2010-01-02

एबस्ट्रेक्ट सा कुछ !!!!

धूप पिछले दो दिनों से छुट्टी पे है ..परिंदे भी....सर्दियों का आफती धुंया नीचे उतर कर उंघती स्ट्रीट लाइटों  को दिन की शिफ्टों में काम करा रहा है   . ...  ... हर आधे घंटे  में अब भी कोई एस. एम् एस नए साल की बाबत इन-बॉक्स में दाखिल होता है ... मन करता है ..कोने में  खड़े उस आदमी से बस  दो कश मांग लूं....ऐसे मौसम में पोशीदा हुई कई छोटी छोटी ख्वाहिशो की  तलब बार बार  उठती है . .. .कुछ ख्याल किसी सफ्हे की तन्हाई को डिस्टर्ब करते है.... ..
(१)"अल्ट्रेशन "
उधेड़ के पुराने किस्सों को
रंग बिरंगे धागों से
मन माफिक जगह रख देता है .....
बड़ा हुनर है उसके हाथ में !!

(२)"इन्वर्सली पर्पोशनल"
मै उम्र का पैमाना
हाथ में लिए
जब भी
मापने बैठा हूँ
"आदमियत"....
हर बार पहले से छोटी मिली  है!!


(३)"औरत

पल्टो रवायतो के कुछ ओर सफ्हे
गिरायो इक ओर रूह
दफ़न कर दो एक ओर लाश
तहज़ीब के लबादे मे.........
ख़ामोश रहकर भी किस कदर डराती है.


ओर अब मोहब्बत !!
ग्यारह बजने में  दस मिनट थे

ट्रेन ने "व्हिसल" दी थी तब
प्लेटफोर्म नंबर एक पर
भरी भीड़ में
मेरे नजदीक आकर 
कानो पे  तुमने
"आई मिस यू" रखा  था ......
ग्यारह बजने में दस मिनट है
तुम्हे हिचकी  आयी होगी !!


टुकड़ा- ए -त्रिवेणी


घर लौटने से पहले उस रात जलाये थे  कागज के कुछ टुकड़े
वो डायरी का पन्ना भी लिपस्टिक लगाकर अपने होठ दिए थे जिसमे  तुमने .....

उस रात  मेरी  छत  ने  सुर्ख  लाल  रंग  से  होली  खेली  थी











85 टिप्‍पणियां:

  1. कैसे-कैसे बिम्ब!! शब्दों की जादूगरी है.

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  2. सचमुच शब्दों व बिम्बों की जादूगरी है ,
    सिर चढ़ कर बोलती है !

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  3. "समाज सिर्फ विद्रोही वीरों को पसंद करता है, विरोधों को नहीं" - मिस्टर सहाय

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  4. तोबा ! नए साल पर लफ़्ज़ों की यह जादूगरी ...कमाल है हर लफ्ज़ ...सही में छोटी छोटी ख्वाइशों की तलब जाग उठती है ..

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  5. गुनगुने अर्थों में लिपटे शब्द पढ़ कर सुकून मिला, आपकी शैली ही निराली है बात कहने की.

    शुभकामनायें....

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  6. उफ्फ्फ !!! सर्द मौसम का असर था शायद जो नए साल के आगाज को ओर खूबसूरत बना गया अरसे बाद आप की नज़्म खास तौर से ये वाली
    ग्यारह बजने में दस मिनट थे

    ट्रेन ने "व्हिसल" दी थी तब
    प्लेटफोर्म नंबर एक पर
    भरी भीड़ में
    मेरे नजदीक आकर
    कानो पे तुमने
    "आई मिस यू" रखा था ......
    ग्यारह बजने में दस मिनट है
    तुम्हे हिचकी आयी होगी !!

    फॉर्म में वापस आ गये डॉ साहब .गुलज़ारिश टच लिए .
    वन ऑफ़ यौर बेस्ट अगेन !

