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2012-01-06

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वो डे स्कोलर  थी  घर से कोलेज .......कोलेज  से घर ....उस उम्र की  ज्यादातर लडकियों की तरह .जो अपनी  माँ को दिन भर की   सारी बात बताती.है ...उन  सहेलियो  के साथ उसका ज्यादा वक़्त बिताती   जो स्कूल टाइम से उसके साथ थी ...टोपर खानदान की टोपर बिटिया ... कुल जोड़ निकाले तो  एक आदर्श  लड़की  ......ओर  वो हॉस्टल वाला था ...उसका अपना बिगडैल  गैंग ...पढाई में साधारण ....दुनिया की ज्यादातर  बुरी आदते उसमे थी ... .वो हमेशा अगली बैंच पर बैठती ओर वो पिछली दो बैंचो के दरमियाँ रहता....... वो हमेशा  क्लास टॉप करती  वो बमुश्किल पास होता वो अपने में सिमटी ओर वो  दुनिया भर के लिए खुला ...... अक्सर हॉस्पिटल  के बाहर वाले कोने में सिगरेट पीते कभी कभी दिख जाता या अपनी "गर्ल फ्रेंड" के साथ किसी पिक्चर हौल में .....उसकी  गर्लफ्रेंड जूनियर  बैच में थी  ...जो ज्यादा वक़्त जींस में रहती ...कोलेज के  सारे लड़के जिस पर  लट्टू रहते ...उसकी क्लास के भी ...कुल मिलाकर उन दोनों ने  आपस में  पूरे तीन सालो में शायद छह दफे बात की हो ..गोया वे न बेहद अच्छे दोस्त थे न दुश्मन .ओर हाँ उसे कभी प्यार नहीं हुआ था ओर वो आठवी क्लास में ही   अपने टीचर के प्यार की  पहली कम्पलसरी शर्त पूरी कर चूका  था .
नकी पहली मुलाकात ........जिसे मुलाकात कहा जा सकता है कोलेज के फेस्टिवल दिनों में हुई थी ..उस दिन वो जब घर से कोलेज के लिए निकली थी तो रेडियो पर "ओ हँसनी" बज रहा था  ......उसकी "गर्लफ्रेंड "घर गयी हुई थी ....  ...वो शायद .कही से भागा आया था हांफ रहा था .....तभी उसने उससे पूछा था
तुम मेरी पार्टनर बनोगी ?
गेम था  मेल पार्टनर की शेव बनाकर दौड़कर दूसरे किनारे जाकर एक मेडिकल  पज़ल सोल्व करनी है जो पहले करेगा वो जीत जाएगा .
"मैंने कभी शेव नहीं बनायी"
उसमे करना क्या है ...लेदर बना कर शेव करना है फटाफट .....कम ऑन !!
वो उसके साथ आयी है .
वो शेव करते वक़्त उसका चेहरा छील देती है ...पर पज़ल सोल्व पांच सेकण्ड में कर देती है
वे दोनों जीत गये है....उसे .उसके चेहरे पर खून देखकर अफ़सोस है  वो रुमाल से  पोछ रहा है.पर जीत से खुश है.
 विनिंग गिफ्ट   है ...  शहर के  फेमस चाइनाइज़ रेसटरोनेंट में लंच के  दो कूपन अगले एक हफ्ते तक वेलिड है .
"सन्डे चलोगी .
"मम्मी से पूछना पड़ेगा सन्डे के लिए"
उसके दोस्त उसे आवाज दे रहे है,
"ये कूपन रखो ..अगर मम्मी हाँ बोले तो सन्डे मेरे साथ चलना नहीं तो अपनी किसी फेवरेट सहेली के साथ हो आना ...शनिवार को मेरा मैच है इंजीयरिंग कोलेज से ..
उसने सोच लिया था वो उसके साथ नहीं जायेगी ...कल ही उसे कूपन थमा देंगी .
अगले तीन दिन तक वो क्लास में नहीं आता .....अजीब अहमक है  उसे  गुस्सा आता है ....उसकी गर्लफ्रेंड दिखती है ..उससे पूछू क्या ? नहीं खामखाँ पता नहीं क्या सोचेगी ? पर ये है कहाँ ?
शनिवार सुबह वो अपना काइनेटिक कोलेज में पार्क कर रही है ....कोई  मोटरसाइकिल आकर रूकती है
क्या कहा मम्मी ने ? वही है
वो सर हिलाती है
गुड ....कैंटीन के सामने ठीक एक बजे .......फुर्र से मोटरसाइकिल से गायब .
अजीब आदमी है ! पता नहीं वो इसके साथ क्यों जा रही है .. अपनी गर्लफ्रेंड को क्यों नहीं ले जाता ! वो अपनी "बेस्ट फ्रेंड "की शरण लेती है . डिफेंसिव मत रहना ...."अटैक इस बेस्ट डिफेन्स " वो तुम्हारी आँखों की तारीफ़ करेगा ,तुम्हारे कपड़ो की ....तुम्हारी बात बात में तारीफ़ करेगा भाव मत देना .
सन्डे दोपहर एक बजे कोलेज कैंटीन के सामने
तुम्हारी गर्ल फ्रेंड शहर में नहीं है क्या
गर्लफ्रेंड ?
वो तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं है ?
साथ घूमने से कोई गर्लफ्रेंड हो जाता है
वो उसे घूरती है ...आधा दिन तुम लोग साथ गुजारते हो .
हम्म .वो अपनी बाईक में झुककर नीचे कुछ चेक करता है
"साथ रहने से प्यार होने की प्रोबेबलिटी ज्यादा होती   है   ".....वो फिर कहती है
वो मुस्कराता है ."लडकियों में "
हाँ लडकियों में ...
जानती हो हम जिसके साथ वक़्त गुजारते है दिल के भीतरे हिस्से से उसके बारे में सब जानते है ."..सब !!
वैसे हम दोनों के बीच बहुत अच्छी अंडर स्टेंडिंग है वो किसी ओर को पसंद करती है ओर हम दोनों के बीच प्यार नहीं होने वाला
वो अब भी बाईक में नीचे झुक कर कुछ कर रहा है
तुम्हारे बारे में  ज्यादातर लोगो की राय अच्छी नहीं है
उसे लगा वो बाईक छोड़कर गुस्से में खड़ा होकर कुछ कहेगा .पर वो नीचे झुका हुआ कहता है
"ओपिनियन पोल" हाईवे के ट्रक ड्राइवर की तरह होते है ..उन पर एतबार नहीं करना चाहिए ...ओर  ये अच्छी  बुरी  चीज़े  बड़ी कमाल की होती है ... शायद पंद्रह साल बाद अच्छा" बुरा" हो जाए ओर बुरा "अच्छा "
फिर नजरे उठकर उसकी आँखों में देखता है ....कभी ड्राइव किया है हाई वे पर
फिर साथ क्यों घूमते हो
हम दोनों एक दूसरे की कम्पनी रेलिश करते है ....दैट्स ईट .
उसने रास्ते में कही ब्रेक नहीं मारे ...बाइक भी तेज नहीं चलायी...वो पिछला हिस्सा पकड़ कर  सेफ डिस्टेंस पर  बैठी रही .पर उसके ड्यू की खुशबु अच्छी है
उसकी बाईक   चाइनीज़ रेस्ट्रोरेन्ट  के बाहर आकर रुकी है
....तुम नॉन वेज खाती हो ?
आई  लव नॉन वेज .मम्मी के हाथ का खायोगे तो उंगलिया चाटते रह जाओगे
वो उसकी ओर देखता है " मैंने अभी अभी रेलिश करना  सीखा है ...एक सीनियर हाँ ओर ना के बीच था तो अपना दुःख बांटने के लिए यहाँ ले आता था.....मै सिर्फ सूप पीता ओर उसकी बात सुनता धीरे धीरे जब  टेस्ट डेवलप हुआ तो उसकी गर्लफ्रेंड ने हाँ बोल दी ओर .....आई ओ दिस टेस्ट टू देयर लव ...
"रेलिश "!! तुम चीजों को रेलिश बहुत करते हो
वो नोट  करती है ..... उसकी एक दिन की बड़ी दाढ़ी  है ग्रीन ग्रीन सी...... शेव बनाकर भी नहीं आया बेवकूफ ! वो होती तो ........
.रेस्तरा में "ओ हंसनी "का इंस्ट्रूमेंटल बज रहा है
मुझे ये गाना बहुत पसंद है वो कहती है
मुझे भी
वो बतलाना  चाहता है   वो अपनी  सो काल्ड  गर्लफ्रेंड के साथ दो बार आया है पर जाने क्यों रुक गया है .इस लड़की के अन्दर  एक अजीब सा इनोसेंस उसे पसंद है ...घर लौटते वक़्त वो याद करती है उसने उसकी तारीफ़ बिलकुल नहीं की वो अपने मैच , क्रिकेट ओर इन्जियार्निंग ओर मेडिकल कोलेज के फर्क की बात करता रहा.....ओर जगजीत सिंह के बारे में ......उसे गजले समझ नहीं आती .

