2009-11-09

"फकत खामख्याली का कन्साइनमेंट "


औसत आदमी के लिए यह सोच लेने से बड़ा ढाढस   ओर कुछ  नहीं है  के सचाई की  हमेशा  जीत होती है -कर्टसी  नैतिक  शिक्षा ....यारो ने कहा है के लोभ भी एक कंटाजीयस बीमारी है ...जिसका डी एन ए हर साल म्युटेट  करता है  ..
इधर डिप्रेस होने के कई कारण. है ....सबसे बड़ा कौडा  भाई है .रोज इक नया खुलासा होता है .के इत्ते करोड़ वहां से मिले ...इत्ते करोड़ वहां है...करोड़ न हुए साले चिल्लर हो गये ...इधर नौ साला प्रेक्टिस में गिने चुने जुटा पाने के बाद कलेंडर में  इ एम् आई की  तारीखे  गोल  करके  जिंदगी . को  ..एडजस्ट करके सेटिंग करके आगे बढा रहे है ..  अगला डिप्रेशन तीन रनों  की हार का गम है ....सचिन के एक सौ पीचत्तर रन ... पता नहीं सचिन के मन में क्या उमड़ता होगा स्क्रीन को देख के ....  ..सोचिये अगर दिल की धडकनों का स्कोर स्क्रीन पे डिस प्ले होता तो आप कित्ती बार डबल सेंचुरी  के नजदीक पहुंचते ?.

..किबला सोचिये ..(.स्लो मोशन में .....)
एक्जाम हाल की सीडिया चढ़ते वक़्त.......१२५
प्रेक्टिकल एक्जाम में  वाइवा  से  ठीक  पहले एक्जाम्नर  की तरफ बढाये  गये वो चंद कदम ...160
रेड लाईट जम्प   करने के बाद   अगले चौराहे  पे  मोटर साइकिल   के ठीक सामने रुकी जीप  की  आवाज़...(किता फ़िल्मी है ).140
सुनो...मै ....(तीन बार दोहराने   के बाद ).. .... इजहारे  मोहब्बत का पहला   ख़त  देते वक़्त (इस मौके   पे आप कानो में घंटियों  सा  बेक ग्राउंड म्यूजिक  भी  दे  सकते है  )......155
  हाय उस पहले  चुम्बन  से पहले  का वो  वक़्त .... .....-जिसके पहले खायी हुई    मिंट की तीन गोलियों का   बकाया  आज  तक   उस पनवाडी  का आप  पर  है......165 ... .

अब टोटल  पूछने की ध्र्ष्टता नहीं करेगे ...  पता नहीं कौडा का कितना स्कोर होगा ..फिर कौडा.... इतने सालो फिर जीवन में किया क्या ?जालिम सवाल   है .......
सोचिये  अलादीन का चिराग गर प्रकट होकर कहे .....हा हा हा ....(हंसना राक्षसों की कम्पलसरी शर्त है जी )...
आका आप चाहे तो अपनी  पिछली  कुछ  मिस्टेक   रिपेयर  कर सकते  है ......तो आप कहाँ से शुरू करेगे ....तनिक उस बॉर्डर से जिसके लेफ्ट पे आप  बालक ओर राइट  पे  आप किशोर है ....
दसवी क्लास के उस गद्दार दोस्त को गाली देकर जिसने बोर्ड ..(बोर्ड को अंडर लाइन किया जाये.)..की दसवी की परीक्षा के मेथ्स के एक्जाम में मल्टिपल  चोयस क्वेश्चन में जानबूझ के   गलत अंसर  टिक कराया  था ....
बहुत सारे लोगो से सौरी भी बोलने का है ....
मसलन...
बारहवी .... क्लास में देहरादून की शादी में मिली उस लड़की को ढूंढकर जिसके भाई से आपने पूछा था ....ये  सेक्सी लड़की कौन है ...बहुत लाइन दे रही है ....

मसलन...
हमारे एक सीनियर   को ...जिन्हें हम दोस्तों ने" एक शर्मीली लड़की" के नाम से ख़त लिख कर चार बार एक होटल  बुलाया वे चारो बार अपनी फटफटिया  पे  सवार  होकर आये ...
मसलन .
.मजूरा गेट का वो ट्रेफिक हवालदार जिसको  हम तीन दोस्तों ने  मोटरसाइकिल पे पकडे जाने के बाद एक्जाम .भूख ओर मां के खाने  .की एक "ट्रेजिक स्टोरी "सुनाई ....जिसे सुनकर वो इतना इमोशनल हुआ के चलते वक़्त एक बीडी भी पिलाई..
मसलन .....
सरफ़रोश पिक्चर में मिले वो साहेब जिन्हें हमने जान बूझ के "लेडिस -टॉयलेट" में भेज दिया ....