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  7. यहां शब्‍द इतने अनौपचारिक चुस्‍त और खिलंदड़े से है कि तुरंत दोस्‍त बन जाते है.बार बार आना चाहूंगा.

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  8. काश आप जैसे लिखने के हुनर का दस प्रतिशत भी हमें आता तो लिटरेचर का नोबल प्राईज़ जेब में लिए घूमते...कहाँ से लाते हैं ये शब्द और भाव...मैंने दांतों तले अपनी सभी उँगलियाँ चबा डालीं हैं लेकिन जवाब अभी तक नहीं मिला है...इस साल अगर आप से नहीं मिला तो समझो इसे कभी ख़तम ही होने नहीं दूंगा...:))
    लाजवाब बेजोड़ लेखन...

    नीरज

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  9. शब्दो के डाकटर कह सकता हूं आपको . शब्दो की सर्जरी कितने करीने से करते है . लाजबाब . और शब्द मेरी समझ मे नही आते आपके लिखे की तारीफ़ करने के .

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  10. तहज़ीब के लबादे मे.........
    ख़ामोश रहकर भी किस कदर डराती है.

    behtreen.

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  11. कोहरे में क्षणिकाएं धुप सी चमक उठी हैं भले ही उनमें छिपी सच्चाई और दर्द की उष्मा, किरणों से अलग है!

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  12. नव वर्ष मंगलमय हो डाक्टर साहिब,इस तपती :) :) और हड्डियों को
    सिकुड़ा देने वाली सर्दी में जान लेके रहोगे आप ऐसा लग रहा है , साड़ी छोटी
    छोटी कवितायेँ और आखिर में ये त्रिवेणी , खुद को लहुलूहान कर के बैठा हब,
    फिर से आता हूँ वाकई काफी सर्दी है अब वो बेवजह की मसरूफियत
    ख़त्म होने वाली है ... :)) :)

    आपका
    अर्श

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  13. कुछ दबा हुआ निकला है
    हाथ में ले कर देख रहा हूँ उसको...

    (आपकी रचना पढ़ के)

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  14. कुछ ख्याल किसी सफ्हे की तन्हाई को डिस्टर्ब करते है....
    या यूँ कह ले के सफ्हे की तन्हाई को दूर करते है..

    उधेड़ के पुराने किस्सों को
    रंग बिरंगे धागों से
    मन माफिक जगह रख देता है .....
    बड़ा हुनर है उसके हाथ में !!..कोई कलाकार लगता है.वरना उध्धे हुए धागे कई बार उलझ भी जाते है बेवजह यूँ ही..

    आदमियत"....
    हर बार पहले से छोटी मिली है!!
    नो कमेंट्स

    औरत ..
    सारे रंग मेरे अंदर है,पर नर्म और पिघले हुए नहीं,
    जो सहज ही इक दुसरे से मिल जाये.,

    ओर अब मोहब्बत !


    रुक गयी..

    छींक यूँ आते आते मुझको..

    तूं रह गया..

    याद करते करते मुझको..

    किसी और ख्याल ने,

    रास्ता तेरा काटा होगा..

    घर लौटने से पहले उस रात जलाये थे कागज के कुछ टुकड़े
    वो डायरी का पन्ना भी लिपस्टिक लगाकर अपने होठ दिए थे जिसमे तुमने .....

    उस रात मेरी छत ने सुर्ख लाल रंग से होली खेली थी ..

    डायरी का पन्ना भी क्या शैय है.सारी कायनात सिमट आती है..
    post aisee jaise suraj ke chhuti pe jane pe dhoop ka ek tukda nazar bacha ke zmeen pe aa gya ho...

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  15. aap apni diary ke panne kabhi mat jalana anuraagji.....please...

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  16. .........................................................................................................................................................................................................................................................आप सिर्फ नज्में ही क्यों नहीं लिखते ???????.............................................फिर आती हूँ .....!!