ओ हंसनी मेरी हंसनी
उसके बाद ....उसके काइनेटिक के पास से कोई  तेजी से गुजरता  ओर जोर से   "हैलो"  कहकर डरा देता,
एक सन्डे वो सुबह सुबह  किसी गुरूद्वारे से निकालता  टकरा गया .....यहाँ  ?
 गुरूद्वारे का प्रसाद बहुत अच्छा होता है ...उसने आँख मारी थी .....एक रोज शोर मचाने पर  उसे   क्लास से बाहर निकला गया ...बाहर कैंटीन के सामने वाली दीवार पर उसके पास गुजरते हुए उसने उसे कहा था "क्यों करते हो ऐसा "? बड़े अजीब ढंग से देखता रहा था वो बिना बोले उसे ...देर तक उसकी उन  आंखो ने पीछा नहीं छोड़ा था लड़की का .......दिलवाले  दुलहिनिया ले जायेगे  के टिकट लायी थी  उसकी बेस्ट फ्रेंड ...कितना खुश थी वे तीन चार सहेलिय ....पर पिक्चर हौल में उसे उसकी गर्लफ्रेंड के साथ देखकर जाने क्यों फिल्म में मन नहीं लगा था उसका .
तय कर लिया था उसने आगे से कभी बात नहीं करेगी उससे .
फिर उस रोज  पीठ पर कोई बैग  लादे सड़क पर बाईक  घसीटता मिला था ...क्या हुआ ?
कुछ गड़बड़ है मुझे आगे तक ड्रॉप कर डौगी... मकेनिक तक
वही ड्यू की खुशबु .
उसका बैग उसके पास रह गया था .किसी का बैग खोलना गलत बात है पर  रात को खोल ही लिया उसने .......
.दो  नयी  कैसट ..किशोर कुमार ओर जगजीत  , एक रजिस्टर ...विवियन रिचर्ड्स की बायोग्राफी ओर एक सिगरेट लाइटर.....उस रात वो देर तक  अपने बिस्तर पर वाल्क्मैन लगाकर  सुनती रही......सोते वक़्त आखिरी गाना  उसने दो बार सुना ......." ओ हंसनी .मेरी हंसनी "

