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2012-01-06

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वो डे स्कोलर  थी  घर से कोलेज .......कोलेज  से घर ....उस उम्र की  ज्यादातर लडकियों की तरह .जो अपनी  माँ को दिन भर की   सारी बात बताती.है ...उन  सहेलियो  के साथ उसका ज्यादा वक़्त बिताती   जो स्कूल टाइम से उसके साथ थी ...टोपर खानदान की टोपर बिटिया ... कुल जोड़ निकाले तो  एक आदर्श  लड़की  ......ओर  वो हॉस्टल वाला था ...उसका अपना बिगडैल  गैंग ...पढाई में साधारण ....दुनिया की ज्यादातर  बुरी आदते उसमे थी ... .वो हमेशा अगली बैंच पर बैठती ओर वो पिछली दो बैंचो के दरमियाँ रहता....... वो हमेशा  क्लास टॉप करती  वो बमुश्किल पास होता वो अपने में सिमटी ओर वो  दुनिया भर के लिए खुला ...... अक्सर हॉस्पिटल  के बाहर वाले कोने में सिगरेट पीते कभी कभी दिख जाता या अपनी "गर्ल फ्रेंड" के साथ किसी पिक्चर हौल में .....उसकी  गर्लफ्रेंड जूनियर  बैच में थी  ...जो ज्यादा वक़्त जींस में रहती ...कोलेज के  सारे लड़के जिस पर  लट्टू रहते ...उसकी क्लास के भी ...कुल मिलाकर उन दोनों ने  आपस में  पूरे तीन सालो में शायद छह दफे बात की हो ..गोया वे न बेहद अच्छे दोस्त थे न दुश्मन .ओर हाँ उसे कभी प्यार नहीं हुआ था ओर वो आठवी क्लास में ही   अपने टीचर के प्यार की  पहली कम्पलसरी शर्त पूरी कर चूका  था .
नकी पहली मुलाकात ........जिसे मुलाकात कहा जा सकता है कोलेज के फेस्टिवल दिनों में हुई थी ..उस दिन वो जब घर से कोलेज के लिए निकली थी तो रेडियो पर "ओ हँसनी" बज रहा था  ......उसकी "गर्लफ्रेंड "घर गयी हुई थी ....  ...वो शायद .कही से भागा आया था हांफ रहा था .....तभी उसने उससे पूछा था
तुम मेरी पार्टनर बनोगी ?
गेम था  मेल पार्टनर की शेव बनाकर दौड़कर दूसरे किनारे जाकर एक मेडिकल  पज़ल सोल्व करनी है जो पहले करेगा वो जीत जाएगा .
"मैंने कभी शेव नहीं बनायी"
उसमे करना क्या है ...लेदर बना कर शेव करना है फटाफट .....कम ऑन !!
वो उसके साथ आयी है .
वो शेव करते वक़्त उसका चेहरा छील देती है ...पर पज़ल सोल्व पांच सेकण्ड में कर देती है
वे दोनों जीत गये है....उसे .उसके चेहरे पर खून देखकर अफ़सोस है  वो रुमाल से  पोछ रहा है.पर जीत से खुश है.
 विनिंग गिफ्ट   है ...  शहर के  फेमस चाइनाइज़ रेसटरोनेंट में लंच के  दो कूपन अगले एक हफ्ते तक वेलिड है .
"सन्डे चलोगी .
"मम्मी से पूछना पड़ेगा सन्डे के लिए"
उसके दोस्त उसे आवाज दे रहे है,
"ये कूपन रखो ..अगर मम्मी हाँ बोले तो सन्डे मेरे साथ चलना नहीं तो अपनी किसी फेवरेट सहेली के साथ हो आना ...शनिवार को मेरा मैच है इंजीयरिंग कोलेज से ..
उसने सोच लिया था वो उसके साथ नहीं जायेगी ...कल ही उसे कूपन थमा देंगी .
अगले तीन दिन तक वो क्लास में नहीं आता .....अजीब अहमक है  उसे  गुस्सा आता है ....उसकी गर्लफ्रेंड दिखती है ..उससे पूछू क्या ? नहीं खामखाँ पता नहीं क्या सोचेगी ? पर ये है कहाँ ?
शनिवार सुबह वो अपना काइनेटिक कोलेज में पार्क कर रही है ....कोई  मोटरसाइकिल आकर रूकती है
क्या कहा मम्मी ने ? वही है
वो सर हिलाती है
गुड ....कैंटीन के सामने ठीक एक बजे .......फुर्र से मोटरसाइकिल से गायब .
अजीब आदमी है ! पता नहीं वो इसके साथ क्यों जा रही है .. अपनी गर्लफ्रेंड को क्यों नहीं ले जाता ! वो अपनी "बेस्ट फ्रेंड "की शरण लेती है . डिफेंसिव मत रहना ...."अटैक इस बेस्ट डिफेन्स " वो तुम्हारी आँखों की तारीफ़ करेगा ,तुम्हारे कपड़ो की ....तुम्हारी बात बात में तारीफ़ करेगा भाव मत देना .
सन्डे दोपहर एक बजे कोलेज कैंटीन के सामने
तुम्हारी गर्ल फ्रेंड शहर में नहीं है क्या
गर्लफ्रेंड ?
वो तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं है ?
साथ घूमने से कोई गर्लफ्रेंड हो जाता है
वो उसे घूरती है ...आधा दिन तुम लोग साथ गुजारते हो .
हम्म .वो अपनी बाईक में झुककर नीचे कुछ चेक करता है
"साथ रहने से प्यार होने की प्रोबेबलिटी ज्यादा होती   है   ".....वो फिर कहती है
वो मुस्कराता है ."लडकियों में "
हाँ लडकियों में ...
जानती हो हम जिसके साथ वक़्त गुजारते है दिल के भीतरे हिस्से से उसके बारे में सब जानते है ."..सब !!
वैसे हम दोनों के बीच बहुत अच्छी अंडर स्टेंडिंग है वो किसी ओर को पसंद करती है ओर हम दोनों के बीच प्यार नहीं होने वाला
वो अब भी बाईक में नीचे झुक कर कुछ कर रहा है
तुम्हारे बारे में  ज्यादातर लोगो की राय अच्छी नहीं है
उसे लगा वो बाईक छोड़कर गुस्से में खड़ा होकर कुछ कहेगा .पर वो नीचे झुका हुआ कहता है
"ओपिनियन पोल" हाईवे के ट्रक ड्राइवर की तरह होते है ..उन पर एतबार नहीं करना चाहिए ...ओर  ये अच्छी  बुरी  चीज़े  बड़ी कमाल की होती है ... शायद पंद्रह साल बाद अच्छा" बुरा" हो जाए ओर बुरा "अच्छा "
फिर नजरे उठकर उसकी आँखों में देखता है ....कभी ड्राइव किया है हाई वे पर
फिर साथ क्यों घूमते हो
हम दोनों एक दूसरे की कम्पनी रेलिश करते है ....दैट्स ईट .
उसने रास्ते में कही ब्रेक नहीं मारे ...बाइक भी तेज नहीं चलायी...वो पिछला हिस्सा पकड़ कर  सेफ डिस्टेंस पर  बैठी रही .पर उसके ड्यू की खुशबु अच्छी है
उसकी बाईक   चाइनीज़ रेस्ट्रोरेन्ट  के बाहर आकर रुकी है
....तुम नॉन वेज खाती हो ?
आई  लव नॉन वेज .मम्मी के हाथ का खायोगे तो उंगलिया चाटते रह जाओगे
वो उसकी ओर देखता है " मैंने अभी अभी रेलिश करना  सीखा है ...एक सीनियर हाँ ओर ना के बीच था तो अपना दुःख बांटने के लिए यहाँ ले आता था.....मै सिर्फ सूप पीता ओर उसकी बात सुनता धीरे धीरे जब  टेस्ट डेवलप हुआ तो उसकी गर्लफ्रेंड ने हाँ बोल दी ओर .....आई ओ दिस टेस्ट टू देयर लव ...
"रेलिश "!! तुम चीजों को रेलिश बहुत करते हो
वो नोट  करती है ..... उसकी एक दिन की बड़ी दाढ़ी  है ग्रीन ग्रीन सी...... शेव बनाकर भी नहीं आया बेवकूफ ! वो होती तो ........
.रेस्तरा में "ओ हंसनी "का इंस्ट्रूमेंटल बज रहा है
मुझे ये गाना बहुत पसंद है वो कहती है
मुझे भी
वो बतलाना  चाहता है   वो अपनी  सो काल्ड  गर्लफ्रेंड के साथ दो बार आया है पर जाने क्यों रुक गया है .इस लड़की के अन्दर  एक अजीब सा इनोसेंस उसे पसंद है ...घर लौटते वक़्त वो याद करती है उसने उसकी तारीफ़ बिलकुल नहीं की वो अपने मैच , क्रिकेट ओर इन्जियार्निंग ओर मेडिकल कोलेज के फर्क की बात करता रहा.....ओर जगजीत सिंह के बारे में ......उसे गजले समझ नहीं आती .