लिस्ट बहुत  ही लम्बी है ठाकुर ....हमारे शुक्ला जी कहा करते थे "इश्क ही वो बहादुरी   है जिसे कमजोर  भी कर सकता है "
बदलू पांडे   अक्सर  सुबह सुबह दूध देने के वास्ते  आते  जाते  कभी भी  हमारी वाट   लगा देते है ...भैय्या  जी भैय्या  जी   करके.......आज   नज़र आये  .तो प्रतिशोध   की  ज्वाला  हमारे  भीतर धधक उठी ... हमने जिन्न वाला ऑप्शन बिना हंसे उन्हें दिया  .....बदलू पांडे   सकपका गये .. . दिमाग पे इत्ता जोर डाला के एक बाजू झुक गये ...फिर बोले .भैय्या ...पिछली बसंत पे वो आडा थोडा तिरछा लगाया होता तो ग्यारह पेंचे हो जाते ....जय हो बदलू मियां की.....
अभी चलते है .वैसे भी रेडियो पे "हीमेश भाई "गा रहे है .मन का रेडियो.......
पुनश्च :   एक आदमी का पश्चात्ताप दूसरे का  संस्मरण होता है -अज्ञात


त्रिवेणी -

रोज  सुबह पैनी  करता है अपनी दरांती माली
एक काटो  मगर  तो दूसरा उग आता है ......

कितने केक्टस अपने भीतर उगा रखे है तुमने

68 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल जी,
    अतीत की गलतियों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है.

    इनमे से कोई एक भी आपका पथ बदलने के लिए काफी है.

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  2. सच में डॉ साब. गलतियों की लिस्ट बहुत ही लम्बी है. मेरी एक गलती जो मैं हमेशा रिपेयर करने की सोचता हूँ वो है जिसे सबसे जयादा चाहा पा न सका. और जो रिपेयर नहीं हो सकती है...

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  3. आपने जो जो भी बाते ... इतने सुंदर ढंग से दर्शाई है... लेकिन इसमें और भी बहुत सी गलतियाँ होंगी, जो हम पब्लिकली शेयर नहीं कर सकते... हा हा हा... :) ... हम सब के साथ ऐसा ही कुछ होता है.. और चाहते हैं की काश अतीत उन गलतियों की माफ़ी मांग पाते ... और कुछ गैप रह गयें हैं उन्हें पूरा कर पाते.... वैसे अतीत सिर्फ याद करने के लिए हो तो भी बहुत अच्छा है... :) .. हम अतीत के लिए कुछ नहीं कर सकते... सिवाय खुद पे मज़े लेने और कोसने के... सब बहुत अच्छा है... धन्यवाद !

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  4. ओ हो आप गलतियां स्वीकार रहे थे ? पाठकों की टिप्पणियां न होती तो दुबारा पढना पड़ता।

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  5. sahi kaha anurag sir.. bahut si aisi batein hain jinhe zindgi ki cassette mein rewind karke fir se bajana chahte hain.. magar mui yahan option nahi hai na rewind ka.. aur dil ke zakhmon ko wapas hara kar diya aapne us match ka yaad dilake.. ankhon se to nahi.. magar dil se dher aansoo nikle the us waqt jab deep long off se nathan hauritz ka throw direct keeper ke hath mein aya tha.. aur muye usne is baar galti bhi nahi ki.. khair.. hamesha ki tarah.. post padhke bada maza aya.. gudgudi bheetar tak chhoo gayi.. :)

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  6. बिना भुगते कोई ऐसी पोस्ट लिख सके है ? हर मसलन के बाद की चार लाइनें पढने के बाद हँसने के लिए थोड़ा थोड़ा वक़्त चाहिए |
    कितने केक्टस अपने भीतर उगा रखे है तुमने

    कितने फूल खिला रक्खे हैं तुमने

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  7. अनुराग सर,
    दिल के सरे केक्टस आपके आपकी त्रिवेणी ने काट डाले हैं...
    पूरी पोस्ट पढ़ते न जाने कितनी बार धडकनों ने डबल सेंचुरी क्रॉस की और ना जाने कितनी बार धड़कन ही बंद हुई...

    I love u dr. sahab

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  8. कौडा इतनी सनसनी यादें दिला गए -कौडा ने यहाँ भी बाजी मार ही ली -धिकार है इस वजूद पर (अपने पर )

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  9. डॉ. साहब, अपनी त्रिवेणियों की एक किताब छपवा लिजिये.. पहला ग्राहक हम ही होंगे.. और अगर हम नहीं भी खरीद पाये तो आप तो हैं ही हमें वह किताब गिफ्ट करने को.. ;)

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  10. bahut sahi kaha aapne..Ishq hi wo Bahaduri hai jo kamjor bhi kar sakta hai....

    aapse baat karne ki ek teevra iccha hai... shayad aapki shagirdgi mein zindagi ko samjhne ka tareeka sulajh jaaye...

    I can be reached at tandon.reetika@gmail.com

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  11. PD की तर्ज़ पर, डॉक्टर साहब आप अपने शीर्षकों की एक किताब छपवा लीजिये...हमें बेहद पसंद आते हैं. और हम पीडी की तरह कंजूस मक्खीचूस नहीं हैं, खरीद कर पढेंगे :D ;)

    मेरी गिनती में वो दिन भी आता है, क्लास से बंक मार कर जेएनयू में टहल रहे थे और भुट्टा खा रहे थे...सामने से हेड ऑफ़ थे डिपार्टमेन्ट चली आ रही थी...मत पूछिए गिनती कितनी थी...कसम से दिल किया था की हम कोई तेंदुआ होते तो लपक के जंगल में गुम हो गए होते...उस एक दिन की खुन्नस पूरे साल भर झेली थी हमने.