AIIMS NEW DELHI
...दो दिन से बुखार था पर उसने पेरासिटामोल खा खा कर उसे चढ़ने नहीं दिया है ...मलेरिया की गोली भी खा ली है ..उसे यहाँ आना था ....पहली बार घर से इतनी  दूर निकली  है .बेस्ट फ्रेंड साथ है शायद इसलिए मम्मी ने भेज दिया है
 देश भर के मेडिकल कोलेज  कल्चरल फेस्टिवल के लिए जुटते है ....उसकी गर्लफ्रेंड भी है पर उसकी  कोई रिलेटिव  है इसलिए रात को ही आती है...उस रोज सब कुतुबमीनार देखने निकले थे..... उसकी तबियत खराब हुई है ..वो उसे    छोड़ ने  आया है ऑटो से उतारते वक़्त वो चक्कर सा महसूस करती है इसलिए उसकी बांह पकड़ लेती है ....कोलेज में  आने के बाद भी वो उसे  गर्ल्स हॉस्टल नहीं ले जाता ग्रायूँड के ठीक सामने पड़ी पत्थर  की बेंचो पर दोनों बैठते है .बिना बात किये देर तलक ..वो  अपनी जेब में  हाथ डालकर अपनी हथेली फैलाता है .
"खाओगी "इन्हें हमारे यहाँ बूंदी कहते है
बूंदी ...वो पीले रंग के उन दानो को देखती है
जानती हो मै बचपन में एक वक़्त में हलवाई बनना चाहता था .....फिर पाइलट  ओर कभी टीचर .......बचपन के  हमारे मकान तक कुछ  आवाजे    .गुरूद्वारे से   आती थी ..कितने घरो को पार करके .गली से मुडके उसकी खिड़की तक ..."गुरुबानी " है  दार  जी  ने  बताया  था  दार जी सब उन्हें  दार जी कहते थे .उनका सब कुछ सफ़ेद था दाढ़ी ,भौंहे , मूंछे सर की पगड़ी .उसके घर से  चौथे मकान पर रहते थे ..
."प्रार्थना रब से बातचीत का जरिया है ".वे कहते
"पर रब से रोज एक ही बातचीत क्यों होती है "  मै  उनसे पूछता था  तो वो जोर जोर से हँसते थे  दार जी बहुत अच्छे  थे हर मंगलवार  मुट्ठी खोलते तो  हाथ में बूंदी के बड़े बड़े दाने निकलते..
वो महसूस करती है जैसे वो एक छोटा बच्चा है ....अपनी  आँखों  में चमक लेकर कुछ कुछ  बताता है  .....वो उसके पास ओर खिसक जाती है
"पहली  बार  दार  जी  के  साथ  मैंने  गली  का  दूसरा  कोना  पार  किया  था  गुरूद्वारे  के  वास्ते   ...., हर इतवार  जानी पहचानी गंधे  वहां होती ....गंध   का भी स्वाद होता है शायद ......आलू की गंध  ,हलवे की गंध ,रोटी  की गंध .हर इतवार वहां मेला सा लगता .बड़ी बड़ी भट्टिया बड़ी बड़ी कढाईया . चने हलवे से मिलकर कितना अच्छा स्वाद देती है .माँ ऐसे कभी नहीं बना पाती .एक रोज पतंग लूटते लूटते मै   गाड़ी के टायर के बीच आ गया  ....पैर की हड्डी गयी ..दार जी सीडिया नहीं चढ़ सकते थे...नीचे खिड़की से आवाजे देते ...एक रोज मेरे सोते सोते  अपने रब के पास चले गए"
वो उसके   नजदीक हो गयी  है इतने की  उसके बदन की खुशबु महसूस कर सकती है .एक अजीब सी गंध ...भली सी ..कभी कभी आप बरसो किसी शख्स के साथ एक तय समय गुजार कर उसे जान नहीं पाते ...हर शख्स के कितने हिस्से है उसका  कौन सा हिस्सा कब खुलता है...वो उसकी बांह पकड़ कर उसके काँधे पे सर रखकर इस धूप में बैठना चाहती है ....बिना लोगो की परवाह किये.....दिल्ली की उस रोज की ये  धूप उसके भीतर तक उतरती है .
पंद्रह दिन बाद का कोई एक बुधवार
वो कैंटीन में उसके पास आयी है
"कैसी हो" वो पूछता है .उसकी ग्रीन दाढ़ी ओर ग्रीन लगने लगी है
वो उसे  घूर कर देखती है .....वो सैंडविच खाने में बिजी है" चाय पियोगी " वो पूछता है
उसे  गुस्सा आता है .उसकी सैंडविच की प्लेट अपनी ओर खींचती है
. .".क्या हुआ ?"
तुम्हे वाकई कोई फर्क नहीं पड़ता ? वो गुस्से में है
किस बात का ?
मै पंद्रह दिनों से तुम्हे इग्नोर कर रही हूँ ...बात नहीं कर रही हूँ ..पूछोगे नहीं क्यों ?
वो उसकी ओर देखता है ...पर पूछता नहीं...... वो फिर भी बतलाती है
पंद्रह दिन पहले मै  गर्ल्स हॉस्टल में गयी थी वहां लडकियों ने कहा .वो रुक गयी है ....सर नीचे झुकाए.....".के तुम "..........तुम कई लडकियों ............
"के साथ सो चूका हूँ " वो चाय के घूँट पीता पीता उसकी बात पूरी करता है ..
वो हामी में सर हिलाती है
"बिना किसी की मर्जी के उसके साथ सोया जा सकता है ? वो चाय का आखिरी घूँट हुए पूछता है 
उसकी चाय आ गयी है .वो चाय में बेवजह चम्मच घुमा रही है .
तुम जिसे मेरी "गर्लफ्रेंड "कहती हो उसमे ओर तुममे यही अंतर है वो कभी मुझसे ये सवाल नहीं पूछती के मै तुमसे क्या बात करता हूँ  ....क्यों करता हूँ
" गर्लफ्रेंड "का बेवाज़िब जिक्र जाने क्यों उसमे गुस्सा भरता है .....तुम उसे हर बार  बीच में क्यों लाते हो ? वो घर से दूर हॉस्टल में है ....मै यहाँ लोकालाईट हूँ....मेरे अपने संस्कार है ....मेरी अपनी घर की कुछ वैल्यू .... मेरी अपनी इनहिबिशन ....मेरा अपना  नजरिया  है अच्छा ओर बुरा ....उसकी आवाज तेज हो गयी है ....कैंटीन में कुछ सर उनकी ओर मुड गये है
एक ख़ामोशी फिर उनके दरमियाँ पसर जाती है
इमोशन हमें "रिड्यूस" करते है....वो कहता है ...फिर उठ गया है ..
.वो  परेशां हो गयी है .वो यहाँ लड़ने नहीं आई थी
वो बाईक स्टार्ट कर रहा है ...वो कैंटीन से बाहर  निकल उसके पीछे पीछे आयी है .उसे "सोरी "कहना चाहती है
पर वो गुस्से में है
"हो सकता है वो  बुरी हो ,पर उसमे एक अच्छी बात है उसने कभी तुम्हे" बुरा "नहीं कहा ......उसके  पास अच्छे बुरे की कोई लिस्ट नहीं है जिसके साइड बार में राईट  का ऑप्शन हो .........ओर हाँ मै "वर्जिन" नहीं हूँ !
वो बाईक स्टार्ट करके चला गया है ओर वो रो पड़ी है
ये प्यार भीतर से बीहड़ ओर खुरदुरा जंगल है जहाँ कई जगह अकेलापन है !
गर याद रहे
इक्जाम ख़त्म हुए है . इंटर्नशिप के पहले छह  महीने इधर उधर की पोस्टिंग में निकल गए है ....अगले तीन महीने की
पोस्टिंग  उसने   दिल्ली ली है कहता है पापा का ओपरेशन होना है .इसलिए उसे तीन महीने वही रहना पड़ेगा इधर वो अपने लिए आये सब रिश्ते वो मना करती है ...एक...दो...तीन !
एक रिश्ता बाहर का है ,माँ के मन में वही अटका है
कही  तुम उससे प्यार  तो करने नहीं लगी ?
नहीं ! वो अपनी माँ से कहती है
शायद ! वो अपनी  बुआ से कहती है
"हाँ" वो अपनी बेस्ट फ्रेंड से कहती है
"उसे मालूम है "?उसकी बेस्ट फ्रेंड पूछती है
शायद !
ओर वो तुझे प्यार करता है ?
शायद ?
"शब्बा खैर " उसकी बेस्ट फ्रेंड सांस लेती है
वो तुम्हारे लिए राईट चोयेस नहीं है ....उसकी बेस्ट फ्रेंड उसे कहती है ....उसकी बुआ भी ......बिना पूछे उसकी माँ भी .....उसका दिमाग भी !
बस उसका दिल अलग बाते कहता है
कुछ दो  महीने अट्ठाईस दिन  कितने अलग होते है
"वो मेरे ज़ज्बात के आधे हिस्से पर  एक वक़्त से  काबिज़  है  बिना मेरी मर्जी के ."वो ट्रेन में अपनी गर्लफ्रेंड से  उसके बारे में कहता है
तुम उससे कह क्यों नहीं देते
मै उसे डिज़र्व नहीं करता ...वो बहुत अच्छी है . मै उसे खराब नहीं करना चाहता
" ओर तुम बहुत बुरे " .पागल ! दिक्कत ये है के उसके दोस्तों की तरह तुमने भी उसे  अच्छा होने का टैग लगा दिया  है ..सब वक़्त को वही पॉज़ कर रहे है  .वो  उसे  उसी तरह से देखना चाहते है जिस तरह से  बरसो से देखते आये है ...सब भूल गए है  उसके पास भी इमोशन है...... नोर्मल इमोशन
वो अपनी दोस्त की बात सुनता है ....ट्रेन के दरवाजे पर खड़े सिगरेट पीते पीते सोचता है   कॉलेज पहुँचते ही उसे कह देगा !!
दो दिन से उसे ढूंढता है.....
वो लॉकर रूम के बाहर दिखती है .अपनी बेस्ट फ्रेंड के साथ
  हाय ....कहाँ हो यार तुम
वो जवाब नहीं देती .उसकी बेस्ट फ्रेंड जवाब देती  है
एक गुड न्यूज़ है ...... इसकी शादी तय हो गयी है ....अगले  तीन महीने  में अमेरिका जा रही है अभी सारे सरटीफिकेट इकठ्ठा करने है ओर तैयारी भी
.वो  सर झुकाए  खड़ी है
 वो कोंग्रेट्स  नहीं कहता
उसकी बेस्ट फ्रेंड आगे बढ़ गयी है ... आवाज दे रही है ....वो उसे देखना भी चाहती है पर अपनी आँखे दिखाना नहीं चाहती .आहिस्ता आहिस्ता चल देती है ......डरती है..  वो  अभी पीछे से आवाज देगा ....रोकेगा ...पर .वो कुछ कहता नहीं .पार्किंग में अपने काइनेटिक के पास आकर वो रोती है .

हते है उसके बाद उस लड़के ने  कभी प्यार नहीं किया ,वो कोलेज की  किसी लड़की के साथ नहीं सोया ,  कोई मैच नहीं खेला ... हॉस्टल  वाले  कहते थे  अगले तीन साल हर सुबह उसके रूम में सबसे   पहला  गाना बजता "ओ हंसनी "!

