फ ड्यूटी करते हैं... जबकि कुछ जवान दिमाग खोल कर आवाम को समझते हुए ड्यूटी करते हैं... अपवाद हर जगह है... पता नहीं महीनो २४ घंटे की ड्यूटी कैसे की जाती है... चाचा सुनाते थे... बांदीपुर में चलती ट्रेन से कूद गए... कारगिल में निशाना लगाने की झोंक में तर्जनी ऊँगली उड़ गयी और यह कई घंटे बाद पता चला... ५० हज़ार के ईंट के भट्टे को हिला दिया... बिना शस्त्र १२ आदमी से भिड गए... तो यह फंतासी लगता था... कारगिल के वक़्त पिताजी रोज़ दानापुर कैंट से शहीदों की लिस्ट दिल थाम कर देखते थे.....

मेजर दिमाग खोल कर ड्यूटी करने वाले फौजी हैं... और आप दिमाग खोल कर यात्रा करने वाले इंसान.... कश्मीर से जुडी कुछ पर्सनल सवाल वाकई सबके जेहन में होंगी.

Rohit Tripathi ने कहा…

nice post Anurag ji, Kashmir hai hamari list mein jaha hum jana chahte hai aur jayege..

Ashish ने कहा…

बुकमार्क करके रखा एक दिन... जितना सुन्दर आपने इसका टाइटल दिया है. उतनी ही हसीन आपकी कए पोस्ट है..

"In Search of...." ने कहा…

मेरे सपनों का शहर "कश्मीर " !फिल्म बेमिसाल का एक गीत है !!

"कितनी खूबसूरत ये तस्वीर है ,मौसम बेमिजाज बेलजीज है !

"ये कश्मीर है , ये कश्मीर है !! "


आज तक छाया हुआ है ये संगीत मेरे मन पर !!

मेरी इच्छा है कि जब भी वहाँ जाऊं कश्मीर की वो तस्वीर वैसी ही मिले !!

डाक्टर साहब आपकी बारगी की नजर बहुत खूब है !!

nice !!

शिवम् मिश्रा ने कहा…

आपने बहुत बढ़िया लिखा है अपनी यात्रा के बारे में ...... 'मेजर' से मिलने की बहुत बहुत बधाइयाँ !

meeta ने कहा…

एक आम से दिन को इतना खुबसुरत बनाने के लिये आप-सी ही नजर चाहिये ...

Ashok Pandey ने कहा…

नीचे वाला चित्र बहुत सुंदर है..आपके आलेख की तरह।

pallavi trivedi ने कहा…

पोस्ट पढ़कर ऐसा लगा जैसे पिछले चार सालों में कुछ भी नहीं बदला है घाटी में! बिलकुल ऐसा ही मंज़र तब भी देखा था हमने! हर दीवार के पीछे से झांकती संगीने , सुबह सुबह स्कूल जाते टमाटर जैसे गालों वाले बच्चे....सब कुछ याद आ गया!

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

हमें जबसे पता चलाकि आप मिल चुके है तो बडी बेसर्बी से पोस्ट का इंतजार कर रहे थे। कुछ चीजें बगैर काँट छाँट यूँ ही मिल जाती है हर जगह। वैसे हम कभी उधर नही गए। पर आपकी पोस्ट से हम भी थोड़ा झाँक लिए।
बेफिर्की से जीने की ललक यहाँ भी है। ये जीने की ललक यूँ ही बनी रहे। और हरी वर्दी देखकर हमें भी कुछ कुछ होता है। और हाँ मैं इस पोस्ट से कुछ अलग ही उम्मीद लगाए हुए था। नीलिमा जी सही कह रही है। और मेजर जी के लिए लिखा शेर बहुत ही ज्यादा पसंद आया । सच्ची कही बात।

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) ने कहा…

कश्मीर के लोगों के बारे में जानने की दिलचस्पी हमेशा रही। वे क्या सोचते हैं, क्या महसूसते हैं और देश में कश्मीर की छन के आती खबरों में उनकी सच्चाई का शेयर कितना है।

लेकिन लगता है वे मौन रहने के लिये ही अभिशप्त हैं...

