2019-12-13

मै ही कही कम ,कही जियादा रहा

पता नहीं अदालत में जिरह करने वाला उस रात कैसे सोता होगा जो जानता है जुर्म का ए "तिराफ़ करने वाले शख्स ने वो गुनाह किया नहीं है। शायद फैसला सुनाने वाले भी अक्सर नींद की गोलिया लेते होंगे। नींद भी एक बड़ी नेमत है। हर शहर हर रात से अपने वजूद के लिए मुख्तलिफ तरीको से लड़ने की तरकीबे सीख लेता है!।
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वो अपनी बालकॉनी के गमलो में अपने कसबे की मिटटी डालता है कहता है " जानते हो मैंने अपनी बीवी को नहीं बताया ये मिटटी कहाँ से आयी वो मुझे पागल समझेगी। डॉ ने प्रेस्क्रिप्शन में कई किस्म की दवाये लिखी पर ठीक मै इस मिटटी की सोहबत से ही हुआ ,बड़े शहरों में शजर का क़त्ल लीगल है पहाड़ो में रहने वाले आदमी का इन शहरी फ़्लैट में बीमार ही तो होगा।
"सर्वाइवल ऑफ़ फिटेस्ट" की लड़ाई के नये साइड इफेक्ट्स है। मुझे नानावती के वो उम्रदराज डॉ याद आते है जो मुझसे नामालूम क्यों बेटे की तरह मोहब्बत करते थे। एक रोज शिवास पीकर इमोशनल होकर बोले थे
"घर भी अम्ब्लिकल कॉर्ड की तरह होते है "

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वियेना के एक रेलवे स्टेशन पर एक आदमी मिला था शायद सीरिया से था उसके साथ उसकी बीवी और दो छोटे बच्चे थे ,वो कुछ कागज दिखाकर किसी जगह का पता पूछ रहा था। मै उसके छोटे छोटे बच्चो को देख रहा था । उसका कोई स्थायी पता नहीं रह गया था ,बिना किसी पते का आदमी होना कितना डरा देने वाला होता है

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पिछले कुछ सालो में जमीर ख़ासा इम्म्यून हो गया है ,कई चीज़ो से पहले की तरह पशेमां नहीं होता। एक उम्र तक आते आते शायद ये फितरत आ ही जाती है .ज़िंदगी की रफ़्तार देख कुछ ख्वाबो को रिमाइंडर पर लगा रखा है ताकि याददाश्त में रह सके। एक दोस्त कहता है लिखना सबसे आसां काम है अब तो कागज और कलम का मोहताज भी नहीं रहा।

खुदगर्जी का दिसंबर

दोपहर की शिफ्ट के बाद गाड़ी में मोबाइल आवाज देता है। उस पार अब गुडगांव में रहने वाला दोस्त है।एक उम्र के बाद गमे रोजगार के वास्ते सबके हिस्से अलग अलग शहर आते है । मैं अंकल को याद करता हूँ ,बहुत डरते थे हम उनसे PMT के दौरान ।
"पापा पिछली दफा आये थे तबसे सर्दियों में नहीं आते" वो बोल रहा है "कहते है तेरे फ्लेट में सूरज एक जगह पर पांच मिनट के लिए आता है वो भी तीन बजे के बाद "
हम दोनों हँसते है !
सूरज भी ज़िन्दगी में कितना लाज़िमी है ना ! ज़िन्दगी में बहुत सी चीज़े लाज़िमी होती है।
"वो पोस्ट ऑफिस याद है" , जहाँ से हमने कंपीटिशन के कितने फॉर्म भर कर रजिस्टर्ड डाक से भेजे थे "
"हाँ ,अचानक कैसे याद आया ?"
उसका पोस्टमास्टर हमारे ही हॉस्पिटल में एडमिट है ,सुबह राउंड ले रहा था तो उसने सामने वाले बेड से आवाज दी।
सिस्टर ने उसे टोका कहा ये "तुम्हारे डॉ नहीं है "तो वो बोला
"हमारे ही है डॉ साहब मेरठ से है ना ! "
उसका बेटा यही गुड़गांव में है। पूछ रहा था आपके साथ जो दूसरा लड़का आता था क्या वो भी डॉ बन गया ?
खुदगर्जी के सफ़र में ऐसे फोन कॉल ठिठका देते है .