विलुप्त नहीं होता प्यार ...न बंद होता किसी पैराग्राफ की आखिरी लाइनों में ......फुलस्टॉप लगाकर ,
बचा रह जाता है मेरे तुम्हारे भीतर थोडा थोडा .!!

(.ओर हाँ किसी भी कथा के पात्र काल्पनिक नहीं होते प्रेम कथाओ के तो बिलकुल नहीं)

2009-10-14

शह ओर मात !

आज   उसका  जन्मदिन  है  …इत्तेफाक   से  देहली    में ही  हूं...विश   करने   के लिए कॉल   करता   हूं तो  मालूम चलता है वो …. घर   में  है …एक्सीडेंट   हुआ   है …
सब  ठीक   तो    है …ना ….मै   बेवकूफी  भरा  सवाल   पूछता  हूं ….
हाँ   सब  ठीक   ही   होगा  …बिस्तर   में  जो  हूं ….वो  हंसती   है  ..एक  आध   फ्रेक्चर   है  बस  वो  .फोन पे कहती है  
….
उसके पास चेस बोर्ड का एक बड़ा कलेक्शन है ...अपने जन्म दिन पर वो सामने से  हम दोस्तों   से  मांगती थी.."मुझे एक यूनिक  चेस बोर्ड गिफ्ट करो..."उसके मेरे बीच एक अजीब सी अंडरस्टेंडिंग है ..साल में एक दो बार ही फोन पे बात करते है .वो भी ज्यादातर पेशेवर ...होली दीवाली पे एक दो एस एम एस इधर उधर हो जाते है . वो ऐसी ही है ..अपनी मर्जी से आपकी जिंदगी में दाखिल हो जायेगी ...अपनी मर्जी से गायब ....  जब  दाखिल   होगी    तो     पूरी    बेतकल्लुफी    से …..
मेरे  पिता   के  अलावा    वो  दूसरी   ऐसी  शख्स  है   जिसे   मै   अब  तक  चेस   में  हरा  नहीं  पाया ...विश्नाथन  .आनंद की तगडी  वाली फेन  है......फिलहाल .वो डब्लू  एच  ओ  में किसी बड़े ओहदे पर है .....
.बीच में एक बार ली मेरिडियन में टकरा गयी....डब्लू एच ओ के किसी प्रोजेक्ट के तहत आयी थी ...
".चल इकठे लंच करते है.."...मुझे सी एम इ  से उठा कर ले गयी....
 "लिखने   पढने   का शौक अभी बाकी है या  सिर्फ    पैसे कमा  रहे   हो  ….....खाना खाते खाते वो पूछती है...
खाते खाते मै  अचानक   रुक जाता हूं ....".आज तो करवा चौथ है न....."
तो ....तुम तो ऐसे रुक गए हो जैसे अमेरिका में दूसरी   कोई   इमारत   उडी   हो  .. .तुम   भी  तो   खा  रहे  हो !
नहीं.....मै ....!!
मेरे मियां ने  तो   कभी इस दिन शराब नहीं छोडी ..!
मै   हक्का  बक्का   उसका  चेहरा   देखता   हूं …..
चिंता   मत   करो …… …..मेरा डाइवोर्स हो गया है....!
आई  ऍम  सॉरी  …!
वो   मुस्कराती   है …"लेप  टॉप  लेकर  घूमेगे …. जेब  में नया  लेटेस्ट   मोबाइल …पर   मन  में वही  करवा  चौथ …"
   हंस  कर  सच   बाते  कहना उसकी फितरत है
.जानता था उसकी शादी शुदा जिंदगी में पिछले  कुछ   सालो से कुछ उथल - पुथल है पर कुछ चीजे बेहद निजी होती है उनमे यूं  ही एंट्री नहीं ली जाती ....ओर कुछ सवाल पूछना उनके जवाब सा ही मुश्किल होता है
उसने  मेरी आँखों के सवाल  को शायद पढ़ लिया है .....…इसलिए वो दो वक़्त को एक साथ जोड़कर लाती है......
"ज्यादा पढ़े लिखे लोगो के नाखून अद्रश्य होते है . साथ रहकर ही दिखते है …....कभी  कभी .औरत अपने भीतर रुक जाती है....मै भी  कुछ साल रुकी रही...."...पर  फिजिकल वोइलेंस…के साथ    शराब …उसे   डाइजेस्ट   करना     मुश्किल    था ….सो  ...एक रोज …  मैंने  भी   दो  जोरदार पंच ....  गिर   पड़ा   …... हगामा मच गया....
"इन  शोर्ट ….बाहर " … वो हंसती है ....
सब   कुछ   उसकी  हंसी   जैसा  आसान  नहीं  था  …उन खरोंचो  से बाहर  निकलना ....  दोबारा   पी  एच  डी  करना  ..पढने  के  लिए  बाहर  जाना !
"अब ! .....मै पूछता  हूं.....
.हर   खाने   की  अपनी  मुश्किलें   है …नाते  रिश्तेदार   ..कभी कभी तो ऐसा लगा  जैसे  कन्फेशन बोक्स में खड़ी  हूं.....वो जिसे हम समाज कहते है ना... इसका  बड़ा  तंग जुगराफिया  है  यार .....एक तलाक़ के बाद औरत "सेकंड हेंड "हो जाती है....
उसे चाइनीज पसंद है ...ओर बीच बीच में ब्लेक कोल्ड ड्रिंक के घूंट भरना ....
औरतो  को  यूटीलाइज करने  के  लिए  कंडीशंड करने  वाले  समाज  के  फोर्मेट  हर तबके हर क्लास के अलग है ..जब भी सामने वाले को पता लगता है अकेली हूं... .डाईवोरसी ..उसका बिहेवियर  बदल जाता है . जैसे साला कोई नोटिस बोर्ड टंगा  हो "अवलेबल "....तुम अस्सी प्रतिशत मर्द एक सा सोचते है ...आँख की स्क्रीन पे लिखा आ जाता है...”पकड़ लो.”... वो किसी ने कहा था ना....... …... जिस्म पे गोश्त चढ़ते ही आदमी की नीयत बदल जाती है........... ठीक लिखा था ..
पीछे   फिश  पोंड  में  तैरती    मछली   एक  पल  को  रुक  गयी  है  .जैसी  उसकी  बात  की  तसदीक   कर  रही  है …


घर !!
वो  बिस्तर पे है ...मुझे देख मुस्कराती है..चेस बोर्ड  उसके  किनारे रखता हूं......
थोबडे की सूरत ज्यादा   तो नहीं बिगडेगी   ना ....वो पूछ रही है .....
फिर एक्सीडेंट का खुलासा होता है ...
 ....रात को गाड़ी से  लौट रही थी तो पीछे कुछ शोहदे लग गये ....बदतमीजी   करने  लगे … सो  गुस्सा  आ गया  ... अपनी कार  उनकी मोटरसाइकिल  में मार दी..पर ..…
कुछ देर वहां बैठकर  मै निकलने के लिए उठा हूं....आंटी कहती है .
"समझा  उसको...….सरफिरी   है …."...
सरफिरी!  मै  बाहर निकल आया हूं.....


ऐसे  सरफिरे  हालात   की बिसात  पे  बरसो से  मात खा रहे है.!





त्रिवेणी-

फलांग जाता है कुछ किस्से...... कही देर तक रुकता है
शोहरत के मोडो पर  मगर अक्सर चौपाले  लगती है.......

एक कमज़ोर लम्हा मेरे माजी का अक्सर मुस्कराता है

2009-10-01

जिंदगी !तेरे कुछ दिनों को रिवाइंड करना है...