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  17. ..............कितनी बार पढ़ चुकी हूँ ......अभी जी नहीं भरा ....फिर पढ़ लूँ .....!!

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  18. टिप्पणियाँ देख कर सोच रही हूँ कि हम बातूनी लोगो को कायदे की बातें करना कब आयेगा ?

    फिर से कोशिश... फिर से निश्शब्द....

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  19. @ उधेड़ के पुराने किस्सों को
    रंग बिरंगे धागों से
    मन माफिक जगह रख देता है .....

    बड़ा हुनर है उसके हाथ में !!

    ये हुनर तो आपके हाथ में है .....!!

    @ तहज़ीब के लबादे मे.........

    ख़ामोश रहकर भी किस कदर डराती है.

    पर खुद तो लाश बनी रहती है न ....?



    @ ग्यारह बजने में दस मिनट है
    तुम्हे हिचकी आयी होगी !!


    जब इतने प्यार से "miss u "कहा है तो हिचकी भी आई ही होगी ......!!


    @ वो डायरी का पन्ना भी लिपस्टिक लगाकर अपने होठ दिए थे जिसमे तुमने .....
    क्यों जला दिए ....??

    कंचन जी क्या करूँ आज तो सच में निशब्द हूँ .....!!

    उत्तर देंहटाएं
  20. और एक बार नीरज जी की टिप्पणी चोरी कर रही हूँ आपके लिए .....

    काश आप जैसे लिखने के हुनर का दस प्रतिशत भी हमें आता तो लिटरेचर का नोबल प्राईज़ जेब में लिए घूमते...कहाँ से लाते हैं ये शब्द और भाव...मैंने दांतों तले अपनी सभी उँगलियाँ चबा डालीं हैं लेकिन जवाब अभी तक नहीं मिला है..

    उत्तर देंहटाएं
  21. पिछली पोस्ट चुपचाप पढकर जाना पडा था, आप कई बार मौका ही नही देते कुछ कहने का बस एक बुखार की तरह लिखावट चढती जाती है..

    सोचने को मजबूर कर देता है आपका हर शब्द, न जाने कहा से लाते हो इन्हे, बस कभी कभी लगता है काफ़ी contagious है, अकेलेपन मे पढ लो तो दिन भर कलम लेकर ही बैठे रहो और पन्ने फ़ाडते रहो..

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  22. क्या-क्या खुराफ़ातें भांजते हो भैये। कान में ’मिस यू ’बोल गया कोई। जय हो।

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  23. well said .........Dr Sahab
    &
    Wish you a Glorious , memorable 2010 !!
    warm wishes for entire family from Snow covered City , its me,
    - Lavanya

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  24. ग्यारह बजने में दस मिनट थे

    ट्रेन ने "व्हिसल" दी थी तब
    प्लेटफोर्म नंबर एक पर
    भरी भीड़ में
    मेरे नजदीक आकर
    कानो पे तुमने
    "आई मिस यू" रखा था ......
    ग्यारह बजने में दस मिनट है
    तुम्हे हिचकी आयी होगी !!

    सबसे पहले आपको नववर्ष की ढेर सारी बधाईया ! ईश्वर हम सबको खुशहाल रखे .. ईश्वर सबको खुशहाल रखे !!

    आपकी इन ४-५ पंक्तियाँ सीधे दिल के उस अँधेरे कोने पर दस्तक देते हैं जो अनछुआ सा छोड़ रखा होता है ! वो कोना जो अपने होने का अहसास केवल उस एक हिचकी से ही देता है !! हर बार की तरह सीधे दिल की गहराई तक घूमा डाला आपकी अभिव्यक्ति ने !
    धन्यवाद !!

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  25. .
    .
    .
    पल्टो रवायतो के कुछ और सफ्हे
    गिराओ इक और रूह
    दफ़न कर दो एक ओर लाश
    तहज़ीब के लबादे मे.........
    ख़ामोश रहकर भी किस कदर डराती है.