ओ हंसनी मेरी हंसनी
उसके बाद ....उसके काइनेटिक के पास से कोई  तेजी से गुजरता  ओर जोर से   "हैलो"  कहकर डरा देता,
एक सन्डे वो सुबह सुबह  किसी गुरूद्वारे से निकालता  टकरा गया .....यहाँ  ?
 गुरूद्वारे का प्रसाद बहुत अच्छा होता है ...उसने आँख मारी थी .....एक रोज शोर मचाने पर  उसे   क्लास से बाहर निकला गया ...बाहर कैंटीन के सामने वाली दीवार पर उसके पास गुजरते हुए उसने उसे कहा था "क्यों करते हो ऐसा "? बड़े अजीब ढंग से देखता रहा था वो बिना बोले उसे ...देर तक उसकी उन  आंखो ने पीछा नहीं छोड़ा था लड़की का .......दिलवाले  दुलहिनिया ले जायेगे  के टिकट लायी थी  उसकी बेस्ट फ्रेंड ...कितना खुश थी वे तीन चार सहेलिय ....पर पिक्चर हौल में उसे उसकी गर्लफ्रेंड के साथ देखकर जाने क्यों फिल्म में मन नहीं लगा था उसका .
तय कर लिया था उसने आगे से कभी बात नहीं करेगी उससे .
फिर उस रोज  पीठ पर कोई बैग  लादे सड़क पर बाईक  घसीटता मिला था ...क्या हुआ ?
कुछ गड़बड़ है मुझे आगे तक ड्रॉप कर डौगी... मकेनिक तक
वही ड्यू की खुशबु .
उसका बैग उसके पास रह गया था .किसी का बैग खोलना गलत बात है पर  रात को खोल ही लिया उसने .......
.दो  नयी  कैसट ..किशोर कुमार ओर जगजीत  , एक रजिस्टर ...विवियन रिचर्ड्स की बायोग्राफी ओर एक सिगरेट लाइटर.....उस रात वो देर तक  अपने बिस्तर पर वाल्क्मैन लगाकर  सुनती रही......सोते वक़्त आखिरी गाना  उसने दो बार सुना ......." ओ हंसनी .मेरी हंसनी "