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  12. yadein sabke pas dher sari hai aur hoti hai ANurag ji, lekin unhe aapki tarah bata pana, shabdo pe dhalna sabko nahi aata :) mujhe to bilkul nahi.. aapka blog mere liye ab mahabharat serial jaise ho gaya hai :) jitna bhi dekho man hi nahi bharta :)

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  13. Anurag ji aisa hai to hum bhi shagird banege aapke :) kabse banna hai mujhe to

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  14. in sabhi masalan waali baat kya kahun daktar sahib... masalan ye ki galfrnd se milne se pahale aap chocolate chose karte ho kaun si li jaye pahali baar ke mulakat me ... ha ha ha sare hi masalan dil ki dhadkane tej kar dene wali hai... kahayan se ye saari baaten aap late ho kuchh bataa do naa source huzoor... kamaal ki baat karte ho aap bhi daktar sahib... fir se milta hun


    aapka hi
    arsh

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  15. dhadkanon ka score kaheen display hota to hamaara kya haal hota,100 se to kabhee neeche nahi aati aur badhne kee had to koi baandh hi nahi rakhi hai:)
    aapne apnee innings ke maandand jo diye hain,mazedaar hai,sab apnee apnee total men lag gaye hain:)

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  16. पता नही कहां कहां गुदगुदी करते हुये भीतर तक धंसती है आपकी बाते...

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  17. एक आदमी का पश्चात्ताप दूसरे का संस्मरण होता है
    moral of story असल में यही है

    देखिये सबको अपने पाप याद आ गये और क्या ही खूब हो कि किसी दिन ये सारे पाप लीगल करार दे दिये जायें...मन से बड़ा बोझ हट जायेगा जी...!

    वैसे इस पोस्ट का आइडिया आपने मेरे दिल के किसी कोने से चुराया है।

    जब जब ये रानी बेटी का खिताब मिलता है, सोचती हूँ कि किसी दिन उन लोगो से पोस्ट लिखवा दूँ जिन्हे मेरा गुस्सा और सिनिक रूप झेलना पड़ता है। किसी दिन सारे गुनाह क़ुबूल तो करने हैं हमें भी जिससे कोई असलियत खुलने पर ये ना कह सके कि सोचा क्या क्या मिला.....!!!! :) :)

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  18. मधु कोडा पर कोई शैतानी साया है...
    नील आर्मस्ट्रोंग चाँद पर कदम रखा था तो उसकी धड़कन २०० के पार थी... ऐसा सुना था...

    आपने तो रिक्टर स्केल पर नाप भी लिया की फलाना होगा तो क्या दर होगा...

    सपने में जब मुझे पहाड़ पर से फैका जाता है तो तब की दर,
    किसी लड़की का मांग दोस्तों की शर्त जीतने के लिए भरता हूँ, और उसका भाई शर्त जीतने पर आ धमकता है, तब की दर...
    जब खुद को एक लड़की समझ इश्क किया था, और पहली बार उस पुरुष (मेरी गर्लफ्रेंड) में दीवार पर दोनों बाहों से घेरा था, किसी शांत शोर की आहट, कमबख्त एक पल के काम को ५ मिनट लगाना... तब की दर...

    यह आज भी नापे से बाहर है...

    रोचक पोस्ट... काफी क्रिएटिव...

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  19. करोडों का मालिक आंद्रे अगासे आज आंसू बहा रहा है अपने किए पर :)

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  20. yये मसlलन क्ी फहरिस्त लगता है अभी और भी बहुत बडी है। पर एक बात आपने हमे समझा दी है वैसे तो हमे पहले ही पता है कि हम औसत दरजे के प्राणी हैं मगर आज तो पक्का हो गया क्यों की मैं तो यही कहती हौऔँ जीत हमेshसा सच की होती है देर से ही सही। बहुत रोचक पोस्ट है बधाई

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  21. शीर्षक देख कर ही समझ गए थे आप आज मूड में है .पोस्ट से पहले एक सच्चा किस्सा. हुआ ये के हमारे गर्ल्स हॉस्टल में एक ही कंप्यूटर है ओर सबने आपको पढना है आपकी पिछली किसी पोस्ट पे हम लड़किया खिलखिला रही थी .वार्डन अन्दर तो पन्ना पलट दिया उन्हें लगा पता नहीं क्या देख रही है .आज दोपहर कंप्यूटर पे बैठी आपका पन्ना बुकमार्क तो है ही सो सारा पढ़ डाला .ढाई घंटे बाद बाहर निकली तो खुद मुस्करा रही थी.निकलते निकलते बोली डॉ साहब क्या लेखक है ?तो आपकी फेन लिस्ट में एक ओर इजाफा .
    अब पोस्ट पे
    शीर्षक -१०० मार्क्स
    औसत आदमी के लिए यह सोच लेने से बड़ा ढाढस ओर कुछ नहीं है के सचाई की हमेशा जीत होती है -कर्टसी नैतिक शिक्षा -६०
    लोभ भी एक कंटाजीयस बीमारी है ...जिसका डी एन ए हर साल म्युटेट करता है ..-९० मार्क्स