ज़िंदगी तेरी बज़्म में गालिबन नहीं लाती

जब हम एक वक्फे में रहते है दूसरा दूसरे वक्फे में रहता है।
हर शै का एक वक़्फ़ा होता है !
वक्फा जानते है एक " पॉज़ "।
मै जिस वक्फे में रहता हूँ उसी की बाबत लिख सकता हूँ।बाज दफे मै कई दिनों एक ही वक्फे में रहता हूँ ख़ास तौर से दिसंबर में।
वो कहती है के " मुझे तुमसे सिर्फ दिसम्बर में मिलना चाहिए ,बाकी महीनो में तुम बोर हो जाते हो "
मै हंस देता हूँ.हक़ीक़त ये है के मै दिसंबर में भी दिलचस्प नहीं रहता।
एफ एम रेडिओ पर अरिजीत गा रहा है इस लड़के के गले में खुदा ने अता बरती है।
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बाज दफे सोचता हूँ गर खुदा वाकई इबादतगाह में रहने लगे तो भी लोग उसका इस्तेकबाल उसी तरह से करेंगे जिस तरह उसके ना होने के अहसास के कारण करते है। नुमाया होने पर कैसा सलूक करेंगे उसके साथ !

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स्टेज में बेस्ट परफॉर्म देने वाला आर्टिस्ट शो के बाद अकेले में बतलाता है वो उस दिन बहुत नर्वस था ,पहले कुछ स्टेप्स के दौरान उसे पालपिटेशन था ,। स्कूल में बैडमिंटन में हमेशा अव्वल आने वाला वो लड़का भी ड्रेसिंग रूम में बहुत घबराता था पर हर साल अव्वल आता रहा

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हर उम्र के आदमी के लिए किसी शहर की तस्वीर अलग होती है ,कोई कहता है पहले यहाँ इस कोने पर एक नीम का पेड़ था ,कोई मैदान को याद करता है ,कोई किसी चीज़ को। साल दर साल शहर अपनी सूरत बदलते है शुक्र है समंदर की कैफियत बदलने की ताकत अभी आदमी के पास नहीं आयी है।
मुझे उन लोगो से रश्क होता है जिनके शहर में समंदर है !

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हम एक सधाए हुए परिंदे है जो तय रास्तो से अलहदा नहीं चलते ,कोशिश भी नहीं करते। ,
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वे कहते है लफ्ज़ कोई हलचल पैदा नहीं करते ,,लिखना वक़्त जाया करना है वे जितना ताकतवर होते जाते है उतना ही लफ्ज़ो से डरने लगते है।अरिजीत अब भी गा रहा है मै उसकी आवाज का अब भी मुरीद हूँ

2019-02-06

तुम्हारा खुदा किसी गैर आबाद इलाके में रहता है

वे पूछती है पांचो वक़्त नमाज पढ़ने वाले आदमी को कैंसर कैसे हो सकता है ?उन्होंने तो ज़िंदगी में कभी किसी का बुरा नहीं किया ?
मै उन्हें क्या जवाब दूँ।
मेरे पास कोई जवाब नहीं है.
आदमी जब गम में होता है तो उसे जवाब की तलाश होती है !
खुदा पे एतबार करने वाला अपनी नेकी बदी का हिसाब टटोलने लगता है।कितने कुर्तो की जेबी में उदासी छुपी हुई है। बूढी उदासी ,जवान उदासी !कुछ उदासियों से मुकाबला किया जा सकता है ,कुछ से नहीं।
कोई पूछता है "साइंस दानो के रहते उदासी को ख़त्म करने की कोई दवा ईज़ाद नहीं हुई "?
मेरे पास इसका भी जवाब नहीं है !
मेरे एजेंट मुझे बीमे की तारीखों को गिनवाता है मार्च का महीना है। हमने अपनी अपनी तसल्ली के लिए इंतज़मात कर रखे है।
उसकी बोसीदा सी डायरी को देख मेरा मन करता है मै उससे कहूं के वो इसे बदल ले, पर कहता नहीं।
बहुत सी बाते कभी कही नहीं जाती ! वे भीतर ही रह जाती है। सर्दियों में एक दफा कॉलेज से घर आते लौटते ट्रेन में सामने वाली सीट पर बैठी किसी उम्र दराज महिला ने रात में मुझ पर अपना कंबल डाल दिया था ,मै उन्हें जानता नहीं था। सुबह आँख खुली थी वो बैठी हुई थी।
मुझे तो नींद नहीं आती ,बैठना था सो "
वे बोली थी।
मैंने कोशिश की थी के मेरे शुक्रिया में उन्हें मेरी आवाज के भीगने का इल्म ना हो पता नहीं मै कितना कामयाब हुआ था या नहीं। उस रोज घर लौटकर बस मै मां से लिपटा था।