AIIMS NEW DELHI
...दो दिन से बुखार था पर उसने पेरासिटामोल खा खा कर उसे चढ़ने नहीं दिया है ...मलेरिया की गोली भी खा ली है ..उसे यहाँ आना था ....पहली बार घर से इतनी  दूर निकली  है .बेस्ट फ्रेंड साथ है शायद इसलिए मम्मी ने भेज दिया है
 देश भर के मेडिकल कोलेज  कल्चरल फेस्टिवल के लिए जुटते है ....उसकी गर्लफ्रेंड भी है पर उसकी  कोई रिलेटिव  है इसलिए रात को ही आती है...उस रोज सब कुतुबमीनार देखने निकले थे..... उसकी तबियत खराब हुई है ..वो उसे    छोड़ ने  आया है ऑटो से उतारते वक़्त वो चक्कर सा महसूस करती है इसलिए उसकी बांह पकड़ लेती है ....कोलेज में  आने के बाद भी वो उसे  गर्ल्स हॉस्टल नहीं ले जाता ग्रायूँड के ठीक सामने पड़ी पत्थर  की बेंचो पर दोनों बैठते है .बिना बात किये देर तलक ..वो  अपनी जेब में  हाथ डालकर अपनी हथेली फैलाता है .
"खाओगी "इन्हें हमारे यहाँ बूंदी कहते है
बूंदी ...वो पीले रंग के उन दानो को देखती है
जानती हो मै बचपन में एक वक़्त में हलवाई बनना चाहता था .....फिर पाइलट  ओर कभी टीचर .......बचपन के  हमारे मकान तक कुछ  आवाजे    .गुरूद्वारे से   आती थी ..कितने घरो को पार करके .गली से मुडके उसकी खिड़की तक ..."गुरुबानी " है  दार  जी  ने  बताया  था  दार जी सब उन्हें  दार जी कहते थे .उनका सब कुछ सफ़ेद था दाढ़ी ,भौंहे , मूंछे सर की पगड़ी .उसके घर से  चौथे मकान पर रहते थे ..
."प्रार्थना रब से बातचीत का जरिया है ".वे कहते
"पर रब से रोज एक ही बातचीत क्यों होती है "  मै  उनसे पूछता था  तो वो जोर जोर से हँसते थे  दार जी बहुत अच्छे  थे हर मंगलवार  मुट्ठी खोलते तो  हाथ में बूंदी के बड़े बड़े दाने निकलते..
वो महसूस करती है जैसे वो एक छोटा बच्चा है ....अपनी  आँखों  में चमक लेकर कुछ कुछ  बताता है  .....वो उसके पास ओर खिसक जाती है
"पहली  बार  दार  जी  के  साथ  मैंने  गली  का  दूसरा  कोना  पार  किया  था  गुरूद्वारे  के  वास्ते   ...., हर इतवार  जानी पहचानी गंधे  वहां होती ....गंध   का भी स्वाद होता है शायद ......आलू की गंध  ,हलवे की गंध ,रोटी  की गंध .हर इतवार वहां मेला सा लगता .बड़ी बड़ी भट्टिया बड़ी बड़ी कढाईया . चने हलवे से मिलकर कितना अच्छा स्वाद देती है .माँ ऐसे कभी नहीं बना पाती .एक रोज पतंग लूटते लूटते मै   गाड़ी के टायर के बीच आ गया  ....पैर की हड्डी गयी ..दार जी सीडिया नहीं चढ़ सकते थे...नीचे खिड़की से आवाजे देते ...एक रोज मेरे सोते सोते  अपने रब के पास चले गए"
वो उसके   नजदीक हो गयी  है इतने की  उसके बदन की खुशबु महसूस कर सकती है .एक अजीब सी गंध ...भली सी ..कभी कभी आप बरसो किसी शख्स के साथ एक तय समय गुजार कर उसे जान नहीं पाते ...हर शख्स के कितने हिस्से है उसका  कौन सा हिस्सा कब खुलता है...वो उसकी बांह पकड़ कर उसके काँधे पे सर रखकर इस धूप में बैठना चाहती है ....बिना लोगो की परवाह किये.....दिल्ली की उस रोज की ये  धूप उसके भीतर तक उतरती है .
पंद्रह दिन बाद का कोई एक बुधवार
वो कैंटीन में उसके पास आयी है
"कैसी हो" वो पूछता है .उसकी ग्रीन दाढ़ी ओर ग्रीन लगने लगी है
वो उसे  घूर कर देखती है .....वो सैंडविच खाने में बिजी है" चाय पियोगी " वो पूछता है
उसे  गुस्सा आता है .उसकी सैंडविच की प्लेट अपनी ओर खींचती है
. .".क्या हुआ ?"
तुम्हे वाकई कोई फर्क नहीं पड़ता ? वो गुस्से में है
किस बात का ?
मै पंद्रह दिनों से तुम्हे इग्नोर कर रही हूँ ...बात नहीं कर रही हूँ ..पूछोगे नहीं क्यों ?
वो उसकी ओर देखता है ...पर पूछता नहीं...... वो फिर भी बतलाती है
पंद्रह दिन पहले मै  गर्ल्स हॉस्टल में गयी थी वहां लडकियों ने कहा .वो रुक गयी है ....सर नीचे झुकाए.....".के तुम "..........तुम कई लडकियों ............
"के साथ सो चूका हूँ " वो चाय के घूँट पीता पीता उसकी बात पूरी करता है ..
वो हामी में सर हिलाती है
"बिना किसी की मर्जी के उसके साथ सोया जा सकता है ? वो चाय का आखिरी घूँट हुए पूछता है 
उसकी चाय आ गयी है .वो चाय में बेवजह चम्मच घुमा रही है .
तुम जिसे मेरी "गर्लफ्रेंड "कहती हो उसमे ओर तुममे यही अंतर है वो कभी मुझसे ये सवाल नहीं पूछती के मै तुमसे क्या बात करता हूँ  ....क्यों करता हूँ
" गर्लफ्रेंड "का बेवाज़िब जिक्र जाने क्यों उसमे गुस्सा भरता है .....तुम उसे हर बार  बीच में क्यों लाते हो ? वो घर से दूर हॉस्टल में है ....मै यहाँ लोकालाईट हूँ....मेरे अपने संस्कार है ....मेरी अपनी घर की कुछ वैल्यू .... मेरी अपनी इनहिबिशन ....मेरा अपना  नजरिया  है अच्छा ओर बुरा ....उसकी आवाज तेज हो गयी है ....कैंटीन में कुछ सर उनकी ओर मुड गये है
एक ख़ामोशी फिर उनके दरमियाँ पसर जाती है
इमोशन हमें "रिड्यूस" करते है....वो कहता है ...फिर उठ गया है ..
.वो  परेशां हो गयी है .वो यहाँ लड़ने नहीं आई थी
वो बाईक स्टार्ट कर रहा है ...वो कैंटीन से बाहर  निकल उसके पीछे पीछे आयी है .उसे "सोरी "कहना चाहती है
पर वो गुस्से में है
"हो सकता है वो  बुरी हो ,पर उसमे एक अच्छी बात है उसने कभी तुम्हे" बुरा "नहीं कहा ......उसके  पास अच्छे बुरे की कोई लिस्ट नहीं है जिसके साइड बार में राईट  का ऑप्शन हो .........ओर हाँ मै "वर्जिन" नहीं हूँ !
वो बाईक स्टार्ट करके चला गया है ओर वो रो पड़ी है
ये प्यार भीतर से बीहड़ ओर खुरदुरा जंगल है जहाँ कई जगह अकेलापन है !
गर याद रहे
इक्जाम ख़त्म हुए है . इंटर्नशिप के पहले छह  महीने इधर उधर की पोस्टिंग में निकल गए है ....अगले तीन महीने की
पोस्टिंग  उसने   दिल्ली ली है कहता है पापा का ओपरेशन होना है .इसलिए उसे तीन महीने वही रहना पड़ेगा इधर वो अपने लिए आये सब रिश्ते वो मना करती है ...एक...दो...तीन !
एक रिश्ता बाहर का है ,माँ के मन में वही अटका है
कही  तुम उससे प्यार  तो करने नहीं लगी ?
नहीं ! वो अपनी माँ से कहती है
शायद ! वो अपनी  बुआ से कहती है
"हाँ" वो अपनी बेस्ट फ्रेंड से कहती है
"उसे मालूम है "?उसकी बेस्ट फ्रेंड पूछती है
शायद !
ओर वो तुझे प्यार करता है ?
शायद ?
"शब्बा खैर " उसकी बेस्ट फ्रेंड सांस लेती है
वो तुम्हारे लिए राईट चोयेस नहीं है ....उसकी बेस्ट फ्रेंड उसे कहती है ....उसकी बुआ भी ......बिना पूछे उसकी माँ भी .....उसका दिमाग भी !
बस उसका दिल अलग बाते कहता है
कुछ दो  महीने अट्ठाईस दिन  कितने अलग होते है
"वो मेरे ज़ज्बात के आधे हिस्से पर  एक वक़्त से  काबिज़  है  बिना मेरी मर्जी के ."वो ट्रेन में अपनी गर्लफ्रेंड से  उसके बारे में कहता है
तुम उससे कह क्यों नहीं देते
मै उसे डिज़र्व नहीं करता ...वो बहुत अच्छी है . मै उसे खराब नहीं करना चाहता
" ओर तुम बहुत बुरे " .पागल ! दिक्कत ये है के उसके दोस्तों की तरह तुमने भी उसे  अच्छा होने का टैग लगा दिया  है ..सब वक़्त को वही पॉज़ कर रहे है  .वो  उसे  उसी तरह से देखना चाहते है जिस तरह से  बरसो से देखते आये है ...सब भूल गए है  उसके पास भी इमोशन है...... नोर्मल इमोशन
वो अपनी दोस्त की बात सुनता है ....ट्रेन के दरवाजे पर खड़े सिगरेट पीते पीते सोचता है   कॉलेज पहुँचते ही उसे कह देगा !!
दो दिन से उसे ढूंढता है.....
वो लॉकर रूम के बाहर दिखती है .अपनी बेस्ट फ्रेंड के साथ
  हाय ....कहाँ हो यार तुम
वो जवाब नहीं देती .उसकी बेस्ट फ्रेंड जवाब देती  है
एक गुड न्यूज़ है ...... इसकी शादी तय हो गयी है ....अगले  तीन महीने  में अमेरिका जा रही है अभी सारे सरटीफिकेट इकठ्ठा करने है ओर तैयारी भी
.वो  सर झुकाए  खड़ी है
 वो कोंग्रेट्स  नहीं कहता
उसकी बेस्ट फ्रेंड आगे बढ़ गयी है ... आवाज दे रही है ....वो उसे देखना भी चाहती है पर अपनी आँखे दिखाना नहीं चाहती .आहिस्ता आहिस्ता चल देती है ......डरती है..  वो  अभी पीछे से आवाज देगा ....रोकेगा ...पर .वो कुछ कहता नहीं .पार्किंग में अपने काइनेटिक के पास आकर वो रोती है .