    जिसके पहले खायी हुई मिंट की तीन गोलियों का बकाया आज तक उस पनवाडी का आप पर है-९० मार्क्स
    "इश्क ही वो बहादुरी है जिसे कमजोर भी कर सकता है "-१०० मार्क्स

    त्रिवेणी तो हमेशा परफेक्ट रहती है

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  22. अनुराग-जी नमस्कार ....अजी जिन किस्सों में ये किस्से हुए ..उन किस्सों को सलाम ...वाकई आज बडी दिलेरी से लिखी है, आपने ये पोस्ट ...हमेशा की तरह बिना मुलम्मे की ये सीधी-सच्ची तस्वीरें दिल को छूती हें ...इस देश में जो ना हो वो ही कम है ....लेकिन वक़्त बदलेगा जरूर इस अहसास को जिंदा रखने में ही हमारी आपकी बेहतरी है ..

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  23. Doctor sahab,
    Bahut time ke baad ek behad hi khoobsoorat post !!!

    Kaash main bhi aisa likh paata....

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  24. मज़ेदार शैतानियाँ रहीं आपकी मन को गुदगुदा गई।
    पर एक बात जो मैं बहुत दिनों से कहना चाहता हूँ वो ये कि कुछ जगह अंग्रेजी शब्दों के इस्तेमाल जिसके लिए प्रचलित हिंदी शब्द पहले से ही मौज़ूद हैं और आम जुबान में प्रयुक्त होते हैं जैसे लेफ्ट राइट.... से आप बच सकते हैं।

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  25. इन 'मस्त' हरकतों के बीच मैं कोडा को भूल ही गया, अपनी मंडली में तो हम बहुत कमाने वालों में गिने जाते हैं... आप भी किससे तुलना करवा रहे हैं. खुश रहने दीजिये कहीं दिमाग घूम गया तो.... ईएम्आई की डेट गोल करने में कोई घाटा नहीं है. वर्ना ना इधर के ना उधर के हो गए तो :)
    बाकी दिल की धड़कन तो २०० क्रॉस गयी कुछ बातें याद कर के ही. उस समय मीटर लगा होता तो खुदा जाने क्या होता !

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  26. मतलब शब्दों में वो ख़ुशी नहीं लिख सकता जो आपके आर्टिकल पढ़कर मिलती है |
    ------
    बाकी दो घटनाएँ तो इतनी नजदीक से मिलती हैं, की क्या कहें |
    [1.] दसवी की कक्षा में बोर्ड परीक्षा में गणित में 100 में से 100 आने को थे कि उसने अंतिम मिनट में ऐसा बरगलाया कि 8 नंबर के सही सवाल को अच्छी तरह काटकर, कि चेक करने वाला गलती से भी नंबर न दे-दे, घिसी-पिटी राइटिंग में दुसर उत्तर लिख दिए, हॉल बहार निकलते ही गलती का पता लग चुका था | उसके कारण 92 ही रह गए, उस दोस्त को गद्दार तो नहीं कह सकते पर यूँ कई साल तक याद आने पर दिल रोता था, 100 नंबर का ख्वाब-ख्वाब ही रह गया |

    [2.] आश्चर्य, 12 वीं तो नहीं कॉलेज में थे तब, और शादी में पार्टी में बड़ी प्यारी बातों का मौसम चल रहा था बोली जूस लेकर आती हूँ हमारा मन तो सातवें आसमान में कुलांचे मार रहा था, मुझे अकेला पाकर एक सज्जन नौजवान कान में धीरे से बोले भाई साहब आप जिससे......... वो मेरी wife है | :(
    बूहू हु हु हु.....
    (बचपन में कोमिक पढ़ते थे तब, बांकेलाल कोमिक्स में ऐसे ही रोता था)
    --------

    आपके उदगार दिल से क्या आलिंद और निलय के भी काफी अन्दर से आते हैं |

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  27. और जब ये अरुण गोविल वाली रामायण आती थी तब, जब मुश्किल से 3 साल के रहे होंगे, ये राक्षसी हंसी भी वो आनंद देने वाली हंसी थोडी थी (मतलब ही ही ही हा हा हा ही ही हा, असली स्वर तो रेकोर्ड करके सुनाई जाए तो ही सही से रस आये) | मेरे जैसे कोमल बच्चों के ह्रदय जो में भय व्याप्त कर देती थी, उसका भी BP भी नोट होना चाहिए | इन राक्षसों को कभी भी नहलाया धुलाया नहीं दिखाया, और 'जय हनुमान' में तो इनके औजार भी बड़े ही अजीब किस्म के दिखाते थे, एक बार थोडा टच भी हो जाये तो खाल निकाल के ही निकले |