2019-02-04

कोई क्यों होता है अपने जैसा ! क्या उसके इख़्तियार में होता है वैसा होना !!


तुम्हारी हंसी की आमद मेरी ज़िंदगी में पहले हुई थी .तुम्हारी हंसी उजली थी उसमे एक खनक थी। पोस्ट ऑफिस के बाहर तुम रेड स्कर्ट में अपनी सहेलियों के साथ खड़ी थी मै एडमिशन की फोर्मल्टी करने के लिए कुछ फॉर्म भरने और कुछ टिकट खरीदने आया था। कमर तक लम्बे बाल और तुम्हारे चश्मे की रेड फ्रेम , सब कुछ तो खूबसूरत था।
तीन दिन बाद सबसे अगली बेंच पर संजीदगी से नोट्स बनाती लड़की को देखा तो हैरानी और ख़ुशी हुई ,
तुम मेरे बैच में थी !
तुममे में बस एक ऐब था !
तुम पढ़ने में अव्वल थी !
बेहद संजीदा !
मेरी फितरत में आवारगी थी। सलीके की कभी आदत नहीं रही हॉस्टल की सोहबत ने कुछ और हुनर जोड़ दिए । मै शायद तुम्हारे लिए "अननोटीसेबल " था  .मै तुम्हारे ड्रेसिंग सेन्स का कायल था। उसने मेरा फलसफा तोडा था के ज्यादा पढ़ने लिखने वाली लड़किया फैशनेबल नहीं होती। तुम अपने आप को एलीगेंटली कैरी करती ! एक दफा सेकण्ड ईयर में पैथॉलजी लैब में तुम्हे इतना नजदीक पाकर मै नर्वस हो गया था ,तुम्हारे कानो में बड़े बड़े गोल ईयर रिंग थे। मै उन ईयर रिंग से बचने के लिए नीलम से सवाल पूछने लगा था !
और उस रोज हॉल में पहुँचने से पहले मैंने और रोशन ने धड़ाधड़ कई सिगरेट फूंक डाली थी। भागते दौड़ते हम अँधेरे में पहुंचे ,खाली सीटों में किसी तरह पहुँचने तक मेरे दिल की धड़कन तेज हो गयी थी ,मुझे तुम्हारी बगल में बैठना था
या खुदा !
नीलम ने एक दफे कहा था तुम्हे "सिगरेट" की स्मेल से "एलर्जी "है और मेरी जैकेट में सिगरेट जैसे उस रोज बसी हुई थी। मैंने रोशन को लगभग उस सीट की और धकेला था। तुम्हे शायद उस स्मेल ने परेशान कर दिया था ! तुम कितनी देर तक अनमनी सी रही। मुझे एक दो दफा गुस्से से देखा था
मै तुम्हारे लिए अब भी "अननोटीसेबल" शै था !
मै अपनी हदे जानता था !