    यह क्या डॉ० साहब,
    इतना सच और डरावना भी,
    क्यों लिखते हो आप ऐसा...?

    (अदा जी की पोस्ट पर आपकी टिप्पणी पढ़ी, जैसे मेरे मन की बात को ही शब्द दे दिये आपने)

    आभार!

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  26. कृपया 'मिस यू' को डिफाईन करें :)

    कोई यूं ही मिस यू कह कर चल दे ऐसा तो नहीं हो सकता......अमा यार उसके मुडते ही कलाई हाथ में आ जानी चाहिये थी उसकी और उसे सकर्लिंग रोटेशन देकर उसे कमान की तरह तान बेधडक कह सकते थे....."आई मिस यू टू" :)

    दिलवाले दुल्हनीया ले जाएंगे स्टाईल में :)

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  27. कानो पे तुमने
    "आई मिस यू" रखा था ......

    ग्यारह बजने में दस मिनट है
    तुम्हे हिचकी आयी होगी !!


    मन कहीं अटक सा गया...कहाँ ? पता नहीं पर कुछ कुछ याद आता है!

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  28. डॉ. साब नववर्ष आपके लिये मंगलमय हो...

    उस रात मेरी छत ने सुर्ख लाल रंग से होली खेली थी...

    वाह वाह...

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  29. कई बार ऐसा होता है कि...कई बार नहीं, आपके पोस्ट पे तो हर बार होता है कि पढ़ने के बाद बस अवाक रहा जाता हूँ। शब्दॊं की बादशाहत जिस तरह से आप एकछत्र एनज्वाय करते हो, शायद ही कोई और करता है। सच कहूँ, तो जलन होती है आपकी इस बादशाहत से...

    तमाम शिर्षक इन क्षणिकाओं के एक-दूसरे से जुड़े लगते हैं कुछ अजीब-सा कोलाज बनाते हुये....
    और अब मुहब्बत इनवर्शली प्रोपोशनल औरत अल्ट्रेशन आदमियत...

    कोलाज जैसा कोलाज कोई....उफ़्फ़्फ़्फ़!

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  30. गागर में सागर जैसे..बहुत कुछ कह गयी ये क्षणिकाएँ.
    "इन्वर्सली पर्पोशनल" ख़ास लगी..जैसे अब इस के बाद कहने को कुछ बाकी रहा ही नहीं.

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  31. dear anuraag ....

    ye 11:30 wala effect dil me utar gaya bhai ..kudos ..

    BTW - Happy New year..

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  32. दिल कुछ मुलायमियत महसूस कर रहा है...

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  33. अनुराग जी
    क्या कमाल का लिखा है.........सचमुच नए साल पर इससे बेहतर और क्या पढ़ा जा सकता था......!

    मै उम्र का पैमाना
    हाथ में लिए
    जब भी
    मापने बैठा हूँ
    "आदमियत"....

    हर बार पहले से छोटी मिली है!!


    नव वर्ष 2010 की हार्दिक शुभकामनायें.....!
    ईश्वर से कामना है कि यह वर्ष आपके सुख और समृद्धि को और ऊँचाई प्रदान करे.

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  34. itne itne dilon ki baate ap kaise apni kalam se kh dete hain anurag ji.khoob khoobsurati se dil ki baato ko alter karte hain aap .

    उत्तर देंहटाएं
  35. गुलज़ार याद आते रहे आपको पढ़ते हुए.
    भाई इसे तारीफ़ समझा जाए!
    सुभान-अल्लाह!

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  36. सूरज की 'विंटर वेकेशन ' चल रही हैं ...क्या करें ...घर में रजाई में दुबक कर तो काम नहीं चल सकता ना ..हमें तो काम करना ही है ...
    आपके छोटे छोटे ख्यालों ने हमारी नींद उड़ा दी है ..सोचने पर मजबूर कर देती है 'अल्ट्रेशन , इन्वेर्सली प्रापोशनल और औरत '

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  37. अभी सुबह सवा पांच बजे हिचकी आ रही है !