रंजन ने कहा…

वाकई बुकमार्क करने वाला दिन है... बहुत संजीदा...

pukhraaj ने कहा…

उम्र की खूबसूरत दहलीज़ पर जब कदम रखा था तो कश्मीर गए थे ....वहां के नजारों में ही डूबे रहने को दिल करता था ...तब न आतंकवाद था न ही डर.... वहां की सुन्दरता के साथ कदम ताल करते सड़कों की सैर और घोडों की सवारी ...वो है ही ऐसी जगह जो सब कुछ भुला दे ....वहां की और भी बातें आपसे सुनेगे ...नोट करते रहिएगा ...मेजर को हमारा नमस्ते और शुभकामनाये

डॉ टी एस दराल ने कहा…

हमारे जवान कितनी विषम परिस्तिथियों में काम करते हैं
इसके लिए हम इनको सलाम करते हैं.
अच्छा संस्मरण.

शरद कोकास ने कहा…

एक आम हिन्दुस्तानी की नज़र से देखा कश्मीर एक खास तरह से नज़र आता है । कश्मीर पर एक यात्रा विवरण यहाँ भी पढिये
http://iyertravels.blogspot.com/2009/10/3.html"

Apoorv ने कहा…

डॉक्‌ साब, पहली बात तो यह कि आप हॉस्पिटल-क्लीनिक के बिजनेस को कुफ़्ल दीजिये..और कलम, कैमरा और कम्प्यूटर ले कर निकल लीजिये अब आवारा रस्तों पर..आपकी यह कलम राहुल सांस्कृत्यायन या मोहन राकेश आदि को रश्क-कॉम्प्लेक्स दे सकती थी..जब घाटी की बेहिसाब खूबसूरती आपकी कलम मे लिपट कर इधर चली आयी तो क्या बाकी बचा होगा उधर..पता नही..अब तो शायद मेजर साब भी आ गये होंगे वहाँ से.
हमारी इंसानी सोच भी हमारी जियोग्राफिकल सरहदों की बेखबर कैदी होती है..और दुनिया के सारे महान मुल्कों के, महान सभ्यताओं के, महान मज़हबों के, भाषाओं, संस्कृतियों वगैरह के नारे इन्ही जियोग्राफ़िकल कुँओं की टरटराहट हैं बस..कम-स-कम मुझे ऐसा ही लगता है.
..और आखिरी पंक्तियाँ जैसे कि हम को (या हमारे जैसे कितनों को) आप खोपचे मे ले जा कर खर्चा-पानी दे देते हो..लगता है कि मैं खुद कन्फ़ेशन बॉक्स मे खड़ा हूँ..अपने छोटेपन के तंग लिबास मे बदन को ढ़कता हुआ....
मेजर साब से मिले आप..मगर रश्क हमें हो रहा है..शायद कोई कॉमिक्स मिल जाती पढ़ने के लिये !!!!

neera ने कहा…

अपनी अपनी मनोव्रतियो के विकार में ....अपने अपने पूर्वाग्रह अपने मन में समेटे ..दंभ ओर अहं की गुर्राहटो के साथ जिंदगी में शब्दों की सियासत का भौंडा चौपड़ खेलते ...... हम लोग उस जवान के आगे कितने छोटे है ....कितने छोटे .......

बिलकुल सच!

Manish Kumar ने कहा…

काश्मीर जाना नहीं हो पाया है इसलिए आपके शब्द चित्रों को पढ़ना अच्छा लग रहा है। मेजर लिखते हैं कि आपने आपसी भेंट के बारे में लिखने से मनाही कर रखी है। क्यूँ भाई ?