हते है उसके बाद उस लड़के ने  कभी प्यार नहीं किया ,वो कोलेज की  किसी लड़की के साथ नहीं सोया ,  कोई मैच नहीं खेला ... हॉस्टल  वाले  कहते थे  अगले तीन साल हर सुबह उसके रूम में सबसे   पहला  गाना बजता "ओ हंसनी "!

विलुप्त नहीं होता प्यार ...न बंद होता किसी पैराग्राफ की आखिरी लाइनों में ......फुलस्टॉप लगाकर ,
बचा रह जाता है मेरे तुम्हारे भीतर थोडा थोडा .!!

(.ओर हाँ किसी भी कथा के पात्र काल्पनिक नहीं होते प्रेम कथाओ के तो बिलकुल नहीं)

2011-12-20

....देवदास अब यहाँ नहीं रहते !

 वो  दिसंबर के आखिरी  हफ्तों वाली  सर्द रात थी ..आधी रात मोबाइल ने जगाया था
"दुनिया भर की  लडकिया एक सी होती है प्यार दिल से करती है ओर फैसले दिमाग से ".......उस ओर नशे में रुंधी  आवाज .....
"नीलाभ "??
   ......"तुम्हारी" डेस्टिनी" वाली  सुई अब  मुझपे  आकर रुकी है  " उदास हंसी !
"तू  कहाँ पे है"?  अकेला है या कोई साथ में है ? मै उनीदी आँखों से घडी देखी थी .. फोन के बैक ग्रायूंड में शोर  था  .वो बाहर  था ...यू एस  में  इतने  कडाके  की  ठण्ड  में  .
"मै उससे प्यार करता था यार ...."
इस सवाल का जवाब बरसो से जाने किस तहखाने में दफ़न है ! ! !
"मुझे  लगा उपर वाला मुझे   बाईपास  कर  जायेगा  .....पर उसके पास भी मार्कर है शायद !"
कोई  बात  नहीं  ,वक़्त  ही  है  साला  गुजर  जाएगा  ..नहीं  तो  धक्का  दे  देंगे  इसे .....मैंने  उसे   झूठा  दिलासा  दिया
"साले  खुदा  के  ओफ्फिस  में  घूस  नहीं  चलती तुझे तो मालूम ही है ."
बरसो बाद दुनिया  के  अपने  अपने  हिस्से  में  एक  दूसरे  को  बिना  बताये  हम  फोन  के  दूसरी  तरफ   रोये थे .!
बाज  वक्तो  में  कुछ  ग़म  कित्ते  बड़े  ग़म  मालूम  होते  है .....दिल   के  ग़म  !