    'अलिफ़ लैला' में भी काफी खतरनाक जिन्नों-राक्षसों से पाला पड़ता था | एक बार तो मोहल्ले में छत पर सोये एक दोस्त की रात को सपने में ऐसी चीख निकली कि पूरे मोहल्ले को सुनाई पड़ी | पता चला कि ये 'अलिफ़ लैला' वाला राक्षस दिखाई पड़ गया था | उन सीरियल के directors को बच्चों को डराने में पता नहीं क्या रस आता था |

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  28. Nayee nayee baten...:D
    '-लोभ भी एक कंटाजीयस बीमारी है ...जिसका डी एन ए हर साल म्युटेट करता है ..

    -'मिस्टेक रिपेयर '
    -'हंसना राक्षसों की कम्पलसरी शर्त है जी '
    :) :) :)!!!!!'


    -Gazab ka likhte hain!

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  29. kya kahun... post ki bhasha shaili ki tareef karun, triveni ki tareef karun ya fir aapki..

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  30. यह कौनसा स्टेथिस्कोप है धरकने गिनने के अलावा कन्फेशन कराना भी जानता है और भीतर उगे केक्टस पर मोगरा के फूल खिलाता है?

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  31. आपकी हरेक पोस्ट पढ़कर ,
    फिर ;
    पुराने दोनों में लौट जाने को दिल करता है
    त्रिवेणी भी क्या खूब लिखते हैं आप डाक्टर मोशाय :)
    जीते रहो !
    - लावण्या

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  32. मेजर साब के यहाँ त्रिवेणी देखि तो दर्पण का और आपका ध्यान आया....
    त्रिवेणी क्या...

    आपकी तो हर याद त्रिवेणी ही है..

    मसलन...
    मसलन....

    हा हा हा हा हा हा हा हा ...

    सुखद रहा आपको पढ़ना...

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  33. लोभ एक बेहद पवित्र भावना है, यह हमें कभी रुकने नहीं देती। घड़े को भरते जाओ, भरते जाओ... ७०० करोड़ के चारे घोटाले, १००० करोड़ के भूमि घोटाले,,से आगे ५००० करोड़ का कोड़ा घोटाला... यार डॉक्टर यार किडनी नहीं बेच सकते तो लोगों की चमडी़ छीलकर बेचना शुरु करें ना. दुकान में हम भी साथ होंगे। ईमानदारी से काम करके ४० रुपये किलो गोभी ३९ रुपये चीनी सह नहीं पा रहे।

    उत्तर देंहटाएं
  34. एक्जाम हाल की सीडिया चढ़ते वक़्त.......१२५
    प्रेक्टिकल एक्जाम में वाइवा से ठीक पहले एक्जाम्नर की तरफ बढाये गये वो चंद कदम ...160
    रेड लाईट जम्प करने के बाद अगले चौराहे पे मोटर साइकिल के ठीक सामने रुकी जीप की आवाज़...(किता फ़िल्मी है ).140
    सुनो...मै ....(तीन बार दोहराने के बाद ).. .... इजहारे मोहब्बत का पहला ख़त देते वक़्त (इस मौके पे आप कानो में घंटियों सा बेक ग्राउंड म्यूजिक भी दे सकते है )......155
    हाय उस पहले चुम्बन से पहले का वो वक़्त .... .....-जिसके पहले खायी हुई मिंट की तीन गोलियों का बकाया आज तक उस पनवाडी का आप पर है......165 ... .

    डाक्टर हैं सभी का अनुभव होना लाजमी है ....पर ये मिंट वाली गोलियों का अनुभव ज्यादा लगा कुछ .....165 .....kamaal है .....????

    बारहवी .... क्लास में देहरादून की शादी में मिली उस लड़की को ढूंढकर जिसके भाई से आपने पूछा था ....ये सेक्सी लड़की कौन है ...बहुत लाइन दे रही है ....हा....हा....हा.....

    कभी कभी किसी का likhaa पढ़ कर बात करने का मन करता .....जैसे आपकी ये post .........


    lafz भी khamosh से हैं उसकी jubaan के
    आँखों में अब barson की udaasee है

    कभी वह भी बहुत shrmili हुआ करती थी .......!!

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  35. "....आका आप चाहे तो अपनी पिछली कुछ मिस्टेक रिपेयर कर सकते है"

    मिस्टेक???? रिपेयर?????? क्या बात कर रहे हैं आप? कैसी बात कर रहे हैं आप? आप की इस बात से आनंद नारायण मुल्ला जी का शेर याद आ गया...

    "वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गयी फुर्सत
    हमें गुनाह भी करने को ज़िन्दगी कम है."

    हमारे पास अगर जिन् आ कर हुकम करें मेरे आका कह कर सवाल करेगा तो जवाब में कहेंगे..." कूल माई डीयर जिन् कूल...गो टेक रेस्ट..."
    अलबत्ता आपकी ये पोस्ट और त्रिवेणी हमेशा की तरह लाजवाब...हम जैसों के लिए प्रशंशा के लिए नए शब्द खोजने को मजबूर करती हुई...

