2013-04-10

"कन्फेशन " !!


"सोचता था जब चालीस का हूँगा जिंदगी का जायका जबां पे होगा, रोजो- शब् के पेंच उलटे नहीं घूमेगे . किसी शख्स का कोई करतब  हैरान नहीं करेगा . ऐब उबाने लगगे . दोस्त पहले की तरह अज़ीज़ होगे .  हाथ की जुम्बिश से तहरीरे  लिखूंगा .  फरिश्तो के नंबर मेरे मोबाइल में सेव होगे ओर सैंकड़ो दास्ताने लाइब्रेरी में .  कंप्यूटर में दर्ज होगे कई मुश्किल लम्हों के हल ओर एक ऐसा  फोल्डर जिसकी  तफसील तब भी किसी से न कहूँगा .
 
पर मुए डेस्टिनी के चाबुक  खलल डालना  नहीं भूले . गुमानो  के कद  मापता हूँ  तो उत्ते ही ऊँचे  है , नकाबो पर सेल अब भी नहीं लगती, अलबत्ता आईना किसी ओर शक्ल को दिखाने लगा है !  
तुम्हारी दुनिया उतनी ही पुरइसरार है खुदा !
देखो ना ........इतने सालो में बहुत कुछ है जो नहीं बदला न तुम, न मै  !!  
 चीयर्स !!

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