 कोई डेड महीना गुजरा   मैंने  ऐहेतियातन  ख़ामोशी  ओढ़  ली ...वो वक़्त  ऐसा ही होता है" इम्तेहानी किस्म" का ....बड़ा तकलीफ देह .....मीलो  दूर तक फैली  ठंडी  सन्नाटो भरी सडको सा ..जो कहाँ ख़त्म होती है दिखता नहीं !
 वो  फिर  फ़ोन  पर  था  ......इस दफे संभला हुआ , थोडा संजीदा
."बैचैन  रहा यहाँ वहां भटका .....हॉस्पिटल  नहीं  गया  .....कुछ दिनों बाद   हॉस्पिटल  गया  तो  एक  16 साल की नीग्रो  लड़की  को  देखा   ....प्रेगनेंट....वो  भी  ट्विन्स  .....हॉस्पिटल स्टाफ ने .बहुत  समझाया  एबोरशन   के लिए ...नहीं  मानी  ...बोली  लड़  लूंगी  ...कर लूंगी .जी लूंगी ........16 साल  की  लड़की  यार  ! ओर  हम  साले   पढ़े  लिखे  आदमी !!....दुनिया  ख़त्म  करे  बैठे  है ! मै  किससे  खौफ जदा हूँ  यार  ...किससे भाग रहा हूँ .....खुद से ."

बीच में वही गैप  जो अक्सर सिगरेट के कश   लेने के दौरान होता है ...

कई  रोज से  अस्पताल में एक बूढ़ा बीमार हालत में था ,आया था तो  तीन दिन तक रोता रहा ..अपने बेटो को याद करके .वे उसे घर में नहीं रखना चाहते .........दो दिन पहले  उसके बेटो को बुलाया गया .कायूँसिलिंग की ...जब वे तैयार हो गए तो अचानक  उस रात  बूढ़े ने मना कर दिया मुझसे बोला  "डॉ वे  अपने भीतर से मेरे लौटने का वेलकम नहीं करते  .....प्रेशर में कर रहे है ,मै ऐसा रिश्ता नहीं चाहता .....

फिर वही गैप.....

" जानते हो उस रात घर लौटते वक़्त मुझे लगा मै भी तो ऐसा ही कर रहा हूँ ......".दूसरा शख्स उस रिश्ते को जारी नहीं रखना चाहता ..ओर मै उसे इस रिश्ते में  रोकना चाहता हूँ क्यों ? क्यूंकि मै उससे प्यार करता हूँ...पर मै ये क्यों नहीं एक्सेप्ट करना चाहता की अब वो मुझसे प्यार नहीं करता ...ये तो एकतरफा प्यार जैसी जिद हुई ना ."

इस बार दो कश वाला गैप ...
"तय कर लिया उसकी फीलिंग की रेस्पेक्ट करूँगा ओर "वी वाल्क लाइक एडल्ट "  !    (एक सांस ).....................मुश्किल था पर सच है ..."

.ऐसा लगा जैसे उसकी  सिगरेट भी ख़त्म हो गयी है ...या उसने खाली जलने  छोड़  दी है ...

"सुन ,डब्लू  .एच .ओ  में  अपलाइ   किया  है  ,,,कुछ  पोसिटिव  साइन  है  निकल  जायूँगा"
"ओर  अमेरिका  .....तेरा तो सपना था ....अब पूरा होने वाला है फिर ....."
"कुछ है जो सपनो से अलग है ....क्या है  ?एक्सप्लेन नहीं कर सकता ..टेम्परेरी है या परमानेंट ... नहीं जानता ..पर कुछ है "........
.वो संजीदा था  उसकी  संजीदगी  के बेकग्राउंड में गम की मिलावट  नहीं था ...एक अजीब सी मजबूती थी ....
"तू ठीक है ना ?
हाँ ....

 जिंदगी की तलबो में  फेरबदल लाजिमी  है ..
सके बाद  मेरे  मोबाइल  में  अजीब अजीब  से   नबर सेव होते फिर बदल जाते ! .अलग अलग देशो से अलग अलग वक्तो में   कई  देश   अफ्रीका नाम्बिया .इथोपिया .. ..इराक ओर न जाने कहाँ कहाँ ...साल दर साल गुजरे....
उसकी बाते   बदलनी  लगी "  जो  दुःख  "मेरे" के दायरे से बाहर हो वो   हमारे लिए   इंडिकेटर   है ....ओर हम सोचते है कोई दूसरा रुक जायेगा"
  पने पिता की खबर सुनकर  सिर्फ तीन दिन के लिए आया था वो...माँ उसकी पहले से नहीं थी....उसके शहर तक जाने में वक़्त लगता है .हम चार घंटे के लिए साथ थे उस दिन. पर बात सिर्फ कुछ मिनटों के लिए हो पायी थी ...उसके घर में कमरे की बालकोनी में .....   .मैंने सिगरेट छोड़ दी है पर मै उससे कहता नहीं . वो अपने हाथ की सिगरेट बात करते करते  आगे बढाता है तो ...पी लेता हूँ
" ये देश बीमार है ... मर रहा है....  डाइगनोस  सब  कर लेते है ...कारणों को भी  पहचान  लेते है पर  कमाल है इसे रोकने के लिए कोई कुछ करता दिखाई नहीं देता  .....उसके पास कहने को बहुत कुछ है ,वो बहुत से चीजों को दुरस्त करना चाहता है !

तरकीबन सात महीने  बाद
 उसके भाई फोन पर है ..मुझे लगा उसकी शादी की बाबत  या भारत  लौट कर आने के बारे में मुझसे कहेगे.......पर उनकी  नाराजगी दूसरी है ........ तुम्हारा  दोस्त पगला गया है ...करोडो की जमीन ट्रस्ट को दे रहा है ....स्कूल चलायेगे ... ज़माना अब वैसा नहीं रहा है....इंडिया के हालात उसे पता नहीं है "
वे ओर भी  बहुत कुछ कहते है ......पर मुझे सुनाई  नहीं देता   !
पिता से  वसीयत में मिली जायदाद .को वो......
 .दुनिया का एक्सपोज़र अपने आप में  एक अलहदा किस्म की किताब है !  तमाम  वक़्त  गुजर जाते है ,ऐसे वक़्त भी जो लगता है गुजरेगे नहीं....

2011-05-25

वो क्या कहते थे तुम जिसे .....प्यार !

"अ" का प्यार-
मेर बाप अब भी मुझे उंगुली पकड़ के चलाना चाहता है ..वो समझता है मुझमे अक्ल नहीं है ....ये मेरी जिंदगी है यार
"....वो पूरे कमरे में   चहलकदमी कर रहा है ..वो जब भी परेशां होता है ..बहुत चलता है ..यहां वहां .बेवजह .सन्डे की सुबह सुबह उसकी एंट्री हुई है ..घडी में आठ बजे है..वार्ड का रायूंड भी है ...
मै मेज पर पड़ी आखिरी सिगरेट को देखता हूँ ..फिर.अलमारी पर टंगे उस ब्लेक बोर्ड को जिस पर रात में मैंने बड़ा बड़ा चोक से लिखा था ..."क्विट स्मोकिंग "
  .तेरा अच्छा है साला ब्रेक अप हो गया इन लफ़डो  से छूट गया ..मै उसे याद दिलाना चाहता हूँ के मेरा ब्रेक अप नहीं हुआ मुझे लड़की ने छोड़ा है ..पर मै सिर्फ सिगरेट सुलगाता हूँ
तू साला मेरी बात भी सुन रहा हूँ या सिर्फ सिगरेट पी रहा है
 
मै उसकी ओर देखने लगा हूँ....