    उत्तर देंहटाएं
  38. मै उम्र का पैमाना

    हाथ में लिए
    जब भी
    मापने बैठा हूँ
    "आदमियत"....

    हर बार पहले से छोटी मिली है!!


    yakinan wakt ka khanjar admiyat ko jibah karne me laga hua hai....behtareeen ....kabhi apne is eklavya ke blog par bhi nazr-e-inayat farmayen...sahi hai sir ap mere kalyugi guru dron hai aur main kalyugi eklavya...:)apko padh padh kar hi seekh raha hu blogging...dhanyavaad dushyant....chandmutthiashaar.blogspot.com....

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  39. @कुश,
    तू मास्टर आदमी है यार...हा!हा!!
    दुष्यंत जी बीच में आ गये वर्ना तो very nice हो ही गया था। देर तक हँसा हूँ....शुक्रिया!

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  40. NAZM KI NAKKAASEE PAR TO AB KYA KAHUN.......

    NAV VARSH KI SHUBHKAAMNA LE LIJIYE.....SAPARIWAAR SWASTH RAHEN,SUKHI RAHEN AUR HAR BEETTE PAL KE SAATH SAFALTA KI CHDHTI SIDHIYON SANG JEEVAN KA SAFAR TAY KARTE RAHEN....

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  41. उधेड़ के पुराने किस्सों को
    रंग बिरंगे धागों से
    मन माफिक जगह रख देता है .....

    बड़ा हुनर है उसके हाथ में !!


    सच कह रहे हैं अनुराग सर.. उससे ज्यादा हुनर किसी के हाथों में नहीं है..

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  42. अचंभित हूँ
    कि कैसे इतनी गहरी सोच को लिख लेते हैं कैसे इतने अच्छे शब्दों में बाँध लेते हैं
    क्या जादू है आपके पास कि बस यहाँ आकर लगता है दिन बन गया

    कैसे इतनी अच्छी त्रिवेणी और ख़्याल आते हैं
    कैसे अलग अलग और कितने गहरे कितने अथाह सोच को लिए हुए मुक्तक कह लेते हैं
    सटीक और दिल को छूते हुए

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  43. अच्छा तो, आप ज़नाब हैं ?
    पता ही न लगा कि यह पोस्ट आपने कब दर्ज़ कर दी !
    तभी तो मैं कहूँ कि तीन दिनों से मेरी यह हिचकी शान्त क्यों न हो रही है ?
    धन्यवाद तुम्हारा कि यह पोस्ट पढ़वा दी, और मेरी हिचकियाँ हिचकोलों में तब्दील होने से रह गयीं !

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  44. पता नही कौन सी अनजानी तासीर है आपकी इन सारी पोस्ट्स की दिल और दिमाग दोनों को बंदर की तरह नचाती रहती हैं..और एक खास मौसम..रंग बदलता..सो ऐसे कि कभी तो पढ़ कर दिमाग ८ साल की उस बच्ची की तरह होता है (जो एक बार ट्रेन पर मिली थी) जो इतनी बातें करती थी..बिना बात के भी..कि रुकने को सांस भी नही लेती थी..और कभी कुछ पढ़ कर दिमाग उसकी मम्मी की तरह हो जाता है(जो उसी ट्रेन पर मिली थीं) जो एक डांट से ही उसे चुप करा देती थीं..और फिर पिन-ड्रॉप-साइलेंस..सारी मंजिलों पर..सो इसे पढ़ कर दिमाग फिर उन्ही मम्मी की तरह हुआ इस बार..खास कर औरत और मोहब्बत वाली..पहले ही पढ़ ली थी मगर....और यह खामोशी डराती है अक्सर..