MANOJ KUMAR ने कहा…

यह रचना बहुत अच्छी लगी।

अभिषेक ओझा ने कहा…

एक करीबी दोस्त हैं जो कई महीनों तक कश्मीर में रहे. पिछले दो सालों से सरकारी नौकरी में थे. उनके कई अनुभव सुनने को मिले. कई बातें अजीब लगती हैं... एक पहेली की तरह. और फिर उनका वादी में बॉर्डर के गावों में भी जाना होता था (जहाँ भी सेव के बगान हैं उन सब इलाकों में). उन गाँवों के लोगो की सोच... फिर आपकी हर सख्स से बात करने वाली बात स्वाभाविक ही लगी. फिर आप तो मेजर साब से भी मिलकर आये.

Anil Pusadkar ने कहा…

………………………………………सच मे बहुत छोटा हूं मैं।बुकमार्क भी और लैण्डमार्क भी ये पोस्ट्।

अल्पना वर्मा ने कहा…

बहुत कुछ बदल जाता है वक़्त के साथ..

घाटी का नज़ारा आपकी कलम से देखा.

मेजर साहब से मुलाकात का संक्षिप्त विवरण पढ़ा.
सच ...बुकमार्क किया एक दिन ही तो है.

M VERMA ने कहा…

अब यकीन हो गया कि कश्मीर बहुत ही खूबसूरत है --
बहुत सुन्दर संस्मरण

Pankaj Upadhyay ने कहा…

फोटो के दर्शन तो पहले ही कर लिये थे :) और आपकी आखो से काश्मीर देख भी लिया...

उन जवानो के आगे हम सच मे बहुत छोटे है॥ मेजर साहब के लिये हमारी तरफ़ से भी ’आल द बेस्ट’...

Pankaj Upadhyay ने कहा…

अनुराग जी :) जब भी समय मिले, प्लीज़ इन लिन्क्स को विजिट करे... कुछ बडे मन से लिखा है.. आप एक बार देख ले तो वे धन्य हो जाये...

http://pupadhyay.blogspot.com/2009/11/blog-post.html

http://pupadhyay.blogspot.com/2009/10/blog-post_23.html

P.S. प्लीज़ इसे कतई अन्यथा(otherwise) न ले :))

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` ने कहा…

कश्मीर हमने भी देखा है और लकडी के बने बड़े शिकारों में रहे भी थे - झेलम का जल तब भी वैसा ही रंगीन था जैसा आज है
काश वहां अमनो चैन कायम हो जाए ...........
मेजर से मुलाक़ात कैसी रही ?
- लावण्या

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुत भला लगा यह पोस्ट पढ़कर और चित्र देखकर. मेजर साहब से पहचान उतनी ही नयी है जितनी डॉ साहब से मगर कश्मीर से पुराना रिश्ता रहा है, शायद पिछले जन्मों का भी कुछ हिसाब रहा हो. अक्सर सोचता हूँ कि यह हरी वर्दी वाले ही जननी-जन्मभूमि को अपना खून देकर सलामत रखते हैं.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आपके साथ कश्मीर घूमने का आनंद ही अलग है...शब्द और चित्र बेजोड़ हैं...तभी तो आपके ब्लॉग की तारीफ़ "नवभारत टाईम्स" पत्रिका के अक्टूबर अंक में (दिवाली अंक) में छपी है आपने देखी...अगर आपके यहाँ ये पत्रिका नहीं मिलती तो यहाँ से भेजूं?

(हमारे मेजर के साथ हुई बातें आपने दिल खोल कर नहीं बतायीं...सफाई से गोल कर गए...ये अच्छी बात नहीं है...:))

नीरज

Raviratlami ने कहा…

आप मेडिकल प्रोफ़ेशन में बाई एक्सीडेंट नहीं आ गए हैं? कमाल का संस्मरण - हर पंक्ति से उम्दा कविता झरती हुई...