"तुम कवि शायरों का पता नहीं साला कब क्या सोचते रहते हो'.. !  तुम लोगो के  क्या कहते है उसे ....' ज़मीर" को   बेवक्त आने की आदत है ...... !.उसके हाथ में जावेद की तरकश " है ..ये डाइलोग उसने उसके पन्ने  पलटते  हुए बोला है...फिर उसे पलंग पे उछाल दिया है ..पूयर जावेद!
उसका मोबाइल बज उठा है...वो बिना कुछ कहे बात करता बाहर निकल गया है..ठीक वैसे ही जैसे आया था .
पता नहीं मेरा  ज़मीर अब कितने  टके का होगा   !!!!
 "ब ""का प्यार ...
मुझे हाल्फ फ्राई खाने की तलब लगी है
.झोपड़ा केन्टीन पे बाइक खड़ी करता हूं .इस केन्टीन में सिर्फ शोहदे आते है ओर सिगरेट पीने वाले सारे शोहदे होते है! हॉस्टल ओर हॉस्पिटल के बीचो बीच एक टीन  का शेड है...जिसे झोपड़ा केन्टीन कहते है .....ऑर्डर देने की जरुरत नहीं है..उसे मालूम है  मुझे क्या चाहिए ... मै  गुजराती अखबार उठाकर पढने की कोशिश करता हूं .ऐसा नहीं है के गुजराती मुश्किल है पर मैंने कभी सीरयसली सीखने की कोशिश नहीं की ."ब " की मोटर साइकल आकर रुकी है..उसने चाय का ऑर्डर देकर सिगरेट सुलगाई है ..अपने म्यूजिक लाइटर से ...
"रायूंड   हो गया " मै उससे पूछता हूं
हूम..म...उसने लम्बा कश लेकर सिगरेट मेरी ओर बढाई है ...

"नहीं  अभी पी है " मै कहता हूं...
"**** कैसी है" मै उसकी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछता हूँ....जो आजकल बरोदा में है .उससे एक साल सीनियर
'ठीक है'
तू गया नहीं ..अमूमन सन्डे वो ट्रेन से बरोदा निकल जाता था ...
साला छुट्टी मिले तो फिर  इमरजेंसी ... एक्जाम टर्म  ..घर जाना चाहता  हूँ.. एक ब्रेक ..थक  गया हूँ
"क्या हुआ "..मै जान गया हूँ वो डिस्टर्ब है ..ये लाइने उसकी नहीं है . 
गुलाब कविताएं रोमांस ..उसी मुझमे वही चाहिए ..वो कम्फर्ट ज़ोन में है यार ..पर  मेरा स्ट्रगलिंग पीरियड है... ..वो अब भी मुझमे  चार साल पुराना  मै ढूंढती  है ....सब कुछ उस के सामने तो है . ऐसे में रोमांस ....एक लम्बा कश....
.केन्टीन वाला हाल्फ फ्राई रख के गया है .समझदार है सिर्फ चुपचाप सुनता है ..मुझे भूख बहुत लगी है ..मै कहना चाहता हूं  ये पाव बासी है पर  सामने वाले की सूरत देखकर पता नहीं क्यों नहीं कहता! ..वो क्यों नहीं समझती....चार  साल का रिश्ता है हमारा पर........उसकी आवाज धीमी हुई है.....कंधे झुक से  गये है .... जानते हो अन्दर से मै डरा हुआ हूँ...पिछले एक महीने से  उसकी बातो में एक ओर बन्दे की तारीफ होती है ...उसकी आवाज की टोन   बदल गयी है या मेरा भ्रम है के  जैसे भर्रा  गयी हो.....मै जानबूझ कर उसके सामने नहीं देखता ...."क्विट स्मोकिंग" को एक दिन ओर आगे बढाकर मै सिगरेट  उसके म्यूजिक लाइटर से जलाता हूँ...खाते खाते .
.मेरा" मेल एगो " इस डर को  उसके आगे............ वो रुक गया है .सिगरेट जल रही है पर वो कश नहीं लेता ......
पर
  प्यार का मतलब समझना भी तो होता है न यार "
 मै  सिगरेट का  बड़ा कश  लेता हूँ.....फिर दूसरा .......लाइटर को  उलट पुलट के देखता हूँ ...ये लाइटर उसकी गर्लेफ्रेंड सिंगापूर से लायी थी ....स्लीक !
 तू  सुन रहा है  ना या सिर्फ सिगरेट पी रहा है .मै उसकी ओर देखता हूं.... पर उसने कवि- शायर के मुताल्लिक कुछ नहीं कहा है !
ब्रेक में "क" की गर्लफ्रेंड
 ...हॉस्पिटल केन्टीन में मै चाय पीते वक़्त अंग्रेजी का अखबार पढने की सोचता हूं ..सूरत में अंग्रेजी अखबार लेट आता है ..चाय के पहला  घूँट भरता हूं....तुम सिगरेट क्यों पीते हो यार ? ‘-“वाली है ....मेरे सामने बैठ गयी है ... मेरी शर्ट के जेब से झांकते पैकेट को देख कुड जाती है.. कहना चाहता हूं  .तुम्हारे बॉय फ्रेंड के वास्ते है उसे वार्ड में देने जाना  है .महँगी  सिगरेट है .साले ने मोबाइल पर फोन करके मंगाई है ..इनकमिंग काल ४ रुपये की है ...सिगरेट २२ की....पर कहता नहीं... जानते हुए भी की ये पैसे कभी वापस नहीं मिलेगे ..उन हालातो में जब आपकी जेब में केवल चालीस रुपये हो.....यूँ भी के ....लोग कहेगे कितने कमीने आदमी हो दोस्ती बड़ी के २६ रुपये !
केन्टीन बॉय उसके लिए चाय रखकर गया है .उसकी टी शर्ट पे "प्ले बॉय ' लिखा है ..! केन्टीन में "वो "आयी है अपने डिपार्टमेंट के साथ ...उससे  आंखे  मिलती है ...उन आंखो में अजीब सा कुछ है ..मै अफ़सोस मनाता हूं के मैंने शेव नहीं बनायीं ..वो हमारे बाए तरफ वाली सीट पर  बैठ  गयी है..उन आँखों में मै फिर देखता हूँ ...वे अब भी मुझे देख रही है 
उधर देखने का कोई फायदा नहीं ..वो फिक्स है "क" वाली ने जैसे मेरी मूवमेंट  को पकड़ लिया है
(फिक्स ! पर उसकी आँखे तो कुछ ओर बोलती है .)
 "हमारी शादी की डेट भी नक्की  हो गयी है ."क वाली  बोले जा रही है .नक्की गुजराती वर्ड है ...मै उन आँखों से फिर टकराता हूं...बड़ी बड़ी  आँखे ... .(ऐ खुदा  फिक्स वालो की आँखे इतनी स्टेयरनिंग तो नहीं होती.)
वैसे तुम क्या सजेस्ट करते हो..मैरून कलर का लहंगा ठीक रहेगा ...क वाली शादी में इन्वोल्व है....पर '.वे आँखे ' सीट से उठ गयी है ....उसने सीट से उठते उठते मुझे फिर देखा है ....मै भी उठ गया हूं .बाय कहकर ...सोच रहा हूं" क" को सिगरेट का पैकेट देते वक़्त कहूँगा "अब भी वक़्त है सोच ले '...पर बिना कहे ही सिगरेट का पैकेट दे आया हूं ..जेब में अब केवल १८ रुपये है .
"स" का प्यार जैसा कुछ  -
पूरा कोलेज मानता था  के वो पिछले दो सालो से कोलेज की सबसे सेक्सी लड़की  के साथ है ! मै  भी ! पर मेरी उसकी दोस्ती उससे कही पहले  थी . वो बहुत खूबसूरत तो नहीं था पर उसे  भीड़ में  भी इग्नोर नहीं किया जा  सकता था . ...झूठ बोलने का भी एक सलीका होता है ...कोंफिड़ेंस..."स " उसमे माहिर है ..पर वो ये आर्ट सिर्फ लडकियों ओर टीचरों के आगे दिखता है दोस्तों के आगे नहीं...... पीकर तो बिलकुल नहीं! ...वो रूम में शिवास लेकर आया है ..सूरत में ..शिवास मिलना एक लक्ज़री है ..ट्रेन में सूटकेस में कई कपड़ो के  नीचे दबा कर लाया है ..कहता है पापा ने गिफ्ट की है ..मुझे अपने याद आते है .सिगरेट का पता चलेगा तो बन्दूक निकाल लेगे ...