    हाँ मौसम की भली कही..दरअस्ल यह वक्त सूरज के स्कूल की विंटर-वैकेशन्स का होता है..जब वो नार्थ से साउथ इंडिया हॉलीडे-टूर पे आता है..सो वहाँ कैसे दिखेगा..और जब मैं सोचता हूँ कि आपको लिखूँ कि कैसे खिलती धूप के गुंचों के बीच टेम्परेचर की सुई २० के ऊपर नीचे थिरकती रहती है आजकल इधर..तो डर लगता है कि यह बताने पर कहीं आप जलेंगे तो नही इन मुई सर्दियों मे? ;-)

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  45. हाँ नये साल (अभी तो बस टाइटलिंग गुजरी है..पिक्चर तो अभी बाकी है) की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं आपके लिये, आपके परिवार के लिये और आपकी जादुई कलम के लिये.

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  46. कहीं मुहाब्ब्त टूट रही होगी
    मेरी हिचकी किसी ने सुनी भी नहीं
    --
    बिलकुल इन्वेर्स्ली प्रोपोर्शन है. हां हमारी कोशिश बेकार जाती है किसी "सहानुभूति" से मल्टीप्लय करने की.
    --

    अभी नए साल का पहला सप्ताह चल रहा है. मेरी मुबारकबाद भी जल्दी से कुबूल कर लें...
    यह अच्छी बात है की आपके पोस्ट की उम्र लम्बी होती है.

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  47. एक बार फिर आई थी अपनी फरमाइश की नज्में पढने ......और कुछ रस भरी टिप्पणियों का स्वाद ....पर बीच में ये nice की tab पे गौतम जी हंसी .....अपना ही मज़ा दे रही है .....!!

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  48. आपके लेख से भी अधिक रुचिकर टिप्पणियां होती हैं(please dont take it otherwise),जब मैं उन्हें पढ़ता हूं तो आपके लेख का महत्व समझ में आ जाता है.

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  49. बहुत खूबसूरत नज़्में है अनुराग ..मुझे बहुत अच्छी लगीं ।

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  50. सचमुच कमाल की कारीगरी है आपकी लेखनी में , हुनर में |

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  51. बहुत सुन्दर रचना
    बहुत बहुत धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  52. कोने में खड़े उस आदमी से बस दो कश मांग लूं....ऐसे मौसम में पोशीदा हुई कई छोटी छोटी ख्वाहिशो की तलब बार बार उठती है . .. .कुछ ख्याल किसी सफ्हे की तन्हाई को डिस्टर्ब करते है.... ..
    कुछ ऐसे ही लम्हे होते हैं जब सबसे ज्यादा जरूरत सिर्फ तन्हाई की होती है। बस अपने साथ कुछ पल , थोड़े से ख्याल और ख्वाहिशों का एक तानाबाना
    इस बार सारी ही त्रिवेणीयां गजब हैं डाक्टर साहब एक का जिक्र करूंगी तो दूसरी रूठ जाएंगी , लेकिन ११ बजने में दस मिनट पहले उसे हिचकी तो जरूर आई ही होगी

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  53. प्रभु... ये "मिस यु" वाली बात वाकई मे टच कर् गई। मुझे लगता है की ईसपे विशेष टिप्प्णी की जरुरत है...:)

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  54. @ उधेड़ के पुराने किस्सों को
    रंग बिरंगे धागों से
    मन माफिक जगह रख देता है .....

    बड़ा हुनर है उसके हाथ में !!
    bahut hi shaandar ,har rachna ek se badhkar .
    kahi aapke baare me padhi ki bahut hi behtrin
    likhte hai, sochi ek baar is shaksh se milkar dekhoon to sahi ,aur yahi utsukta yahan khinch laai ,magar umeed se adhik paakar aanand aa
    gaya ,aur hunar aapki kalam me bhi kuchh kam
    nahi ,