    नीरज

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  36. ये मन के अंदर उगे कैक्टस ही हमें पश्चात्ताप करने और सॉरी बोलने को उकसाते रहते हैं वरना तो हम गलतियां कर के आगे ही बढते जायें अब कम से कम कुछेक को तो सॉरी बोल ही देते हैं ।
    दिलकी धडकनों का क्या हे वे तो बढती ही चली जाती हैं बिना बात ।
    और एक दिन हो जाती हैं बे आवाज़ ।

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  37. अपनी धृष्‍टताओं के बारे में और बताओ न....


    - आनंद

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  38. कभी कभी मन करता है की जीवन की भी ऐसी प्रोग्रामिंग होती जो लाइफ का अतिसरलीकरण कर देती....इधर दिल रोज आवाज देने लगता है ब्रेक ......अकेले सन्डे से काम नहीं चलता ..
    हर पेचीदा जिंदगी के पीछे एक सदा मसलन छिपा होता है .....ऐसे कितने मसलन जाने कितने दिलो में दफ़न है .साँस ले रहे है .वक़्त ओर पेशे की कैफियत समझो या जिंदगी की रेलम पेल ....
    किसी जगह गुजरे दस साल ....आपको कई "मसलन "देते है ......
    उन दिनों एक्जाम के बाद होस्टल वालो का केवल एक इंटरटेनमेंट होता था .....पिक्चर ...अंग्रेजी -हिंदी जो नयी ओर धाँसू हो .. कई बार .. एव्निग क्लिनिक के बाद चले जाते ... हमारा एक दोस्त हॉल में घुसते की क्लिनिक में इस्तेमाल होने वाली टॉर्च लेकर लोगो को इधर उधर बैठा देता ......
    दूसरा हॉल में घुसते ही राम सिंह जोर से चिल्लाता जो की उसके रूम पार्टनर का नाम था ....टॉर्च वाले का तो ये हाल हुआ के कई हाल में ब्लेक लिस्ट हो गया ....

    डिप्रेस होने के बहुत सारे कारण है ..इस देशमे...
    @मनीष
    अंग्रेजी के शब्दों का जानबूझ के इस्तेमाल करता हूं...इसे शायद लिखने का एक हिस्सा मानो या मेरी कमी .या इधर उधर बहुत पढने के कारण बिगड़ी आदत का एक हिस्सा .....
    ऐसा ही एक प्रशन एक बार योगेश ने भी मुझसे किया था ....
    @रीतिका जी ..@नीलिमा ...आपकी जर्रा नवाजी सर आंखो पे .....
    @पूजा @पी डी......
    जिस दिन कोई प्रकाशक रिस्क लेने के वास्ते अपुन को याद करेगा ... ....उस दिन ....
    @कंचन .....इस पोस्ट के पीछे बहुत सारी चीजे है ....शायद अगली किसी पोस्ट में .गर मूड ऐसा ही रहा तो .....

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  39. आपको, मेरा मतलब है आपकी पोस्ट को देर से पढ़ने का अलग ही मजा है। पोस्ट के अलबेले स्वाद के साथ कुछ बेहद ही रसीले टिप्पणियों की चाशनी, जैसे कि अभी वाली पीडी और पूजा की...हाँ कंचन की भी...और फिर आपका आखिरी का कमेंट रेसिपी को पूर्ण करता हुआ...

    आपके लिखे पे अक्सर ऐसा देखा है अन्य ब्लौगरों को अपना "स्व" खोलते हुये...काश कि मेरी लेखनी भी ऐसा चमत्कार कर सकती!

    एक किसी मिस्टेक को काश कि मुझे भी वो खुदाया रिपेयर करने को देता...पल्लवी को उसका सुरेश मिल जाता!

    उत्तर देंहटाएं
  40. वाह अनुराग जी, कहाँ से शुरु किया और कहाँ जाकर अंत किया और बीच में अलाद्दीन डाल दिया। कमाल की लेखनी है जी आपकी। पोस्ट हो तो ऐसी हो। अलाद्दीन से याद हमें भी बहुत कुछ याद आ रहा है पर.........। वैसे प्रशांत भाई सही कह रहे है अब तो इन पोस्टों की एक किताब आनी ही चाहिए। हम जब भी उदास हुआ करेंगे उस किताब को उठा लिया करेंग़े। और त्रिवेणी का जवाब नहीं। और् हाँ "बलिश्त भर के सपने" का क्या ये मतलब है "मुट्ठी भर के सपने"

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  41. वेल..बातों-बातों मे बड़ी पापी-टाइप पब्लिक इकट्ठी हो गयी ठहरी...मसलन्‌.. ;-)
    वैसे सोच रहा था कि धड़कनों की डबल सेंचुरी खुद किसी रिकार्ड-बुक मे दर्ज होती या ना..मगर हमें जरूर दर्ज करा देती..किसी मर्चुरी की रिकार्ड-बुक में ;-)
    और हाँ इतने स्पाइसी सिचुएशनों की झांकी देखने के बाद हमें तो अपनी प्याज-लहसुन-रहित जिंदगी (सो फ़ार) पर तरस आ गया..हाँ मगर ना-कर्दा गुनाहों की बात चल रही हो..तो बात अलग है..मसलन्‌.. ;-)

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  42. एक और उम्दा दिल को छूने वाली पोस्ट !
    लगे रहिये ! शुभकामनाएं !