"एयर पोर्ट पे जो सबसे बोर सी शक्ल वाला आदमी नजर आये समझो वो मेरा ड्राइवर है...हिन्दुस्तान में ही  आदमी  बिना  कोमन सेंस  के ठाठ  से गुजारा  कर सकता है  ओर वो  ठेठ हिन्दुतानी   है .... ओर हां  गाडी की  खिड़की खोलकर सिगरेट पीना .. वरना मेरी  बीवी  मेरी ऐसी-तेसी फेर देगी.".गाडी बीवी की है .... .प्रशांत ने फोन पर कहा था..बॉम्बे की  उस दो दिन  की वर्कशॉप  की  मेरी राते पहले से शेड्यूल्ड  हो गयी थी...... "मूर्खों से एक खास दूरी बनाये रखने की विधा का नाम शिष्टाचार है ."..प्रशांत अक्सर ऐसे  दार्शनिक जुमले वाजिब समयों पर आपके फोनों में ठेला करता है... .गैर वाजिब समय मतलब....रात  के तीन बजे ..ढाई बजे ........ ओर्थोपेडिक वाले एमेर्जेंसियो में रात भर भटकते है मालूम   है ...पर वो आज इमरजेंसी में है ये   पूरे  देश भर में फैले उनके दोस्तों को पता लग जाता था ...

 दिन भर की वर्कशॉप के बाद  हम तीनो दोस्तों  ने मिलना था ....तीसरा राजीव था  .....उसे  सलेक्टिव  एग्रोफोबिया था ...यानी भीड़ से डर .....भीड़ भाड़ वाली जगह  वो स्कूटर या बाइक पर अनकम्फर्टेबल  हो जाता ..ऐसी जगह  अवोइड  करता...  एक ही जींस को कई दिनों तक पहनकर घूमता... ..पूछते  तो  कहता .लकी जींस है.... अपने एक सत्तर के मोडल पुराने स्कूटर पे घूमता .....उसको याद करते ही छवि मिश्रा याद आती है ...  .जूनियर .सीनियर  कई लोग उसके लिए कतार में थे ......ओर .छवि उसके पीछे पागल थी ... छवि के मामी पापा यू एस में थे ...इंडिया में वो अपने दादा दादी के साथ रहकर पढ़ रही थी... पर जाने क्या हुआ उस रोज जब हम लोकर रूम में क्रिकेट खेल रहे थे ...छवि उससे कुछ बात करने आयी थी......जिसके बाद  वो गुस्से में थी ....."कावर्ड्स" ...तुम्हारे दोस्त में गट्स नहीं है ...हाउ ही फेस  दिस वर्ल्ड  आउट साइड दिस केम्पस  ....मुझसे बोली थी...मुझे बड़ा अजीब लगा था ..हम दोस्त जानते थे उसे छवि पसंद है.फिर क्या हुआ ? अगले तीन महीने में वो यू एस चली गयी.......
.. कहते है जो आदमी बीस की उम्र में भला होता है वो तीस की उम्र में भी भला ही रहता है ओर चालीस की उम्र में भी .. राजीव शायद जन्म से भला था ...अपने ठेठ भलेपन के बावजूद    उसने  हमें  कई अजीब सी आदते सिखाई जिन्हें शरीफ लोग शरीफाना नहीं कहते .मसलन ..कोल्ड ड्रिंक में एक एक्स्ट्रा आइस क्यूब ओर नमक डालकर पीना ....अंडो की हाफ  फ्राई में कुछ इनोवेशन कर टोमेटो फ्राई बनाना ..हेंग ओवर के लिए दही खाना ... अब  सोचता हूं प्यार केवल कैम्पस  की  उस चाहरदीवारी  में ही सरवाइव कर सकता है ..  .…बाहर की  दुनिया की जद्दोजेहद  में  साले बड़े बड़े गम है .
प्रशांत ने मेरी सहूलियत के लिए गाडी रख छोडी थी ..चूंकि मेरी कांफ्रेंस होटल रेनिसेंस में थी .तो ये तय हुआ की दिन भर वे अपना कामकाज करेगे ओर मै कांफ्रेंस अटेंड करूंगा ...रात को सब इकठ्ठा होगे .
पर दोपहर  बाद वर्क शॉप   के  तीनो   टोपिक  में  कुछ नया नहीं था सोचा शायद राजीव यहां से नजदीक हो... अगला अच्छा टोपिक डेड घंटे बाद था .... ..  राजीव को फोन मिलाता हूं…"
.आधा  घंटे  का  रास्ता  है   अगर  ट्रेफिक    ठीक   रहा  तो …तू पहुँच जायेगा वो  कहता है ......… तकरीबन पैंतालिस  मिनट ....  बाद  उसे  किसी  हॉस्पिटल   के  नीचे  खडा  पाया "..दो  पेशंट  है ... राउंड   लेना   है ...दूसरा  दूसरे हॉस्पिटल में है  …तू  साथ   चलेगा मुश्किल से  ……पांच  मिनट   लगेगे …तब तक मै इसको देख आता हूँ मै वही ड्राइवर के साथ रुकता हूँ ..हॉस्पिटल किसी पुरानी इमारत  सरीखा सा है बाहर  से देखकर लगता नहीं की हॉस्पिटल  भी है ...बाहर  केवल एक बोर्ड लगा हुआ है ....इंग्लिश  के बाद  मराठी में ऊपर से  कुछ लिखा हुआ . .में ..शायद राज ठाकरे के डर से …पांच मिनट बाद वो नीचे उतर के आता है ..प्रशांत के ड्राइवर को वही छोड़ हमें  दूसरे हॉस्पिटल जाना है ...रास्ता सिर्फ कुछ फीट चौडा है एक तंग गली जैसा ...दोनों ओर बनी दुकाने .इतनी तंग की सामने से अगर कोई फॉर व्हीलर आ जाए तो रास्ता ब्लोक हो जायेगा .." वही साली गरीबी ....एप्लास्टिक अनीमिया ...मियां बीवी दोनों मजदूर .....खून तक चढाने के पैसे नहीं .....वो गाडी में बैठते ही  कहता है....वो मेडिकल कॉलेज में किसी से बात कर रहा है .उस पेशेंट को एडमिट करवाने के वास्ते ......मै हैरान हूँ के इन तंग गलियों में वो कैसे इतनी तसल्ली से गाडी चला रहा है .....
पर हम खाना नहीं खा पाये ...दूसरे पेशेंट   को देखते  वक़्त  उसकी एक ओर इमरजेंसी  कॉल आ गयी..इसलिए  मै  वापस अपनी कांफ्रेंस  वाले  होटल  आ गया .... ..
रात ९ बजे प्रशांत के घर.....
"..साला बड़े दिनों बाद अपने स्टाइल में पियेंगे ..जग्गू दा  के साथ ..यहाँ तो पिछले आठ सालो से बुढढो  के साथ पी पी कर बोर हो  रहा हूँ ....
राज नहीं  आया अब तक "वो पूछता है ....फोन मिला उसको .....
कोई पेशेंट सीरियस है उसका ...मै कहता हूं.....
वो फोन मिलाता है...कहता है आधे घंटे में पहुंचेगा ....तू फ्रेश हो ले .. तकरीबन आधे घंटे हम पाकिस्तान ओर न्यूजीलेंड का मैच देखते है.... करीब एक घंटे बाद वो घर में घुसा है.........  'साले कहाँ था अब तक .....तेरे चक्कर में भूखे बैठे है ....
...खाने का  क्या है ..बहुत भूख लगी है ....प्रशांत उसके लिए  एक गिलास में वाइन  भर रहा  है
"मेरा मत बनाना ....कॉल आ सकती है" ..राज मना करता है ...एक पेशेंट सीरियस है ...
राज  प्लेट में रखकर खाने लगा है..... प्रशांत के मोबाइल पर  नीरव का फोन है....वो  राजकोट में है ..बहुत बड़ा सेट अप  है ..अकेला मेनेज नहीं कर पा रहा हूँ... राजीव को बुला रहा हूं.....आता नहीं.साला नखरे दिखा रहा है ....उससे .कुछ देर इधर उधर की बाते होती है ......
जाता क्यों नहीं....... अच्छा ऑप्शन है तो ........फोन  रखने के बाद मै  राजीव से   कहता हूँ
वो सिर्फ मुस्कराता है ...
"क्यों साला एगो बीच   में आ रहा  है ... प्रशांत  उससे  कहता  है ... ...... तू  ओर नीरव तो  सबसे ज्यादा क्लोज़  थे ..इतना अच्छा पैकेज ओफर  कर रहा है ...
... वो चुप है...चुपचाप एक दो कौर मुंह में डालता है ....फिर कहता है
 याद है ...६०   -७०   के  आदर्शवादी  सिनेमा  का भाई  होता था  … बलराज  साहनी टाइप  ……भाई ऐसा  ही है .……पूरी  जिंदगी  हम में  खप  गया ...एक घूंट पानी ...
"उसकी तब नयी नयी शादी हुई थी….. तब ..पापा  को पेरालेसिस का अटेक हुआ था...उससे रिकवर नहीं नहीं कर पाये   प्राइवेट  जॉब.....लिमिटिड आमदनी…. एक  पूरा घर अचानक अपनी जिम्मेदारी लिए भाई के सामने आ गया ... स्लम एरिया का बी एम् एस डोक्टर कितना कमा लेगा .वो भी  ..जिसमे दया कूट कूट के भरी हो  .....   पर वो खीचता रहा दिनों को...हमें अपने आप को .भाभी को.... …… वो  स्कूटर  ..वो हँसता है ....  . सत्तर का मॉडल.... ....भाई  का था  .....  एक  बार  कॉलेज  आया था .बोला तू इतना पैदल चलता है .तेरे सब दोस्तों के पास बाइक है....अगले दिन  भिजवा दिया ... एक ठंडी सांस ......साली कोई जींस मेरे लिए लकी नहीं रही... एक्चुली मेरे पास तब   कुल तीन जींस थी ......फिर ...कुछ देर की खामोशी ...प्रशांत   घूरकर  वाइन  में  पिघलती   आइस को  देखता    है  ….एक  घूँट   में  सारी     पीकर  …..  उठकर बेवजह की चहलकदमी  करता है ...उसकी आदत बदली नहीं अभी ...कोलेज टाइम  में भी  बैचेनी   में  पूरे कमरे में घूम जाता था ..
. भाभी की आंखे  चुभती  थी  उन दिनों ..वो कुछ कहती नहीं थी पर उनकी आंखे जैसे तहरीर करती थी  अब भाई ..४५ की उम्र में पहला अटेक....हार्ट के पेशेंट बन गए है .... थक गये है बोझा ढो के हम सब का...इत्ते सालो से ....अब मेरा टर्न है... यार…."
हम तीनो   के बीच   खामोशी    फिर   पसर  गयी  है .. प्रशांत ने मेरे सिगरेट के पेकेट से सिगरेट जलायी है ... सिर्फ सिर्फ जग्गू दा अकेले गा रहे है...."अपनी आग को जिंदा रखना कितना मुश्किल है "
"तेरी  एक  बेटी  है  न तीन  साल  की …क्या  नाम  है  उसका "? ……मै माहोल को चेंज करने की कवायद में हूँ....
"ये ....वो मोबाइल में फोटो दिखाता है ...".छवि "!