मेजर के लिए (उनके हाथ से प्लास्टर पर) बेस्ट ऑफ़ लक.

डॉ .अनुराग ने कहा…

इस यात्रा में कई फलसफे सुनने पड़े .....कई अजीब से वाक्यों से गुजरना पड़ा ..जैसे

आपकी फ्लाईट ग्यारह पेंतालिस की हो ओर आप एयरपोर्ट पे ठीक ग्यारह तेंतालीस पे नुमायेदार हो तो भी आप फ्लाईट पकड़ सकते है ......कर्टसी एयर इंडिया
..दिल्ली के ट्रेफिक को कभी अंडर एस्टीमेट मत करिये ....कभी भी कही भी आपकी वाट लगा सकता है ....

एयरटेल का लोगो वहां जाते ही इंडियन एयरटेल हो जाता है ....

...क्रिकेट ओर राजमा से मोहब्बत आपको कश्मीर में भी दिखती है ...

"अपने ही देश में शरणार्थी "आपने कभी सुना है सर ...हमारे ट्रिप का मेनेजमेंट देखने वाले सरदार एम् पी सिंह कहते है.....वाही पले बढे है ....आपने कभी कश्मीर छोड़ने की सोची सिंह साहब .मैंने उनसे पूछा था ...एक बार सर .जब हजरत बल वाली प्रोब्लम हुई थी हम चालीस दिन घरो के अदंर रहे थे ....कई दिनों तक दूध ओर बासी गली सब्जियों से गुजारा करना पड़ा था ......
जगमोहन ने ये गलती की सर के कश्मीरी पंडितो को जाने दिया ...ये वादा किया के उन्हें वापस बुलालेगा ऐसा नहीं हुआ ....
नौ साल पहले एक वक़्त ऐसा भी आया था सर के पाकिस्तानी करेंसी यहाँ चलने लगी थी .लोगो ने अपनी घडियों के टाइम पाकिस्तान के मुताबिक कर लिए थे ......

आतंकवाद अब एक इंडस्ट्री है सर .....करोडो रूपया दुसरे मुल्को से हवाले के जरिये आता है ....इन लोगो के पास ....दिल्ली मुंबई गुजरात के रास्ते

भ्रष्टाचार भी है सर ...कई बार पोलिस ओर फोर्स के लोग भी हथियार बेचते है ....

यहाँ की पुरानी मुख्यमंत्री की सहानुभूति उन्ही लोगो के साथ है जो इस देश से अलग होना चाहते है .....किसी भी टेरिरिस्ट के मरने के बाद वो वहां पहुंच जाती है


दबे स्वरों में कई लोगो ने ऐसी बात की एक अलग स्वतंत्रता कश्मीर को देने की बात हो रही है .....

नयी पीढी को कत्ले आम से इतना इत्तेफाक नहीं है .,वो पढना चाहती है देश के दूसरे हिस्सों में नौकरी करके वैसा ही शानदार जीवन जाना चाहती है ..नए मुख्यमंत्री से लोगो को उम्मीदे है .श्रीनगर में देर रात तक चलने वाला ढाबा एक वेजिटेरियन ढाबा है ...श्रीनगर में महिलाए एक बड़ी संख्या में टीचर है ...शाम को वहां की सडको पे तगड़ा जाम लगता है .बड़ी संख्या में लोग सपरिवार वहां थे ....घूमने आये हुए खास तौर से गुजराती .....मीडिया की भूमिका से सभी नाराज थे वे कहते है समस्याओ को सही परिपेक्ष्य में सामने नहीं लाया जाता ....खास तौर से जो समझदारी की बात करते है देश के साथ रहने की उनको मुकम्मिल आवाज नहीं दी जाती ....