उस रोज शदीद बारिश थी ,सुबह से गिरनी शुरू हुई थी। मै सिगरेट लेकर लौट रहा था ! तुम अपने स्कूटी के साथ खड़ी थी .तुमने ब्लैक सूट पहना हुआ था। उस पर वो लाल दुपट्टा जिस पर तुम कभी कभी बिंदी लगाती थी ,बड़ी सी !बड़ी बिंदिया मुझे पसंद थी ,अब भी है !
इत्तेफाकों के शायद कुछ सबब होते हो। जाने क्यों मै रुक गया था।
तुम्हारी स्कूटी को चेक करने !
मैंने बस यही दुआ की थी के ये स्कूटी स्टार्ट ना हो !
उस रोज खुदा मेरे साथ था
स्कूटी स्टार्ट नहीं हुई। मैंने तुम्हे हॉस्टल तक छोड़ने का ऑफर किया था
मैंने आहिस्ता आहिस्ता मोटर साइकिल चलायी थी मै उस लम्हे को जैसे रोक देना चाहता था !तुम पूरा भीग गयी थी ,बैठे हुए काँप रही थी शायद तुम्हे ठण्ड लग गयी थी मै तुम्हे महसूस कर सकता था मुझे अफ़सोस हुआ के मैंने खामखां तुम्हे बारिश में रोक के रखा ! हॉस्टल पहुंचकर भी तुम एक मिनट तक बाइक से उत्तरी नहीं तुम काँप रही थी।
हॉस्टल की उस चारदीवारी से मै कैसे बेदम होकर निकला था उस रोज !
अपने रूम में पहुंचकर अहसास हुआ मेरा सिगरेट का पैकेट तुम्हारे पास रह गया है। तुम्हे सिगरेट से कितनी नफरत थी
उस रात मै देर तक सोया नहीं था क्या सोचती होगी तुम मेरे बारे में
सुबह आँख देर से खुली थी रोशन मुझे उठाने आया था स्टेशन तक छोड़ने के लिए ! पापा को पैरालिटिक अटैक पड़ा था अगला एक महीना हॉस्पिटल और उसके बाद के दो महीने तकलीफ देह थे। पापा कुछ बोल नहीं पाते थे इशारो से बात करते थे। यूँ तो घर का बड़ा बेटा पहले भी था पर अचानक से बड़ा हो गया था। मां एक दम उदास हो गयी थी ,छोटी भी अचानक से सहम गयी थी ,मुझसे लड़ना छोड़ दिया था। पापा की वजह से मैंने पूरी इंटर्नशिप इसी शहर में लेने की रिकवेस्ट डाली जो खास केस की वजह से मंजूर हो गयी थी।
तकरीबन दस महीने बाद हम नार्मल हुए थे जब पापा बोलने और बिना सहारे के चलने लगे थे। चाचा के यू इस ए से के लगातार कई फोन से मुझसे पहले पापा कनविंस हुए थे। मैंने यू इस एम् ली दी थी। तुम्हारे बारे में दो चार लोगो से दरयाफ्त किया था। किसी ने बताया तुम भोपाल में हो ,कम्पीटिशन की तैयारी में हो। तुम्हार फोन भी हासिल हुआ था पर कभी कर नहीं पाया!
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आज यहाँ शदीद बारिश है ,सुबह से गिर रही है ! अपने वतन से दूर रहने वाले कुछ बाशिंदो ने एक रेडियो चैनल बनाया है। कार में हूँ ,रोजाना 25 किलोमीटर ड्राइव करता हूँ। अरिजीत सिंह जैसे रकीब बन गया है।
"जान जाती है जब उठकर जाते हो तुम
एक तलब सी सीने में उठी है !
तुम बेसबब याद आयी हो !
मैंने कार को किनारे लगा दिया है सिगरेट ढूंढ रहा हूँ।
कोई किसी को चूम रहा है !
"खुदा तुम्हे खुश रखे "