    उत्तर देंहटाएं
  55. डा० साब
    एक जिद्दी धुन पर की ये पोस्ट और एक बेकार की बहस के लिये:-

    http://ek-ziddi-dhun.blogspot.com/2010/01/blog-post_7845.html

    उत्तर देंहटाएं
  56. शब्द-शब्द सुंदर
    आकर्षक क्षण‍िकाएंॅ ...
    एक बात खटक रही है क‍ि जब आप शब्दों के भी इतने अच्छे डाक्टर हैं तो प्रथम दो क्षण‍िकाओं के शीर्षक के ल‍िए आपने ह‍िन्दी शब्दों की खोज क्यों नहीं की ?...जैसे "इन्वर्सली पर्पोशनल" के ल‍िए 'क्रम‍िक ह्रास' जैसा ही कोइ शब्द....
    यह मेरा सोचना है मैं पूर्णत: गलत भी हो सकता हूंॅ।

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  57. भाव अद्वितीय हैं, और शब्दों का चयन उससे भी बेहतर.

    त्रिवेणी नें प्रभावित किया , बहुत ही बेहतर.

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  58. छोटी छोटी चीजों पर इनती पैनी और गहरी नज़र... फिर उसे माहिर शब्दों में बाँधने की कला !!!!!!
    कभी कभी मुझे लगता है आपमें देवत्व है, एक जिद्दी धुन पर आपके कहे वचन से तो लगता है जैसे आप सिर्फ हमारा दिल रखने के लिए हमारी पोस्ट पर कमेन्ट करते हो... आपका स्केल तो बहुत ऊँचा है...

    उत्तर देंहटाएं
  59. कौंधती सी क्षणिकाएं और लपट सी त्रिवेणी वाह ! वाह ! वाह !

    उत्तर देंहटाएं
  60. देर से आने के लिये क्षमा चाहती हूँ इतनी देर बाद इस लाजवाब रचना के लिये कुछ कहना अच्छा नहीं लग रहा सभी तारीफ के शब्द तो मुझ से पहले आने वाले उडा ले गये। वैसे भी निशब्द ही होती हूँ आपकी हर रचना पर । नये साल की बहुत बहुत शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  61. आप के ब्लॉग की सबसे अच्छी बात की यहाँ जल्दी जल्दी पोस्ट नही लिखी जाती है | जो भी लिखा जाता है वो विचारों की गति है जो पाठकों को बहुत पसंद है | आभार |

    उत्तर देंहटाएं
  62. हैरान रह गई हूँ पढ़ कर, गहरी बातों को, इतने छोटे में, सुंदर बिम्बों में पिरो दिया.

    उत्तर देंहटाएं
  63. ख़ामोश रहकर भी किस कदर डराती है.
    बहुत शानदार. सभी क्षणिकायें बहुत शानदार, यथार्थ से रूबरू कराती हुई.

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  64. ..कोने में खड़े उस आदमी से बस दो कश मांग लूं...
    हम्म्म्म !!

    कई बार यूँ हुआ है कि अँधेरे में सिगरेट पीने का मन ही नहीं करता, जब तक उसका धुआं न देख लो, और जाड़ों में बहती हुई बारिश में कितना Condense लगता है ना धुआं? भाई ! कोई दुकान खुली नहीं है, २ ड्रेग प्लीज़

    @ inversely proportional
    अगर उम्र का हिसाब नापना हो तो देखो किसी काम (पाप) को करते वक्त कितनी तेज़ धडकता है दिल...
    (वियुत्क्रमानुपति) . एक किस्सा:
    एक माँ अपनी बेटी से कहती है बेटा बस में अपनी बगल की खाली सीट में बेशक किसी नवयुवक को बैठने दे देना पर किसी बूढ़े को नहीं.

    उत्तर देंहटाएं
  65. ओर अब मोहब्बत !!

    ग्यारह बजने में दस मिनट थे


    ट्रेन ने "व्हिसल" दी थी तब
    प्लेटफोर्म नंबर एक पर
    भरी भीड़ में
    मेरे नजदीक आकर
    कानो पे तुमने
    "आई मिस यू" रखा था ......