.एक ओर बात ...आप वहां से घूम कर आयेगे आपको गिल्ट फिल होगा .चप्पे चप्पे पे आर्मी का जवान खडा है .शंकराचार्य मंदिर के बाहर या निशांत गार्डन के बाहर ल्हादा जवान तलाशी लेते वक़्त पूछता है के आप कहाँ से आये है तो "मेरठ "सुनते ही उसकी आँखों में चमक उभर आती है ...वो भी मेरठ का ही है .वापसी में एक कप चाय पी कर जाइयेगा साहब ..
कितनी तंख्वाह होगी उसकी ?सवाल प्रतिबधता का है ...मेरा इस बात में ओर विश्वास पुख्ता हुआ है की इंडियन आर्मी से बड़ा डिसिप्लिन किसी ओर आर्मी में नहीं है .....ओर क्यों जवान फ्रस्टेशन में आते है मनो रोग का शिकार होते है ये कारण भी समझ आते है
....जाहिर है वे ओर उनके परिवार वाले एक बेहतर जीवन के हक़दार है ...रिटायर्मेंट के बाद ....

@मनीष @neraj ji ..
किसी भी वर्चुअल रिश्ते से ये रूबरू पहली मुलाकात थी ..
गौतम से मिलने के कई कारण थे ..एक वो मेरे पुराने दोस्त की याद दिलाता है .....दो... वो ब्लॉग जगत के उन लोगो में है जिनके लिखने का मै कायल हूँ .जो दिलसे लिखते है .....तीसरे चौथे कई कारण है मसलन जैसे हम दोनों थोड़े से बिगडे हुए लोग है .....इसलिए मुलाकात की बात कैसे रूबरू करते ...सेंसर बातो को सामने लाकर .........

योगेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा…

वाकई आप बहुत सुन्दर लिखते हैं, आपको डॉक्टरी छोड़ देनी चाहिए ;-) | पर हाय रे कमबख्त रोजी !!

raj ने कहा…

apki post padi kyee baar...bahut kuch tha fir bhi kam sa tha...lagta tha aap kayee cheeze chhipa gye hai....ab apka cmnt post ke sath jod ke padha...suna tha badi udaas hai vadi..par apki nazaro se dekha to khushnuma si lagi....

अर्कजेश ने कहा…

आपका गद्य तो बिल्कुल कविता की तरह लगता है ।
जैसे किसी बगीचे में सैर कर रहे हों !

केतन कनौजिया 'शाइर' ने कहा…

ऐसा लगा के वादी में उतर गयी हो रूह.. मेजर साहब को मेरी शुभकामनाएं भी पहुंचाइयेगा..

Udan Tashtari ने कहा…

कश्मीर यात्रा का सुन्दर शब्द चित्रण..याद रह जाने वाला अंदाज.

मेजर से आपकी मुलाकात हुई, जानकर अच्छा लगा.

Nirmla Kapila ने कहा…

aapaki is post kaa intazar bahut din se tha ki aap major sahib se milane vale hain magar bahut kam shabdon me baat khatam kar di book maark ham ne bhi book maark kar ke rakh liya hai jab kaashmir dekhane ka man hoga aapaki post padh lenge aaj roman me comment dete huye achha nahin lag raha magar hindi tool chal nahin raha dhanyavaad aur shubhakaamanayen

"अर्श" ने कहा…

अमा मैं ही इस बुकमार्क के पोस्ट से पीछे रहा पडा मिला ... ये क्या बात हुई भला ... हलाकि औरों की तरह इस पोस्ट का इंतज़ार तो मुझे भी था मगर आप बिच में कुछ गल्गोप कर रहे हैं डाक्टर साहिब... आपके शब्दों के साथ पहलगाम घुमाना अछा लगा ... मेजर से मिलना बहुत अछि बात है ... मेजर हैं ही ऐसे हस्ते हैं तो दिल दिल खोल के हस्ते हैं.. बहुत ही जिंदा दिल इंसान... य;अहि सोच रहा हूँ खूब जमी होगी रंग जब बैठे होंगे आप और मेजर संग संग... इस मुलाक़ात के लिए बधाई साहिब...