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  43. शीर्षकों का तो आप पेटेंट करा ही लो..

    प्रेक्टिकल एक्जाम में वाइवा से ठीक पहले एक्जाम्नर की तरफ बढाये गये वो चंद कदम ...160

    160 कम नहीं है ?

    हमेशा की तरह टिप्पणियों का मजा ले रहा हूँ.. नीलिमा, मेजर, कंचन, अपूर्व.. पूजा और भी कई सारी.. बहरहाल छोटू के लिए खुशियों का एक बोरा भिजवा दिया है.. वी पी पी से.. :)

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  44. @ कुश - भाई मेरे, डॉ साहब अपने तराजू पर तौल कर 160 लिखे हैं.. मेरे जैसे छात्रों ने तो अपनी ट्रिपल सेंचुरी उसी समय जमा कर रिटायर हो चुके हैं.. :D

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  45. मेरी हंसी देख केबिन के सामने से गुजरने वाले कौतूहल से देख रहे हैं की ये अकेले अकेले हंसने वाली कौन सी नयी बीमारी मुझे लग गयी है...
    उफ़ !!! क्या लिखा है आपने.....

    """ कौड़ा "" हा हा हा ....लाजवाब !! जब उसका यह नाम माँ बाप ने रखा होगा तो उन्होंने कभी सोचा होगा की उनका सपूत सचमुच इतना बड़ा कौड़ा निकलेगा ...

    वैसे सुना कि उसका नार्को टेस्ट होने वाला है...मजे की बात बताऊँ....नार्को टेस्ट में बेचारा बोलेगा क्या...उसने तो बस हस्ताक्षर भर किये थे जहाँ जहाँ उसके आकाओं ने कहा..लेकिन अब उन आकाओं का तो नार्को टेस्ट होने से रहा....अंततः निकलेगा यही कि राजनितिक कारणों से कौड़ा जी को फंसाया गया..सारी कौडियाँ सब चुपचाप गटक लेंगे और इस जांच के बहाने भी जांचकर्ताओं के जेबों में कौडियाँ झरती गिरती रहेंगी...

    आपके माफीनामे की फेरहिस्त ने तो बस जान ही ले ली हंसाकर....और त्रिवेणी....लाजवाब !!

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  46. हा हा हा ..
    पता नहीं कब से हम टिपण्णी करना चाह रहे हैं..
    हर बार यही सोचते हैं .....शायद अब हो जाए..
    बहुत ही रोचक लगा आपको पढना....
    धनयवाद....

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  47. सुनो...मै ....(तीन बार दोहराने के बाद ).. .... इजहारे मोहब्बत का पहला ख़त देते वक़्त (इस मौके पे आप कानो में घंटियों सा बेक ग्राउंड म्यूजिक भी दे सकते है )......155
    हाय उस पहले चुम्बन से पहले का वो वक़्त .... .....-जिसके पहले खायी हुई मिंट की तीन गोलियों का बकाया आज तक उस पनवाडी का आप पर है......165 ... .


    hahaha

    kamaal ki trveni hai
    kitne kaitas uga rakhe hai
    bahut rochak bahut sarathk

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  48. वाह गुरुदेव.... लिस्ट बहुत लम्बी बोलकर निकल गये.. अरे सुनाइये सारे किस्से :P

    और आपके चाहने वालो के लिये - अनुराग जी की त्रिवेणीयो का खजाना यहा है-

    http://www.orkut.co.in/Main#CommMsgs?cmm=32587195&tid=2533252969865579320&start=1

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  49. फिर से आया था पढ़ने...सोचा बताते चलूँ आपको!

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  50. त्रिवेणी में उगाये हुए केक्टस से आपका भाषा प्रवाह कहीं अलग नहीं होता उतना ही सच्चा जितनी कि ज़िन्दगी... पढो तो लगता नहीं कि कैब में बैठे हो, सब कुछ आस पास खिल उठता है. बहुत अच्छा.

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  51. एक बुक मार्क करने लायक पोस्ट....

    ps i love you ki tarah....

    (वैसे ये किताब उतनी पसंद नहीं मुझे पर, भूतकाल से भविष्य कि सम्भावना निकलने कि कवायद समान है, आपकी बेशक बेह्तेरिन है उस नोवेल से....

    Back to the future type, या प्राची के पार टाइप....



    और सबसे बेह्तेरी लगा 'धडकनों' की गिनती ....
    कोई डॉ. ही कर सकता है, कोई साहित्यकार ही लिख सकता है.