    ग्यारह बजने में दस मिनट है
    तुम्हे हिचकी आयी होगी !!

    Veer ka gaana 'Pavan udaiye chitthiyan' sun raha hoon...

    Wo din yaad ho aiye....
    nahi nahi 'train to pakistan' ka wo hissa yaad ho aaya jismein gaon wale train se samay ka pata lagate the, 'Biological clock' ko 'Jet leg' Hua chahta hai....

    उत्तर देंहटाएं
  66. अनुराग सर आपकीं औरत पढ़कर...
    ...Thousand Splendid Suns पढ़ी है आपने?

    उत्तर देंहटाएं
  67. अस्सलाम वालेकुम डॉक्टर साहेब
    आप भी न !! क्या-क्या उपमा और उपमेय रच देते हैं .
    उपमा अनुरागस्य दिमाग में बैठ चुका है.
    पिछले ४० मिनट से आपके ही ब्लॉग पर अटक गया सा हूँ.
    आज टिपण्णी दे ही देता हूँ, हमेशा की तरह हवा के झोंके सा गुज़र जाने के बजाय इस बार हस्त-चिन्ह छोड़ता जाऊँगा.

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  68. It is only sometimes on blog to find such small but passionate and pleasant expressions.
    Praiseworthy!!

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  69. ट्रेन ने "व्हिसल" दी थी तब
    प्लेटफोर्म नंबर एक पर
    भरी भीड़ में
    मेरे नजदीक आकर
    कानो पे तुमने
    "आई मिस यू" रखा था ......
    ग्यारह बजने में दस मिनट है
    तुम्हे हिचकी आयी होगी !!

    पढ़ कर हैरान हूँ , गहरी बातों को, सुंदर बिम्बों में पिरो दिया.

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  70. आप जब लिखते हैं, तो लगता नहीं कि एक डॉक्टर लिख रहा है. एक चीज़ों के न जाने कितने मायने होते हैं.. वाह भाई...

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  71. उधेड़ के पुराने किस्सों को रंग बिरंगे धागों से
    मन माफिक जगह रख देता है .....क्या कहूं क्या लिखूं ...बेहद अच्छी पंक्तियाँ ...दरअसल ब्लॉग की दुनिया से ही बहुत दिनों तक मन उचाट रहा ...इस लिए भी नहीं पढ़ पाई थी आपको लेकिन यकीं माने कुछ एक ब्लॉग बार-बार जेहन में उभरते रहे उनमें आपका ब्लॉग तो भुलाया नहीं जा सकता ...सेहत
    का ध्यान रखना पिछले दिनों प्रिओरिटीपर था बस इसलिए ...शुभकामना के साथ

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  72. Wake up, Sir ji | Where art thou?
    Waiting for new post.

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  73. ye kalam ki kalakaari meerut walon ke lahoo me hai ya gene me?????
    Jai Hind...

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  74. ऐसी मसरूफ़ियत क्या मसरूफ़ियत कि तमाम पब्लिक वैली सी हो कर प्रतीक्षा कर रही हो, ’प्रतीक्षा’ के बाहर खड़े हो कर..सर्दी के सूरज से यह कैसा गठबंधन..खिल भी जाइये अब..एक झलक :-)

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  75. जब भी आपके ब्लाग पर आता हूं। गुम हो जाता हूं। न तो किसी और का ब्लाग पढ़ पाता हूं और न ही सोचने की क्षमता रहती है। बस यहीं फंस कर रह जाता हूं।

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कुछ टिप्पणिया कभी- कभी पोस्ट से भी सार्थक हो जाती है ,कुछ उन हिस्सों पे टोर्च फेंकती है ... .जो लिखने वाले के दायरे से शायद छूट गये .या जिन्हें ओर मुकम्मिल स्पेस की जरुरत थी......लिखना दरअसल किसी संवाद को शुरू करना है ..ओर प्रतिक्रिया उस संवाद की एक कड़ी ..

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