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कोई क्यों होता है अपने जैसा ! क्या उसके इख़्तियार में होता है वैसा होना !!
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तुम बेतरतीब बालो में अच्छे लगते थे ,जब कभी उन्हें तरतीब करके क्लास में आते मेरा मन करता उन्हें बिखेर दूँ। खास तौर से ग्रीन सी वो बढ़ी दाढ़ी तुम पर सूट होती। तुम पर क्या फबता है तुम्हे इल्म नहीं था ना तुम्हारे दोस्त तुम्हे कभी बताते। तुम्हारी डार्क ब्लू शर्ट भी मुझे पसंद थी। पता नहीं तुम मुझसे इतना खौफ क्यों खाते थे। एक दफा सेकंड ईयर में पैथोलॉजी स्लाइड्स देखते वक़्त तुम मेरी बगल में थे फिर भी बाबत नीलम से पूछा। नीलम को कभी कुछ मालूम था ,वो मुझसे पूछती फिर तुम्हे बताती। मै भी बेवकूफो की तरह उसके सवालों का जवाब देती रही। गुस्सा तो बहुत आया था। दूसरी मर्तबा हमारी पूरी क्लास फाइनल इयर में मूवी देखनी गयी थी। तुम्हारी सीट से इत्तेफ़ाक़ से मेरे बगल में आयी थी। मुझे बैठा देख तुम जैसे हड़बड़ा गए थे फिर तुमने रोशन को मेरे बराबर में बैठा दिया था। 
रोशन जिसे लगता था क्लास की सारी लड़किया उस पर मरती है। । मेरा सारा मूड ख़राब हो गया था ,सर दर्द में मैंने वो मूवी देखी थी। गुस्सा इतना आ रहा था के तुम्हारे कॉलर पकड़ कर झापड़ रसीद कर दूँ "समझते क्या हो तुम अपने आप को "
मैंने तय कर लिया था तुम्हे अब इग्नोर करुँगी। वैसे भी मेरे अलावा मेरे दिल का हाल कौन जानता था और तुम्हे पसंद करने वाले थे ही कितने लोग
एक वो सेकण्ड ईयर की जूनियर जो हमेशा जींस पहने रहती ऊपर से शर्ट का पहला बटन खुला रखती। हाँ मानती हूँ वो स्मार्ट थी पर उसमे अक़्ल कितनी थी !
उस शहर में बारिश बहुत होती थी पर उस रोज उसके मिज़ाज़ से ज्यादा हुई थी कॉलेज के अंदर आते वक़्त मेरा स्कूटी बंद पड़ गया था तुम ना जाने कहाँ से वापस आ रहे थे। अमूमन ना रुकने वाले जाने क्यों उस रोज मुझे देखा रुक गए थे स्कूटी में उलझने से पहले तुमने हिचकते हुए अपने हाथ से "सिगरेट का पैकेट" मुझे पकड़ाया था बारिश में भीगते हुए तुम मेरी स्कूटी से उलझे रहे थे !
मेरा सारा गुस्सा काफूर हो गया था
मैंने उस वक़्त दो ही दुआ की थी
एक मेरी स्कूटी स्टार्ट ना हो
दूसरी बारिश बंद ना हो
अजीब बात है ऊपर वाले ने मेरी दोनों बाते सुन ली थी।
तुमने ग्रीन कलर की टी शर्ट पहनी थी जिसमे ब्लू स्ट्रिप्स थी। कुछ देर जूझने के बाद ,
"मै आपको हॉस्टल तक छोड़ देता हूँ "तुमने कहा था
आज भी सोचती हूँ सबको "तुम" बोलने वाले तुमने मुझे "आप "क्यों कहा था
तुम मुझे पीछे बैठा कर हॉस्टल तक छोड़ने आये थे। पहली दफा मुझे अफ़सोस हुआ के कॉलेज के गेट से हॉस्टल का रास्ता इतना कम क्यों है
तुम अंदर तक छोड़ने आये थे। मै पागलो सी तुम्हारी मोटरसाइकिल रुकने के बाद भी एक मिनट तक बैठी रही थी। मैं तुम्हे "थैंक क्यू" भी नहीं कह पायी थी ! तुम्हारा सिगरेट का पैकेट मेरे हाथ में रह गया था। मुझे लगा तुम उसे वापिस लेने लौटोगे। पर तुम आये नहीं। शायद तुम्हे लगा होगा कही गिर गया है।
पता नहीं तुम कहाँ गुम हो गए थे उसके बाद !
मैंने एक हफ्ते तक वो अपने पास छिपा कर रखा था अपनी रूम मेट्स के हाथ लगने तक। उसने "स्मोकिंग" की बाबत जाने क्या क्या लेक्चर दिए थे मुझे ! उसके बाद से इंटर्नशिप शुरू थी अलग अलग जगहों पर पोस्टिंग। मैंने भी दूसरी लड़कियों की तरह घर के पास पोस्टिंग ली थी।
तुम मुझे कभी नहीं मिले !
इत्तेफ़ाक़ से भी नहीं !!
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आज भी बारिश है ! ऊपर से फरीदा खानम गा रही है "जान जाती है जब उठकर जाते हो तुम "
सचमुच जान जाती है।!
लिखने वाले ने मोहब्बत में ही लिखा होगा ,
कम्बखत बड़ी बुरी शै है !!










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