    "Masters of all ki tarz par"

    त्रिवेणी आपके लेवल कि नहीं है ये आप भी जानते हैं ('ये आप भी जानते हैं' ख़ास तौर पर इसलिए लिखा है कि आपका बाहरी समर्थन प्राप्त हो सके)
    ahem ahem....
    अब आप अगर benchmark set करेंगे तो आपको ही दिक्कत होगी....

    and yes, कोई बेस्ट कमेन्ट की ट्राफी हो तो अपूर्व को दें दें....


    and at last once again,
    One of the Best Post i've read in your Blog...

    उत्तर देंहटाएं
  52. Is trevein ko shayad us "fauji wali trevein" se compare kar raha hoon...
    that was masterpiece.

    kuch halki si yaad hai....
    aapko recall kara deta hoon...
    "kitni sarhedin hain rashan ki dukaan aur munne ke school ke beech..."

    That was Toooooooo good !!

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  53. अनुराग जी आज सोचा कोई नई पोस्ट होगी तो पढ़ा जाय ...लेकिन ये तो पढ़ चुकी थी ..फिर से पढ़ी त्रिवेणी को पढ़ा ..अद्भूत ...केक्टस पर फूल भी खिला करतें हें एक उम्र के बाद ...अपनी ही कविता की एक पंक्ति बरबस याद आगई ...शब्द -संयोजन खूब है ..बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  54. dr sahib....upar jitne bhi tareef bhare cmnt hai....sandwitch cmnts ke ilawa wo meri taraf se samjh liye jaye....

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  55. एक आदमी का पश्चात्ताप दूसरे का संस्मरण होता है -
    लिस्ट बहुत ही लम्बी है ठाकुर ....kitnee lambi hai Anuraag ji...likh hee daliye ...soooooooooo interesting !!!

    Hahaha....rakshahon waliii nahi....:)))

    उत्तर देंहटाएं
  56. रोज सुबह पैनी करता है अपनी दरांती माली
    एक काटो मगर तो दूसरा उग आता है ......
    कितने केक्टस अपने भीतर उगा रखे है तुमने
    Sahi samajik privesh nirmit karti panktiyan bahut kuch kaha rahi hain ....
    Shubhkanna

    उत्तर देंहटाएं
  57. डॉ साहब पढ़कर मजा आ गया....आपकी लेखनी के मुरीद हो चुके है हम...यार क्या लिखते हो...एकदम नेचुरल...हा!..हा!..हा!

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  58. ऑबजेक्शन मी-लॉर्ड

    @ इश्क वो बहादुरी है जिसे कमजोर भी कर सकता है

    प्यार-मुहब्बत कमजोरों को कबसे होने लगे। लोहे का जिगर चाहिये और पत्थर की खाल। कोचिंग के बाहर उस पिंक टीवीएस स्कूटी का वेट तो आपने भी किया होगा.. हमने भी किया है। लेकिन ‘प्यार का पहला ख़त’ उस महजबीं को देने के लिये बहुत जाँबाजी चाहिये।

    बहुत सारे दादा-टाइप लोगों को यहाँ पोंक जाते देखा है। डिक्की में रख जाने की तो हिम्मत नहीं होती, हाथ में थमाने में कलेजा मुँह को आ जाता है।

    :)

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  59. मैंने कई बार सोचा कि अशांति का कारण क्या है
    दसवी में पढ़ता था तब इकलौता कारण लगता था पोस्ट ऑफिस, जिससे कभी आई हुई चिट्ठियां और कभी न आई हुई
    इन दिनों लगता है कि मेल में आया हुआ नाकाफी है और कभी ना आया
    आप भी उसी "अनुराग अदा" में लिखते हैं जो रुक कर के अपने साथ ले जाया करती है विस्मृत अनुभूतियों में. ज़िन्दगी में ख्वाहिशें बहुत है पर ठहरी हुई चीजों का तकाजा क्या करना.

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  60. त्रिवेणी झकास थी !
    बोले तो पोस्ट पर भारी

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  61. रोज सुबह पैनी करता है अपनी दरांती माली

    एक काटो मगर तो दूसरा उग आता है ......

    कितने केक्टस अपने भीतर उगा रखे है तुमने

    एक और बेहतरीन त्रिवेणी डाक्टर साहब, एज यूजअल आपकी यादों की पिटारी दा कोई जवाब नहीं। संस्मरण भी ऐसे ऐसे बंदा हंसे बिना और इमोशन हुए बिना रह ही नहीं सके।

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  62. अनुराग जी, क्या बात है..... एकदम रिफ्रैश कर दिया... वाह..

    उत्तर देंहटाएं
  63. पोस्ट पढ़ते वक़्त जितनी बार हंसा
    कैक्टस का काँटा चुभा अन्दर...

    अनुराग जी को सलाम!!!

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  64. doosri baar fir aa gaye hain... socha exam ho gaye to revision maar lein ek baar.. :P
    isi bahane kai saare comments bhi padhne ko mile...
    hamara bhi double century lagne wala hai isi mahine ki 11 tareekh ko.. heart beat meter courier kar dijiye, bata denge bani double century ya miss ho gayi...

    उत्तर देंहटाएं

कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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