अर्श

गिरिजेश राव ने कहा…

ऊँट यहाँ आया तो पाया कि पहाड़ के नीचे खड़ा है।....
_______________________

गिरिजेश राव ने कहा…

भाई जी, हमारी टिप्पणी तो रस्ते में ही कट कर रह गई। उसे भी लाज आ गई ऐसे समृद्ध गद्य के आगे नाच दिखाते हुए ! अब दुबारा लिखने का साहस नहीं है।

ओम आर्य ने कहा…

आप किस्से सुनाते हैं और हम ? हम क्या करें ? थोडी देर इमोशनल रहते हैं और फिर ऑफिस जाने की जल्दी में मशीन हो जाते हैं!!

गौतम राजरिशी ने कहा…

आप कितने संक्रामक हो शायद आपको भी नहीं पता है...उस शाम से जब भी कुछ लिखने बैठा हूँ, लगता है कि डा० अनुराग बनता जा रहा हूँ मैं। ये मेजर सोमनाथ वाली पोस्ट पे ना जाईयेगा, ये तो जाने कब की शेड्यूल्ड हो रखी थी। उस सरदार जी से मिलने की ललक रह गयी...

और फ़राज का ये शेर मुझे तनिक और...तनिक और, और , और , और अनुरागमय कर गया है!

Kishore Choudhary ने कहा…

अब तो भीड़ और तन्हाई एक रंग हो गयी है. फीलिंग्स के स्तर पर हर जगह इसी दौर के संस्कार दीखते हैं. पोस्ट बड़ी ही पर्सनल है फिर भी हम सब को समेटे हुए.

श्रद्धा जैन ने कहा…

अपनी अपनी मनोव्रतियो के विकार में ....अपने अपने पूर्वाग्रह अपने मन में समेटे ..दंभ ओर अहं की गुर्राहटो के साथ जिंदगी में शब्दों की सियासत का भौंडा चौपड़ खेलते ...... हम लोग उस जवान के आगे कितने छोटे है ....कितने छोटे .......


bahut gahri baat ......... ham log us jawaan ke aage kitne chhote hain

पर तफसील से.. कहने सुनने का वक़्त नहीं है . .मोबाइल बीच बीच में आवाज देता है .....वक़्त को कुछ देर खींचकर ....मेजर विदा लेता है ....उसके हाथ में बंधे प्लास्तर पर मै "बेस्ट ऑफ़ लक" लिखना भूल गया हूं .. .सो उस शाम के लिए यहां फराज साहब का एक शेर चस्पा है....तुम्हारे लिए मेजर .....

बजाहिर एक ही शब है फराके -यार मगर

कोई गुजारने बैठे तो उम्र सारी लगी "


bahut achcha sher ....... मेजर sahab ke liye

Nandani Mahajan ने कहा…

अनुराग,

खूबसूरत नज्मों से गुजरते हुए हर बार कुछ संवेदनशील पढ़ने को मिला. ज़िन्दगी के किस्सों को आप यूं चंद शब्दों में बयां करते है कि अहसासों की कमी नहीं लगती. समय पर उपस्थित नहीं हो पाती हूँ किन्तु 'दिल की बात' नाम के अनुरूप ही दिल के करीब ही है.