रोज  उचककर  देखता था जो  इस जानिब
वक़्त को फलांगने की   बेजा कोशिश में .....
आज सुबह उसी लम्हे ने दम तोडा है


पुनश्च: कायदे में  तो इसे यूं लिखा जाना चाहिए था ..जिंदगी तेरे कुछ दिनों की रिवाइंड करना है ताकि मै उन्हें तरतीब से लगा सकूं.आपके तो मालूम  नहीं  पर वाकई मेरे पास कई ऐसे दिन पड़े है जिन्हें रिपेयर की जरुरत है !



2009-08-21

जाने क्या सोचकर वही गुजरा .....


दोपहर का सूरज भी अपनी दिहाड़ी करके जैसे सुस्ताने के मकाम पे है .ओर . हम नॉएडा के "ग्रेट इंडियन मॉल" की बसेमेंट पार्किंग मे दाखिल हुए है..., अन्दर उस पांच मंजिला इमारत में जुदा-जुदा ख्वाहिशे करीने से सजी है .....शोपर स्टॉप के लेडीज सेक्शन के किनारे पे एक काफी शॉप है ,वह रखी कुछ पेस्ट्रिया देखकर हमारे नन्हें मिया मचल गये है ,हमारी श्रीमती जी चूँकि अपनी शूपिंग मे व्यस्त है .... इसलिए मैं ओर आर्यन वहां कुर्सियों मे बैठ गये है ,उन्ही कुर्सियों के सीधे हाथ पे दीवार से लगे किनारे पे दो सोफे है ,काफी शॉप से थोड़ा बाहर निकले हुए मानो बाहर झाँक रहे हो ...,आर्यन ने अगले कुछ मिनटों में मुझसे आदतन मुश्किल सवाल पूछे .है .आदतन जिनका मैंने गोल मोल जवाब दिया.है .. पेस्ट्री आयी है पर उसकी सूरत उसे पसंद नहीं आयी है चुनाचे ... मैंने सैंडविच का ऑर्डर दिया है ...अपने लिए कोफी ....
.. फ़िर वो नजर आयी है .....परपल फ़्रोक मे ,नन्हें नन्हें पैरो मे आवाज करते जूते ,जिनकी आवाज जैसे पूरे शोपर स्टॉप मे गूँज रही है ..... पर कानो को बहुत भली सी लग रही है ......गोरी चिट्टी ..बिल्कुल परी सी .है ....उसके छोटे से कंधे पे एक पानी की बोत्तल ओर माथे पे बिल्कुल नन्ही सी बिंदी ..एक दम बीचों बीच ......वो आर्यन की तरफ़ बढ़ी ...."..मिष्टी "पीछे से आवाज आई ," लक्ष्मी मिष्टी को देखो "....आवाज का पीछा करता हूँ ....एक उम्रदराज महिला . एक युवती ओर एक लगभग ३0 -३५ की ...मोर्डन किस्म की एक महिला है... ,अंदाजा लगाता हूँ वही मिष्टी की माँ है... .उस किनारे पे रखे सोफे पे से एक १३ -१४ साल की दुबली पतली सांवले से कुछ गहरे रंग की एक लड़की उठी है ओर मिष्टी को उठाकर उसकी माँ के बराबर मे रखी खाली कुर्सी पर उसे बिठा दिया..है ...कुछ दो मिनट बीते .है .... मिष्टी की आँखे हमारी ओर घूमी है... .. ....फिर वही जूतों की आवाज आर्यन के नजदीक आकर रुकी है............"मिष्टी " ...माँ की आवाज ....लक्ष्मी खींच कर उसी कुर्सी पे टिका रही है. ..... , उनका ऑर्डर आ गया है .. उन्होंने खाना शुरू किया है .... ....साथ वाली युवती कुछ ओर ऑर्डर कर रही है ...मां मिष्टी को चम्मच से खिलाने की असफल कोशिश करती है ...मेरी कोफी ओर आर्यन का सेंडविच आ गया है ......सोफे पे कुछ दूर बैठी लक्ष्मी की निगाह कुछ सेकंड तक सामने शीशे पे रंग बिरंगी पेस्ट्री पर रुकी.है....फिर अपनी मालकिन पर..
मै कोफी का एक घूँट भरता हूँ ..दो घूँट . ....कोफी गरम है......तकरीबन दो तीन मिनट गुजरते है .. ... मिष्टी किसी खाली प्लेट मे चम्मच बजा रही है ....वे .तीनो खाते हुए अपनी बातचीत मे बिजी है .... वेटर मिष्टी का सैंडविच लेकर आया .है....एक नजर अपनी प्लेट को देख उसकी आँखे सोफे पर मुडी है.... ...".लक्ष्मी " उसने तोतले लफ्जों से पुकारा ,लक्ष्मी ने वही से उसे मुस्कान दी है.....कोफी का एक ओर घूँट ...."आराम से खायो ...."माँ ने बातचीत रोककर .अंग्रेजी मे हिदायत दी है....फिर व्यस्त हो गयी है....,मिष्टी सोफे की ओर देखती है.... फ़िर नीचे उतरती है... अपनी सैंडविच वाली भारी सी प्लेट लेकर सोफे की तरफ़ बढ़ी है..... .तकरीबन आधा रास्ता पार किया है ....."मिष्टी कम हियर"माँ ने पुकारा है ...मिष्टी सीधी चलती हुई सोफे पे पहुँची .है.....सोफा उसके कद से थोड़ा ऊँचा है ,पहले प्लेट रखी.. गयी है.......' मिष्टी कम हियर" .....'वापस वही आवाज ...मिष्टी ने अपने नन्हें पैर उचके है .. ओर लगभग कसरत सी करती हुई सोफे पे चढ़ गई .है .प्लेट मे से एक सैंडविच का पीस उठा कर लक्ष्मी की दिया है... ओर एक अपने हाथो मे पकड़ खाने लगी. है.......लक्ष्मी सहमी हुई है .......'.खायो -खायो"मिष्टी की तोतली आवांज गूंजती है... वो आर्यन को देखते हुए अपना सेंडविच खा रही है उसकी मां की ओर मेरी निगाह एक पल को मिली है....मै कोफी का आखिरी घूँट भरता हूँ...