उसका तीसरा है ..ओर मेरा दूसरा ..मै  अपने ग्लास में आइस डालता हूं....मेरी औकात  दो तक की है ओर मुझे मालूम है ..कमरे में छोटा  फ्रिज भी एक लोकालाईट ने रखा है इसी वास्ते ...
"रिलेशन शिप में कभी कभी आप उबने लगते हो '..अचानक उसकी   बातो  का दायरा  बदलने  लगा है ..अपना स्पेस ढूँढने की छटपटाहट सी होती है ..तुझे कभी ऐसा नहीं लगा ..वो मुझसे पूछता है मै जवाब नहीं देता सिर्फ मुस्कराता हूँ..
"साली दुनिया सोचती है मै कोलेज की सबसे सेक्सी लड़की के साथ घूम रहा हूँ...पर कोई मुझसे पूछे ..'
मै उसकी ओर देखता हूँ ...
गर कोई मुझसे पूछे उसके साथ जिंदगी गुजार लेगा ..तो ईमानदारी से कहूँ डर लगता है यार
मुझे सिगरेट जलाने पड़ेगी ....ऐसे  फिलोस्फिकल माहोल में वो बड़ा सहारा देती है !
मुझसे उसपे यकीन नहीं है यार !
 "उसने तुझसे शादी के लिए कहा .क्या" मै पूछता हूं .
नहीं 
गर पूछेगी तो ....उसका डर है !
गर न पूछे तो
?
वो भी हर्ट  करेगा ..
..ब्लेक बोर्ड हवा से हिला है ..सोचता हूं उसके जाने के बाद  क्विट स्मोकिंग मिटा दूंगा ..पिछले तीन हफ्ते में चौथी बार मिटाया है .केसेट ख़त्म हो गयी है ...मै उठकर पलटता हूं उसका पैग ख़त्म हो गया है .वो आगे कुछ नहीं बताना चाहता .न मै उससे पूछना .

लिखा था जिस किताब में इश्क तो हराम है ...

सुबह मोबाइल के अलार्म ने आँख खोली है ..फोन उठाकर बंद करता हूं..उनीदी आँखों से  एक मेसेज दिखता है ... ....मेरी एक्स  का मेसेज है ..."
  मिलना चाहती हूं..मिलोगे"
मै फिर से तकिये में मुंह छिपाकर सो जाता हूं .


 ये तसल्ली है की इसे वो नहीं पढेगी.....जो कभी पढ़कर  "किसी" से कहा करती थी "तुम्हारे दोस्त की कहानियो में इतनी सिगरेटे क्यों आती है !

2009-02-08

यू क्नो अवर ब्लडी समाज .....इमोशनल अत्याचार ओर जानेमन .....