गौतम राजरिशी ने कहा…

डा० साब, उधर ऊपर ब्लौग-हेडर "दिल की बात" के नीचे के शब्द आधे गुम हो जा रहे हैं ब्लौग खुलने के बाद। "बेतरतीब सी कई सौ ख्वाहिशे है ...वाजिब -गैरवाजिब कई सौ सवाल. है....कई सौ शुबहे है...एक आध कन्फेशन भी है ...सबको सकेर कर यहां जमा कर रहा हूं..ताकि गुजरे वक़्त" इसके बाद वाले हिस्से पढ़े नहीं जा रहे हैं और मैं विकल हूं पढ़ने के लिये।

डॉ .अनुराग ने कहा…

हां इन्टरनेट एक्स्प्लोरर में प्रोब्लम आ रही है मेजर ....मोजिला फायरफोक्स में नहीं ...कोशिश करता हूं....वैसे वो कुछ यूं है

"बेतरतीब सी कई सौ ख्वाहिशे है ...वाजिब -गैरवाजिब कई सौ सवाल. है....कई सौ शुबहे है...एक आध कन्फेशन भी है ...सबको सकेर कर यहां जमा कर रहा हूं..ताकि गुजरे वक़्त में खुद को शनाख्त करने में सहूलियत रहे ..."

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

वाह कश्मीर ! आह कश्मीर !
सियासत का भौंडा चौपड़ खेलते ...... हम लोग उस जवान के आगे कितने छोटे है ....कितने छोटे .......
फराज़ साहब को शेर एकदम सटीक मेजर साहब को शुभ कामनाएँ और कश्मीर के लोगों को भी जो एक खुशहाल जिंदगी चाहते हैं ।

Harkirat Haqeer ने कहा…

सुभानाल्लाह .....लिखने की कला तो कोई आपसे सीखे ....उसके हाथ में बंधे प्लास्तर पर मै "बेस्ट ऑफ़ लक" लिखना भूल गया हूं .....मंत्रमुग्ध हूँ , निःशब्द हूँ, विस्मित हूँ ....पहुँच से बहुत ऊपर हैं आप दोनों ......

हम लिखते रहेंगे वतन का नाम तेरे ज़ख्मों पे
तुम मुस्कुरा के यूँ ही सीना ताने रखना .....!!

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

अगर ये चित्र दूसरा चित्र आपके कैमरे से लिया गया है तो आपकी फोटोग्राफी को भी सलाम करना होगा...!

और फोन से डिस्टर्बेस...???? एक फोन पहुँचा था...लगा रॉंग नंबर लग गया... लोग इतना मशरूफ थे....! :):)

और ये शेर

बजाहिर एक ही शब है फराके -यार मगर

कोई गुजारने बैठे तो उम्र सारी लगी "


अल्लाऽऽऽह....!

अर्शिया ने कहा…

कितनी खूबसूरत बात कह दी आपने। दिल की हसरत उभर आई है। काश हम दिनों को वेबपेज की तरह बुकमार्क कर पाते।
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और अब दो स्क्रीन वाले लैपटॉप।
एक आसान सी पहेली-बूझ सकें तो बूझें।

डॉ .अनुराग ने कहा…

ya @kanchan........10megapixel..nikon....

manu ने कहा…

हम तो जल मरे साहिब आपसे..
इस मुलाक़ात के बारे में और नहीं लिखा जा रहा...

आपका अंदाजे-बयां और फोटोग्राफी दोनों पसंद आये....
लेकिन दो ही चित्रों से पेट नहीं भरा...

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

किसी का एक शेर याद आ रहा है कि...........

इस का कारण मुझको भी मालूम नहीं,
आप मुझे क्यूं इतने अच्छे लगते हैं..

बस्स.....

Vidhu ने कहा…

कोई गुजारने बैठे तो उम्र सारी लगी "खूबसूरत...खूबसूरत..खूबसूरत..खूबसूरत..खूबसूरत..खूबसूरतक्या कहूं इसके अलावा आपसे एक गुजारिश है ,अपनी हर पोस्ट पर एक काला टीका जरूर लगा दिया करें

Vidhu ने कहा…

कोई गुजारने बैठे तो उम्र सारी लगी "खूबसूरत..खूबसूरत..खूबसूरत..खूबसूरत..खूबसूरतक्या कहूं इसके अलावा आपसे एक गुजारिश है ,अपनी हर पोस्ट पर एक काला टीका जरूर लगा दिया करें

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