कई बार कुछ वाक़ये अलग शक्ल इख्तियार कर आपके सामने से दोबारा से गुजरते है ...इत्तिफकान या कोई ओर वजह ये कहना मुमकिन नहीं ...हैदराबाद के एयरपोर्ट से मेरियट होटल की दूरी लगभग एक घंटे में तय करने के बाद रात को मै ओर मेरा दोस्त बिरयानी के मूड से बाहर निकले ...वहां एक होटल में कुछ ऐसा सा ही नजारा सामने आया ..बस फर्क नाम का था ...यहाँ मिष्टी के बदले फरजाना थी ...उम्र में शायद एक आध साल बड़ी ....लिखने कुछ ओर बैठा था ... .पर जाने क्यों ये वाकया अब भी दिमाग पे काबिज है ...सोचा इससे निजात पा लू ...इसलिए रीठेल रहा हूँ....
वैसे एक मिष्टी ओर है ...दूसरी परी...

2008-06-21

तीन बरस की जिंदगी


सोचता था थाम लूँगा हाथो में
वक़्त है मगर ठहरता नही

जब उसे दरवाजे तक छोड़ कर वापस मुडा तो मेरे स्टाफ की लड़की पानी के गिलास उठाते हुए बोली "एक बात कहूँ सर 'बोलो मैंने कहा ...ये डॉ कितनी सुंदर थी ना,..मै मुस्करा दिया ,ये मुस्कराहट भी अजीब शै है अपने पीछे ढेरो दास्तान छुपाये रखती है .मेघा मेरे क्लीनिक पर आयी थी अपने किसी relative को दिखाने..बड़े ही ओपचारिक तरीके से हम मिले ,साथ में उसकी मदर -इन-ला भी थी .. आजकल ऑस्ट्रेलिया में थी ... ९ साल बीत गये ..

उस रात ११ बजे हॉस्पिटल के बाहर चाय की लारी पर था तब मोबाइल बजा था ..अजय था .."शेखर का एक्सीडेंट हो गया है... ..मोदीनगर के पास हुआ है किसी ट्रक ने टक्कर मार दी है...?क्या सब ठीक है ..मैंने डरते डरते पूछा था "कह नही सकता अभी बेहोश है "काफी fractures है शरीर में....मै स्टेशन पर खड़ा हूँ.... सुबह तक पहुँच जायूँगा ...तू कल सुबह वाली किसी ट्रेन से बैठ जाना......
दो दिन पहले ही तो उससे बात हुई थी ......साले छट्टी रखना २६ तारीख की ..एंगेजमेंट है ... नही आ सकता ..एक्साम है..मैंने कहा ..अबे हमने भी residency की है ..भाईसाहब आप पास हो गए है...उसका रिजल्ट अभी २० दिन पहले ही आया था. अभी ६ महीने है एक्साम में ....उसने गाली दी ...अभी अपनी होने वाली भाभी को तो देख ले .... वही है मैगी वाली ?. या कोई दूसरी है ?..मैंने छेडा…...चिंता मत कर अब राजमा चावल मिलेगे ..बहुत अच्छा बनाती है....उसने कहा ..राजमा चावल मेरी कमजोरी रहे है..वो जानता था बस तू आ जा यार ..ड्रामे मत कर... . वो गुस्सा हो गया था ...."ठीक है भाई" मैंने कहा .... आप हमेशा आगे रहे है.. ..पहले सेलेक्शन,पहले अफेयर ,पहले शादी ..मैंने "ओपनिंग बैट्समैन हूँ न.......वैसे फर्स्ट विकेट डाउन तू था न ? वो हंसा था ...
हम तीनो का ११ क्लास से साइकिलों से पूरा दिन तय करते ...क्रिकेट ओर badminton .दोनों ही टीमो का हिस्सा रहे ...वो ओपनिंग बैट्समैन था ,एक बार मेरठ में एक जगह हालात ख़राब होने की खबरे फैली ..कुछ दुकानों के शटर गिर गए थे ओर हमारा क्रिकेट मैच था ... तो मै ओर अजय साइकिलों से छोटी छोटी गलिया तय करते हुए उसके घर पहुंचे ..उसके घरवालो ने मना कर दिया ,वो बाहर छोड़ने आया तो अजय ने उसे साईकिल पर बिठा लिया ...वो मैच तो बीच में ही रोकना पड़ा था ..पर उसके बाद का मैच कई महीनो तक चला ......उसके घर में हमारी एंट्री बैन हो गयी थी...