भीड़ भाड़ भर उस मोहल्ले में जहाँ चारो ओर पंजाबी ही पंजाबी थे ओर उनकी ढेर सारी लड़किया .. इश्क से हमारी मुलाकात वही हुई थी ,उस पंजाबी मोहल्ले में रहने के दो बड़े फायदे हुए हमारी माँ को पंजाबी स्टाइल का राजमा बनाना आ गया ओर वही उन्होंने पंजाबी सांभर बनाना सीखा ...आलू के पराँठे में अचार का मसाला भर कर हम कभी कभी आज के पिज्जा ओर मेक्दोनल के बर्गर से उन दिनों मुकाबला करते थे ....
खैर इश्क के मौसम में इश्क पर आते है , ...साइकिल पे चलते इश्क से पहला टकराव हुआ ...तब हम कुल जमा ७ -८ साल के होगे ....नीचे वाले घर में ४ लड़किया थी बड़ी बड़ी..उनमे से एक थी शम्मी दीदी ।सबसे सुंदर....वो चश्मा लगाने के बाद ओर सुंदर लगती थी.....सफ़ेद रंग का उनका वो फ्रेम मुझे आज भी याद है..... कुल जमा ४ घर थे ..ओर बिल्डिंग की लड़कियों को जब भी बाहर निकलना होता .हम जैसे छोटो को पकड़ा जाता ....कई बार बड़ी कोफ्त होती ....आप कंचा ताड़ रहे होते .. या किसी घर आए मेहमान के लिए प्लेट में रखे ग्लूकोज़ के बिस्किट के आगे मुस्तैद रहते .. ओर आपको अचानक फरमान सुनाया जाता की समेट लो ....हमें समझ नही आता की शम्मी दीदी जाती है तो हमें क्यों अपने साथ ले जाती है...पर जब किसी दूकान पे कंचे वाली बोतल का नमकीन पानी गटकते तो शम्मी दीदी अच्छी लगने लगती......
उन छोटी -छोटी गलियों के मुहाने पर ढेरो ऐसे प्रेमी होते जिनका नाम इतिहास में दर्ज नही है ... .... एक साहब चौडी सी बेल बोटम पहने अक्सर गली के कोने पे साइकिल लेकर खड़े होते ..पास से गुजरते तो अक्सर कुछ न कुछ गाना सुनाते ...शम्मी दीदी दूर से उन्हें देखती ओर नीची नजरे करके तेजी से हमें घसीटते हुए ले जाती ....हम अचानक हुए इस गति परिवर्तन से अक्सर नाराज होते ओर अक्सर उन साइकिल वाले साहब को देर तक पीछे मुड कर देखते ...वे हमें आँख मारते....एक रोज हमने भी पलटकर मार दी...कई दिनों ये सिलसिला चला ....
उन दिनों हमारा प्रिय शगल कंचे था ..ओर जीत जीत के हम बिल्डिंग में एक खास सीक्रेट जगह उनको छिपा कर रखते ...दुनिया के दूसरे पिताओ की तरह हमारे पिता को भी कंचो से नफरत थी .... एक दिन हम जब अकेले अपने कंचे संभाले गली में से गुजर रहे थे , तो उन्ही साहेब ने हमें आवाज देकर बुलाया ...उस दिन हम हार के ग़मगीन लौट रहे थे ....उन्होंने एक ख़त ...ओर बड़े बड़े कंचे ... हमें दिए .... ख़त को हिदायतों के साथ थमाया गया छोटी सी जेब में कंचे बजाते हम घर की ओर चले .....तभी पिता श्री के लेम्ब्रेटा स्कूटर की आवाज सुनाई...पिता श्री के आने से पहले ही हमने उन्हें सीक्रेट जगह छिपाना था .. .कंचे बड़े भारी थे .... ...इश्क की गहराई तब हम समझते नही थे .......सो बिल्डिंग में घुसते ही ख़त हमने सामने खड़े शम्मी दीदी के पिता जी चमन अंकल को दे दिया ......
थोडी देर बाद जब हमारी ठुकाई हुई ओर सीक्रेट जगह का राज भी हमारे छोटे भाई ने पिता श्री के आगे खोल दिया...ओर हमारी अमानत ...हमारा खजाना .. सारे कंचे फेंके गए .... उस दिन हमें अहसास हुआ की ये ख़त भी खतरनाक चीज है....उस दिन के बाद से ना तो गली में बेल बोटम दिखी ओर कई दिनों तक हमने कंचे वाली बोतल भी नसीब नही हुई
कई दिनों बाद हमारा प्रमोशन हुआ ओर हमें बड़ी नीता दीदी के साथ ट्रांसफर कर दिया गया ओर हम रंगीन बर्फ के गोले खाने लगे ....नीता दीदी ऐसे एक साईकिल वाले के पास पहुंचकर ओर धीमी हो जाती ...वो फुसफुसा कर बोलता 'जानेमन " ...सुनकर वे आँख तिरछी कर देखती फ़िर मुंह दबाकर हंसती.....हम समझ नही पाते ..एक रोज हमने अपनी टीचर से इसका मतलब पूछा ... उन्होंने डांटकर डस्ट - बिन पर मुंह पर टेप लगाकर बिठा दिया ......हमने दिमाग की डायरी में दूसरा खतरनाक वर्ड नोट कर लिया
कुछ ही महीनो में नीता दीदी की शादी तय हो गयी .ओर उन्होंने सगाई होने की खुशी में हम सबने ऋषि कपूर की' कर्ज -मूवी" देखी ....एक संभावित प्रेम कहानी के क्रूर कत्ल के पाप का बोझ हम बरसो से अपने सीने में लिए घूम रहे है....
देव -डी रिलीज हो गयी है .... अभय देओल मुझे पसंद है ओर अनुराग कश्यप भी... ..अभय की . पहली पिक्चर 'सोचा ना था "खासी दिलचस्प थी .. उसी का एक डाइलोग था "यू क्नो अवर ब्लडी समाज " ....याद आ रहा है.......सामने .रिक्शा में लड़की चल रही है....ओर मोटरसाइकिल पे लड़का... उसे कार्ड देने की कोशिश कर रहा है ....इश्क का "एपिडेमिक" इस महीने खासा फैलता है .....संस्क्रति के लम्बरदार ओर उनके लठैत कितनी कोशिश कर ले ये "इमोशनल अत्याचार" रुकेगा नही.... ...कम्बखत . इश्क के सेल मगर मरते नही ... ..


आज की त्रिवेणी ...

कागज की पर्चियों को अब बेगारी भी नही मिलती
देर रात तक "एस.एम् एस " ही गुलाब तक ढोता है .......

ये इश्क भी इन दिनों कितना पेचीदा है

ओर अजित वडनेकर जी से मुआफी मांगते हुए जिन्हें ६- ७ महीने पहले "बकलम- ख़ुद' में लिखने के वादे को पूरा नही कर पाया ..एक तो कोई गौरवशाली अतीत है नही ...वर्तमान भी रफू करके जैसे तैसे काम चला रहे है... ओर जो फिल्टर करके थोड़ा बहुत निकला है वो पहले ही बाँट दिया....१४ फरवरी को अपनी सगी बीवी को साथ में घूमने -पिक्चर देखने में डर लगने लगा है ....वैसे १४ फरवरी को हमारी टेंशन दूसरे कारणों से होती है... अपनी एनिवर्सरी भी १४ को पड़ती है...


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