फिरोजपुर जनता में ही T.T.को कुछ पैसे देकर मैंने हाथो हाथ जुगाड़ करवाया था ,थकी हुई ट्रेन थी पर कोई ओर आप्शन नही था ..ट्रेन में याद आया कि "मेघा से पहली मुलाकात कैसे हुई थी ? मेरठ में सर्दियों में रात भी ठिठुरती है ओर वो भी दिसम्बर के आखिरी दिनों में ,उस रात उसके होस्टल में हम लोग ये सोचकर बैठे थे की एक एक बियर पी कर कुछ खाने निकल जायेंगे ..लेकिन लंबे अरसे के बाद मिले थे तो वक़्त गुजर गया रात १२ बजे खाना कहाँ मिलता ?मैंने कहा यार भूख लगी है ?बहुत लगी है उसने पूछा .हाँ मैंने कहा था .."चल फ़िर "उसने जैकेट पहनी "इतनी रात को "कहाँ मिलेगा "है एक जगह वो बोला ....उसके पास सफ़ेद रंग का LML वेस्पा था ,हम उस पर बैठे ओर वो लेडीज होस्टल में घुस गये,हमें काटो तो खून नही "अबे पिटवायेगा '? मै फुसफुसाया था ..कही झाडियों के पीछे उसने स्कूटर खड़ा किया ओर पत्थर फेका ...कोई खिड़की खुली ..उसने सीटी बजायी ..अंधेरे में एक छाया बाहर आयी..भूख लगी है ..साथ में कौन है उसने पूछा ....अनुराग है ... ...अबे इधर आ ...उसने मुझे बुलाया मुझे उस माहोल में मिलने में बड़ी शर्म आयी ये साला कौन सा तरीका है रात के १२ बजे बियर पी कर उसके होस्टल में घुस कर खाना मांगो फ़िर छाती ठोककर कहो .."ये है मेरा बेस्ट फ्रेंड " खैर कुल मिलाकर १० मिनट बाद मैगी ,कुछ बिस्कुट लेकर हम स्कूटर पर बैठकर वापस रवाना हुए थे
 

दोपहर ४ बजे तक मै मेरठ पहुँचा था ..सीधा नर्सिंग होम पहुँचा तो नर्सिंग होम के बाहर ही अजय मिल गया
रात को ही घंटो उसका ऑपरेशन चला था ,डॉ होने के नाते उसे ये फायदा हुआ था ..
.. ऑपरेशन तो हो गया है ..multiple fracture है.'सीधे हाथ का अंगूठा ओर दो उन्गुलिया गयी वो कहता कहता रुक गया ....ये बहुत बुरी ख़बर थी.... " मन कही गहरे तक बैठ गया ...उसका तो सपना था की आगे न्यूरो सर्जरी करेगा ...सर्जन के सीधे हाथ का अंगूठा ओर अंगुलिया जाना मतलब ..कैरिएर ख़त्म ....होश आया मैंने पुछा ..."हाँ अभी आधा घंटा पहले ही आया है..' उसने कहा ...जा उससे मिल आ ..पर कदम उठ नही रहे थे .... अन्दर कमरे में घुसा तो उसकी मम्मी देखते ही फूट फूट कर रोने लगी... अंकल ने चेहरा उधर घुमा लिया था ...
मुझे देख वो मुस्कराया उसके चेहरे पर दाढ़ी बड़ी हुई थी चेहरे पर कई घाव थे बाकि शरीर पट्टियों में लिपटा हुआ था , उसके खूबसूरत चेहरे पर एक अजीब सी उदासी थी .. ..कितनी देर कमरे में खामोशी रही.. कई मिलने जुलने वाले आते रहे ....
तकरीबन ४५ मिनट बाद हम दोनों अकेले हुये..मै उसके पास उठकर गया .."कैसा है ? “सब ख़त्म हो गया यार” वो बोला .."वो मुझसे लिपटना चाहता था पर शायद शरीर ने उसका साथ नही दिया ..उसकी आँख से आंसू बह निकले सब ठीक हो जायेगा मैंने उससे कहा ...क्या ठीक होगा मै भी नही जानता था .. कुछ मिनट हम रोते रहे ........जाने कितनी देर से गुबार अपने अन्दर रोके हुए था ..मै हिल गया था ,हम तीनो में वो सबसे मजबूत था ओर मुश्किल वक़्त में हम उसका कन्धा ही ढूंढते थे ....
दरवाजा खुला तो मेघा ओर उसके परेंट्स थे .....मै उठा ओर आहिस्ता आहिस्ता बाहर निकल गया ....
अगले तीन दीन बाद उसका दूसरा ऑपरेशन हुआ ... उसके एक पैर में रोड डली ओर उसके fracture कि हालत देखते हुये बतोर एक डॉ हम जान गये थे कि उसका एक पैर अब नोर्मल नही रहेगा , उसकी चाल में उम्र भर एक लंगडाहट रहेगी .ज्यादा छुट्टी नही ले सकता था इसलिए ५ दीन बाद मै भी सूरत वापस रवाना हो गया ...अगले १ महीने वो हॉस्पिटल में रहा , ओर तकरीबन ६ महीने तक वो बिस्तर में रहा ..उससे फोन पर लगातार संपर्क में रहा ...३ महीने बाद एक दिन रात को उसका फोन आया ..वो सिसक रहा था..क्या हुआ ?..मेघा के घर वालो ने शादी से इनकार कर दिया था ..वे उसकी शादी ऑस्ट्रेलिया के किसी लड़के से कर रहे थे ..मै सन्न रह गया ..उसके पैर में जिंदगी भर खराबी रहेगी ये तय था ,अब वो सर्जरी भी नही कर पायेगा ..पर प्यार ?३ सालो से उनका अफेयर था....
मै बात करूँ मेघा से ?मैंने कहा ..नही ..उसके स्वर में सख्ती थी .. मै जानता था कुछ मामलो में उसके असूल पक्के थे "..प्यार में कोई शर्त नही होती" वो अक्सर कहा करता था ओर प्यार अपनी सूरत नही बदलता वो हर मौसम में एक सा रहता है....फ़िर भी अजय ने मेघा से बात की थी... नतीजा कुछ नही निकला था... उसके बाद हमारी फोन पर बातें होती पर वो कभी मेघा का जिक्र नही करता ..बात करने पर बात को घुमा देता ...अजय से मालूम हुआ ...वो ऑस्ट्रेलिया चली गयी है . वो लगभग ६ महीने बिस्तर पर रहा ...मै एक्साम में उलझ गया ओर रिजल्ट आने के बाद मुंबई जाने से पहले एक बार घर आया तो हम दोनों एक रेस्टोरेंट में खाना खाने बाहर गये तब तक वो एक छड़ी का सहारा लेकर चलता था .."अब क्या इरादा है ?मैंने पूछा ..पता नही ?सोचता हूँ USMLE दे दूँ ?"हूँ "मै सुनता रहा ... ,नानावटी हॉस्पिटल में ...

जिन दिनों मुंबई नानावती में था तब मालूम चला वो अपने बड़े भाई के पास इंदोर चला गया है ओर वही रहकर USMLE की तैयारी कर रहा है ... बाद में घर वाले भी वही शिफ्ट कर गये ....उसने एक्साम पास कर लिया ओर नॉन क्लीनिकल ब्रांच में पी.जी की.....फ़िर वही वही किसी पाकिस्तानी डॉ लड़की से शादी कर ली... अभी उसके एक प्यारी सी गुडिया है फिलहाल वे दोनों वहां के मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट पर है.. ,.
आज से ३ साल पहले वो जब इंडिया आया था तो हम तीनो दोस्त दिल्ली में मिले थे उसके पास वक़्त की कमी थी ओर अजय तब दिल्ली में हिंदू राव हॉस्पिटल में ही था ... उन तीन सालो में जिस जिंदगी को मैंने जिया है उन्ही में मै समझा हूँ..कि जिंदगी क्या है...इसलिये सच मायनो में मेरी उम्र अभी ५ साल ही है उस रात वो बोला था ..
अभी कुछ दिन पहले मै अपने पुराने फोटो निकालकर उन्हें ठीक कर रहा था तो मेरे बेटे ने उसकी फोटो देखकर पूछा था" ये कौन है ?"
ये हीरो है बेटे असली हीरो "मै बुदबुदाया था


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